विशेष

भोपाल। मध्य प्रदेश में सार्वजनिक वितरण प्रणाली के अंतर्गत गरीबों को दिए जाने वाले चावल के बाद अब नमक में भी मिलावट का मामला सामने आया है। सागर जिले के बीना ब्लॉक और जबलपुर की राशन दुकानों से बांटे जा रहे नमक में बारीक रेत मिलाने का खुलासा हुआ है। इस मामले को लेकर अब राजनीति शुरू हो गई है। विपक्ष में बैठी कांग्रेस आक्रामक हो गई है और सरकार पर सवाल उठा रही है। वहीं पूर्व सीएम और कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष कमलनाथ ने पूरे मामले को शर्मनाक बताते हुए दोषियों पर कार्यवाही की मांग की है।   कमलनाथ ने ट्वीट कर पूरे मामले पर सरकार पर निशाना साधा है। उन्होंने एक के बाद एक कई ट्वीट कर कहा ‘शिवराज सरकार में प्रदेश के कई जिलो में गऱीबों को जानवरो के खाने लायक़ चावल के वितरण के बाद अब गऱीबों को सार्वजनिक राशन वितरण प्रणाली के तहत दिये जाने वाला नमक भी मिलावटी? नमक में रेत? जबलपुर व सागर में इस तरह के मामले सामने आये हैं, बेहद गंभीर व शर्मनाक? एक अन्य ट्वीट कर उन्होंने कहा कि ‘शिवराज सरकार में हर जगह भ्रष्टाचार, फर्जीवाडे, घोटाले, मिलावट का काम जारी। प्रदेशभर में गऱीबों को वितरित की जाने वाली राशन सामग्री की जाँच हो, घटिया चावल के वितरण के बाद अब नमक भी मिलावटी, गरीबों के स्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ बंद हो, दोषियों पर कड़ी से कड़ी कार्यवाही हो।

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Dakhal News 4 December 2020

भोपाल। मध्यप्रदेश के रतलाम जिले में तिहरे हत्याकांड के मुख्य आरोपी दिलीप देवल को गुरुवार रात पुलिस ने एनकाउंटर में मार गिराया। पुलिस आरोपित को वारदात के बाद से ही ट्रेस कर रही थी और उस पर तीस हजार का ईनाम भी घोषित किया था। इस मुठभेड़ में दो सब इंस्पेक्टर सहित पांच पुलिसकर्मी भी घायल हुए हैं। रतलाम मुठभेड़ पर सीएम शिवराज सिंह चौहान ने प्रतिक्रिया दी है।   सीएम शिवराज ने ट्वीट कर मुठभेड़ पर कहा है कि अभी थोड़ी देर पहले रतलाम ट्रिपल मर्डर केस का मुख्य आरोपी दिलीप देवल पुलिस के साथ मुठभेड़ में मारा गया। मैंने पुलिस को सख्त निर्देश दिए थे की ऐसे नरपिशाच को समाज में रहने का कोई अधिकार नहीं है। उसे जल्द से जल्द पकड़ा जाए। उन्होंने पुलिस की टीम को कार्यवाही के लिए धन्यवाद देते हुए घायल पुलिस कर्मियों के स्वस्थ होने की कामना की है। एक अन्य ट्वीट कर उन्होंने कहा ‘जब पुलिस टीम उसे पकडऩे गयी तो उसने टीम पर गोलियाँ चलाई और हमारे बहादुर जवानों ने उसका मुंहतोड़ जवाब दिया। हमारे कुछ पुलिसकर्मी इस मुठभेड़ में घायल भी हुए है। मैं उनके शीघ्रातिशीघ्र ठीक होने की कामना करता हूँ। पूरी पुलिस टीम को मध्यप्रदेश की तरफ़ से धन्यवाद। मध्यप्रदेश आज फिर से शांति से सोएगा क्योंकि आप हमारे रक्षक हो। जय हिंद!

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Dakhal News 4 December 2020

राजनीति

भोपाल। मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) ने प्रदेश सरकार पर गंभीर आरोप लगाए हैं। पार्टी के राज्य सचिव जसविंदर सिंह ने शुक्रवार को मीडिया को जारी अपने बयान में कहा है कि जब पूूरे देश के किसान मंडी व्यवस्था को खत्म किए जाने के खिलाफ आंदोलन कर दिल्ली को चारों दिशाओं से घेरे हुए हैं, तब शिवराज सरकार की ओर से निजी मंडियां खोलने की बात कर न केवल अपने किसान विरोधी चरित्र को उजागर किया है।    उन्होंने कहा है कि इस समय पूरे प्रदेश की मंडियों में किसानों की लूट मची हुई है। उत्तरी मध्यप्रदेश में बाजरा और धान उत्पादक किसान अपनी फसलों को औने-पौने दामों पर बेचने के लिए मजबूर है। वहीं निमाड़ में कपास उत्पादक किसान अपनी फसल का वाजिब दाम नहीं मिल रहे हैं। नीमच में प्याज उत्पादक मंडियों में अपना प्याज फैलाने को मजबूर हैं। मक्का उत्पादक किसानों की लूट हो रही है। तब प्रदेश की भाजपा सरकार इस लूट को रोकने और किसानों की फसल की खरीद को सुनिश्चित कर उनकी फसल को न्यूनतम समर्थन मूल्य पर खरीदने की गांरटी देने की बजाय निजी मंडियों की व्यवस्था कर इस लूट को संस्थागत रूप देना चाहती है।   माकपा राज्य सचिव जसविंदर सिंह ने कहा है कि जब पूरे देश को किसान मंडी व्यवस्था को खत्म करने के केंद्र सरकार के निर्णय के विरोध में एक सप्ताह से दिल्ली घेर कर बैठा है और मंडी व्यवस्था को मजबूत करने की बात कर रहा है, तब शिवराज सरकार का यह निर्णय किसानों को उत्तेजित कर आग में घी डालने का काम करेगा। उन्होंने मांग करते हुए कहा कि शिवराज सरकार को इस निर्णय को तुरंत वापस लेना चाहिए, अन्यथा किसान दिल्ली के साथ साथ शिवराज सरकार को भी इस निर्णय को वापस लेने के लिए बाध्य करेंगे।   गौरतलब है कि मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने एक दिन पहले यानी गुरुवार को मुख्यमंत्री किसान कल्याण योजना के तहत पांच लाख किसानों के खातों में 100 करोड़ रुपये सिंगल क्लिक के माध्यम से ट्रांसफर किये थे। इस दौरान उन्होंने अपने संबोधन में प्रदेश में निजी मंडियां खोलने की बात कही थी। इसी को लेकर माकपा ने शिवराज सरकार पर निशाना साधा है।

