Patrakar Priyanshi Chaturvedi
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक मोहन भागवत ने कहा कि समाज में भ्रम फैलाकर जनजातीय और अन्य वर्गों को अलग बताने के प्रयास किए गए हैं, जबकि सच्चाई यह है कि हजारों वर्षों से अखंड भारत में रहने वाले सभी लोगों का डीएनए एक है। उन्होंने यह बात शनिवार को भोपाल के कुशाभाऊ ठाकरे सभागार में आयोजित सद्भावना बैठक में कही। भागवत ने कहा कि बाहरी रूप से भले ही लोग अलग दिखते हों, लेकिन राष्ट्र, धर्म और संस्कृति के स्तर पर सभी एक हैं और यही विविधता में एकता भारतीय समाज की मूल पहचान है।
संघ प्रमुख ने कहा कि हिंदू कोई संज्ञा नहीं बल्कि एक स्वभाव है, जो मत, पूजा पद्धति या जीवनशैली के आधार पर भेदभाव नहीं करता। उन्होंने जोर देते हुए कहा कि समाज को कानून के जरिए नियंत्रित किया जा सकता है, लेकिन उसे जोड़कर रखने के लिए सद्भावना जरूरी है। संवाद, मेलजोल और एक-दूसरे को समझना ही सद्भावना की पहली शर्त है। बैठक में कथावाचक पंडित प्रदीप मिश्रा और मध्यभारत प्रांत संघचालक अशोक पांडेय सहित 16 जिलों से विभिन्न समाजों और संगठनों के प्रतिनिधि मौजूद रहे।
Patrakar Priyanshi Chaturvedi
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