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छत्तीसगढ़, मध्य प्रदेश और महाराष्ट्र के बीच नया नक्सल जोन बनाने में जुटे नक्सलियों को इस इलाके में सिर उठाने से पहले ही कुचलने की तैयारी कर ली गई है। दो दिन पहले चिल्फी घाट के जंगल स्थित एक गांव में मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ और महाराष्ट्र पुलिस के वरिष्ठ अफसरों ने दुर्ग आइजी जीपी सिंह के नेतृृत्व में एक गुप्त बैठक आयोजित की थी।
बैठक में तीनों राज्यों की फोर्स को संयुक्त मोर्चे पर उतारने की सहमति बनी है। नक्सलियों ने इस इलाके में बस्तर से दस्ते भेजे हैं। पुलिस भी सतर्क है। दस दिन पहले कवर्धा के पास एमपी-छत्तीसगढ़ सीमा पर स्थित जंगल में हुई मुठभेड़ में एक नक्सली को पुलिस ने मार गिराया था।
पुलिस अधिकारियों का कहना है कि इस इलाके में नक्सलियों को पांव जमाने नहीं दिया जाएगा। गौरतलब है कि कुछ महीने पहले पुलिस को नक्सलियों के ऐसे दस्तावेज मिले थे जिनसे पता चला कि नक्सली नया जोन बना रहे हैं।
इस नए जोन में मध्य प्रदेश के बालाघाट और महाराष्ट्र के गोंदिया जिलों के साथ ही छत्तीसगढ़ के राजनांदगांव, कवर्धा और मुंगेली जिलों को शामिल करने की बात कही गई थी। नक्सलियों ने इस जोन को एमएमसी जोन नाम दिया है।
अनुमान है कि एमएमसी में कुल मिलाकर करीब 80 नक्सली हैं। इस टुकड़ी को उन्होंने विस्तार प्लाटून नाम दिया है। कवर्धा, राजनांदगांव के जंगल बस्तर के जंगलों जैसे ही हैं। रास्ते नहीं हैं और अंदरूनी इलाकों में सरकार की पहुंच न के बराबर है। नक्सली वारदात कर एक राज्य से दूसरे राज्य में भाग जाते हैं इसलिए तीनों राज्यों ने मिलकर इस चुनौती से निपटने की योजना बनाई है।
स्पेशल डीजी, नक्सल ऑपरेशन डीएम अवस्थी ने बताया पिछले दो साल में नक्सल मोर्चे पर लगातार सफलता मिली है। बस्तर में उनके पांव उखड़ रहे हैं। नए इलाकों में पनपने नहीं दिया जाएगा। पुलिस पूरी तरह तैयार है।
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