विशेष

इंदौर। नवागत कलेक्टर मनीष सिंह ने रविवार को बिना किसी देरी के शहर में कंप्लीट लॉक डाउन के आदेश जारी किए हैं। उन्होंने कहा कि  कोरोना वायरस को लेकर अब धीरे-धीरे प्रशासन शक्ति बढ़ाता जाएगा। जनता से अनुरोध है कि कुछ दिनों थोड़ी परेशानियों का सामना कर लें, क्योंकि कोविड- 19 को आज संयमित नहीं किया गया तो कल वह बहुत ही भयावह स्थिति बन कर उभरेगा। ज्यादा केस वाले स्थान पूर्ण रूप से प्रतिबंधितकलेक्टर ने बताया कि ऐसे स्थान जहां पर कोरोना वायरस से संक्रमित मरीजों की संख्या ज्यादा है वे पूर्ण रूप से प्रतिबंधित रहेंगे। रानीपुरा, नयापुरा ,चंदन नगर ,हाथीपाला, दौलतगंज आदि  स्थानों पर ज्यादा सतर्कता बरतने की जरूरत है। आज रानीपुरा को टेकओवर किया जा रहा है। इस स्थान के आसपास की रोड को लॉक डाउन करके स्क्रीनिंग भी की जाएगी। स्क्रीनिंग के पश्चात दवाइयां भी बटवाई जाएंगी। इस प्रकार चयनित स्थानों पर ऐसे व्यक्ति जिनकी उम्र 55 साल से अधिक है तथा जिन्हें हृदय रोग अथवा डायबिटीज की परेशानी है, उन्हें दवा का कितना डोज देना है, यह भी निश्चित किया जा रहा है।प्राइवेट अस्पतालों से पूर्ण सहयोग की अपेक्षाजिलाधीश ने बताया कि हमारी प्राथमिकता ऐसे मरीजों को अलग करना है जो हाई रिस्क कैटेगरी में आते हैं अर्थात जिन्हें क्वॉरेंटाइन करने की जरूरत है। ऐसे मरीजों को आइसोलेट करके रखा जाएगा। इसके लिए अलग से दो-तीन हॉस्पिटल तय कर मरीजों को शिफ्ट किया जाएगा। क्वॉरेंटाइन के लिए मैरिज गार्डन भी लिए जा रहे हैं जहां मरीजों के भोजन संबंधी उचित व्यवस्थाएं भी रहेंगी।स्वयंसेवी संस्थाओं को दी गई छूट निरस्तगरीब, विकलांग, वृद्ध, आश्रित लोगों के सेवा कार्य की इच्छुक सामाजिक संस्थाओं के लिए प्रतिबंधात्मक आदेश में छूट दी गई थी। पूर्व में दिए गए निर्देशों के अनुसार कुछ निश्चित संस्थाएं  गरीबों, आश्रितों,वृद्धों एवं विकलांगों की मदद हेतु भोजन पैकेट, दवाइयां आदि उपलब्ध करा सकेंगे। कलेक्टर मनीष सिंह ने इस आदेश को निरस्त किया है। उन्होंने बताया कि प्रशासन अलग से लगभग 10 हजार भोजन पैकेट की व्यवस्था कर रहा है। जिसके द्वारा जरूरतमंदों की मदद की जाएगी साथ ही दवा तथा इलाज संबंधी व्यवस्था भी बनाई जाएगी। उन्होंने बताया कि इस समय प्रशासन का मुख्य उद्देश्य लोगों को घरों में रहने के लिए प्रेरित करना है जिससे कि कोरोना वायरस के संक्रमण की जंजीर को तोड़ा जा सके।वाहनों के लिए शुरू किया गया ऑड-इवन क्लोज आदेश भी निरस्तवहीं, वाहनों के लिए शुरू किया गया ऑड-इवन, क्लोज आदेश निरस्त किया गया है। इसका उद्देश्य लोगों को घर में रहने के लिए प्रेरित करना एवं सोशल डिस्टेंसिंग बनाए रखना है। इंदौर कोरोना वायरस के संक्रमण की जिस स्टेट से गुजर रहा है उस समय यह अतिआवश्यक है कि लोग घर में ही रहें और बाहर बिल्कुल भी ना जाएं।उन्होंने बताया कि हॉस्टल में रहने वाले बच्चों की भोजन व्यवस्था हॉस्टल मालिकों तथा मजदूरों के लिए इसी प्रकार की व्यवस्था ठेकेदार के द्वारा की जाएगी। उन्होंने बताया कि यह हॉस्टल मालिकों तथा ठेकेदारों की जिम्मेदारी बनती है कि वे समुचित व्यवस्था बनाएं अन्यथा उनके खिलाफ कार्यवाही की जाएगी।उन्होंने लोगों से अपील की कि, इस वक्त ज्यादा हरी सब्जियां भी ना खरीदें। क्योंकि सब्जियां भी कई स्तर से होते हुए घर में पहुंचती है तथा इनमें भी वायरस पाए जाने की संभावना बनी रहती है। अत: इस घड़ी में कम साधनों में आवश्यकता की पूर्ति करना ही बेहतर है।संभागायुक्त एवं एडीजी ने किया खजराना एवं रानीपुरा इलाके का निरीक्षणइधर, सम्भागायुक्त आकाश त्रिपाठी और एडीजी विवेक शर्मा ने रविवार को शहर के खजराना और रानीपुरा इलाकों का निरीक्षण किया। इस दौरान उन्होंने कर्फ्यू व्यवस्थाएं देखीं। उल्लेखनीय है कि करोना के संक्रमण की रोकथाम के लिए जिले में धारा 144 के अंतर्गत जिले में प्रतिबंधात्मक आदेश जारी किए गए हैं। शहर में कर्फ्यू के दौरान सारी व्यवस्थाएं नियमित रूप से जारी रहें तथा कोई भी व्यक्ति कर्फ्यू का उल्लंघन ना करें इसके लिए  कमिश्नर, कलेक्टर, नगर निगम तथा पुलिस विभाग  द्वारा नियमित रूप से भ्रमण किया जा रहा है।

