विशेष

भोपाल। आज विश्व टाइगर दिवस है। इस अवसर पर टाइगर स्टेट का दर्जा प्राप्त मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह ने प्रदेश की वाइल्डलाइफ टीम को बधाई दी है। उन्होंने कहा है कि टाइगर बचाने के लिए प्रदेश में हमारी वाइल्डलाइफ की टीम द्वारा किए गए कार्य अभिनंदनीय हैं। विशेष प्रयत्नों से बाघों की संख्या मध्यप्रदेश में लगातार बढ़ रही है। हम टाइगर स्टेट के रूप में कटिबद्ध हैं बाघों को बचाने के लिए भी और बढ़ाने के लिए भी। मुख्यमंत्री चौहान ने ट्वीट के माध्यम से कहा है कि -\"टाइगर प्रकृति की अनमोल धरोहर के साथ ही हमारा राष्ट्रीय पशु और मध्य प्रदेश की शान भी हैं। सम्पूर्ण विश्व में टाइगर संरक्षण के क्षेत्र में हमारे प्रदेश ने एक विशेष पहचान स्थापित की है। इस विश्व टाइगर दिवस पर हम इनके संरक्षण के लिए प्रयास का संकल्प लें।\" उन्होंने कहा कि -\"टाइगर स्टेट आफ इंडिया के रूप में मध्यप्रदेश स्थापित है। मैं टाइगर पार्क और वाइल्डलाइफ से सम्बंधित सभी अधिकारियों और कर्मचारियों सहित इस काम में लगी पूरी टीम को बधाई देता हूं। हमें भौतिक प्रगति और पर्यावरण में संतुलन स्थापित करने की आवश्यकता है। टाइगर भी बचें और बाकी वन्यप्राणी भी स्वतंत्र विचरण करें, इससे प्रकृति का चक्र पूरा होता है। मध्यप्रदेश टाइगर्स को बचाने के साथ ही बढ़ाने के लिए भी कटिबद्ध है।\"मुख्यमंत्री चौहान ने ट्वीट किया है -\"भवानी प्रसाद मिश्र जी ने कहा था, 'सतपुड़ा के घने जंगल, ऊंघते अनमने जंगल।' इन जंगलों में विशेष प्रयत्नों के द्वारा टाइगर्स की संख्या लगातार बढ़ती जा रही है। वाइल्डलाइफ के बिना हमारा जीवन अधूरा है, प्रकृति का चक्र ऐसा है कि टाइगर के बिना सृष्टि नहीं चल सकती है।\"उन्होंने कहा कि-\"टाइगर के संरक्षण के लिए प्रदेश में टाइगर पार्क और वाइल्डलाइफ की टीम द्वारा जो प्रयत्न किए गए हैं, वो अभिनंदनीय हैं। चाहे पन्ना में फिर से टाइगर बसाने का मामला हो, या सतपुड़ा टाइगर रिज़र्व, जिसकी अपनी एक अलग पहचान है। यह प्राकृतिक सौंदर्य का खजाना है।\"मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने आज विश्व टाइगर दिवस के अवसर पर 'सतपुड़ा फील्ड गाइड' पुस्तक का विमोचन किया। इस पुस्तक से सफारी गाइड्स और नैचुरलिस्ट्स को वाइल्डलाइफ को समझने में मदद मिलेगी।  

