Patrakar Priyanshi Chaturvedi
प्रवर्तन निदेशालय (ED) की कार्रवाई को लेकर पश्चिम बंगाल में बड़ा टकराव सामने आया है। मनी लॉन्ड्रिंग जांच के दौरान ईडी अधिकारियों के खिलाफ दर्ज एफआईआर पर सुप्रीम कोर्ट ने रोक लगाते हुए अगली सुनवाई तक किसी भी तरह की कार्रवाई से मना कर दिया है। कोर्ट ने कहा कि राज्य की एजेंसियां जांच में दखल नहीं दे सकतीं और केंद्रीय एजेंसियों को राजनीतिक गतिविधियों में हस्तक्षेप का अधिकार नहीं है। साथ ही सभी सीसीटीवी फुटेज, डिवाइस और दस्तावेज सुरक्षित रखने के आदेश दिए गए हैं। इस मामले में ममता बनर्जी, डीजीपी और अन्य अधिकारियों को नोटिस जारी कर दो हफ्ते में जवाब मांगा गया है।
सुनवाई के दौरान सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने आरोप लगाया कि ईडी अधिकारियों को धमकाया गया, मुख्यमंत्री खुद छापेमारी स्थल पर पहुंचीं और जांच में बाधा डाली गई। उन्होंने दावा किया कि फाइलें और एक अधिकारी का फोन तक जब्त किया गया। वहीं, बंगाल सरकार की ओर से कपिल सिब्बल ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि कोर्ट को गलत जानकारी दी जा रही है। उन्होंने सवाल उठाया कि चुनाव के बीच ईडी को राजनीतिक रणनीतिकार संस्था IPAC के दफ्तर में जाने की क्या जरूरत थी। कोर्ट ने सभी पहलुओं की जांच का भरोसा दिलाया है और अगली सुनवाई 3 फरवरी को तय की गई है।
बंगाल विवाद के बीच झारखंड में भी ईडी को नई चुनौती का सामना करना पड़ रहा है। रांची स्थित ईडी के क्षेत्रीय कार्यालय पर राज्य पुलिस जांच के लिए पहुंची, जहां एजेंसी के दो अधिकारियों पर पेयजल विभाग के कर्मचारी से मारपीट का आरोप लगा है। इस मामले में पुलिस ने एफआईआर दर्ज की है, जबकि ईडी ने हाईकोर्ट का रुख किया है। झारखंड पुलिस की कार्रवाई पर राजनीतिक बयानबाजी शुरू हो गई है, बीजेपी ने इसे बदले की राजनीति बताया है। एक के बाद एक राज्यों में बढ़ते टकराव के बीच सवाल उठ रहा है कि ईडी को इन कानूनी और प्रशासनिक चुनौतियों से राहत कैसे मिलेगी।
Patrakar Priyanshi Chaturvedi
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