डिजिटल अरेस्ट पर केंद्र की सख़्ती: CBI–NIA समेत कई मंत्रालय जांच में शामिल
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डिजिटल अरेस्ट मामलों पर सुप्रीम कोर्ट में मंगलवार को सुनवाई होनी है। इससे पहले केंद्र सरकार ने कोर्ट में स्टेटस रिपोर्ट दाखिल करते हुए बताया कि इस तरह की साइबर ठगी के सभी पहलुओं की जांच के लिए गृह मंत्रालय ने एक हाई-लेवल इंटर-डिपार्टमेंटल कमेटी का गठन किया है। केंद्र ने मामले पर विस्तृत रिपोर्ट पेश करने के लिए सुप्रीम कोर्ट से एक महीने का समय भी मांगा है, ताकि देशभर में फैल रहे इस संगठित साइबर अपराध की गहराई से जांच की जा सके।

केंद्र के मुताबिक, इस कमेटी की अध्यक्षता गृह मंत्रालय के विशेष सचिव (आंतरिक सुरक्षा) कर रहे हैं। इसमें CBI, NIA, दिल्ली पुलिस के IG रैंक के अधिकारी और इंडियन साइबर क्राइम कोऑर्डिनेशन सेंटर (I4C) के सदस्य सचिव शामिल हैं। इसके अलावा इलेक्ट्रॉनिक्स एवं आईटी मंत्रालय, दूरसंचार विभाग, विदेश मंत्रालय, वित्तीय सेवा विभाग, विधि एवं न्याय मंत्रालय, उपभोक्ता मामले मंत्रालय और RBI के संयुक्त सचिव स्तर के अधिकारी भी कमेटी का हिस्सा हैं, ताकि तकनीकी, कानूनी और वित्तीय सभी पहलुओं पर समन्वित कार्रवाई हो सके।

गौरतलब है कि 16 दिसंबर 2025 को सुप्रीम कोर्ट ने डिजिटल अरेस्ट जैसे मामलों में पीड़ितों को मुआवजा दिलाने के लिए केंद्र को ठोस कदम उठाने के निर्देश दिए थे। हरियाणा के एक बुजुर्ग दंपति की शिकायत पर स्वतः संज्ञान लेते हुए कोर्ट ने कहा था कि फर्जी पुलिस, कोर्ट आदेश और जजों के नाम का इस्तेमाल कर की जा रही ठगी न केवल आर्थिक अपराध है, बल्कि न्यायपालिका पर जनता के भरोसे पर सीधा हमला है। इसके बाद से सुप्रीम कोर्ट लगातार देशव्यापी स्तर पर ऐसे गिरोहों के खिलाफ सख़्त कार्रवाई की जरूरत पर जोर दे रहा है।

Priyanshi Chaturvedi 13 January 2026

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