विशेष

भोपाल। कोरोना संक्रमण के कारण बेसहारा हुए परिवारों के लिए मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने बड़ा ऐलान किया है। उन्होंने कहा कोरोना महामारी ने कई परिवारों को तोड़ कर रख दिया है, कुछ ने अपने बुढ़ापे की सहारे की लाठी खोई है, कुछ ने पालकों की छाया खोई है। इसलिए हमने तय किया है कि ऐसे परिवारों को जिनके घर में आजीविकोपार्जन करने वाला कोई नहीं बचा उन्हे 5,000 रुपये प्रति माह पेंशन शासन द्वारा दी जाएगी। ऐसे बच्चों की शिक्षा का निशुल्क प्रबंध किया जाएगा। इन परिवारों को पात्रता न होने पर भी राशन उपलब्ध करवाया जाएगा। ऐसे परिवारों के सदस्यों को सरकार की गारंटी पर बिना ब्याज के काम-धंधे के लिए ऋण उपलब्ध करवाया जाएगा। ऐसे बच्चों और परिवारों का सहारा हम हैं, प्रदेश सरकार की है।   मुख्यमंत्री शिवराज ने कहा कि कोरोना संक्रमण से बेसहारा हुए एपरिवारों की चिंता हमारी है। राज्य सरकार बच्चों परिवारों की चिंता करेगी। बेसहारा परिवारों को पेंशन,निशुल्क राशन, नि:शुल्क शिक्षा जैसी सुविधाएं देगी। कोरोना महामारी के दौर में मध्यप्रदेश पहला राज्य बना है। सरकार ऐसे बच्चे जिनके परिवार से पिता, अभिभावक का साया उठ गया। घर में कोई कमाने वाला नहीं है। ऐसे परिवारों को 5000 प्रति माह पेंशन देगी। सीएम शिवराज ने कहा कि दुखी परिवारों को हम बेसहारा नहीं छोड़ सकते। उनका सहारा हम हैं प्रदेश की सरकार है। ऐसे बच्चों को भी चिंता करने की जरूरत नहीं है, वो प्रदेश के बच्चे हैं, प्रदेश उनकी देखभाल करेगा, प्रदेश उनकी चिंता करेगा।   सीएम ने कहा कि यदि ऐसे परिवार में कोई सदस्य ऐसा है या हमारी जिस बहन के पति नहीं रहे और वो कोई काम-धंधा करना चाहें तो सरकार की गारंटी पर बिना ब्याज के उन्हें ऋण उपलब्ध करवाया जायेगा, ताकि फिर से वे जीवन यापन के लिए अपना काम-धंधा प्रारंभ कर सकें।

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Dakhal News 13 May 2021

भोपाल। मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान गुरुवार, 13 मई को सामाजिक न्याय एवं नि:शक्तजन कल्याण विभाग की विभिन्न पेंशन योजनाओं में 50 लाख 20 हजार 979 हितग्राहियों को 301 करोड़ 25 लाख रुपये की पेंशन राशि वितरित करेंगे। सामाजिक न्याय एवं नि:शक्तजन कल्याण मंत्री प्रेमसिंह पटेल ने कहा है कि पेंशन योजनाओं के हितग्राहियों को राशि का हस्तांतरण ई-पेमेंट के माध्यम से किया जाएगा।   उक्‍त जानकारी देते हुए सुनीता दुबे ने बुधवार को बताया कि मंत्री पटेल ने कहा है कि मुख्यमंत्री चौहान सिंगल क्लिक ई-पेमेंट के माध्यम से सामाजिक सुरक्षा वृद्धावस्था पेंशन के 9 लाख 42 हजार 572 हितग्राहियों के खाते में 56 करोड़ 55 लाख रुपये, मुख्यमंत्री कल्याणी पेंशन के 13 लाख 14 हजार 532 हितग्राहियों को 78 करोड़ 87 लाख 19 हजार रुपये, सामाजिक सुरक्षा परित्यक्ता पेंशन के 34 हजार 675 हितग्राहियों को 2 करोड़ 8 लाख 5 हजार रुपये, सामाजिक सुरक्षा दिव्यांग पेंशन के 3 लाख 24 हजार 870 हितग्राहियों को 19 करोड़ 49 लाख 22 हजार रुपये, सामाजिक सुरक्षा शिक्षा प्रोत्साहन के 57 हजार 486 हितग्राहियों को 3 करोड़ 44 लाख 92 हजार रुपये, मुख्यमंत्री अविवाहिता पेंशन के 2 हजार 140 हितग्राहियों को 12 लाख 84 हजार रुपये और वृद्धाश्रम में निवासरत 246 वृद्धजनों को एक लाख 48 हजार रुपये की पेंशन राशि सिंगल क्लिक से उनके खातों में हस्तांतरित करेंगे।

