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मध्य प्रदेश में मौसम का मिजाज लगातार बदल रहा है। प्रदेश के कुछ हिस्सों में हल्की बारिश और बौछारें दर्ज की जा रही हैं, वहीं ग्वालियर और चंबल संभाग में अधिकतम तापमान में गिरावट आई है। मौसम विभाग ने अगले 24 घंटों के दौरान प्रदेश के 21 जिलों में कहीं-कहीं बारिश होने की संभावना जताई है। इस दौरान गरज-चमक के साथ बिजली गिरने और 30 से 40 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चलने का अनुमान है। राजगढ़, नीमच, उज्जैन, ग्वालियर, मुरैना समेत कई जिलों में मौसम का असर देखने को मिल सकता है। बदलते मौसम को देखते हुए लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी गई है। मौसम विभाग के अनुसार, पिछले 24 घंटों के दौरान इंदौर, उज्जैन, ग्वालियर, चंबल और जबलपुर संभाग के कुछ जिलों में बारिश दर्ज की गई, जबकि प्रदेश के अन्य संभागों में मौसम मुख्यतः शुष्क रहा। ग्वालियर और चंबल संभाग में अधिकतम तापमान में 2.4 से 2.8 डिग्री सेल्सियस तक की गिरावट दर्ज की गई। चंबल संभाग में तापमान सामान्य से 4.4 डिग्री तक नीचे रहा, जबकि ग्वालियर संभाग में यह सामान्य से 2 डिग्री कम दर्ज किया गया। इसके विपरीत, इंदौर संभाग में अधिकतम तापमान सामान्य से 1.7 डिग्री तक अधिक रहा। शनिवार सुबह 8:30 बजे तक के आंकड़ों के मुताबिक, उज्जैन जिले के झारड़ा में सबसे अधिक 10 मिलीमीटर बारिश दर्ज की गई। वहीं, विजयपुर में 8 मिलीमीटर, सबलगढ़ में 6 मिलीमीटर और धार में 3.4 मिलीमीटर वर्षा हुई। मौसम विभाग के भोपाल केंद्र ने राजगढ़, आलीराजपुर, झाबुआ, धार, रतलाम, उज्जैन, आगर मालवा, मंदसौर, नीमच, गुना, अशोकनगर, शिवपुरी, ग्वालियर, दतिया, भिंड, मुरैना, श्योपुर, पन्ना, छतरपुर, टीकमगढ़ और निवाड़ी में बारिश की संभावना जताई है। इन जिलों में कुछ स्थानों पर गरज-चमक के साथ बिजली गिरने और तेज हवाएं चलने की चेतावनी भी जारी की गई है। मौसम में इस बदलाव के पीछे कई मौसमी प्रणालियों का सक्रिय होना बताया जा रहा है। उत्तरी हरियाणा और आसपास के क्षेत्रों में पश्चिमी विक्षोभ से जुड़ा चक्रवातीय परिसंचरण मौजूद है। इसके अलावा दक्षिण-पूर्वी राजस्थान और दक्षिणी मध्य प्रदेश के आसपास तथा उत्तर-पश्चिमी उत्तर प्रदेश में भी ऊपरी हवा के चक्रवातीय परिसंचरण सक्रिय हैं। इनके प्रभाव से प्रदेश के कुछ हिस्सों में बारिश और तेज हवाओं का दौर जारी रह सकता है। मौसम विभाग के पूर्वानुमान के अनुसार, अगले पांच दिनों तक प्रदेश के तापमान और मौसम की स्थिति में किसी बड़े बदलाव की संभावना नहीं है।
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सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को दिल्ली के व्यापारिक संगठनों की याचिका पर तत्काल आदेश देने से इनकार कर दिया। याचिका में कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के दिल्ली के सेंट्रल पार्क में प्रस्तावित प्रदर्शन के कारण कारोबार प्रभावित होने की आशंका जताई गई थी। सुनवाई के दौरान जस्टिस जॉयमाल्या बागची ने कहा कि किसी के लिए प्रदर्शन करना जरूरी है, तो किसी के लिए मूंगफली बेचना और कानून-व्यवस्था बनाए रखना भी महत्वपूर्ण है। अदालत ने उम्मीद जताई कि सभी पक्ष समझदारी से काम लेंगे। प्रदर्शन को देखते हुए नई दिल्ली नगर परिषद (NDMC) ने सेंट्रल पार्क बंद करने का आदेश दिया है। व्यापारियों का दावा है कि इससे कनॉट प्लेस और आसपास के बाजारों में रोजाना करीब 200 