भारत आना घर लौटने जैसा, अंतरिक्ष में सहयोग जरूरी: सुनीता विलियम्स
New Dehli , India ,  returning home, cooperation , space, necessary: ​​Sunita Williams

भारतीय मूल की अमेरिकी एस्ट्रोनॉट सुनीता विलियम्स ने दिल्ली के अमेरिकन सेंटर में आयोजित सेमिनार ‘आंखें सितारों पर, पैर जमीन पर’ में कहा कि भारत आना उन्हें घर वापसी जैसा लगता है, क्योंकि उनके पिता गुजरात के झूलासन गांव से थे। उन्होंने कहा कि आज दुनिया में अंतरिक्ष को लेकर एक नई स्पेस रेस चल रही है, लेकिन लक्ष्य सिर्फ पहले पहुंचना नहीं, बल्कि चांद और अंतरिक्ष में सुरक्षित, टिकाऊ और लंबे समय तक रहने लायक व्यवस्था बनाना होना चाहिए। यह काम सहयोग, पारदर्शिता और लोकतांत्रिक तरीके से होना चाहिए, ताकि पूरी मानवता को इसका लाभ मिले, ठीक अंटार्कटिका मॉडल की तरह।

 

चांद पर जाने के सवाल पर सुनीता ने मजाकिया अंदाज में कहा कि वह चंद्रमा पर जाना चाहती हैं, लेकिन उनके पति शायद इजाजत नहीं देंगे। उन्होंने कहा कि अब अगली पीढ़ी को अंतरिक्ष खोज में आगे बढ़ने का समय है। अंतरिक्ष से धरती को देखने के अनुभव पर उन्होंने कहा कि वहां से पृथ्वी को देखकर लगता है कि हम सब एक हैं और हमें मिलकर काम करना चाहिए। उन्होंने यह भी बताया कि पिछले एक दशक में अंतरिक्ष में बढ़ता कचरा एक बड़ी चुनौती बन गया है, जिसे संभालने के लिए नई तकनीक की जरूरत है।

 

60 वर्षीय सुनीता विलियम्स हाल ही में NASA से 27 साल की सेवा के बाद रिटायर हुई हैं। उन्होंने तीन मिशनों में कुल 608 दिन अंतरिक्ष में बिताए और 9 स्पेसवॉक किए, जो किसी भी महिला एस्ट्रोनॉट में सबसे ज्यादा हैं। 2024 में उनका 8 दिन का मिशन तकनीकी कारणों से 9 महीने से ज्यादा लंबा हो गया था। भारत दौरे के दौरान उन्होंने दिवंगत एस्ट्रोनॉट कल्पना चावला की मां और बहन से भी मुलाकात की और भावुक पल साझा किए, जिससे दोनों अंतरिक्ष यात्रियों के बीच गहरे रिश्ते की झलक मिली।

Dakhal News 21 January 2026

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