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Dakhal News 12 May 2021

राजनीति

भोपाल। मप्र कांग्रेस मीडिया उपाध्यक्ष भूपेन्द्र गुप्ता ने पेट्रोल की बढ़ती कीमतों को लेकर सरकार पर निशाना साधा है। उन्होंने कहा है कि एक तरफ जनता कोरोना के हमले से बेजार जान बचाती फिर रही है। दूसरी तरफ नकली रेमडेसीविर बनाने वाले, ऑक्सीजन सिलेंडर की मुनाफाखोरी करने वाले डाकुओं से परेशान है। अस्पताल में बेड नहीं है, दवाई नहीं है, बिल चुकाने के लिए पैसे नहीं है। इन परेशानियों से बेजान जनता को अब पेट्रोल की बढ़ती कीमतों की आग में झोंक दिया सरकार ने। पेट्रोल सेंचुरी मार रहा है और भाजपा चियर लीडर्स की तरह डांस कर रही है।   भूपेंद्र गुप्ता ने कहा कि मध्यप्रदेश में  लगभग 2 लाख सक्रिय मरीज अस्पतालों में इलाज करा रहे हैं लगभग एक लाख मरीज घर से इलाज करा रहे हैं इनके परिजनों को अस्पताल जाना होता है दवा लेने जाना होता है। पेट्रोल की बढ़ी हुई कीमतों ने उनकी गाड़ी के पहिये बांध दिये हैं। लगातार बढ़ रही पेट्रोल की कीमतों की निंदा करते हुये कांग्रेस नेता ने कहा कि जब चुनावों में जनता को ठगने के लिये पेट्रोल डीजल की कीमतें स्थिर रख सकते हैं तो कोरोना त्रासदी में क्यों नहीं? इस समय पूरी दुनिया में कहीं भी पेट्रोल डीजल की कीमत नहीं बढ़ रही तो भारत में क्यों बढ़ रही है?    भूपेन्द्र गुप्ता ने कहा कि भाजपा के वक्तव्यवीर नेता किसानों के खाद बीज की कीमतों पर बयान क्यों नहीं देते। बतायें कि डीएपी की बोरी 1200 रुपये से सीधे 1900 रुपये कैसे हो गई है? क्या उसका समर्थन मूल्य भी 900 रुपये बढ़ाया है?

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Dakhal News 12 May 2021

भोपाल। खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण मंत्री बिसाहू लाल सिंह ने कहा कि हितग्राहियों को नि:शुल्क वितरित किए जाने वाले खाद्यान में दाल एवं खाद्य तेल के वितरण के लिए मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान से वे चर्चा करेंगे। मंत्री सिंह ने बुधवार को अंतरविभागीय गरीब कल्याण समूह की वर्चुअल बैठक में समिति के सदस्यों द्वारा हितग्राहियों को दिये जाने वाले खाद्यान्न के साथ दाल और तेल उपलब्ध करवाने के प्रस्ताव पर यह बात कही। बैठक में समिति के सदस्यों में नगरीय विकास मंत्री भूपेन्द्र सिंह, नवीन एवं नवकरणीय ऊर्जा मंत्री हरदीप सिंह डंग, पशुपालन मंत्री प्रेम सिंह पटेल एवं श्रम मंत्री महेन्द्र सिंह सिसौदिया भी वर्चुअली उपस्थित रहे।   मंत्री डंग ने कहा कि हितग्राहियों को गेहूँ एवं चावल के साथ एक किलो दाल भी वितरित की जाना चाहिए। उनकी बात का समर्थन करते हुए श्रम मंत्री महेन्द्र सिंह सिसौदिया ने कहा कि खाद्य तेल का आयात बाधित होने के कारण तेल की कीमतें लगभग दुगनी हो गई हैं। प्रदेश का गरीब तेल खरीदने की स्थिति में नहीं है। ऐसी स्थिति में गेहूँ, चावल, दाल के साथ खाद्य तेल भी हितग्राहियों को नि:शुल्क वितरित किया जाना चाहिए।   वास्तविक हितग्राही हों सुगमता से लाभान्वित प्रमुख सचिव खाद्य फैज़ अहमद क़िदवई ने बताया कि अंतर्विभागीय गरीब कल्याण समूह योजना में भारत सरकार द्वारा ऐसे व्यक्ति, जिन्हें सरकारी सहायता की आवश्यकता है, की पहचान के लिए गरीबी रेखा का निर्धारण किया गया है। निर्धनता का निर्धारण विभिन्‍न मापदण्डों के आधार पर किया गया है। निर्धनों के कल्याण के लिए संबंधित विभागों के आपसी समन्वय एवं सहभागिता के लिए अंतरविभागीय गरीब कल्याण समूह का गठन किया गया है।   अन्न योजना के हितग्राही परिवार प्रमुख सचिव किदवई ने बताया कि राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा के अंतर्गत दो प्रकार के हितग्राहियों को खाद्यान्न उपलब्ध कराया जा रहा है। इनमें पहला बीपीएल श्रेणी के एवं दूसरे हितग्राही प्राथमिकता श्रेणी के परिवार शामिल हैं। इनमें अंत्योदय परिवार के सदस्यों को एक माह में गेहूँ, चावल और मोटा अनाज एक रूपये प्रति कि.ग्रा. की दर से 35 कि.ग्रा. प्रति परिवार, एक रूपये प्रति कि.ग्रा. की दर से 20 किलो शक्कर प्रति परिवार, एक रूपये प्रति किलो नमक प्रति परिवार एवं 3 लीटर कैरोसीन 35 से 40 रूपये लीटर प्रति परिवार की दर से उपलब्ध कराया जा रहा है।   प्राथमिकता श्रेणी के परिवार किदवई ने बताया कि दूसरे हितग्राही प्राथमिकता श्रेणी के परिवारों को गेहूँ, चावल और मोटा अनाज प्रति परिवार 35 कि.ग्रा. एक रूपये प्रति किलो की दर से, एक कि.ग्रा. नमक एक रूपये प्रति किलो की दर से प्रति परिवार एवं कैरोसीन 35 से 40 रूपये प्रति लीटर की दर से एक लीटर प्रति परिवार उपलब्ध कराया जा रहा है। उन्होंने बताया कि उपरोक्त के अतिरिक्त कोरोना की दूसरी लहर में प्रत्येक हितग्राही को भारत सरकार की प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना में 5 किलो प्रति सदस्य, प्रति माह नि:शुल्क खाद्यान्न भी प्रदान किया जा रहा है। राज्य सरकार द्वारा कोरोना संक्रमण में हितग्राहियो को अप्रैल से जून तीन माह तक नियमित आवंटन का खाद्यान्न स:शुल्क के स्थान पर नि:शुल्क उपलब्ध कराया जा रहा है।