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Dakhal News 29 July 2021

भोपाल। पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष कमलनाथ उपचुनाव की तैयारी को लेकर भोपाल में गुरुवार को एक बड़ी बैठक ली। बैठक को संबोधित करते हुए कमलनाथ ने कहा कि हमारे देश में संविधान में कई प्रकार के चुनाव होते हैं, लोकसभा के, विधानसभा के, नगरीय निकाय के, पंचायत के, वही उपचुनावों का भी अपना एक अलग ही मायना होता है। इससे ना सरकार बनती है, ना बिगड़ती है लेकिन उपचुनावों के परिणाम देश में, प्रदेश में एक संदेश के रूप में होते हैं। कमलनाथ ने इस अवसर पर कहा कि दो साल बाद प्रदेश में विधानसभा के चुनाव हैं, यह चारों उपचुनाव, उन चुनावों के लिए एक संदेश के रूप में होंगे। आज हमने यह महत्वपूर्ण बैठक चारों उपचुनावों की तैयारियों व रणनीति को लेकर बुलाई है। हम इन क्षेत्रों के सभी प्रमुख कांग्रेसजनों, कार्यकर्ताओं से राय मशवरा कर इन चुनावों की रणनीति को और यहां के प्रत्याशियो के नाम को अंतिम रूप देंगे। जो भी जीतने वाला योग्य उम्मीदवार होगा, उसे हम अपना प्रत्याशी बनाएंगे। जो भी प्रत्याशी पार्टी की तरफ़ से तय होगा, सभी कांग्रेस जन पूरी ताकत व एकजुटता से उसे जिताने के लिए मैदान में जुड़ जाये। जिस प्रकार दमोह में हमने उपचुनाव भारी मतों से जीता, वैसे ही हमें यह सभी उपचुनाव भी भारी मतों से जीतना है। दमोह का उपचुनाव हमारे संगठन ने, मंडल-बूथ-सेक्टर के कार्यकर्ताओं ने लड़ा। उस चुनाव की जीत मंडल-सेक्टर के कार्यकर्ताओं की जीत रही संगठन की जीत रही। पूर्व सीएम ने कहा कि मैं शुरू से ही कहता हूं कि हमारा मुकाबला भाजपा से नहीं बल्कि उसके संगठन से है। आज की राजनीति परिवर्तनशील व स्थानीय हो चली है। अब बड़ी-बड़ी आम सभाओं और रैलियों का समय गया, अब तो बूथ पर व जनता से सीधे जुड़ाव का समय है। जिसका जनता से सीधा जुड़ाव होगा, उसकी जीत सुनिश्चित है। हमें क्षमतावान लोगों की पहचान करना होगी, इन क्षेत्रों में मंडल-सेक्टर की इकाइयों में सभी योग्य, निष्ठावान लोगों का चयन हो, इस बात का आप सब लोग विशेष रुप से ध्यान रखें। हमें तेरा-मेरा नहीं देखते हुए सभी को साथ लेकर चलना है। केन्द्र- प्रदेश सरकार पर साधा निशाना बैठक को संबोधित करते हुए कमलनाथ ने केन्द्र और प्रदेश सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि आज देश में मोदी सरकार, प्रदेश में शिवराज सरकार किस प्रकार से लोगों का दमन कर रही है। उनकी विफलताओं को हमें जनता के बीच में लेकर जाना होगा। किस प्रकार तीन काले कानूनों से किसानों को बर्बाद करने का काम किया जा रहा है, पेगासस जासूसी के माध्यम से लोगों की निजता हनन करने का काम किया जा रहा है। हम सरकार से इस पर चर्चा व जांच की मांग कर रहे लेकिन सरकार इससे पीछे भाग रही है। आज महंगाई, बेरोजगारी, अर्थव्यवस्था, किसानों का शोषण जैसे प्रमुख मुद्दे हैं, हमें इन मुद्दों को लेकर जनता के बीच में जाना होगा। उन्होंने कहा कि जिस प्रकार हमने एकजुटता से लडक़र दमोह सीट जीती है, वैसे ही हमें यह चारों सीटें भी हर हाल में जितना है। इस महत्वपूर्ण बैठक में पूर्व प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष सुरेश पचौरी, अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी के सचिव सुधांशु त्रिपाठी, सी पी मित्तल, कुलदीप इंदौरा, संजय कपूर, पूर्व प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष कांतिलाल भूरिया सहित कांग्रेस संगठन के प्रमुख पदाधिकारी गण, इन क्षेत्रों के प्रमुख नेता व कार्यकर्ता उपस्थित थे।

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Dakhal News 29 July 2021

राजनीति

भोपाल। आपदा प्रबंधन की तैयारियों को और अधिक पुख्ता करें। विभिन्न आपदाओं के बेहतर प्रबंधन के लिये एसओपी तैयार करें। यह निर्देश प्रदेश के गृह मंत्री डॉ. नरोत्तम मिश्रा ने गुरुवार को मंत्रालय में आपदा प्रबंधन की तैयारियों की समीक्षा करते हुए दिये। बैठक में पुलिस महानिदेशक विवेक जौहरी, अपर मुख्य सचिव जल-संसाधन एसएन मिश्रा, महानिदेशक होमगार्ड अशोक दोहरे, एडीजी अशोक अवस्थी, आईजी एसडीईआरएफ दीपिका सूरी, सचिव डी. श्रीनिवास वर्मा और अन्य वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे।गृह मंत्री डॉ. मिश्रा ने विभिन्न आपदाओं के प्रबंधन के लिये जिला एवं राज्य स्तर पर एसओपी तैयार करने के निर्देश दिये। उन्होंने कहा कि एसओपी तैयार हो जाने से विभिन्न आपदाओं का बेहतर प्रबंधन किया जा सकेगा। बैठक में डॉ. मिश्रा ने आपदा प्रबंधन के लिये होमगार्ड के 2425 पदों को स्टेट डिजास्टर इमरजेंसी रिस्पांस फोर्स (एसडीईआरएफ) में सौंपने के लिये प्रस्ताव कैबिनेट को भेजने के निर्देश दिये। उन्होंने होमगार्ड में अनुसचिवीय बल के युक्ति-युक्तकरण के आदेश जारी करने के भी निर्देश दिये। डॉ. मिश्रा ने महानिदेशक होमगार्ड को निर्देशित किया है कि जिन जिलों में होमगार्ड के डिस्ट्रिक कमाण्डेंट के पद रिक्त हैं, वहाँ पर कम्पनी कमाण्डर को डिस्ट्रिक कमाण्डेंट के पद का प्रभार सौंपे जाने के लिये भी आवश्यक कार्यवाही करें।गृह मंत्री ने आपदा की स्थिति में बेहतर निगरानी और त्वरित सहायता पहुँचाने के लिये होमगार्ड और एसडीईआरएफ के स्टेट कमाण्ड सेंटर को सतत मॉनीटरिंग करने को कहा। उन्होंने बैठक में निर्देशित किया कि मानसून को देखते हुए आपदा प्रबंधन की तैयारियों में लापरवाही नहीं बरती जाये। उन्होंने आपदाओं से निपटने के लिये आवश्यक संसाधनों का पूर्व से ही पुख्ता बंदोबस्त करने को कहा।विभाग का मानवीय पक्ष भी सामने आना जरूरी   गृह मंत्री डॉ. मिश्रा ने कहा कि पुलिस विभाग के अधिकारी-कर्मचारी विभिन्न आपदाओं और विपत्तियों के समय में अपनी जान को जोखिम में डालकर जनहित में कार्य करते हैं। उन्होंने कहा कि कोरोना संकट में हमारे जवान कड़ी धूप और बारिश में भी मैदानी कार्य करते रहे। इस दौरान कई अधिकारी-कर्मचारी शहीद हो गये। उन्होंने कहा कि अतिवृष्टि हो या बाढ़, हमारे जवान स्वयं को संकट में डालकर जनता की रक्षा करते हैं। डॉ. मिश्रा ने वरिष्ठ अधिकारियों को निर्देशित किया कि विपरीत परिस्थितियों में भी संवेदनशीलतापूर्वक कार्य करने वाले विभाग के मानवीय चेहरे को भी सामने लाया जाये।  

