विशेष

भोपाल। लॉकडाउन के चलते अपने देश नहीं लौट पाए छात्र छात्राओं को अब रेस्क्यू किया जाएगा । भोपाल सहित अन्य राज्यो से तकरीबन 500 लोग पढ़ाई करने या टूरिस्ट वीजा पर इटली और ईरान गए हुए है थे जिनको अब भोपाल लाया जा रहा है ।     बात दें कि एक विशेष हवाई जहाज द्वारा 02 अप्रैल को करीबन 500 लोगो के भोपाल पहुचने की उम्मीद है जहां भोपाल के ई एम ई सेंटर में इनके लिए बनाया 500 बेड का अस्पताल बनाया गया है । जहाँ इन्हें 14 दिन तक क्वारटाइन किया जाएगा। यह आइसोलेन वार्ड सेना के अधिकारियों की सतत निगरानी में तैयार किया गया है इस आइसोलेशन वार्ड की निगरानी खुद सेना के अफसर करेंगे।   

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Dakhal News 31 March 2020

इंदौर। देश की मिनी मुंबई कहलाने वाले इंदौर शहर में कोरोना का कहर बढ़ता ही जा रही है। इंदौरवासियों के लिए एक ओर चिंता की खबर है। इंदौर से भोपाल भेजे गए 40 सैंपल्स में से 17 मरीज कोरोना पॉजिटिव आए हैं। सभी मरीज इंदौर के हैं। इसके साथ ही इंदौर में कोराना वायरस संक्रमित मरीजों की संख्या 40 पार यानि कुल 44 मरीज हो गए है। इंदौर प्रशासन ने इसकी पुष्टि की है और साथ ही कोरोना मरीजों की बढ़ती संख्या को बहुत ही चिंताजनक बताया है।   कोरोना संक्रमण के चलते जहां अब तक इंदौर में 3 लोगों को अपनी जान गंवानी पड़ी है, वही अब यहां कोरोना संक्रमण के शिकार लोगों की संख्या भी तेजी से बढ़ रही है। इंदौर के चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग को रविवार को इंदौर से भोपाल भेजे गए 40 सैंपल की जांच रिपोर्ट मिली है। रिपोर्ट में 17 लोग कोरोना से संक्रमित पाए गए है और अब स्वास्थ्य विभाग सभी 17 लोगों को संक्रमण के दृष्टिकोण से इलाज में जुट गया है। बताया जा रहा है कि भोपाल से आई रिपोर्ट में 17 मरीजो में कोरोना की पुष्टि होने के बाद अब इंदौर में कोरोना पॉजिटिव मरीजो की संख्या 42 तक पहुंच गई है। वही 13 मरीजों की दोबारा जांच आईसीएमआर के निर्देश के अनुसार की जा रही है जिन्हें अभी संदिग्ध माना जा रहा है। फिलहाल, अकेले इंदौर में कोरोना से 3 मौत हो चुकी है वही पॉजिटिव मरीजों की संख्या बढक़र 44 तक जा पहुंची है जो इंदौर के लिए एक बड़े खतरे की घन्टी माना जा रहा है। उल्लेखनी है कि कोरोना संक्रमण के मामले में इंदौर संक्रमित शहरों की सूची में आठवें नंबर पर है। वहीं कोरोना संक्रमण से मौत के मामले में भी मप्र दूसरे नंबर पर है। अब तक कोरोना से सबसे ज्यादा मौतें महाराष्ट्र में हुई हैं उसके बाद दूसरे नंबर पर मप्र है। 

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Dakhal News 31 March 2020

राजनीति

भोपाल। पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष कमलनाथ ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को पत्र लिखा है। अपने पत्र में कमलनाथ ने देश के विभिन्न हिस्सों से अपने घर की ओर पलायन कर रहे मप्र समेत पूरे देश के गऱीब मज़दूरों व छात्रों की और ध्यान दिलाया है और उनके रहने- खाने व सकुशल वापसी के इंतजाम करने का आग्रह किया है। साथ ही उन्होंने कहा है कि एक कंट्रोल रूम बनाकर इस पर काम होना चाहिए।    प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को लिखे अपने पत्र में कमलनाथ ने लिखा है कि कोरोना महामारी से निपटने के लिए किए जा रहे प्रयासों के लिए हमके आपके साथ है और अपनी पूरी क्षमताओं के साथ इस विभीषिका के खिलाफ लड़ाई के लिए तैयार है। अपने पत्र में आगे कमलनाथ ने कहा है कि इस वक्त मप्र सहित समूचे भारत के विभिन्न राज्यों के पलायन करने वाले मजदूरों एवं छात्रों के सामने भीषण संकट खड़ा हुआ है। वे जहां रहते थे या काम करते थे  वहां उन्हें जीवन की बुनियादी सुविधाएं नहीं मिल पा रही है। ऐसे समय में वे अपने गांव-घर पहुंच कर सुरक्षित हो जाऐंगे। यहीं कारण है कि लाखों मजदूर और छात्र पैदल ही अपने घरों तक सैकड़ों मील पैदल चलकर पहुंचने की कोशिश कर रहे है। उनके पास खाने पीने का कोई साधन नहीं है। कई मॉएं अपने दूध पीते बच्चों को कंधे पर लेकर चल रही है। उनकी बेबसी देखकर असहनीय पीड़ा हो रही है।    कमलनाथ ने सरकार से आग्रह करते हुए कहा है कि केन्द्र सरकार तत्काल राज्य सरकारों से समन्वय स्थापित करके देश के सभी हिस्सों में प्रवासी मजदूरों और छात्रों को पहले भरोसा दिलाए कि वे जहां हैं उन्हें वहां कोई तकलीफ नहीं होगी और खाने पीने का इंतजाम किया जाएगा। इसके अलावा सोशल डिस्टेंसिंग के साथ उनके रहने और खाने के लिए स्कूलों और धर्मशालाओं का प्रङ्क्षध किया जाए। इस काम में जनप्रतिनिधि और सामाजिक संस्थाओं से मदद ली जाए। कमलनाथ ने प्रवासी मजदूरों और छात्रों की स्क्रीनिंग करने के साथ ही उन्हें घर तक पहुंचने के लिए परिवहन व्यवस्था करने और ऐसे लोगों को तीन माह का राशन और 7500 रुपए प्रतिमाह के हिसाब से आर्थिक सहायता करने का आग्रह किया है। अपने पत्र के अंत में कमलनाथ ने इस पूरी प्रक्रिया के लिए एक  सक्रिय नियंत्रण कक्ष हर राज्य में खाद्य असुरक्षा, भूखमरी और पलायन के प्रभावों को नियंत्रित करने के लिए बनाए जाने का आग्रह किया है।   

