नई दिल्ली । मध्य प्रदेश में जनसामान्य खासकर गरीबों को पीने के लिए शुद्ध पेयजल पहुंचाने के लिए हर घर जल योजना के क्रियान्वयन में भारी गड़बड़ी और जालसाजी का खुलासा हुआ है। इसके बाद 280 एजेंसियों और 22 ठेकेदारों को काली सूची में डालने के अलावा संदिग्ध ठेके निरस्त कर दिये गये हैं और डेढ़ सौ से अधिक अधिकारियों को नोटिस देने के साथ ही मामले की जांच केन्द्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) को सौंपा गया है।
केंद्र सरकार के सहयोग से मध्य प्रदेश सरकार ने वर्ष 2020 से प्रदेश में जल जीवन मिशन की शुरूआत की थी, लेकिन लंबे समय से मिल रही भ्रष्टाचार की शिकायतों के बाद जांच शुरू हुई, जिसके बाद गड़बड़ी और जालसाजी करने वाली एजेंसियों, ठेकेदारों पर राज्य सरकार का चाबुक तो चला ही, इसमें संलिप्त पाए गए कई अधिकारियों पर भी कड़ी कार्रवाई की गई है।
लोक स्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग के प्रमुख सचिव पी. नरहरि ने हिन्दुस्थान समाचार से बातचीत में कहा कि विभाग ने पूरी पारदर्शिता के साथ सभी गड़बड़ियों और भ्रष्टाचार की जांच कर ठोस कार्रवाई की है। उन्हें इस बात का पूरा संतोष और भरोसा है कि अब जल जीवन मिशन के लक्ष्य काे शत प्रतिशत प्राप्त किया जा सकेगा। उन्होंने बताया कि प्रदेश में पिछले लंबे समय से जल जीवन मिशन को लेकर कई तरह की शिकायतें जिला स्तर से लेकर शासन तक पहुंच रही थीं, लेकिन इनकाे या तो नजरअंदाज कर दिया जाता था या फिर उन पर लीलापोती कर दी जाती थी लेकिन जब इन शिकायतों का पहाड़ खड़ा हो गया और ये सरकार तक पहुंचीं तो उसके कान खड़े हो गए। इसके बाद राज्य सरकार ने मंत्रालय के आला अधिकारियों को इसकी गहन जांच के निर्देश दिए। इस तरह प्रदेश के जल जीवन मिशन परियोजना की गहन जांच की गई, तो इसमें कई चौंकाने वाली बातें उजागर हुईं। इसमें परियोजना से जुडी एजेसियों, ठेकेदारों के साथ अधिकारियों की संलिप्तता उजागर हुई।
पी नरहरि ने बताया कि पिछले दो वर्ष से जल जीवन में कई तरह की गड़बड़ियों की शिकायतें मिल रही थीं। इसके मद्देनजर शासन ने इस परियोजना की हर स्तर पर व्यापक जांच कराई। इसमें जो भी जहां भी खामी, लापरवाही, मिलीभगत और भ्रष्टाचार पाया उस पर कड़ी कार्रवाई की गई है। इसमें परियोजना में लगी एजेंसियों, ठेकेादारों पर ना केवल ठोस और कड़ी कार्रवाई की गई अपितु उनका अनुबंध निरस्त कर जुर्माना भी लगाया गया। फर्जी खातों संबंधी मामले की जांच सीबीआई को सौंपी गई है। अधिकारियों पर भी कठोर कार्रवाई की गई है। इनको पोर्टल पर डाला गया है।
उन्होंने बताया कि जल-जीवन मिशन के कार्यों में अनियमितता बरतने पर 280 एजेंसियों और 22 ठेकेदारों को काली सूची में डाला गया है। साथ ही उनके अनुबंध निरस्त किए गए हैं। गलत डीपीआर बनाने वाले 141 अधिकारियों और 187 एजेंसियों को नोटिस दिए गए हैं। टेंडर प्रक्रिया का उल्लंघन करने वाले 10 अधिकारियों के विरूद्ध भी कार्रवाई की गई है। फर्जी बैंक गांरटी के मामले में ठेकेदारों को खत्म किया है। इन प्रकरण सीबीआई को सौंपा गया है। अब तक 30 करोड़ का जुर्माना भी लगाया गया है। पुनरीक्षण योजना परीक्षण समिति गठित की गई है। 8358 एकल ग्राम नल-जल योजना का परीक्षण कराया गया है।
