विशेष

भोपाल। मध्यप्रदेश के बासमती चावल को भौगोलिक संकेत टैग (जीआई टैगिंग) दिलाने के लिए मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान लगातार प्रयास कर रहे हैं, लेकिन पंजाब सरकार ने इसका विरोध किया है। पंजाब के मुख्यमंत्री अमरिंदर सिंह ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को एक पत्र लिखकर कहा है कि मप्र के बासमती चावल को जीआई टैगिंग न दी जाए। इस मामले में मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने अमरिंदर द्वारा भेजे गए पत्र की निंदा की है। साथ ही कहा है कि उन्हें मध्यप्रदेश के किसानों से क्या दुश्मनी है?   मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान गुुरुवार को सिलसिलेवार ट्वीट करते हुए कहा है कि ‘मैं पंजाब की कांग्रेस सरकार द्वारा मध्यप्रदेश के बासमती चावल को जीआई टैगिंग देने के मामले में प्रधानमंत्री जी को लिखे पत्र की निंदा करता हूं और इसे राजनीति से प्रेरित मानता हूं। मैं पंजाब के मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह से यह पूछना चाहता हूँ कि आखिर उनकी मध्यप्रदेश के किसान बन्धुओं से क्या दुश्मनी है? यह मध्यप्रदेश या पंजाब का मामला नहीं, पूरे देश के किसान और उनकी आजीविका का विषय है।’   उन्होंने लिखा है कि ‘मध्य प्रदेश को मिलने वाले जीआई टैगिंग से अंतरराष्ट्रीय बाजारों में भारत के बासमती चावल की कीमतों को स्टेबिलिटी मिलेगी और देश के निर्यात को बढ़ावा मिलेगा। मध्य प्रदेश के 13 जिलों में वर्ष 1908 से बासमती चावल का उत्पादन हो रहा है, इसका लिखित इतिहास भी है।’   मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा है कि पाकिस्तान के साथ एपीईडीए के मामले का मध्यप्रदेश के दावों से कोई संबंध नहीं है क्योंकि यह भारत के जीआई एक्ट के तहत आता है और इसका बासमती चावल के अंतर्देशीय दावों से इसका कोई जुड़ाव नहीं है। पंजाब और हरियाणा के बासमती निर्यातक मध्यप्रदेश से बासमती चावल खरीद रहे हैं। भारत सरकार के निर्यात के आंकड़े इस बात की पुष्टि करते हैं। भारत सरकार वर्ष 1999 से मध्यप्रदेश को बासमती चावल के ब्रीडर बीज की आपूर्ति कर रही है।’   उन्होंने लिखा है कि ‘सिंधिया स्टेट के रिकॉर्ड में अंकित है कि वर्ष 1944 में प्रदेश के किसानों को बीज की आपूर्ति की गई थी। इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ राईस रिसर्च, हैदराबाद ने अपनी 'उत्पादन उन्मुख सर्वेक्षण रिपोर्ट' में दर्ज किया है कि मध्यप्रदेश में पिछले 25 वर्ष से बासमती चावल का उत्पादन किया जा रहा है।’   गौरतलब है कि पंजाब के मुख्यमंत्री अमरिंदर सिंह ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को बुधवार को एक पत्र लिखा है, जिसमें उन्होंने मध्यप्रदेश के बासमती चावल को जीआई टैगिंग नहीं देने की मांग करते हुए कहा है कि इससे पाकिस्तान को फायदा होगा। मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने उनके इस बयान की निंदा करते हुए उन पर निशाना साधा है।