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Dakhal News 31 March 2020

इंदौर। एमआरटीबी अस्पताल में भर्ती कोरोना पॉजिटिव दो मरीज रविवार सुबह जब अस्पताल से गायब पाए गए तो अस्पताल सहित पुलिस और प्रशासन में हड़कंप मच गया। काफी मशक्कत के बाद इन दोनों मरीजों को खजराना इलाके से पकड़ा गया, जिसके बाद लोगों ने राहत की सांस ली। दोनों मरीजों को वापस अस्पताल में भर्ती कराया गया है। इस घटना को लेकर अस्पताल की व्यवस्थाओं पर भी सवाल उठ रहे हैं।एमआरटीबी अस्पताल के स्पेशल वार्ड में भर्ती कोरोना पॉजीटिव दो मरीज रविवार सुबह वार्ड से नदारद थे। पहले अस्पताल में ही मरीजों की खोजबीन की गई लेकिन जब वे कहीं नहीं मिले तो पुलिस और प्रशासन को सूचना दी गई। पहले से ही अलर्ट पर चल रही इंदौर पुलिस ने काफी मशक्कत के बाद दोनों मरीजों को शहर के खजराना क्षेत्र से पकड़ लिया। इसके बाद दोनों को फिर से अस्पताल में भर्ती कराया गया है। इस घटना को अस्पताल प्रशासन की बड़ी लापरवाही माना जा रहा है। यह सवाल भी खड़ा हो रहा है कि जब सड़कों पर जगह-जगह पुलिस लोगों को रोककर पूछताछ कर रही है, ऐसे में दो पॉजिटिव मरीज कैसे अस्पताल से भाग निकले।शनिवार को भी आधा घंटा वार्ड में घूमता रहा एक मरीज एमआरटीबी अस्पताल में बनाए स्पेशल वार्ड में भर्ती एक पॉजिटिव मरीज शनिवार को आधा घंटा तक बेरोकटोक अस्पताल परिसर में घूमता रहा। उस वक्त वहां दो दर्जन से ज्यादा लोग हंगामा कर रहे थे। मरीज भी इन्हीं में शामिल होकर अस्पताल की व्यवस्थाओं को कोसने लगा। कर्मचारियों ने उससे पूछताछ तो पता चला कि वह कोरोना पॉजिटिव है और स्पेशल वार्ड में भर्ती है। हंगामा होता देख वह भी बाहर निकल आया था। इतना सुनते ही वहां सन्नाटा छा गया। कर्मचारियों ने किसी तरह मरीज को वापस वार्ड में भिजवाया था।  

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Dakhal News 29 March 2020

मीडिया

Pushya Mitra : इस वक़्त आप पॉजिटिव पत्रकार कैसे हो सकते हैं? कुछ टिप्स- हर समस्या की वजह विपक्ष और जनता में, गरीबों में, दलितों में, अल्पसंख्यकों में ढूँढिये। राहुल गांधी, केजरीवाल, लालू, नेहरू और पाकिस्तान में ढूँढिये। चीन में ढूँढिये। फिर भी काम न चल रहा हो तो नीतीश जैसों में भी ढूंढ लीजिये। भाजपा, मोदी और उनके लोगों में मत ढूँढिये। सरकार की विफलता की बात मत कीजिये, यह वक़्त सरकार की आलोचना करने का नहीं है। बेचारी हतोत्साहित हो जाएगी। चुप रहकर देखिये, मोदी जी ने किया है, ठीक ही किया होगा। ऐसा लग रहा हो तो राष्ट्र के लिये थोड़ी कुर्बानी दीजिये। कुछ दिन ऐसा करके देखिये। आपको लोग पॉजिटिव मानने लगेंगे। Samarendra Singh : संधी लौंडों को मौका मिल गया है। चौके-छक्के मार रहे हैं। ब्रज में देसी-विदेशी गोपियों संग होली खेल रहे थे तो कोरोना नहीं फैला? 19-20 मार्च तक तिरुपति बालाजी और बाबा जगन्नाथ से लेकर सभी मंदिर खुले थे और भजन कीर्तन जारी था मगर वहां भी कोरोना नहीं फैला! बस 13-15 मार्च को निजामुद्दीन में ही फैला है! इन संधी लौंडों और पंडों को मुल्लों ने और मीडिया ने एक और अवसर दिया है राजनीति करने का अगले कुछ दिन इसी के नाम। जय कोरोना!     निज़ामुद्दीन में लोग छिपे होते हैं। लेकिन वैष्णो देवी में लोग फँसे होते है। शब्दों के बारीक हेरफेर से न्यूज़ में नफ़रत की खेती होती है। विवेक राव