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Dakhal News 29 July 2021

भोपाल। केन्द्र सरकार द्वारा चिकित्सा-दंत चिकित्सा के स्नातक एवं स्नातकोत्तर पाठ्यक्रमों के ऑल इंडिया कोटे में अन्य पिछड़ा वर्ग को 27 प्रतिशत तथा आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग को 10 प्रतिशत आरक्षण वर्तमान शिक्षा सत्र से दिए जाने का निर्णय लिया गया है। मप्र के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने केन्द्र सरकार के इस फैसले का स्वागत किया है। उन्होंने गुरुवार को ट्वीट के माध्यम से कहा है कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का अन्य पिछड़ा वर्ग एवं आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग को चिकित्सा-दंत चिकित्सा के स्नातक एवं स्नातकोत्तर पाठ्यक्रमों में आरक्षण दिए जाने का निर्णय ऐतिहासिक है। यह हमारे हजारों युवक-युवतियों को प्रतिवर्ष बेहतर अवसर प्रदान करेगा तथा देश में सामाजिक न्याय के क्षेत्र में मानदंड स्थापित करेगा।

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Dakhal News 29 July 2021

समाज

विदिशा। बीती रात पुलिस को छपरा-मुंबई एक्सप्रेस में हथियारबंद लुटेरों के होने की सूचना मिली। इस सूचना के आधार पर विदिशा में ट्रेन को रोककर उसकी तलाश ली गई। लुटेरों के नहीं मिलने पर कड़ी सुरक्षा के बीच ट्रेन को भोपाल रवाना किया गया। पुलिस सूत्रों ने बताया कि भोपाल स्थित कंट्रोल रूम से बुधवार रात विदिशा पुलिस को सूचना मिली थी कि कुछ हथियारबंद लुटेरे छपरा-मुंबई एक्सप्रेस में चढ़े हैं, जो लूटपाट कर सकते हैं और यात्रियों को हानि पहुंचा सकते हैं। इसके बाद रात में छपरा से मुंबई जा रही इस ट्रेन को विदिशा में रोका गया। इसके साथ ही एडीशनल एसपी संजय साहू ने आरपीएफ, जीआरपी और विदिशा पुलिस बल के जवानों के साथ पूरी ट्रेन को घेर लिया और उसकी तलाशी ली गई। इसके साथ ही यात्रियों से भी संदिग्ध व्यक्तियों के बारे में जानकारी ली गई। तलाशी के दौरान ट्रेन में लुटेरे नहीं मिले और ट्रेन को पूरी सुरक्षा के बीच भोपाल रवाना किया गया।  