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Dakhal News 29 March 2020

भोपाल। कोरोना वायरस के संक्रमण से बचाव के लिए किये जा रहे ऐहतियातन प्रयासों के बीच मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान रविवार शाम को फेसबुक लाइव के माध्यम से प्रदेश के नागरिकों से रू-ब-रू हुए। उन्होंने प्रदेशवासियों से बातकर बड़ा ऐलान किया कि जिन फैक्ट्रियों में मजदूर काम करते थे और लॉकडाउन की वजह से वह काम पर नहीं जा रहे हैं, उन सभी मजदूरों को घर बैठने पर मजदूरी का पैसा मिलेगा। फैक्ट्री प्रबंधन उनकी मजदूरी का पैसा बराबर देगा और ऐसा नहीं करने पर फैक्ट्री प्रबंधन के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने रविवार शाम को छह बजे फेसबुक लाइव पर मजदूरों से अपील करते हुए कहा कि वह जहां हैं, वही रहें। उनके रहने खाने की व्यवस्था के लिए मुख्यमंत्री लगातार दूसरे राज्यों के मुख्यमंत्री से संपर्क में है। उनको उन राज्यों में उत्तम सुविधा उपलब्ध कराई जाएगी। उन्होंने किसानों को ढांढस बंधाते हुए कहा कि बिन मौसम बरसात से हुए नुकसान पर किसान भाइयों को चिंता करने की कोई आवश्यकता नहीं है। उन्हें खाद बीज की कोई कमी नहीं होने दी जाएगी। न ही किसी जरूरी सामान की कमी की जाएगी। मुख्यमंत्री ने जनता से अपील करते हुए कहा कि इस समय प्रदेशवासी घर में ही रहें। हम अपने प्रदेशवासियों के लिए हर समय सहायता कर रहे हैं। सरकार सबके भोजन की व्यवस्था में जुटी हुई है। उनके पास राशन कार्ड नहीं उन्हें भी राशन दिया जाएगा। उन्होंने प्रदेशवासियों से अपील की है कि वह सोशल डिस्टेंसिंग का ध्यान रखें। पीडि़त से सहानुभूति का भाव रखें। सीएम शिवराज ने स्वास्थ्य के मुद्दे पर बात करते हुए कहा कि कोरोना के लिए एक लाख टेस्ट किट का आर्डर दिया गया है। इस महामारी के संक्रमण को रोकने और इसके इलाज के लिए भी पूरी व्यवस्था की गई है। इलाज को लेकर लोगों को चिंता करने की कोई आवश्यकता नहीं है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी ने जनता के लिए 1 लाख 70 हजार करोड़ का पैकेज दिया है। हम लोग कोरोना से लड़ेंगे और इससे जीतेंगे भी। उन्होंने प्रदेशवासियों से अपील की है कि वह अपने परिवार को समय दें, योग-व्यायाम करते रहें, प्रधानमंत्री जी की बातों का पालन करें और इलाज को लेकर किसी तरह की चिंता ना करें।मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने फेसबुक लाइव पर मेडिकल स्टाफ, पुलिस प्रशासन, सफाई कर्मी डॉक्टर स्वयंसेवी संस्था एवं पत्रकारों को बधाई देते हुए कहा कि सभी लोग इस संकट के समय में अपने कर्तव्य का बहुत अच्छे ढंग से निर्वहन कर रहे हैं। डॉक्टर जान जोखिम में डालकर काम कर रहे हैं तो कहीं स्वयंसेवी संस्था भी मदद के लिए आगे आई हैं। पत्रकार मित्र लोगों को जागरूक करने का काम कर रहे हैं तो वहीं पुलिस प्रशासन मुस्तैदी से अपनी ड्यूटी में लगी हुई है। उन्होंने कहा कि समाज की ताकत हिम्मत देती है, हमें विश्वास है कि कोरोना को लडक़र हम इसे अवश्य परास्त करेंगे। कोरोना से डरने की जरूरत नहीं बस लॉक डाउन का पालन करें क्योंकि घर पर रहकर ही कोरोना को हराया जा सकता है।

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Dakhal News 29 March 2020

राजनीति

भोपाल। कोरोना के चलते देशभर में लगे लॉकडाउन ने आम जनजीवन को बुरी तरह से प्रभावित कर दिया है। मप्र में लॉकडाउन के चलते लोग राशन और खाने पीने की चीजों के लिए परेशान हो रहे है। वहीं दूसरे राज्यों में फंसे मप्र के लोगों के लिए भी कामधंधा बंद होने से घर वापसी चुनौती बन गई है। ऐसे में मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने प्रदेश सरकार से लोगों तक राशन और खाने पीने की चीजें पहुंचाने और दूसरे राज्यों में फंसे लोगों को वापस लाने की व्यवस्था करने का आग्रह किया है।    शनिवार रात दिग्विजय सिंह ने एक विडियो के माध्यम से मप्र सरकार से लोगों को राशन मुहैया कराने और अलग -अलग जगहों पर फंसे लोगों के वापस लौटने की व्यवस्था करने का आग्रह किया है। दिग्विजय ने कहा है कि पूरे भारतवर्ष में लॉकडाउन है। इन तीन दिनों में जो खास दिक्कत आ रही है कि वो यह है कि लोगों को राशन नहीं मिल पा रहा है। उनके खाने पीने की व्यवस्था नहीं हो पा रही है।    प्रदेश सरकार ने 23 मार्च को ही निर्णय ले लिया था, कि कंट्रोल की दुकानों से लोगों को तीन महिने का अनाज एडवांस में मिलना चाहिए, लेकिन कंट्रोल की दुकानों पर भी पर्याप्त अनाज नहीं है। इस कारण काफी दिक्कत आ रही है।    राज्य से बाहर परेशान हो रहे नागरिकों की मदद की अपील करते हुए दिग्विजय ने कहा कि दूसरी दिक्कत यह है कि कई लोग मप्र के बाहर दूसरे राज्यों में फंसे हुए है। अलग अलग स्थानों पर मेरे पास 60- 70 आवेदन आए है। उसमें करीब 100 मजदूर जैसलमेर में फंसे हुए है। मैं राजस्थान सरकार को वहां फंसे लोगों की मदद करने के लिए धन्यवाद देना चाहता हूं। लेकिन प्रदेश सरकार को इस बारे में पूरा प्रयास करना चाहिए बाहर फंसे लोगों को अपने गंतव्य स्थान पर पहुंचाने की। साथ ही यह ध्यान रहे कि उनका मेडिकल टेस्ट होना चाहिए। नेगिटिव रिपोर्ट आने पर घर भेजे और पॉजिटिव को यही क्वांरेटिन करें। उन्होंने कहा कि केन्द्र सराकर ने जो पैकेज दिया है, अच्छा है लेकिन उसे कार्यान्वित करने में तीन महिने का समय लगता है। ऐसे में मेरा आपसे आग्रह है कि लॉकडाउन में फँसे लोगों की मदद के लिए सरकार को ब्यूरोक्रेसी की पेचीदगियों से ऊपर उठकर काम करना होगा। 

