Patrakar Priyanshi Chaturvedi
जिले में 1189 अति कुपोषित बच्चे अब भी कुपोषण से जंग लड़ रहे हैं, जबकि पोषण पुनर्वास केंद्रों की व्यवस्थाओं पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। अधिकारियों की कमजोर मॉनिटरिंग और विभागों के बीच समन्वय की कमी के कारण कई जरूरतमंद बच्चों को समय पर पुनर्वास केंद्रों तक नहीं पहुंचाया जा पा रहा है। आठ पोषण पुनर्वास केंद्रों में उपलब्ध बेड के मुकाबले केवल 101 बच्चे भर्ती हैं। खंडवा जिला अस्पताल के 20 बेड वाले केंद्र में 16 और छैगांव माखन के 10 बेड वाले केंद्र में केवल 6 बच्चे भर्ती मिले, जबकि कुछ केंद्रों में क्षमता से अधिक बच्चों को रखने के लिए अतिरिक्त बेड लगाने पड़े।
स्वास्थ्य विभाग के अनुसार आदिवासी बहुल खालवा क्षेत्र में सबसे अधिक 281 अति कुपोषित बच्चे हैं, इसके बाद पंधाना, पुनासा और अन्य क्षेत्रों का स्थान है। वहीं जिला अस्पताल स्थित पोषण पुनर्वास केंद्र में बच्चों के खेल उपकरणों पर बेडशीट और चादरें सुखाए जाने का मामला भी सामने आया है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह की लापरवाही से कमजोर प्रतिरोधक क्षमता वाले बच्चों में संक्रमण का खतरा बढ़ सकता है। ऐसे में पोषण पुनर्वास केंद्रों की व्यवस्था और निगरानी को प्रभावी बनाने की आवश्यकता महसूस की जा रही है।
Patrakar Priyanshi Chaturvedi
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