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Dakhal News 6 August 2020

  भोपाल। मध्य प्रदेश में 27 विधानसभा सीटों पर उपचुनाव होने वाले हैं। इसको लेकर भाजपा और कांग्रेस के नेता किसान, बेरोजगारी, कर्जमाफी, महिला सुरक्षा जैसे मामलों पर एक दूसरे को घेरने की तैयारी में हैं। वहीं, अब उपचुनाव के मुद्दों में राम मंदिर भी शामिल हो गया है। भाजपा के साथ कांग्रेस भी राम मंदिर के नाम पर वोट मांगने की रणनीति बना रही है। कांग्रेस की रणनीति पर मप्र के गृह एवं जेल मंत्री नरोत्तम मिश्रा ने निशाना साधा है। कांग्रेस कार्यालय के राममय होने पर गृह मंत्री नरोत्तम मिश्रा ने कहा है कि यही तो हम चाहते थे, सियाराम मय सब जग जानी। सारा जग सियाराम हो जाए, इससे ज्यादा और अच्छे दिन क्या चाहिए। कितने अच्छे दिन आ गए हैं, पीसीसी में भगवान राम लग जाए, यही हमारी कल्पना थी कि सब सियाराम मय हो।   गृहमंत्री नरोत्तम मिश्रा ने गुरुवार को मीडिया से बातचीत में कहा कि सवाल पार्टी की नीति का नहीं, राष्ट्र का है, बीजेपी जितने निर्णय लेती है वह राष्ट्रहित के होते हैं। बहुजन हिताय, बहुजन सुखाय यह सोच लेकर के राजनीति में आते हैं। गृह मंत्री अमित शाह ने जो कहा वह किया, भाजपा की यही विशेषता है जो कहती है वह करती है, आज ना दो प्रधान है ना दो विधान। हमने कहा था एक देश में दो विधान दो प्रधान नहीं चलेंगे, आज भारत और कश्मीर का संविधान एक है। हमने कहा था सौगंध खाते हैं मंदिर वहीं बनाएंगे, बना दिया। हमने कहा ट्रिपल तलाक हटाएंगे, हटा दिया। भाजपा एकमात्र पार्टी है जो कहती है, वो करती है। वहीं उपचुनाव में राम मंदिर को मुद्दा बनाने की कांग्रेस की तैयारी पर गृह मंत्री नरोत्तम मिश्रा ने कहा कि कांग्रेस के सारे वकील राम मंदिर के खिलाफ कोर्ट में लड़ चुके हैं। राम मंदिर को लेकर कांग्रेस का विरोध रिकॉर्ड में है। तमिलनाडु सरकार ने हलफनामा देकर राम को काल्पनिक बताया था, रामसेतु को हमेशा कांग्रेस में काल्पनिक बताया था। राम के ऊपर सवाल उठाने वाले अब कैसे ऐसा कह सकते हैं।   कांग्रेस का काम सिर्फ कमियां निकालनापूर्व सीएम कमलनाथ के शिलान्यास में आमंत्रित सदस्यों को लेकर सवाल खड़े करने पर मंत्री मिश्रा ने कहा कि कांग्रेस का काम सिर्फ कमियां निकालना है। कमलनाथ को मध्य प्रदेश के किसानों की चिंता करनी चाहिए, मध्य प्रदेश के किसानों पर पंजाब की सरकार कुठाराघात कर रही है। पंजाब सरकार बासमती चावल पर आपत्ति लगा रही है। इस पर कमलनाथ मौन क्यों है। किसानों के नाम पर झूठे वादे कर कांग्रेस ने सरकार बना दिया और आज भी किसानों के साथ धोखा कर रही हैं। जब जब किसान की बात आती है कांग्रेस के सभी नेता खामोश रहते हैं।   किसानों के हित में बनाई कृषि कैबिनेट प्रदेश सरकार द्वारा कृषि कैबिनेट बनाए जाने पर मंत्री मिश्रा ने कहा कि किसानों के हितों की चर्चा के कृषि कैबिनेट लिए बनाई गई है। बैठक होगी तो किसानों के हितों पर चर्चा की जाएगी। उन्होंने कहा कि  मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के लिए किसान हमेशा प्राथमिकता में रहे हैं। पहले भी कृषि कैबिनेट बनाई गई, पहले भी कृषि का बजट मध्य प्रदेश के विधानसभा में अलग से प्रस्तुत हुआ है। मंत्री मिश्रा ने बताया कि देश में पहला ऐसा प्रदेश जहां कृषि कैबिनेट बनी है। किसान का बेटा मुख्यमंत्री है तो स्वाभाविक है मध्य प्रदेश में किसानों के हित में फैसले होंगे। कांग्रेस पर साधा निशाना पंजाब सरकार के बासमती टैग का विरोध करने पर मंत्री नरोत्तम मिश्रा ने कांग्रेस पर निशाना साधते हुए कहा कि पंजाब में कांग्रेस की सरकार है और कांग्रेस हमेशा से ही किसान विरोधी रही है। मामला कृषि समिति पर विचाराधीन है और दिल्ली सरकार फैसला करेगी। इस पर मध्य प्रदेश में पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ बताएं वह किसके साथ है।  

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Dakhal News 6 August 2020

राजनीति

भोपाल। किसान चाहे पंजाब के हों या मध्यप्रदेश के, उन्होंने कृषि उत्पादन बढ़ाने के लिए जी तोड़ परिश्रम किया है। पंजाब ने अगर सारे देश को खेती से समृद्धि हासिल करने का रास्ता दिखाया है तो वह उसके किसानों के परिश्रम के बलबूते पर ही संभव हुआ है और अगर आज मध्यप्रदेश समर्थन मूल्य पर सबसे ज्यादा गेहूं खरीदी वाला राज्य बना है तो वह भी किसानों की मेहनत का नतीजा है। ऐसे में सिर्फ राजनीतिक नजरिए से देखकर मध्यप्रदेश और पंजाब के किसानों में भेद करना उनके परिश्रम का अपमान है। पंजाब के मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदरसिंह को इससे बचना चाहिए। यह बात भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष विष्णुदत्त शर्मा ने गुरुवार को मध्यप्रदेश को बासमती की जीआई टैगिंग  के संबंध में पंजाब के मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदरसिंह द्वारा प्रधानमंत्री को पत्र लिखे जाने को अनुचित बताते हुए कही।   उन्होंने कहा कि मध्यप्रदेश में बासमती चावल की खेती का पुराना इतिहास रहा है। देश की आजादी के काफी पहले से प्रदेश के कई जिलों में बासमती चावल की खेती होती रही है। अब तो मध्यप्रदेश के कई जिले चावल उत्पादक हो गए हैं, लेकिन 1940 के दशक के सिंधिया स्टेट के दस्तावेजों से भी प्रदेश के 13 जिलों में धान की खेती की पुष्टि होती है। वहीं, भारत सरकार द्वारा भी प्रदेश में खेती के लिए ब्रीडर बीज उपलब्ध कराए जाने के प्रमाण हैं। ऐसी स्थिति में मध्यप्रदेश के बासमती चावल को जीआई टैगिंग मिलने पर किसी को कोई आपत्ति नहीं होना चाहिए।   उन्होंने कहा कि जहां तक अंतरराष्ट्रीय बाजार की बात है, तो उसमें भी प्रदेश को जीआई टैगिंग मिलने से बासमती की कीमत को स्थिरता ही मिलेगी। सिर्फ इस वजह से मध्यप्रदेश को जीआई टैगिंग मिलने का विरोध करना कि मध्यप्रदेश में भाजपा सरकार है और पंजाब कांग्रेस शासित राज्य है, प्रदेश के लाखों किसानों के साथ अन्याय है। उन्होंने कहा कि कैप्टन अमरिंदरसिंह को एक किसान के नजरिए से इस मुद्दे से देखना चाहिए, सिर्फ राजनीतिक नजरिए से नहीं।   छोटे नजरिये नहीं, बड़े दिल से सोचें कै.अमरिंदर सिंह   शर्मा ने कहा कि आज मध्यप्रदेश ने गेहूं खरीदी में जो रिकॉर्ड बनाया है, उसके पीछे किसानों की मेहनत तो है ही, प्रदेश की भाजपा सरकार की सोच और 15 सालों का श्रम भी है। इन 15 सालों में भाजपा सरकार ने सिंचाई सुविधाएं बढ़ाई, बिजली की उपलब्धता बढ़ाई, शून्य प्रतिशत पर कर्ज उपलब्ध कराया और हर आपदा में किसानों का साथ दिया। देश में लंबे समय तक पंजाब खेती के मामले में रोल मॉडल रहा है। उस समय किसी राज्य को इससे परेशानी नहीं हुई, लेकिन आज मध्यप्रदेश के नंबर-1 बनने पर पंजाब के मुख्यमंत्री का रवैया बताता है कि कहीं न कहीं वो संकुचित नजरिया रखते हैं। शर्मा ने कहा कि मध्यप्रदेश के किसानों के प्रति दुर्भावना दिखाने की बजाय कैप्टन अमरिंदरसिंह को यह सोचना चाहिए कि कहीं, पंजाब के पिछड़ने की वजह कांग्रेस सरकार की नीतियां तो नहीं हैं? उन्होंने कहा कि देश के किसानों की आय बढ़े, खेती लाभ का धंधा बने, इन सब के लिए आज एक बड़े दिल की जरूरत है, संकुचित दृष्टिकोण की नहीं।

