Patrakar Priyanshi Chaturvedi
मोदी सरकार प्रशासनिक ढांचे में गहरा बदलाव ला रही है, जिसका उद्देश्य सत्ता से सेवा और अधिकार से जिम्मेदारी तय करना है। इस कड़ी में राजभवन को अब ‘लोक भवन’ कहा जाएगा और प्रधानमंत्री कार्यालय को ‘सेवा तीर्थ’ का नाम मिलेगा। यह परिवर्तन शासन में कर्तव्य, पारदर्शिता और जनसेवा की भावना को दर्शाता है।
नया नाम, नई सोच
सेंट्रल विस्टा प्रोजेक्ट में बन रहे नए पीएम कार्यालय को ‘सेवा तीर्थ’ कहा गया है। राजभवन अब ‘लोक भवन’ के नाम से जाने जाएंगे। प्रधानमंत्री के आधिकारिक घर का नाम पहले ही ‘लोक कल्याण मार्ग’ रखा जा चुका है। इन नामों का उद्देश्य पब्लिक इंस्टीट्यूशन्स में सत्ता के बजाय सेवा, अधिकार के बजाय जिम्मेदारी और प्रायोरिटी के बजाय जनकल्याण की भावना को प्रमुखता देना है।
संस्कृति और नैतिकता में भी बदलाव
ये परिवर्तन केवल एडमिनिस्ट्रेटिव नहीं बल्कि कल्चरल और मोरल हैं। सेंट्रल सेक्रेटेरिएट को ‘कर्तव्य भवन’ कहा गया है, जो दर्शाता है कि पब्लिक सर्विस एक कमिटमेंट है। नए नाम और प्रतीक यह संदेश देते हैं कि भारत का लोकतंत्र अब पावर के बजाय जिम्मेदारी और स्टेटस के बजाय सेवा को प्राथमिकता दे रहा है। नामों में बदलाव सोच में बदलाव की दिशा में एक प्रतीकात्मक कदम है।
Patrakar Priyanshi Chaturvedi
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