विशेष

भोपाल। मध्य प्रदेश में एक राज्यसभा सीट के लिए चुनाव की अधिसूचना जारी कर दी गई है। उल्लेखनीय है कि थावरचंद गहलोत के इस्तीफे के बाद खाली हुई इस सीट पर चार अक्टूबर को मतदान होगा। इसी दिन मतगणना भी की जाएगी।  

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Dakhal News 9 September 2021

भोपाल। मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने केंद्र सरकार द्वारा मौजूदा फसल वर्ष के लिए गेहूं और सरसों समेत छह रबी फसलों के न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) में किए गए इजाफे को किसानों की आय में बढ़ोतरी करनेवाला एक महत्वपूर्ण कदम बताया है। मुख्यमंत्री ने जारी एक वीडियो में कहा है कि इससे लिए मैं प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का ह्दय से धन्यवाद देता हूं। वे किसान हितैषी प्रधानमंत्री हैं और किसानों के हित में लगातार फैसले ले रहे हैं। कल ही उन्होंने इस संदर्भ में बड़ा कदम उठाया है। उनके द्वारा लिया गया यह निर्णय निश्चित ही किसानों की आय में वृद्धि करेगा। वहीं, चौहान ने ट्विटर पर गुरुवार लिखा, ''किसान हितैषी प्रधानमंत्री श्री @narendramodiजी को किसानों के हित में लगातार निर्णय लेने के लिए हृदय से धन्यवाद देता हूँ। एमएसपी में वृद्धि कर किसानों की आय बढ़ाने की दिशा में एक और महत्वपूर्ण कदम उनके नेतृत्व में केंद्र सरकार द्वारा उठाया गया है।'' उल्लेखनीय है कि केंद्र सरकार ने गेहूं की एमएसपी 40 रुपये प्रति क्विंटल बढ़ाई है। इस इजाफे के बाद 2,015 रुपये प्रति क्विंटल की न्यूनतम कीमत पर गेहूं की खरीद होगी। सरसों की एमएसपी 400 रुपये प्रति क्विंटल बढ़ाकर 5,050 रुपये कर दी गई है। जौ की एमएसपी 35 रुपये बढ़ाकर 1635 रुपये प्रति क्विंटल कर दी गई है। चने की कीमत 130 रुपये बढ़ाकर 5,230 रुपये प्रति क्विंटल कर दी गई है। मसूर की एमएसपी 400 रुपये बढ़ाने के बाद 5,500 रुपये प्रति क्विंटल हो गई है। कुसुम की एमएसपी 114 रुपये बढ़ाकर 5,441 रुपये प्रति क्विंटल करने का फैसला लिया गया है।एमएसपी वह कीमत है जिस पर सरकार किसानों से फसल की खरीद करती है। इस समय सरकार खरीफ और रबी सीजन के 23 फसलों के लिए एमएसपी तय करती है। रबी फसलों की बुआई अक्टूबर में खरीफ फसल की कटाई के तुरंत बाद होती है। गेहूं और सरसों रबी सीजन के दो मुख्य फसल हैं।

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Dakhal News 9 September 2021