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Dakhal News 4 December 2020

भोपाल। भारत के पहले राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र प्रसाद की आज गुरुवार को 136वीं जयंती है। उनका जन्म 3 दिसंबर, 1884 को बिहार के सीवान जिले के जीरादेई गांव में हुआ था। वह अत्यंत दयालु और निर्मल स्वभाव के महान व्यक्ति थे। उनकी जयंती पर मप्र के सीएम शिवराज सिंह चौहान समेत भाजपा नेताओं ने उन्हें स्मरण कर विनम्र श्रद्धांजलि दी है।   सीएम शिवराज ने ट्वीट कर भारत रत्न डॉ राजेन्द्र प्रसाद की जयंती पर उन्हें नमन करते हुए लिखा ‘अंग्रेज़ी हुकूमत की नींव हिलाने वाले स्वतंत्रता संग्राम सेनानी, सरल और सहज स्वभाव के धनी देश के प्रथम राष्ट्रपति भारत रत्न डॉ. राजेन्द्र प्रसाद को जयंती पर सादर नमन।   भाजपा प्रदेश अध्यक्ष वीडी शर्मा ने अपने ट्वीट में कहा ‘भारत के प्रथम राष्ट्रपति, भारत रत्न डॉ. राजेन्द्र प्रसाद जी की जयन्ती पर उन्हें कोटि - कोटि नमन।भाजपा राष्ट्रीय महामंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने डॉ राजेन्द्र प्रसाद को नमन करते हुए कहा ‘भारतीय गणराज्य के प्रथम राष्ट्रपति, सादगी, सेवा, त्याग और देशभक्ति की प्रतिमूर्ति डॉ राजेन्द्र प्रसाद जी की जयंती पर कोटि-कोटि नमन न्याय के रक्षक अभिवक्ता बंधुओं को 'अभिवक्ता दिवस' की हार्दिक शुभकामनाएं!

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Dakhal News 3 December 2020

मीडिया

–डॉ. वेदप्रताप वैदिक– ईरान और बाइडन की दुविधा… ईरान के परमाणु-वैज्ञानिक मोहसिन फख्रीजाद की हत्या एक ऐसी घटना है, जो ईरान-इस्राइल संबंधों में तो भयंकर तनाव पैदा करेगी ही, यह बाइडन-प्रशासन के रवैए को भी प्रभावित कर सकती है। फख्रीजाद ईरान के परमाणु-बम कार्यक्रम के अग्रगण्य वैज्ञानिक थे। उनका नाम लेकर इस्राइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने उन्हें काफी खतरनाक आदमी बताया था। ईरानी सरकार का दावा है कि तेहरान के पास आबसर्द नाम के गांव में इस वैज्ञानिक की हत्या इस्राइली जासूसों ने की है।   इसके पहले इसी साल जनवरी में बगदाद में ईरान के लोकप्रिय जनरल कासिम सुलेमानी की हत्या अमेरिकी फौजियों ने कर दी थी। ईरान के सर्वोच्च नेता आयतुल्लाह अली खामेनई ने कहा है कि ईरान इस हत्या का बदला लेकर रहेगा। यों भी पिछले 10 साल में ईरान के छह वैज्ञानिकों की हत्या हुई है। उसमें इस्राइल का हाथ बताया गया था। हत्या की इस ताजा वारदात में अमेरिका का भी हाथ बताया जा रहा है, क्योंकि ट्रंप के विदेश मंत्री माइक पोंपिओ पिछले हफ्ते ही इस्राइल गए थे और वहां उन्होंने सउदी सुल्तान और नेतन्याहू के साथ भेंट की थी। ईरानी सरकार को शंका है कि ट्रंप-प्रशासन अगली 20 जनवरी को सत्ता छोड़ने के पहले कुछ ऐसी तिकड़म कर देना चाहता है, जिसके कारण बाइडेन-प्रशासन चाहते हुए भी ईरान के साथ तोड़े गए परमाणु समझौते को पुनर्जीवित न कर सके। ओबामा-प्रशासन और यूरोपीय देशों ने ईरान के साथ जो परमाणु समझौता किया था, उसे ट्रंप ने भंग कर दिया था और ईरान पर से हटे प्रतिबंध को दुबारा थोप दिया था। अब ईरान गुस्से में आकर यदि अमेरिका के किसी बड़े शहर में कोई जबर्दस्त हिंसा करवा देता है तो बाइडन-प्रशासन को ईरान से दूरी बनाए रखना उसकी मजबूरी होगी। यह दुविधा ईरानी नेता अच्छी तरह समझ रहे होंगे। यह तो गनीमत है कि ट्रंप ने अपनी घोषणा के मुताबिक अभी तक ईरान पर बम नहीं बरसाए हैं। अपनी हार के बावजूद हीरो बनने के फेर में यदि ट्रंप ईरान पर जाते-जाते हमला बोल दें तो कोई आश्चर्य नहीं है। वैसे भी उन्होंने पश्चिम एशिया के ईरान-विरोधी राष्ट्रों इस्राइल, सउदी अरब, जोर्डन, यूएई और बहरीन आदि को एक जाजम पर बिठाने में सफलता अर्जित की है। बाइडन-प्रशासन की दुविधा यह है कि वह इस इस्राइली हमले की खुली भर्त्सना नहीं कर सकता लेकिन वह किसी को भी दोष दिए बिना इस हत्या की निंदा तो कर ही सकता है। ईरान और बाइडन-प्रशासन को इस मुद्दे पर फूंक-फूंककर कदम रखना होगा।

