Patrakar Priyanshi Chaturvedi
कर्मचारी भविष्य निधि (EPF) के 64 वर्ष पुराने नियमों में प्रस्तावित बदलावों को लेकर देशभर के कर्मचारी संगठनों ने विरोध तेज कर दिया है। संगठनों का आरोप है कि कर्मचारी भविष्य निधि योजना-2026 के नए प्रावधान कर्मचारियों की तुलना में उद्योगपतियों और नियोक्ताओं के हित में अधिक हैं। उनका कहना है कि इन बदलावों से करीब 8 करोड़ कर्मचारियों और कामगारों के सेवानिवृत्ति कोष पर असर पड़ेगा, जबकि इसका अप्रत्यक्ष प्रभाव लगभग 30 करोड़ लोगों पर पड़ सकता है। इसी मुद्दे पर राष्ट्रीय स्तर पर विरोध प्रदर्शन की तैयारी भी शुरू हो गई है।
कर्मचारी संगठनों का कहना है कि नई व्यवस्था में कर्मचारियों को भविष्य निधि में 12 प्रतिशत से कम अंशदान देने का विकल्प मिलने की बात कही जा रही है, जिससे तत्काल हाथ में अधिक वेतन मिलने का दावा किया जा रहा है। लेकिन उनका तर्क है कि इससे भविष्य निधि में जमा होने वाली राशि कम होगी और सेवानिवृत्ति के समय मिलने वाला फंड भी घट जाएगा। उनका कहना है कि मौजूदा व्यवस्था में कर्मचारी और नियोक्ता दोनों 12-12 प्रतिशत अंशदान करते हैं, जिससे कर्मचारियों की दीर्घकालिक वित्तीय सुरक्षा सुनिश्चित होती है।
संगठनों ने आरोप लगाया कि प्रस्तावित बदलावों से कर्मचारियों के सामाजिक सुरक्षा लाभ कमजोर होंगे और इसका फायदा मुख्य रूप से उद्योगों एवं नियोक्ताओं को मिलेगा। उनका कहना है कि वर्तमान ईपीएफ व्यवस्था वर्षों से कर्मचारियों के हितों की रक्षा करती आई है और इसमें किसी भी बदलाव से पहले सभी पक्षों से व्यापक चर्चा की जानी चाहिए। कर्मचारी संगठन जल्द ही इस मुद्दे पर देशव्यापी आंदोलन की रूपरेखा तय करने की बात भी कह रहे हैं।
Patrakar Priyanshi Chaturvedi
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