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दिल्ली में दो युवक ऑपरेशन कराकर पुरुष से महिला बन गए। उनमें से एक की पहचान अब कृतिका के रूप में है। दूसरे ने नाम नहीं बदला और अपना पुराना नाम तक्ष बरकरार रखा है। फोर्टिस शालीमार बाग के प्लास्टिक, कॉस्मेटिक व रिकंस्ट्रक्टिव सर्जरी विभाग के डॉक्टरों ने ऑपरेशन कर उन्हें पुरुष से महिला बनाया।
तक्ष की सर्जरी तीन महीने पहले ही हुई है। दोनों अपना नया रूप हासिल कर खुश हैं। 23 वर्षीय तक्ष पेशे से मॉडल हैं और मूलरूप से हिमाचल प्रदेश के रहने वाले हैं।
डॉक्टरों के अनुसार, वह पुरुष के रूप में असहज महसूस कर रहे थे। बचपन से ही उन्हें महिलाओं की तरह कपड़े पहनना पसंद था। कई बार मनोचिकित्सकों को भी दिखाया गया पर व्यवहार में परिवर्तन नहीं आया। उनके पिता डॉक्टर हैं। तक्ष ने माता-पिता के सामने जब लिंग परिवर्तन कराने का प्रस्ताव रखा तो वे राजी हो गए।
वहीं, लखनऊ निवासी कृतिका 12वीं के बाद पढ़ाई के लिए दिल्ली आ गई। यहां आने के बाद उसने हार्मोनल थैरेपी शुरू कराई। हालांकि परिवार के लोग नहीं चाहते थे कि वह लड़के से लड़की के रूप में परिवर्तित हो जाए, इसलिए घर से सर्जरी के लिए पैसे नहीं मिले। इस वजह से नौकरी की और बैंक से पर्सनल लोन लेकर सर्जरी कराई।
कृतिका ने कहा कि उसने सर्जरी से पहले खुद की पहचान महिला के रूप में हासिल कर ली थी। इसके लिए उसे बहुत संघर्ष भी करना पड़ा। प्लास्टिक, कॉस्मेटिक व रिकंस्ट्रक्टिव सर्जरी विभाग के निदेशक डॉ. ऋचि गुप्ता ने कहा कि जेंडर डिस्फोरिया एक ऐसी स्थिति है जिसमें पुरुष या महिला अपने वास्तविक शरीर में सहज महसूस नहीं करते।
लड़कों को खुद में लड़की होने का अहसास होता है, जबकि लड़कियों को लड़का होने का अहसास होता है। कुछ ऐसी ही स्थिति इन दोनों की थी। ऐसे लोगों की सर्जरी से पहले हार्मोनल दवाएं दी जाती हैं। इसके बाद सर्जरी कर लिंग परिवर्तन किया जाता है। महिला से पुरुष बनना मुश्किल सर्जरी के जरिए पुरुष से महिला बनाया जाना थोड़ा आसान है, क्योंकि ऐसे मरीजों की सिर्फ एक सर्जरी करनी पड़ती है। वहीं, महिला से पुरुष बनाना ज्यादा मुश्किल होता है। ऐसे मरीजों को कम से कम तीन ऑपरेशन से गुजरना पड़ता है। कई लोगों की आवाज बदलने की भी सर्जरी करनी पड़ती है।
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