Patrakar Vandana Singh
मध्यप्रदेश हाईकोर्ट जबलपुर के पूर्व विशेष कर्त्तव्यस्थ अधिकारी, अतिरिक्त जिला सत्र न्यायाधीश आरके श्रीवास को अनुशासनहीनता के आरोप में निलंबित कर दिया गया है। मंगलवार 8 अगस्त को प्रिंसिपल रजिस्ट्रार (विजिलेंस) सत्येन्द्र कुमार सिंह के हस्ताक्षर से इस आशय का आदेश जारी हुआ।
उक्त आदेश में कहा गया है कि सीरियस मिस कंडक्ट को लेकर एडीजे श्रीवास के खिलाफ विभागीय जांच संस्थित कर दी गई है। निलंबन अवधि में एडीजे श्रीवास का मुख्यालय नीमच रहेगा। उल्लेखनीय है कि 15 महीने में चार तबादलों के विरोध में एडीजे श्रीवास ने हाईकोर्ट के बाहन तीन दिनों तक सत्याग्रह किया था।
हालांकि, शनिवार को उन्होंने बच्चों की पढ़ाई का नुकसान न हो, इसलिए ट्रांसफर आदेश मानते हुए गृहस्थी का सामान नीमच शिफ्ट कर लिया। उन्होंने मंगलवार को नीमच कोर्ट में ज्वाइन ही किया और प्रिंसिपल रजिस्ट्रार ने उनका निलंबन आदेश जारी कर दिया।
निलंबन आदेश काला धब्बा, दिल्ली तक उठाऊंगा आवाज : एडीजे श्रीवास
एडीजे श्रीवास ने अपनी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए अपने निलंबन आदेश को न्यायपालिका के इतिहास में काला धब्बा निरूपित किया। साथ ही हाईकोर्ट के कठोर रवैये की तुलना अंग्रेजों के जमाने में न अपनी दलील और न वकील वाले रोलेट एक्ट से करते हुए अपनी आवाज दिल्ली तक उठाने की चेतावनी दी है।
इससे पूर्व जबलपुर आकर हाईकोर्ट स्तर पर विरोध दर्ज कराया जाएगा। यदि आवश्यक पड़ी तो साइकल रैली भी निकालने की बात कही गई है। एडीजे का कहना है कि मैं अपने साथ हुए अन्याय का प्रतिकार जैसे भी बनेगा करूंगा। मैं अपनी ओर से उठाई गई फोर्थ क्लास भर्ती घोटाले सहित 9 बिन्दुओं पर जांच की मांग पर भी पूर्ववत कायम रहूंगा।
जबलपुर से हाल ही में नीमच ट्रांसफर किए गए एडीजे श्रीवास ने महज 15 माह में चार तबादला आदेशों को लेकर आक्रोश प्रदर्शित करते हुए हाईकोर्ट के गेट नंबर-3 के सामने सड़क किनारे दरी बिछाकर तीन दिनी सत्याग्रह किया था। इससे पूर्व अपनी पीड़ा सोशल मीडिया के जरिए सार्वजनिक की गई, जिसे मीडिया में स्थान मिला।
एडीजे श्रीवास ने बताया कि उन्होंने मंगलवार 8 अगस्त को दोपहर 1 बजे नीमच कोर्ट पहुंचकर विधिवत ज्वाइनिंग दे दी। शाम तक बाकायदे न्यायिक कार्य किया। लेकिन शाम 6 बजे निलंबन आदेश थमा दिया गया। लिहाजा, बुधवार से वे कोर्ट में सुनवाई का न्यायिक कार्य नहीं कर सकेंगे। चूंकि उन्हें फ्री कर दिया गया है, अत: वे एक-दो दिन में अपनी रणनीति बनाकर जबलपुर आएंगे और यहीं से आंदोलन को नए सिरे से गति देंगे।
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