विशेष

भोपाल। प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ और कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष कमलनाथ ने बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस सरकार द्वारा किसानों की ऋण माफी पर पहले दिन से ही मुख्यमंत्री शिवराज सिंह और कांग्रेस छोडक़र भाजपा में गए ज्योतिरदित्य सिंधिया झूठ बोलते रहे हैं। इस झूठ की राजनीति का पर्दाफाश स्वयं शिवराज सरकार ने कल विधानसभा में कर दिया है और स्वीकार किया कि प्रदेश में प्रथम और द्वितीय चरण में कांग्रेस की सरकार ने 51 जिलों में 26 लाख 95 हजार किसानों का 11 हजार 6 सौ करोड़ रुपये से अधिक का ऋण माफ किया है। उन्होंने सीएम शिवराज और सिंधिया से माफी मांगने की मांग करते हुए कहा कि प्रदेश की जनता से सफेद झूठ बोलने और गुमराह करने की घृणित राजनीति के लिए शिवराज सिंह और ज्योतिरादित्य सिंधिया को तत्काल प्रदेश की जनता से माफी मांगना चाहिए ।    कमलनाथ ने मंगलवार को जारी अपने एक बयान में कहा कि ग्वालियर दौरे के दौरान मैंने मुख्यमंत्री शिवराज सिंह को किसानों की ऋण माफी के मुद्दे पर खुली बहस करने की चुनौती दी थी। वे इस मुद्दे पर खुली बहस करते, उसके पहले ही उनकी सरकार ने विधानसभा में स्वीकार कर लिया कि कांग्रेस सरकार ने 26 लाख 95 हजार किसानों का ऋण माफ किया था और स्वीकृति की प्रकिया में शेष पांच लाख नब्बे हजार किसानों की संख्या को भी स्वीकार किया है, जिसकी स्वीकृति मेरी सरकार के समय की जा रही थी। पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि सदन के पटल पर जो सच्चाई भाजपा सरकार ने स्वीकार की है, इससे  शिवराज सिंह व भाजपा की झूठ की राजनीति का पर्दाफाश हो चुका है और मेरे द्वारा पहले दिन से ही किसान ऋण माफी की जो संख्या और सूची दी जा रही थी, वह अंतत: सच साबित हुई है।   कमलनाथ ने कहा कि मैं शुरू से ही यह कहता आ रहा हूं कि भाजपा चाहे जितना झूठ बोल ले लेकिन जो सच्चाई है, वह इस प्रदेश की जनता जानती है और हमारे किसान भाई इसके गवाह हैं। इसी सच्चाई को सदन में भाजपा सरकार के कृषि मंत्री ने लिखित में स्वीकार भी किया है। इस सच्चााई को स्वीकार करने के बाद शिवराज सरकार को शेष किसानों की ऋण माफी की प्रक्रिया को शीघ्र शुरू करना चाहिये। उन्होंने कहा कि विधानसभा में जो बहाना ऋण माफी योजना की समीक्षा का बनाया गया है, वह यह बताता है कि भाजपा और शिवराज सिंह किसानों के विरोधी हैं। कांग्रेस सरकार ने ऋण माफी की जो योजना बनाई थी, वह पूर्णत: विचार विमर्श के बाद ही तैयार की गई थी, जिसकी समीक्षा करने की कोई गुंजाइश नहीं बचती है। शिवराज सरकार कोई समय-सीमा भी बताने को तैयार नहीं है, इससे यह स्पष्ट होता है कि वे किसानों की कर्ज माफी करना ही नहीं चाहते।   पूर्व मुख्यमंत्री ने तंज कसते हुए कहा कि किसानों के साथ हमेशा से भाजपा छलावा करती रही है। उनके वोट पाने के लिए झूठे सब्जबाग दिखाकर भाजपा को किसानों को धोखा दिया है। यही कारण है कि मध्यप्रदेश में भाजपा सरकार में इतनी बड़ी संख्या में किसान आत्महत्या को मजबूर हुए। उन्होंने कहा कि हाल ही में संसद में गैर संवैधानिक तरीके से जो कृषि विधेयक पास हुए है, उससे भी स्पष्ट हो गया है कि भाजपा मूलत: किसान विरोधी है, वह किसानों का भला नहीं चाहती है।

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Dakhal News 22 September 2020

भोपाल। किसानों से जुड़े बिल को लेकर विपक्ष विरोध का रूख अपनाए हुए है। विपक्ष का विरोध इस बिल को लेकर कम होने का नाम नहीं ले रहा। वहीं दूसरी ओर राज्यसभा से निलंबित आठ सांसदों का मामला भी तूल पकड़ चुका है। निलंबित सांसद सोमवार से संसद परिसर के गांधी प्रतिमा के पास धरने पर बैठे हुए हैं। राज्यसभा में कांग्रेस के हंगामे पर प्रदेश के गृृहमंत्री नरोत्तम मिश्रा ने कटाक्ष किया है।   मंत्री नरोत्तम मिश्रा ने मंगलवार को मीडिया से बातचीत करते हुए कहा कि कृषि बिल संशोधन पर राज्यसभा में कांग्रेस सांसदों के हंगामे पर कहा कि संसद में पारित किए गए कृषि सुधार के नए कानून को लेकर एक बार फिर कांग्रेस का दोहरा चरित्र सामने आया है, ऐसा ही जीएसटी के समय में भी था। इस संबंध में कपिल सिब्बल के भाषण का वायरल हो रहा वीडियो इसका स्पष्ट उदाहरण है। उन्होंने कहा कि पीएम मोदी ने स्पष्ट कहा है कि किसानों की आय दोगुनी करनी है। देश की सबसे बड़ी आबादी किसान की है, पीएम ने जो कदम उठाया है वो राष्ट्रहित में है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी किसानों की आय बढ़ाने के लिए कृतसंकल्पित हैं।   सचिन और प्रियंका पर साधा निशाना इस दौरान उपचुनाव में कांग्रेस के लिए सचिन पायलट और प्रियंका गांधी के ग्वालियर- चंबल में प्रचार में उतरने पर मंत्री मिश्रा ने कहा कि कांग्रेस किसी को भी बुला सकती है। जनता समझ चुकी है कि कांग्रेस के पास ना नेता है और न नीयत।   छिंदवाड़ा में एसडीएम के साथ हुई घटना दुर्भाग्यपूर्ण छिंदवाड़ा में एसडीएम के साथ हुई घटना के बाद एसडीएम और तहसीलदार की हड़ताल पर गृह मंत्री नरोत्तम मिश्रा ने कहा कि एसडीएम के साथ जो हुआ दुर्भाग्यपूर्ण था, कांग्रेस को इस तरह के दुराग्रह से बचना चाहिए। कांग्रेस पर तंज कसते हुए उन्होंने कहा कि आज विपक्ष में आने पर कांग्रेस की हालत खिसियानी बिल्ली खंभा नोचे जैसी हो गई है। कांग्रेस के लोगों को ऐसा अमर्यादित आचरण नहीं करना चाहिए।  