करोड़ रुपये का कारोबार प्रभावित हो सकता है। यह याचिका दिल्ली किराना कमेटी और दिल्ली आयरन एंड हार्डवेयर मर्चेंट एसोसिएशन की ओर से दायर की गई थी। व्यापारिक संगठनों ने अदालत में कहा कि त्योहारों और शादी के सीजन में प्रदर्शन के कारण दुकानदारों, ठेले वालों और छोटे कारोबारियों की आजीविका प्रभावित हो सकती है। याचिका में यह भी दावा किया गया कि 10 अक्टूबर से जारी प्रदर्शनों के चलते व्यापारियों को करीब 2,000 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ है। अदालत ने छोटे दुकानदारों की रोजी-रोटी से जुड़ी मुश्किलों का जिक्र करते हुए कहा कि इन परिस्थितियों में सभी पक्षों को बेहतर समझदारी दिखानी चाहिए। हालांकि, अदालत ने इस मामले में तत्काल हस्तक्षेप करते हुए प्रदर्शन पर रोक लगाने का आदेश नहीं दिया। दरअसल, CJP ने मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के विरोध और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर 10 अक्टूबर को जंतर-मंतर पर प्रदर्शन का ऐलान किया था। दिल्ली पुलिस ने इस प्रदर्शन को रोक दिया था और पार्टी के शीर्ष नेताओं अभिजीत दीपके, सौरव दास और आशुतोष रांका को हिरासत में लिया था। मजिस्ट्रेट अदालत ने तीनों को रिहा करने का आदेश दिया था और वे करीब 23 घंटे पुलिस हिरासत में रहे। इस दौरान अन्य राजनीतिक नेताओं और लोगों को भी हिरासत में लिए जाने की खबर सामने आई थी। प्रदर्शन से जुड़े घटनाक्रम के बीच अब मामला कारोबार, सार्वजनिक व्यवस्था और प्रदर्शन के अधिकार के बीच संतुलन को लेकर चर्चा में है।
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छह राज्यों में राज्यपालों की नियुक्ति और तबादलों के बाद भारतीय जनता पार्टी में संगठनात्मक बदलाव की अटकलें तेज हो गई हैं। चर्चा है कि पार्टी के संसदीय बोर्ड, केंद्रीय चुनाव समिति और केंद्रीय मंत्रिमंडल में फेरबदल हो सकता है। 12 अक्टूबर को हुए बदलावों में सुधा यादव को कर्नाटक का राज्यपाल बनाया गया है, जिसके बाद संसदीय बोर्ड में एक जगह खाली हुई है। इसी के चलते संगठन के पुनर्गठन को लेकर चर्चाएं शुरू हो गई हैं, हालांकि पार्टी की ओर से अभी किसी बदलाव की आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है। संसदीय बोर्ड और केंद्रीय चुनाव समिति में संभावित नए चेहरों के तौर पर महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नामों की चर्चा है। दोनों नेता 2022 में हुए संगठनात्मक पुनर्गठन के दौरान संसदीय बोर्ड में शामिल नहीं किए गए थे। वहीं, पंजाब में अगले साल होने वाले विधानसभा चुनावों को देखते हुए किसी सिख नेता को भी बोर्ड में जगह मिलने की अटकलें लगाई जा रही हैं। पूर्व IPS अधिकारी इकबाल सिंह लालपुरा 2022 में संसदीय बोर्ड में शामिल होने वाले पहले सिख नेता बने थे। हालांकि, इन संभावित नियुक्तियों को लेकर अभी कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। बीजेपी ने हाल के महीनों में संगठन में कई बदलाव किए हैं। राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन ने मई से राज्यों के पार्टी अध्यक्षों में बदलाव की प्रक्रिया शुरू की और 17 अगस्त को अपनी नई टीम घोषित की। इसके बाद 23 सितंबर को राज्यों के प्रभारियों की सूची जारी की गई। पार्टी में संगठनात्मक जिम्मेदारी नहीं मिलने वाले कुछ नेताओं को राज्यपाल बनाकर नई भूमिका दिए जाने के उदाहरण भी सामने आए हैं। बीजेपी का संसदीय बोर्ड पार्टी की प्रमुख निर्णय लेने वाली संस्था है, जो प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री पदों के लिए नामों पर विचार करने, महत्वपूर्ण राजनीतिक फैसले लेने, गठबंधन और अनुशासन से जुड़े मामलों में भूमिका निभाता है।