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Dakhal News 12 May 2021

मीडिया

उर्मिलेश-   एक हिंदी-पत्रकार के तौर पर अपने लगभग चालीस वर्ष के अनुभव और देश-विदेश के अपने भ्रमण से अर्जित समझ के आधार पर पिछले कुछ वर्षो से यह बात मैं लगातार कहता आ रहा हूं. उसे आज फिर दोहराऊंगा. इस महामारी में भी नये सिरे से इसे कहने की जरुरत है. हमारा साफ शब्दों में कहना है कि अब उत्तर भारत के हिंदी-भाषी इलाकों के गरीबों और उत्पीड़ित समाज के लोगों को अपने बच्चों को शुरू से ही अंग्रेजी में शिक्षित करने का प्रबंध करना चाहिए. खर्च में कटौती करना पडे तो भी बच्चों की अच्छी शिक्षा पर कोई समझौता नही कीजिये. सामाजिक, धार्मिक या सामुदायिक संगठनों को गांव-गांव ऐसे स्कूल खोलने चाहिए, जहां बच्चों को शुरु से ही अंग्रेजी में शिक्षित किया जा सके. बेशक, वे एक भाषा के तौर पर हिंदी भी पढें-समझें!   अपने को आपका हितैषी बताने वाले राजनीतिक दलों के बड़े नेताओं से भी यह सुनिश्चित कराइये कि वे सरकार में आने पर आपके बच्चों को भी अपने बच्चों की तरह अंग्रेजी में शिक्षा का प्रबंध करेंगे. हर चुनाव में आम लोग अपने नेताओं पर इसके लिए दबाव बनायें. याद रखिये, हर प्रमुख नेता(वह चाहे जिस जाति या धर्म का हो!) का बेटा अंग्रेजी मीडियम स्कूल में पढ़ा होता है या पढ़ रहा होता है.   इस महामारी(कोविड-19) के बाद जब हालात कुछ संभलेंगे तो अच्छी नौकरियां अंग्रेजी वालों को मिलेंगी और मजदूरी का काम हिंदी वालों को. अंग्रेजी के बगैर होम-डिलीवरी वाली कंपनियों की साधारण नौकरी भी नहीं मिलेगी. मामला सिर्फ नौकरी का नही है. सूचना, ज्ञान और विज्ञान की दुनिया से बेहतर परिचय के लिए भी अंग्रेजी का अच्छा ज्ञान ज़रूरी है. हिंदी में पढ़कर आपके बच्चे सूचना के लिए हिंदी उन अखबारों को पढ़ने और, टीवीपुरम् के कथित न्यूज़ चैनलों को देखने के लिए अभिशप्त होंगे, जिनका न्यूज़ की दुनिया से अब कोई वास्ता नहीं, वे सब एक अमानवीय सोच, एक जनविरोधी राजनीतिक धारा और कारपोरेट प्रोपगेन्डा के संगठित मंच भर हैं.   आपके बच्चे अगर फर्राटेदारअंग्रेजी नहीँ जानेंगे तो देश-विदेश के अपेक्षाकृत अच्छे मीडिया प्लेटफॉर्म का उपयोग नहीं कर सकेंगे. घटिया प्रोपगेन्डा के घटिया मंच उनके दिमाग में घटिया विचार इंजेक्ट करेंगे.   अब इस महामारी में ही देख लीजिये. हर जरूरी चीज का नाम अंग्रेजी में है: टीका का नाम सब भूल चुके हैं. अब उसे ‘हिंदी’, ‘हिंदू’ और ‘हिन्दुस्थान’ वाले भी ‘वैक्सीन’ कहते हैं. देश के हिंदी अखबारों में भी ‘वैक्सीन’ और ‘वैक्सीनेशन’ जैसे शब्द प्रयुक्त होते हैं. इसे वे ‘अप-मार्केट’ की भाषा ‘हिंग्लिश’ कहते हैं. फिर आपके बच्चे ऐसी घटिया भाषा क्यों बोलें? वे सीधे अंग्रेजी ही क्यों न बोलें? महामारी के बारे में हिंदी अखबारों में सार्थक और ज़रूरी खबरें बहुत कम छप रही हैं. हिंदी के न्यूज़ चैनल इतना सब सामने होता देखकर भी सरकारी भोंपू बने हुए हैं—पूरे के पूरे टीवीपुरम्! उनमें काम करने वाले भी ज्यादातर कुछ ही समुदायों के होते हैं.   विदेश के अंग्रेजी अखबार-न्यूज चैनल ही आज भारत का सच बताते दिख रहे हैं. अगर देश में यह काम कोई कर रहा है तो वे भारत की अंग्रेजी न्यूज़ वेबसाइट हैं. इनमें कुछ दो भाषाओं मे भी हैं. देश के कुछेक अंग्रेजी चैनलों के कुछेक एंकर और विश्लेषक भी अच्छे कार्यक्रम पेश कर रहे हैं. वेबसाइटों की पहुंच अभी हमारे यहां ज़्यादा नहीं है.   लेकिन यह बात सौ फीसदी सच है कि ज्ञान-विज्ञान का बड़ा खजाना अंग्रेजी मे है. हमारी सरकारों ने बीते 73 वर्षो में हिंदी को इस लायक बनाया ही नहीं. सरकारों के असल संचालक अंग्रेजी में सोचते और करते रहे, नेता हिंदी भाषी क्षेत्रों की गरीब और उत्पीड़ित जनता खो हिंदी के नाम पर बेवकूफ़ बनाते रहे!   आज गरीबों के बच्चे हिंदी में क्यों पढें? क्या तर्क हैहिंदी-वादियो के पास? क्या सिर्फ मजदूरी करने के लिए हिंदी में पढ़ें? रिक्शा या टेम्पो चलाने के लिए? या कुछ ‘शक्तिशाली लोगों’ के इशारे पर काम करने वाली दंगाइयो की भीड़ का हिस्सा बनने के लिए ?   इसलिए, हिंदी भाषी क्षेत्र के उत्पीड़ित समाजों के लोगों, अब आप अपने बच्चों को वैज्ञानिक, प्रोफेसर, रिसर्चर, समाज विज्ञानी, न्यायविद्, लेखक, आईआईटियन, कम्प्यूटर विज्ञानी और अंतरिक्ष विज्ञानी बनाने के लिए अंग्रेजी को उनकी शिक्षा का माध्यम बनाइये. पढ-लिखकर वे स्वयं भी बदलेंगे और अपने समाजों में बदलाव का प्रेरक भी बनेंगे.   इस बारे में हिंदी क्षेत्र के कुछ बुजुर्ग होते नेताओं या कुछ आत्ममुग्ध हिंदी लेखकों-बुद्धिजीवियों की फ़ालतू और बासी दलीलो से कन्फ्यूज होने की जरूरत नहीं है. यही न कि वो आपसे कहने आयेंगे कि आप अपनी प्यारी हिंदी छोड़कर अपने बच्चों को अंग्रेजी में शिक्षा क्यों दिलाने लगे? आप पूछियेगा उनसे, उनमें कितनों के बच्चे निगम या पंचायत संचालित हिंदी वाले स्कूलों में पढ़ते हैं? फिर वे आपको बेवजह हिंदी-भक्त क्यों बनाये रखना चाहते हैं?सोचिये और बदलिये, वरना बहुत देर हो जायेगी!

