Patrakar Priyanshi Chaturvedi
भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) की मौद्रिक नीति समिति (MPC) ने 13 अगस्त 2026 को अपनी समीक्षा बैठक के बाद देश की प्रमुख नीतिगत ब्याज दर (रेपो रेट) को यथावत रखने का फैसला सुनाया। वित्तीय विशेषज्ञों का कहना है कि केंद्रीय बैंक का यह निर्णय देश में मुद्रास्फीति (महंगाई) की दर को नियंत्रित करने और साथ ही आर्थिक विकास की गति को मजबूती देने के बीच एक संतुलित स्थिति बनाए रखने के लिए लिया गया है। वैश्विक बाजार की अनिश्चितताओं के बीच सतर्कता बरतना आवश्यक समझा गया।
इसका असर क्या होगा? रेपो रेट के स्थिर रहने से आम बैंक ग्राहकों को बड़ी राहत मिलेगी क्योंकि उनके होम लोन, ऑटो लोन और पर्सनल लोन की ब्याज दरों या ईएमआई (EMI) में फिलहाल कोई बढ़ोतरी नहीं होगी। बैंकों पर ब्याज दरें बढ़ाने का दबाव नहीं रहेगा, जिससे मध्यम वर्ग का मासिक बजट संतुलित रहेगा। इसके अलावा, रियल एस्टेट और ऑटोमोबाइल जैसे प्रमुख क्षेत्रों में मांग बनी रहेगी, जिससे देश की आर्थिक गतिविधियों को गति मिलेगी।
आर्थिक विश्लेषकों का मानना है कि आरबीआई के इस फैसले से बाजार में निवेशकों का विश्वास मजबूत होगा। हालांकि, खाद्य वस्तुओं की कीमतों और मानसून के रुख पर केंद्रीय बैंक अपनी कड़ी नजर बनाए हुए है। यदि आने वाले महीनों में महंगाई दर और नीचे आती है, तो भविष्य में ब्याज दरों में कटौती की संभावना का मार्ग भी प्रशस्त हो सकता है।
Patrakar Priyanshi Chaturvedi
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