Patrakar Priyanshi Chaturvedi
Supreme Court of India ने जनहित याचिकाओं (PIL) के दुरुपयोग पर कड़ी टिप्पणी करते हुए कहा कि अब यह “पब्लिक इंटरेस्ट” से हटकर “प्राइवेट, पब्लिसिटी, पैसा और पॉलिटिकल इंटरेस्ट लिटिगेशन” बनती जा रही हैं। यह टिप्पणी नौ जजों की संविधान पीठ ने Sabarimala Temple से जुड़े मामलों की सुनवाई के दौरान की। कोर्ट ने कहा कि केवल वास्तविक जनहित से जुड़ी याचिकाओं पर ही सुनवाई की जानी चाहिए।
सुनवाई के दौरान कोर्ट ने Indian Young Lawyers Association की 2006 की याचिका के उद्देश्य पर सवाल उठाए, जिसमें सबरीमाला मंदिर में 10 से 50 वर्ष की महिलाओं के प्रवेश पर रोक को चुनौती दी गई थी। अदालत ने कहा कि इस तरह की PIL कानून की प्रक्रिया का दुरुपयोग हैं और याचिकाकर्ताओं को अपने संगठन और सदस्यों के हित में काम करना चाहिए, न कि अनावश्यक याचिकाएं दाखिल करनी चाहिए।
गौरतलब है कि सितंबर 2018 में सुप्रीम कोर्ट की पांच जजों की संविधान पीठ ने 4:1 के बहुमत से फैसला देते हुए महिलाओं के प्रवेश पर लगी पाबंदी को असंवैधानिक करार दिया था। वर्तमान सुनवाई में भी अदालत ने यह स्पष्ट किया कि सिर्फ अखबारों में छपे लेखों के आधार पर PIL दायर करना उचित नहीं है और ऐसे मामलों में सावधानी बरतने की जरूरत है।
Patrakar Priyanshi Chaturvedi
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