Patrakar Priyanshi Chaturvedi
मध्य प्रदेश का स्कूल शिक्षा विभाग वर्ष 2005 से 2009 के बीच भर्ती हुए करीब 70 हजार शिक्षकों को शिक्षक पात्रता परीक्षा (TET) से छूट दिलाने के लिए एक बार फिर सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाने की तैयारी कर रहा है। विभाग का तर्क है कि इन शिक्षकों का चयन पहले ही सरकार द्वारा आयोजित भर्ती परीक्षा के माध्यम से हुआ था, इसलिए उन्हें दोबारा पात्रता परीक्षा देने के लिए बाध्य करना उचित नहीं है। विधि विभाग और कानूनी विशेषज्ञों से राय लेने के बाद राज्य सरकार एक सप्ताह के भीतर नई याचिका दायर कर सकती है।
सुप्रीम कोर्ट के सितंबर 2025 के आदेश के बाद प्रदेश के स्कूल शिक्षा और जनजातीय कार्य विभाग के वर्ष 1998 से 2009 के बीच नियुक्त लगभग डेढ़ लाख शिक्षकों के लिए TET अनिवार्य कर दिया गया था। अदालत ने स्पष्ट किया था कि पांच वर्ष से अधिक सेवा पूरी कर चुके शिक्षकों को परीक्षा उत्तीर्ण करनी होगी, जबकि ऐसा न करने पर अनिवार्य सेवानिवृत्ति का प्रावधान लागू हो सकता है। हालांकि, कोर्ट ने शिक्षकों को राहत देते हुए TET पास करने की अंतिम तिथि 31 अगस्त 2028 तक बढ़ा दी है।
स्कूल शिक्षा विभाग का मानना है कि वर्ष 2005-09 में नियुक्त शिक्षकों का चयन व्यापमं की भर्ती परीक्षा के जरिए हुआ था, इसलिए उनके मामले को अलग आधार पर देखा जाना चाहिए। हालांकि, विभागीय अधिकारियों का यह भी कहना है कि सुप्रीम कोर्ट पहले ही इस मुद्दे पर 65 से अधिक पुनर्विचार याचिकाएं खारिज कर चुका है, इसलिए राहत की संभावना सीमित है। इसके बावजूद शिक्षकों के हितों को ध्यान में रखते हुए राज्य सरकार कानूनी प्रयास जारी रखने के पक्ष में है।
Patrakar Priyanshi Chaturvedi
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