Patrakar Priyanshi Chaturvedi
भोपाल में कांग्रेस की ‘डिक्लेरेशन-2’ ड्राफ्टिंग कमेटी की बैठक के दौरान विधायक फूल सिंह बरैया ने SC/ST विधायकों और सांसदों की स्थिति की तुलना ‘कुत्ते’ से की। उन्होंने कहा कि जॉइंट इलेक्टोरल सिस्टम के कारण समुदाय के जनप्रतिनिधि अपनी स्वतंत्रता खो देते हैं और “जैसे कुत्ते के मुंह पर पट्टी बंधी हो, भौंक भी नहीं पाए।” बरैया ने सेपरेट इलेक्टोरल की मांग करते हुए इसे बाबा साहब अंबेडकर के सपने के पूरा होने का माध्यम बताया।
बरैया ने आदिवासी समुदाय को लेकर भी विवादित टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि आदिवासियों को हिंदू धर्म अपनाने से रोका जाए और उन्हें सरना धर्म में बनाए रखा जाए, क्योंकि इससे उनकी मुक्ति का मार्ग खुल सकता है। उन्होंने यह भी कहा कि आदिवासी आज भी ‘सिविलाइज’ नहीं हैं और जंगल कटने से उनका पारंपरिक ज्ञान प्रभावित हो रहा है। यह बयान भोपाल के समन्वय भवन में आयोजित बैठक में दिया गया, जहां दिग्विजय सिंह और विक्रांत भूरिया जैसे वरिष्ठ नेता मौजूद थे।
सेपरेट इलेक्टोरल एक ऐसी चुनावी व्यवस्था है जिसमें मतदाताओं को जाति, धर्म या वर्ग के आधार पर अलग-अलग समूहों में बांटा जाता है और हर समूह केवल अपने समुदाय के उम्मीदवार को चुनता है। ब्रिटिश काल में अल्पसंख्यकों के प्रतिनिधित्व के लिए इसे इस्तेमाल किया गया था, लेकिन संविधान सभा में आलोचना के बाद इसे बंद कर दिया गया। वर्तमान में भारत जॉइंट इलेक्टोरल सिस्टम अपनाता है, जिसमें सभी वर्ग एक साथ वोट डालते हैं, लेकिन आरक्षित सीटों पर केवल SC/ST उम्मीदवार ही चुनाव लड़ सकते हैं।
Patrakar Priyanshi Chaturvedi
|
All Rights Reserved © 2026 Dakhal News.
Created By:
Medha Innovation & Development |