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Dakhal News 30 November 2020

-शशिकांत सिंह- महाराष्ट्र में मीडियाकर्मियों को लोकल ट्रेन में जाने की इजाजत नहीं है। लोकल ट्रेन में सिर्फ उन्हीं पत्रकारों को यात्रा की इजाजत है जो मंत्रालय से मान्यता प्राप्त हैं। अब जाहिर सी बात है कि मान्यता ज्यादातर उन्ही पत्रकारों को मिलता है जो पोलिटिकल बीट कवर करते हैं। इनकी संख्या नाम मात्र है। महाराष्ट्र में उन पत्रकारों और मीडियाकर्मियों की संख्या ज्यादा है जो क्राइम बीट, इंटरटेनमेंट बीट, सोशल तथा अन्य बीट को कवर करते हैं। इन्हें लोकल ट्रेन में यात्रा की इजाजत नहीं है। यहां तक कि जो रेलवे बीट को कवर करते हैं खुद उन्हें भी लोकल ट्रेन में जाने की इजाजत नहीं है। न्यूज़ पेपर प्रिंटिंग, इलेक्ट्रॉनिक टीवी, वेब न्यूज़ के मीडियाकर्मियों और इनसे जुड़े ज्यादातर पत्रकारों को लोकल ट्रेन में यात्रा की इजाजत नहीं है।  लोकल ट्रेन में वाचमैनों को यूनिफार्म पहनकर यात्रा की इजाजत है। वाचमैनों को लोकल में यात्रा के लिए आईकार्ड दिखाकर सीजन टिकट या नार्मल टिकट भी आसानी से मिल जा रहा है लेकिन बिना मान्यता प्राप्त पत्रकारों को लोकल का टिकट देने की जगह काउंटर पर बैठने वालों से जलालत झेलनी पड़ रही है। वाचमैनों के अलावा बैंकों के कर्मचारी और बैंकों के बाहर खड़े होकर क्रेडिट कार्ड बेचने वालों को भी लोकल में जाने की इजाजत है। सरकारी कर्मचारी, स्कूल कर्मचारी, मनपा कर्मचारी, अस्पताल कर्मचारी सबको लोकल ट्रेन में जाने की इजाजत है और इन्हें आवश्यक सेवा में माना जाता है लेकिन महाराष्ट्र के मीडियाकर्मियों को आवश्यक सेवा में शामिल नहीं माना जा रहा है। अचरज की बात यह है कि महाराष्ट्र में दर्जनों पत्रकार संगठन हैं लेकिन ज्यादातर इस मामले पर चुप हैं। एक दो संगठन ने इस मुद्दे पर लेटरबाजी और ट्वीट भी राज्य सरकार व रेलमंत्री को किया लेकिन न राज्य सरकार उनकी सुन रही है न रेल मंत्रालय। रेलवे के ज्यादातर पीआरओ की हालत है कि रेलवे के किसी बड़े अधिकारी की पत्नी किसी कार्यक्रम का फीता काटेंगी तो वो खबर भेज देंगे लेकिन सभी मीडियाकर्मियों को लोकल ट्रेन में जाने की इजाजत कब मिलेगी इस पर उनका कहना होता है कि यह सब राज्य सरकार को तय करना है कि सभी मीडियाकर्मियों को लोकल में कब से यात्रा की अनुमति मिलेगी। लोकल में यात्रा की अनुमति न मिलने से अधिकांश मीडियाकर्मी बेचारे सैकड़ों रुपये और 5 से 6 घंटे बर्बाद कर कार्यालय जाने को मजबूर होते हैं। राज्य सरकार और रेल मंत्रालय से निवेदन है कि इस ओर जल्द ध्यान दें। शशिकांत सिंह वॉइस प्रेसिडेंटन्यूज़ पेपर एम्प्लॉयज यूनियन ऑफ इंडिया

