आदिवासी छात्रावासों में डेढ़ करोड़ की रोटी मेकर मशीनें बेकार, गैस-बिजली खर्च बढ़ने से बंद हुआ उपयोग
Roti-making machines , tribal hostels, electricity costs

मध्य प्रदेश के खंडवा जिले में जनजातीय कार्य विभाग के छात्रावासों और आश्रमों के लिए खरीदी गई करीब डेढ़ करोड़ रुपये की रोटी मेकर मशीनें उपयोग के अभाव में कबाड़ बनती जा रही हैं। जनजातीय कार्य मंत्री विजय शाह के गृह जिले के 56 छात्रावासों में करीब 10 महीने पहले गुजरात की एक कंपनी ने ये मशीनें उपलब्ध कराई थीं, ताकि कम समय में बड़ी संख्या में रोटियां तैयार की जा सकें। हालांकि तकनीकी और व्यावहारिक दिक्कतों के चलते अधिकांश छात्रावासों में इनका उपयोग बंद कर दिया गया है और मशीनें स्टोर रूम में धूल फांक रही हैं। कई जगहों पर मशीनों के ऊपर अन्य सामान रखा है और लंबे समय से इस्तेमाल न होने के कारण उनके तार व उपकरण भी खराब होने लगे हैं।

छात्रों और रसोई कर्मचारियों का कहना है कि मशीन से बनी रोटियां स्वाद और गुणवत्ता में हाथ से बनी रोटियों जैसी नहीं होतीं, इसलिए बच्चे उन्हें पसंद नहीं करते। वहीं मशीन चलाने में गैस और बिजली की खपत भी अधिक होती है, जिससे रसोई का खर्च बढ़ गया है। अधीक्षकों का कहना है कि सीमित बजट में मशीनों का संचालन संभव नहीं है, इसलिए पारंपरिक तरीके से तवे पर रोटियां बनाई जा रही हैं। हालांकि प्रभारी सहायक आयुक्त डॉ. नारायण सिंह ने कहा कि मशीनें पूरी तरह बंद नहीं हैं और उपयोग की स्थिति की जांच कराई जाएगी। उन्होंने माना कि कुछ अधीक्षकों ने समीक्षा बैठक में गैस की अधिक खपत की समस्या जरूर बताई है।

 
 
Priyanshi Chaturvedi 2 August 2026

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