Patrakar Priyanshi Chaturvedi
बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के राज्यसभा के लिए नामांकन दाखिल करने के फैसले को लेकर उनके परिवार ने उन्हें मनाने की काफी कोशिश की, लेकिन वे अपने निर्णय पर अडिग रहे। मुख्यमंत्री के बहनोई अनिल कुमार ने एक निजी चैनल से बातचीत में बताया कि 4 मार्च की रात परिवार के लोग लगातार उनसे इस फैसले पर दोबारा विचार करने का आग्रह करते रहे, मगर उन्होंने किसी की बात नहीं मानी। अनिल कुमार का कहना है कि नीतीश कुमार को अभी बिहार छोड़कर दिल्ली की राजनीति में नहीं जाना चाहिए था।
अनिल कुमार ने कहा कि पिछले 25–30 वर्षों से बिहार की जनता ने नीतीश कुमार पर भरोसा जताकर उन्हें नेतृत्व दिया है, इसलिए उन्हें कम से कम 2030 तक राज्य की राजनीति में सक्रिय रहना चाहिए था। उन्होंने यह भी कहा कि उनके बिना बिहार खुद को असहाय महसूस करेगा और राज्य के विकास की रफ्तार पर भी असर पड़ सकता है। हालांकि इस पूरे मुद्दे पर नीतीश कुमार ने परिवार के लोगों को कोई स्पष्ट जवाब नहीं दिया।
नीतीश कुमार के कामकाज की सराहना करते हुए अनिल कुमार ने कहा कि जब उन्होंने सत्ता संभाली थी, तब बिहार पर “जंगलराज” का टैग लगा हुआ था, लेकिन उन्होंने राज्य को उस छवि से बाहर निकालकर विकास की राह पर आगे बढ़ाया। उनके कार्यकाल में सड़कों का विस्तार हुआ, बिजली आपूर्ति में सुधार आया और शिक्षा व रोजगार के क्षेत्र में भी कई सकारात्मक बदलाव देखने को मिले।
Patrakar Priyanshi Chaturvedi
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