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Dakhal News 24 November 2020

समाज

इंदौर। मध्यप्रदेश में शिवराज सरकार ने गुंडे बदमाशों के खिलाफ खुलकर मोर्चा खोल दिया है और उनके ठिकानों को बर्बाद करने दौर लगातार जारी है। इसी क्रम में शुक्रवार सुबह इंदौर जिला प्रशासन ने एंटी माफिया अभियान के तहत खजराना इलाके के जमजम चौराहा पर गुंडे इस्लाम पटेल के अवैध कब्जों पर कार्यवाई करते हुए उसे धराशायी किया। नगर निगम के अमले ने जिला प्रशासन और पुलिस की मौजूदगी में अवैध मकान और दुकान तोड़े।   जिला प्रशासन लगातर शहर में गुंडों और बदमाशों के अवैध कब्जों के खिलाफ कार्रवाई कर रहा है। प्रशासन ने आज इस्लाम पटेल के खिलाफ कार्यवाई की। एंटी माफिया अभियान के तहत यह कार्रवाई हो रही है। मौके पर विरोध प्रदर्शन को देखते हुए भारी पुलिस बल तैनात किया गया है।    उल्‍लेखनीय है कि इस्लाम पटेल के खिलाफ शहर के अलग-अलग थानों में 420, 307 सहित 9 केस दर्ज है। एंटी माफिया अभियान के तहत टीम कबूतर खाना में भी गुंडो के मकान को तोडऩे की कार्रवाई की जा रही है। उल्लेखनीय है कि ज़िला प्रशासन, निगम और पुलिस की संयुक्त टीम लगातार बीते 10-12 दिनों से लगातार कार्रवाई कर रही है। टीम ने कई गुंडे बदमशों की लिस्ट बनाई है, जिसके खिलाफ अब कार्रवाई हो रही है।

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Dakhal News 4 December 2020

भोपाल। मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल में कोरोना का कहर जारी है। यहां दीपावली के बाद संक्रमित मरीजों की संख्या लगातार बढ़ती जा रही है। यहां बीते 24 घंटों के दौरान कोरोना के 339 नये मामले सामने आए हैं, जबकि दो लोगों की मौत हुई है। इसके बाद यहां संक्रमित मरीजों की कुल संख्या 33,263 और मृतकों की संख्या 526 हो गई है।   भोपाल सीएमएचओ कार्यालय द्वारा शुक्रवार को जानकारी दी गई है कि राजधानी में बीते 24 घंटों में प्राप्त जांच रिपोर्ट में 339 नये व्यक्तियों में कोरोना संक्रमण की पुष्टि हुई है। इसके बाद भोपाल में संक्रमित मरीजों की कुल संख्या 32,924 से बढक़र 33,263 हो गई है। वहीं, भोपाल में कोरोना से दो लोगों की मौत की भी पुष्टि हुई है। अब यह कोरोना से मरने वालों की संख्या 526 हो गई है। हालांकि, यहां संक्रमित मरीज तेजी से स्वस्थ हो रहे हैं। यहां अब तक 29,506 मरीज कोरोना को मात दे चुके हैं और पूरी तरह स्वस्थ होकर अपने घर पहुंच गए हैं, लेकिन अधिक संख्या में नये संक्रमित मिलने से सक्रिय मरीजों की संख्या बढक़र 2800 के करीब पहुंच गई है  जिनका विभिन्न अस्पतालों और घरेलू एकांतवास में उपचार जारी है। भोपाल में 60 फीसदी मरीज घरेलू एकांतवास में उपचार करा रहे हैं।

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Dakhal News 4 December 2020

पेज 3

हाल में कंगना रनौत किसान आंदोलन को लेकर किये गए ट्वीट के कारण बुरी तरह ट्रोल हो गई। सोशल मीडिया पर कंगना को कड़ी आलोचनाओं का सामना करना पड़ा। कंगना ने भी आलोचकों को कड़ी प्रतिक्रिया दी, लेकिन अब लगता है उनके तेवर कुछ नरम हो रहे हैं। दरअसल सोशल मीडिया पर आलोचनाओं का सामना करने के बाद कंगना ने देर रात किसानों का समर्थन करते हुए एक के बाद एक तीन ट्वीट किये। कंगना ने अपने पहले ट्वीट में लिखा- 'मैं किसानों के साथ हूं। पिछले साल मैंने एग्रोफॉरेस्ट्री को बढ़ावा देने के लिए कार्यक्रम किए और डोनेशन भी दिया। मैं किसानों के शोषण और उनकी समस्याओं के लिए हमेशा मुखर रही हूं। मैं उनके बारे में काफी चिंता करती हूं और इस कारण मैंने इस सेक्टर में बदलाव के लिए प्रार्थना की जो आखिरकार इन बिलों के रूप में सुनी गई।' इसके बाद कंगना ने इसी ट्वीट को और आगे बढ़ाते हुए ट्वीट किया--''ये बिल कई मायनों में किसानों का जीवन बदलने वाले हैं। मैं चिंता और अफवाहों के प्रभाव को समझती हूं लेकिन मुझे विश्वास है कि सरकार सारे संदेहों को दूर करेगी। कृपया धैर्य रखें। मैं किसानों के साथ हूं और पंजाब के लोग मेरे दिल में एक खास जगह रखते हैं।' अपने अगले ट्वीट में कंगना ने लिखा-'मैं देश के किसानों से अपील करती हूं कि किसी भी वामपंथी/खालिस्तानी/टुकड़े गैंग को अपनी प्रोटेस्ट को हाईजैक ना करने दें। ताजा आ रही रिपोर्ट्स के मुताबिक अधिकारियों के साथ किसानों की बात का नतीजा आ रहा है। मैं सभी को ऑल दी बेस्ट कहती हूं। आशा करती हूं कि देश में शांति और विश्वास की जीत होगी। जय हिंद।' गौरतलब है कंगना रनौत ने हाल ही में एक ट्वीट किया था, जिसमें उन्होंने किसान आंदोलन में शामिल हुई बुजुर्ग महिला को सीएए प्रोटेस्ट की बिलकिस बानो बताया था। जिसके बाद सोशल मीडिया पर कंगना का यह ट्वीट सोशल मीडिया पर वायरल हो गया और कंगना को आलोचकों का सामना करना पड़ा। हालांकि बाद में कंगना ने इस ट्वीट को डिलीट भी कर दिया था।