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Dakhal News 29 July 2021

भोपाल। मध्य प्रदेश में रुक रुककर बौछारे पडऩे का सिलसिला जारी है। राजधानी भोपाल में गुरुवार सुबह से आसमान में बादल छाए रहे लेकिन बारिश नहीं हुई। हालांकि दोपहर बाद हल्की रिमझिम फुहारें गिरी, जिससे मौसम में पूरी तरह से ठंडक घुल गई है। मौसम विभाग के अनुसार अरब सागर और बंगाल की खाड़ी से लगातार आ रही नमी के कारण कहीं-कहीं गरज-चमक के साथ बौछारें पड़ती रहेंगी। उधर बंगाल की खाड़ी में बने गहरे कम दबाव के क्षेत्र के शुक्रवार से आगे बढऩे की संभावना है। इससे शनिवार से प्रदेश में एक बार फिर कहीं-कहीं तेज बौछारें पडऩे का सिलसिला शुरू होने की संभावना है। इस दौरान पूर्वी मप्र में कहीं-कहीं भारी वर्षा भी हो सकती है। वरिष्ठ मौसम वैज्ञानिक पीके साहा ने जानकारी देते हुए बताया कि बंगाल की खाड़ी में बना गहरा कम दबाव का क्षेत्र शुक्रवार को आगे बढऩे लगेगा। मानसून ट्रफ भी अभी सामान्य स्तिति में है ऑर उत्तरप्रदेश से होकर गुजर रहा है। उत्तरी पाकिस्तान से अरब सागर तक एक ट्रफ बना हुआ है। इसके अतिरिक्त दक्षिणी गुजरात से उत्तरी केरल तट तक एक अपतटीय ट्रफ बना हुआ है। इस वजह से हवाओं के साथ लगातार नमी आने का सिलसिला बना हुआ है। शुक्रवार को सिस्टम के आगे बढऩे से मप्र में बारिश की गतिविधियों में तेजी आने लगेगी। इस दौरान जबलपुर, रीवा, शहडोल, सागर संभाग के जिलों में कहीं-कहीं भारी बारिश भी हो सकती है।

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पेज 3

बॉलीवुड की ख़ूबसूरत अभिनेत्री ऐश्वर्या राय ने हाल ही में बॉलीवुड के मशहूर फैशन फोटोग्राफर डब्बू रत्नानी के कैलेण्डर के लिए फोटोशूट कराया है। डब्बू रत्नानी के कैलेंडर में 22वीं बार ऐश्वर्या राय बच्चन नजर आईं, इन तस्वीरों में ऐश्वर्या बेहद ही प्यारी और ग्लैमरस लग रही हैं। इस फोटोशूट में ऐश्वर्या ने खुले लहराते बालों के साथ एक ट्रेंच कोट पहना है। उनका यह स्टनिंग लुक फैंस को काफी पसंद आ रहा है। डब्बू रत्नानी ने ऐश्वर्या के फोटोशूट की इस तस्वीर को अपने अधिकारिक इंस्टाग्राम पर साझा करते हुए लिखा-'जब आप अंदर प्रकाश रखते हैं, वह बाहर भी बिखरता है। ऐश्वर्या राय की चमकदार तस्वीरें डब्बू रत्नानी के कैलेंडर से।' ऐश्वर्या का यह फोटोशूट सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। उनके इस लुक को फैंस काफी पसंद कर रहे हैं और जमकर उनकी तारीफ भी कर रहे हैं। ऐश्वर्या राय बच्चन इन दिनों मणिरत्नम की अपकमिंग फिल्म पोन्नियिन सेलवन की शूटिंग में व्यस्त हैं। इस फिल्म में ऐश्वर्या दोहरी भूमिका में नजर आयेंगी।  

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Dakhal News 29 July 2021

फिल्म अभिनेता संजय दत्त आज अपना 62 वां जन्मदिन मना रहे हैं। इस खास मौके पर उनकी मोस्ट अवेटेड फिल्म 'केजीएफ चैप्टर 2 ' के मेकर्स ने फिल्म से अभिनेता का नया पोस्टर जारी किया है। फिल्म के इस पोस्टर में संजय दत्त अधीरा के लुक में नजर आ रहे हैं। उनका यह लुक काफी खतरनाक लग रहा है। फिल्म के इस नए पोस्टर में संजय दत्त हाथ में तलवार पकड़े नजर आ रहे हैं और उनके पीछे लोगों की भीड़ नजर आ रही हैं। फिल्म के इस नए पोस्टर को संजय दत्त ने अपने सोशल मीडिया अकाउंट पर फैंस के साथ साझा किया है और उन्हें धन्यवाद भी दिया है। संजय दत्त ने लिखा-'‘जन्मदिन की इतनी सारी बधाइयों के लिए आप सभी का शुक्रिया। ‘केजीएफ 2’ में काम करना का अनुभव काफी अच्छा रहा। मैं जानता हूं कि आप लोग लंबे से समय से फिल्म के रिलीज़ होने का इंतज़ार कर रहे हैं। मैं आश्वासन देता हूं कि आपका इंतज़ार करना बेकार नहीं जाएगा।'फिल्म में संजय का लुक काफी दमदार है और इसे फैंस काफी पसंद कर रहे हैं। गौरतलब है फिल्म केजीएफ चैप्टर 2 में साउथ के सुपरस्टार यश लीड रोल में होंगे। फिल्म में उनके किरदार का नाम रॉकी होगा ,जबकि संजय दत्त फिल्म में विलेन की भूमिका में अधीरा का किरदार निभाएंगे । जबकि रवीना टंडन रमिका सेन की भूमिका में होगी । वहीं फिल्म में इन सब के अलावा श्रीनिधी शेट्टी,प्रकाश राज, मालविका अविनाश और राव रमेश भी अहम भूमिका में नजर आएंगे। यह फिल्म साल 2018 में रिलीज हुई केजीएफ चैप्टर वन का दूसरा भाग है। फिल्म 'केजीएफ चैप्टर 2 ' के निर्माता विजय किरागंदुर हैं,जबकि फिल्म का निर्देशक प्रशांत नील हैं। फिल्म 'केजीएफ चैप्टर 2 ' हिंदी ,मलयालम,तमिल और तेलुगु में प्रदर्शित की जाएगी।