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Dakhal News 22 September 2020

राजनीति

भोपाल। मध्यप्रदेश में एक बार फिर बारिश का दौर शुरु हो गया है। बंगाल की खाड़ी में बने निम्नदाब के क्षेत्र के कारण प्रदेश के अधिकतर जिलों में बारिश हो रही है। मंगलवार सुबह से झाबुआ और भोपाल समेत कई जिलों में झमाझम बारिश का दौर जारी है। मौसम विभाग ने मंगलवार को कई जिलों में अति भारी और भारी बारिश की चेतावनी जारी की है। विभाग ने आज एक साथ येलो और ऑरेंज अलर्ट जारी किया है। मौसम विभाग ने 10 संभागों और करीब एक दर्जन जिलों में गरज चमक के साथ भारी बारिश की चेतावनी जारी की है। इसी के चलते देर रात तवा डेम के 3 गेट खोल दिए गए है। वही अन्य बांधों के गेट खोलने की संभावना है। वरिष्ठ मौसम वैज्ञानिक अजय शुक्ला के मुताबिक बंगाल की खाड़ी में कम दबाव का क्षेत्र बन गया है, जिसके चलते प्रदेश में तीन-चार दिन तक अच्छी बरसात होने की संभावना है। मंगलवार को रीवा, शहडोल, जबलपुर, सागर संभाग में कई स्थानों पर भारी वर्षा हो सकती है। इंदौर, उज्जैन, होशंगाबाद, भोपाल संभाग के जिलों में गरज-चमक के साथ तेज बौछारें पड़ सकती हैं। वही ग्वालियर चंबल संभाग में मंगलवार को मध्यम बारिश का दौर शुरू होने के आसार है। 23 सितंबर को ग्वालियर, मुरैना, भिंड, दतिया, शिवपुरी, श्योपुर, गुना, अशोकनगर में कहीं कहीं भारी बारिश भी हो सकती है। इसके प्रभाव से धीरे-धीरे बारिश की गतिविधियों में वृद्धि देखने को मिलेगी। मध्य प्रदेश के पूर्वी तथा मध्य क्षेत्रों में कम से कम 25 सितंबर तक कई जगहों पर मध्यम से भारी मॉनसूनी वर्षा होती रहेगी। 24 सितंबर के बाद आसमान साफ हो जाएगा। उसके बाद मानसून की विदाई की शुरुआत हो जाएगी।   तवा डेम के तीन गेट खोले इटारसी और आसपास के क्षेत्रों में देर रात फिर मॉनसून सक्रिय हो गया जिसके कारण बीती रात को दो बजे, तवाडेम के तीन गेटों को तीन-तीन फीट पर खोला गया है। हजार क्यूसेक पानी नर्मदा नदी में छोड़ा जा रहा, वहीं तवाडेम का जल स्तर 1,166 फीट है। बारिश हो जाने से जहां तापमान में भी गिरावट दर्ज की गई जिससे लोगों को भीषण गर्मी और उमस से राहत मिली है, लेकिन इस बारिश ने किसानों की सोयाबीन और धान की फसल को लेकर चिंता बढ़ा दी है। तवा डेम के तीन गेटों से पानी छोड़े जाने के बाद नर्मदा नदी के जलस्तर में बढ़ोतरी दर्ज की गई है। फिलहाल डेम का वॉटर लेवल 1,166 फीट पर है, वहीं एसडीओ ने बताया कि बारिश से डेम से एचईजी को बिजली बनाने के लिए 20 हजार क्यूसेक पानी दिया जा रहा है।   इन जिलों में अति भारी बारिश की चेतावनी (ऑरेंज अलर्ट)शहडोल संभाग के जिले,  विदिशा, बालाघाट, रायसेन जिलों में।इन जिलों में भारी बारिश की चेतावनी (येलो अलर्ट)सागर और होशंगाबाद संभाग के जिले, रीवा , सतना, सीहोर, राजगढ, अलीराजपुर, झाबुआ, धार, देवास, शाजापुर, अशोकनगर।   इन संभागों में कही गरज चमक के साथ बारिशरीवा, जबलपुर, शहडोल, भोपाल, उज्जैन, इंदौर, होशंगबाद,सागर, ग्वालियर और चंबल संभागों के जिलों में कहींं-कहींं।

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Dakhal News 22 September 2020