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Dakhal News 6 August 2020

भोपाल। मप्र विधानसभा के अध्यक्ष रामेश्वर शर्मा ने गुरुवार को विधानसभा के वर्तमान एवं पूर्व सदस्यों के लिए भोपाल के रचना नगर में आवास संघ द्वारा बनाये जा रहे आवासों का स्थल निरीक्षण किया तथा विधानसभा, आवास संघ,नगर निगम एवं विद्युत विभाग के अधिकारियों के साथ बैठक की। इस दौरान विधानसभा अध्यक्ष शर्मा ने अधिकारियों को निर्माणाधीन आवासों का कार्य पूर्ण कर 31 अगस्त तक पात्र हितग्राहियों को आधिपत्य सौंपे जाने के निर्देश दिए। शर्मा ने बताया कि जिन 117 हितग्राहियों द्वारा राशि जमा कर दी गई है, उन्हें 21 अगस्त को लॉटरी के माध्यम से आवासों का आवंटन किया जाएगा। इसके लिए पांच विधायकों की समिति भी गठित कर दी गई है। उन्होंने कहा कि नियत समय पर आवासों का आधिपत्य न मिलने पर संबंधित निर्माण एजेंसी पर जुर्माना भी अधिरोपित किया जाएगा।उल्लेखनीय है कि भोपाल के रचना नगर में आवास संघ द्वारा वर्तमान एवं पूर्व विधायकों हेतु आवासों का निर्माण किया जा रहा है।इस कार्य योजना का भूमि पूजन जुलाई 2016 में किया गया था। निरीक्षण के दौरान विधानसभा के प्रमुख सचिव एपी सिंह, नगर निगम आयुक्त केवीएस चौधरी, आवास संघ के प्रबंध संचालक अरविंद सिंह सेंगर सहित अन्य अधिकारी मौजूद थे।

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Dakhal News 6 August 2020

मीडिया

ये खबर मेरे जैसों के लिए है जो कोरोना को हलके में लेते हैं. इधर उधर फुदकते रहते हैं. विजय विनीत जी बनारस के दबंग और मुखर पत्रकारों में से एक हैं. आम जन के दुखों, जनता से जुड़ी खबरों को लेकर शासन प्रशासन से टकराना इनकी फितरत है. इन्हें जब कोरोना का संक्रमण हुआ तो तनिक भी अंदाजा न था कि मरते मरते बचेंगे. यूं कहें कि ये मर ही गए थे, बस अपनी जीवटता और कुछ डाक्टरों की जिद के चलते जी गए. कृपया सावधान रहें. घर में रहें. बहुत जरूरी हो तो ही निकलें. कोरोना का कोई इमान धर्म नहीं है. कब किसे कहां पकड़ ले और मार डाले, कुछ कहा नहीं जा सकता. विजय विनीत जी ने अपनी स्टोरी विस्तार से लिखी है, पढ़िए पढ़ाइए और बहुत जरूरी न हो तो चुपचाप घर में बैठे रहिए. मुझे भी कुछ फीडबैक हैं. गर्दन, कंधे व हाथ के दर्द के कारण मैं फिजियोथिरेपी कराने जिस डाक्टर के पास जाता था, उनकी पत्नी एक सरकारी अस्पताल (ईपीएफ वाले) में हेड नर्स हैं. उनके फिजियोथिरेपिस्ट पति बता रहे थे कि वाइफ जहां काम करती हैं वहां के अस्पताल में तैनात मेडिकल स्टाफ में अघोषित तौर पर ये सहमति है कि जिन कोरोना मरीजों की हालत बिगड़ गई हो उसे छूना-छेड़ना नहीं है. उसे मरने के लिए छोड़ देना है क्योंकि उन्हें ठीक करने की लंबी कवायद में मेडिकल स्टाफ संक्रमित हो सकता है. उनने बताया कि कोरोना संक्रमित कई मरीजों को बचाया जा सकता था लेकिन मेडिकल स्टाफ के बीच एक मूक सहमति के चलते कोई मरीज के पास जाकर उसे बचाने की कवायद में खुद संक्रमित होने का जोखिम उठाने के लिए तैयार नहीं हुआ. मैं तो सुनकर दंग रह गया. मतलब जब हालत खराब हो और मदद की जरूरत हो तब मरने के लिए छोड़ दीजिए. जब माइल्ड लक्षण हों तो बस खाना वगैरह भिजवा कर अकेले पड़े पड़े डिप्रेशन में जाने के लिए छोड़ दीजिए. आप ठीक हो जाएं या मर जाएं, ये आपका भाग्य है. वैसे भी कोरोना पेशेंट के लिए आजकल अस्पतालों में न बेड है, न गंभीर रूप से बीमार मरीजों के लिए आक्सीजन सिलेंडर. जो कुछ हैं भी तो वो बड़े व वीवीआईपी के लिए आरक्षित-सुरक्षित हैं. ज्यादा बड़े वीवीआईपी तो मैक्स व मेदांता जैसे प्राइवेट अस्पतालों में इलाज करा रहे हैं. ग़ज़ब है ये देश. ग़ज़ब है इस देश के हुक्मरां जिन्होंने अपनों की जेबें तो खूब भरी-भरवाईं लेकिन देश की जनता के इलाज के लिए बुनियादी सुविधाएं मुहैया न करा सके. हर कोई विजय विनीत जी जैसा भाग्यशाली नहीं है कि उन्हें मुश्किल वक्त में कुछ जिद्दी डाक्टर मिल जाएं. हर कोई विजय विनीत जैसा इच्छा शक्ति रखने वाला भी नहीं है. विजय विनीत की कहानी हमें डराती है. विजय विनीत की कहानी हमें बताती है फिलहाल तो सारी सत्ताओं से बड़ी मौत की सत्ता है जो अदृश्य होकर यहां वहां जहां तहां विराजमान है. कौन इसकी गिरफ्त चपेट में आएगा, न मालूम. ऐसे में जरूरी है कि हम आप यथासंभव प्रीकाशन रखें. जीवन-मृत्यु को उदात्तता से समझने-बूझने की प्रक्रिया शुरू कर दें ताकि मौत आए भी तो उसके साथ जाने में कोई मलाल शेष न रहे. हालांकि ये भी जान लीजिए कि मरता वही है जो दिमागी से रूप से मरने के लिए तैयार हो जाए. विजय विनीत जैसी कहानियां बताती हैं कि जिनमें जिजीविषा है, वो मौत को मात देकर उठ खड़े होते हैं. तो, समझिए बूझिए सब कुछ, पर जिजीविषा तगड़ी वाली बनाकर रखिए. जैजै भड़ास एडिटर यशवंत सिंह की एफबी वॉल से.