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Dakhal News 31 March 2020

भोपाल।  मध्य प्रदेश में राजधानी भोपाल पुलिस ने कोरोना वायरस संक्रमित एक पत्रकार के खिलाफ मामला दर्ज किया है। उक्‍त पत्रकार कोराना (कोविड-19) से संक्रमित था इसके बाद भी वे पूर्व सीएम कमलनाथ की आहूत पत्रकार वार्ता में शामिल होने पहुंच गए थे, जबकि चिकित्‍सकों द्वारा  इस पत्रकार की बेटी के लंदन से वापस लौटने पर कोरोना संक्रमित पाए जाने पर पूरे परिवार को घर में पृथक रहने की सलाह दी गई थी।    उल्‍लेखनीय है कि पूर्व मुख्‍यमंत्री कमलनाथ ने अपने पद से त्‍याग देने के पूर्व पत्रकारों को  20 मार्च को मुख्यमंत्री निवास में प्रेसवार्ता में शामिल होने के लिए बुलाया था। जिसमें कि लगभग सभी प्रमुख मीडिया संस्‍थानों के 200 से अधिक पत्रकार शामिल हुए थे। पत्रकारों से हुई बातचीत के बाद पत्रकार की बेटी और दो दिन बाद स्वयं पत्रकार के कोराना (कोविड-19) के संक्रमण की पुष्टि हुई थी।  वर्तमान में पिता और पुत्री दोनों इलाज के लिए भोपाल के एम्स में भर्ती हैं।    भोपाल पुलिस के प्रवक्ता ने बताया कि शहर के श्यामला हिल्स पुलिस थाने में इस पत्रकार के खिलाफ भादंवि की धारा 188 (सरकारी सेवक के कानूनी आदेश की अवहेलना), धारा 269 (उपेक्षापूर्ण कार्य जिससे जीवन के लिए संकटपूर्ण रोग का संक्रमण फैलना संभाव्य हो), धारा 270 (परिद्वेषपूर्ण कार्य, जिससे जीवन के लिए संकटपूर्ण रोग का संक्रमण फैलना संभाव्य हो) के तहत मामला दर्ज किया गया है।  उनका यह भी कहना था कि कोरोना वायरस महामारी से संबंधित सरकार के प्रतिबंधात्मक आदेश का उल्लंघन करने पर पत्रकार के खिलाफ मामला दर्ज किया गया है ।    इस घटना के बाद प्रदेश की राजधानी में रह रहे अनेक पत्रकारों ने स्‍वयं को होम कोरंटाइन कर लिया है, वहीं कई प्रशासनिक अधिकारी व पूर्व मंत्री एवं विधायक जोकि इस पत्रकार वार्ता में मौजूद थे, उन्‍होंने भी एतिहातन अपने को 14 दिन के लिए परिवार से अलग कर लिया है, जबकि कई लोग इस बीच अपनी कोरोना जांच करा चुके हैं, जिसमें कि अब तक सभी की रिपोर्ट नेगेटिव आई है।    वहीं, पूर्व मंत्री सचिन यादव ने शनिवार को इस बारे में ट्वीट कर जानकारी दी है। साथ ही उन्होंने वहां मौजूद पत्रकारों और अन्य लोगों से भी सावधानी बरतने का आग्रह किया हैं। उन्होंने ट्वीट कर लिखा ‘20 मार्च को कमलनाथ जी की आयोजित प्रेसवार्ता में मौजूद एक पत्रकार साथी कोरोना वायरस से संक्रमित पाए गए हैं, इसीलिए सावधानी के तौर पर मैं सेल्फ़-आइसोलेशन में हूँ एवं पत्रकार साथियों से भी अनुरोध है अपना ख्याल रखें। मैं सरकार के सभी आवश्यक निर्देशों का पालन कर रहा हूँ और आप भी करें’।    इसी तरह से कमलनाथ की प्रेस वार्ता में मौजूद ग्वालियर से कांग्रेस विधायक प्रवीण पाठक ने भी सावधानी के तौर पर पहले ही खुद को होम आइसोलेट कर लिया है। वहीं पूर्व पशुपालन मंत्री और भितरवार से कांग्रेस विधायक लाखन सिंह ने भी अपना मेडिकल चेकअप करवाया है । हालांकि डॉक्टर ने सब सामान्य बताया है।    उधर,  प्रशासन ने भी तत्काल पत्रकार और उनके परिवार समेत इनके संपर्क में आए लोगों से होम क्वारेंटाइन की अपील की थी । अब तक ज्‍यादातर की जांच हो चुकी है।  शेष की जांच कराई जा रही है। बतादें कि आरोपी पत्रकार की 26 वर्षीय बेटी लंदन में कानून की पढ़ाई कर रही है1  18 मार्च को उसके लंदन से भोपाल आने पर परिवार को घर में पृथक (होम क्वारेंटाइन) की सलाह दी गई थी लेकिन उसके आने के दो दिन बाद ही, 20 मार्च को ये पत्रकार मुख्यमंत्री निवास पत्रकार प्रेसवार्ता में शामिल होने पहुंच गए थे ।   