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Dakhal News 8 May 2021

बहुत ही दुखद खबर है। आजतक के चर्चित एंकर और राइट विंग पत्रकार रोहित सरदाना की मौत हो गई है।   बताया जा रहा है कि रोहित कोरोना से संक्रमित थे। मेट्रो अस्पताल नोएडा में भर्ती थे। डाक्टरों की देखरेख में उनका इलाज चल रहा था। अचानक इसी दौरान इन्हें हार्ट अटैक आ गया और बचाया न जा सका।   रोहित के निधन की सूचना मिलते ही आजतक में मातम फैल गया है। किसी को इस मौत को लेकर यक़ीन नहीं हो रहा है।       कुछ प्रतिक्रियाएं देखें-   सुधीर चौधरी- अब से थोड़ी देर पहले @capt_ivane का फ़ोन आया। उसने जो कहा सुनकर मेरे हाथ काँपने लगे। हमारे मित्र और सहयोगी रोहित सरदाना की मृत्यु की ख़बर थी। ये वाइरस हमारे इतने क़रीब से किसी को उठा ले जाएगा ये कल्पना नहीं की थी। इसके लिए मैं तैयार नहीं था। ये भगवान की नाइंसाफ़ी है.. ॐ शान्ति!   साक्षी जोशी- आज तक के एंकर रोहित सरदाना के निधन की खबर ने अंदर तक हिला दिया है। ये अत्यंत ही दुखद समाचार है। अब तक विश्वास नहीं हो पा रहा है। ये किसकी नज़र लग गई हमारे देश को। बस अभी निशब्द हूँ।   चित्रा त्रिपाठी- हँसता-खेलता परिवार, दो छोटी बेटियाँ. उनके लिए इस दंगल को हारना नहीं था @sardanarohit जी.आज सुबह चार बजे नोएडा के निजी अस्पताल में ICU में आपको ले ज़ाया गया और दिन चढ़ने के साथ ये बहुत बुरी खबर. कुछ कहने को अब बचा ही नहीं.   राणा यशवंत- रोहित तुम सदमा दे गए यार! बहुत क़ाबू करने के बावजूद ऐसा लग रहा है कि शरीर काँप रहा है। ये ईश्वर की बहुत बड़ी नाइंसाफ़ी है!! ऊपर अगर कोई दुनिया है तो तुमको वहाँ सबसे शानदार जगह मिले। तुम ज़बरदस्त इंसान थे। इससे ज़्यादा अभी कुछ भी कहने की हालत में नहीं हूँ। उफ़्फ़्फ़्फ़्फ़्फ़्फ़!!