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Dakhal News 29 March 2020

भोपाल। केंद्रीय नेतृत्व ने हमें मध्यप्रदेश के 45 लाख अभावग्रस्त लोगों तक पहुंचने के लिए नौ लाख कार्यकर्ताओं की सूची बनाने के लिये कहा है, ताकि ये कार्यकर्ता कोरोना से लडऩे के क्रम में अभावग्रस्त परिवारों तक भोजन एवं अन्य सहायता पहुंचा सकें। मध्यप्रदेश मजबूत संगठन वाला प्रदेश है और मुझे आशा है कि हर जिले में शीघ्रातिशीघ्र ऐसे कार्यकर्ताओं की सूची तैयार कर ली जाएगी। यह बात भाजपा के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष व प्रदेश प्रभारी डॉ. विनय सहस्त्रबुद्धे ने शनिवार को प्रदेश अध्यक्ष विष्णुदत्त शर्मा एवं पार्टी कार्यकर्ताओं से ऑडियो कांफ्रेंसिंग के दौरान कही। उन्होंने कहा कि केंद्रीय नेतृत्व की मध्यप्रदेश से अपेक्षाएं अधिक हैं और हमें ऐसे 9 लाख कार्यकर्ताओं की सूची तैयार करना है, जो 5-5 जरूरतमंद लोगों तक भोजन पहुंचा सकें। इस तरीके से हम 45 लाख लोगों तक पहुंचकर उन्हें भोजन और सहायता उपलब्ध करा सकेंगे। उन्होंने कहा कि यह काम हमें बिना भीड़ इक_ा किये करना है और इसके दौरान सोशल डिस्टेंसिंग तथा कोविड-19 से मुकाबले के लिये तय किए गए सतर्कता के मापदंडों के अनुसार करना है। उन्होंने कार्यकर्ताओं की सूची जितने जल्दी हो सके तैयार करने की बात कही, ताकि अभावग्रस्त लोगों तक जल्द से जल्द सहायता पहुंचाई जा सके।लक्ष्य हासिल करेंगे प्रदेश के कार्यकर्ता: विष्णुदत्त शर्माप्रदेश प्रभारी डॉ. विनय सहस्त्रबुद्धे एवं पार्टी कार्यकर्ताओं के साथ ऑडियो कांफ्रेंसिंग के दौरान प्रदेश अध्यक्ष विष्णुदत्त शर्मा ने कहा कि मध्यप्रदेश में 56 जिले हैं और 9 लाख के हिसाब से प्रत्येक जिले में 16 हजार कार्यकर्ताओं की सूची तैयार की जाना है। यह सूची तैयार की जा रही है और हम पीडि़तों को राहत पहुंचाने के लिये पूरी ताकत से काम कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि हमें 45 लाख अभावग्रस्त लोगों तक पहुंचने का जो लक्ष्य दिया गया है, हम उस टारगेट को पूरा करेंगे और लोगों को यह अहसास कराएंगे कि इस मुसीबत के समय में भाजपा पूरी ताकत से आपके साथ खड़ी है।

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Dakhal News 28 March 2020

मीडिया

देश की आर्थिक राजधानी मुम्बई सहित पूरे महाराष्ट्र में पहली बार ऐसा हुआ है कि समाचार पत्रों का प्रकाशन लगातार हफ्ते भर से ज्यादा दिनों के लिए स्थगित रखना पड़ा हो। नई जानकारी के मुताबिक महाराष्ट्र के अखबारों को अब 31 मार्च तक के लिए बंद कर दिया गया है। बताते हैं कि पिछले रविवार को मुम्बई सहित आसपास में समाचार पत्रों की प्रिंटिंग पूर्व की तरह हुई लेकिन कोरोना वायरस के खौफ और जनता कर्फ्यू के कारण समाचार पत्र विक्रेताओं ने समाचार पत्रों को बांटने के लिए नहीं खरीदा। इसके बाद प्रिंटिंग पेपर वापस अखबार प्रबंधन के लोगों ने मंगा लिया। उसके बाद रविवार की रात से मुम्बई की लाइफलाइन लोकल ट्रेन बंद हो गयी जिसे देखते हुए अखबारों का प्रकाशन नहीं हुआ। सोमवार को समाचार पत्र विक्रेताओं के संगठन बृहनमुंबई वृतपत्र विक्रेता संघ ने दोपहर 12 बजे उद्योगमंत्री सुभाष देसाई से मुलाकात की जिसमे सभी संगठन के प्रतिनिधियों ने इस चर्चा में हिस्सा लिया। इस चर्चा में दिनोदिन बढ़ रहे कोरोना वायरस के संक्रमण से सुरक्षा को देखते हुए तय किया गया कि 24 मार्च और 25 मार्च को समाचार पत्रों का वितरण नहीं किया जाएगा। उसके बाद अगली परिस्थिति की समीक्षा कर अगला निर्णय 26 मार्च से लिया जाएगा। आज 25 मार्च को फिर समाचार पत्र विक्रेताओं के संगठन के पदाधिकारियों की बैठक हुई जिसमें तय हुआ कि 31 मार्च तक पूरे राज्य में समाचार पत्रों की विक्री नही की जाएगी और 29 मार्च को संगठन की फिर बैठक होगी जिसमें स्थिति की समीक्षा कर आगे की रणनीति तय की जाएगी। उधर, सोमवार देर शाम महाराष्ट्र सरकार ने पूरे महाराष्ट्र में कर्फ्यू लगा दिया है। राज्य में कर्फ्यू और ऊपर से लोकल ट्रेन बन्द और 14 अप्रैल तक राष्ट्र व्यापी लॉक डाउन।जब तक लोकल चालू नहीं होगी तब तक ज्यादातर प्रिंट मीडिया के कर्मी घर पर रहेंगे। ऐसे में महाराष्ट्र में अखबारों का प्रकाशन कब शुरू होगा कोई नहीं जानता। आपको बता दें की ऐसा पहली बार हुआ है जब इतने लंबे समय तक मुम्बई में लोकल ट्रेन और समाचार पत्रों का प्रकाशन बंद रहेगा। कुछ अखबार ऑनलाइन एडिशन अपडेट कर रहे हैं और रिपोर्टरों को बोलकर खबर मंगा रहे हैं। उधर राज्य सरकार और महाराष्ट्र के कामगार आयुक्त ने एक आदेश जारी किया है कि राज्य में कोरोना वायरस से सुरक्षा के लिए सभी निजी कंपनियों को बंद किया जा रहा है। सरकारी परिपत्रक में कहा गया है कि न तो कर्मचारी को हटाना है और न ही उनका वेतन काटना है। कर्मचारियों के लिए राहत भरी खबर है।   शशिकांत सिंहपत्रकार और आरटीआई एक्टिविस्ट