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Dakhal News 4 August 2020

भोपाल। सदाबहार गायक, अभिनेता किशोर कुमार की आज मंगलवार को जंयती है। बॉलीवुड की फिल्मों में कई शानदार गानों को अपनी आवाज देने वाले किशोर कुमार का जन्म 4 अगस्त 1929 को मध्य प्रदेश के खंडवा में हुआ था और उनका निधन 13 अक्टूबर को 1987 में हुआ। किशोर कुमार का असली नाम आभास कुमार गांगुली था। बॉलीवुड में कई सिंगर्स आए और गए लेकिन किशोर कुमार की आवाज का जादू आज भी बरकरार है। किशोर कुमार अभिन्न प्रतिभा के धनी थे। इसके अलावा वो व्यवहार से मजाकिया और मस्तमौला किस्म के इंसान थे। अब किशोर कुमार तो हमारे बीच नहीं पर उनकी यादें आज भी जिंदा हैं।   किशोर कुमार की जयंती पर आज उन्हें हर कोई याद कर रहा है। आम आदमी से लेकर राजनेता तक उन्हें याद कर श्रद्धांजलि दे रहे हैं। मप्र के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने भी किशोर कुमार को जयंती पर स्मरण कर उन्हें नमन किया है। उन्होंने ट्वीट कर कहा ‘जिंदगी के हर पल को जिंदादिली के साथ जीने वाले, महान गायक, अभिनेता स्व. किशोर कुमार की जयंती पर नमन। वह बहुत शान से 'किशोर कुमार खंडवे वाले' कहते हुए अपना परिचय देते थे। अपनी जड़ों से इतना प्रेम करने और सदा जुड़े रहने वाले अपने रत्न को मध्यप्रदेश कभी विस्मृत न कर सकेगा।   भाजपा राष्ट्रीय महासचिव कैलाश विजयवर्गीय ने अपने संदेश में कहा ‘चलते चलते, मेरे ये गीत याद रखना, कभी अलविदा ना कहना...हिंदी फिल्मों के प्रसिद्ध अभिनेता, संगीतकार, निर्माता-निर्देशक और साथ में एक उम्दा पाश्र्व गायक श्री किशोर कुमार जी की जयंती पर सादर नमन...।   गृहमंत्री नरोत्तम मिश्रा ने अपने ट्वीट में कहा ‘मप्र की माटी के सपूत किशोर कुमार जितने अच्छे गायक थे, उतने ही जिंदादिल इंसान। उनकी गाने की शैली अद्वितीय थी।

