दिग्विजय सिंह के बयान पर कांग्रेस में घमासान, राहुल गांधी से कार्रवाई की मांग
मध्य प्रदेश कांग्रेस में पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह के एक बयान को लेकर आंतरिक विवाद खुलकर सामने आ गया है। उज्जैन के वीर भारत न्यास को एक रुपये में 500 करोड़ रुपये की जमीन दिए जाने के मामले में प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष के आरोपों को गलत बताए जाने के बाद पार्टी के कई वरिष्ठ नेताओं ने दिग्विजय सिंह के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। पूर्व केंद्रीय मंत्री अरुण यादव, पूर्व मंत्री सज्जन सिंह वर्मा और प्रदेश महासचिव निधि सत्यव्रत चतुर्वेदी समेत कई नेताओं ने इसे संगठन के लिए नुकसानदायक बताते हुए कांग्रेस नेतृत्व से हस्तक्षेप और अनुशासनात्मक कार्रवाई की मांग की है। इससे पहले प्रवीण पाठक और आरिफ मसूद भी उनके बयान का विरोध कर चुके हैं।
विवाद के बीच कांग्रेस की गुटबाजी भी खुलकर सामने आ गई है। नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने दिग्विजय सिंह से उनके आवास पर मुलाकात की, जिसे लेकर राजनीतिक चर्चाएं तेज हो गई हैं। वहीं अरुण यादव ने सोशल मीडिया पर राहुल गांधी को संबोधित करते हुए कहा कि पार्टी के समर्पित कार्यकर्ताओं का मनोबल तोड़ने की कोशिश की जा रही है। सज्जन सिंह वर्मा ने भी कहा कि कांग्रेस को बाहरी विरोधियों से ज्यादा नुकसान पार्टी के भीतर ऐसे लोगों से हो रहा है, जो संगठन के हितों के खिलाफ काम कर रहे हैं।
प्रदेश महासचिव निधि चतुर्वेदी ने दिग्विजय सिंह पर अपने बेटे जयवर्धन सिंह को आगे बढ़ाने के लिए पार्टी अनुशासन की अनदेखी करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि सार्वजनिक रूप से प्रदेश अध्यक्ष के रुख का विरोध करना विपक्ष को राजनीतिक लाभ पहुंचाने जैसा है। फिलहाल दिग्विजय सिंह ने इस पूरे विवाद पर कोई प्रतिक्रिया नहीं दी है, जबकि उनके समर्थक उनके बचाव में सामने आए हैं। इस घटनाक्रम ने मध्य प्रदेश कांग्रेस के भीतर बढ़ते मतभेदों और संगठनात्मक चुनौतियों को एक बार फिर उजागर कर दिया है।