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Dakhal News 25 March 2020

देश की आर्थिक राजधानी मुम्बई सहित पूरे महाराष्ट्र में पहली बार ऐसा हुआ है कि समाचार पत्रों का प्रकाशन लगातार हफ्ते भर से ज्यादा दिनों के लिए स्थगित रखना पड़ा हो। नई जानकारी के मुताबिक महाराष्ट्र के अखबारों को अब 31 मार्च तक के लिए बंद कर दिया गया है। बताते हैं कि पिछले रविवार को मुम्बई सहित आसपास में समाचार पत्रों की प्रिंटिंग पूर्व की तरह हुई लेकिन कोरोना वायरस के खौफ और जनता कर्फ्यू के कारण समाचार पत्र विक्रेताओं ने समाचार पत्रों को बांटने के लिए नहीं खरीदा। इसके बाद प्रिंटिंग पेपर वापस अखबार प्रबंधन के लोगों ने मंगा लिया। उसके बाद रविवार की रात से मुम्बई की लाइफलाइन लोकल ट्रेन बंद हो गयी जिसे देखते हुए अखबारों का प्रकाशन नहीं हुआ। सोमवार को समाचार पत्र विक्रेताओं के संगठन बृहनमुंबई वृतपत्र विक्रेता संघ ने दोपहर 12 बजे उद्योगमंत्री सुभाष देसाई से मुलाकात की जिसमे सभी संगठन के प्रतिनिधियों ने इस चर्चा में हिस्सा लिया। इस चर्चा में दिनोदिन बढ़ रहे कोरोना वायरस के संक्रमण से सुरक्षा को देखते हुए तय किया गया कि 24 मार्च और 25 मार्च को समाचार पत्रों का वितरण नहीं किया जाएगा। उसके बाद अगली परिस्थिति की समीक्षा कर अगला निर्णय 26 मार्च से लिया जाएगा। आज 25 मार्च को फिर समाचार पत्र विक्रेताओं के संगठन के पदाधिकारियों की बैठक हुई जिसमें तय हुआ कि 31 मार्च तक पूरे राज्य में समाचार पत्रों की विक्री नही की जाएगी और 29 मार्च को संगठन की फिर बैठक होगी जिसमें स्थिति की समीक्षा कर आगे की रणनीति तय की जाएगी। उधर, सोमवार देर शाम महाराष्ट्र सरकार ने पूरे महाराष्ट्र में कर्फ्यू लगा दिया है। राज्य में कर्फ्यू और ऊपर से लोकल ट्रेन बन्द और 14 अप्रैल तक राष्ट्र व्यापी लॉक डाउन।जब तक लोकल चालू नहीं होगी तब तक ज्यादातर प्रिंट मीडिया के कर्मी घर पर रहेंगे। ऐसे में महाराष्ट्र में अखबारों का प्रकाशन कब शुरू होगा कोई नहीं जानता। आपको बता दें की ऐसा पहली बार हुआ है जब इतने लंबे समय तक मुम्बई में लोकल ट्रेन और समाचार पत्रों का प्रकाशन बंद रहेगा। कुछ अखबार ऑनलाइन एडिशन अपडेट कर रहे हैं और रिपोर्टरों को बोलकर खबर मंगा रहे हैं। उधर राज्य सरकार और महाराष्ट्र के कामगार आयुक्त ने एक आदेश जारी किया है कि राज्य में कोरोना वायरस से सुरक्षा के लिए सभी निजी कंपनियों को बंद किया जा रहा है। सरकारी परिपत्रक में कहा गया है कि न तो कर्मचारी को हटाना है और न ही उनका वेतन काटना है। कर्मचारियों के लिए राहत भरी खबर है।   शशिकांत सिंहपत्रकार और आरटीआई एक्टिविस्ट

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Dakhal News 25 March 2020

समाज

उज्जैन। धर्म नगरी उज्जैन के बीचोंबीच स्थित जान्सापुरा पूरे मध्यप्रदेश में सुर्खियां में आ गया है । यहां पर रहने वाले एक ही परिवार के चार सदस्य कोरोना पॉजिटिव पाए गए हैं। इनमें से एक महिला की मौत भी हो चुकी है।  चीन के वुहान से शुरू हुआ करोना कब उज्जैन तक पहुंच गया यह बात किसी को पता तक नहीं चल पाई । सबसे बड़ी बात यह है कि जान्सापुरा में रहने वाला एक ही परिवार कोरोना वायरस की जद में आ गया। पहले कोरोना पाजिटिव राबीया बी की दर्दनाक मौत हो गई और अब उनके पुत्र, पुत्री और पोता वायरस से संघर्ष कर रहे हैं । कोरोना किस कदर एक दूसरे में फैलता है यह बात किसी से छिपी नहीं है।  जांसापुरा में रहने वाले कुछ और लोगों के सैंपल भी लिए गए हैं । जो राबीया के परिवार के संपर्क में रहे हैं।    दूसरी तरफ जिला प्रशासन की ओर से ऐसे दुकानदारों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जा रही है जो नियमों का उल्लंघन कर रहे हैं । जिला प्रशासन के अधिकारियों ने कई दुकानों को सील कर दिया है । इसके अलावा मुकदमे भी दर्ज किए जा रहे हैं इसलिए दुकानदारों को भी अब नियम के दायरे में रहकर ही दुकान चलाना होगी। अब पुलिस की सख्ती और बढेगी। 

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Dakhal News 29 March 2020

जबलपुर। प्रदेश के जबलपुर में रविवार को कोरोना संदिग्ध महिला की ईलाज के दौरान मौत हो गई। महिला के सैंपल जांच के लिए भेजे गए हैं। फिलहाल, जांच रिपोर्ट नहीं आई है। महिला का पति 10 दिन पहले ही सउदी अरब से लौट कर शहडोल आया था। जिला प्रशासन ने महिला के पूरे परिवार के सैंपल लिए जाने के निर्देश दिए हैं।     जानकारी अनुसार 65 साल की महिला को पांच दिन पहले महिला की तबीयत खराब होने पर परिजनों ने उसे शहडोल के सरकारी अस्पताल में भर्ती कराया था। यहां उसकी हालत में सुधार नहीं होने पर उसे जबलपुर के मेडिकल कॉलेज रेफर कर दिया। ईलाज के दौरान महिला में कोरोना वायरस के जैसे लक्षण मिलने पर डॉक्टरों ने उसे आइसोलेशन वार्ड में भर्ती कर दिया।   शुक्रवार शाम को महिला के सैंपल जांच के लिए भेज दिए गए। महिला के परिवार की ट्रेवल हिस्ट्री की जानकारी लेने पर पता चला कि महिला का पति करीब 10 दिन पहले ही सउदी अरब से लौटकर शहडोल आया है। डॉक्टर महिला का इलाज कोरोना का संदिग्ध मान कर रहे थे। महिला के सैंपल जांच के लिए भेजे गए हैं। फिलहाल, जांच रिपोर्ट नहीं आई है। रविवार सुबह महिला की मौत हो गई। डॉक्टरों का कहना है कि महिला के सैंपल रिपोर्ट आने के बाद वजह का पता चल सकेगा। जिला प्रशासन ने महिला के पूरे परिवार के सैंपल लिए जाने के निर्देश दिए हैं।  