भोपाल। कमलनाथ सरकार में मंत्री रहे कांग्रेस विधायक सचिन यादव सरकार पर जमकर बरसे। उन्होंने मंगलवार को प्रदेश कांग्रेस कार्यालय में एक पत्रकार वार्ता को संबोधित करते हुए प्रदेश सरकार पर अनैतिक तरीके से सरकार के बनाने और किसान ऋण माफी को लेकर झूठ बोलने के आरोप लगाए। सचिन यादव ने कहा कि प्रदेश की 8 करोड़ जनता कि किस तरह प्रदेश में अनैतिक संसाधनों से बहुमत बनाकर बनी सरकार पहले दिन से ही किसान फसल ऋण माफी योजना को लेकर जनता के साथ झूठ बोल रही है। पहले यह कहा गया कि कोई कर्ज ही माफ नहीं किया गया। फिर कहा गया 2 लाख तक का माफ नहीं किया, फिर कहा गया 2 रुपये चार रुपये किया गया। फिर बोले 10 दिन में नहीं किया गया। लगातार झूठ बोलते बोलते जनता को गुमराह करने की सरकार कोशिश करती रही लेकिन सच तो किसान जानते थे।   सचिन यादव ने कहा कि कमलनाथ बार बार इसीलिये कहते थे उन्हें भाजपा के सर्टिफिकेट की जरूरत नहीं, जनता के सर्टिफिकेट की जरूरत है। आपको अच्छी तरह याद होगा कि प्रदेश के किसान कल्याण मंत्री कमल पटेल घोषणा करते रहे कि कमलनाथ सरकार ने किसानों के साथ धोखा किया झूठे ऋण माफी प्रमाण पत्र बांटे गए और यह भी कि कमल पटेल कमलनाथ जी के खिलाफ एफ आई आर दर्ज कराएंगे। भाजपा के झूठ और मिथ्याचरण के खिलाफ जब कमलनाथ ने ग्वालियर की सभा में शंखनाद किया और शिवराज सिंह को खुली चुनौती दी कि एक मंच पर आकर शिवराज अपनी 15 साल की सरकार का हिसाब दें और मैं 15 महीने की सरकार का एक-एक दिन का हिसाब देने तैयार हूं। इस चुनौती के बाद फिर से शिवराज सिंह ने आगरा और सुवासरा की सभाओं में अपने नियमित झूठ को दोहराया।   सचिन यादव ने कहा कि सभी जानते हैं कि सत्य कभी पराजित नहीं होता भारत की चेतन संस्कृति में विश्वास करने वाले करोड़ों अरबों लोग जानते हैं और मानते हैं कि 'सत्यमेव जयते'। सत्य की जीत होती है। उन्होंने कहा कि प्रदेश की विधानसभा के ताजा सत्र में किसान कल्याण मंत्री कमल पटेल ने जो एफआईआर करने का दम भरते थे। खुद विधानसभा के पटल पर स्वीकार किया कि कमलनाथ जी की सरकार ने प्रथम चरण में 2023136 किसानों का 7108 करोड़ का कर्ज माफ किया दूसरे चरण में 672245 किसानों का 4538 करोड़ माफ करने की स्वीकृति दी गई एवं 590848 किसानों का 7492 करोड़ स्वीकृति हेतु शेष है। अब भाजपा सरकार ने अधिकृत रूप से कर्जमाफी को स्वीकार कर लिया है।   उन्होंने कहा कि लोग कितने झूठे हैं और राजनीति में झूठ के माध्यम से जनता में भ्रम फैलाने की कुटिल राजनीति करते हैं। सच को जानते हुए भी लगातार झूठ पर झूठ बोलते जाते हैं विधानसभा सभा के मानस पटल पर रखी गई, यह जानकारी इस बात की गवाह है। विगत 6 माह से बोला गया झूठ आज मंत्री कमल पटेल के मुंह से ही धूल चाट रहा है, मुख्यमंत्री शिवराज सिंह एवं उनके नेता बार-बार यही कहते रहे हैं कि केवल जिन क्षेत्रों में उपचुनाव है वहीं- वहीं के ऋण माफ किए गए हैं। विधानसभा के पटल पर रखी गई जानकारी के अनुसार यह झूठ-2 भी बेनकाब हो गया। स्वयं सरकार और किसान कल्याण मंत्री ने विधानसभा में पूरे 51 जिलों की ऋण माफी की सूची भी जारी की है इससे यह स्पष्ट हो गया है कि भाजपा और उसके नेता जनता से सच बोलने से परहेज करते हैं। आपके संदर्भ के लिए विधानसभा में दिए गए उत्तरों की छाया प्रति हम आपको दे रहे हैं। जो यह सिद्ध करेंगे की छल से सरकार बनाने वाले अब छल और छद्म से सरकार बचाना चाहते हैं। जिसे शिवराज जी के कृषि कल्याण मंत्री ने ही बेनकाब कर दिया। प्रधानमंत्री किसान बीमा योजना के संबंध में भी सरकार सच सामने नहीं आने देना चाहती यह पोल भी केंद्र सरकार ने खोल ही दी है।   सचिन यादव ने आरोप लगाते हुए कहा कि भाजपा के 15 साल के शासन में 18 हजार किसानों ने आत्महत्या की थी, किसानों की छाती पर गोलियां दागीं गईं। कांग्रेस पार्टी फिर प्रदेश के किसानों को आश्वस्त करती है कि सरकार में वापिस आते ही शेष किसानों के कर्ज माफ कर दिये जायेंगे। किसानों के खिलाफ आ रहे अध्यादेशों को प्रदेश में बिना किसानों की सहमति लागू नहीं होने देगी। प्रदेश को सैकड़ों साल पुरानी जमींदारी की जकडऩ हम नहीं आने देंगे। उन्होंने कहा कि कांग्रेस मांग करती है कि शेष किसानों का ऋण शिवराज सरकार माफ करे और समय सीमा भी बताये।

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Dakhal News 22 September 2020

मीडिया

बेहद दुखदायी ख़बर मिल रही है। दैनिक भास्कर से जुड़े रहे और वर्तमान में प्रजातंत्र अखबार इंदौर में कार्यरत पत्रकार मनोज बिनवाल का कोरोना के कारण निधन हो गया है। मनोज का इलाज एक सुपर स्पेशिएलटी हास्पिटल में चल रहा था। मनोज के निधन से मीडियाकर्मी स्तब्ध हैं। सभी ने ईश्वर से कामना की, दुखी शोक संतप्त परिवार को दुख सहने की शक्तिप्रदान करें!   दैनिक भास्कर के डीबी संस्करण के मध्यप्रदेश में  संपादक रहे मनोज बिनवाल का कोरोना उपचार के दौरान निधन से अब वो मीडियाकर्मी भी कोरोना से सतर्क हो गए हैं जो इसे हल्के में ले रहे थे और लगातार बाहर निकल रहे थे। श्री बिनवाल ने हाल ही में प्रजातन्त्र अखबार जॉइन किया था. वे गुजरात, राजस्थान में भी अपनी सेवाएं दे चुके हैं. उन्हें चरक अस्पताल में कोविड-19 से संक्रमित होने के बाद भर्ती किया गया था. मृत्यु से दो दिन पहले  कोविड केयर सुपर हास्पिलिटी सेंटर में दाखिल किया गया था. बताया जा रहा है कि बिनवाल के माता-पिता भी संक्रमित हैं  

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Dakhal News 21 September 2020

