Patrakar Vandana Singh
सिंगरौली (4 जनवरी, 2025): सिंगरौली जिले में 63 जोड़ों का सामूहिक विवाह कार्यक्रम आयोजित किया गया, जिसमें ग्रामीण और शहरी इलाकों के दूल्हे-दुल्हन शामिल हुए। हालांकि, इस विवाह समारोह के बाद हिंदू संगठनों में आक्रोश देखा जा रहा है। इन संगठनों का कहना है कि यह विवाह हिंदू मान्यताओं के खिलाफ है, क्योंकि खरमास में विवाह करना परंपरागत रूप से मना है।
खरमास में विवाह पर सवाल
हिंदू धर्म में खरमास का महीना विशेष रूप से वर्जित माना जाता है, और इस दौरान शादी विवाह के आयोजन को निषेध समझा जाता है। यही कारण है कि 63 जोड़ों के सामूहिक विवाह समारोह पर सवाल उठाए जा रहे हैं। हिंदू संगठनों का मानना है कि यह विवाह हिंदू परंपराओं के खिलाफ है और इसके परिणामस्वरूप इन जोड़ों को परेशानियां हो सकती हैं। उनका कहना है कि इस समय किए गए विवाहों का भविष्य संदेहास्पद हो सकता है और इन जोड़ों का तलाक हो सकता है, जैसा कि उनके अनुसार इस तरह की गलत तारीखों पर विवाह तय करने का परिणाम हो सकता है।
हिंदू संगठनों का आक्रोश
हिंदू संगठनों का कहना है कि यह विवाह समारोह विशेष रूप से सनातनी मान्यताओं के खिलाफ था। संगठन यह सवाल उठाते हैं कि इस सामूहिक विवाह समारोह की तारीख जानबूझकर खरमास में क्यों तय की गई। कुछ का आरोप है कि यह काम कुछ बौद्ध धर्म से संबंधित अधिकारियों और कर्मचारियों द्वारा जानबूझकर किया गया। इसके अलावा, भाजपा के जनप्रतिनिधियों की इस कार्यक्रम में उपस्थिति पर भी सवाल उठाए गए हैं, क्योंकि इसे हिंदू परंपराओं पर कुठाराघात माना जा रहा है।
आखिर क्या होगी कार्रवाई?
अब यह देखना होगा कि मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव इस मामले में क्या कदम उठाते हैं। हिंदू संगठनों और जनता के बीच बढ़ते आक्रोश को देखते हुए, मुख्यमंत्री के लिए यह एक महत्वपूर्ण निर्णय होगा कि वे इस विवाद पर किस तरह प्रतिक्रिया देते हैं और जिम्मेदार अधिकारियों पर क्या कार्रवाई करते हैं।
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