Patrakar Vandana Singh
अमरपाटन नगर परिषद में एक गंभीर मुद्दा उभरा है। बसपा की एक महिला पार्षद, वार्ड नंबर 5 की प्रतिनिधि, पिछले तीन दिनों से धरने पर हैं। उनका आरोप है कि उनके वार्ड में विकास कार्य नहीं हो रहे हैं और नगर परिषद के अधिकारी जातिगत भेदभाव कर रहे हैं।
पार्षद का वार्ड मुख्य रूप से अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति समुदाय के लोगों का निवास स्थान है। यहां पानी की किल्लत, सफाई की समस्या और बुनियादी सुविधाओं का अभाव है। उन्होंने इन समस्याओं के समाधान के लिए कई बार नगर परिषद अध्यक्ष और मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीएमओ) को लिखित शिकायतें दी हैं, लेकिन कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है।
इसके अलावा, पार्षद ने सीएमओ पर जातिगत टिप्पणी करने का भी आरोप लगाया है। उनका आरोप है कि नगर परिषद के अधिकारी एससी और एसटी समुदाय के लोगों के विकास में बाधा डाल रहे हैं।
स्थानीय लोग पार्षद के साथ खड़े हैं और नगर परिषद से मांग कर रहे हैं कि वे वार्ड में विकास कार्य शुरू करें। उनका मानना है कि सभी वार्डों का समान विकास होना चाहिए और किसी भी समुदाय के साथ भेदभाव नहीं किया जाना चाहिए।
यह मामला कई महत्वपूर्ण मुद्दों को उठाता है। सबसे पहले, यह विकास की असमानता को उजागर करता है। कुछ वार्डों में विकास कार्य तेजी से हो रहे हैं, जबकि अन्य वार्डों में विकास की गति बहुत धीमी है। दूसरा, यह जातिगत भेदभाव का एक गंभीर मामला है, जो भारतीय संविधान के विरुद्ध है।
नगर परिषद को इस मामले को गंभीरता से लेना चाहिए और पार्षद की मांगों पर ध्यान देना चाहिए। उन्हें वार्ड में विकास कार्य शुरू करने के लिए ठोस कदम उठाने चाहिए। साथ ही, उन्हें जातिगत भेदभाव के आरोपों की जांच करनी चाहिए और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई करनी चाहिए।
यह मामला न केवल अमरपाटन के लिए बल्कि पूरे देश के लिए एक सबक है। हमें सुनिश्चित करना चाहिए कि सभी लोगों को समान अधिकार और अवसर मिलें, चाहे उनकी जाति, धर्म या सामाजिक स्थिति कुछ भी हो।
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