राजनीति

भोपाल। मध्य प्रदेश के समस्त विश्वविद्यालय एवं महाविद्यालय की शैक्षणिक गतिविधियाँ 15 सितम्बर 2021 से विद्यार्थियों की भौतिक रूप से उपस्थिति के साथ प्रारंभ होंगी। यह जानकारी गुरुवार को प्रदेश के उच्च शिक्षा मंत्री डॉ. मोहन यादव ने दी है।उन्होंने बताया कि सभी महाविद्यालयों एवं विश्वविद्यालयों में शैक्षणिक तथा अशैक्षणिक स्टॉफ की शत-प्रतिशत उपस्थिति होगी। विद्यार्थियों की 50 प्रतिशत उपस्थिति के साथ कक्षाओं का संचालन होगा। डॉ. यादव ने बताया कि महाविद्यालय के शैक्षणिक एवं अशैक्षणिक स्टॉफ तथा विद्यार्थियों को कोविड-19 प्रथम डोज टीकाकरण का प्रमाण-पत्र जमा कराना अनिवार्य होगा।उच्च शिक्षा मंत्री ने विद्यार्थी संख्या अधिक होने की स्थिति में प्रत्येक स्तर पर कोविड-19 के सुरक्षा मानकों के आधार पर पृथक-पृथक समूह बनाकर प्रायोगिक एवं शैक्षणिक कार्यों को संपादित करने के निर्देश दिये हैं। उन्होंने कहा कि इस संबंध में अधोसंरचना की उपलब्धता एवं स्थानीय परिस्थिति के परिपेक्ष्य में संबंधित संस्था प्रमुख निर्णय लेने के लिए बाध्य होंगे। उन्होंने कहा कि शिक्षण संस्थाओं द्वारा ऑनलाइन कक्षाओं का संचालन भी जारी रहेगा। डॉ. यादव ने शिक्षण संस्थाओं द्वारा ऑफलाइन एवं ऑनलाइन कक्षाओं के लिए अलग-अलग समय-सारणी बनाये जाने के निर्देश दिए हैं।ग्रंथालय भी होंगे प्रारंभ   उच्च शिक्षा मंत्री डॉ. यादव ने बताया कि सभी शैक्षणिक संस्थाओं में विद्यार्थियों के अध्ययन के लिए ग्रंथालय भी प्रारंभ होंगे। केवल पंजीकृत विद्यार्थियों को ही प्रवेश दिया जायेगा। ग्रंथालय में प्रवेश के पूर्व कर्मचारियों-विद्यार्थियों का कोविड प्रोटोकॉल के तहत शारीरिक तापमान, आवश्यक रूप से मास्क का इस्तेमाल, हाथों को सेनेटाइज़ करने तथा पुस्तकालय में सोशल डिस्टेंसिंग का पालन सुनिश्चित करने के निर्देश दिये है। पुस्तकालय अध्ययन कक्ष में 50 प्रतिशत क्षमता के साथ उपस्थिति होगी।छात्रावास और मैस भी होंगे शुरू   डॉ. यादव ने बताया कि विश्वविद्यालयों एवं महाविद्यालयों में छात्रावास और मैस भी प्रारंभ होंगे। छात्रावास चरणबद्ध रूप से प्रारंभ किये जायेंगे। प्रथम चरण में स्नातक अंतिम वर्ष एवं स्नातकोत्तर तृतीय सेमेस्टर के छात्रों के लिये छात्रावास खोले जायेंगे। छात्रावास परिसर में सोशल डिस्टेंसिंग, सेनिटाइजेशन एवं सभी विद्यार्थी की थर्मल स्क्रीनिंग सुनिश्चित की जायेगी। डायनिंग हॉल, रसोई, स्नानागार और शौचालय की स्वच्छता की सतत निगरानी होगी। छात्रावास में विश्वविद्यालय/महाविद्यालय के स्टॉफ के अतिरिक्त अनावश्यक लोगों का प्रवेश वर्जित होगा। उन्होंने कहा कि किसी भी विद्यार्थी अथवा स्टॉफ में कोविड-19 के लक्षण प्रकट होने पर उसे तुरन्त आइसोलेशन के साथ चिकित्सा सुविधा उपलब्ध हो यह सुनिश्चित होगा। छात्रावासों में राज्य हेल्पलाइन नंबर और स्थानीय अस्पताल आदि के नंबर सूचना पटल पर प्रदर्शित किए जायेंगे। विद्यार्थियों के घोषणा-पत्र एवं माता-पिता/अभिभावकों की लिखित सहमति के आधार पर ही विद्यार्थी को छात्रावास की सुविधा उपलब्ध होगी।उच्च शिक्षा मंत्री ने बताया कि छात्रावास के भोजन कक्ष में विद्यार्थियों को छोटे-छोटे बैच मे भोजन उपलब्ध कराया जाएगा। मैस की समय-सारणी बनाकर समयावधि भी बढ़ाई जाने के निर्देश दिए गए है। भोजन बनाने एवं खाना परोसने वाले स्टॉफ द्वारा फेस कवर, मास्क का उपयोग एवं हाथों को सेनेटाइज़ करना अनिवार्य होगा।सुरक्षा संबंधी जागरूकता   उच्च शिक्षा मंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि शैक्षणिक संस्थाओं द्वारा अपने स्टॉफ एवं विद्यार्थियों को स्वास्थ्य एवं कोविड-19 संबंधी समस्याओं के विषय में जागरूक किया जाना चाहिए। कोविड-19 के संक्रमण के बचाव के लिए उनका नियमित स्वास्थ्य परीक्षण एवं लक्षण पाए जाने पर चिकित्सा सुविधा की व्यवस्था सुनिश्चित करना आवश्यक होगा। उन्होंने कहा कि संक्रमित व्यक्ति के लिए आइसोलेशन एवं क्वारंटीन सुविधा की व्यवस्था छात्रावास में पृथक रूप से किया जाए अथवा शासकीय अस्पताल में इसकी व्यवस्था सुनिश्चित की जाए। डॉ. यादव ने कहा कि किसी भी स्थिति में कटेन्मेंट जो़न से संबंधित विद्यार्थी और स्टॉफ का संस्था में प्रवेश वर्जित रहेगा। विद्यार्थी एवं स्टॉफ आरोग्य सेतु एप डाउनलोड करें। विश्वविद्यालय एवं महाविद्यालयों के विद्यार्थियों एवं समस्त स्टॉफ के लिए वैक्सीनेशन करवाना अनिवार्य होगा। संस्था प्रमुख द्वारा वैक्सीनेशन के संबंध में शैक्षणिक, अशैक्षणिक स्टॉफ एवं विद्यार्थियों की कक्षावार जानकारी संग्रहीत कर अग्रणी महाविद्यालय को उपलब्ध कराई जायेगी। विश्वविद्यालय स्तर पर कुल सचिव तथा महाविद्यालय स्तर पर संबंधित क्षेत्रीय अतिरिक्त संचालक द्वारा निरंतर मॉनीटरिंग की जायेगी और इसका प्रतिवेदन प्रत्येक सोमवार प्रेषित किया जायेगा।