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Dakhal News 29 July 2021

दखल क्यों

डॉ. दिनेश प्रसाद मिश्र भयंकर गर्मी से जूझ रही मानवता को निजात दिलाने के लिए वर्षा ऋतु जल की अगाध राशि लेकर आयी है, किंतु हमारा समाज और हमारी सरकारी व्यवस्था इस प्रतिदान को सहेजने समेटने के लिए तैयार नहीं दिखती है। पानी की एक-एक बूंद को तरसने वाला समाज वर्षा जल को सहेजने के लिए तैयार नहीं है। उच्चतम न्यायालय ने शुद्ध पर्यावरण और पानी को मूल अधिकारों के अंतर्गत रखते हुए प्रत्येक व्यक्ति को उन्हें उपलब्ध कराने की बात कही है किंतु व्यवहार में कहीं भी यह परिलक्षित नहीं हो रहा। वर्षा का जल पूर्व की भांति बह कर नदी नालों के माध्यम से समुद्र में पहुंच जा रहा है, जब कि आवश्यकता थी कि उसकी एक एक बूंद को संरक्षित कर आवश्यकतानुसार लोगों को रूप से उपलब्ध कराया जाता। साथ ही जल की पर्याप्त उपलब्धता से ऐसी स्थिति बनती कि प्रकृति के कण-कण को उसकी आवश्यकता अनुसार सुलभ होता। वर्षा जल को भली-भांति न सहेजने के कारण ऐसा संभव नहीं हो पा रहा है। संरक्षित न किए जाने के कारण भूगर्भ का जलस्तर निरंतर गिरता जा रहा है। देश के 256 जिलों के 1592 विकास खंडों से भूगर्भ जल लगातार रसातल की ओर जा रहा है । एक अंतरराष्ट्रीय अध्ययन के अनुसार दुनिया के सर्वाधिक 30 प्रदूषित शहरों की सूची में 21 भारतीय शहर शामिल हैं। शीर्ष 10 की सूची में छह भारतीय शहर हैं ।इस सूची में उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद को सर्वाधिक प्रदूषित शहर माना गया है। वर्ष 2019 में पीएम 2.5 की सांद्रता 110.2 थी, जो अमेरिकी पर्यावरण सुरक्षा एजेंसी की तरफ से तय मानक से 9 गुना ज्यादा थी। वायु प्रदूषण के कारण वर्ष 2019 में भारत में 16.7लाख से भी ज्यादा लोग असमय काल के गाल में समा गए। यह देश भर में हुई कुल मौतों का 17.8 प्रतिशत था।इसका मूल कारण भूगर्भ के जल को संरक्षित करने और उसके उन्नयन हेतु किसी भी प्रकार का कोई प्रयास न कर उसका अंधाधुंध दोहन किया जाना है। इससे भूगर्भ के जल स्तर में जहां एक और निरंतर गिरावट होती जा रही है, वहीं दूसरी ओर जल की कमी से उसमें जीवन के लिए आवश्यक खनिजों के अभाव के साथ-साथ जीवन तथा स्वास्थ्य को नुकसान पहुंचाने वाले पदार्थ अप्रत्याशित रूप से बढ़कर दूषित पानी के साथ शरीर में पहुंचकर नाना प्रकार की व्याधियों को जन्म देते हुए जीवन के समक्ष प्रश्न चिन्ह खड़ा कर देते हैं। जल वायु मिट्टी व भूगर्भ जल के प्रदूषित होने का दुष्प्रभाव जहां लोगों की सेहत पर पड़ रहा है वहीं अर्थव्यवस्था की सेहत भी खराब हो रही है। एक एक रिपोर्ट के अनुसार वायु प्रदूषण की वजह से हुई असमय मौतों और बीमारियों के कारण वर्ष 2019 में भारत को 2.6 लाख करोड़ रुपये का आर्थिक नुकसान हुआ। यह सकल घरेलू उत्पाद यानी जीडीपी का 1.4 फ़ीसदी रहा। भारत में पर्यावरण को होने वाले सालाना नुकसान की कीमत 3.75 लाख करोड़ रुपये बैठती है। जल प्रदूषण से स्वास्थ्य लागत करीब 610 अरब अरब रुपये सालाना है। शुद्ध जल साफ सफाई और स्वच्छता के अभाव में हर साल चार लाख लोग मारे जाते हैं। जल जनित बीमारियों के चलते विश्व में पांच साल से कम आयु के करीब 15 लाख बच्चों की मौत होती है और 20 करोड़ काम के दिनों का हर साल नुकसान होता है । जल गुणवत्ता सूचकांक में 122 देशों की सूची में भारत तीसरा सबसे खराब देश है।। संसद में दी गई सूचना के अनुसार दिल्ली के कुल 11 जिलों में से 7 जिलों के भूगर्भ जल में अत्यधिक मात्रा में फ्लोराइड पाया गया है, 8 जिलों में नाइट्रेट की मात्रा अधिक है तो 2 जिलों में आरसैनिक और शीशा की मात्रा बढ़ी हुई पाई गई है। देश के अन्य हिस्सों की बात करें तो 386 जिलों के भूगर्भ जल में अत्यधिक नाइट्रेट पाया गया है, जबकि 335 जिलों में फ्लोराइड की मात्रा अधिक थी, 301 जिलों में आयरन, 153 जिलों में आरसैनिक, 93 जिलों में शीशा ,30 जिलों में क्रोमियम तथा 24 