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छत्तीसगढ़ में 15 दिनों से जारी शिक्षाकर्मियों की हड़ताल अचानक सोमवार रात 1.30 बजे खत्म हो गई। जिला प्रशासन की ओर से एडीएम हरवंश मिरी, शिक्षाकर्मियों के आला नेताओं के साथ सर्किट हाउस पहुंचे और वहां घोषणा कर दी गई कि मंगलवार से सभी आंदोलनकारी शिक्षाकर्मी स्कूल लौट जाएंगे। शिक्षाकर्मियों के नेताओं ने रायपुर में जमा सभी साथियों से वापस अपने स्कूल जाने की अपील भी की। इस अप्रत्याशित घटनाक्रम के पीछे का राज क्या है, यह खुलकर सामने नहीं आ सका है।
सबसे बड़ा आश्चर्य यह है कि हड़ताल जीरो यानी बिना कोई मांग माने समाप्त की गई है। तो क्या शिक्षाकर्मियों के बैकफुट पर जाने की वजह सरकार का कड़ा रुख रहा? यह आने वाले दिनों में स्पष्ट होगा, लेकिन स्कूली शिक्षा के लिहाज से यह राहत देने वाली खबर है। इधर सभी जिला पंचायत के सीईओ को शिक्षाकर्मियों की बर्खास्तगी रद्द करने के निर्देश भी जारी कर दिए गए हैं।
गौरतलब है कि शिक्षाकर्मी 9 सूत्रीय मांगों को लेकर 20 नवंबर से हड़ताल कर रहे थे। रोजाना इनका प्रदर्शन उग्र होता जा रहा था। राजधानी में शनिवार, रविवार और सोमवार को कर्फ्यू जैसे हालात थे। सरकार की तरफ से यह साफ किया गया था की वह संविलियन संभव नहीं है।
जेल में मिले एसपी, कलेक्टर- उच्च पदस्थ सूत्रों के मुताबिक सोमवार रात 9:30 बजे के करीब कलेक्टर ओपी चौधरी, एसपी डॉ. संजीव शुक्ला केंद्रीय जेल में बंद शिक्षाकर्मियों के नेताओं से मिलने पहुंचे थे। इस दौरान जेल अधीक्षक के केबिन में इनके बीच बातचीत हुई थी। हालांकि वार्ता क्या हुई, यह स्पष्ट नहीं हो सका, लेकिन दोनों अफसरों ने सरकार का रुख यहां स्पष्ट किया, जो कड़े तेवर वाला था।
शिक्षाकर्मी संघ के नेता वीरेंद्र दुबे, केदार जैन, संजय शर्मा ने कहा हम छात्रहित को ध्यान में रखते हुए हड़ताल वापस ले रहे हैं।
हरवंश मिरी, एडीएम, रायपुर ने कहा शिक्षाकर्मियों की कोई भी मांग नहीं मानी गई है। उनके नेता केदार जैन, वीरेंद्र दुबे, संजय शर्मा ने शासन-प्रशासन से बात की और हड़ताल खत्म कर दी है। वे सभी मंगलवार से काम पर लौटेंगे। शासन से वार्ता के दौरान नेताओं ने सरकार के निर्णय पर सहमति जताई है। बाकी निर्णय शासन स्तर पर होंगे।
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