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मुंबई| कोरोना वायरस से बचने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश में 21 दिनों का लॉकडाउन किया है। वहीं बॉलीवुड सिलेब्रिटीज कोरोना के खिलाफ जंग में दिल खोलकर दान दे रहे हैं। अभिनेता वरुण धवन और सिंगर गुरु रंधावा ने भी पीएम राहत कोष में दान दिया है। वरुण धवन ने 55 लाख रुपये देने की घोषणा की है। उन्होंने पीएम केयर्स फंड में 30 लाख और महाराष्ट्र मुख्यमंत्री के राहत कोष में 25 लाख रुपये का अपना योगदान दिया है। इसकी जानकारी वरुण धवन ने सोशल मीडिया पर दी। वरुण धवन ने ट्वीट किया-'मैं पीएम केयर फंड में 30 लाख का योगदान देने की प्रतिज्ञा करता हूं। हम इस लड़ाई में जरूर जीतेंगे। देश है तो हम हैं।'   वरुण धवन ने ट्विटर पर लिखा-'मैं महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री राहत कोष में 25 लाख का योगदान करने का संकल्प लेता हूं। हम आपके साथ हैं सर।'वहीं सिंगर गुरु रंधावा ने भी 20 लाख रुपये की मदद की घोषणा की है। गुरु रंधावा ने ट्वीट किया-'मैं अपनी बचत से पीएम केयर्स फंड में 20 लाख रुपये का योगदान दे रहा हूं। आइए एक-दूसरे की सहायता करें। जय हिंद।'देश में कोरोना वायरस से संक्रमित लोगों की संख्या तेजी से बढ़ने लगी है। कोरोना वायरस के संक्रमित मामले बढ़कर 979 हो गए हैं, जबकि इसकी वजह से 25 लोगों की मौत हो चुकी है। 

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Dakhal News 29 March 2020

मुंबई| बॉलीवुड सुपरस्टार अक्षय कुमार ने शनिवार को कोरोना वायरस महामारी के खिलाफ लड़ाई में 25 करोड़ रुपये दान करने का संकल्प लिया। 52 वर्षीय अभिनेता की पत्नी और अभिनेत्री ट्विंकल खन्ना का कहना है कि उन्हें उस पर 'गर्व' है। अभिनेता ने कहा कि वह अपनी बचत से राशि दान कर रहे हैं। ट्विटर पर खबर साझा करते हुए अभिनेता ने कहा कि वह अपनी बचत से 'पीएम-केयर्स फंड' में 25 करोड़ रुपये का योगदान देंगे। यह वह समय है जब हम सबके जीवन का सवाल है। कोरोना के खिलाफ जंग में किसी अभिनेता ने अभी तक इतनी बड़ी रकम राहत कोष में नहीं दी गई है। सरकार ने 'प्रधानमंत्री नागरिक सहायता एवं आपात स्थिति राहत कोष' की घोषणा की थी। उन्होंने कोविड-19 के खिलाफ जंग लड़ने में दान देने की इच्छा व्यक्त करने के लिए सभी क्षेत्रों के लोगों से आग्रह किया। इसके बाद अक्षय कुमार ने शनिवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ट्वीट को रिट्वीट कर लिखा-'यह वह समय है जब हम सबके जीवन का सवाल है और हमें कुछ करने की जरूरत है, हम जो भी कर सकें। मैं अपनी बचत से 25 करोड़ रुपये का योगदान पीएम केयर्स फंड में देने का सकल्प करता हूं। आओ जीवन बचाएं। जान है तो जहान है।'   अभिनेत्री और लेखिका ट्विंकल खन्ना ने अपने पति की सराहना की है और उन्होंने कहा कि उन्हें उस पर बहुत गर्व है। ट्विंकल खन्ना ने ट्वीट किया-'मुझे इस आदमी पर गर्व है। जब मैंने उनसे पूछा, क्या वो वाकई इतनी बड़ी राशि देना चाहते हैं। क्योंकि हमें लिक्विड फंड की जरूरत होगी। उन्होंने कहा-मेरे पास कुछ भी नहीं था जब मैंने शुरुआत की थी और अब जब मैं इस स्थिति में हूं, तो मैं जो कुछ भी कर सकता हूं, मैं कैसे पीछे हट सकता हूं। ऐसे लोगों के लिए, जिनके पास कुछ नहीं है।'    बॉलीवुड के खिलाड़ी अक्षय कुमार के दरियादिली की खूब सराहना हो रही है। अक्षय कुमार पहले भी कई मौकों पर दान किए हैं। मार्च, 2020 में अक्षय ने चेन्नई में बनने वाले देश के पहले ट्रांसजेंडर शेल्टर होम के लिए 1.5 करोड़ रुपये की राशि अपनी ओर से दान में दी थी। पुलवामा हमले के शहीदों के लिए दिए 5 करोड़, जुलाई 2019 में असम में आई भयानक बाढ़ पीड़ितों की मदद के लिए 2 करोड़, मई, 2019 में आए फैनी तूफान पीड़ितों के लिए 1 करोड़ दिए थे। अक्षय कुमार ने हाल में कहा कि लॉकडाउन की इस घड़ी में जो अपने घर में रहेगा, वही सुपरस्टार होगा। बॉलीवुड अभिनेता अक्षय कुमार के लाखों की संख्या में फैंस हैं। वह इन दिनों सोशल मीडिया पर एक्टिव हैं। अक्षय कुमार कोरोना वायरस को लेकर लोगों को जागरूक कर रहे हैं। अभिनेता लगातार सोशल मीडिया पर 21 दिनों के लॉकडाउन के दौरान लोगों से घर में रहने, लोगों से दूरी बनाने और सरकार के साथ सहयोग करने का आग्रह कर रहे हैं।   भारत में कोरोना वायरस तेजी से पैर पसार रहा है। अब तक कोरोना वायरस के 886 मामले हो गए हैं और 19 लोगों की इस माहमारी से मौत हो चुकी है। चीन के वुहान शहर से शुरू हुआ कोरोना वायरस अब पूरी दुनिया में फैल चुका है। दुनियाभर में कोरोना संक्रमितों की संख्या छह लाख से पार जा चुकी है, जबकि इस जानलेवा वायरस से अब तक 27,800 से अधिक लोगों की मौत हो चकी है। 