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Dakhal News 30 April 2021

समाज

रतलाम।  पश्चिम रेलवे रतलाम मंडल के इंदौर से जबलपुर के मध्य चलने वाली गाड़ी संख्या 02292/02291 जबलपुर-इंदौर-जबलपुर स्पेशल एक्सप्रेस अगले आदेश तक निरस्त रहेगी।    मंडल रेल प्रवक्ता जितेन्द्र कुमार जयंत ने बताया कि वर्तमान परिस्थितियों में कोरोना संक्रमण के कारण गाडियों में यात्रियों  की कम संख्या को देखते हुए कई गाडियों को निरस्त किया गया है। इसी क्रम में गाड़ी संख्या 02292/02291 जबलपुर इंदौर जबलपुर स्पेशल एक्सप्रेस को अगले आदेश तक निरस्त  किया गया है। गाड़ी संख्या 02292 जबलपुर इंदौर स्पेशल एक्सप्रेस 13 मई  से तथा गाड़ी संख्या 02291 इंदौर जबलपुर स्पेशल एक्सप्रेस, 14 मई से अगले आदेश तक निरस्त रहेगी।   

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Dakhal News 12 May 2021

भोपाल। मध्‍य प्रदेश में बुधवार कई जगह पेट्रोल कीमतों ने 100 से ऊपर 102 रुपए की कीमत को भी पार कर लिया। राजधानी भोपाल सहित प्रदेश के बड़े शहरों इंदौर, जबलपुर और ग्‍वालियर में जहां प्रति लीटर पेट्रोल की कीमत 100 रुपये से अधिक है, वहीं राज्‍य के दो जिले शहडोल और अनूपपुर में पेट्रोल के दाम 102 रुपये से ऊपर पहुंच गया है।    इंडियन आयल कार्पोरेशन की वेबसाइट पर दिए बुधवार सुबह के आंकड़ों के अनुसार राजधानी भोपाल में पेट्रोल प्रति लीटर कीमत 100.08 रुपए और डीजल - 90.95 प्रति लीटर पर दिया जा रहा है। वहीं इंदौर में पेट्रोल के दाम 100 रुपये 16 पैसे प्रति लीटर हो गए हैं तो डीजल 91 रुपये चार पैसे प्रति लीटर पर पर है। इसी तरह से प्रदेश के बड़े महानगरों में ग्वालियर के दाम देखें तो पेट्रोल 100.04 प्रति लीटर और डीजल - 90.91 प्रति लीटर है। ऐसे ही प्रदेश की संस्‍कारधानी जबलपुर में भी पेट्रोल प्रति लीटर  100.12  और डीजल - 91.00 प्रति लीटर है।    उल्‍लेखनीय है कि प्रदेश के दो जिलों शहडोल और अनूपपुर में पेट्रोल के दाम 102 रुपये से ऊपर हैं। यह भाव मंगलवार रात 12 बजे से लागू हो गए थे। जबकि पेट्रो कीमतों ने अपना शतक मंगलवार को ही लगा दिया था। अब डीजल भी शतक से सिर्फ नौ रुपये दूर है।   उधर, प्रदेश के बाहर यदि देश के बड़े महानगरों की बात करें तो देश की राजधानी दिल्ली में पेट्रोल और डीजल के दाम 25-25 पैसे बढ़कर क्रमश: 92.05 रुपये और 82.61 रुपये प्रति लीटर पर पहुंचे हैं । यह पहली बार है कि राष्ट्रीय राजधानी में पेट्रोल 92 रुपये के पार निकला है। इसी तरह से कोलकाता में पहली बार पेट्रोल का मूल्य 92 रुपये प्रति लीटर व चेन्नई में 93 रुपये के पार निकल गया है। मुंबई में पेट्रोल 98.36 रुपये और डीजल भी 90 रुपये प्रति​ लीटर के करीब पहुंच गया है ।

