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केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) की विशेष अदालत ने शनिवार को डेरा सच्चा सौदा सिरसा के प्रमुख गुरमीत राम रहीम सिंह की दो याचिकाओं को खारिज कर दिया।
पंचकूला में बचाव पक्ष द्वारा 2003 में सीबीआई के पूर्व अधिकारी केएल रैना द्वारा लिए गए पीडि़ताओं के प्रथम ब्यानों को कोर्ट में पेश करने और पूर्व जांच पुलिस अधिकारी रैना को गवाह बनाने की मांग की थी।
सीबीआई के वकील एचपीएस वर्मा ने कहा कि परीक्षण में देरी करने के लिए यह याचिका लगाई गई है जिसके बाद दोनों याचिकाओं को खारिज कर दिया गया।
बचाव पक्ष के वकील एसके गर्ग नरवाना ने बताया था कि सीबीआइ ने कुछ स्टेटमेंट्स छिपाई है, जोकि काफी गंभीर बात है। कुछ गवाहियां 2003 में रिकॉर्ड की गई थी और उसके बाद 2005 और 2006 में दर्ज हुई। हम 2003 में दर्ज गवाहियां को कोर्ट में पेश करना चाहते हैं।
बचाव पक्ष ने कहा था कि 2003 में रेप पीडि़तों के 161 के तहत बयान हुए थे, जोकि चालान का हिस्सा नहीं बनाए गए। बचाव पक्ष का कहना था कि सीबीआइ द्वारा जानबूझकर गवाही छिपाई। वहीं केएल रैना इस मामले के लंबे समय तक जांच अधिकारी रहे और वह पीडि़ताओं सहित अन्य महिला अनुयायियों भी मिले थे। इसलिए उनको भी गवाह बनाया जाए।
यह है मामला - गौरतलब है कि पंचकूला विशेष सीबीआई में डेरा प्रमुख गुरमीत राम रहीम पर साध्वी यौन शोषण समेत दो हत्या के मामले चल रहे हैं। तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी को लिखे गुमनाम पत्र के माध्यम से एक साध्वी ने डेरा प्रमुख पर यौन शोषण के आरोप लगाए थे।
माननीय उच्च न्यायालय ने पत्र का संज्ञान लेते हुए सितम्बर 2002 को मामले की सीबीआई जांच के आदेश दिए थे। सीबीआई ने जांच में उक्त तथ्यों को सही पाया और डेरा प्रमुख के खिलाफ विशेष अदालत के समक्ष 31 जुलाई 2007 में आरोप पत्र दाखिल कर दिया था।
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