नरहरि ने बताया कि मुख्य सचिव के निर्देशानुसार पुनरीक्षित योजनाओं के योजनावार परीक्षण के लिए संबंधित मुख्य अभियंता की अध्यक्षता में जिलेवार पुनरीक्षण योजना परीक्षण समिति का गठन किया गया था, जिसमें जल निगम के अधिकारियों को भी सम्मिलित किया गया। इस समिति द्वारा 8358 एकल ग्राम नल जल योजनाओं की पुनरीक्षित योजनाओं का योजनावार परीक्षण किया गया। समिति के प्रतिवेदन पर शासन ने जल जीवन मिशन जैसे जनजीवन से जुड़े महत्वपूर्ण कार्यों में भी लापरवाही को गंभीरता से लेते हुए कठोर प्रशासनिक रूख अपनाया और उपयंत्री से लेकर कार्यपालन यंत्री स्तर तक के 141 अधिकारियों को ग्रामों की मूल योजनाओं की त्रुटिपूर्ण डीपीआर तैयार करने के कारण कारण बताओ सूचना पत्र जारी किए गए हैं। इसके साथ ही डीपीआर तैयार करने वाली 187 एजेंसियों को नोटिस जारी किए गए हैं।
उन्होंने बताया कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के हर घर नल से जल के साथ खुशियां भी पहुंचाने के विजन और मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के मिशन को लोक स्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग के अधिकारी पूरी तत्परता के साथ पूर्ण करने में सक्रिय हैं। मुख्य सचिव ने निर्देश दिए हैं कि जल जीवन मिशन की शेष योजनाओं में कार्य की गति तेज़ करते हुए हर ग्राम के हर घर तक स्वच्छ जल पहुंचाने के लक्ष्य को समयबद्ध रूप से पूरा किया जाए। गुणवत्ता नियंत्रण एवं नियमित पुनरीक्षण की सभी प्रक्रियाओं को मजबूती से लागू किया जाए। शासन की मंशा है कि जल जीवन मिशन के क्रियान्वयन में पारदर्शिता, उत्तरदायित्व और गुणवत्ता सर्वोच्च प्राथमिकता रहे तथा किसी भी स्तर पर लापरवाही के लिए जीरो टॉलरेंस की नीति का पालन किया जाए। उन्होंने कहा कि विभाग द्वारा हर संभव प्रयास किए जा रहे हैं कि जल जीवन मिशन का कार्य पूर्ण गुणवत्ता के साथ समय-सीमा में पूर्ण हों एवं किसी भी प्रकार की वित्तीय अनियमितता न हो।
मुख्य सचिव अनुराग जैन ने जल-जीवन मिशन के कार्यों की समीक्षा करने के बाद कहा था कि प्रदेश के घरों में नल से जल कनेक्शन जल-जीवन मिशन में कोई लापरवाही या कोताही किसी कीमत पर बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उन्होंने निर्देश दिए हैं कि जल जीवन मिशन की शेष योजनाओं में कार्य की गति तेज़ करते हुए हर ग्राम के हर घर तक स्वच्छ जल पहुंचाने के लक्ष्य को समयबद्ध रूप से पूरा किया जाए। गुणवत्ता नियंत्रण एवं नियमित पुनरीक्षण की सभी प्रक्रियाओं को मजबूती से लागू किया जाए। उन्होंने कहा कि शासन की मंशा है कि जल जीवन मिशन के क्रियान्वयन में पारदर्शिता, उत्तरदायित्व और गुणवत्ता सर्वोच्च प्राथमिकता रहे तथा किसी भी स्तर पर लापरवाही के लिए जीरो टॉलरेंस की नीति अख्तियार की जाए। उन्होंने अब तक 80 लाख 52 हजार 82 घरों तक नल कनेक्शन दिए जाने के कार्य पर संतुष्टि जतायी। उन्होंने बताया कि यह प्रगति 72 प्रतिशत से अधिक है और मध्यप्रदेश देश में अग्रणी राज्य बन रहा है। मुख्य सचिव ने मंत्रालय में जल जीवन मिशन के कार्यों की सूक्ष्मता से समीक्षा की है।
उल्लेखनीय है कि मध्यप्रदेश में वर्ष 2020 से जल जीवन मिशन संचालित है, जिसके अंतर्गत प्रदेशभर में भू-जल स्रोत आधारित एकल ग्राम नल जल योजनाएं और सतही जल स्रोत आधारित समूह जल प्रदाय योजनाओं का क्रियान्वयन प्रत्येक ग्रामीण परिवार तक क्रियाशील घरेलू नल कनेक्शन से स्वच्छ पेयजल पहुंचाने के उद्देश्य से किया जा रहा है। इस महत्वपूर्ण मिशन अंतर्गत कुछ एकल ग्राम नल जल योजनाओं में कुछ मजरे, पारे, टोलों के छूट जाने का मामला संज्ञान में आया था, जिसके फलस्वरूप कुछ ग्रामीण परिवारों को घरेलू नल कनेक्शन प्राप्त न होने की शिकायतें आ रही थीं।