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मध्य प्रदेश में 27 प्रतिशत ओबीसी आरक्षण का मुद्दा एक बार फिर राजनीतिक बहस के केंद्र में आ गया है। पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ ने इस मामले को लेकर भाजपा सरकार पर निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि पिछले सात वर्षों से ओबीसी आरक्षण को लेकर सरकार का रवैया ठीक नहीं रहा है। कमलनाथ ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट कर कहा कि 2019 में उनकी सरकार के कार्यकाल के दौरान अन्य पिछड़ा वर्ग को 27 प्रतिशत आरक्षण देने का फैसला किया गया था। उनके मुताबिक, इसके बाद से भाजपा सरकार ने हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट में इस आरक्षण को समाप्त करने की कोशिश की। उन्होंने कहा कि यदि भाजपा वास्तव में ओबीसी आरक्षण को लागू रखना चाहती है, तो उसे सुप्रीम कोर्ट में पूरी कानूनी तैयारी और ठोस तथ्यों के साथ अपना पक्ष रखना चाहिए। कमलनाथ ने आरोप लगाया कि सरकार की कमजोर कानूनी पैरवी के कारण हाईकोर्ट में 27 प्रतिशत आरक्षण के खिलाफ फैसला आया। उन्होंने मांग की कि ओबीसी वर्ग की आबादी से जुड़े प्रमाणिक आंकड़े सुप्रीम कोर्ट के सामने रखे जाएं और आरक्षण से संबंधित कानूनी पहलुओं पर प्रभावी ढंग से पक्ष प्रस्तुत किया जाए। कमलनाथ ने यह भी कहा कि आरक्षण की सीमा और आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग यानी ईडब्ल्यूएस को दिए गए 10 प्रतिशत आरक्षण जैसे मुद्दों पर सरकार को स्पष्टता के साथ आगे बढ़ना चाहिए। उन्होंने भाजपा नेताओं के बयानों पर सवाल उठाते हुए कहा कि यदि सरकार को इस मामले में उनकी या कांग्रेस पार्टी की किसी भी तरह की सहायता चाहिए, तो वे इसके लिए तैयार हैं। कमलनाथ के इस बयान के बाद भाजपा की ओर से भी प्रतिक्रिया सामने आई। भाजपा नेता डॉ. हितेश वाजपेयी ने एक्स पर पोस्ट कर कमलनाथ के आरोपों का जवाब दिया। उन्होंने 2019 में तत्कालीन कांग्रेस सरकार द्वारा लाए गए अध्यादेश और संशोधन कानून का हवाला देते हुए कहा कि हाईकोर्ट की टिप्पणियां विधायी प्रक्रिया में पर्याप्त तैयारी और जल्दबाजी को लेकर गंभीर सवाल खड़े करती हैं। वाजपेयी ने पूछा कि ओबीसी आरक्षण जैसे संवेदनशील विषय पर कांग्रेस सरकार ने पर्याप्त कानूनी तैयारी और स्पष्टता क्यों सुनिश्चित नहीं की। उन्होंने ईडब्ल्यूएस आरक्षण लागू करने में हुई देरी को लेकर भी तत्कालीन सरकार की जवाबदेही पर सवाल उठाए। भाजपा नेता ने कहा कि ओबीसी और ईडब्ल्यूएस आरक्षण जैसे मामलों में राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप के बजाय संवैधानिक स्पष्टता, मजबूत कानूनी तैयारी और पात्र नागरिकों के अधिकारों को प्राथमिकता दी जानी चाहिए। इस तरह 27 प्रतिशत ओबीसी आरक्षण को लेकर कमलनाथ और भाजपा के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर तेज हो गया है।