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Dakhal News 28 March 2020

समाज

बैतूल। बीते दिनों बैतूल जिले में मिले कोरोना के दो संदिग्धों के सेम्पल भोपाल जांच के लिए भेजे गए थे, जिसमें एक की रिपोर्ट रविवार को आ गई है। रिपोर्ट निगेटिव आने से प्रशासन और आम लोगों ने थोड़ी राहत महसूस की है। वहीं, प्रशासन लगातार ऐहितयात बरत रहा है और आम लोगों से भी अपील कर रहा है।    मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. जीसी चौरसिया ने बताया कि अब तक बैतूल जिले में कुल 2  कोविड-19 संदिग्ध मरीज भर्ती हुए हैं। इनके सैंपल लिए गए और जांच के लिए भोपाल भेजे गए थे। इनमें से रविवार को एक रिपोर्ट प्राप्त हुई है, जो कि निगेटिव है। उन्होंने बताया कि जिले में विदेश यात्रा करके आए नागरिकों की संख्या- 84 है एवं इनमें से 66 मरीजों का स्वास्थ्य परीक्षण कर लिया गया है। इन 84 नागरिकों में से 18 नागरिकों ने विदेश यात्रा की जानकारी दी है, जो बैतूल जिले के निवासी हैं किंतु अन्य स्थानों पर निवासरत हैं और जिले में नहीं आए हैं। वर्तमान में होम आइसोलेशन में 52 नागरिकों को रखा गया था जबकि होम आइसोलेशन के 14 दिवस पूर्ण किए नागरिकों की संख्या 14 है । इस तरह वर्तमान में कुल 52 नागरिक होम आइसोलेशन में हैं औऱ 14 नागरिक अपनी अवधि पूर्ण कर चुके हैं जिन्हें अभी भी घर में रहकर सावधानी बरतने की सलाह दी गयी है। डॉक्टर चौरसिया ने बताया कि दो मरीजों को कोरोना वार्ड में इसलिए रखा गया है ताकि दूसरे लोग उनके संपर्क में ना आएं। कोरोना वार्ड बनाया ही इसलिए गया है ताकि वहां कोरोना संदिग्धों को रखा जा सके चाहे कोरोना वायरस की जांच रिपोर्ट सकारात्मक आए या नकारात्मक। लक्षणों के आधार पर सुरक्षा की दृष्टि से इन मरीजों को कोरोना  वायरस वार्ड में रखा गया है ताकि किसी भी प्रकार की कोई चूक ना हो। इस तरह की हिदायत भी दी जा रही है ।

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Dakhal News 29 March 2020

उज्जैन। धर्म नगरी उज्जैन के बीचोंबीच स्थित जान्सापुरा पूरे मध्यप्रदेश में सुर्खियां में आ गया है । यहां पर रहने वाले एक ही परिवार के चार सदस्य कोरोना पॉजिटिव पाए गए हैं। इनमें से एक महिला की मौत भी हो चुकी है।  चीन के वुहान से शुरू हुआ करोना कब उज्जैन तक पहुंच गया यह बात किसी को पता तक नहीं चल पाई । सबसे बड़ी बात यह है कि जान्सापुरा में रहने वाला एक ही परिवार कोरोना वायरस की जद में आ गया। पहले कोरोना पाजिटिव राबीया बी की दर्दनाक मौत हो गई और अब उनके पुत्र, पुत्री और पोता वायरस से संघर्ष कर रहे हैं । कोरोना किस कदर एक दूसरे में फैलता है यह बात किसी से छिपी नहीं है।  जांसापुरा में रहने वाले कुछ और लोगों के सैंपल भी लिए गए हैं । जो राबीया के परिवार के संपर्क में रहे हैं।    दूसरी तरफ जिला प्रशासन की ओर से ऐसे दुकानदारों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जा रही है जो नियमों का उल्लंघन कर रहे हैं । जिला प्रशासन के अधिकारियों ने कई दुकानों को सील कर दिया है । इसके अलावा मुकदमे भी दर्ज किए जा रहे हैं इसलिए दुकानदारों को भी अब नियम के दायरे में रहकर ही दुकान चलाना होगी। अब पुलिस की सख्ती और बढेगी। 