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Dakhal News 4 December 2020

अभिनेत्री कंगना रनौत की मुश्किलें इन दिनों बढ़ी हुई हैं। हाल ही में कंगना को जहां सोशल मीडिया पर किसान आंदोलन को लेकर किये गए अपने ट्वीट को लेकर आलोचनाओं का सामना करना पड़ रहा है। वहीं, अब बॉलीवुड के मशहूर गीतकार जावेद अख्तर ने भी गुरुवार को अभिनेत्री कंगना रनौत के खिलाफ दायर मानहानि की शिकायत मामले में अंधेरी की मेट्रोपॉलिटन अदालत के समक्ष वकील के माध्यम से अपना बयान दर्ज करवा दिया है। अब कंगना ने इसे लेकर सोशल मीडिया पर एक ट्वीट किया है, जिसमें कंगना ने लिखा- 'अकेली महिला/ अकेली योद्धा बॉलीवुड के सुसाइड गैंग, ड्रग माफिया, फांसीवादी सरकार, टुकड़े गैंग के खिलाफ लड़ रही है। हो सकता है मैंने एक कठिन जीवन चुना लेकिन यह सम्मान की बात है कि राष्ट्र को हमारी एकता और अखंडता के सभी खतरों के खिलाफ जगाने का काम किया।' गौरतलब है जावेद अख्तर ने बीते दिनों कंगना रनौत पर मानहानि का मुकदमा दर्ज कराया था। उन्होंने अभिनेत्री पर एक टेलीविजन इंटरव्यू में कथित रूप से उनके खिलाफ मानहानि और बेबुनियाद टिप्पणी करने का आरोप लगाया था। कंगना ने दावा किया था कि जावेद अख्तर ने उन्हें घर बुलाकर धमकाया और ऋतिक रोशन से माफी मांगने के लिए कहा था। जिसके बाद से कंगना और जावेद अख्तर के बीच जुबानी जंग जारी थी। वहीं, अब इस मामले में जावेद अख्तर ने अंधेरी की मेट्रोपॉलिटन अदालत के समक्ष वकील के माध्यम से अपना बयान दर्ज करवाया दिया है। कंगना रनौत अभिनेता सुशांत सिंह राजपूत के निधन के बाद से ही लगातार चर्चाओं में बनी हुई हैं। सुशांत की मौत के बाद उन्होंने अपने एक बयान में बॉलीवुड में फैले ड्रग रैकेट के बारे में कई बयान दिए थे, जिसके बाद बॉलीवुड दो गुटों में बंट गया था।