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दिल्ली पुलिस ने ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन (AISA) की अध्यक्ष नेहा बोरा को प्रदर्शन के बाद शांति बनाए रखने के लिए 10 हजार रुपये का निजी बॉन्ड भरने का नोटिस जारी किया है। नोटिस में एक जमानतदार के साथ बॉन्ड भरने और 19 अक्टूबर को स्पेशल एग्जीक्यूटिव मजिस्ट्रेट के सामने पेश होने का निर्देश दिया गया था। यह नोटिस 17 अक्टूबर की तारीख का है, जिसे नई दिल्ली जिला पुलिस ने 18 अक्टूबर को जारी किया। नेहा बोरा ने इस कार्रवाई को चुनौती देते हुए दिल्ली हाईकोर्ट में याचिका दायर की है और नोटिस पर तत्काल रोक लगाने की मांग की है। AISA का आरोप है कि पुलिस का नोटिस अस्पष्ट और तथ्यों के लिहाज से गलत है। संगठन ने इसे संविधान के अनुच्छेद 19 और 21 का उल्लंघन बताया है, जो अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और व्यक्तिगत स्वतंत्रता से जुड़े हैं। संगठन की कानूनी टीम हाईकोर्ट में तत्काल सुनवाई की मांग करने की तैयारी में है। वकील स्पेशल एग्जीक्यूटिव मजिस्ट्रेट के सामने भी पेश होकर हाईकोर्ट में चुनौती दिए जाने की जानकारी देंगे। मामले की पृष्ठभूमि 16 अक्टूबर को दिल्ली के कनॉट प्लेस में हुए ‘लहरा दो तिरंगा’ प्रदर्शन से जुड़ी है, जिसमें मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग की जा रही थी। नेहा बोरा प्रदर्शन में शामिल होने जा रही थीं, तभी दिल्ली पुलिस ने उन्हें एहतियातन हिरासत में ले लिया था। अगली सुबह उन्हें रिहा कर दिया गया। AISA का आरोप है कि हिरासत के दौरान उन्हें कई जगह ले जाया गया और वकीलों से मिलने नहीं दिया गया। रिहाई के बाद नेहा ने पुलिस की कार्रवाई को अवैध बताते हुए कहा था कि लोकतंत्र और संविधान के लिए आवाज उठाना अपराध नहीं है। वहीं, दिल्ली पुलिस का कहना है कि कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए करीब 150 लोगों को हिरासत में लिया गया था।
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मध्य प्रदेश के जबलपुर से हैदराबाद के बीच हवाई सफर करने वाले यात्रियों को दिवाली से पहले किराए में राहत मिल सकती है। 25 अक्टूबर से इस रूट पर एटीआर विमान की जगह एयरबस का संचालन शुरू होने की उम्मीद है। इससे टिकटों के दाम में 25 से 30 प्रतिशत तक की कमी आ सकती है। फिलहाल सामान्य दिनों में जबलपुर से हैदराबाद की टिकट के लिए यात्रियों को करीब 6,500 से 9,000 रुपये तक खर्च करने पड़ते हैं। एयरबस शुरू होने के बाद यह किराया घटकर लगभग 4,000 से 5,500 रुपये तक रह सकता है। हालांकि, वास्तविक किराया बुकिंग के समय, यात्रियों की मांग और सीटों की उपलब्धता पर निर्भर करेगा। किराए में संभावित गिरावट की प्रमुख वजह एयरबस में सीटों की अधिक संख्या होना है। मौजूदा एटीआर विमान में करीब 78 सीटें होती हैं, जबकि एयरबस में 180 से 186 यात्रियों के बैठने की क्षमता होती है। विमानन कंपनियां डायनामिक प्राइसिंग के तहत टिकटों के दाम तय करती हैं। कम सीटों वाले विमान में सस्ती टिकटों की श्रेणी जल्दी भर जाती है, जिसके बाद यात्रियों को महंगे टिकट खरीदने पड़ते हैं। अधिक सीटों की उपलब्धता से कम किराए वाली श्रेणी में टिकट मिलने की संभावना बढ़ सकती है। फिलहाल व्यस्त दिनों में जबलपुर-हैदराबाद रूट का किराया 12 हजार से 18 हजार रुपये तक पहुंच जाता है। एयरबस संचालन के बाद सामान्य दिनों में किराया 4,000 से 5,500 रुपये रहने का अनुमान है, जबकि आखिरी समय में टिकट लेने वाले यात्रियों को भी पहले की तुलना में राहत मिल सकती है। जबलपुर और आसपास के कटनी, नरसिंहपुर, मंडला और सिवनी जैसे जिलों के यात्रियों के लिए यह रूट काफी महत्वपूर्ण है। हैदराबाद और बेंगलुरु में आईटी क्षेत्र में काम करने वाले युवाओं के साथ दक्षिण भारत के अस्पतालों में इलाज के लिए जाने वाले लोगों को भी इसका लाभ मिल सकता है। हैदराबाद से आगे बेंगलुरु, चेन्नई, केरल और खाड़ी देशों के लिए कनेक्टिंग फ्लाइट लेना भी सुविधाजनक हो सकता है। प्रस्तावित समय-सारणी के अनुसार, विमान हैदराबाद से दोपहर 3:40 बजे रवाना होकर शाम 4:55 बजे जबलपुर पहुंचेगा। इसके बाद जबलपुर से शाम 5:25 बजे उड़ान भरकर शाम 6:45 बजे हैदराबाद पहुंचेगा। एयरबस की अधिक क्षमता और संभावित कम किराए से यात्रियों को सुविधा मिलने की उम्मीद है।