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भोपाल। प्रदेश के चिकित्सा शिक्षा मंत्री विश्वास कैलाश सारंग ने वीडियो कॉन्फ़्रेंसिंग से निर्देशित किया कि विभिन्न संकायों की लंबित परीक्षा को शीघ्र कराए जाने के लिए समय-सारणी निर्धारित कर तत्काल कार्यवाही प्रारंभ करे। उन्होंने कहा कि लंबित परीक्षा परिणाम को जारी करें। चिकित्सा शिक्षा मंत्री सारंग ने यह निर्देश गुरुवार को मेडिकल यूनिवर्सिटी, जबलपुर की समीक्षा करते हुए दिये। इस मौके पर अपर मुख्य सचिव मोहम्मद सुलेमान और आयुक्त चिकित्सा शिक्षा निशांत वरवड़े उपस्थित थे। कुलपति, रजिस्ट्रार एवं मेडिकल यूनिवर्सिटी के अन्य अधिकारियों वर्चुअली उपस्थित रहे।मंत्री सारंग ने आगामी शैक्षणिक सत्रों में सभी परीक्षा एवं परीक्षा परिणाम जारी करने के कार्यवाही अकादमिक कैलेंडर जारी करते हुए निर्धारित समय-सीमा में सम्पूर्ण कार्यवाही पूरी करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि छात्र-छात्राओं सम्बंधित विभिन्न समस्याओं के निराकरण के लिए यूनिवर्सिटी स्तर पर अधिकारी को अधिक्रत कर नियमानुसार कार्यवाही की जाए। सारंग ने निर्देश दिए कि यूनिवर्सिटी में आई॰टी॰ सेल बनायी जाए। उन्होंने कहा कि यूनिवर्सिटी की केपेसीटी बिल्डिंग तैयार की जाए। साथ ही रिक्त पदों पर नियुक्ति की कार्यवाही जल्द हो, जिससे यूनिवर्सिटी अंतर्गत विभिन्न कार्यों का संपादन प्रभावशीलता के साथ समय-सीमा किया जा सके।

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समाज

बैतूल। बीती रात से हो रही झमाझम बारिश से सभी नदी नाले उफान पर है मुलताई क्षेत्र में बारिश ज्यादा होने को वजह से ताप्ती नदी पर बने पारसडोह जलाशय का जलस्तर डेम लेबल तक पहुंच गया है। पारसडोह डेम के 3 गेट एक एक फिट तक खोल दिये गए हैं। रात में हुई बारिस से माचना नदी में भी पानी का भाव तेज हो गया है। गुरुवार को मुलताई जल संसाधन विभाग के कार्यपालन यंत्री विपिन वामनकर ने बताया कि बुधवार रात से हो रही बारिस से ताप्ती नदी में जलस्तर बढ़ गया है और ताप्ती पर बने पारसडोह डेम भी लगभग भरा चुका है , चूंकि डेम 15 सितम्बर तक भरना है इसलिए सुरक्षा की दृष्टि से अभी सुबह साढ़े दस बजे डेम के 6 गेट में से 3 गेट एक एक फिट खोल दिये गए है डेम से अभी 124 क्यूबिक पानी बाहर निकाला जा रहा है। वर्तमान में 220 क्यूबिक मीटर पानी की आवक हो रही है। पारस डोह डेम का फुलटेंक लेवल 639.10 मीटर है फिलहाल डेम का लेवल 638.42 हो चुका है। सारणी के सतपुड़ा जलाशय का भी एक गेट खोला गया, हालांकि सतपुड़ा जलाशय के गेट पहले भी खोले जा चुके हैं।

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बैतूल। एक महिला पर प्रेत-बाधा सहित अन्य व्याधियों के चलते झाड़ फूंक कर रहे एक तांत्रिक के घर पर ही आकाशीय बिजली गिर गई। इस घटना में झाड़ फूंक कराने गई महिला घायल हो गई है। महिला को जिला अस्पताल में उपचार के लिए भर्ती कराया गया है। प्राप्त जानकारी के अनुसार चिचोली थाना क्षेत्र का खापा मेंढ़ा गांव जहां दोपहर में एक बाबा तांत्रिक जिसके घर बीमार लोगों की भीड़ लगी हुई थी। तांत्रिक तंत्र विद्या से लोगों की बीमारी का इलाज कर रहा था इसी दौरान आसमान में मौसम खराब हुआ और आकाशीय बिजली सीधे तांत्रिक के घर गिरी, जहां इलाज कराने गई महिला भी बिजली की चपेट में आ गई और गम्भीर रूप से घायल हो गई। घायल महिला को चिचोली सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र लाया गया था, जहां से डॉक्टरों ने महिला को जिला अस्पताल रेफर किया एम्बुलेंस से रात में महिला को जिला अस्पताल लाया गया है। घायल महिला के पति बिहारी लाल ने बताया कि उसकी पत्नी का पेट दर्द हो रहा था। इलाज कराने तांत्रिक के घर गए थे, जहां बिजली गिर गई और उसकी पत्नी घायल हो गई थी।