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Dakhal News 4 December 2020

दखल क्यों

वाल्ट डिज्नी के जन्मदिवस (5 दिसम्बर) पर विशेष योगेश कुमार गोयल 5 दिसम्बर 1901 को जन्मे वाल्टर एलियास वाल्ट डिज्नी द्वारा मूल रूप से अमेरिका के कैलिफोर्निया के एनाहिम स्थित 'डिज्नीलैंड' एक ऐसा मनोरंजन और थीम पार्क है, जहां दुनियाभर से आनेवाले बच्चों के साथ-साथ बड़े भी मस्ती करते हैं। यह ऐसी जगह है, जहां कल्पनाओं से भरी अनूठी दुनिया हर किसी को आनंदित करती है। वाल्ट डिज्नी द्वारा बनवाए गए डिज्नीलैंड में प्रतिवर्ष करीब एक करोड़ साठ लाख पर्यटक पहुंचते हैं, जहां अभीतक 50 करोड़ से भी ज्यादा पर्यटक पहुंच चुके हैं। इन पर्यटकों में कई देशों के राष्ट्रपति, राष्ट्राध्यक्ष तथा अनेक शाही लोग भी शामिल हैं। डिज्नीलैंड का नाम इसके संस्थापक वाल्ट डिज्नी के नाम पर रखा गया। वाल्ट डिज्नी एक ऐसे थीम पार्क का निर्माण चाहते थे जहां माता-पिता और बच्चे, एकसाथ आनंद ले सकें। डिज्नीलैंड के रूप में उन्होंने अपने इसी विचार को मूर्त रूप दिया। वर्ष 1940 के आसपास की बात है, जब एकबार रविवार के दिन वाल्ट डिज्नी अपनी दोनों बेटियों डियान और भोरॉन के साथ ग्रिफिश पार्क में घूमने गए। हालांकि वहां दूसरे बच्चे मस्ती कर रहे थे लेकिन उनकी बेटियों को वह पार्क इतना अच्छा नहीं लगा। तब वाल्ट डिज्नी के मन में विचार आया कि क्यों न ऐसी जगह विकसित की जाए, जहां बच्चों के साथ-साथ बड़े भी भरपूर मस्ती कर सकें। उसी के बाद वाल्ट डिज्नी थ्रिलर और मस्ती से भरी ऐसी ही दुनिया के निर्माण में जुट गए। कहा जाता है कि वाल्ट डिज्नी 'डिज्नीलैंड' की स्थापना करने के मुकाम तक पहुंचने में करीब तीन सौ बार असफल हुए किन्तु उन्होंने हार नहीं मानी। काफी लंबे प्रयासों तथा अथक परिश्रम के बाद 'डिज्नीलैंड' के रूप में उनका सपना साकार हुआ, जो आज दुनियाभर में हर किसी के आकर्षण का केन्द्र है। असफलताओं से जूझते-जूझते सफलता के इतने बड़े मुकाम तक पहुंचने की उनकी यह कहानी, ऐसे लोगों के लिए बड़ी प्रेरणा है, जो एक-दो बार की असफलता से ही हार मानकर जीवन से निराश हो जाते हैं। वाल्ट डिज्नी जब 19 साल के थे, तब उन्होंने अपने दोस्त के साथ मिलकर एक कमर्शियल आर्टिस्ट कम्पनी की नींव रखी। उस समय वे कई अखबारों और प्रकाशकों के लिए कार्टून बनाया करते थे। 16 अक्तूबर 1923 को उन्होंने अपने भाई के साथ मिलकर 'डिज्नी ब्रदर्स कार्टून स्टूडियो' की नींव रखी। बहुत थोड़े समय में डिज्नी के कार्टून्स की लोकप्रियता इतनी बढ़ गई कि लोग चिट्ठियां लिख-लिखकर उनके स्टूडियो में आने की इच्छा जताने लगे। उनका स्टूडियो छोटा था इसलिए उन्होंने ऐसा थीम पार्क बनाने के अपने आइडिया को मूर्त रूप देने का निश्चय किया, जहां लोग दिनभर परिवार के साथ खूब मस्ती कर सकें। हालांकि पहले इस पार्क को स्टूडियो के पास ही तीन एकड़ जगह पर बनाए जाने पर विचार हुआ किन्तु बाद में इसे एनाहिम में 65 एकड़ के विशाल क्षेत्र में बनाया गया। डिज्नीलैंड की स्थापना के बाद वाल्ट डिज्नी दुनियाभर के मनोरंजन पार्कों में घूम-घूमकर देखते रहे कि वहां लोगों की दिलचस्पी किन-किन चीजों में है, उसी के आधार पर डिज्नीलैंड में भी वे उन सभी चीजों का समावेश करते रहे, जो लोगों को ज्यादा आकर्षित करती थी। 'वाल्ट डिज्नी पार्क्स' के स्वामित्व वाले डिज्नीलैंड की स्थापना 17 जुलाई 1955 को हुई थी। उस दिन सजीव टेलीविजन प्रसारण के साथ डिज्नीलैंड का पूर्वावलोकन किया गया था, जिसे आर्ट लिंकलेटर और रोनाल्ड रीगन द्वारा आयोजित किया गया था। उसके अगले दिन 18 जुलाई 1955 को डिज्नीलैंड को आम लोगों के लिए खोल दिया गया, जहां एक डॉलर मूल्य का इसका सबसे पहला टिकट इसके संस्थापक वाल्ट डिज्नी के भाई ने खरीदा था। आजकल यहां के एकदिन के टिकट की कीमत सौ डॉलर से भी ज्यादा है। 