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मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल के मिसरोद थाना क्षेत्र में जनजातीय विद्यार्थियों के साथ कथित दुर्व्यवहार का मामला तूल पकड़ता जा रहा है। गोंड समाज महासभा ने इस मामले में निष्पक्ष जांच और जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है। महासभा के प्रदेश अध्यक्ष युवा प्रकोष्ठ जेएस धुर्वे ने नरसिंहपुर कलेक्टर के माध्यम से राष्ट्रपति, राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग और राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग के नाम ज्ञापन सौंपा है। ज्ञापन में आरोप लगाया गया है कि 13 अक्टूबर को गोंडवाना स्टूडेंट यूनियन के शांतिपूर्ण प्रदर्शन के दौरान ‘जय जोहार’ अभियान पर आपत्तिजनक टिप्पणी की गई और प्रदर्शन कर रहे छात्रों को पुलिस वाहन में बैठाकर ले जाया गया। इस मामले में मिसरोद के तत्कालीन थाना प्रभारी रतन सिंह परिहार पर छात्रों के साथ अभद्र व्यवहार करने और आपत्तिजनक भाषा का इस्तेमाल करने के आरोप लगे हैं। घटनाक्रम का एक वीडियो सोशल मीडिया पर सामने आने के बाद विभिन्न संगठनों ने विरोध जताया था। मामले की गंभीरता को देखते हुए थाना प्रभारी को निलंबित कर जांच के आदेश दिए गए। राज्य मंत्री नरेंद्र शिवाजी पटेल के मुताबिक, मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने मामले को गंभीरता से लेते हुए कार्रवाई के निर्देश दिए हैं। उन्होंने यह भी कहा कि जांच में यदि अन्य पुलिसकर्मी दोषी पाए जाते हैं, तो उनके खिलाफ भी कार्रवाई की जाएगी। गोंड समाज महासभा ने मांग की है कि घटना से जुड़े सीसीटीवी फुटेज, मोबाइल वीडियो और पुलिस रिकॉर्ड सुरक्षित रखे जाएं, ताकि निष्पक्ष जांच हो सके। संगठन ने हिरासत में लेने की प्रक्रिया की वैधानिकता की जांच करने और आरोप प्रमाणित होने पर संबंधित लोगों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की मांग भी की है। महासभा का कहना है कि केवल निलंबन पर्याप्त नहीं है और जांच के आधार पर एफआईआर दर्ज करने पर भी विचार किया जाना चाहिए। साथ ही, पुलिसकर्मियों को जनजातीय संस्कृति, परंपराओं और संवैधानिक अधिकारों के प्रति संवेदनशील बनाने की मांग उठाई गई है। अब इस मामले में जांच के निष्कर्ष और आगे होने वाली कार्रवाई पर सबकी नजर है।
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मध्य प्रदेश में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की अध्यक्षता में 15 अक्टूबर को भोपाल स्थित मंत्रालय में कैबिनेट की बैठक हुई। बैठक में औद्योगिक विकास, स्कूल परिवहन व्यवस्था और शैक्षणिक संस्थानों के उन्नयन से जुड़े कई अहम प्रस्तावों को मंजूरी दी गई। सरकार ने भोपाल, जबलपुर और इंदौर को जोड़ने वाले औद्योगिक कॉरिडोर के विकास का फैसला किया है। इसके लिए उद्योग विभाग के माध्यम से राज्य सरकार के स्वामित्व वाली नई कंपनी गठित की गई है और शुरुआती तौर