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Dakhal News 4 August 2020

समाज

शिवपुरी। जिले के पिछोर तहसील मुख्यालय स्थित बस स्टैंड पर लगी डॉ. भीमराव अंबेडकर की प्रतिमा को किसी अज्ञात व्यक्ति द्वारा बीती देर रात क्षतिग्रस्त कर दिया गया। यह घटना सीसीटीवी कैमरों में कैद हो गई। गुरुवार सुबह स्थानीय लोगों ने प्रतिमा को क्षतिग्रस्त देख पुलिस को सूचना दी। पुलिस ने अज्ञात आरोपित के खिलाफ प्रकरण दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। इधर, घटना को लेकर प्रदेश में राजनीति भी शुरू हो गई। बसपा नेताओं ने मामले को लेकर कलेक्टर को एक ज्ञापन सौंपा है, जिसमें आरोपित के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की गई है।   नगर पुलिस निरीक्षक अजय भार्गव के मुताबिक, घटना बीती देर रात की है। सीसीटीवी फुटेज से पता चला है कि एक युवक रात लगभग 10.45 बजे मुंह पर कपड़ा बांधकर वहां पहुंचा और मूर्ति को नुकसान पहुंचाया। पुलिस ने सीसीटीवी फुटेज के आधार पर प्रकरण दर्ज किया है और मामले की जांच की जा रही है।    बता दें कि मध्यप्रदेश में आने वाले दिनों में विधानसभा की रिक्त 27 सीटों पर उपचुनाव होने वाले हैं। इनमें शिवपुरी जिले की सीटें भी शामिल हैं। इसीलिए यह मुद्दा राजनीति का विषय बन गया है। बसपा ने इस मुद्दे को लपक लिया और गुरुवार सुबह ही पार्टी नेताओं-कार्यकर्ताओं ने नाराजगी जताते हुए कलेक्टर के नाम स्थानीय तहसील कार्यालय में एक ज्ञापन सौंपा।

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Dakhal News 6 August 2020

इंदौर। कोरोना संकट में करीब 130 दिन लॉक रहने के बाद शहर बुधवार से पूरी तरह अनलॉक हो गया। जिम, योग केंद्र, लाइब्रेरी, ब्यूटी पार्लर के शटर बुधवार से उठ गए। इसके अलावा इंदौर में लगे बाजारों पर प्रतिबंध को पूरी तरह से हटा लिया गया है। अब सभी के लिए एक जैसे नियम लागू होंगे।   जिला आपदा प्रबंधन समूह की बैठक के बाद कलेक्टर मनीष सिंह ने शहर के राजबाड़ा और आसपास के मध्य क्षेत्र जोन वन एरिया में फिलहाल लेफ्ट-राइट को खत्म कर दिया। मध्य क्षेत्र सहित पूरे जिले में सभी तरह की दुकानें और बाजार सप्ताह में छह दिन सुबह सात से रात आठ बजे तक खोले जा सकेंगे। कलेक्टर के अनुसार जिम, योगा केंद्र आदि को केंद्र द्वारा जारी गाइडलाइन का पालन करना होगा। 56 दुकान पर आकर ग्राहक टेक अवे सुविधा में सामग्री ले जा सकेंगे। हालांकि रात्रिकालीन कर्फ्यू अभी नहीं हटाया गया है और जिले में रात 9 से सुबह 5 बजे तक का कर्फ्यू जारी रहेगा। इसके साथ हर रविवार को टोटल लॉकडाउन भी रहेगा, इसमें केवल मेडिकल इमरजेंसी के लिए ही बाहर जा सकेंगे और दूध का वितरण भी केवल सुबह होगा।

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Dakhal News 5 August 2020

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देशवासियों के लिए आज का दिन खास है। भूमि पूजन से पहले पूरी अयोध्या सज-धज कर तैयार है। 90 वर्षीय गायिका लता मंगेशकर ने कहा कि है कि पूरा संसार बहुत खुश है और मानो आज हर धड़कन हर सांस कह रही है जय श्रीराम। उन्होंने ट्विटर पर एक वीडियो शेयर किया जिसमें वह राम भजन श्री राम रमा रमणम गा रही है। अयोध्या में राम मंदिर के भूमि पूजन को लेकर देशवासियों में उत्साह है।    स्वर कोकिला लता मंगेशकर ने लिखा-'नमस्कार। कई राजाओं का, कई पीढ़ियों का और समस्त विश्वके राम भक्तों का सदियों से अधूरा सपना आज साकार होता दिख रहा है। कई सालों के वनवास के बाद आज अयोध्या में प्रभु श्रीराम के मंदिर का पुनर्निर्माण हो रहा है, शिलान्यास हो रहा है। इसका बहुत बड़ा श्रेय माननीय लालकृष्ण अडवाणी जी को जाता है, क्योंकि उन्होंने इस मुद्दे को लेकर रथ यात्रा करके पूरे भारत में जनजागृति की थी और श्रेय माननीय बालासाहेब ठाकरे जी को भी जाता है। आज इस शिलान्यास का बहुत बड़ा आयोजन हो रहा है उसमें माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी, आरएसएस के सरसंघ चालक माननीय मोहन भागवत जी, उत्तर प्रदेश की राज्यपाल श्रीमती आनंदीबेन पटेल जी और राम जन्मभूमि न्यास अध्यक्ष नृत्य गोपाल दास जी, उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री माननीय योगी आदित्यनाथ जी और कई गणमान्य व्यक्तित्व उपस्थित होंगे। आज भले ही कोरोना की वजह से लाखों रामभक्त वहां पहुंच नहीं पाएंगे, परंतु उनके मन और ध्यान श्रीराम के चरणों में ही होंगे। मुझे खुशी है की ये समारोह माननीय नरेंद्रभाई के कर कमलों से हो रहा है। आज मैं, मेरा परिवार और पूरा संसार बहुत खुश है और मानो आज हर धड़कन हर सांस कह रही है जय श्रीराम।' इससे पहले मंगलवार को दिग्गज गायिका ने किशोर कुमार को उनकी 91वीं जयंती पर याद किया था। लता मंगेशकर ने लिखा था-'नमस्कार। आज हमारे किशोर दा की जयंती है। किशोर दा हरफनमौला थे। दिन भर सबको हंसाना ये उनका पसंदीदा काम था, मैं तो उनको मिलने के बाद एक पल भी हंसे बिना रह नहीं सकती थी। ये सब होते हुए भी अपने काम में वो 100 प्रतिशत स्योर होते थे।' किशोर कुमार का निधन 13 अक्टूबर 1987 को हुआ था।   90 साल के उम्र के बावजूद लता मंगेशकर आज भी सोशल मीडिया पर सक्रिय हैं। लता मंगेशकर ने अपने सात दशक के करियर में विभिन्न भाषाओं में 30,000 से अधिक गाने गाए हैं। उन्हें 2001 में सर्वोच्च नागरिक सम्मान भारत रत्न प्रदान किया गया था। लता मंगेशकर को दादा साहेब फाल्के, पद्म विभूषण, पद्म भूषण और तीन नेशनल अवॉर्ड्स सहित कई पुरस्कारों से सम्मानित भी किया जा चुका हैं। लता मंगेशकर ने 13 साल की उम्र में पहली बार साल 1942 में आई मराठी फिल्म पहली मंगलागौर में गाना गाया था। इतिहास की सर्वाधिक गाने गानी वाली कलाकार के रूप में उनका नाम गिनीज बुक ऑफ रिकॉर्ड्स में 1974 में ही दर्ज गया था।