-निरंजन परिहार अगर वह किसी हिंदी सिनेमा का कोई सीन होता, और वे इतने ही दमदार तरीके से बोलतीं, तो लोग हर डायलॉग पर तालियां बजाते, वाह वाह करते और खुश हो जाते। क्योंकि वे अभिनय बहुत अच्छा कर लेती हैं। जीवन भर किया भी तो वहीं है। सो, जया बच्चन सुपर हिट हो जाती। लेकिन बात थी जमाने की परवाह न करनेवाले सिनेमा में नशे को कारोबार की, और जगह थी संसद, जहां पर जो कह दिया, वही दर्ज हो जाता है इतिहास में। संसद में फिल्मों की तरह रीटेक के अवसर नहीं होते। यह वे जानती थीं। इसीलिए जमकर बोलीं। लेकिन बोलने पर बवाल मच गया। क्योंकि जिंदगी कोई सिनेमा नहीं है, जहां पटकथा के पात्रों को पढ़े पढ़ाए डायलॉग पर जीना होता है। यहां तो लोग खुलकर खेलते हैं, बोलते हैं और अभिव्यक्ति की आजादी के नाम पर गालियां तक परोस देते हैं, जो कि जया बच्चन को सोशल मीडिया पर मिल भी खूब रही हैं। जया बच्चन ने संसद में कहा कि बॉलीवुड को बदनाम करने की साजिश चल रही है। कुछ लोग जिस थाली में खाते हैं, उसमें ही छेद करते हैं। ये गलत बात है। मनोरंजन उद्योग के लोगों को सोशल मीडिया के माध्यम से बदनाम किय़ा जा रहा है। उनकी तकलीफ यही थी कि बॉलीवुड को बदनाम नहीं किया जाना चाहिए। जया बच्चन के कहने का अर्थ यही था कि सिनेमा के निष्पाप लोगों को अचानक गुनाहगार साबित किया जा रहा है। लेकिन संसद में यह कहते वक्त जया बच्चन शायद यह भूल गई थी कि सिनेमा के कलाकारों को तो अपनी बदनामी की असल में कोई चिंता ही नहीं होती। अगर होती, तो क्या वे फिल्में हिट करवाने के लिए खुद को बदनाम करने के नुस्खे ढूंढते ? खुद ही खुद के खिलाफ षड़यंत्र फैलाते ? और खुद ही खुद की इज्जत की भद्द पिटवाने की कारस्तानियां करते ? सो, ऐसे फिल्मवालों की क्या तो इज्जत और क्या ही उनकी बदनामी की चिंता। संसद में जया जब सोशल मीडिया के उलाहने दे रही थीं, तो उन्हें इस बात का कतई अंदेशा नहीं था कि वही सोशल मीडिया उनके लिए सनसनाता जबाव लेकर बाहर तैयार खडा मिलेगा। कंगना रणौत ने सोशल मीडिया पर ही उनसे पूछा – ‘जयाजी, क्‍या आप तब भी यही कहतीं अगर मेरी जगह पर आपकी बेटी श्‍वेता को किशोरावस्था में पीटा गया होता, ड्रग्‍स दिए गए होते और शोषण होता। क्‍या आप तब भी यही कहतीं अगर अभिषेक एक दिन फांसी से झूलते पाए जाते? थोड़ी हमदर्दी हमसे भी दिखाइए।‘ जाहिर है कंगना के इस सवाल का सीधा, सरल, सहज और सामान्य सा जवाब माननीय सांसद महोदया के पास हो ही नहीं सकता। कंगना के बाद तो बॉलीवुड सहित देश भर में जया बच्चन के विरोध और समर्थन में जो स्वर उठने लगे, उनमें उनके प्रति आभार के मुकाबले गालियां और गोलियां बहुत ज्यादा हैं। जया बच्चन के खिलाफ यह गुबार इसलिए भड़क रहा है, क्योंकि सिनेमा जगत में ड्रग्स की असलियत से अच्छी तरह वाकिफ होने के बावजूद जया बच्चन संसद में जो बोली, उसमें कितना सच था और कितना झूठ, यह वे खुद भी जानती है। यह सच है कि ‘सिलसिला’, ‘शोले’, ‘गुड्डी’, ‘अभिमान’, ‘जंजीर’ और ऐसी ही ढेर सारी फिल्मों में गजब का अभिनय करने वाली जया बच्चन आजकल बडे पर्दे पर कुछ खास नहीं कर पा रही हैं, लेकिन संसद में वे अभिनय जैसा ही कुछ करने में जबरदस्त कामयाब रही हैं। उन्हें सिनेमा के संसार की उड़ रही इज्जत की चिंता है। लेकिन सिनेमा खुद अपनी इज्जत की परवाह न करते हुए कोकीन, स्मैक और हेरोइन के धुएं में अपनी इज्जत उडाने को हर पल बेताब दिखता है और ड्रग्स की पार्टियां करता है। जया बच्चन चाहे कहे कुछ भी, लेकिन जानती वे भी हैं कि सिनेमा के संसार में सबसे ज्यादा नशेड़ी बसते हैं, और अक्सर वहीं से, किसी न किसी कलाकार के नशीले धुंए में धंसे होने की गंध आती रहती है। फिर भी वही सिनेमा, जया बच्चन की नजरों में दूध का धुला है, किसी हवन की आहुति से प्रज्वलित ज्वाला सा पवित्र है और सूरज की किरणों से निकली चमक सा पावन है। उसे कैसे कोई बदनाम करने की जुर्रत कर सकता है। सो, जया ने कहा, बॉलीवुड को बदनाम करने की साजिश चल रही है। कुछ लोग जिस थाली में खाते हैं, उसमें ही छेद करते हैं। ये गलत बात है। कायदे से देखें, तो बीजेपी के सांसद रविकिशन ने तो ऐसा कुछ कहा भी नहीं था, जिस पर जया बच्चन इतना बवाल मचाती। उल्टे जया बच्चन को तो रविकिशन समर्थन करना चाहिए था। क्योंकि उन्होंने तो पाकिस्तान और चीन से ड्रग्स की तस्करी रोकने और फिल्म उद्योग में इसके सेवन को लेकर नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो की जांच का मुद्दा उठाया था और इस दिशा में कड़ी कार्रवाई की मांग की थी। लेकिन वे तो भड़क उठीं। उसके उलट आश्चर्यजनक रूप से अमिताभ बच्चन चुप हैं। एकदम चुप। वे अकसर कई ज्वलंत विषयों पर ब्लॉग लिखते हैं। लेकिन फिल्म जगत में बहुत दिनों से हो रहे बवाल पर कुछ नहीं बोले। माना जा रहा है कि अमिताभ की बात उनकी पत्नी जया बच्चन ने कह दी है। वह भी सीधे संसद में। इसीलिए जया के साथ अमिताभ भी निशाने पर है। सोशल मीडिया में दोनों को लेकर जबरदस्त विरोध के स्वर सुलग रहे हैं। हर छोटे – बड़े मामले पर भी मुखर होकर अपना मत व्यक्त करनेवाले अमिताभ का राम मंदिर के शिलान्यास पर कुछ नहीं बोलना भी सोशल मीडिया में मुद्दा बना हुआ है और जया बच्चन का तो विरोध हो ही रहा है। जय़ा के जवाब में रवि किशन ने कहा है कि जिस थाली में जहर हो उसमें छेद करना ही पड़ेगा। और भी बहुत कुछ कहा जा रहा है। तो. अब शायद अमिताभ भी सोच रहे होंगे कि कभी कभी किसी मुद्दे पर न बोलना, बोलने के मुकाबले बहुत बेहतर होता है। (लेखक राजनीतिक विश्लेषक हैं)