पर 100 करोड़ रुपए की राशि उपलब्ध कराई गई है। इस परियोजना का उद्देश्य महाकौशल समेत प्रदेश के विभिन्न क्षेत्रों में निवेश, व्यापार और औद्योगिक गतिविधियों को गति देना है। औद्योगिक कॉरिडोर के पहले चरण में 3,000 से 10,000 एकड़ तक भूमि विकसित करने की योजना है। सरकार के अनुमान के मुताबिक, मार्च 2028 तक इस परियोजना के जरिए एक लाख करोड़ रुपए से अधिक का निवेश आकर्षित किया जा सकता है, जिससे करीब एक लाख लोगों को प्रत्यक्ष और दो लाख लोगों को अप्रत्यक्ष रोजगार मिलने की संभावना है। आगामी तीन वर्षों में तीन लाख करोड़ रुपए से अधिक के निवेश और छह लाख से ज्यादा रोजगार के अवसर पैदा करने की संभावनाएं भी जताई गई हैं। इस क्षेत्र में पर्यटन, कृषि, खनन और भारी उद्योगों के विकास पर जोर दिया जाएगा। सड़क, बिजली, पानी और विमानन जैसी सुविधाओं का उपयोग कर उद्योगों के लिए अनुकूल माहौल तैयार करने की योजना है। कैबिनेट ने स्कूलों में परिवहन व्यवस्था को मजबूत करने के लिए करीब 241 करोड़ रुपए की योजना को भी मंजूरी दी है। इसके तहत बसों के संचालन और रखरखाव की जिम्मेदारी जिला स्तर पर कलेक्टरों को सौंपने का निर्णय लिया गया है, ताकि स्थानीय जरूरतों के अनुसार व्यवस्था बेहतर बनाई जा सके। इसका लाभ जनजातीय और अन्य क्षेत्रों के विद्यार्थियों को देने का लक्ष्य है। इसके अलावा, सांदीपनि स्कूलों सहित शासकीय स्कूलों, छात्रावासों, पुस्तकालयों और अन्य शैक्षणिक संस्थानों के उन्नयन के लिए लगभग 3,000 करोड़ रुपए की राशि स्वीकृत किए जाने की जानकारी दी गई। सरकार का लक्ष्य शिक्षा से जुड़ी सुविधाओं को बेहतर बनाना और विद्यार्थियों को अधिक प्रभावी शैक्षणिक एवं परिवहन सुविधाएं उपलब्ध कराना है।
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बॉलीवुड अभिनेता टाइगर श्रॉफ की कार पर फायरिंग के मामले में कोटा सिटी पुलिस ने तीन आरोपियों को हिरासत में लिया है। इनमें एक नाबालिग भी शामिल है। कोटा एसपी तेजस्विनी गौतम के मुताबिक, पुलिस को सूचना मिली थी कि मामले के मुख्य संदिग्ध पुणे-जयपुर एक्सप्रेस से गुजर रहे हैं। इसके बाद पुलिस टीम ने कोटा रेलवे स्टेशन पर ट्रेन में घेराबंदी कर करीब 15 मिनट में तीनों को पकड़ लिया। आरोपियों की पहचान हरियाणा के सोनीपत निवासी रेहान उर्फ सुक्का, बिहार के बेगूसराय निवासी ऋतिक कुर्मी उर्फ रोशन और एक नाबालिग के रूप में हुई है। पुलिस के अनुसार, शुरुआती पूछताछ में पता चला है कि आरोपियों की योजना दिल्ली पहुंचकर वहां से नेपाल भागने की थी। एसपी ने बताया कि रेहान कथित तौर पर अनिल पंडित के संपर्क में था, जिसे लॉरेंस बिश्नोई गैंग से जुड़ा बताया जा रहा है। पुलिस इस संपर्क और फायरिंग की घटना के बीच संबंधों की जांच कर रही है। वारदात में इस्तेमाल हथियार अभी बरामद नहीं हुए हैं। मुंबई पुलिस की टीम कोटा पहुंच गई है और आरोपियों को उसके हवाले करने की प्रक्रिया चल रही है। पुलिस के मुताबिक, फायरिंग की घटना 18 अक्टूबर की शाम मुंबई के जुहू इलाके में हुई, जब टाइगर श्रॉफ फुटबॉल ग्राउंड से कार में लौट रहे थे। हमलावरों ने उनकी गाड़ी पर गोलीबारी की, जिसमें ड्राइवर और वहां मौजूद एक अन्य व्यक्ति घायल हो गए। टाइगर श्रॉफ को भी शीशे का टुकड़ा लगने से चोट आई, हालांकि उन्हें गोली नहीं लगी। अब पुलिस आरोपियों से पूछताछ कर हथियारों की बरामदगी और घटना के पीछे की पूरी साजिश का पता लगाने में जुटी है।