जिलों में कैडिमम अत्यधिक मात्रा में पाया गया है। देश के लगभग 70% घरों में शुद्ध पेयजल उपलब्ध नहीं है। लोग प्रदूषित पानी पीने के लिए बाध्य हैं,जिसके चलते लगभग 4 करोड़ लोग प्रतिवर्ष प्रदूषित पानी पीने से बीमार होते हैं तथा लगभग 6 करोड लोग फ्लोराइड युक्त पानी पीने के लिए विवश हैं। देश में प्रतिवर्ष लगभग चार हजार अरब घन मीटर पानी वर्षा के जल के रूप में प्राप्त होता है किंतु उसका लगभग 8% पानी ही हम संरक्षित कर पाते हैं। शेष पानी नदियों ,नालों के माध्यम से बहकर समुद्र में चला जाता है। हमारी सांस्कृतिक परंपरा में वर्षा के जल को संरक्षित करने पर विशेष ध्यान दिया गया था, जिसके चलते स्थान स्थान पर पोखर ,तालाब, बावड़ी, कुआं आदि निर्मित कराए जाते थे , जिनमें वर्षा का जल एकत्र होता था तथा वह वर्ष भर जीव-जंतुओं सहित मनुष्यों के लिए भी उपलब्ध होता था। अब वैज्ञानिक प्रगति के नाम पर इन्हें संरक्षण न दिए जाने के कारण अब तक लगभग चार हजार, 500 नदियां तथा 20 हजार तालाब झील आदि सूख गए हैं तथा वह भू माफिया के अवैध कब्जे का शिकार होकर अपना अस्तित्व गवा बैठे हैं। देश की बड़ी-बड़ी नदियों को जल की आपूर्ति करने वाली उनकी सहायक नदियां वैज्ञानिक प्रगति के नाम पर अपना अस्तित्व गवा बैठी हैं। जो कुछ थोड़े बहुत जल स्रोत आज उपलब्ध हैं,उनमें से अनेक औद्योगिक क्रांति की भेंट चढ़ चुके हैं। फलस्वरूप उनके पानी में औद्योगिक फैक्ट्रियों से निकलने वाले गंदे पानी में कचरे के मिल जाने से उन का जल इतना प्रदूषित हो गया है कि उसको पीना तो बहुत दूर, स्नान करने पर भी अनेक रोगों से ग्रस्त हो जाने का खतरा विद्यमान है। भारत की कृषि पूर्णतया वर्षा जल पर निर्भर है। वर्षा पर्याप्त होने पर सिंचाई के अन्य साधन सुलभ हो जाते हैं किंतु वर्षा न होने पर सभी साधन जवाब दे देते हैं और कृषि सूखे का शिकार हो जाती है। चीनी उत्पादक महाराष्ट्र एवं उत्तर प्रदेश के किसान निरंतर गन्ने की खेती पर बल दे रहे हैं और सरकार भी गन्ना उत्पादन के लिए उन्हें प्रोत्साहित कर रही है ।इसी प्रकार धान की खेती के लिए पंजाब, छत्तीसगढ़, उत्तर प्रदेश इत्यादि अनेक राज्य धान की फसल का क्षेत्रफल निरंतर बढ़ाते जा रहे हैं किंतु उसके लिए पानी प्राप्त न होने के कारण वह पानी भूगर्भ से निकाल कर खेतों को सींचा जा रहा है। इससे भूगर्भ में स्थित जल का स्तर निरंतर गिरता जा रहा है, जिस ओर कोई ध्यान नहीं दे रहा। स्पष्ट है कि जल प्रदूषण के अनेक स्रोत हैं जो सामूहिक रूप से जल को प्रदूषित करते हैं। शहरीकरण के परिणाम घरेलू सीवेज, अनियंत्रित तथा हरित क्रांति के परिणामस्वरूप पानी पर अवलंबित खेती एवं औद्योगिक अपशिष्ट तथा कृषि कार्यों में अत्यधिक प्रयोग में लाए गए कीटनाशक ,जल में घुल मिलकर भूगर्भ के जल को अत्यधिक मात्रा में प्रदूषित कर रहे है। इससे निजात पाने के संदर्भ में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने चुनाव प्रचार के दौरान यह घोषणा की थी कि पुनः सत्ता में आने पर खेती को पानी तथा हर घर को सन 2024 तक नल के माध्यम से पीने का पानी उपलब्ध कराया जायेगा। इस बात को दृष्टि में रखते हुए हर खेत को पानी के साथ हर घर को भी नल के माध्यम से पेयजल उपलब्ध कराने तथा सूख रही नदियों को पुनर्जीवित करने, नदियों में विद्यमान प्रदूषण को समाप्त करने तथा स्वच्छ जल स्रोतों को पुनर्जीवित करने ,के उद्देश्य से जल शक्ति मंत्रालय का गठन किया गया है। जल शक्ति मंत्रालय द्वारा जन सहयोग के साथ सरकारी व्यवस्था के अंतर्गत जल संरक्षण योजना को मूर्त रूप देने का कार्य विचाराधीन है ।संभव है वह निकट भविष्य में मूर्त रूप ले। स्पष्ट है कि विद्यमान जल को प्रदूषण मुक्त कर पीने योग्य बनाये रखने हेतु भूगर्भ के जल स्तर का उन्नयन, उसका संभरण तथा संरक्षण अति आवश्यक है और यह तभी संभव है जब वर्षा जल की एक एक बूंद एकत्रित होकर भूगर्भ में समाहित हो जाए । (लेखक स्वतंत्र टिप्पणीकार हैं।)