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Dakhal News 17 September 2020

समाज

धार। जिले का धामनोद थाना क्षेत्र में इंदौर से मुम्बई जा रही एक निजी ट्रैवल्स की स्लीपर कोच बस में बीती देर रात जोरदार धमाके के साथ अचानक आग लग गई। धमाके की आवाज सुनकर बस के सभी यात्री अपने सामान के साथ नीचे उतर गए, लेकिन तब तक बस धू-धूकर जलने लगी। सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और धामनोद से दमकल की गाडिय़ां बुलाकर आग पर काबू पाया। इस हादसे में कोई जनहानि नहीं हुई है, लेकिन बस पूरी तरह जलकर खाक हो गई। पुलिस ने मामले को जांच में लिया है।   जानकारी के अनुसार, निजी ट्रेवल्स की बस क्रमांक एमपी-04, पीए 3778 रविवार रात इंदौर से यात्रियों को लेकर मुंबई के लिए रवाना हुई थी। कोरोना के चलते बस में कम यात्री सवार थे और रात होने के कारण वे बस में आराम से सो रहे थे। रात करीब साढ़े 11 बजे के करीब बस धामनोद नगर के बाहर दूधी तिराहे स्थित मधुबन होटल के पास पहुंची थी, तभी स्पीड ब्रेकर पार करते समय अचानक जोरदार धमाके की आवाज आई और बस में आग लग गई। धमाके की आवाज सुनकर बस में सो रहे यात्री जाग गए और अपने सामान के साथ नीचे उतर गए, लेकिन तब तक आग पूरी बस में फैल गई और बस धू-धू कर जलने लगी। यात्रियों ने तत्काल पुलिस और फायर ब्रिगेड को सूचना दी। सूचना मिलते ही पुलिस और दमकल की गाडिय़ां मौके पर पहुंची और कड़ी मशक्कत के बाद आग पर काबू पाया, लेकिन तब तक बस का अगला हिस्सा पूरी तरह जल चुका था। धामनोद पुलिस के अनुसार, इस हादसे में कोई जनहानि नहीं हुई है। यात्रियों को दूसरी बस से अपने गंतव्य की ओर रवाना कर दिया है और फिलहाल पुलिस मामले की जांच कर रही है।

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Dakhal News 21 September 2020

भोपाल। आज से मध्यप्रदेश में एक बार फिर झमाझम बारिश का दौर शुरु होने वाला है। बंगाल की खाड़ी में एक कम दबाव का क्षेत्र बनने की संभावना है, इस वजह से 21-22 सितंबर को बारिश का एक और दौर फिर शुरू होने के आसार हैं। हालांकि वातावरण में नमी के चलते दिन में उमस और गर्मी हो रही है, लेकिन शाम होते होते कई दिनों से कई जिलों में गरज चमक के साथ बौछारों का सिलसिला जारी है।   वरिष्ठ मौसम वैज्ञानिक अजय शुक्ला के मुताबिक मध्य प्रदेश के दक्षिण पश्चिमी भागों में बारिश की गतिविधियां 24 घंटों के बाद कम होने लगेंगी और अगले तीन-चार दिनों तक जहां पूर्वी तथा मध्य भागों में कई जगहों पर अच्छी वर्षा होती रहेगी। वहीं पश्चिमी क्षेत्रों में गुना से लेकर इंदौर, उज्जैन, रतलाम, देवास, धार, मंदसौर तक मौसम मुख्यत: शुष्क रहने की संभावना है। बारिश के आगामी स्पैल के दौरान सबसे ज़्यादा प्रभावित होने वाले जिले होंगे पूर्वी मध्य प्रदेश के जबलपुर, मंडला, बालाघाट, कटनी, सागर, सतना, पन्ना, छतरपुर, खजुराहो और भोपाल।   क्या कहता है मौसम विभागमौसम विभाग की माने तो बंगाल की खाड़ी में सिस्टम बना है। हिमालय की तराई में पहुंच गई मानसून द्रोणिका के फिर वापस लौटने की संभावना है। इस वजह से 21-22 सितंबर को बारिश का एक और दौर फिर शुरू होने के आसार हैं। बंगाल की खाड़ी में कम दबाव का क्षेत्र बनने से दो दिन बाद बरसात की गतिविधियों में तेजी आएगी। मौसम विभाग की माने तो अगले 24 घंटों के दौरान मध्य प्रदेश के दक्षिण पश्चिमी जिलों में वर्षा होने की संभावना है। उसके बाद बारिश की गतिविधियां बढऩे के आसार हैं क्योंकि बंगाल की खाड़ी पर एक डिप्रेशन बनने वाला है। इसके प्रभाव से धीरे-धीरे बारिश की गतिविधियों में वृद्धि देखने को मिलेगी। मध्य प्रदेश के पूर्वी तथा मध्य क्षेत्रों में कम से कम 25 सितंबर तक कई जगहों पर मध्यम से भारी मॉनसूनी वर्षा होती रहेगी।   इन संभागों में गरज चमक के साथ बौछारेरीवा, जबलपुर, शहडोल, भोपाल, उज्जैन, इंदौर, होशंगबाद,सागर, ग्वालियर और चंबल संभागों के जिलों में कही कही।   इन जिलों में गरज चमक के साथ बिजली गिरने की संभावना सागर, रीवा, जबलपुर, सतना, उमरिया जिलों में।