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फिल्म अभिनेता अक्षय कुमार का आज जन्मदिन है। अक्षय कुमार आज 54 साल के हो गए हैं। लेकिन दुखद बाद यह है कि इस साल अक्षय के जन्मदिन के ठीक एक दिन पहले उनकी माँ अरुणा भाटिया ने हमेशा के लिए इस दुनिया को अलविदा कह दिया है। अपनी माँ के निधन से अक्षय टूट से गए हैं। जन्मदिन के मौके पर अक्षय को बधाई संदेश मिल रहे हैं। अब खुद अक्षय ने लोगों को जन्मदिन पर बधाई देने के लिए शुक्रिया कहा है और साथ ही अपनी मां को भी याद किया है। अक्षय ने अपने सोशल मीडिया अकाउंट पर एक तस्वीर शेयर की है, जिसमें उनकी माँ उनके गालों को चूमती हुई नजर आ रही हैं। इस तस्वीर को शेयर करते हुए अक्षय ने लिखा-'ये बात बहुत अखर रही है लेकिन कभी मुझे यकीन है कि मेरी मां ऊपर से मेरे लिए हैप्पी बर्थडे गा रही हैं। आप सब लोगों का संवेदनाओं और जन्मदिन की शुभकामनाओं के लिए शुक्रिया। जिंदगी चलती रहती है।' उल्लेखनीय है, अक्षय कुमार की माँ अरुणा भाटिया काफी समय से बीमार चल रही थी और अस्पताल में भर्ती थी। कुछ दिन पहली उनकी तबियत ज्यादा बिगड़ने के कारण उन्हें आईसीयू में शिफ्ट किया गया था।मां की बिगड़ती हालत को देखते हुए अक्षय तुरंत ब्रिटेन में जारी अपनी फिल्म सिंड्रेला की शूटिंग छोड़कर वापस मुंबई आ गए। इसके बाद उन्होंने फैंस से मां के लिए दुआ करने की अपील की थी। लेकिन 8 सितंबर की सुबह उनकी माँ का निधन हो गया। वहीं अगर अक्षय के वर्क फ्रंट की करें तो उनकी की कई फिल्में जल्द ही रिलीज होंगी। इनमें बच्चन पांडे, सूर्यवंशी, अतरंगी रे, रक्षाबंधन ,रामसेतु समेत कई फिल्में शामिल हैं।

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सलमान खान और आयुष शर्मा की आगामी फिल्म 'अंतिम : द फाइनल ट्रुथ' का पहला गाना 'विग्नहर्ता' गुरुवार को रिलीज हो गया है। गणपति उत्सव पर फिल्मायें गए इस गाने को अजय गोगावले ने अपनी आवाज दी है। इस गाने का म्यूजिक हितेश मोदक ने दिया है, जबकि लिरिक्स वैभव जोशी के हैं। ऊर्जा और भव्यता से भरपूर यह गाना रिलीज होते ही सोशल मीडिया पर छा गया है। गाने में वरुण धवन सलमान और आयुष के साथ जमकर ठुकमे लगाते हुए नजर आ रहे हैं। वरुण धवन , सलमान खान और आयुष शर्मा ने इस गाने को अपने सोशल मीडिया अकॉउंट के जरिये फैंस के साथ साझा किया है। फैंस को यह गाना काफी पसंद आ रहा है। फिल्म 'अंतिम : द फाइनल ट्रुथ' में सलमान खान एक सिख पुलिस अफसर की भूमिका में नजर आएंगे, जबकि आयुष शर्मा फिल्म में गैंगस्टर की भूमिका में होंगे।इस फिल्म का निर्देशन महेश मांजेरकर कर रहे हैं, जबकि सलमान खान की कम्पनी यानी सलमान खान फिल्म्स प्रोड्यूस कर रही हैं।

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Dakhal News 9 September 2021