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Dakhal News 12 May 2021

पेज 3

कोरोना महामारी के बढ़ते मामलों के बीच सोशल मीडिया पर कुछ दिनों से किसी ने किसी सेलिब्रिटी के निधन की अफवाहें आज कल तेजी से उड़ रही हैं। हाल ही में दिग्गज अभिनेत्री किरण खेर और मीनाक्षी शेषाद्रि ,सिंगर लकी अली  के बाद अब अभिनेता मुकेश खन्ना के निधन की खबर सोशल मीडिया पर चल रही है। मंगलवार की शाम से सोशल मीडिया पर अचानक से अफवाह उड़ी कि मुकेश खन्ना के निधन हो गया है। इस खबर के बाद उनके फैंस सोशल मीडिया पर लगातार उनकी हेल्थ के बारे में सवाल करते रहे और इसके  साथ ही कुछ लोग उन्हें श्रद्धांजलि भी देने लगे। जिसके बाद अब अभिनेता ने खुद आगे आकर इस मामले पर अपनी चुप्पी तोड़ी है और इसका खंडन किया है। मुकेश खन्ना ने अपना एक वीडियो शेयर करते हुए लिखा- 'मैं एकदम ठीक हूं। यह अफवाह फैलाने वाले किलेश के बाशिंदे होते हैं। इनको पकड़ कर मारना चाहिए। आप सब की दुआ से और भगवान की दया से मैं स्वस्थ हूं। ख्याल रखें।'     वहीं इस वीडियो में मुकेश खन्ना कहते हैं- 'मैं पूरी तरह से स्वस्थ हूं, पता नहीं कि किन लोगों ने ऐसी अफवाह उड़ाई है। मैं बिल्कुल ठीक हूं और जब आप लोगों की दुआएं मेरे साथ हैं तो मुझे क्या हो सकता है। सभी का बहुत बहुत शुक्रिया मेरी इतनी चिंता करने के लिए। मुझे कई लोगों के फोन आ रहे हैं। आप सभी का शुक्रिया।'   अभिनेता के कई फैंस उनके वीडियो पर अपनी प्रतिक्रिया दे रहे हैं और उनकी लम्बी आयु और स्वस्थ जीवन की प्रार्थना कर रहे हैं।

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Dakhal News 12 May 2021

हाल ही में साउथ सुपरस्टार अल्लू अर्जुन कोरोना संक्रमित पाए गए थे। अभिनेता ने खुद 28 अप्रैल को सोशल मीडिया के जरिये अपने कोरोना संक्रमित होने की जानकारी फैंस के साथ साझा की थी। कोरोना संक्रमित होने के बाद से वह क्वारंटीन में थे और कोरोना प्रोटोकॉल का पालन कर रहे थे। अब अभिनेता ने लगभग 15 दिन के बाद कोरोना को मात दे दी है और उनकी कोरोना रिपोर्ट भी नेगटिव आई है। इसकी जानकारी खुद अभिनेता ने सोशल मीडिया पर ट्वीट कर फैंस को दी है। अल्लू अर्जुन ने फैंस के साथ इस खुशखबरी को शेयर करते हुए लिखा-'सभी को नमस्ते, 15 दिन क्वारंटाइन रहने के बाद मेरी कोरोना रिपोर्ट नेगेटिव आई है। मैं अपने सभी शुभचिंतकों और फैंस को उनकी शुभकामनाओं और प्रार्थनाओं के लिए धन्यवाद कहना चाहता हूं। उम्मीद करता हूं कि ये लॉकडाउन कोरोना केसों को कम करने में मदद करेगा। घर पर रहिए और सेफ रहिए। आप सभी के प्यार के लिए शुक्रिया।'   अल्लू अर्जुन के कोरोना निगेटिव होने की खबर से उनके फैंस काफी खुश हैं। वह अभिनेता की इस पोस्ट पर उन्हें बधाई देने के साथ-साथ, उन्हें सुरक्षित और अपना धयान रखने की सलाह भी दे रहे हैं। रिपोर्ट्स के अनुसार अल्लू अर्जुन कोरोना संक्रमित होने से पहले अपनी आगामी फिल्म 'पुष्पा' की शूटिंग कर रहे थे।  अभिनेता के कोरोना संक्रमित होने के बाद फिल्म की शूटिंग रोक दी गई थी।