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साउथ सुपरस्टार रजनीकांत की एक्शन-ड्रामा फिल्म ‘जेलर 2’ ने रिलीज के पहले ही दिन बॉक्स ऑफिस पर शानदार शुरुआत की है। नेल्सन दिलीपकुमार के निर्देशन में बनी यह फिल्म 15 अक्टूबर को सिनेमाघरों में रिलीज हुई। ट्रेड वेबसाइट सैकनिल्क के मुताबिक, फिल्म ने भारत में पहले दिन 59.70 करोड़ रुपये का नेट कलेक्शन किया, जबकि घरेलू बाजार में इसका ग्रॉस कलेक्शन 70.25 करोड़ रुपये रहा। विदेशों में फिल्म ने 55 करोड़ रुपये का ग्रॉस कारोबार किया। इस तरह फिल्म की पहले दिन की वर्ल्डवाइड कमाई 125.25 करोड़ रुपये तक पहुंच गई। रिपोर्ट के मुताबिक, फिल्म को पहले दिन सिनेमाघरों में करीब 37.46 लाख दर्शक मिले। ‘जेलर 2’ ने पहले दिन की वर्ल्डवाइड ओपनिंग के मामले में रणबीर कपूर की फिल्म ‘एनिमल’ के 116 करोड़ रुपये के कलेक्शन को पीछे छोड़ दिया है। वहीं, विदेशी बाजार में भी फिल्म ने इस साल जनवरी में रिलीज हुई ‘धुरंधर 2’ के 52 करोड़ रुपये के पहले दिन के ग्रॉस कलेक्शन को पार कर लिया। भाषा के हिसाब से देखें तो फिल्म को सबसे ज्यादा कमाई तमिल वर्जन से हुई, जिसने 9,326 शो में 43.35 करोड़ रुपये का नेट कलेक्शन किया। तेलुगु वर्जन ने 12.50 करोड़ रुपये, हिंदी वर्जन ने 3.50 करोड़ रुपये और कन्नड़ वर्जन ने 35 लाख रुपये कमाए। इन सभी भाषाओं को मिलाकर फिल्म का घरेलू नेट कलेक्शन 59.70 करोड़ रुपये रहा। ‘जेलर 2’ साल 2023 में आई रजनीकांत की हिट फिल्म ‘जेलर’ का सीक्वल है। फिल्म में रजनीकांत एक बार फिर रिटायर्ड जेलर टाइगर मुथुवेल पांडियन के किरदार में नजर आ रहे हैं। कहानी में अंडरवर्ल्ड से नई चुनौती सामने आने के बाद टाइगर अपने परिवार और विरासत की रक्षा के लिए फिर से संघर्ष करता है। इस एक्शन थ्रिलर में रजनीकांत के साथ मोहनलाल और विद्या बालन भी अहम भूमिकाओं में हैं। फिल्म की शुरुआती कमाई ने इसे बॉक्स ऑफिस पर चर्चा में ला दिया है, हालांकि आगे इसका प्रदर्शन कैसा रहता है, यह आने वाले दिनों के कलेक्शन से स्पष्ट होगा।
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दिल्ली में कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के संस्थापक अभिजीत दीपके को शनिवार को स्पेशल एग्जिक्युटिव मजिस्ट्रेट (SEM) कोर्ट में पेश किया गया। उन्हें 16 अक्टूबर को कनॉट प्लेस स्थित सेंट्रल पार्क में प्रस्तावित ‘लहरा दो तिरंगा’ मार्च से पहले पुलिस ने हिरासत में लिया था। यह मार्च CJP के सदस्य सौरव दास और आशुतोष रांका की गिरफ्तारी के विरोध में आयोजित किया जाना था। संगठन मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग भी कर रहा है। दीपके की पेशी के दौरान मंदिर मार्ग पुलिस स्टेशन के बाहर भारी पुलिस बल तैनात रहा। संगठन की कानूनी मामलों की प्रमुख रत्ना सिंह ने भी सोशल मीडिया के जरिए उनकी पेशी की जानकारी साझा की। दिल्ली पुलिस के मुताबिक, अभिजीत दीपके के मामले में भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 126 और 170 के तहत कार्रवाई की गई है। ये प्रावधान शांति बनाए रखने और संभावित अपराध को रोकने से संबंधित हैं। वहीं, CJP ने आरोप लगाया था कि दीपके को हिरासत में लिए जाने के बाद कई घंटों तक उनके परिवार, वकीलों और संगठन के सदस्यों को उनके बारे में जानकारी नहीं मिल सकी। इस घटनाक्रम के बाद मामले को लेकर संगठन और पुलिस की कार्रवाई चर्चा में है। हालांकि, हिरासत और पुलिस कार्रवाई से जुड़े आरोपों पर संबंधित पक्षों के दावों को अलग-अलग समझना जरूरी है। CJP चुनाव