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Dakhal News 29 March 2020

पेज 3

मुंबई   पूरी दुनिया इस समय कोरोना वायरस के प्रकोप का सामना कर रही है और इसके खिलाफ जंग लड़ रही है। ऐसे में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान बना चुकी अभिनेत्री प्रियंका चोपड़ा और उनके पति एवं अमेरिकी सिंगर निक जोनस ने भी इस लड़ाई में मदद के लिए अपना हाथ आगे बढ़ाया है। उन्होंने कोरोना वायरस के खिलाफ इस लड़ाई में पीएम केयर्स फंड में दान देने के साथ-साथ यूनिसेफ, फीड अमेरिका, गूंज, डॉक्टर्स विदाउट बॉर्डर्स, गिव इंडिया और कई संस्थाओं को मदद देने के लिए अपना हाथ आगे बढ़ाया है। इसकी जानकारी प्रियंका चोपड़ा ने सोशल मीडिया पर दी। प्रियंका ने इंस्टाग्राम पर कुछ तस्वीरें शेयर कर लिखा-'दुनिया को हमारी मदद की पहले से कहीं ज्यादा जरूरत है। ये संगठन कोविड-19 से प्रभावित लोगों की मदद करके अद्भुत काम कर रहे हैं। वे भूखों को खिला रहे हैं। डॉक्टर्स की मदद कर रहे हैं, कम आय वाले और बेघर समुदायों की मदद कर रहे हैं और मनोरंजन की दुनिया में मौजूद हमारे सहयोगियों  का भी समर्थन कर रहे हैं।निक और मैं पहले ही सभी संस्थाओं में दान कर चुके हैं। जो भी आप सब ने किया उसका धन्यवाद। उन्हें आपके समर्थन की भी आवश्यकता  है और हम आपसे भी दान करने का अनुरोध करेंगे। कोई भी दान छोटा नहीं होता है। हम साथ मिलकर दुनिया को इसे हराने में मदद कर सकते हैं!'   प्रियंका चोपड़ा और निक जोनस के इस कार्य की जमकर सराहना हो रही है। हालांकि प्रियंका ने अपने इस पोस्ट में यह खुलासा नहीं किया हैं कि उन्होंने किसे कितना दान दिया है। उनके फैंस उनके इस कार्य से काफी खुश हैं। प्रियंका चोपड़ा ने इससे पहले लोगों से कोरोना वायरस से सतर्क रहने और स्वयं को क्वारंटाइन में रखने की अपील की थी। प्रियंका चोपड़ा ने 22 मार्च को हुए जनता कर्फ्यू के दौरान अमेरिका में अपने पति निक जोनस के साथ छत पर खड़े होकर ताली भी बजाई थी।

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Dakhal News 31 March 2020

मुंबई मशहूर बॉडी बिल्डर और सलमान खान के भतीजे अब्दुल्ला खान का निधन हो गया है। अब्दुल्ला खान हाल ही में मुंबई के कोकिलाबेन अस्पताल में भर्ती में हुए थे और उनके फेफड़ों में संक्रमण था।अब्दुल्ला खान की मौत की खबर सुनते ही सलमान सहित उनका पूरा परिवार सदमे है। सलमान ने अब्दुल्ला खान को श्रद्धांजलि देते हुए सोशल मीडिया पर उनकी ब्लैक एंड वाइट तस्वीर शेयर की है। इसके साथ ही सलमान ने लिखा-' तुम्हें हमेशा प्यार करेंगे!'   सलमान और अब्दुल्ला के बीच एक मजबूत बॉन्डिंग थी। दोनों ने साथ में बॉडी बिल्डिंग की ट्रेनिंग भी की थी। अब्दुल्ला को सलमान के सबसे करीबी लोगों में माना जाता था। दोनों ने पिछले साल रिलीज हुई फिल्म 'दबंग 3' की शूटिंग के दौरान काफी समय साथ में भी बिताया था। वहीं अभिनेत्री डेजी शाह भी उनके निधन से  सदमे में है। उन्होंने इंस्टाग्राम पर अब्दुल्ला की तस्वीर शेयर कर लिखा-'मेरे बेस्ट फ्रेंड मैं हमेशा तुमसे प्यार करूंगी! अभिनेत्री जरीन खान और अभिनेता राहुल देव ने भी  सोशल मीडिया के जरिये अब्दुल्ला को श्रद्धांजलि दी है।    