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Dakhal News 12 May 2021

दखल क्यों

डॉ. वेदप्रताप वैदिक   यह गनीमत है कि ईद के मौके पर अफगानिस्तान के तालिबान और सरकार ने अगले तीन दिन के लिए युद्ध-विराम की घोषणा कर दी है। पिछली 1 मई से अफगानिस्तान के विभिन्न शहरों में तालिबान ने इतने हमले किए हैं कि जितने उन्होंने पिछले एक साल में भी नहीं किए। पिछले साल फरवरी में तालिबान और अफगानिस्तान की गनी सरकार के बीच जो समझौता हुआ था, वह अब हवा में उड़ गया है। यह समझौता अमेरिका की पहल पर कतर की राजधानी दोहा में हुआ था।   इस समझौते के मुताबिक 1 मई 2021 को अफगानिस्तान से सारी विदेशी फौजों को वापस चले जाना था। यह समझौता ट्रंप-प्रशासन ने करवाया था लेकिन बाइडन-प्रशासन ने इसकी तारीख बदल दी। उसने घोषणा की कि 1 मई को नहीं, अब अमेरिकी फौजें अफगानिस्तान से 11 सितंबर 2021 को वापस लौटेंगी। यह वह दिन है, जिस दिन तालिबान ने अमेरिका पर हमला किया था। तालिबान इस तिथि-परिवर्तन से बेहद नाराज़ हैं। इसे वे अपना अपमान मानते हैं। इसलिए 1 मई के बाद तालिबान ने अफगानिस्तान में लगातार हमले बोल रखे हैं। बाइडन-प्रशासन ने गनी-सरकार को भरोसा दिलाया है कि 11 सितंबर के बाद भी अमेरिका अफगानिस्तान का ख्याल रखेगा। उसे वह आतंकवादियों के हवाले नहीं होने देगा। इसका तालिबान यही अर्थ निकाल रहे हैं कि अमेरिका अफगानिस्तान में डटा रहेगा।   अफगानिस्तान से फौजी वापसी की इच्छा ओबामा और ट्रंप, दोनों प्रशासनों ने व्यक्त की थी और उसके आधार पर अमेरिकी जनता के वोट भी जुटाए थे लेकिन तालिबान को शक है कि अमेरिका अफगानिस्तान में डटे रहना चाहता है। उसका कारण तो यह है कि परमाणु समस्या पर अभीतक दोनों देश, अमेरिका और ईरान उलझे हुए हैं और रूस के साथ भी अमेरिका की तनातनी चली आ रही है। चीन के साथ भी अमेरिका की कूटनीतिक मुठभेड़ तो जग-जाहिर है। ऐसी हालत में अफगानिस्तान में टिके रहना उसे अपने राष्ट्रहित की दृष्टि से जरूरी लग रहा है। उसने वियतनाम को खाली करने का नतीजा देख लिया है। उत्तरी वियतनाम को दक्षिण वियतनाम जीम गया है।   यद्यपि अफगानिस्तान बहुत ही गहन राष्ट्रवादी देश है लेकिन पाकिस्तान तालिबान के जरिए वहां अपना वर्चस्व कायम करना चाहेगा। पाकिस्तानी वर्चस्व फिलहाल अफगानिस्तान में रूस और चीन का मार्ग प्रशस्त कर सकता है। यह गणित भारतीय विदेश मंत्रालय के दिमाग में भी हो सकता है। इस मौके पर, जबकि तालिबान के लगातार हमले हो रहे हैं, पाक सेनापति और गुप्तचर-प्रमुख की काबुल-यात्रा का अभिप्राय क्या है ? क्या वे तालिबान को चुप कराने के लिए काबुल गए हैं और गनी सरकार का मनोबल बढ़ाने के लिए गए हैं ? यह एक पहेली है। इस मौके पर भारत सरकार का मौन अपने आप में एक पहेली है। (लेखक सुप्रसिद्ध पत्रकार और स्तंभकार हैं।)

