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ओड़िशा में ईब नदी पर बन रहे बांध से छत्तीसगढ़ में 110 हेक्टेयर खेत डूब जाएंगे। इससे प्रदेश का क्षेत्रफल स्थाई रूप से कम हो जाएगा। आंध्रप्रदेश में बन रहे पोलावरम बांध से भी छत्तीसगढ़ का बड़ा हिस्सा डुबान में आ जाएगा। सोमवार को कोलकाता में आयोजित पूर्वी राज्यों के जल संसाधन मंत्रियों के सम्मेलन में अंतरराज्यीय सिंचाई परियोजनाओं पर छत्तीसगढ़ की चिंता को जोर शोर से उठाया।
उन्होंने आंध्रप्रदेश और ओड़िशा में निर्माणाधीन सिंचाई परियोजनाओं में छत्तीसगढ़ के किसानों के हित में राज्य सरकार ने जो प्रस्ताव केंद्र सरकार को भेजे हैं, उस पर तत्काल निर्णय लेने की मांग की। सम्मेलन की अध्यक्षता केंद्रीय जल संसाधन राज्य मंत्री अर्जुन मेघवाल ने की।
बृजमोहन ने केंद्रीय जल आयोग से प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना के तहत चयनित केलो वृहद परियोजना की पुनरीक्षित लागत 990 करोड़ 34 लाख रुपए की स्वीकृति जल्द दिलाने का अनुरोध किया। सम्मेलन में पश्चिम बंगाल, ओड़िशा, झारखंड और बिहार के जल संसाधन मंत्री और अन्य प्रतिनिधि उपस्थित थे।
अग्रवाल ने ओड़िशा की ईब नदी पर प्रस्तावित सिंचाई परियोजना की ऊंचाई पर सवाल उठाया। उन्होंने तेलगिरी मध्यम सिंचाई परियोजना, नवरंगपुर सिंचाई परियोजना, खड्गा बैराज, पतोरा बांध परियोजना, पोलावरम, इंद्रावती जोरा नाला विवाद, गोदावरी इंचमपल्ली बांध, कावेरी ग्रांड एनीकट लिंक परियोजना पर छत्तीसगढ़ का पक्ष रखा। ईब नदी के जलग्रहण क्षेत्र का 25 प्रतिशत भाग छत्तीसगढ़ दे रहा है लेकिन इस परियोजना से राज्य के किसानों को कोई लाभ नहीं मिलेगा।
पोलावरम बांध की ऊंचाई 177 फीट होने से छत्तीसगढ़ के सुकमा जिले का बड़ा हिस्सा डूब जाएगा। 1979 में बांध की ऊंचाई 150 फीट रखने पर सहमति बनी थी। ज्यादा ऊंचाई पर छत्तीसगढ़ को आपत्ति है। यह मामला भी सुप्रीम कोर्ट में लंबित है।
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