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Dakhal News 31 March 2020

दखल क्यों

सियाराम पांडेय 'शांत' कोरोना जैसी आपदा से निपटने के लिए दुनिया के अधिकांश देश संजीदा हैं। वहां की सरकारें भी अपने स्तर पर कोरोना से निपटने के लिए हरसंभव प्रयास कर रही हैं। जिस चीन के वुहान शहर से इस महामारी का जन्म हुआ, वहां जनजीवन लगभग पटरी पर आ गया है लेकिन दुनिया के 195 देश कोरोना की मार से त्रााहि-त्राहि कर रहे हैं। चीन में भले ही अब गिने-चुने लोग कोरोना संक्रमित बताए जा रहे होंं लेकिन दुनिया भर में लाखों लोग कोरोना संक्रमित हैं जबकि हजारों लोगों की मौत हो चुकी है। अकेले भारत में कोरोना पीड़ितों व मृतकों की संख्या में भी लगातार इजाफा देखा जा रहा है। इस स्थिति ने भारत सरकार की पेशानी पर बल ला दिया है। केंद्र सरकार ने इस आपदा से बचाव के लिए देशभर में 21 दिनों के लॉकडाउन की घोषणा कर रखी है लेकिन जिस तरह औद्योगिक शहरों से मजदूरों का पलायन शुरू हुआ, उसने सरकार की परेशानियां बढ़ा दी हैं। बड़ी तादाद में घरों की ओर पैदल ही लौट रहे लोग दुनिया भर में चर्चा का विषय बन गए। प्रिंट मीडिया, इलेक्ट्रॉनिक मीडिया और सोशल मीडिया की सुर्खियां बन गए। उत्तर प्रदेश सरकार यूं तो कोरोना वायरस के खात्मे के लिहाज से बेहतर प्रयास कर रही थी। एकदिन पूर्व ही उसने सामुदायिक रसोईघर योजना भी आरंभ की थी लेकिन मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अच्छी सहयोग भावना से भी एक गलत निर्णय ले लिया। बस चलवाकर उन्होंने गरीब मजदूरों की पीड़ा को दूर करने का काम किया। हालांकि एकदिन पूर्व ही वे कई मुख्यमंत्रियों से बात भी कर चुके थे कि वे यूपी के मजदूरों को ठहरने और खाने-पीने का प्रबंध करें। सारे खर्च उत्तर प्रदेश सरकार वहन करेगी लेकिन रात ही में उन्होंने एक हजार बसों की व्यवस्था कर मजदूरों को उनके गंतव्य तक पहुंचाने का निर्णय ले लिया। मानवीय आधार पर देखा जाए तो किसी भी जनप्रतिनिधि को कुछ इसी तरह का निर्णय लेना चाहिए था लेकिन कोरोना वायरस की भयावहता और उसकी संक्रमण प्रकृति के चलते उनके इस निर्णय की नीतीश कुमार ने आलोचना भी की। केंद्र सरकार ने भी मजदूरों को बुलाने के निर्णय पर ऐतराज जाहिर किया। दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल पर केंद्र सरकार की लॉकडाउन योजना को विफल करने की साजिश रचने के आरोप भी लगे लेकिन इन सबसे अलग हटकर यह बात विचार योग्य है कि मौजूदा समय राजनीतिक बहस-मुबाहिसे में फंसने का नहीं है बल्कि इस समय का सही सदुपयोग करने की जरूरत है। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने तत्काल कर्मचारियों को निर्देश दिया कि जो कर्मचारी जहां हैं, वहीं रहें। लेकिन ऐसा निर्णय करने से पहले हजारों लोग उत्तर प्रदेश आ चुके थे। इतने सारे लोगों को आइसोलेशन वार्ड में डालना संभव नहीं है। फिर भी सरकार इस दिशा में काम कर तो रही ही है। राहत और बचाव के मोर्चे पर पहल करते हुए योगी आदित्यनाथ सरकार ने उत्तर प्रदेश के 27.5 लाख मनरेगा मजदूरों के खाते में डाले 611 करोड़ रुपये की बड़ी राशि डाल भी दी है। कोरोना पीड़ितों और लॉकडाउन के दौरान अपनी नौकरी खो चुके कर्मचारियों की सहायता के लिए दानवीरों ने भी अपने सहयोग के हाथ बढ़ाने आरंभ कर दिए हैं। उप राष्ट्रपति एम. वेंकैया नायडू ने सभी सांसदों से अपनी विकास निधि से एक करोड़ रुपये पीएम केयर फंड में जमा करने का अनुरोध किया है। लोकसभा के 542 और राज्यसभा के 245 सांसद जिसमें राष्ट्रपति द्वारा नामित 12 सांसद भी शामिल हैं, अगर एक करोड़ का भी सहयोग सांसद निधि से करते हैं तो भी इस समस्या से निपटने के लिए 787 करोड़ होंगे। अगर सभी राज्यों के विधायक और विधान पार्षद इसकी आधी राशि भी सहयोग स्वरूप प्रदान करती है तो भारी भरकम राशि एकत्र हो जाएगी जो इस देश की स्वास्थ्य सुविधाओं को मजबूत करने में सहायक ही नहीं, मील का पत्थर भी बनेगी। कोरोना वायरस से निपटने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अपील पर देशवासी बढ़-चढ़कर हिस्सा ले रहे हैं। छोटे-छोटे बच्चे तक अपना गुल्लक तोड़ रहे हैं और पीएम केयर फंड में जमा कर रहे हैं। पीएम केयर फंड को चौतरफा समर्थन मिल रहा है। यह इस बात का संकेत है कि भारत अपने बलबूते अपनी समस्याओं को शिकस्त देने में समर्थ है। देश की सीमाओं को