Patrakar Priyanshi Chaturvedi
वेनेजुएला में अमेरिकी सैन्य कार्रवाई और राष्ट्रपति निकोलस मादुरो की गिरफ्तारी के दावों के बाद लैटिन अमेरिकी देशों में तीखी नाराज़गी देखने को मिल रही है। चिली, क्यूबा और कोलंबिया ने अमेरिका की इस कार्रवाई की कड़ी निंदा की है। रिपोर्टों के मुताबिक अमेरिकी डेल्टा फोर्सेज ने काराकास समेत कई इलाकों में ऑपरेशन चलाकर मादुरो को हिरासत में लिया और न्यूयॉर्क पहुंचाया। अमेरिका का दावा है कि मादुरो पर नार्को-टेररिज्म के आरोप हैं और उन्हें फेडरल कोर्ट में पेश किया जाएगा। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने संकेत दिया है कि मुकदमा न्यूयॉर्क के बजाय मियामी या फ्लोरिडा के किसी अन्य शहर में भी चलाया जा सकता है।
इधर, अमेरिकी कार्रवाई के खिलाफ लैटिन अमेरिका में विरोध तेज हो गया है। क्यूबा के राष्ट्रपति मिगुएल डियाज़-कैनेल ने हवाना में रैली कर अमेरिका के खिलाफ नारे लगाए और वेनेजुएला के साथ एकजुटता दिखाई। चिली के राष्ट्रपति गैब्रियल बोरिक ने चेतावनी दी कि आज वेनेजुएला निशाने पर है, कल कोई और देश हो सकता है। कोलंबिया के राष्ट्रपति गुस्तावो पेट्रो ने भी अमेरिका पर लोकतंत्र को कमजोर करने का आरोप लगाया। वहीं वेनेजुएला की उपराष्ट्रपति डेल्सी रोड्रिगेज ने इस कार्रवाई को सत्ता परिवर्तन की साजिश बताते हुए कहा कि अमेरिका देश के तेल और प्राकृतिक संसाधनों पर कब्जा करना चाहता है, जबकि वेनेजुएला के वैध राष्ट्रपति निकोलस मादुरो ही हैं।
Patrakar Priyanshi Chaturvedi
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