चुनाव से पहले ED की सक्रियता पर सवाल
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पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव से पहले प्रवर्तन निदेशालय (ED) की बढ़ती कार्रवाई को लेकर राजनीतिक बहस तेज हो गई है। कोलकाता में I-PAC से जुड़े ठिकानों पर हालिया छापेमारी के बाद मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और ED आमने-सामने हैं। बंगाल में मार्च-अप्रैल 2026 में चुनाव प्रस्तावित हैं और ठीक इसी समय पुरानी जांचों में तेजी आने से एजेंसी की कार्रवाई की टाइमिंग पर सवाल उठ रहे हैं। इससे पहले भी बीते चार वर्षों में झारखंड, दिल्ली और महाराष्ट्र में चुनावी माहौल के दौरान ED की बड़ी कार्रवाइयां देखी जा चुकी हैं।

 

इसी साल पश्चिम बंगाल के साथ-साथ तमिलनाडु, असम, केरल और पुडुचेरी में भी विधानसभा चुनाव होने हैं और इन राज्यों में भी ED ने पुराने मामलों की फाइलें दोबारा खोलनी शुरू कर दी हैं। तमिलनाडु में शराब, रियल एस्टेट और शेल कंपनियों से जुड़े केस सत्ताधारी डीएमके के लिए चुनौती बने हुए हैं। असम में भाजपा सरकार के बीच विपक्षी कांग्रेस और एआईयूडीएफ से जुड़े नेताओं पर कार्रवाई की आशंका जताई जा रही है। वहीं केरल में सोना तस्करी और सहकारी बैंक घोटालों से एलडीएफ सरकार दबाव में है, जबकि पुडुचेरी में कारोबारी-राजनीतिक गठजोड़ पर एजेंसी की नजर है।

 

यह पैटर्न नया नहीं माना जा रहा है। झारखंड में मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन, दिल्ली में अरविंद केजरीवाल और महाराष्ट्र में शिवसेना-एनसीपी से जुड़े मामलों में ED की कार्रवाई ने राजनीतिक समीकरणों को प्रभावित किया था। ताजा मामले में ED ने कोयला तस्करी से जुड़े ₹2,742 करोड़ के मनी लॉन्ड्रिंग केस में 8 जनवरी को I-PAC के कार्यालय और उसके निदेशक प्रतीक जैन के घर छापेमारी की। हालांकि मामला 2020 से जांच में है, लेकिन चुनाव से ठीक पहले सामने आई कार्रवाई ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या जांच एजेंसियों की सक्रियता और चुनावी राजनीति के बीच कोई सीधा संबंध है।

Priyanshi Chaturvedi 13 January 2026

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