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Dakhal News 29 March 2020

दखल क्यों

सुन्दर सिंह राणा भारतीय समाज में धर्म, दैनिक जनजीवन के इर्द-गिर्द घूमता है। मंदिर आम जीवन में धर्म का प्रमुख प्रतीक है। धर्म के प्राचीनतम प्रतीकों में मंदिर सर्वाधिक महत्व रखता है। भारत में मंदिर हिन्दू-धर्म के अलावा जैन समुदाय की आस्था का भी प्रतीक है। देश में भव्य जैन मंदिर अपनी उपस्थिति सकारात्मक दायित्वों के साथ सदैव से दर्ज कराते रहे हैं। आमजन और मंदिर के बीच गहरा भावनात्मक सम्बन्ध है। समाज तीव्र गति से बदल रहा है। लोगों की व्यस्तताएं बढ़ी है इसलिए जरूरी है, मंदिर को समुदाय के बीच नये आकर्षणों के साथ स्थापित करने की। भागदौड़ भरे व्यस्ततम जीवन में पूजा-पाठ के साथ मंदिर एक सहयोगी संस्था के रूप में मजबूत सामुदायिक केन्द्र बनकर कैसे उभरे, यह हमें जैन मंदिरों की संचालन व्यवस्था से सीखने की आवश्यकता है। जहां मंदिर जन जरूरतों की पूर्ति़ का माध्यम बनकर उभरा है। सुबह-सायं प्रसाद तो पाते ही हैं, वहीं भोजन की भी व्यवस्था नियमित रूप से गुरुद्वारों के लंगर की तरह रहती है। साधारण भोजन मिलता है जो बहुद कम प्रतीकात्मक कीमत में उपलब्ध रहता है। घर में अकेले रह रहे बुजुर्गों हेतु टिफिन सेवा की सप्लाई का प्रबंध है। नियमित रूप से रोगियों के लिए चिकित्सा और दवा की पूरी सुविधा है, जहां बाजार भाव से आधी कीमत पर सभी तरह की दवाइयां उपलब्ध हैं। आपको अपने शरीर की किसी तरह की जांच/परीक्षण कराना है तो ब्लड सैम्पल से लेकर रिपोर्ट तक आपको मंदिर में ही उपलब्ध कराने की पूरी व्यवस्था है। शारीरिक व्यायाम के लिए जिम की सुविधा है। सुबह-शाम व्यायामशाला जारी है। जरूरतमंद लोगों के लिए फिजियोथिरेपी केन्द्र आधुनिक मशीनों और सुविधाओं सहित संचालित हो रहे हैं। जैन मंदिरों में यह सब सेवाएं नियमित रूप से सुबह पांच से प्रारम्भ होकर रात्रि 9 बजे तक सुचारू ढंग से संचालित रहती है। राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली क्षेत्र में जाकर आप किसी भी मंदिर में इन नियमित लाभों को ले सकते हैं। साथ ही जरुरतमंद लोगों को मंदिर द्वारा प्रदान इन सेवाओं का लाभ लेने को प्रेरित कर सकते हैं। वास्तव में मंदिरों की असली भूमिका ऐसी मानवीय जरूरतों की पूर्ति करना भी है। जो समाज के जरूरतबंद तबके के जीवन संघर्षों को कुछ कम करने में मददगार बन सके। वहीं समुदाय के उन लोगों को कुछ सुविधाप्रद वातावरण उपलब्ध कराना भी हो जो नियमित रूप से मंदिर से जुड़े हैं। ताकि उस निरन्तरता की कुछ सार्थकता भी साबित हो सके और आस्थावान लोग अपने समय का सदुपयोग कर कुछ जरुरतों को इसी के माध्यम से पूरा कर पाए। सही मायने में मंदिर की सर्वोत्तम उपयोगिता यही है। हमारे देश में बहुत से ऐसे मंदिर हैं जो इस दिशा में अहम् योगदान कर सकते हैं। अपनी सम्पत्ति को सकारात्मक कार्यों में संलग्न कर समाज के लिए गुणवत्तापूर्ण शिक्षावाले स्कूल, आधुनिक सुविधाओं वाले हॉस्पिटल्स और समाज के ऐसे तबके को जो किन्हीं वजहों से तिरस्कृत हैं, उनके लिए अनाथ आश्रम और वृद्ध आश्रम स्थापित कर सामाजिक पुर्ननिर्माण में आगे बढ़कर योगदान कर सकते हैं। देश में अभी भी अधिकांश मंदिर किसी भी तरह के सामाजिक सरोकार से नहीं जुड़ पाए हैं, हमारे नेतृत्व को चाहिए कि मंदिरों को अपना सकारात्मक सहयोग करने के लिए प्रेरित करे। हमारे मंदिरों को अपनी परम्पराओं के साथ आधुनिक मूल्यों का मान करना चाहिए। जैसे केरल के सबरीमाला मंदिर के मामले में सुप्रीम कोर्ट का हस्तक्षेप महिलाओं को मंदिर जाने की इजाजत दे रहा है तो इसका सबको स्वागत करना चाहिए। मंदिर आधुनिक समाज में न सिर्फ पूजास्थल तक सीमित रह सकते हैं बल्कि उन्हें एक मजबूत सामुदायिक केन्द्र की भूमिका में स्वयं को पुर्नस्थापित करना होगा। मंदिर धार्मिकता के साथ-साथ सामाजिक-सांस्कृतिक जागरण का भी दायित्व निभाएं। समाज के लिए शिक्षण के केन्द्र बनकर उभरे। मंदिर भारतीय समाज में प्राचीनतम् और मजबूत व्यवस्था है। हमें इसके महत्व को पहचानना चाहिए। भारत में 400 ईसा पूर्व से मंदिर के अवशेष मौजूद हैं। मंदिर सदियों से हमारे समाज का अभिन्न हिस्सा रहा है। भारतीय समाज बहुत ही उदार स्वभाव वाला समाज रहा है। यहां हर समुदाय के अपने-अपने मंदिर हैं। शिव में आस्था रखने वाले शैव मंदिर और विष्णु को मानने वाले वैष्णव मंदिर तथा देवी में आस्था वाले शक्ति मंदिर स्थापित करते रहे हैं। भारत में मंदिर सामाजिक-धार्मिक संगम का पवित्र स्थल की भूमिका में रहे हैं। हिन्दू मंदिर अपने आराध्य के दर्शनार्थ एक पवित्र केन्द्र हैं। धार्मिक स्थल की अपनी विशिष्ठ महत्ता होती है। किसी भी धार्मिक स्थल पर उस धर्म के अनुयायी पूजा-पाठ करने आते हैं। यह निरन्तता समाज को जोड़े रखने में महत्पूर्ण भूमिका निभाती है। मंदिर हमारे लिए नियमित धार्मिक अभ्यास का केन्द्र है। धर्म हमारे सामाजिक अभ्यासों के लिए ईंधन प्रदान करता है, जिससे हमारा समाज संचालित होता है। समाज द्वारा धार्मिक उत्सवों, तीज-त्यौहारों और विभिन्न सांस्कृतिक क्रियाकलापों को इसी पृष्ठभूमि में आयोजित और संचालित किया जाता रहा है। आधुनिक समय में समाज में जो बदलाव आए हैं और मानवीय जरूरतें अपनी प्राथमिकता बदल रही है, ऐसे में धर्म को इन बदली स्थितियों/परिस्थियों को ध्यान में रखकर नयी भूमिकाओं को धारण करना होगा और अपने समाज को सशक्त समाज के रूप में स्थापित करना होगा। (लेखक स्वतंत्र टिप्पणीकार हैं।)

