मध्य प्रदेश सरकार ने समान नागरिक संहिता (UCC) का प्रारंभिक ड्राफ्ट तैयार कर लिया है और इसे अंतिम रूप देने से पहले कुछ महत्वपूर्ण प्रावधानों पर मंथन जारी है। सूत्रों के अनुसार, राज्य सरकार आदिवासी समुदायों की तरह घुमंतू, अर्ध-घुमंतू और घुमक्कड़ जातियों को भी यूसीसी के दायरे से बाहर रखने पर विचार कर रही है। इन समुदायों की जीवनशैली, स्थायी निवास की कमी और सामाजिक परिस्थितियों को देखते हुए यह प्रस्ताव तैयार किया गया है।
जानकारों के मुताबिक, इन समुदायों के कई परिवार आज भी स्थायी पते, आवश्यक दस्तावेजों और सरकारी योजनाओं के लाभ से वंचित हैं। यही कारण है कि उनके सामाजिक और पारंपरिक ढांचे को ध्यान में रखते हुए उन्हें विशेष छूट देने पर विचार किया जा रहा है। इससे पहले राज्य सरकार आदिवासी समुदायों को यूसीसी से बाहर रखने का संकेत भी दे चुकी है, क्योंकि उनकी पारंपरिक रीति-रिवाजों को विशेष संरक्षण प्राप्त है।
हालांकि सरकार मानसून सत्र में यूसीसी विधेयक लाने की तैयारी कर रही है, लेकिन इसकी संभावना कम मानी जा रही है। उच्च स्तरीय समिति का कार्यकाल 26 जुलाई 2026 तक बढ़ा दिया गया है, जबकि विधानसभा का मानसून सत्र 24 जुलाई को समाप्त होगा। सूत्रों के अनुसार, ड्राफ्ट का बड़ा हिस्सा गुजरात मॉडल पर आधारित है, जिसमें विवाह, तलाक, उत्तराधिकार, भरण-पोषण, बच्चों की अभिरक्षा और लिव-इन रिलेशनशिप जैसे पारिवारिक मामलों के लिए समान कानूनी व्यवस्था का प्रस्ताव शामिल है।