17 जुलाई को ओपनिंग के दिन हालांकि वाल्ट डिज्नी ने ओपनिंग सेरेमनी में कुछ खास मेहमानों के अलावा कुछ पत्रकारों को ही आमंत्रित किया था किन्तु इस समारोह में करीब 28 हजार लोग पहुंचे गए। इनमें से आधे से भी ज्यादा ऐसे लोग थे, जिन्हें कोई आमंत्रण नहीं दिया गया था। डिज्नीलैंड के उस समारोह का सीधा प्रसारण किया गया था। लोगों की अचानक उमड़ी भीड़ के चलते चारों तरफ अव्यवस्था का आलम बन गया था। पीने के पानी की कमी हो गई थी, बेहद गर्मी के चलते कुछ ही समय पहले वहां कुछ जगहों पर जमीन पर डाला गया तारकोल पिघलने से महिलाओं की सैंडिलें उसपर चिपक रही थी। जो कोल्ड ड्रिंक कम्पनी डिज्नीलैंड की उस ओपनिंग सेरेमनी को स्पांसर कर रही थी, उसने पानी की कमी होने पर नलों से पानी आना बंद होने पर नलों के पास ही कोल्ड ड्रिंक बेचना शुरू कर दिया था, जिससे लोगों में खासी नाराजगी भी उत्पन्न हो गई थी। यही वजह रही कि डिज्नीलैंड के 'ओपनिंग डे' को 'ब्लैक संडे' के नाम से भी जाना जाता है। 'वाल्ट डिज्नी पार्क्स' द्वारा 'डिज्नीलैंड' के अलावा 'डिज्नीलैंड रिसोर्ट कॉम्प्लेक्स' का भी संचालन किया जाता है। डिज्नीलैंड को इस रिसोर्ट कॉम्पलैक्स से भिन्नता प्रदान करने के लिए 1998 में डिज्नीलैंड को 'डिज्नीलैंड पार्क' नाम दिया गया। डिज्नीलैंड की सबसे खास बात यह है कि यहां के हर हिस्से में काम करने वाले कर्मचारी सदैव चेहरे पर मुस्कराहट के साथ नजर आएंगे किन्तु यहां की एक जगह ऐसी है, जहां कर्मचारियों को मुस्कुराने की इजाजत नहीं है। यह जगह है डिज्नीलैंड का 'हांटेड हाउस', जिसके बारे में कुछ लोगों का यह भी मानना है कि इसमें वास्तव में 'भूत' भी हो सकते हैं। कुछ समय पहले तक इस 'हांटेड हाउस' में पर्यटक सेल्फी स्टिक के साथ सेल्फी के लिए आते थे किन्तु अब इसमें सेल्फी स्टिक लेकर जाने पर पाबंदी लगा दी गई। वैसे तो पूरा डिज्नीलैंड कल्पनाओं, रहस्य और रोमांच से भरा है, फिर भी मिकी माउस, मिनी माउस, प्रिंसेस टियाना, टिंकर बेल, गूफी, पूह जैसे डिज्नी कार्टून कैरेक्टर्स के साथ अलग-अलग थीम पर बने डिज्नीलैंड में पेड़ पर टारजन का घर, इंडियाना जोंस, टेंपल ऑफ द फॉरबिडेन आई, पायरेट्स ऑफ द कैरेबियन, माउंटेड मेंसन, पैसेंजर ट्रेन, रोमांच से भरी जंगल लाइफ, फेरिस व्हील, स्काई राइड इत्यादि हर समय आकर्षण का मुख्य केन्द्र बने रहते हैं। बच्चे टीवी पर जिस मिकी माउस और मिनी माउस को देखकर खुश होते हैं, वे उन्हें यहां जगह-जगह घूमते-फिरते, बातें करते और डांस करते नजर आएंगे। इस खूबसूरत मनोरंजन पार्क में 'मिकी टूनटाउन' में बच्चों के इन पसंदीदा कार्टून कैरेक्टर्स का घर बनाया गया है। हालांकि 1971 में फ्लोरिडा के ऑरलैंडो में डिज्नी वर्ल्ड, 1983 में टोक्यो में डिज्नीलैंड, 1992 में पेरिस में यूरो डिज्नीलैंड तथा 2005 में हांगकांग डिज्नीलैंड की भी स्थापना हुई है किन्तु अमेरिका के कैलिफोर्निया के एनाहिम में स्थित 'डिज्नीलैंड' सबसे पुराना और सबसे विस्तृत डिज्नीलैंड है। इसका कुल क्षेत्रफल 73.5 हेक्टेयर है, जिसमें से 30 हेक्टेयर में थीम पार्क है। बताया जाता है कि यह इतना विशाल मनोरंजन पार्क है कि इसके संचालन और देखभाल के लिए यहां 65 हजार से भी ज्यादा कर्मचारी कार्यरत हैं। 2017 में मनोरंजन के उद्देश्य से यहां करीब 1.83 करोड़ पर्यटक आए थे। दुनियाभर के किसी भी अन्य मनोरंजन पार्क में एक साल में इतने ज्यादा पर्यटक कभी नहीं पहुंचे। (लेखक स्वतंत्र टिप्पणीकार हैं।)