दखल क्यों

  सियाराम पांडेय 'शांत' उत्तर प्रदेश में बहुजन समाज समाज पार्टी के कार्यक्रम में जय श्रीराम के नारे लगे। बसपा के इतिहास में ऐसा पहली बार हुआ है। राम और राममंदिर से दूरी बनाकर चलने वाली बसपा में आया यह बदलाव अचानक नहीं हुआ है। बसपा महासचिव सतीश चंद्र मिश्र की अगुआई में ब्राह्मण सम्मेलन की शुरुआत भी अयोध्या से ही हुई थी। बसपा प्रमुख मायावती ने त्रिशूल तक लहराया। कार्यक्रम में शंख तक बजे। यह भी कहा गया कि ब्राह्मण शंख बढ़ाएगा, हाथी बढ़ता जाएगा लेकिन इस सच को नकारा नहीं जा सकता कि हाथी जब पगलाता है तो रौंदता भी है। सत्ता से बड़ा मद दूसरा नहीं होता।बसपा में वैसे भी यह जो कुछ भी हो रहा है, ब्राह्मणों को प्रभावित करने के लिहाज से हो रहा है। अन्यथा बसपा का इतिहास जानने वालों को पता है कि मायावती बिना मतलब किसी को भी अपने पास नहीं फटकने देतीं। जब कांशीराम और मुलायम सिंह यादव की मैत्री हुई थी तब इसी बहुजन समाज पार्टी में जोर-शोर से नारा लगा था कि 'मिले मुलायम-कांशीराम, हवा हो गए जय श्रीराम।' कोई ढाई दशक बाद अगर बसपाई श्रीराम का जयनाद करने को विवश हैं तो इसकी वजह आसानी से समझी जा सकती है। ब्राह्मणों को मनुवादी कहने वाली मायावती अब ब्राह्मण और दलित गठजोड़ के आधार पर उत्तर प्रदेश में सरकार गठन के सपने बुन रही हैं। 'तिलक, तराजू और तलवार, इनको मारो जूते चार' का नारा उछालने वाली मायावती को पता है कि अकेले दलितों के बल पर वह सरकार बना पाने की स्थिति में नहीं हैं लेकिन श्रीराम का नारा लगाने के बाद उनके मुस्लिम मतदाता उनसे छिटकेंगे जरूर, इस संभावना को हल्के में नहीं लिया जा सकता। हर क्रिया की अपनी प्रतिक्रिया होती है। इसकी भी होगी, इसमें कोई संदेह नहीं है।अगले साल उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव है। इसे लेकर सभी छोटे-बड़े दल सक्रिय हो गए हैं। मायावती की पार्टी भी इसका अपवाद नहीं है। मुस्लिम, ओबीसी, ब्राह्मण, क्षत्रिय और दलितों के प्रति राजनीतिक दलों का बढ़ता रुझान और मतदाताओं को लुभाने की सारी गुणा-गणित सत्ता का सिंहासन कब्जाने को लेकर है। एक-दूसरे के वोट पर चोट करने की हसरत हर राजनीतिक दल पाले हुए है। इसके लिए हर संभव संतुलन साधे जा रहे हैं। तालमेल बिठाने की कोशिशें कर रहे हैं। मतदाताओं को लुभाने के लिए विवादास्पद बयानों, योजनाओं और गोष्ठियों का दौर शुरू हो चुका है। इसमें संदेह नहीं कि हर बड़े राजनीतिक दल का अपना परंपरागत निर्धारित वोटबैंक है। इसलिए उसकी कोशिश अपने वोटबैंक को टस से मस न होने देने की है। विजयश्री के वरण के लिए ऐसा करना जरूरी भी है लेकिन दूसरे दल के वोटबैंक में सेंध लगाने और उसे अपने पक्ष में करने की मुकम्मल रणनीति भी बनानी होगी।बसपा साढ़े नौ साल से सत्ता से बाहर है। वर्ष 2007 में ब्राह्मणों के सहयोग से वह सत्ता में आई थी लेकिन जिस तरह बसपा से ब्राह्मणों को एक-एक कर पार्टी से निकाला गया, वह भी किसी से छिपा नहीं है। अकेले सतीश चंद्र मिश्र ही पार्टी में बने रहे, वर्ना तो उनके कई रिश्तेदार विधायक और मंत्री तक बसपा से दूध की मक्खी की तरह बाहर कर दिए गए। कुछ पर तो जांच का शिकंजा तक कस गया। इसबार फिर सतीश चंद्र मिश्र और उनकी पत्नी-बेटी को आगे कर मायावती ब्राह्मणों को अपने खेमे में लाने का प्रयास कर रही हैं। इसमें वे कितना सफल हो पाएंगी, यह तो नहीं कहा जा सकता लेकिन जिस तरह कांग्रेस, सपा और भाजपा के शासन में वे ब्राह्मणों की उपेक्षा की बात कर रही हैं, उन्हें अपने शासनकाल में ब्राह्मणों पर हुए दलित उत्पीड़न के मुकदमों की संख्या पर विचार जरूर करना चाहिए। ब्राह्मणों को अकेले मायावती ही अपने खेमे में लाना चाहती हों, ऐसा भी नहीं है। सपा भी ब्राह्मणों को भाजपा के खेमे से निकालकर अपने खेमे में लाना चाहती है। 27 अगस्त से जिला स्तर पर वह भी ब्राह्मण सम्मेलन आयोजित कर रही है। कांग्रेस की भी नजर ब्राह्मणों पर है। बसपा प्रमुख मायावती वर्ष 2007 जैसी सोशल इंजीनियरिंग कर पाएंगी या नहीं, यह तो नहीं कहा जा सकता लेकिन इससे भाजपा की पेशानी पर बल तो पड़ ही गया है।मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को अगर यह कहना पड़ रहा है कि ब्राह्मण भाजपा से नाराज नहीं है तो इसके अपने राजनीतिक मायने हैं। भाजपा प्रबुद्ध वर्ग सम्मेलन आयोजित कर रही है। वह तीर्थ पुरोहितों के साथ सम्मेलन कर रही है। संस्कृत के विद्वानों को पुरस्कृत कर रही है। संस्कृत विद्यालयों का स्तर सुधारने और वहां नियुक्तियां करने का उपक्रम कर रही है, इसे भी ब्राह्मणों को रिझाने की कवायद के तौर पर ही देखा जा रहा है। वैसे भी तीन दशकों बसपा की नजर में अगर ब्राह्मण 'शोषक' से 'शोषित' हो गए हैं तो इसे भी मायावती की सोशल इंजीनियरिंग के अध्याय के रूप में ही देखा जाना चाहिए। इसमें संदेह नहीं कि राममंदिर आंदोलन से पूर्व ब्राह्मण कांग्रेस का कट्टर समर्थक हुआ करता था लेकिन राममंदिर आंदोलन के बाद वह भाजपा के साथ आ गया है। भाजपा से नाराजगी की वजह से वह एकबार सपा और एकबार बसपा के साथ गया जरूर लेकिन समग्रता में नहीं। इससे भाजपा ने सबक लिया। बिकरू कांड में विकास दुबे के एनकाउंटर को लेकर विरोधी दल भाजपा को घेर जरूर रहे हैं लेकिन वे आधा सच बोल रहे हैं। विकास दुबे और उसके साथियों के हमले में मारे गए पुलिसकर्मियों में अधिकांश ब्राह्मण थे। इस बात का जिक्र राजनीतिक दल अपने सुविधा संतुलन के लिहाज से शायद नहीं कर रहे हैं। भाजपा ने भी बसपा और सपा के 'काउंटर' में ब्राह्मण सम्मेलन शुरू किए हैं। वैसे ब्राह्मण तो सभी दलों से जुड़े हैं। कहीं कम और कहीं ज्यादा। हाल ही में केंद्रीय मंत्रिमंडल के विस्तार में जिस तरह ब्राह्मण नेताओं को महत्व मिला, उसे हल्के में नहीं लिया जा सकता। प्रदेश में ब्राह्मण 12 फीसदी और राजपूत 8 प्रतिशत हैं। इस वोटबैंक में जरा-सी हेरफेर भाजपा की राजनीतिक गणित बिगाड़ सकती है। वैसे जिस दलित वोटबैंक को मायावती अपना बता रही हैं, उसमें भाजपा कब का सेंध लगा चुकी है। अति दलित और अति पिछड़ों का राग अलापकर उसने मायावती के वोटबैंक की जड़ में पहले ही विभाजन का मट्ठा डाल रखा है। उत्तर प्रदेश में तकरीबन 40 प्रतिशत ओबीसी हैं। भाजपा जिस तरह ओबीसी मतदाताओं को अपने पाले में लेती जा रही है, उससे सपा, बसपा, कांग्रेस की जमीन दरकती नजर आ रही है। केंद्रीय मंत्रिमंडल में 27 ओबीसी मंत्रियों को शामिल करना भी उसके इसी मास्टर प्लान का हिस्सा है। 2 सितंबर से शुरू हुआ भाजपा ओबीसी मोर्चा का आउटरीच कार्यक्रम भी काबिलेगौर है। इसके जरिए अति पिछड़ा वर्ग के लोगों को भाजपा यह समझाने में जुटी है कि अन्य राजनीतिक दलों ने उन्हें धोखा दिया है और उन्हें केवल वोटबैंक मानते रहे हैं। दलित वोटबैंक को भी तोड़ने का लाभ भी पिछले चुनावों में भाजपा को मिला है। दलित समुदाय मुख्य रूप से बसपा का वोटबैंक रहा है। यह प्रदेश की आबादी में 20.8 प्रतिशत है। मुस्लिमों को विश्वासघाती कहकर मायावती पहले ही अल्पसंख्यक वर्ग को नाराज कर चुकी हैं। कुछ घटनाओं का जिक्र कर वे उत्तर प्रदेश के 19 प्रतिशत मुसलमानों को यह बताने-जताने में जुटी हैं कि सपा, कांग्रेस और भाजपा के शासन में मुसलमानों के साथ ज्यादतियां हुई हैं लेकिन इस पर मुस्लिम तबका कितना यकीन कर पाएगा, यह देखने वाली बात होगी। सपा अगर मुस्लिम-यादव समीकरण की बात करती रही है तो बसपा दलित-मुस्लिम समीकरण की। कांग्रेस भी मुस्लिम मतों को साधकर प्रदेश के सत्ता सिंहासन पर विराजित होती रही है।ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन के अध्यक्ष असदुद्दीन ओवैसी भी मुस्लिमों को यह एहसास दिलाने में जुटे हैं कि उनकी पार्टी उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में करीब 100 सीटों पर चुनाव लड़ेगी और सभी वर्गों के लोगों को टिकट देगी। मुसलमान सपा और बसपा को वोट देते रहे, मुख्यमंत्री बनाते रहे और जब हिस्सेदारी की बात होती है तो उनसे बात भी नहीं की जाती। आम आदमी पार्टी भी उत्तर प्रदेश में अपना वर्चस्व बनाने में जुटी है।कुल मिलाकर राजनीतिक दल अपने-अपने हिसाब से मतदाताओं को लुभाने में कोर-कसर शेष नहीं रख रहे हैं। रही बात ब्राह्मणों की तो वह वहीं जाएगा जहां उसे सम्मान मिलेगा। इसलिए भी आवश्यक है कि ब्राह्मण को ठीक से समझने की कोशिश की जाए। जो भी राजनीतिक दल ऐसा कर पाएगा, 2022 में यूपी का चुनाव उसी के हाथ में होगा।   (लेखक हिन्दुस्थान समाचार से संबद्ध हैं।)  

