भगवान राम की छवि ने दी पहचान: लेकिन अरुण गोविल का करियर रुक गया
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अरुण गोविल ने रामानंद सागर की रामायण’ (1987) में श्रीराम का किरदार निभाकर पूरे देश में अपार लोकप्रियता और सम्मान पाया। उनके अभिनय ने उन्हें घर-घर में देवताके रूप में स्थापित कर दिया। हालांकि इस सम्मान के साथ एक चुनौती भी आई: दर्शकों और समाज ने उन्हें केवल भगवान राम के रूप में ही देखने शुरू कर दिया, जिससे अन्य भूमिकाओं में नजर आना कठिन हो गया।

स्ट्रीमिंग के बाद अरुण गोविल जहां भी जाते, लोग उन्हें भगवान मानकर उनके पैर छूते और आशीर्वाद लेने की लंबी कतारें लग जाती थीं। अरुण बताते हैं कि इस बेपनाह प्यार ने उनके पेशेवर फिल्मी करियर में उन्हें दूसरी भूमिकाएं निभाने से रोक दिया। प्रोड्यूसर्स और डायरेक्टर्स उन्हें किसी भी अलग रोल के लिए नहीं सोच पाते थे, क्योंकि दर्शकों की नजर में वे सिर्फ राम ही बने रहते थे।

1990 के दशक में अरुण गोविल ने मुकाबला’, ‘हथकड़ीऔर ढालजैसी फिल्मों में छोटे सपोर्टिंग रोल किए, लेकिन लीड रोल के मौके नहीं मिले। लगभग 14 वर्षों तक बड़े प्रोजेक्ट से दूर रहने के बाद उन्होंने एक्टिंग से दूरी बना ली। इस तरह, जिस किरदार ने उन्हें अमर बना दिया, वही उनके फिल्मी करियर में सबसे बड़ी फुल स्टॉपसाबित हुआ।

Priyanshi Chaturvedi 12 January 2026

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