अजित पवार नहीं रहे तो क्या महाराष्ट्र की सरकार संकट में आएगी?
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महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री अजित पवार राज्य की राजनीति के सबसे असरदार नेताओं में गिने जाते हैं। बीते दो दशकों में उन्होंने सत्ता और संगठन दोनों स्तरों पर मजबूत पकड़ बनाई है। ऐसे में यदि किसी कारणवश वे अचानक राजनीति के परिदृश्य से बाहर होते हैं, तो यह निश्चित रूप से भावनात्मक और राजनीतिक रूप से बड़ा झटका होगा। हालांकि सवाल यह है कि क्या इससे मौजूदा बीजेपी-नेतृत्व वाले गठबंधन की सरकार पर सीधा खतरा पैदा होगा।

 

राजनीतिक गणित पर नज़र डालें तो मौजूदा विधानसभा में बीजेपी सबसे बड़ी पार्टी है और एकनाथ शिंदे की शिवसेना उसके साथ मजबूती से खड़ी है। एनसीपी (अजित पवार गुट) गठबंधन का हिस्सा ज़रूर है, लेकिन सरकार का संख्याबल केवल उसी पर निर्भर नहीं है। ऐसे में अजित पवार के न रहने की स्थिति में भी सरकार गिरने की आशंका कम मानी जाती है, बशर्ते सहयोगी दलों में बड़े पैमाने पर टूट न हो।

 

बीजेपी के लिए यह स्थिति प्रशासनिक रूप से चुनौतीपूर्ण ज़रूर हो सकती है, लेकिन सत्ता के लिहाज़ से घातक नहीं। एनसीपी में नेतृत्व परिवर्तन या आंतरिक खींचतान हो सकती है, पर सरकार की स्थिरता पर इसका सीमित असर पड़ेगा। कुल मिलाकर, अजित पवार का जाना महाराष्ट्र की राजनीति में एक युगांतकारी घटना हो सकती है, लेकिन मौजूदा हालात में इससे बीजेपी की सरकार गिरने की संभावना बेहद कम है।

Priyanshi Chaturvedi 28 January 2026

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