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Dakhal News 9 September 2021

10 सितम्बर गणेश चतुर्थी पर विशेष रमेश सर्राफ धमोरा हिन्दू मान्यता के अनुसार हर अच्छी शुरुआत व हर मांगलिक कार्य का शुभारंभ भगवान गणेश के पूजन से किया जाता है। गणेश शब्द का अर्थ होता है जो समस्त जीव जाति के ईश अर्थात् स्वामी हो। गणेश जी को विनायक भी कहते हैं। विनायक शब्द का अर्थ है विशिष्ट नायक। वैदिक मत में सभी कार्य का आरम्भ जिस देवता का पूजन से होता है वही विनायक है। गणेश चतुर्थी के पर्व का आध्यात्मिक एवं धार्मिक महत्त्व है। मान्यता है कि वे विघ्नों के नाश करने और मंगलमय वातावरण बनाने वाले हैं। भारत त्योहारों का देश है और गणेश चतुर्थी उन्हीं त्योहारों में से एक है। गणेशोत्सव को 10 दिनों तक बड़े धूमधाम से मनाया जाता है। इस त्योहार को गणेशोत्सव या विनायक चतुर्थी भी कहा जाता है। पूरे भारत में भगवान गणेश के जन्मदिन के इस उत्सव को उनके भक्त बहुत उत्साह के साथ मनाते हैं। गणेश चतुर्थी का त्योहार महाराष्ट्र, गोवा, तेलंगाना, केरल और तमिलनाडु सहित पूरे भारत में काफी जोश के साथ मनाया जाता है। किन्तु महाराष्ट्र में विशेष रूप से मनाया जाता है। पुराणों के अनुसार इसी दिन भगवान गणेश का जन्म हुआ था। गणेश चतुर्थी पर भगवान गणेशजी की पूजा की जाती है। कई प्रमुख जगहों पर भगवान गणेश की बड़ी-बड़ी प्रतिमायें स्थापित की जाती है। इन प्रतिमाओं का नौ दिन तक पूजन किया जाता है। बड़ी संख्या में लोग गणेश प्रतिमाओं का दर्शन करने पहुंचते हैं। नो दिनों बाद गणेश प्रतिमाओं को समुद्र, नदी, तालाब में विसर्जित किया जाता है। गणेश चतुर्थी का त्योहार आने से दो-तीन महीने पहले ही कारीगर भगवान गणेश की मिट्टी की मूर्तियां बनाना शुरू कर देते हैं। गणेशोत्सव के दौरान बाजारों में भगवान गणेश की अलग-अलग मुद्रा में बेहद ही सुंदर मूर्तियां मिल जाती है। गणेश चतुर्थी वाले दिन लोग इन मूर्तियों को अपने घर लाते हैं। कई जगहों पर 10 दिनों तक पंडाल सजे हुए दिखाई देते हैं जहां गणेश जी की मूर्ति स्थापित होती हैं। प्रत्येक पंडाल में एक पुजारी होता है जो इस दौरान चार विधियों के साथ पूजा करते हैं। सबसे पहले मूर्ति स्थापना करने से पहले प्राणप्रतिष्ठा की जाती है। उन्हें कई तरह की मिठाइयां प्रसाद में चढ़ाई जाती हैं। गणेश जी को मोदक काफी पंसद है। जिन्हें चावल के आटे, गुड़ और नारियल से बनाया जाता है। इस पूजा में गणपति को लड्डूओं का भोग लगाया जाता है। इस त्योहार के साथ कई कहानियां भी जुड़ी हुई हैं जिनमें से उनके माता-पिता माता पार्वती और भगवान शिव के साथ जुड़ी कहानी सबसे ज्यादा प्रचलित है। शिवपुराण में रुद्रसंहिता के चतुर्थ खण्ड में वर्णन है कि माता पार्वती ने स्नान करने से पूर्व अपने मैल से एक बालक को उत्पन्न करके उसे अपना द्वारपाल बना दिया था। भगवान शिव ने जब भवन में प्रवेश करना चाहा तब बालक ने उन्हें रोक दिया। इस पर भगवान शंकर ने क्रोधित होकर अपने त्रिशूल से उस बालक का सिर काट दिया। इससे पार्वती नाराज हो उठीं। भयभीत देवताओं ने देवर्षि नारद की सलाह पर जगदम्बा की स्तुति करके उन्हें शांत किया। भगवान शिवजी के निर्देश पर विष्णुजी उत्तर दिशा में सबसे पहले मिले जीव (हाथी) का सिर काटकर ले आए। मृत्युंजय रुद्र ने गज के उस मस्तक को बालक के धड़ पर रखकर उसे पुनर्जीवित कर दिया। माता पार्वती ने हर्षातिरेक से उस गजमुख बालक को अपने हृदय से लगा लिया। ब्रह्मा, विष्णु, महेश ने उस बालक को सर्वाध्यक्ष घोषित करके अग्र पूज्य होने का वरदान दिया। देश की आजादी के आंदोलन में गणेश उत्सव ने बहुत महत्वपूर्ण भूमिका निभायी थी। 