सुरक्षित रखने वाली सेना और रक्षा मंत्रालय के कर्मचारी भी 500 करोड़ रुपये देने की घोषणा कर चुके हैं। पुलिस, पीएसी के जवान भी अपने तईं ठीक-ठाक आर्थिक सहायता दे रहे हैं। स्वयंसेवी संगठनों ने भी मदद के हाथ बढ़ाए हैं। उद्योग समूहों, फिल्म, खेल और अन्य क्षेत्रों से जुड़ी हस्तियों ने भी मुक्त हाथों से कोरोना पीड़ितों के लिए दान किया है। टाटा ग्रुप ने 500 करोड़ की आर्थिक सहायता दी है। फिल्म अभिनेता रजनीकांत, प्रभास, अक्षय कुमार, कार्तिक आर्यन आदि ने जमकर कोरोना पीड़ितों की मदद की है। उत्तर प्रदेश क्रिकेट संघ ने 50 लाख, युवा निशानेबाज ईशा ने 30 हजार, शिल्पा शेट्टी और राज कुंद्रा ने 21 लाख, युवा निशानेबाज मनु भाकर ने एक लाख, सचिन तेंदुलकर ने 50 लाख और पूर्व क्रिकेटर सुरेश रैना ने 52 लाख रुपये का योगदान कर यह साबित किया है कि उन्होंने यह धन इसी देश से कमाया है और जब देश ही संकट में है तो देश में कमाए गए धन का सदुपयोग भी देशहित में होना चाहिए। बैडमिंटन खिलाड़ी पीवी सिंधू, पहलवान बजरंग पूनिया, धाविका हिमा दास और बीसीसीआई अध्यक्ष सौरव गांगुली भी कोरोना पीड़ितों के हित में दान कर चुके हैं। भारतीय ओलंपिक संघ ने अगर अपना पूरा सहयोग और योगदान करने का वादा किया है तो उच्चतम न्यायालय के अधिकारी और कर्मचारी भी अपना तीन दिन का वेतन 'पीएम केयर्स फंड में देने की घोषणा कर चुके हैं। साइकिलिंग महासंघ और भारतीय गोल्फ संघ ने पहले ही वित्तीय मदद का वादा कर दिया है। लार्सन एंड टुब्रो 150 करोड़ और टीवीएस मोटर कंपनी 25 करोड़ रुपये देने की घोषणा कर चुकी है। रिलायंस इंडस्ट्रीज, अडानी ग्रुप सहित अन्य कारोबारी समूह अपने समर्थन की घोषणा कर चुके हैं। देश में एक-एक कर भामाशाह आगे आ रहे हैं लेकिन इन सबके बीच श्रमिकों के पलायन का मामला सर्वोच्च न्यायालय में भी चला गया है। उच्चतम न्यायालय ने कोरोना वायरस के प्रकोप से उत्पन्न दहशत और लॉकडाउन की वजह से बड़ी संख्या में कामगारों के शहरों से अपने पैतृक गांवों की ओर पलायन की स्थिति से निबटने के उपायों पर केन्द्र से रिपोर्ट मांगी है। शीर्ष अदालत ने टिप्पणी की है कि भय की वजह से बहुत संख्या में कामगारों का पलायन कोरोना वायरस से कहीं बड़ी समस्या बन रहा है। वहीं कुछ लोगों द्वारा यह सवाल भी उठाए जा रहे हैं कि जब देश में 1948 से ही प्रधानमंत्री आपदा राहत कोष संचालित है तो अलग से पीएम केयर फंड बनाने की जरूरत क्यों पड़ी? ऐसे लोगों को यह बताना जरूरी है कि पीएम केयर फंड को विशेष रूप से कोरोना वायरस से निपटने के लिए बनाया गया है। इस तरह के कोष कुछ समय के लिए भी चलाए जाते हैं। आवश्यकता पूरी होने पर इन्हे बंद कर दिया जाता है। वहीं प्रधानमंत्री राहत कोष हमेशा संचालित रहते हैं। इसमें कभी भी दान किया जा सकता है। इसमें दान की गई राशि का उपयोग भी देश की समस्याओं से निपटने के लिए ही किया जाता है लेकिन यह किसी विशेष समस्या के लिए नहीं होता है। लॉकडाउन के चलते देश की अर्थव्यवस्था पटरी से उतरी हुई है। शेयर मार्केट रोज ही दगा दे रहा है। इन सबके बीच भारतीयों के आत्मविश्वास में कहीं कोई कमी नहीं आई है। प्रधानमंत्री की कोशिश कोरोना वायरस को बड़े स्तर पर न फैलने देने की है। लॉकडाउन जैसा बड़ा और कड़ा निर्णय इसीलिए लिया गया है। दिल्ली, पंजाब, हरियाणा और राजस्थान के कल-कारखानों ने जिस तरह कर्मचारियों पर घर जाने का दबाव बनाया, उससे उनकी संवेदनहीनता का पता चलता है। इससे बड़ी तादाद में कर्मचारियों को परेशानी हुई। इसके लिए मन की बात कार्यक्रम में प्रधानमंत्री तक को माफी मांगनी पड़ी लेकिन लॉकडाउन इस देश के हित में है। जनता मोदी सरकार के निर्णयों के साथ है। कुछ लोगों को अपवाद मानें तो देश की अधिसंख्यक आबादी कोरोना के खिलाफ कमरों में कैद है। अब केंद्र और राज्य सरकारों का दायित्व है कि वह कोरोना पीड़ितों को उचित चिकित्सकीय सुविधा उपलब्ध कराए। साथ ही यह भी सुनिश्चित करे कि घरों में लॉकडाउन का सम्मान कर रहे लोगों को आवश्यक वस्तुओं की कमी, कालाबाजारी का सामना न करना पड़े। सरकार को चाहिए कि वह घर-घर चेकिंग अभियान चलाए। हालांकि उसके पास इतने संसाधन नहीं हैं तथापि इच्छाशक्ति हो तो इस देश के लिए असंभव कुछ भी नहीं। अफवाहों से इस देश को बचाना भी सरकार की सबसे बड़ी जिम्मेदारी है। (लेखक हिन्दुस्थान समाचार से संबद्ध हैं।)      

