Patrakar Priyanshi Chaturvedi
छत्तीसगढ़ के इंद्रावती टाइगर रिजर्व ने गिद्ध संरक्षण के क्षेत्र में देशभर के लिए मिसाल कायम की है। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय और वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री केदार कश्यप के निर्देशानुसार रिजर्व में गिद्ध सुरक्षित क्षेत्र (Vulture Safe Zones) स्थापित किए गए हैं, ताकि घटती गिद्ध आबादी को बचाया और बढ़ाया जा सके। गिद्ध पर्यावरण के 'सफाईकर्मी' हैं, और इनके बिना बीमारियों का खतरा बढ़ सकता है। यहां उपग्रह टेलीमेट्री आधारित निगरानी कार्यक्रम के तहत गिद्धों की गतिविधियों का उच्च-रिज़ॉल्यूशन डेटा एकत्रित किया जा रहा है, जिससे लगभग 10,000 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में उनकी आवाजाही और प्रजनन पर नजर रखी जा रही है।
संरक्षण कार्यों में गिद्ध मित्र दल की अहम भूमिका रही है, जिसने घोंसलों की निगरानी, सुरक्षित शव प्रबंधन और सामुदायिक सहभागिता सुनिश्चित की। इसके तहत “वुल्चर रेस्टोरेंट” की स्थापना कर NSAID-मुक्त सुरक्षित भोजन उपलब्ध कराया गया है। भविष्य की रणनीति में तीन अतिरिक्त गिद्धों की सैटेलाइट टैगिंग, 100 किलोमीटर क्षेत्र में गिद्ध सुरक्षित क्षेत्र का विस्तार और 50 से अधिक जागरूकता कार्यक्रम शामिल हैं। इंद्रावती टाइगर रिजर्व यह संदेश दे रहा है कि तकनीक, पारंपरिक ज्ञान और सामुदायिक सहभागिता के माध्यम से वन्यजीवन और मानव जीवन एक साथ सुरक्षित और संतुलित तरीके से आगे बढ़ सकते हैं।
Patrakar Priyanshi Chaturvedi
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