Patrakar Priyanshi Chaturvedi
ईरान में युद्ध के बाद वैश्विक तेल बाजार में आई तेजी से दुनिया की छह सबसे बड़ी तेल कंपनियों ने अप्रैल से जून के बीच संयुक्त रूप से 81 अरब डॉलर (करीब 7.7 लाख करोड़ रुपये) का मुनाफा कमाया। यह राशि भारत के वार्षिक रक्षा बजट से भी अधिक बताई जा रही है। युद्ध शुरू होने के समय कच्चे तेल की कीमत करीब 70 डॉलर प्रति बैरल थी, जो बढ़कर 120 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई। तेल की कीमतों में इस उछाल का असर दुनिया भर में महंगाई पर भी देखने को मिला, क्योंकि ईंधन महंगा होने से परिवहन और आवश्यक वस्तुओं की लागत बढ़ी।
इस बीच पश्चिम एशिया से जुड़े घटनाक्रम भी तेजी से बदल रहे हैं। यमन के पास लाल सागर में भारतीय ध्वज वाले एक कारोबारी जहाज पर हमला हुआ, हालांकि उसमें सवार सभी 13 भारतीय नागरिकों को सुरक्षित बचा लिया गया। वहीं, ईरान में विदेश मंत्री अब्बास अराघची के खिलाफ महाभियोग लाने की तैयारी की खबरें सामने आई हैं, जबकि राष्ट्रपति मसूद पजशकियान की निर्णय लेने की भूमिका सीमित होने की भी चर्चा है। दूसरी ओर, अमेरिका और ईरान के बीच संभावित समझौते की उम्मीद बढ़ने से अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट दर्ज की गई और ब्रेंट व डब्ल्यूटीआई क्रूड दोनों के दाम नीचे आए।
Patrakar Priyanshi Chaturvedi
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