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बस्तर में 2016 नक्सली हिंसा व रक्तपात के निशान छोडता आया है लेकिन खत्म होने जा रहा वर्ष 2016 पुलिस के लिए उपलब्धि वाला वर्ष रहा है। बीते 359 दिनों में 134 नक्सली ढेर हुए। वहीं केवल 38 जवानों को ही शहादत देनी पड़ी है। मारे गए नक्सलियों में पीएलजीए के 14 हार्डकोर भी शामिल हैं।
आंकड़ों पर नजर डालें तो वर्ष 2014 के जून माह से नक्सलियों के विरूद्ध आक्रामक मिशन की शुरूआत के बाद तुलनात्मक रूप से नक्सलियों का नुकसान बढ़ा है। अपेक्षाकृत पुलिस की क्षति कम हुई है। वर्ष 2014 में मुठभेड़ के दौरान 16 नक्सलियों का शव बरामद हुआ था। वहीं वर्ष 2015 में 40 शव बरामद हुए थे। इसी प्रकार 24 जून 2016 तक की स्थिति में 134 नक्सलियों के शव बरामद किए गए हैं।
हांलाकि मारे गए नक्सलियों की संख्या इससे अधिक भी हो सकती है। अधिकतर घटनाओं में नक्सली मारे गए साथियों के शव घसीट कर ले जाते हैं। बीते वर्ष जहां पुलिस के 43 जवान शहीद हुए थे। इस वर्ष 38 जवानों की शहादत हुई है। यह संख्या मारे गए नक्सलियों के तुलना में काफी कम है।
डायरेक्ट एक्शन का रहा असर नक्सल मामलों के जानकारों की मानें तो मिशन 2016 में पुलिस ने पारम्परिक रणनीति में आमूल-चूल बदलाव किया। पहले जहां जंगल में सर्च आपरेशन के दौरान नक्सलयों द्वारा हमले के बाद सुरक्षा बल के जवान रक्षात्मक भूमिका में नजर आते थे पर गुरिल्ला ट्रेंड डीआरजी की तैनाती के बाद नक्सलियों के ठिकानों पर सीधे हमले किए गए। फलस्वरूप इसका रिजल्ट भी सामने आया। वहीं ओडिसा रिजर्व गार्ड, आंध्र ग्रेहाउंडस के साथ बेहतर समन्वय व ज्वाइंट आपरेशन को भी सफलता की अहम कड़ी माना जा रहा है।
पहली बार 14 पीएलजीए कमांडो ढेर आमतौर पर मुठभेड़ के दोरान मिलिशिया व निचले काडर के नक्सली ही मारे जाते रहे हैं पर वर्ष 2016 में नक्सलियों की सैन्य शाखा पीएलजीए पीपूल्स लिबरेशन गोरिल्ला आर्मी के 14 सदस्य मुठभेड़ में ढेर किए गए। साथ ही उनके पांच नग आटोमेटिक वैपन इंसास व एसएलआर भी जब्त किए गए। "ङमुख मुठभेड़ों में सुकमा जिले के किस्टारम थाना क्षेत्र अंतर्गत पेसलपाड़ गांव के पास दो फरवरी की सुबह हुई मुठभेड़ है। इसमें पीएलजीए के आठ लड़ाके ढेर हुए थे। साथ ही एक एसएलआर व एक इंसास बरामद किया गया था। इसी "ङकार बीजापुर जिले के फरसेगढ़, कांकेर जिले के कोयलीबेड़ा, नारायणपु जिले के धौड़ई क्षेत्र में हुए मुठभेड़ों में पुलिस द्वारा हार्डकोर कमांडो नक्सलियों को ढेर किया गया है। वहीं विस्फोटक आदि बरामद किए गए।
आईजी बस्तर एसआरपी कल्लूरी मिशन 2016 के तहत सुरक्षा बल आक्रामक रूप से नक्सल विरोधी आपरेशंस चला रहे हैं। वहीं मिजोरम से गोरिल्लावार ट्रेनिंग लेकर लौटे डीआरजी के स्थानीय लड़ाकों की मदद से पुलिस को महत्वपूर्ण सफलता हासिल हुई है।
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