Patrakar Priyanshi Chaturvedi
हटाई गई दलित महिला सरपंच का वित्तमंत्री मलैया के बेटे सिद्धार्थ पर आरोप ,ग्रामीण सरपंच के खिलाफ
मध्य प्रदेश के दमोह जिले में एक दलित महिला सरपंच ने प्रदेश के वित्त मंत्री जयंत मलैया के बेटे पर गंभीर आरोप लगाकर सनसनी फैला दी है| महिला का आरोप है की वित्त मंत्री का बेटा उनको 15 अगस्त पर ध्वजारोहण नहीं करने देना चाहता। इसके लिए उसने उसे पद से हटा दिया गया|
दमोह, बांदकपुर ग्राम पंचायत की सरपंच रहीं पूना बाई कलेक्ट्रेट के बाहर धरने पर बैठ गई है। उनका आरोप है कि उन्हें दलित होने की वजह से साजिश करते हुए वित्त मंत्री के बेटे के कहने पर हटाया गया है। वित्तमंत्री मलैया के बेटे और भाजपा नेता सिद्धार्थ उन्हें ध्वजारोहण नहीं करने देना चाहता। वो कहते हैं कि यहां दलित सरपंच झंडा रोहण नहीं करेगी।
घटनाक्रम को लेकर जिले में चर्चाएं जारी हैं। इस मामले में मलैया का कहना है कि पूना बाई को दलित होने की वजह से नहीं बल्कि अनियमितता के चलते उनके पद से हटाया गया है। पूर्व सरपंच पूनाबाई का ये भी आरोप है कि पिछले साल भी वित्तमंत्री के बेटे के कारण ही उन्हें 15 अगस्त से पहले हटा दिया गया था, ताकि वो ध्वजारोहण न कर सके।
गुरुवार को बांदकपुर से आए सैकड़ों ग्रामीणों के साथ पूर्व सरपंच सुनील डबुलया ने कलेक्टर को ज्ञापन सौंपा है। जिसमें मांग की गई है कि सरपंच पद से निष्कासित पूना बाई को सरपंच न बनाया जाए। जबकि दूसरी ओर कांग्रेस पार्टी के पदाधिकारी पूनाबाई का समर्थन करने पहुंचे। गुरुवार को बांदकपुर के पूर्व सरपंच सुनील डबुलया के साथ बड़ी संख्या में ग्रामीण जिसमें अधिकतर दलित समुदाय के लोग शामिल थे। जिन्होंने पूनाबाई पर खुलकर आरोप लगाए हैं। इनका कहना है कि गांव में विकास के नाम पर सुलभ शौचालय बनाए गए थे जिनका पूनाबाई द्वारा भुगतान नहीं किया गया बल्कि पूनाबाई के द्वारा यह राशि निकालली गई है। इस तरह के सैकड़ों शौचालय सरपंच के द्वारा बनाए गए थे। इसी तरह गांव में पंचायत द्वारा बनाई गई दुकानों के आवंटन में इनके द्वारा भृष्टाचार किया गया है।
दरअसल दमोह जिले की ग्राम पंचायत बांदकपुर की सरपंच पूनाबाई को भृष्टाचार के आरोप के तहत कलेक्टर के आदेश पर 13 अगस्त 2015 को पद से हटा दिया गया था, लेकिन अपर आयुक्त सागर ने कलेक्टर के आदेश को खारिज करते हुए दलित महिला सरपंच को पुनः बहाल करने करने का आदेश जारी किया था। महिला सरपंच पूनाबाई पर आरोप था कि उन्होंने बाजार बैठकी के नाम पर बिना रसीद दिए राशि वसूल कर अपने खर्च में उपयोग किया था। नल कनेक्शनों के नाम पर अवैध वसूली की और दुकानों का निर्माण कर निजी लाभ लिया। कलेक्टर ने आरोपों को सही मानते हुए सरपंच पूनाबाई के खिलाफ धारा 40 की कार्रवाई करते हुए उन्हे पद से अलग कर दिया और 6 साल के लिए चुनाव लड़ने अयोग्य घोषित कर दिया।
इस मामले में मंत्री पुत्र सिद्धार्थ मलैया का कहना है कि उन पर लगाए गए आरोप बेबुनियाद और निराधार हैं। हमें इस मामले से कोई लेना देना नहीं है।
गुरुवार को बांदकपुर की निष्कासित सरपंच पूनाबाई के समर्थन में कांग्रेस पार्टी के पदाधिकारी भी शामिल हुए। जिसमें जिला अध्यक्ष हरीशंकर चौधरी, सतीष जैन कल्लन,सुदामा दुबे, दिनेश रैकवार आदि की उपस्थिति रही। इस पूरे मामले में कलेक्टर श्री निवास शर्मा का कहना है कि इस मामले की जांच चल रही है। जांच के बाद ही जो चीजें सामने आएंगी उसके बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी।
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