Patrakar Priyanshi Chaturvedi
भारतीय रेलवे ने 13 अगस्त 2026 को देश के सबसे व्यस्त और हाई-स्पीड रेल गलियारों पर अपनी स्वदेशी स्वचालित ट्रेन सुरक्षा प्रणाली 'कवच 4.0' के व्यापक विस्तार का काम शुरू कर दिया है। रेलवे द्वारा इस प्रोजेक्ट को शीर्ष प्राथमिकता देने का मुख्य उद्देश्य ट्रेनों की आमने-सामने की टक्करों को शून्य करना और मानवीय भूलों के कारण होने वाली दुर्घटनाओं को पूरी तरह रोकना है। रेल यात्रा को सुरक्षित बनाने के लिए यह आधुनिक तकनीक अत्यंत प्रभावी मानी जा रही है।
इसका असर क्या होगा? कवच 4.0 प्रणाली के चालू होने के बाद, यदि कोई लोको पायलट गलती से रेड सिग्नल पार करता है या निर्धारित गति से अधिक तेज गाड़ी चलाता है, तो सिस्टम स्वचालित रूप से ट्रेन के ब्रेक लगा देगा। घने कोहरे या खराब मौसम में भी यह तकनीक सिग्नल की सटीक जानकारी लोको पायलट के केबिन में पहुंचाएगी, जिससे ट्रेनों का संचालन बिना किसी जोखिम के संभव होगा। इससे यात्रियों का सफर सुरक्षित होगा और ट्रेनों की समयबद्धता (Punctuality) में भी सुधार आएगा।
रेलवे तकनीशियनों के अनुसार, कवच 4.0 रेडियो फ्रीक्वेंसी, जीपीएस और उन्नत सेंसरों से लैस एक विश्वस्तरीय प्रणाली है जो वास्तविक समय में ट्रेन की गतिविधियों को नियंत्रित करती है। पूरे रेल नेटवर्क पर इसके लग जाने से भारतीय रेलवे दुनिया के सबसे सुरक्षित रेल नेटवर्कों की सूची में मजबूती से शामिल हो जाएगा।
Patrakar Priyanshi Chaturvedi
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