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Dakhal News 29 March 2020

हृदयनारायण दीक्षित सुख सबकी कामना है। सामान्यतया अपने वातावरण व समाज की अनुकूलता सुख व प्रतिकूलता दुख कही जाती है लेकिन आयु-विज्ञान के महान ग्रंथ चरक संहिता (हिन्दी अनुवाद, चैखम्भा वाराणसी) में सुख और दुख की विशेष परिभाषा की गई है। चरक के अनुसार “स्वस्थ होना सुख है और रूग्ण (विकार ग्रस्त) होना दुख है।” सुखी रहने के लिए उत्तम स्वास्थ्य जरूरी है। चरक संहिता ने सुखी जीवन के लिए स्वास्थ्य को आवश्यक बताया है। स्वस्थ जीवन के तमाम स्वर्ण सूत्र चरक संहिता के पहले उपनिषदों में कहे गए थे। छान्दोग्य उपनिषद् में अन्न पचने और रक्त अस्थि तक बनने के विवरण हैं। महाभारत (शांति पर्व) में भी शरीर की आंतरिक गतिविधि का वर्णन है। चरक संहिता में स्वास्थ्य के लिए कठोर अनुशासन को जरूरी कहा गया है। बताते हैं “अपना कल्याण चाहने वाले सभी मनुष्यों को अपनी स्मरण शक्ति बनाए रखते हुए सद्व्रत्तों का पालन करना चाहिए।” सद्व्रत ध्यान देने योग्य है। मनुष्य ने अपने व संपूर्ण समाज के स्वास्थ्य के लिए अनेक नियम बनाए हैं। व्यापक सामाजिक हित में ही ऐसे नियमों का सतत् विकास हुआ है। कोरोना वायरस का संक्रमण विश्वव्यापी है। दुनिया के सभी क्षेत्रों में भय है। यह भय असाधारण प्रकृति का है। यह किसी साधारण रोग के संक्रमण का भय नहीं है। यह मृत्यु भय है। प्रतिष्ठित चिकित्साविज्ञानी भी इसका कारण नहीं जानते। निवारण की बात अभी दिवास्वप्न है। चिकित्सा विज्ञानियों के अनुसार परस्पर दूर रहकर ही कोरोना से बचाव संभव है। यही वर्तमान चुनौती से जूझने का सद्व्रत है। मूलभूत प्रश्न कई हैं कि भारत की मनुष्य केन्द्रित चिंतनधारा में व्रत पालन की सुदृढ़ परंपरा के बावजूद हममें से अनेक परस्पर दूर रहने के सामान्य व्रत का भी पालन क्यों नहीं करते? इस व्रत के पालन की प्रार्थना प्रधानमंत्री ने हाथ जोड़कर की है तो भी व्रतपालन क्यों नहीं? इस प्रार्थना के पीछे कानून की शक्ति है तो भी नहीं। इस व्रतभंग में मृत्यु की भी खतरा है तो भी व्रतभंग क्यों? इन प्रश्नों का उत्तर खोजना आधुनिक भारतीय चिंतन की बड़ी चुनौती है। महाभारत में यक्ष द्वारा युधिष्ठिर से अनेक जीवनोपयोगी प्रश्न पूछे गए थे। उनमें मृत्यु सम्बंधी प्रश्न भी था। यक्ष ने पूछा “सबसे बड़ा आश्चर्य क्या है-किम् आश्चर्यम्?” युधिष्ठिर ने कहा “सबकी मृत्यु निश्चित है तो भी लोग यह सत्य नहीं स्वीकार करते, अपनी हठ में बने रहते हैं।” कल्पना करें-महाभारत के इस अंश का कोरोना संदर्भ में नए सिरे से सम्पादन करें तो यह अंश संशोधित होकर कैसा होगा? यक्ष प्रश्न नए रूप में पढ़ते हैं, “भारत के लोकजीवन में सबसे बड़ा आश्चर्य क्या है? उत्तर होगा “सब लोग जानते हैं कि कोरोना की दवा नहीं। कोरोना मारक है। सब लोगों को पता है कि सामाजिक दूरी ही एकमात्र उपाय है। लोग मिले तो मरे। मुख खोले खड़ी प्रत्यक्ष मृत्यु के बावजूद लोग जीवन रक्षा का सामान्य उपाय भी नहीं मानते।” क्या यही सबसे बड़ा आश्चर्य नहीं है। यक्ष प्रश्नों जैसी कथाएं लोक प्रबोधन के लिए ही लिखी गई थीं। सरल और सुबोध भाषा में ही लिखी गई थीं। ज्वर साधारण बीमारी है। अथर्ववेद के ऋषि अनेक प्रकार के ज्वरों से परिचित थे। ज्वर अकेला नहीं होता। इसका अपना प्रिय परिवार भी साथ आता है। कहते हैं “ज्वर अपने भाई कफ के साथ आता है। खांसी उसकी बहिन है। वह बहिन के साथ आता है। इसका भतीजा यक्ष्मा (टीबी) है।” (5.22.12) सब आगे पीछे आते हैं। मनुष्य आयुर्विज्ञान के व्रतों का पालन करे तो बच सकता है। रोगी से दूर रहने पर रोग संक्रमण से जीवन का बचाया जा सकता है।