Patrakar Priyanshi Chaturvedi
एम्स (AIIMS) में हरीश राणा के लिए 'पैसिव यूथेनेशिया' (निष्क्रिय इच्छामृत्यु) की कानूनी प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। विशेषज्ञों की टीम ने फैसला लिया है कि अब उन्हें कोई कृत्रिम ऑक्सीजन सपोर्ट नहीं दिया जाएगा। इसी प्रक्रिया के तहत जीवन बनाए रखने के लिए इस्तेमाल हो रही फीडिंग ट्यूब और हाइड्रेशन भी धीरे-धीरे बंद किए जा रहे हैं। यह कदम हरीश को गरिमापूर्ण मृत्यु देने के उद्देश्य से चरणबद्ध तरीके से अपनाया जा रहा है।
चिकित्सा विशेषज्ञों की निगरानी में यह प्रक्रिया बेहद संवेदनशील चरण में है। पोषण और हाइड्रेशन देने वाली फीडिंग ट्यूब को हटाने की बजाय उस पर कैप लगाकर इसे निष्क्रिय किया जाएगा। एम्स की विशेष टीम अत्याधुनिक मॉनिटर्स के माध्यम से हरीश की नब्ज और स्वास्थ्य की लगातार निगरानी कर रही है। इस चरणबद्ध प्रक्रिया का उद्देश्य कानूनी और चिकित्सकीय प्रोटोकॉल का पूरी तरह पालन करना है।
एम्स प्रशासन ने मामले की संवेदनशीलता के चलते फिलहाल आधिकारिक बयान नहीं दिया है। सूत्रों के अनुसार, 5 से 9 विशेषज्ञों वाली एक मल्टीडिसिप्लिनरी मेडिकल टीम सर्वोच्च न्यायालय द्वारा निर्धारित दिशा-निर्देशों के अनुरूप पूरी प्रक्रिया का नेतृत्व कर रही है। यह घटना चिकित्सा, कानूनी और मानवीय दृष्टि से एक चुनौतीपूर्ण और भावनात्मक पहलू का प्रतीक बन गई है।
Patrakar Priyanshi Chaturvedi
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