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Dakhal News 31 March 2020

सुरेंद्र किशोरी कोरोना वायरस (कोविड-19) मानवता को लीलने को आतुर है। इस विषम परिस्थिति से निबटने के लिए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा सम्पूर्ण भारत में लॉकडाउन और सोशल डिस्टेंसिंग को लागू करना जरूरी कदम है। वायरस चेन को ब्रेक करने के लिए इसके अलावा कोई दूसरा विकल्प हमारे पास नहीं है। भारत में अगर तीसरे चरण में कोविड-19 का एपिडेमिक ब्लास्ट हो जाता है तो यहां की हालत इटली, अमेरिका, स्पेन आदि देशों से भी काफी भयावह हो जाएगी क्योंकि हमारे पास इन विकसित देशों की तुलना में चिकित्सा सुविधाएं न्यूनतम हैं। डॉ. अभिषेक कुमार कहते हैं कि अभीतक इस महामारी से पीड़ित व्यक्ति के इलाज के लिए तय दवा की खोज करने में डॉक्टर्स, मेडिकल रिसर्चर्स और वैज्ञानिकों की टीम लगातार प्रयास कर रही है। कोविड-19 से पीड़ित मरीजों के ठीक होने का जो मामला सामने आ रहा है वो डॉक्टर्स के लिए बहुत सारी बीमारियों में प्रयुक्त स्पेसिफिक दवाओं के कॉम्बिनेशन्स का परिणाम है। इस कॉम्बिनेशन को क्रिएट करने के लिए डॉक्टर बधाई के पात्र हैं। इसका मतलब यह हरगिज नहीं है कि कोविड-19 का खतरा किसी भी प्रकार से कम हो गया। कोविड-19 का खतरा तबतक हमारे सामने प्रचंड रूप में है, जबतक यह महामारी के रूप में फैल रहा है और इसकी दवा विकसित नहीं हो जाती।इसलिए लॉकडाउन और सोशल डिस्टेंसिंग के नियमों के साथ-साथ व्यक्तिगत स्वच्छता, सतर्कता, संयम और जागरूकता अत्यंत आवश्यक है। लॉकडाउन से समाज के गरीब और मजदूर तबकों के सामने समस्या आयी है। सबसे अधिक प्रभावित वो हुए हैं जो रोज कमाते-खाते थे। आज उनके लिए भोजन की उपलब्धता प्रमुख चुनौती बनकर खड़ी है। इस समस्या से निबटने के लिए केंद्र व राज्य सरकारें अपने स्तर से प्रयासरत हैं लेकिन सरकारों के प्रयासों की जो सीमा है उसे देखते हुए राहत में कुछ समय लगना अवश्यम्भावी है। इस स्थिति में स्थानीय निकायों और आमलोगों को आगे आकर मानवता का परिचय देते हुए जरूरतमंदों के लिए भोजन की व्यवस्था करना बेहतर विकल्प साबित हो सकता है। कम्युनिटी किचन आज की जरूरत है। काफी संख्या में भयभीत और बहकावे में आकर लोग महानगरों को छोड़कर पैदल ही अपने घरों को चलने लगे हैं। इनमें से कोई पैदल ही दिल्ली से बिहार तो कोई जयपुर से गुजरात जा रहा है। लॉकडाउन की हालत में जब बिना किसी एहतियात के पैदल चल रहे हैं तो ये लोग अपने आप से, परिवार, समाज व देश से ही नहीं मानवता की दृष्टि से भी ठीक नहीं कर रहे हैं। बिना किसी एहतियात के पैदल चलना इनको कोविड-19 से संक्रमित कर सकता है और ये कोविड-19 का केरियर बनकर अपने परिवार, समाज और देश को संक्रमित कर सकते हैं। ऐसे में जब कुछ लोग आत्मघाती कदम उठा ही चुके हैं तो यह शासन-प्रशासन की जिम्मेदारी है कि वे जहां हैं वहीं उन्हें रोके, उनके लिए आइसोलेशन की व्यवस्था और भोजन की उपलब्धता सुनिश्चित करे। फिलहाल आमलोगों की हिफाजत के लिए लॉकडाउन और सोशल डिस्टेंसिंग वायरल चेन को ब्रेक करने के लिए अतिआवश्यक है। तमाम भारतीयों को इस लॉकडाउन और सोशल डिस्टेसिंग के नियमों का कड़ाई से पालन करने के साथ स्वास्थ्य संबंधी थोड़ी-सी भी डिस्कॉम्फर्ट फील होते ही तुरंत डॉक्टर्स से परामर्श लेनी चाहिए। आज भारत कोविड-19 जैसे अदृश्य दानवी ताकत के खिलाफ युद्धरत है तो वहीं धार्मिक अंधविश्वास की खेती करने वालों के लिए यह विपरीत समय भी माकूल प्रतीत हो रहा है। तभी तो धार्मिक ग्रंथों के नाम पर कोरोना से मुक्ति का प्रोपेगेंडा फैलाया जा रहा है तो कहीं अल्लाह के नाम में कोरोना से मुक्ति का शगूफा छोड़ा जा रहा है। दोनों स्थिति कोरोना वायरस कोविड-19 के खिलाफ युद्ध में भारत को कमजोर करने वाली है। धार्मिक आस्था बुरी बात नहीं है, बुरी बात है तो आस्था के नाम पर अंधविश्वासी हो जाना। अगर पूजा और नमाज से भारत कोरोना मुक्त हो जाता तो आज देश के तमाम मंदिरों और मस्जिदों में ताला लटका नहीं होता। तमाम धर्म और धार्मिक ग्रंथ हमें कर्तव्यनिष्ठ होने की प्रेरणा देते हैं, कर्मच्युत होकर अंधविश्वासी बनने की हरगिज नहीं। इस कोविड-19 के खिलाफ युद्ध में हमारा कर्म है स्वच्छ, संयमित और सतर्क रहना, खुद जागरूक होना और लोगों को जागरूक कर लॉकडाउन तथा सोशल डिस्टेंसिंग के नियमों का पालन करना। जब हम कर्तव्यनिष्ठ बनेंगे, तभी मानवता की जीत होगी और कोरोना वायरस कोविड-19 की पराजय। (लेखक हिन्दुस्थान समाचार से संबद्ध हैं।)

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Dakhal News 29 March 2020

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