प्राण जीवन है। श्वसन तंत्र के रोग प्राणहीन करते हैं। प्राणों की रक्षा के लिए प्राणायाम की शोध हुई थी। प्राणायाम से स्वस्थ्य शरीर में रोग नहीं आते। फिर भी रोगाणुओं को पराजित करने की तमाम कारगर औषधियां खोजी गई थी। अथर्ववेद (19.37.1) में कहते हैं, यक्ष्मा सहित, “उस मनुष्य को कोई रोग पीड़ित नहीं करता, दूसरों के द्वारा दिए गए अभिशाप (संक्रमण) उसे स्पर्श तक नहीं करते, जिसके पास औषधरूप गुग्गुल की श्रेष्ठ सुगंधि संव्याप्त रहती है।” (आचार्य श्रीराम शर्मा का अनुवाद) गुग्गुल साधारण वनस्पति है। आधुनिक आयुर्विज्ञानी इसे रोग निरोधक क्षमता बढ़ाने वाली प्रमुख औषधि बताते हैं। अथर्ववेद में इस औषधि का अनेकशः उल्लेख हुआ है। ऊपर के मंत्र के अनुसार गुग्गुल के प्रयोगकर्ताओं के पास कोई भी रोग नहीं आते। एक अन्य मंत्र (4.37.3) में भी गुग्गुल को अन्य औषधियों पीलु या भल, व जटमांसी को महत्वपूर्ण औषधि बताया गया है। रोग निरोधक शक्ति की चर्चा बहुत होती है लेकिन अथर्ववेद के आयुर्विज्ञान की उपेक्षा होती है। ब्लूमफील्ड जैसे कुछेक विद्वानों ने अथर्ववेद को जादू-टोने वाला वेद बताया। विदेशी विद्वानों को सही मानने वाले भारतवासियों ने भी उन्हीं की राह पर वैदिक शोध की उपेक्षा की। नई पीढ़ी ने वेदों के वैज्ञानिक यथार्थवाद पर ध्यान नहीं दिया। उन्होंने प्राचीन साहित्य को आध्यात्मिक समझा। अथर्ववेद के भरे-पूरे चिकित्सा विज्ञान की उपेक्षा जारी है। अथर्ववेद में वर्णित औषधियां प्रभावशाली हैं। इस वेद के प्रमुख रचनाकार द्रष्टा अथर्वा हैं। ऋषि जानते हैं कि “उसके पहले अथर्वा, कश्यप व अगस्त्य ने इन औषधियों से तमाम रोगाणुओं को नष्ट किया था।” (4.37.1) भारत में अथर्ववेद व इसके पहले भी चिकित्सा विज्ञान की सुदीर्घ परंपरा थी। अथर्ववेद में अनेक रोगों व उनके लक्षणों का विस्तार से वर्णन किया गया है। साथ में तत्सम्बंधी रोगों की तमाम औषधियां भी बताई गई हैं। एक मंत्र (6.127.3) में हृदय रोग का उल्लेख हैं, “जो रोग फैलकर हाथ, पैर, आंख, कान, नाक तक पहुंच जाते हैं, उन्हें और विद्रध नामक व्रण व हृदयरोग-हृदयामयम् को औषधियों द्वारा दूर करता हूं।” ब्लूमफील्ड ने भी हृदयामयम का अनुवाद “पेन इन दि हार्ट” किया है। अथर्ववेद के रचनाकाल में हृदय रोग की जानकारी बड़ी बात है। औषधियां प्राणरक्षक हैं। प्राण से ही औषधियां लहराती हैं। एक सुंदर सूक्त (11.6) में प्राण को सबका स्वामी बताया गया है। कहते हैं, “हे प्राण! औषधियों के समक्ष गर्जन करते हैं, तब औषधियां शक्तिशाली होती हैं, विस्तार को प्राप्त होती हैं। प्राण औषधियों के हित में बादल रूप गर्जन करता है। औषधियों पर जल वर्षा करता है। औषधियां प्रसन्न मन कहती हैं- आपने हमारी आयु बढ़ाई है। सुगंधित बनाया है। (वही 1, 2, 3, 4 व 6) प्राण ही रोग व मृत्यु के कारण हैं। (वही 9 व 11) प्राण की स्तुति करते हैं, “आप वर्षा द्वारा तृप्ति देते हैं। तब अथर्वा द्वारा रोपित, अंगिरावंशजों व मनुष्यों द्वारा निर्मित औषधियां प्रकट होती हैं।” (वही 16) प्राण से औषधियां हैं। औषधियों से प्राण रक्षा है। इनके सदुपयोग का विधान है। संक्रमण से बचने-बचाने का आचार हम सबका व्यवहार होना चाहिए। वैद्य लोकहित में चिकित्सा करते हैं। चरक संहिता में धनलोभी वैद्य की भर्त्सना है। प्राचीन चिकित्सा विज्ञान या आयुर्विज्ञान की आधुनिक चिकित्सा विज्ञान से तुलना बेमतलब है। दोनों वैज्ञानिक दृष्टिकोणों को एकसाथ मिलाने से लोककल्याण की संभावना ज्यादा है। औषधि विज्ञान के विकास के कई चरण हैं। पहला ऋग्वेद के रचनाकाल से भी पूर्व है। ऋग्वेद में उल्लेख है कि “देवों पूर्वजों को तीन युग पहले औषधियों की जानकारी थी। ऋग्वैदिक काल दूसरा चरण है। इस काल में चिकित्सा विज्ञान का खासा विकास हो चुका था। अथर्ववेद तीसरा चरण है। इसमें औषधि विज्ञान का समुचित विकास हुआ। चरक संहिता आयुर्वेद का प्रतिष्ठित ग्रंथ है। आयुर्वेद चिकित्सा विज्ञान से भरा-पूरा है लेकिन जोर सदाचार पर है। औषधि प्रयोग ही पर्याप्त नहीं है। फिर सभी रोगों की औषधियां आधुनिक काल में भी नहीं खोजी जा सकी हैं। कोरोना भी ऐसी ही महामारी है। बचाव ही विकल्प है। स्वयं को अलग रखना ही बचाव है, बावजूद इसके अनेक लोग परिपूर्ण बंदी में भी घर से बाहर टहलने के आत्मघात पर आमादा हैं। (लेखक उत्तर प्रदेश विधानसभा के अध्यक्ष हैं।)

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