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Dakhal News 4 December 2020

शहनाज हुसैन फूलों की पंखुड़ियां महिलाओं की सुन्दरता में चार चांद लगाती रही हैं। भारत में सदियों से फूलों की पंखड़ियों से हर्बल सौंदर्य उत्पाद बनाये जाते रहे हैं। बहुराष्ट्रीय कंपनियों के सौंदर्य प्रसाधन बाजार में उतरने से पहले महिलायें सौंदर्य निखारने के लिए फूलों को उपयोग में लाती रही हैं। फूलों को पूजा, जन्मदिवस, विवाह, पार्टियों तथा विभिन आयोजनों में सजावट के लिए प्रयोग किया जाता है। रासायनिक सौन्दर्य प्रसाधनों के बाजार में आने से पहले फूल महिलाओं की त्वचा तथा बालों के सौन्दर्य को निखारने में प्रयोग किये जाते रहे हैं। इन्हीं फूलों को अगर आप सौन्दर्य निखारने में भी प्रयोग में लाती हैं तो आप बिना किसी सौन्दर्य प्रसाधन के दमकती त्वचा तथा चमकीले बाल प्राप्त कर सकती हैं। आज भले ही फूलों के सौंदर्य उत्पाद आकर्षक पैक में महंगे दामों पर बाजार में उपलब्ध हैं लेकिन इन उत्पादों की शेल्फ लाइफ को लम्बे समय तक बनाये रखने के लिए जिन रासायनिक पदार्थों का प्रयोग किया जाता है वह फायदे की बजाय नुकसान ज्यादा करते हैं। ऐसे में अगर आप थोड़ा समय निकल कर घर में फूलों के सत से हर्बल उत्पाद तैयार कर सौंदर्य निखारने का प्रयोग करें तो इससे जहाँ पैसे की बचत होगी वहीं आपकी आभा में चार चाँद लगेंगे। गुलाब, लेवेन्डर, जैसमिन, गुड़हर आदि फूलों का उपयोग करके आप प्राकृतिक सौन्दर्य प्राप्त कर सकती हैं। फूलों से वातावरण में वनस्पतिक उर्जा मिलती है। फूलों की सुगन्ध तथा रंगों से न केवल हमारी इन्द्रियां आनन्दित महसूस होती हैं बल्कि फूलों में ताकतवर गुणकारी तत्व भी विद्यमान होते हैं। अनेक फूलों की प्रजातियों की सुगन्ध से ही मानसिक शांति प्राप्त हो जाती है। प्राचीनकाल में गुलाब, चमेली, लवेन्डर तथा नारंगी फूलों से मानसिक विकारों से ग्रस्त रोगियों का इलाज किया जाता था। आधुनिक सौन्दर्य देखभाल में सुन्दरता ग्रहण करने के लिए मानसिक तनाव से मुक्ति को परम आवश्यक माना गया है। सौन्दर्य से जुड़ी अनेक समस्यायें जैसे बालों का गिरना, गंजापन, कील-मुहांसे आदि मानसिक तनाव की देन माने जाते हैं। फूलों की सुगन्ध से तनाव से मुक्ति के साथ शरीर में शांतिदायक तथा ताजगी के पलों का एहसास मिलता है। ब्यूटी सैलूनों में सौन्दर्य उपचार के लिए सौन्दर्य उत्पादों में फूलों के सत्त तथा सुगन्धित तेल का व्यापक रूप से उपयोग किया जाता है। तिल, नारियल, जैतून तथा बादाम आदि का प्रेसड ऑयल सुगन्धित तेल से बिल्कुल भिन्न है। सुगन्धित तेल प्राकृतिक रूप में काफी जटिल होते हैं तथा सुगन्धित तेल पौधों के सुगन्धित हिस्से से संघटित होते हैं। यह पौधे की प्राण शक्ति माने जाते हैं। सुगन्धित तेलों को औषधीय तेलों के साथ-साथ सुगन्ध के लिए जाना जाता है। गुलाब, चन्दन, मोंगरा, चमेली, लवेन्डर आदि फूलों की महक सुगन्धित तेलों की वजह से होती है तथा इन फूलों के सुगन्धित तेलों को सौन्दर्य निखारने में बखूबी प्रयोग किया जाता है। हमें यह सचेत रहने की जरूरत है कि सुगन्धित तेलों को दूसरे बादाम, तिल, जैतून तथा गुलाब जल लोशन से मिश्रित करके ही उपयोग में लाना चाहिए तथा सुगन्धित तेलों को विशुद्ध रूप से कभी उपयोग में नहीं लाना चाहिए। फूलों से घरेलू सौन्दर्य गुलाबजल को त्वचा का बेहतरीन टोनर माना जाता है। थोड़े से गुलाबजल को एक कटोरी में ठंडा करें। काॅटनवूल की मदद से ठंडे गुलाब जल से त्वचा को साफ करें तथा त्वचा को हल्के-हल्के थपथपायें। इससे त्वचा में यौवनता तथा स्वास्थ्यवर्धक बनाये रखने में मदद मिलती है। यह गर्मियों तथा बरसात ऋतु में काफी उपयोगी साबित होता है। तैलीय त्वचा के लिएः एक चम्मच गुलाबजल में दो-तीन चम्मच नींबू का रस मिलायें तथा इस मिश्रण में काॅटनवूल पैड डुबोकर इससे चहरे को साफ करें। इससे चेहरे पर जमा मैल, गन्दगी, पसीने की बदबू को हटाने में मदद मिलेगी। ठंडा सत्त तैयार करने के किए जपा पुष्प के फूल तथा पत्तियों को एक तथा छह के अनुपात में रात्रिभर ठण्डे पानी में रहने दें। फूलों को निचोड़कर प्रयोग करने से पहले पानी को बहा दें। इस सत्त को बालों तथा सिर को धोने के लिए प्रयोग में ला सकते हैं। इस सत्त या फूलों के जूस में मेहंदी मिलाकर बालों पर लगाने से बालों को भरपूर पोषण मिलता है तथा यह बालों की कंडीशनिंग उपचार के लिए प्रयोग में लाया जाता है। गेंदे या केलैन्डयुला के ताजा या सूखे पत्तों का भी प्राकृतिक सौन्दर्य में उपयोग किया जा सकता है। चार चम्मच फूलों को उबलते पानी में डालिये लेकिन इसे उबालें नहीं। फूलों को 20 या 30 मिनट तक गर्म पानी में रहने दीजिए। इस मिश्रण को ठंडा होने के बाद पानी को निकाल दें तथा मिश्रण को बालों के संपूर्ण रोगों के उपचार के लिए प्रयोग में लाया जा सकता है। ठंडे पानी से चेहरे को धोने से चेहरे में प्राकृतिक निखार आ जायेगा। इस मिश्रण से तैलीय तथा कील-मुहांसों से प्रभावित त्वचा को अत्यधिक फायदा मिलता है। (लेखिका अन्तर्राष्ट्रीय ख्यातिप्राप्त सौन्दर्य विशेषज्ञा हैं।)

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Dakhal News 3 December 2020

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