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Dakhal News 21 September 2020

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अभिनेता सुशांत सिंह राजपूत सुसाइड केस में ड्रग्स एंगल सामने आने के बाद बॉलीवुड में हर दिन किसी न किसी सेलिब्रेटी का नाम सामने आ रहा हैं। दीपिका पादुकोण, विक्की कौशल, करण जौहर के बाद अब इस मामले में अभिनेत्री दीया मिर्जा का भी नाम सामने आया है। ड्रग्स मामले में दीया मिर्जा का नाम सामने आने के बाद अभिनेत्री ने सोशल  मीडिया पर एक बयान जारी किया है। अपने इस पोस्ट में दीया ने ड्रग मामले में अपना नाम आने पर प्रतिक्रिया देते हुए इन आरोपों को गलत ठहराया है।   दीया ने इंस्टाग्राम पर पोस्ट शेयर कर लिखा-'मैंने जिंदगी में कभी ड्रग नहीं ली है। जो भी खबरें चल रही है पूरी तरह से झूठी है। इसके आधार पर मेरी छवि खराब करने की कोशिश हो रही है। मैं इस खबर को सिरे से खारिज करती हूं। क्योंकि यह गलत, निराधार और गलत इरादों के साथ किया जा रहा है।इस तरह की तुच्छ रिपोर्टिंग से मेरी प्रतिष्ठा पर सीधा प्रभाव पड़ रहा है। मेरे करियर को नुकसान पहुंच रहा है, जो मैंने सालों की मेहनत से बनाया है। मैंने अपने जीवन में  न तो कभी ड्रग्स खरीदा है और न ही इसका सेवन किया है। मैं कानूनी रास्ता अपनाऊंगी। मेरे साथ खड़े लोगों का धन्यवाद।'   ड्रग्स मामले में दीया मिर्जा का नाम सामने आने के बाद जहां कुछ लोग उन्हें ट्रोल कर रहे हैं,वहीं कुछ लोग दीया के समर्थन में भी है। सुशांत सिंह सुसाइड केस में ड्रग ऐंगल सामने आने के बाद से ही बॉलीवुड में हड़कंप सा मच गया है और हर दिन इस मामले में एक नया नाम सामने आ रहा है।वहीं दीया का नाम इस मामले में सामने आने के बाद कयास लगाए जा रहे हैं कि जल्द ही एनसीबी (नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो) दीया को इस मामले में पूछताछ के लिए समन भेज सकती है।

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Dakhal News 23 September 2020

  अभिनेत्री पायल घोष ने हाल ही में फिल्ममेकर अनुराग कश्यप पर यौन शोषण का आरोप लगाया है। साथ ही उन्होंने कई अभिनेत्रियों के साथ अनुराग के संबंध होने का भी दावा किया है। यहीं नहीं पायल ने कुछ हीरोइनों का नाम लेते हुए कहा कि उनके सम्बन्ध अनुराग कश्यप के साथ थे। इस मामले में अभिनेत्री ऋचा चड्ढा का भी नाम आया था। जिसके बाद ऋचा इस पर लीगल एक्शन लेने की तैयारी में हैं और उन्होंने एक आधिकारिक बयान भी जारी किया था। वहीं अब अभिनेत्री हुमा कुरैशी ने भी पायल के आरोपों को गलत बताया है।    दरअसल पायल ने जिन लोगों का नाम लेते हुए उनके अनुराग के साथ सम्बन्ध होने का दावा किया है उनमें से एक नाम हुमा कुरैशी का भी है। हुमा कुरैशी ने पायल के इन आरोपों को गलत बताते हुए ट्विटर पर एक पोस्ट शेयर कर अनुराग का समर्थन किया है। अपने इस पोस्ट में हुमा ने लिखा-'मैंने और अनुराग ने 2012-13 में साथ काम किया था। वह अच्छे दोस्त और अनुभवी डायरेक्टर हैं। मेरे व्यक्तिगत अनुभव और मेरी जानकारी में उन्होंने मुझसे या किसी और के साथ कभी कोई गलत व्यवहार नहीं किया। हालांकि जो भी ये दावा करता है कि उसके साथ गलत हुआ उसे अथॉरिटीज, पुलिस और न्यायालय में रिपोर्ट करनी चाहिए। मैंने अब तक कॉमेंट नहीं किया क्योंकि मैं सोशल मीडिया के झगड़ों और मीडिया ट्रायल्स में यकीन नहीं रखती।'   सोशल मीडिया पर हुमा के इस पोस्ट पर कई सेलिब्रिटी अपनी प्रतिक्रिया देते हुए उनका समर्थन कर रहे हैं। मीटू के आरोपों के बीच घिरे अनुराग कश्यप को बॉलीवुड से कई लोगों का समर्थन मिल रहा हैं।  

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Dakhal News 22 September 2020

