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उमेश त्रिवेदी
पाक अधिकृत कश्मीर में 'सर्जिकल-स्ट्राइक' की खुशखबर के बाद देश हर उस परिस्थिति से जूझने को तैयार है, जो युध्द-काल में किसी भी देश के नागरिकों से अपेक्षित होती है। लोग भलीभांति समझते हैं कि यह इब्तिदा है और हमने किसी निर्णायक लड़ाई को अंजाम नहीं दिया है। पाकिस्तान की हरकतों का सिलसिला यूं ही खत्म होने वाला नहीं है। सेना ने पाकिस्तान को यह पहला सबक सिखाया है। मोदी सरकार जानती है कि यह आश्वस्त होकर बैठने का समय नहीं है। सेना ने भी साफ कर दिया है कि हमारी कार्रवाई खत्म हो चुकी है, लेकिन किसी भी जवाबी कार्रवाई से निपटने के लिए सेना पूरी तरह तत्पार है। मोदी सरकार जानती थी कि जनमत पाकिस्तान के खिलाफ है और कुछ किए बिना उसका समाधान नहीं होगा।
आदतन टीवी देखने वालों के लिए टीवी स्क्रीन पर ढीली-ढाली पैबन्द लगी खबरों में कोई नयापन नहीं होता है। मुखौटों के साथ नेताओं के बयानों में उव्देलित करने जैसा कुछ नहीं होता है, लेकिन गुरुवार को टीवी स्क्रीनों पर जब भारतीय सेना की 'सर्जिकल-स्ट्राइक' की खबर का खुलासा हुआ तो हैरत के साथ उत्साह अंगड़ाई लेने लगा। खुलासे के वक्त टीवी स्क्रीन पर सेना के मिलेटरी ऑपरेशन्स के महानिदेशक (डीजी) लेफ्टिनेंट जनरल रणबीर सिंह की दृढ़प्रतिज्ञ 'बॉडी-लैंग्वेज' के साथ ही पूरे देश की 'बॉडी-लैंग्वेज' में वीरोचित उत्तेजना छलकने लगी। उनके चेहरे पर वीरता, दृढ़ता और प्रतिबध्दता की दमक पूरे देश की रगों में दौड़ती महसूस हो रही थी। प्रेस-कान्फ्रेंस में उनके पहले संबोधन 'जयहिन्द' में भारतीय सेना का जय-गान था और 'सर्जिकल-स्ट्राइक' के ब्योकरे में बेखौफ रहने का आव्हान था। टीवी स्क्रीन पर 'रणवीर सिंह की चौकस आंखों में बैठे 'बब्बर शेर' का अहसास हिन्दुस्तानियों के लहू में गरमाहट घोल रहा था। एक सेनापति के मानिन्द लेफ्टिनेंट जनलर रणवीर सिंह की वीरोचित घोषणाओं के बाद आत्म विश्वास से लबरेज हिन्दुस्तान एक कदम-ताल के साथ सेना को सैल्यूट करता महसूस हो रहा था। पाक अधिकृत कश्मीर में आंतकवादियों के सात 'लांच-पैड्स' पर भारतीय सेना की इस खामोश 'सर्जिकल-स्ट्राइक' के बाद पाकिस्तान के नेताओं और सेना-प्रमुखों की अलग-अलग बयानबाजियों में बौखलाहट देखते ही बनती है।
हम गर्व कर सकते हैं कि भारतीय सेना की यह 'सर्जिकल-स्ट्राइक' भारत की रणनीतिक, राजनीतिक और कूटनीतिक नीतियों का 'परफेक्ट-कॉम्बीनेशन' था। रात के अंधेरे में दुश्मनों की मांद में सात अलग-अलग ठिकानों पर आक्रमण की लयबध्दता को संजोना आसान काम नहीं है। सारा देश सेना के इस 'परफेक्शन' के आगे नतमस्तक है। जम्मू कश्मीर में उड़ी-हमले के बाद देश अनिश्चय और अनिश्चितता के दरख्तों के पीछे भटकता महसूस हो रहा था। जनमत भी उव्देलित था कि मोदी-सरकार इतना असहाय व्यवहार क्यों कर रही है? लेकिन यह भारत की कूटनीतिक सफलता है कि 'सर्जिकल-स्ट्राइक' के बाद पाकिस्तान दुनिया के देशों में अलग-थलग खड़ा है। देहातों में एक कहावत चलती है कि 'जबरा, गरीब को मारता भी है और रोने भी नहीं देता है।' भारत की इस मार के बाद पाकिस्तान के भी वही हाल हैं कि 'वो न तो रो पा रहा हैं, ना ही चिल्ला पा रहा है।'
भारत ने कूटनीतिक-रणनीति से पाकिस्तान के हालात ऐसे कर दिए हैं कि वो चाह कर भी दूसरे मुल्कों से कूटनीतिक समर्थन हासिल नहीं कर पा रहा है। दुनिया गवाह है कि मोदी ने बाहें फैलाकर पाकिस्तान की दोस्ती का लंबा इंतजार किया है। यह मोदी का पलटवार है। मोदी ने पिछले साल 25 दिसम्बर 2015 को जन्मदिन पर बधाई देने के लिए लाहौर पहुंचकर जिस प्रकार पाकिस्तानी प्रधानमंत्री नवाज शरीफ सहित पूरी दुनिया को चौंका दिया था, उसके बिल्कुल उलट बुधवार की रात पीओके में 'सर्जिकल स्ट्राइक' के जरिए आतंकवादियों के सात शिविरों को नेस्तनाबूद करके सारी दुनिया को हतप्रभ कर दिया है। मोदी के 'एटीट्यूड' में 360 डिग्री का यह 'ट्विस्टी' उनके इरादों की इबारत में इस्पात घोलता है कि वो बेहतर रिश्तों की तलाश में सारे प्रोटोकॉल तोड़कर यदि पाकिस्तान जा सकते हैं, तो देश की सुरक्षा की खातिर 'सर्जिकल स्ट्राइक' जैसे रणनीतिक फैसले भी लेने का साहस रखते हैं। 25 दिसम्बर 2015 को मोदी ने जो कुछ किया था, वो अभूतपूर्व था और आज उनके नेतृत्व में सेना ने जो किया, वह भी अभूतपूर्व है। पीठ में छुरा भोंकने का पाकिस्तानी-इतिहास पुराना है। घरेलू राजनीति के मोर्चे पर कांग्रेस सहित सभी दल मोदी-सरकार के साथ खड़े हैं। [लेखक सुबह सवेरे के प्रधान संपादक है।]
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