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रवीन्द्र जैन
भोपाल में चातुर्मास कर रहे जैन संत आचार्य विद्यासागर महाराज ने कहा है कि मोहमार्ग को छोड़े बगैर मोक्षमार्ग पर चलना संभव नहीं है। उन्होंने कहा है कि मोक्षमार्ग पर चलने के लिए कई गुनी सावधानी की आवश्यकता है। आचार्यश्री शनिवार को हबीबगंज जैन मंदिर में प्रवचन दे रहे थे।
शनिवार को मुंबई से आए श्रावक प्रभात जैन, न्यायाधीश एनके जैन ने आचार्यश्री को श्रीफल भेंटकर उनसे आशीर्वाद लिया। अपने आर्शीवचन में आचार्यश्री ने कहा कि मोक्षमार्ग सहज नहीं है। इसका मूल्य वह जोहरी ही समझ सकता है जिसने मोह का त्याग कर इस मार्ग को अपनाया हो। जिस प्रकार संसार में अलग-अलग दुकानें होती हैं। चाय, पान, किराना, सब्जी की दुकानें बड़ी संख्या में मिलेंगी लेकिन ऐसे जोहरी की दुकान कम होंगी जिस पर अमूल्य हीरे, माणिक होंगे। इसी प्रकार धर्म के क्षेत्र में भी कई दुकानें हैं, लेकिन मोक्ष मार्ग जोहरी की तरह ऐसा मार्ग है जो भव-भव के बंधन से छुटकारा दिलाने वाला है।
आचार्यश्री ने कहा कि जो आया है उसे जाना है, लेकिन कहां जाना है जाने का रास्ता कैसा है यह समझ लो। चारो गतियों में जाने का रास्ता सीधा है। संसार में सभी भटके हुए हैं और जिस प्रकार शहर में रिंग रोड पर घुमते हैं और वापिस वहीं आ जाते हैं ऐसे ही हम चारो गतियों मेें घुम रहे हैं। एकाध कोई व्यक्ति होता है जो इसमें से निकल पाता है और मोक्ष मार्ग पर चल पाता है। वैसे ही जैसे चने के भाड़ से एकाध चना उछलकर बाहर आ जाता है और वह भुनने से बच जाता है।
संयम महोत्सव
आचार्यश्री ने तीन वर्ष पहले महाराष्ट्र के जैन तीर्थ रामटेक में 24 बाल ब्रह्मचारी युवाओं को दीक्षा देकर मुनि बनाया था। इन मुनियों का चौथा दीक्षा दिवस शनिवार को दोपहर 2 बजे हबीबगंज जैन मंदिर में संयम दिवस के रूप में मनाया । इस अवसर पर आचार्यश्री के मंगल प्रवचन हुए । जिन मुनियों का दीक्षा दिवस मनाया गया उनमें मुनिश्री निस्वार्थ सागर महाराज, मुनिश्री निर्दोष सागर महाराज, मुनिश्री निर्लोक सागर महाराज, मुनिश्री निरोग सागर महाराज, मुनिश्री निर्मोह सागर महाराज, मुनि निष्पक्ष सागर महाराज, मुनिश्री निष्पृह सागर महाराज, मुनिश्री निश्चल सागर महाराज, मुनिश्री निष्कंप सागार महाराज, मुनिश्री निष्पंद सागर महाराज, मुनिश्री निरामय सागर महाराज, मुनिश्री निराकुल सागर महाराज, मुनिश्री निरूपम सागर महाराज, मुनिश्री निष्काम सागर महाराज, मुनिश्री निरीह सागर महाराज, मुनिश्री निस्सीम सागर महाराज, मुनिश्री निर्भीक सागर महाराज, मुनिश्री निराग सागर महाराज, मुनिश्री नीरज सागर महाराज, मुनिश्री निकलंक महाराज, मुनिश्री निर्मद सागर महाराज, मुनि श्री निसर्ग सागर महाराज और मुनिश्री निसंग सागर महाराज शामिल हैं। इनमें से केवल निष्पक्ष सागार महाराज वर्तमान में राजस्थान में चातुर्मास कर रहे हैं। बाकि शेष महाराज आचार्यश्री के साथ भोपाल में चातुर्मास की साधना कर रहे हैं।
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