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Dakhal News 5 August 2020

बॉलीवुड की बिंदास अभिनेत्री काजोल का आज जन्मदिन है और वह बुधवार को 46 साल की हो गई हैं। सोशल मीडिया पर उनके फैंस और दोस्त उन्हें जन्मदिन की बधाई दे रहे हैं। वहीं अभिनेत्री के पति और अभिनेता अजय देवगन ने काजोल को खास अंदाज में जन्मदिन की बधाई दी है। 51 वर्षीय अभिनेता अजय देवगन ने सोशल मीडिया पर काजोल के साथ एक रोमांटिक तस्वीर साझा की और उन्हें जन्मदिन की शुभकामनाएं दी। अजय देवगन ने काजोल को टैग कर ट्विटर पर तस्वीर शेयर कर लिखा-'हैप्पी रिटर्न्स ऑफ द डे, फॉरएवर एंड ऑलवेज।'   यह तस्वीर इस साल की शुरुआत में फिल्म 'तानाजी: द अनसंग वॉरियर' के प्रमोशन के दौरान की है। तस्वीर में काजोल ऑफ व्हाइट प्रिंटेड चूड़ीदार सूट में  काफी खूबसूरत लग रही हैं। काजोल ने सूट के साथ मैचिंग दुपट्टे भी लिया है। वहीं अजय देवगन ब्लैक रंग के टी-शर्ट और ग्रे जीन्स में हैंडसम दिख रहे हैं। तस्वीर में काजोल और अजय को एक दूसरे की आंखों में देखकर हंसते हुए देखा जा सकता है।     काजोल और अजय देवगन की पहली मुलाकात फिल्म हलचल के सेट पर हुई थी। उसके बाद अजय देवगन और काजोल की दोस्ती प्यार में बदल गई। 1998 में फिल्म 'प्यार तो होना ही था' के बाद काजोल और अजय देवगन ने 24 जनवरी, 1999 को शादी कर ली। उनकी बेटी न्यासा का जन्म 2003 और बेटा युग का जन्म 2010 में हुआ। उन्होंने फिल्म गुंडाराज, इश्क, दिल क्या करे, राजू चाचा, प्यार तो होना ही था और तानाजी: द अनसंग वारियर जैसी कई फिल्मों में एक साथ काम किया है।   90 के दशक की टॉप अभिनेत्रियों में शामिल बॉलीवुड अभिनेत्री काजोल आज भी लाखों दिलों पर राज करती हैं। उन्होंने बॉलीवुड की कई बेहतरीन फिल्मों में अभिनय किया है। बॉलीवुड में काजोल अपनी अद्भुत हंसी के लिए जानी जाती हैं। अभिनेता अजय देवगन और काजोल की जोड़ी बॉलीवुड की हिट जोड़ियों में से एक है। काजोल पिछली बार निर्देशक ओम राउत की फिल्म 'तानाजीः द अनसंग वॉरियर' में नजर आई थी। इस फिल्म में उनके साथ अजय देवगन भी थे।  