दखल क्यों

अनिल निगम   राजनीतिक दल सोची-समझी रणनीति के तहत किसानों से संबंधित तीन कानूनों का विरोध कर रहे हैं। इनका सबसे बड़ा विरोध इस बात को लेकर था कि सरकार ने न्यूनतम समर्थन मूल्य को समाप्त कर दिया है। अकाली दल की नेत्री हरसिमरत बादल का केन्द्रीय मंत्री पद से इस्तीफा एक राजनीतिक चाल है। अकाली दल पंजाब में अपने घटते जनाधार से बेहद चिंतित है। इसलिए उन्होंने इस इस्तीफे से पंजाब के किसानों को ये संदेश देने की कोशिश की है कि अकाली दल उनका हितैषी है।   पंजाब और हरियाणा किसानों के गढ़ हैं। सबसे ज्यादा फसल पंजाब में उगती है। कुछ पंजाबी किसान संगठनों ने इन तीनों कानूनों को किसान-विरोधी बताया है और वे इनके विरुद्ध आंदोलन चला रहे हैं। कुछ दूसरे प्रदेशों में भी विरोधी दलों के उकसावे पर किसानों ने धरना-प्रदर्शन किया अथवा ऐसा करने की योजना बना रहे हैं।   निस्संदेह, तीनों कानून किसानों को ज्यादा से ज्यादा फायदा पहुंचाने के लिए बनाए गए हैं। पहला कानून किसान का उत्पाद, व्यापार एवं विपणन, दूसरा- आवश्यक अधिनियम 1955 में संशोधन और तीसरा अधिनियम कॉन्ट्रैक्ट फार्मिंग पर बनाया गया है। पूर्व में प्रावधान था कि देश के किसान अपनी फसल बेचने के लिए अनिवार्य रूप से अपनी स्थानीय मंडियों में जाएं और दलालों-आढ़तियों की मदद से अपना खाद्यान्न बेचें। लेकिन अब उनके ऊपर से ये बाध्यता समाप्त हो जाएगी। अब वे अपना माल सीधे बाजार में ले जाकर बेच सकते हैं। कहने का आशय यह है कि किसानों के लिए अब पूरा देश खुल गया है। उनकी निर्भरता मंडियों और आढ़तियों पर खत्म हो जाएगी। जब किसान अपनी फसल स्थानीय मंडियों में बेचते थे तो उनको आढ़तियों या दलालों को कमीशन देना पड़ता था। लेकिन उक्त कानून लागू होने के बाद उनको न मंडी-टैक्स देना पड़ेगा और न ही आढ़तियों को कमीशन। चूंकि अब वे अपने माल को देश की किसी भी मंडी या व्यापारी को बेचने को स्वतंत्र होंगे, इसलिए उन्हें फसल की कीमतें ज्यादा मिलेंगी।   इसके बावजूद कुछ विपक्षी दलों ने किसानों को उकसाया कि नए कानून पूरी तरह से किसान विरोधी हैं और इससे किसानों का बहुत बड़ा नुकसान होने वाला है। तर्क दिया गया कि फसल अब औने-पौने दामों पर बिका करेगी, क्योंकि बाजार तो बाजार है। बाज़ार में दाम उठते-गिरते रहते हैं। परन्तु मंडियों में न्यूनतम समर्थन मूल्य मिलने से किसानों की अधिक सुरक्षा रहती है। किसानों के इस डर को केंद्रीय कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने संसद में दूर कर दिया। उन्होंने बताया कि किसानों को उनकी फसल का न्यूनतम मूल्य हर हाल में मिलेगा। इसको सरकार समाप्त नहीं करेगी।   भारत में आज भी 50 फीसदी से अधिक आबादी कृषि कार्य में लगी हुई है। लेकिन भारत की जीडीपी में कृषि का योगदान सिर्फ 18 फीसदी योगदान है। यह अत्यंत विचारणीय बिंदु है। पिछले वर्ष किए गए एक अध्ययन के मुताबिक भारत में 10.07 करोड़ किसानों में से 52.5 प्रतिशत कर्ज़ में दबे हुए हैं। वर्ष 2017 में एक किसान परिवार की कुल मासिक आय 8,931 रुपये थी। वास्तव में किसानों को अपने उत्पाद का सही मूल्य इसलिए नहीं मिल पाता क्योंंकि वे बिचौलियों की मर्जी पर निर्भर हैं। हर किसान को खुला बाजार मिलने से उन्हें अपना माल बेचने की आजादी होगी। दुर्भाग्यपूर्ण यह है कि कुछ राजनीतिक दल किसानों को एक पक्षीय तस्वीर दिखा रहे हैं।   सरकार की मंशा किसानों को उनकी उपज का अच्छा मूल्य दिलाने की है। यह कानून किसानों के लिए काफी फायदेमंद सिद्ध हो सकता है। हालांकि इस बात का खतरा जरूर है कि उनकी फसलों पर देश के बड़े पूंजीपति अग्रिम कब्जा कर बाजार में ज्यादा महंगा बेचने लगें। ऐसा भी संभव है कि वे किसानों को अग्रिम पैसा देकर फसलों की खरीददारी पहले ही सुनिश्चित कर लें। यह खतरा तो रहेगा। पर इसमें भी फायदा किसानों का ही होगा। इस नई व्यवस्था में किसानों का कोई अहित न होने पाए, इसके लिए सरकार एक सशक्त मॉनिटरिंग सिस्टम अवश्य बनाना चाहिए।     (लेखक स्वतंत्र टिप्पणीकार हैं।)  

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Dakhal News 23 September 2020

