Patrakar Priyanshi Chaturvedi
देश की आर्थिक राजधानी मुम्बई सहित पूरे महाराष्ट्र में पहली बार ऐसा हुआ है कि समाचार पत्रों का प्रकाशन लगातार हफ्ते भर से ज्यादा दिनों के लिए स्थगित रखना पड़ा हो। नई जानकारी के मुताबिक महाराष्ट्र के अखबारों को अब 31 मार्च तक के लिए बंद कर दिया गया है।
बताते हैं कि पिछले रविवार को मुम्बई सहित आसपास में समाचार पत्रों की प्रिंटिंग पूर्व की तरह हुई लेकिन कोरोना वायरस के खौफ और जनता कर्फ्यू के कारण समाचार पत्र विक्रेताओं ने समाचार पत्रों को बांटने के लिए नहीं खरीदा। इसके बाद प्रिंटिंग पेपर वापस अखबार प्रबंधन के लोगों ने मंगा लिया। उसके बाद रविवार की रात से मुम्बई की लाइफलाइन लोकल ट्रेन बंद हो गयी जिसे देखते हुए अखबारों का प्रकाशन नहीं हुआ।
सोमवार को समाचार पत्र विक्रेताओं के संगठन बृहनमुंबई वृतपत्र विक्रेता संघ ने दोपहर 12 बजे उद्योगमंत्री सुभाष देसाई से मुलाकात की जिसमे सभी संगठन के प्रतिनिधियों ने इस चर्चा में हिस्सा लिया। इस चर्चा में दिनोदिन बढ़ रहे कोरोना वायरस के संक्रमण से सुरक्षा को देखते हुए तय किया गया कि 24 मार्च और 25 मार्च को समाचार पत्रों का वितरण नहीं किया जाएगा।
उसके बाद अगली परिस्थिति की समीक्षा कर अगला निर्णय 26 मार्च से लिया जाएगा। आज 25 मार्च को फिर समाचार पत्र विक्रेताओं के संगठन के पदाधिकारियों की बैठक हुई जिसमें तय हुआ कि 31 मार्च तक पूरे राज्य में समाचार पत्रों की विक्री नही की जाएगी और 29 मार्च को संगठन की फिर बैठक होगी जिसमें स्थिति की समीक्षा कर आगे की रणनीति तय की जाएगी।
उधर, सोमवार देर शाम महाराष्ट्र सरकार ने पूरे महाराष्ट्र में कर्फ्यू लगा दिया है। राज्य में कर्फ्यू और ऊपर से लोकल ट्रेन बन्द और 14 अप्रैल तक राष्ट्र व्यापी लॉक डाउन।जब तक लोकल चालू नहीं होगी तब तक ज्यादातर प्रिंट मीडिया के कर्मी घर पर रहेंगे। ऐसे में महाराष्ट्र में अखबारों का प्रकाशन कब शुरू होगा कोई नहीं जानता। आपको बता दें की ऐसा पहली बार हुआ है जब इतने लंबे समय तक मुम्बई में लोकल ट्रेन और समाचार पत्रों का प्रकाशन बंद रहेगा।
कुछ अखबार ऑनलाइन एडिशन अपडेट कर रहे हैं और रिपोर्टरों को बोलकर खबर मंगा रहे हैं। उधर राज्य सरकार और महाराष्ट्र के कामगार आयुक्त ने एक आदेश जारी किया है कि राज्य में कोरोना वायरस से सुरक्षा के लिए सभी निजी कंपनियों को बंद किया जा रहा है। सरकारी परिपत्रक में कहा गया है कि न तो कर्मचारी को हटाना है और न ही उनका वेतन काटना है। कर्मचारियों के लिए राहत भरी खबर है।
शशिकांत सिंह
पत्रकार और आरटीआई एक्टिविस्ट
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