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Dakhal News 5 August 2020

दखल क्यों

  डॉ. प्रभात ओझा देश में कोरोना की वैक्सीन का परीक्षण अंतिम चरण में है। सम्भव है कि अगले वर्ष के प्रारम्भ में ही इसे आम लोगों के लिए सुलभ कराया जा सके। रूस ने तो इसी साल अक्टूबर से ही कोरोना के टीकाकरण का अभियान शुरू करने की योजना बनाई है। यह अलग बात है कि दुनिया भर में रूस की वैक्सीन को लेकर सवाल भी उठ रहे हैं। कई देशों ने कोरोना की वैक्सीन बनाने की रूस की प्रक्रिया पर शक जाहिर किया है। उसपर वैक्सीन के सूत्र चुराने के भी आरोप हैं। बहरहाल, यह सब होता रहता है। बहस का नया मुद्दा यह हो चला है कि दुनिया से कोरोना की समाप्ति हो भी पायेगी अथवा नहीं। कारण खुद विश्व स्वास्थ्य संगठन ही है। विश्व स्वास्थ्य संगठन के प्रमुख डॉ. टेड्रोस एडोनोम गेब्रिएसस ने यह तो उम्मीद जाहिर की है कि कोविड-19 की वैक्सीन मिल सकती है। साथ ही यह भी कहा है कि अभी इसकी कोई अचूक दवा नहीं है। गेब्रिएसस यह भी जोड़ते हैं कि शायद इसकी अचूक दवा कभी न मिल सके। डॉ. टेड्रोस एडोनोम गेब्रिएसस पहले भी कई बार इस तरह का शक जाहिर कर चुके हैं। उनके तर्ज पर दुनिया के कई देश और भारत में भी यह कहा जाता है कि मुमकिन है कि लोगों को कोरोना के साथ ही जीना पड़े। हालांकि इसका जो सकारात्मक अर्थ लिया जाता है, वह ये है कि कोरोना भी दूसरे रोगों के साथ सामान्य ढंग से लिया जायेगा और इसका इलाज होता रहेगा। विश्व स्वास्थ्य संगठन के अध्यक्ष का कथन इसी अर्थ में है, तो ठीक है। वैसे वे तो कुछ और ही कहना चाहते हैं। वह कहते हैं कि कोरोना दूसरे वायरस से बिल्कुल अलग है। वह खुद को बदलता रहता है। मौसम बदलने से भी कोरोना पर कोई असर नहीं पड़ रहा है। यह दिख भी रहा है कि विश्व भर में अलग-अलग तापमान के बावजूद कोरोना किसी भी असर से प्रभावित नहीं हो रहा है। विश्व स्वास्थ्य संगठन के अध्यक्ष के ताजा बयान के आलोक में देखें तो जुलाई की अंतिम तिथि तक दुनिया भर में एक करोड़ 81 लाख से अधिक लोग कोरोना वायरस से प्रभावित हो चुके हैं। दुखद यह है कि इस तिथि तक 6 लाख, 90 हज़ार से अधिक मरीज अपने प्राण गंवा चुके हैं। संक्रमण के दूसरे और तीसरे चरण में यह रोग और अधिक सक्रिय हो चुका है। इन जगहों में हमारा देश भारत भी शामिल है। हमारे यहां इससे पड़े प्रभाव से निपटने के लिए आम जन को तरह-तरह की सहायता दी जा रही है। दुनिया में सबसे अधिक प्रभावित अमेरिका ने तो कोरोना वायरस के अर्थव्यवस्था पर दुष्प्रभाव को कम करने के लिए इस तिमाही में 947 अरब डॉलर कर्ज लेने की योजना तक बना ली है। कहने का सबब यह है कि हर देश कोरोना से संघर्ष के लिए उपाय खोज रहे हैं। कोरोना से निजात पाने का उपाय इसका इलाज ही है। आर्थिक उपाय तो तात्कालिक ही हैं। इसीलिए हर देश अपने नागरिकों का स्वास्थ्य परीक्षण और मरीजों की चिकित्सा पर जोर दे रहा है। संयुक्त अरब अमीरात के स्वास्थ्य मंत्री की मानें तो उनके यहां 50 लाख लोगों का कोरोना टेस्ट किया जा चुका है। वहां इस रोग से ठीक होने की दर 90 प्रतिशत है। यूएई का दावा सच है तो भी देखना होगा कि उसकी आबादी सिर्फ 96 लाख है। बड़ी आबादी के देशों में जांच भी एक बड़ा काम है। फिर मुख्य बिंदु वही कि हर देश का अपना प्राकृतिक वातावरण भी है। शायद इसलिए इस रोग का प्रसार और लोगों के ठीक होने की अलग-अलग दर भी है। विश्व स्वास्थ्य संगठन अपने बयानों के लिए पहले भी कई देशों के निशाने पर आ चुका है। प्रारम्भ में उसपर चीन के पक्ष में रोग को छिपाने का भी आरोप लगा। इस कारण अमेरिका विश्व स्वास्थ्य संगठन को दिया जाने वाला अपना अंशदान भी बंद कर चुका है। बहरहाल, संगठन के ताजा बयान की सिर्फ इस कारण अनदेखी की जाय, ठीक नहीं होगा। हम कामना करें कि अलग-अलग जगहों पर खोजा जा रहा वैक्सीन, प्राकृतिक वातावरण के अनुकूल कारगर साबित हो। तब तक तो कोरोना के संक्रमण से बचने के लिए आपस में भौतिक दूरी, हाथों को ठीक तरह से धोने और मास्क पहनने को जीवन का हिस्सा बना ही लेना चाहिए। (लेखक हिन्दुस्थान समाचार की पत्रिका `यथावत' के समन्वय सम्पादक हैं।)