प्रमोद भार्गव भारत सरकार और राज्य सरकारें चिकित्साकर्मियों को कोरोना योद्धा का दर्जा दे रही हैं। इस सम्मान के वास्तव में वे अधिकारी हैं। अलबत्ता यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि संसद में जब समाजवादी पार्टी के सांसद रविप्रकाश वर्मा ने सवाल पूछा कि अबतक देश में कितने चिकित्सक और चिकित्साकर्मियों की मौतें हुई हैं तो इसके उत्तर में स्वास्थ्य राज्यमंत्री अश्विनी चौबे का उत्तर आश्चर्य में डालने वाला रहा। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार के पास कोरोना संक्रमण से प्राण गंवाने वाले चिकित्सकों के आंकड़े नहीं हैं, क्योंकि यह मामला केंद्र का विषय न होकर राज्य का विषय है। निश्चित ही यह विषय राज्य का है लेकिन इस कंप्युटर युग में राज्यों से आंकड़े जुटाना केंद्र के लिए कोई मुश्किल काम नहीं है। इसी तरह सरकार ने कोरोना काल में मृतक पुलिसकर्मियों और प्रवासी मजदूरों के आंकड़े देने में असमर्थता जता दी। हालांकि भारतीय चिकित्सा संगठन (आईएमए) ने अगले दिन कोरोना काल में सेवाएं देते हुए शहीद 382 चिकित्सकों की सूची जारी कर दी। आईएमए ने इन्हें त्याग की प्रतिमूर्ति और राष्ट्रनायक मानते हुए प्राण गंवाने वाले चिकित्सकों को शहीद और परिवार को मुआवजा देने की मांग भी की है। यह सूची 16 सितंबर 2020 तक कोरोना काल के गाल में समाए चिकित्सकों की है। कोरोना से शहीद हुए चिकित्सकों की इस सूची में केवल एमबीबीएस डॉक्टर हैं। इनके अलावा आयुर्वेद, होम्योपैथी और अन्य वैकल्पिक चिकित्सा से जुड़े डॉक्टर भी कोरोना की चपेट में आकर मारे गए हैं। अभीतक कुल 2238 एमबीबीएस चिकित्सक कोविड-19 से संक्रमित हो चुके हैं। चिकित्सकों के प्राणों का इस तरह से जाना, निकट भविष्य में चिकित्सकों की कमी और बढ़ा सकता है। इस सबके बावजूद स्वास्थ्यकर्मियों के हौसले पस्त नहीं हुए हैं। विपरीत परिस्थितियों में इलाज करना बहुत मुश्किल है लेकिन उनका उत्साह बरकरार है। जबकि अस्पतालों में विषाणुओं से बचाव के सुरक्षा उपकरण पर्याप्त मात्रा में नहीं हैं, बावजूद डॉक्टर जान हथेली पर रखकर इलाज में लगे हैं। यह विषाणु कितना घातक है, यह इस बात से भी पता चलता है कि चीन में फैले कोरोना वायरस की सबसे पहले जानकारी व इसकी भयावहता की चेतावनी देने वाले डॉ ली वेनलियांग की मौत हो गई। चीन के वुहान केंद्रीय चिकित्सालय के नेत्र विशेषज्ञ वेनलियांग को लगातार काम करते रहने के कारण कोरोना ने चपेट में ले लिया था। वेनलियांग ने मरीजों में सात ऐसे मामले देखे थे, जिनमें सॉर्स जैसे किसी वायरस के संक्रमण के लक्षण दिखे थे और इसे मनुष्य के लिए खतरनाक बताने वाला चेतावनी से भरा एक वीडियो भी सार्वजनिक किया था। भारत में वैसे भी आबादी के अनुपात में चिकित्सकों की कमी है। इसके बावजूद वे दिन-रात अपने कर्तव्य के पालन में जुटे हैं। दरअसल कोरोना वायरस संक्रमण से हमारे चिकित्सक और चिकित्साकर्मी सीधे जूझ रहे हैं। चूंकि ये सीधे रोगियों के संपर्क में आते है, इसलिए इनके लिए विशेष प्रकार के सूक्ष्म जीवों से सुरक्षा करने वाले बायो सूट और एन-5 मास्क पहनने को दिए जाते हैं। बायो सूट को ही पीपीई अर्थात व्यक्तिगत सुरक्षा उपकरण कहा जाता है। यह एक प्रकार का बरसात में उपयोग में लाए जाने वाले बरसाती जैसा होता है। किंतु लगातार काम करते रहने के दौरान अदृश्य कोरोना विषाणु कब स्वास्थ्कर्मियों को हमला बोल दे, इसका अहसास मुश्किल है। भारत में चिकित्सकों की असमय मौत इसलिए चिंताजनक है, क्योंकि विश्व स्वास्थ्य संगठन 1000 की आबादी पर एक डॉक्टर की मौजूदगी अनिवार्य मानता है, लेकिन भारत में यह अनुपात 0.62.10 है। 2015 में राज्यसभा को केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा ने बताया था कि 14 लाख ऐलौपैथी चिकित्सकों की कमी है। किंतु अब यह कमी 20 लाख हो गई है। इसी तरह 40 लाख नर्सों की कमी है। अबतक सरकारी चिकित्सा संस्थानों की शैक्षणिक गुणवत्ता और चिकित्सकों की कार्यप्रणाली पर सवाल उठते रहे हैं, लेकिन ध्यान रहे कि लगभग 60 प्रतिशत मेडिकल कॉलेज निजी क्षेत्र में हैं। कोरोना के इस भीषण संकट में सरकारी अस्पताल और मेडिकल कॉलेज दिन-रात रोगियों के उपचार में लगे हैं, लेकिन जिन निजी अस्पतालों और कॉलेजों को हम उपचार के लिए उच्च गुणवत्ता का मानते थे, उनमें से ज्यादातर की इस संकटकाल में तालाबंदी कर दी है। जिला और संभाग स्तर के अधिकांश निजी अस्पताल बंद रहे थे। हालांकि अब ये अस्पताल खुलने लगे हैं, लेकिन रोगी में कोरोना के लक्षण देखते ही उसे अस्पताल से बाहर का रास्ता दिखा देते हैं। एमसीआई द्वारा जारी 2017 की रिपोर्ट के अनुसार देश में 10.41 लाख ऐलोपैथी डॉक्टर पंजीकृत हैं। शेष या तो निजी अस्पतालों में काम करते हैं या फिर निजी प्रैक्टिस करते हैं। इसके उलट केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय की रिपोर्ट के अनुसार पंजीकृत ऐलोपैथी डॉक्टरों की संख्या 11.59 लाख है, किंतु इनमें से केवल 9.27 लाख डॉक्टर ही नियमित सेवा देते हैं। देश में फिलहाल 11082 की आबादी पर एक डॉक्टर का होना जरूरी है। लेकिन घनी आबादी वाले बिहार में 28,391 की जनसंख्या पर एक डॉक्टर है। उत्तर प्रदेश, झारखंड, मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ में भी हालात बहुत अच्छे नहीं है। यदि देश की कुल 1.35 करोड़ आबादी का औसत अनुपात निकालें तब भी 1445 लोगों पर एक ऐलोपैथी डॉक्टर होना आवश्यक है। कोरोना महामारी के चलते स्पष्ट देखने में आ रहा है कि देश के ज्यादातर निजी चिकित्सालय बंद हैं, साथ ही जो ऐलोपैथी डॉक्टर निजी प्रैक्टिस करते हैं, उन्होंने भी फिलहाल रोगी के लिए अपने दरवाजे बंद कर दिए हैं। ऐसे में केंद्र व राज्य सरकारों को इस कोरोना संकट से सबक लेते हुए ऐसे कानूनी उपाय करने होंगे कि बढ़ते निजी चिकित्सालयों और निजी प्रैक्टिस पर लागम लगे तथा सरकारी अस्पताल व स्वास्थ्य केंद्रों की जो श्रृंखला गांव तक है, उसमें चिकित्सकों व स्वास्थ्यकर्मियों की उपस्थित की अनिवार्यता के साथ उपकरण व दवाओं की मात्रा भी सुनिश्चित हो। (लेखक स्वतंत्र टिप्पणीकार हैं।)

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Dakhal News 23 September 2020

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