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Dakhal News 12 May 2021

सियाराम पांडेय 'शांत' केंद्रीय रक्षामंत्री राजनाथ सिंह ने कहा है कि कोरोना महामारी से निपटने के लिए केंद्र और राज्य सरकारें बेहतर काम कर रही हैं। विपक्ष आलोचना करने की बजाय सुझाव दे। केंद्रीय रक्षामंत्री की इस नसीहत का स्वागत किया जाना चाहिए लेकिन उनकी इस नसीहत ने आलोचना और सुझाव के अंतर को सुस्पष्ट करने को भी विवश कर दिया है। सुझाव की जाहिर तौर पर अपनी अलग जगह है लेकिन आलोचना में सुझाव सहज समाहित होता है। सत्तारूढ़ दल जब स्वतः निर्णय लेने लगते हैं और प्रतिपक्ष को लगता है कि उसकी बात, उसके सुझाव या तो सुने नहीं जा रहे या सुनकर भी उसे अनसुना किया जा रहा है, तब वे आरोप और आलोचना को ओर अग्रसर होते हैं।   सत्तारूढ़ दल और विपक्ष दोनों मिलकर लोकतंत्र को मजबूत बनाते हैं। कमजोर विपक्ष हो, मजबूत सरकार हो तो भी और मजबूत विपक्ष हो, कमजोर सरकार हो तो भी लोकतंत्र मजबूत नहीं हो पाता। अगर सरकार हर किसी से सकारात्मक होने की ही अपेक्षा करने लगे और सारे लोग सकारात्मक ही देखने और दिखाने लगें तो यह किसी भी देश के लिए और अधिक त्रासद स्थिति होगी। सरकार अगर सुझावों पर अमल करती तो फिर आलोचना और आरोप की नौबत ही नहीं आती। आंखों पर गुलाबी चश्मा लगा लेना या फिर अपनी सुविधा का संतुलन देखना और बात है लेकिन जब बात जनहित की हो तो समग्रता में देखना ही उचित होता है।   इसमें शक नहीं कि केंद्र और राज्य सरकारें कोरोना महामारी से निपटने के लिए यथासंभव प्रयास कर रही है। लोगों को टीका लगवाने से लेकर ऑक्सीजन, वेंटिलेटर और ऑक्सीजन उपलब्ध कराने के लिए वह देश-विदेश से सहयोग प्राप्त कर रही है। यह और बात है कि इस देश के लोगों को अस्पतालों में बेड, ऑक्सीजन, वेंटिलेटर का अभाव झेलना पड़ा है। भाजपा के सांसद और विधायक भी अपने परिजनों को बेड नहीं दिला सके। अतिविशिष्ट लोग जब परेशान हुए तो आम जनता को कितनी परेशानी हुई होगी, इसकी कल्पना सहज ही की जा सकती है। जिस तरह से देश की अदालतों ने केंद्र और राज्य सरकारों को फटकार लगाई है, उसे भी हल्के में नहीं लिया जा सकता।   यह सच है कि सरकार चिकित्सा सुविधाओं की उपलब्धता को लेकर बेहद संजीदगी से काम कर रही है। इस निमित्त उसने सेना को भी लगा दिया है। डीआरडीओ के स्तर पर जगह-जगह हजार बेड के कोविद अस्पताल बनाए जा रहे हैं। हर अस्पताल में ऑक्सीजन उत्पादन संयंत्र लगाए जा रहे हैं। देशभर के हज हाउसों को कोविड अस्पतालों में बदलना अच्छी बात है। फौरी तौर पर इससे राहत मिल सकती है, लेकिन हमें विकल्प से अधिक स्थायी विकास को तरजीह देनी चाहिए। हाल के दिनों में जिस कोरोना संक्रमितों की तादाद घटी है, वह अपने आप में सुखद है लेकिन जिस तरह कोरोना की तीसरी लहर की आशंका है। ब्लैक फंगस के खतरे बढ़ रहे हैं, उसमें सरकार को अपने प्रयासों को लेकर आत्ममुग्ध होने की जरूरत नहीं है। इस समय सरकार जो कुछ भी कर रही है, वह प्यास लगने पर कुआं खोदने जैसा है।   विपक्ष अगर यह कह रहा है कि सरकार के तर्कों और दलीलों से लाशों को छिपाया नहीं जा सकता तो उसके निहितार्थ को समझा जाना चाहिए। प्रयास किया जाना चाहिए कि विपक्ष को इस तरह की बात करने का अवसर ही न मिले। विपक्ष न तो सलाहकार है और न ही चारण। उससे ठकुरसुहाती की उम्मीद भी नहीं की जानी चाहिए। गंगा में लाशें चाहे बिहार में मिलें या उत्तर प्रदेश में, यह कहकर जिम्मेदारियों से बचा नहीं जा सकता कि लाशें उनके राज्य की नहीं हैं, दूसरे राज्य से बहकर आई हैं।   विपक्ष को सुझाव देना चाहिए या आलोचना करनी चाहिए, यह बहस और मुबाहिसे का विषय हो सकता है लेकिन जिसका जो दायित्व है, उसे उसी का निर्वाह करना चाहिए। विपक्ष सरकार का प्रशस्तिगान नहीं कर सकता। उसके द्वारा की जाने वाली आलोचना में ही सरकार का व्यापक हित निहित है। अपने देश में निंदक नियरे राखिए आंगन कुटी छवाय वाली परंपरा रही है।आलोचना आत्मावलोकन का अवसर देती है जबकि प्रशंसा में व्यक्ति अक्सर खुद को ठीक से समझ न पाने की भूल कर बैठता है। इसलिए भी सरकार को चाहिए कि वह सुने सबकी, करे अपने मन की।निर्णय तो उसे स्वविवेक के आधार पर ही लेना है। सरकार को दूसरों से सकारात्मक होने की अपेक्षा करने की बजाय खुद सकारात्मक होना है। विपक्ष अगर सुझाव तक ही सिमट जाएगा तो उसका वजूद ही खत्म हो जाएगा। सुझाव देना वैसे भी विपक्ष का काम नहीं है। विरोधी दल तो विरोध ही करता है। विरोध तो विरोध होता है। चाहे वह सकारात्मक हो या नकारात्मक। विपक्ष की भूमिका एक सशक्त आलोचक की होनी चाहिए। विरोध में भी दृष्टिबोध होना चाहिए। सुझाव देना सलाहकार का काम होता है और सरकार के पास सलाह देने वालों की कहीं कोई कमी नहीं। वह निजी क्षेत्र के विशेषज्ञों की भी सेवा लेती है। कौन क्या कह रहा है,यह उतना मायने नहीं रखता जितना यह कि हम क्या कर रहे हैं।   विपक्ष हमेशा गंभीर मुद्दों पर सर्वदलीय बैठक बुलाने की मांग करता रहता है। सरकारें बहुधा ऐसा करती भी हैं, लेकिन सर्वदलीय बैठक के मुद्दों पर कितना अमल हो पाता है, यह भी किसी से छिपा नहीं है। विपक्ष को विरोध का अवसर चाहिए और सरकार को जनहितकारी योजनाओं को आगे बढ़ने का। उसे आलोचनाओं और सुझावों की अपेक्षा किए बगैर केवल अपने हिस्से की जिम्मेदारी निभानी है। अगर सब अपना-अपना काम करने लगें तो आधी समस्या का समाधान तो वैसे ही हो जाए। कोरोना काल में जागरूकता बहुत जरूरी है। इस मोर्चे पर तो काम करना ही है, जनता जनार्दन के हितों का ध्यान रखते हुए चिकित्सा सुविधाओं में इजाफा भी करते जाना है अन्यथा आनेवाला समय हमें माफ नहीं करेगा। (लेखक हिन्दुस्थान समाचार से सम्बद्ध हैं।)

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