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Dakhal News 5 August 2020

  ऋतुपर्ण दवे जिस शुभ घड़ी का इंतजार था, आखिर वह आ ही गई। राममंदिर के लिए देश ने जो सपना देखा था, वह पूरा हो रहा है। देखने वाले राममंदिर को भले ही धार्मिक नजरिए से देखें लेकिन वह इससे कहीं अलग भारत की सद्भावना और शान का मुद्दा बनता गया और अंततः एक पहचान भी। राम अपने जन्मस्थान में रहेंगे, यही तो सब चाहते थे। यहां तक कि वो पक्षकार भी जिनका इससे सीधा सरोकार था। राममंदिर को लेकर देशभर में चाहे जैसे मुद्दे बनते रहे हों और वक्त की चाशनी के साथ राजनीति अलग-अलग पर्तों में जमती रही, पर सच यह है कि जन्मभूमि के मूल निवासी यही चाहते थे कि मंदिर अयोध्या में ही बने और रामलला जहां थे वहीं विराजें। अब तो राममंदिर देश की आस्था और अस्मिता से भी जुड़ गया। तभी तो 130 करोड़ की आबादी में 150 लोगों को भेजा गया निमंत्रण पूरे देश को भेजे निमंत्रण जैसा लग रहा है। इसमें सबसे खास निमंत्रण जो पूरे देश को सच में अच्छा लगा वह है बाबरी मंदिर के पक्षकार हाजी महबूब इकबाल अंसारी को बुलाया जाना। उनकी खुशी और भावना इसी से समझी जा सकती है कि वह प्रधानमंत्री को रामचरित मानस और रामनामी गमछा भेंट करेंगे। सैकड़ों वर्षों के विवादित घटनाक्रम में इससे सुन्दर दूसरा पल शायद और कभी हो भी नहीं हो सकता। यही तो भारत की खासियत है। यूं तो इस पूरे विवाद में हाजी इकबाल से पहले उनके पिता हाशिम अंसारी राम जन्मभूमि-बाबरी मस्जिद विवाद के सबसे पुराने पक्षकार थे, जिनके 2016 में निधन के बाद इकबाल अंसारी बने लेकिन इस पूरे मामले में देश में जहां-तहां भले ही कई बार तनाव की स्थितियां बनीं परन्तु बाबरी मस्जिद के दोनों पक्षकारों की मित्रता हमेशा चर्चाओं में रही। सभी ने देखा कि कई मौकों पर इस विवाद के दोनों पक्षकारों की करीबी मित्रता हैरान करती रही। परस्पर विरोधी पक्षकार होकर भी दोनों अभिन्न मित्र अंत तक बने रहे। मंदिर हर भारतीय का है, यह बात इससे भी साबित होती है कि डेढ़ सौ आमंत्रितों में एक दूसरे मुस्लिम भी हैं जिन्हें लावारिस लाशों के अंतिम संस्कार के लिए पद्मश्री भी मिल चुका है, वह हैं पद्मश्री मोहम्मद शरीफ। यही तो भारत की रवायत है। वाकई मंदिर सबका है। कुछ भी हो जो सर्वमान्य हल सर्वोच्च न्यायालय ने दिया, निश्चित रूप से एक नजीर भी है और समाधान भी। 5 अगस्त बुधवार को उसी नजीर पर देश के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी, राममंदिर की आधारशिला रख लंबे समय से विवादित मुद्दे के समाधान की बुनियाद पर नई इमारत की आधारशिला रख, स्वतंत्र भारत के इतिहास में एक नई इबारत लिखेंगे। राम सबके हैं, देश राम का है। यही भावना इस कार्यक्रम में भी साफ झलक रही है। महज 150 आमंत्रितों को इतने बड़े देश से चुनना बेहद मुश्किल भरा काम था जिसे आयोजकों ने बखूबी निभाया। इन चुनिंदा लोगों को भेजे गए आमंत्रण भी अपने आप में देश का एक ऐतिहासिक दस्तावेज होने जा रहा है। जो भारत का एक यादगार व हमेशा संजोकर रखा जाने वाला आमंत्रण होगा जिसको देखने के लिए भी लोग उमड़ेंगे। यह भी एक ऐतिहासिक सत्य है कि भगवान राम की जन्मभूमि अयोध्या, सरयू के तट पर स्थित देश के सुन्दर नगरों में शुमार है। जिसकी भव्यता पहले भी कम न थी और अब देखते ही बनेगी। वैसे भी अयोध्या का इतिहास बेहद संपन्न रहा है। यह देश के धर्मनिरपेक्ष ढांचे के लिए भी एक मिसाल जैसा है क्योंकि जहां बौध्द धर्मावलंबी इस जगह को साकेत कहते हैं, वहीं सिख और जैन भी अपने-अपने रिश्ते बताते हैं। जबकि साढ़े 400 सालों से ज्यादा वक्त तक बाबरी मस्जिद भी यहीं रही। कुल मिलाकर अयोध्या भारत की सर्वधर्म समभाव की पावन स्थली बन चुकी है और कहा जा सकता है कि भगवान राम की ही महिमा थी जो सभी धर्मों की आस्था यहां जुड़ती चली गई और अंत में वापस भगवान अपने धाम में भव्यता से विराजमान होकर अलग संदेश देकर देश के लिए एक नए युग का सूत्रपात करेंगे। समय के चक्र के साथ अयोध्या में रामलला विराजमान ने भी कई दौर देखे। अंततः 9 नवंबर 2019 को देश के इतिहास में आए पहले बहुप्रतीक्षित महा ऐतिहासिक फैसले ने जैसे बड़ी सहजता से सबकुछ हल कर दिया और रामजन्म भूमि विवाद का पटाक्षेप कुछ यूं हुआ कि कई दिनों तक लगा कि जैसे कोई सपना तो नहीं? कोरोना के चलते आयोजन की भव्यता में तो कोई कमी नहीं आई लेकिन साक्षात उपस्थिति पर जरूर विराम लग गया। बावजूद कोशिश यह दिखी कि वे लोग जरूर शामिल हों जो सीधे तौर पर पूरे मामले से किसी न किसी रूप में जुड़े रहे हैं। तभी तो अयोध्या में रहने वाले उन परिवार के सदस्यों को भी बुलाया गया, जिनके परिवार के लोग उस दौरान गोलियों से मार दिए गए थे। सिख, बौद्ध, आर्यसमाजी, जैन, वैष्णव सभी परंपरा के लोग भूमि पूजन में आ रहे हैं। उम्रदराज लोगों को जरूर स्वास्थ्य कारणों के चलते उन्हें बताकर दूर रखा गया है। इस कार्यक्रम में देश के लगभग 2000 पावन तीर्थस्थलों की पवित्र मिट्टी और लगभग 100 पवित्र नदियों का जल पहले ही भूमिपूजन के लिए जन्मस्थल पर पहुंच चुका है। राममंदिर का भूमिपूजन देश की आस्था, विश्वास और पहचान का प्रतीक चुका है। तभी तो पक्ष तो ठीक, पक्षकार और विपक्ष का भी खुला समर्थन मिलने लगा है। मप्र के पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ ने अयोध्या में भव्य राममंदिर बनाए जाने की शुरुआत का स्वागत करते हुए खुद को रामभक्त बताते हुए अपने घर पर राम दरबार सजाने और हनुमान चालीसा का पाठ किए जाने का आह्वान कर अच्छा संदेश दिया है। भारत में 5 अगस्त 2020 की नई सुबह उस कसम या संकल्प को पूरा होते देखने वाला ऐतिहासिक दिन होगा जो देश ही नहीं दुनिया के इतिहास का अजर, अमिट व रत्नजड़ित पन्नों पर स्थाई रूप से दर्ज दिन होगा। (लेखक स्वतंत्र टिप्पणीकार हैं।)

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Dakhal News 4 August 2020

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