प्रक्रिया में पारदर्शिता और निष्पक्षता की मांग को लेकर चुनाव आयोग के खिलाफ विरोध कर रहा है। इससे पहले संगठन से जुड़े सौरव दास और आशुतोष रांका की गिरफ्तारी के बाद प्रस्तावित तिरंगा मार्च को लेकर तनाव की स्थिति बनी थी। दीपके की हिरासत और कोर्ट में पेशी ने इस विवाद को फिर सुर्खियों में ला दिया है। फिलहाल, अदालत में हुई सुनवाई के नतीजे और आगे की कानूनी कार्रवाई को लेकर विस्तृत जानकारी सामने नहीं आई है। अब मामले में अदालत के अगले कदम और पुलिस की आगे की कार्रवाई पर नजर रहेगी।
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छत्तीसगढ़ सरकार ने अग्निपथ योजना के तहत चार साल की सैन्य सेवा पूरी करने वाले पूर्व अग्निवीरों के लिए सरकारी नौकरी के नए अवसर खोलने की पहल की है। सामान्य प्रशासन विभाग की ओर से 15 अक्टूबर 2026 को जारी भर्ती नियमों के तहत पुलिस आरक्षक, वनरक्षक और जेल प्रहरी के पदों पर पात्र पूर्व अग्निवीरों को 10 प्रतिशत क्षैतिज आरक्षण देने का प्रावधान किया गया है। इसके तहत गृह विभाग, वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग और जेल विभाग की भर्तियों में उन्हें अवसर मिलेगा। यह आरक्षण संबंधित सामाजिक श्रेणियों के भीतर लागू होगा। हालांकि, इस विशेष व्यवस्था का लाभ छत्तीसगढ़ के पात्र स्थानीय निवासी पूर्व अग्निवीर ही ले सकेंगे। इसके लिए उम्मीदवारों को चार साल की सैन्य सेवा पूरी करने का प्रमाणपत्र, स्थानीय निवास प्रमाणपत्र और अन्य जरूरी दस्तावेज प्रस्तुत करने होंगे। नए नियमों के अनुसार, पात्र पूर्व अग्निवीरों को लिखित परीक्षा और शारीरिक योग्यता एवं दक्षता परीक्षा से छूट देने का प्रावधान है। चयन के लिए 10वीं कक्षा के अंकों के आधार पर मेरिट सूची तैयार की जाएगी। यदि दो उम्मीदवारों के अंक समान होते हैं, तो अधिक उम्र वाले अभ्यर्थी को प्राथमिकता देने का प्रावधान रखा गया है। सेना, नौसेना या वायुसेना से जारी मान्य शैक्षणिक प्रमाणपत्रों को भी निर्धारित नियमों के अनुसार स्वीकार किया जा सकेगा। इसके अलावा, पूर्व अग्निवीरों को अधिकतम आयु सीमा में अतिरिक्त छूट मिलेगी। पहले बैच के अभ्यर्थियों को पांच साल और अन्य बैच के अभ्यर्थियों को तीन साल की छूट देने का प्रावधान है। भर्ती प्रक्रिया में बैचवार प्राथमिकता भी निर्धारित की गई है, जिसके तहत पहले बैच के पात्र उम्मीदवारों पर पहले विचार किया जाएगा। हालांकि, अंतिम पात्रता संबंधित विभाग के भर्ती नियमों और आधिकारिक विज्ञापन के अनुसार तय होगी। राज्य सरकार ने पूर्व अग्निवीरों की भर्ती के लिए अलग ऑनलाइन पोर्टल विकसित करने का भी प्रावधान किया है। संबंधित विभागों की ओर से भर्ती विज्ञापन जारी होने के बाद पात्र उम्मीदवार आवेदन कर सकेंगे। फिलहाल आवेदन शुरू होने की तारीख और कुल रिक्त पदों की संख्या की जानकारी उपलब्ध नहीं है। नियमों के अनुसार, चयनित उम्मीदवारों को तीन साल की परिवीक्षा अवधि पर रखा जाएगा। साथ ही, किसी एक पद पर पूर्व अग्निवीर आरक्षण का लाभ लेकर नियुक्ति पाने वाला अभ्यर्थी दूसरे पद पर नियुक्ति के लिए दोबारा इसी आरक्षण का लाभ नहीं ले सकेगा। सरकार ने 30 सितंबर 2026 को मंत्रिपरिषद की बैठक में इन भर्ती नियमों को मंजूरी दी थी, जिसके बाद 15 अक्टूबर को इन्हें जारी किया गया। अब पात्र उम्मीदवारों को आवेदन प्रक्रिया और भर्ती से जुड़ी आगे की जानकारी के लिए आधिकारिक विज्ञापन का इंतजार करना होगा।
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