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उमेश त्रिवेदी
भारत की सर्जिकल-स्ट्राइक के बाद पाकिस्तान के हालात तेजी से नीचे की ओर फिसलते दिख रहे हैं। उसकी कोशिश है कि हिन्दुस्तानी की इस कार्रवाई को फर्जी करार देते हुए पतली गली से बाहर निकल जाए, क्योंकि जम्मू-कश्मीर के उड़ी सेक्टर में फौजी ठिकानों पर उसने जो आतंकवादी हमला करके पाकिस्तान में जो उन्माद पैदा किया था, वह ज्वार-भाटो की तरह खड़ा होकर अपने ही किनारों को तहस-नहस करने लगा है। पाकिस्तान की राजनीति उलटी करवट लेकर अपने ही राजनेताओं और सेना-नायकों के सामने बैठकर देश की आन-बान और शान का हिसाब मांगने लगी हैं। सॉफ्ट-इंडिया के चेहरे की इस्पाती रंगत ने पाकिस्तान को दुविधा में डाल दिया है। पाकिस्तान की समझ मे आ गया है कि भविष्य में दहशतगर्दी को लेकर भारत की रणनीति का स्वरूप क्या और कैसा होगा?
पाकिस्तान परमाणु- धमकियां का इस्तेमाल रणनीति के तहत करता है। क्या इस घटना को महज एक संयोग है कि पाक-रक्षामंत्री ख्वाजा मुहम्मद आसिफ ने 17 सितम्बर को जियो न्यूज से कहा था कि आत्म-रक्षाकी खातिर पाकिस्तान भारत के खिलाफ परमाणु हमले से संकोच नहीं करेगा। अगले दिन ही उड़ी के सैन्य-ठिकानो पर हमला हो जाता है। 8 अगस्त, 2016 को ही हिजबुल मुजाहिदीन के मुखिया सैयद सलाउद्दीन ने कश्मीर मुद्दे पर परमाणु हमले की बात कही थी।
पाकिस्तान मे परमाणु उन्माद की यह कहानी बहुत पुरानी है। अमेरिकी पत्रकार पीटर लेंड्समेन ने पाकिस्तान के संस्मरणों पर केन्द्रित अपनी वृतांत – ' ए मॉडेस्ट प्रोपोजल फ्रॉम ए ब्रिगेडियर' में परमाणु उन्माद का चौकाने वाला जिक्र किया है। पीटर लेंड्समेन 2002 में बलूचिस्तान के चागई रैंज में पाकिस्तान के इस्लामिक-बम के प्रभावों का अध्ययन करने आए थे। चागई के पथरीले पहाड़ों की ये अनाम चोटियां पाकिस्तान के न्यूकलियर परीक्षण की साइट हैं। इन अनाम पथरीले पहाड़ो पर भारत की परमाणु शक्ति का मुकाबले करने के लिए पाकिस्तान ने 1998 में पहले इस्लामिक-बम का विस्फोट किया था। लेंड्समेन ने पाकिस्तान ब्रिगेडियर अमान उल्लाह की बातचीत के हवाले से लिखा है कि बकौल अमान उल्लाह 1947 के पाकिस्तान के निर्माण के बाद 1998 ही ऐसा साल था ,जब यह महसूस हुआ था कि मुल्क ने कुछ हांसिल किया है।
सेना से रिटायर अमान उल्लाह पाकिस्तान की पूर्व प्रधानमंत्री बेनजीर भुट्टो के इस्लामाबाद-हाउस मे काम करते थे। ब्रिगेडियर ने लेंड्समेन के सामने पाकिस्तान के निर्माता जिन्ना के आदमकद चित्र की इंगित करते हुए बताया था कि फोटो में जिन्ना हाथ उठाकर आकाश में उड़ते जिस रॉकेट को दिखा रहे हैं, वह न्यूक्लियर वार-हेड भारत की ओर जा रहा है। लेंड्समेन ने पहले सोचा कि ब्रिगेडियर मजाक कर रहे हैं. लेकिन बाद में वो सही में ऐसा ही सोचते हैं। अमान उल्लाह ने कहा कि भारत के साथ ऐसा ही होना चाहिए। पाकिस्तान को बदला लेने के लिए न सिर्फ भारत का प्रतिकार करना चाहिए, बल्कि पहले हमला भी करना चाहिए। बम्बई, दिल्ली और कलकत्ता जैसे कुछ शहरों को तबाह कर देना चाहिए। बदले में यदि वो हमारे लाहौर या कराची तबातह कर दे तो भी कोई बात नहीं। करोड़-दो करोड़ लोगो के मरने से कुछ नही बिगड़ेगा। वो खराब लोग हैंऔर उन्हे सबक सिखाया जाना चाहिए। ब्रिगेडियर बुदबुदाये जा रहा था कि यहां पाकिस्तान में कोई भविष्य नहीं है। हमें अभी शुरुआत करना है। आप पाकिस्तान के गांव मे हालात देखिये... नंग- धड़ंग बच्चो का कोई भविष्य नहीं है। गरीबी,बदहाली, मीलो पानी नहीं, बिजली नहीं, और यह सब देखकर मेरा मन रो उठता है...चीखने को मन करता है...मेरे बच्चो को कोई भविष्य नहीं है ... पाकिस्तान में किसी भी बच्चे का कोई भविष्य नही है। हम चारों तरफ, सिर्फ युध्द, और युध्द की तकलीफो से घिरे हैं। ब्रिगेडियर इस दुर्दशा के लिए अपने सेनाधिकारियों के बजाय भारत को जिम्मेदार मानते हैं कि उसने पाक पर युध्द थोपा रखा है। लेंड्समेन कहते है कि अमान उल्लाह पाकिस्तान के नीति-निर्धारक नही हैं, लेकिन आम लोगो को सोच को प्रतिबिम्बित करते हैं कि जहनीतौर पर वंहालोगों के मन मे कितना जहर भरा है। दुनिया में नार्थ कोरिया के अलावा पाकिस्तान एक मात्र ऐसा देश है, जो अपने पड़ोसियों के खिलाफ पहले परमाणु अस्त्रो की इस्तेमाल की बात करता है। और साफ कहता है कि उसका परमाणु बम सिर्फ भारत के खिलाफ इस्तेमाल करने के लिए है।[लेखक सुबह सवेरे के प्रधान संपादक हैं ]
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