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Dakhal News 28 July 2021

सियाराम पांडेय 'शांत' प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश को हमेशा पहले रखने का मंत्र दिया है। भारत जोड़ो आंदोलन चलाने की सलाह दी है। उन्होंने कहा है कि इसे राजनीतिक आंदोलन मानने की जरूरत नहीं है बल्कि इसे जनता का आंदोलन बनाया जाना चाहिए। उन्होंने इसके लिए महात्मा गांधी के अंग्रेजो भारत छोड़ो आंदोलन का हवाला दिया है। समवेत और नवोन्मेषी विकास से भारत को जोड़ने की नसीहत दी है। प्रधानमंत्री 79 बार रेडियो पर अपने मन की बात कर चुके हैं। भारत के अन्य किसी भी प्रधानमंत्री ने रेडियो पर इतनी बार अपने मन की बात नहीं की है। यह और बात है कि प्रधानमंत्री ने जब भी अपने मन की बात की है, उस पर राजनीति जरूर हुई है। इस बार भी कुछ ऐसा ही हुआ। राजनीतिक दलों का अक्सर यही आरोप होता है कि प्रधानमंत्री अपने मन की बात तो करते हैं लेकिन देश के मन की बात नहीं करते। हर बार ऐसे ही आरोप लगने लगें तो स्पष्टीकरण जरूरी हो जाता है। यह अच्छा तो नहीं कि प्रधानमंत्री से हर बात पर सफाई की अपेक्षा की जाए लेकिन देश की राजनीति में इन दिनों हर बात पर सीधे प्रधानमंत्री से ही जवाब मांगने का चलन विकसित हो गया है। गोया, प्रधानमंत्री न हुआ, जवाब देने की मशीन हो गया। प्रधानमंत्री ने तो इस बार तो यह बताने की भी कोशिश की कि उनकी मन की बात निजी बिल्कुल भी नहीं है। उसमें देश भर के 35 साल से कम आयु-वय के 75 प्रतिशत युवाओं के सुझाव शामिल होते हैं। लेकिन राहुल गांधी और प्रियंका वाड्रा की कटाक्षपरक प्रतिक्रिया से ऐसा नहीं लगा कि उन्हें प्रधानमंत्री के इस दिलासे पर भरोसा भी है। राहुल गांधी को लगता है कि प्रधानमंत्री देश के मन की बात नहीं समझते अन्यथा देश में टीकाकरण के ऐसे हालात नहीं होते। जबकि प्रियंका वाड्रा का आरोप है कि प्रधानमंत्री खरबपति मित्रों के चश्मे से देखते और किसानों का अपमान करते हैं। किसी के मन को समझना कठिन है। राहुल और प्रियंका क्या चाहते हैं, क्या सोचते हैं, यह आजतक कांग्रेसी भी नहीं समझ पाए। प्रधानमंत्री को बार-बार राष्ट्रप्रेम, भारत प्रथम या भारत सबसे पहले जैसी भावना के विकास की बात क्यों करनी पड़ रही है। भारत जोड़ो अभियान चलाने की बात क्यों करनी पड़ रही है? जाहिर सी बात है कि आजादी के बाद ही अगर नेहरू-गांधी परिवार ने देश प्रथम की भावना से काम किया होता तो चीन को देश का बहुत बड़ा भूभाग ऊसर- बंजर और बेकार कहकर सौंप न दिया गया होता। हिंदुस्तान-पाकिस्तान का बंटवारा न होता। सरदार बल्लभ भाई पटेल ने भौगोलिक स्तर पर तो देश को जोड़ दिया लेकिन जाति-भाषा, धर्म और संस्कृति के स्तर पर यह देश कभी एक हो नहीं पाया। यह काम करेगा तो कोई प्रधानमंत्री ही।सच तो यह है कि अनेकता में एकता की बात करने वाले राजनीतिक दल आजादी के 74 साल बाद भी देश को उसकी एक अदद राष्ट्रभाषा तक नहीं दे पाए। हिंदी और अन्य भारतीय भाषाएं अपने ही देश में कामकाज की भाषा नहीं बन पा रही हैं। बड़ी अदालतों में न तो हिंदी या अन्य भारतीय भषाओं में वाद स्वीकृत हो रहे, न उनमें बहस या जिरह हो रही और न ही फैसले आ रहे। फिर देश जुड़ेगा कैसे? यह अपने आप में बड़ा सवाल है। जुड़ने के लिए तो दिल का मिलना, मन का मिलना जरूरी है। मन तो तभी मिलता है, जब यह स्पष्ट हो कि सामने वाला क्या कह रहा है? यह एक राष्ट्र-एक भाषा होने पर ही संभव है। कम से कम देश में एक ऐसी भाषा तो हो जिसे सब समझ सकें। भारत जोड़ो अभियान का मतलब है- देश से खुद को जोड़ो। अपने को देश का समझो। देश को अपना समझो।