करगिल के रणबांकुरे की कहानी, शादी के 9 दिन बाद मोर्चे पर पहुंचे और तोलोलिंग में दिखाई वीरता
Kargil war, his wedding , displayed valour , Tololing.

करगिल विजय दिवस पर सेना से सेवानिवृत्त हो रहे सूबेदार मेजर ऑनरी लेफ्टिनेंट बृजेश कुमार ने 1999 के युद्ध की यादें साझा कीं। उन्होंने बताया कि 9 फरवरी 1999 को विवाह के केवल नौ दिन बाद, 18 फरवरी को उन्हें कुपवाड़ा में पोस्टिंग का आदेश मिला और वे मातृभूमि की रक्षा के लिए घर छोड़कर ड्यूटी पर रवाना हो गए। कुछ ही महीनों बाद करगिल युद्ध शुरू हुआ और उनकी यूनिट को द्रास सेक्टर भेजा गया। 11 जून 1999 की रात भारतीय जवानों ने तोलोलिंग की दुर्गम पहाड़ी पर चढ़ाई करते हुए दुश्मन से आमने-सामने की लड़ाई लड़ी और पाकिस्तानी सैनिकों को बंकरों से बाहर निकालकर मार गिराया।

 

बृजेश कुमार ने बताया कि सुबह तक पहाड़ी पर 48 पाकिस्तानी सैनिकों के शव पड़े थे, लेकिन इस जीत की बड़ी कीमत भी चुकानी पड़ी। कंपनी कमांडर मेजर विवेक गुप्ता समेत आठ भारतीय जवान वीरगति को प्राप्त हुए। उन्होंने कहा कि तिरंगा फहराने की खुशी के साथ-साथ साथियों को खोने का दर्द आज भी याद है। उन्होंने कहा कि करगिल युद्ध ने सिखाया कि भारतीय सैनिक देश की रक्षा के लिए अपने प्राणों की भी परवाह नहीं करता। 26 जुलाई को मनाया जाने वाला करगिल विजय दिवस इसी अदम्य साहस और सर्वोच्च बलिदान को श्रद्धांजलि देने का दिन है।

Priyanshi Chaturvedi 26 July 2026

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