1894 में अंग्रेजों ने भारत में एक कानून बना दिया था जिसे धारा 144 कहते हैं जो आजादी के इतने वर्षों बाद आज भी लागू है। इस कानून में किसी भी स्थान पर 5 से अधिक व्यक्ति इकट्ठे नहीं हो सकते थे। न ही समूह बनाकर कहीं प्रदर्शन कर सकते थे। महान क्रांतिकारी बंकिम चंद्र चटर्जी ने 1882 में वन्देमातरम नामक एक गीत लिखा था जिसपर भी अंग्रेजों प्रतिबंध लगा कर गीत गाने वालों को जेल मे डालने का फरमान जारी कर दिया था। इन दोनों बातों से लोगों में अंग्रेजों के प्रति बहुत नाराजगी व्याप्त हो गयी थी। लोगों में अंग्रेजों के प्रति भय को खत्म करने और इस कानून का विरोध करने के लिए महान स्वतंत्रता सेनानी लोकमान्य तिलक ने गणपति उत्सव की स्थापना की और सबसे पहले पुणे के शनिवारवाड़ा मे गणपति उत्सव का आयोजन किया गया। 1894 से पहले लोग अपने अपने घरों मे गणपति उत्सव मनाते थे। लेकिन 1894 के बाद इसे सामूहिक तौर पर मनाने लगे। पुणे के शनिवारवडा के गणपति उत्सव मे हजारों लोगो की भीड़ उमड़ी। लोकमान्य तिलक ने अंग्रेजों को चेतावनी दी कि हम गणपति उत्सव मनाएगे अंग्रेज पुलिस उन्हें गिरफ्तार करके दिखाये। कानून के मुताबिक अंग्रेज पुलिस किसी राजनीतिक कार्यक्रम में एकत्रित भीड़ को ही गिरफ्तार कर सकती थी। लेकिन किसी धार्मिक समारोह में उमड़ी भीड़ को नहीं। 20 अक्तूबर 1894 से 30 अक्तूबर 1894 तक पहली बार 10 दिनों तक पुणे के शनिवारवाड़ा मे गणपति उत्सव मनाया गया। लोकमान्य तिलक वहां भाषण के लिए हर दिन किसी बड़े नेता को आमंत्रित करते। 1895 मे पुणे के शनिवारवाड़ा मे 11 गणपति स्थापित किए गए। उसके अगले साल 31 और अगले साल ये संख्या 100 को पार कर गई। फिर धीरे -धीरे महाराष्ट्र के अन्य बड़े शहरो अहमदनगर, मुंबई, नागपुर, थाणे तक गणपति उत्सव फैलता गया। गणपति उत्सव में हर वर्ष हजारो लोग एकत्रित होते और बड़े नेता उसको राष्ट्रीयता का रंग देने का कार्य करते थे। इस तरह लोगो का गणपति उत्सव के प्रति उत्साह बढ़ता गया और राष्ट्र के प्रति चेतना बढ़ती गई। 1904 में लोकमान्य तिलक ने लोगो से कहा कि गणपति उत्सव का मुख्य उद्देश्य स्वराज्य हासिल करना है। आजादी हासिल करना है और अंग्रेजो को भारत से भगाना है। आजादी के बिना गणेश उत्सव का कोई महत्व नहीं रहेगा। तब पहली बार लोगो ने लोकमान्य तिलक के इस उद्देश्य को बहुत गंभीरता से समझा। आजादी के आन्दोलन में लोकमान्य तिलक द्धारा गणेश उत्सव को लोकोत्सव बनाने के पीछे सामाजिक क्रान्ति का उद्देश्य था। लोकमान्य तिलक ने ब्राह्मणों और गैर ब्राह्मणों की दूरी समाप्त करने के लिए यह पर्व प्रारम्भ किया था जो आगे चलकर एकता की मिसाल बना। जिस उद्देश्य को लेकर लोकमान्य तिलक ने गणेश उत्सव को प्रारम्भ करवाया था वो उद्देश्य आज कितने सार्थक हो रहे हैं। आज के समय में पूरे देश में पहले से कहीं अधिक धूमधाम के साथ गणेशोत्सव मनाये जाते हैं। मगर आज गणेशोत्सव में दिखावा अधिक नजर आता है। आपसी सद्भाव व भाईचारे का अभाव दिखता है। आज गणेश उत्सव के पण्डाल एक-दूसरे के प्रतिस्पर्धात्मक हो चले हैं। गणेशोत्सव में प्रेरणाएं कोसों दूर होती जा रही हैं और इनको मनाने वालों में एकता नाम मात्र की रह गयी है। इसबार भी कोरोना महामारी के कारण लगी सरकारी पाबंदियों के चलते सार्वजनिक स्थानों पर गणेशोत्सव का भव्य आयोजन नहीं हो पायेगा। ऐसे में लोगों को अपने घरों में ही मिट्टी की गणेश प्रतिमा बनाकर उसका पूजन करना चाहिये। लागों को गणेश पूजन करते समय विश्व शांति की कामना करनी चाहिये। कोरोना के बढ़ते संक्रमण को रोकने के लिये गणेश पूजन करते समय भी हमें निर्धारित शारीरिक दूरी बनाये रखनी चाहिये। इस बार मन में गणेश पूजा करनी चाहिये। जो पैसा हम गणेशोत्सव मनाने पर हर बार खर्च करते थे उसे इस बार कोरोना से बचाव पर खर्च करें। इस साल के लिये यही सर्वश्रेष्ठ गणेश पूजा होगी।  

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Dakhal News 9 September 2021

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