जो भी काम करो, यह विचार कर करो कि क्या यह देश के व्यापक हित में है? जिस तरह बूंद-बूंद से महासागर बनता है।उसी तरह व्यक्ति-व्यक्ति के मेल से देश बनता है। व्यक्ति को जोड़ने का काम भाषा करती है। हमारे सत्कर्म ही देश को विकासगामी बनाते हैं। देश को आगे ले जाना केवल सरकारों का काम नहीं है, यह हर व्यक्ति का नैतिक दायित्व है। हमने जिस देश का अन्न-जल ग्रहण किया है। यहां से वायु प्राप्त की है। जहां हम पले-बढ़े हैं। जहां से हमने ज्ञान पाया है, जहां के वस्त्र पहने हैं, उस देश के लिए हम क्या कुछ कर रहे हैं, यह तो कभी हम सोचते ही नहीं। प्रधानमंत्री का इशारा है कि हम जो भी काम करते हैं, उसमें नवोन्मेष तलाशें। उसे गुणवत्तापूर्वक पूरी ईमानदारी से करें। कुछ चिंतकों का मानना है कि युवाओं को भाषण की नहीं, काम की जरूरत है। देश में काम की नहीं, काम करने वालों की कमी है। सरकारी विभागों में कार्यरत लोग कितना काम करते हैं और कैसे करते हैं, यह किसी से छिपा नहीं है। कुछ राजनीतिक दल जनता को मुफ्त पानी,मुफ्त बिजली,मुफ्त राशन और मुफ्त सुविधाएं देने की वकालत करते हैं, लेकिन हमें सोचना होगा कि मुफ्त कुछ भी नहीं मिलता। उसकी कीमत हमें चुकानी पड़ती है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी स्वाधीनता संग्राम सेनानियों की राह पर चलने और उनके सपनों का देश बनाने की बात कर रहे हैं। हमें सोचना होगा कि हमारा सपना आजादी के दीवानों के सपनों से कितना मेल खाता है और अगर नहीं तो क्यों? परस्पर स्नेह और सहकार इस देश की ताकत रही है।आज हम इससे वंचित क्यों हैं? प्रधानमंत्री अगर लखीमपुर के केले के बेकार तने के रेशे से फाइबर निर्माण की सराहना करते हैं तो मणिपुर में सेब की खेती की सराहना करना भी नहीं भूलते। उत्तर प्रदेश के सभी जिलों में मेडिकल कॉलेज और हर मंडल में सैनिक स्कूल खोलने की बात हो रही है। ऐसा हर प्रदेश में होना चाहिए। टीकाकरण और ऑक्सीजन पर राजनीति करने वाले दलों ने अगर वाकई चिकित्सा नेटवर्क मजबूत करने की दिशा में काम किया होता तो क्या देश के आज यही हालात होते। प्रधानमंत्री अगर मन की बात भी करते हैं तो सोच-समझकर करते हैं इसलिए उनकी भावनाओं को समझा जाना चाहिए। विरोध करना आसान है लेकिन विरोध भी सोच-समझ कर हो तभी उसकी अहमियत है। होश में रहकर किया काम ही इस देश को आगे ले जा सकता है। होश और जोश दोनों की युति बनें तभी भ्रष्टाचारमुक्त सार्थक विकास हो सकता है। अपने काम को बेहतर तरीके से अंजाम देकर ,सबका साथ,सबका विकास की भावना को महत्व देकर ही हम एक दूसरे के दिलों में जगह बना सकते हैं। प्रधानमंत्री स्वस्थ प्रतिस्पर्धा की बात कर रहे हैं। अच्छा होता कि राजनीतिक दल मन की बात के निहितार्थ समझ पाते। (लेखक हिन्दुस्थान समाचार से सम्बद्ध हैं।)

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Dakhal News 26 July 2021

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