Patrakar Priyanshi Chaturvedi
ओंकारेश्वर में गणगौर पर्व पारम्परिक उत्साह के साथ मनाया गया ... भक्तों की भीड़ ढोल ढ़माके ... बाजे गाजे के साथ गणगौर माता की जय घोष लगाते हुए बाड़ी स्थल पहुंची और जवारो का पूजन किया ..
ओकारेश्वर में गणगौर माता की बाड़ी खुलते ही भक्तों की भीड़ उमड़ने लगी ... ब्रह्म मुहूर्त से बाड़ी स्थान भक्त गणगौर माता का जय कारा लगाते हुए पूजा अर्चना करते रहे रहे ... ओंकारेश्वर के ब्रह्मपुरी ,विष्णुपुरी , शिवपुरी क्षेत्र में अनादि काल से गणगौर माता की बाड़ी बोई जा रही है ... दोपहर को बड़ी संख्या में लोग रथ में बारात लेकर रानू बाई को लेने पहुंचें .. सभी रथो में ब्राह्मणों द्वारा बोय गए जवारो की टोकरियों का विशेष रूप से श्रृंगार किया गया था ... धनियर राजा और रनु बाई के रथों को महा निर्वाणि अखाडे लाया गया ... जहाँ परंपरागत रूप से महन्त कैलाश भारती द्वारा पूजा अर्चना कर सभी रथ नर्मदा के तट पर भेजे गए ...ओंकारेश्वर में माता का मायका माना जाता है ... इसलिए एक दिन पहले माता के जाग बोए जाते हैं तथा दूज को माता पाठ होता है ...
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