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केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान के बेटे कार्तिकेय सिंह चौहान ने खेल प्रशासन में कदम रखा है। उन्हें मध्य प्रदेश वॉलीबॉल संघ का निर्विरोध अध्यक्ष चुना गया है। रविवार को भोपाल में हुए चुनाव में प्रदेश के 33 जिला संघों के प्रतिनिधि शामिल हुए। कार्तिकेय को 2026 से 2030 तक के कार्यकाल के लिए यह जिम्मेदारी सौंपी गई है। अध्यक्ष बनने के बाद उन्होंने प्रदेश में वॉलीबॉल के विकास और खिलाड़ियों को बेहतर अवसर उपलब्ध कराने की बात कही। कार्तिकेय सिंह चौहान ने कहा कि प्रदेश में वॉलीबॉल को बढ़ावा देने के लिए मध्यप्रदेश वॉलीबॉल खेल नीति 2026 का प्रारूप जल्द तैयार किया जाएगा। इसके तहत हर जिले में खेल के विकास के लिए रोडमैप बनाया जाएगा। उन्होंने नई प्रतिभाओं को आगे लाने, खिलाड़ियों को बेहतर सुविधाएं देने और जिला संघों को आर्थिक सहायता उपलब्ध कराने पर जोर दिया। उनका लक्ष्य वॉलीबॉल को प्रदेश के गांवों और युवाओं तक पहुंचाना है। उन्होंने अध्यक्ष पद की जिम्मेदारी सौंपने के लिए संघ के पदाधिकारियों और जिला प्रतिनिधियों का आभार भी जताया। चुनाव अधिकारी एडवोकेट दिलीप मालवीय ने चुनाव प्रक्रिया पूरी कराई। नई कार्यकारिणी में अनवर खान को वरिष्ठ उपाध्यक्ष, विधायक आशीष शर्मा और राम पांडे को उपाध्यक्ष, सतीश जोशी को महासचिव और विशाल शर्मा को कोषाध्यक्ष चुना गया। वहीं, डीआर सिंह और राजेश शुक्ला संयुक्त सचिव बनाए गए हैं। बैठक में विभिन्न आयु वर्गों की राज्य स्तरीय वॉलीबॉल चैंपियनशिप आयोजित कराने को भी मंजूरी दी गई। अब नई कार्यकारिणी के सामने प्रदेश में खेल का विस्तार करने, जिला संघों को मजबूत बनाने और उभरते खिलाड़ियों को बेहतर मंच देने की जिम्मेदारी होगी।
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दिल्ली में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार और मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को लेकर जारी विरोध प्रदर्शन के बीच इंडियन यूथ कांग्रेस ने हिरासत में लिए गए लोगों की मदद के लिए पहल की है। संगठन ने प्रदर्शन के दौरान पुलिस की हिरासत में पहुंचे लोगों और कथित तौर पर धमकियों का सामना कर रहे लोगों को कानूनी सहायता उपलब्ध कराने के लिए हेल्पलाइन नंबर जारी किया है। शनिवार को दिल्ली के अलग-अलग इलाकों में प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिए जाने की खबरों के बाद यह कदम उठाया गया। संगठन का उद्देश्य उन लोगों तक कानूनी मदद पहुंचाना है, जो प्रदर्शन में शामिल होने के लिए दिल्ली पहुंचे थे और कार्रवाई के बाद सहायता की जरूरत महसूस कर रहे हैं। कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के नेतृत्व में आयोजित प्रदर्शन में शामिल होने के लिए देश के विभिन्न हिस्सों से लोग दिल्ली पहुंचे थे। प्रदर्शनकारियों को जंतर-मंतर तक पहुंचने से रोकने के लिए राजधानी के कई इलाकों में पुलिस ने बैरिकेडिंग की और सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी। रिपोर्ट के मुताबिक, दिल्ली पुलिस ने अलग-अलग स्थानों से करीब 1,500 लोगों को हिरासत में लिया। प्रदर्शन को देखते हुए दिल्ली और राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (NCR) में सुरक्षा बलों की तैनाती बढ़ाई गई और सीमावर्ती इलाकों में भी निगरानी तेज की गई। पुलिस की कार्रवाई के बीच हिरासत में लिए गए लोगों की कानूनी सहायता का मुद्दा प्रमुखता से सामने आया है। इंडियन यूथ कांग्रेस की ओर से जारी हेल्पलाइन का उद्देश्य हिरासत में लिए गए प्रदर्शनकारियों को कानूनी सहायता उपलब्ध कराने के साथ-साथ जरूरतमंद लोगों को मदद का रास्ता देना है। संगठन ने उन लोगों को भी सहायता देने की बात कही है, जिन्हें प्रदर्शन के दौरान कथित तौर पर धमकियां मिल रही हैं। दूसरी ओर, प्रदर्शन को लेकर दिल्ली में सुरक्षा इंतजाम कड़े बने हुए हैं और पुलिस की ओर से विभिन्न स्थानों पर निगरानी की जा रही है। ऐसे में हेल्पलाइन शुरू किए जाने को प्रदर्शनकारियों की कानूनी मदद के लिए उठाए गए कदम के तौर पर देखा जा रहा है।
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अखिलेश यादव ने प्रदर्शन को रोकने की कोशिशों और पुलिस की भारी तैनाती को लेकर केंद्र सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में हर व्यक्ति को अपनी बात रखने और विरोध दर्ज कराने का अधिकार है। किसी भी सरकार को यह अधिकार छीनने की कोशिश नहीं करनी चाहिए। अखिलेश यादव ने तंज कसते हुए कहा कि जंतर-मंतर पर प्रदर्शन रोक देने से विपक्ष की आवाज बंद नहीं होगी। उन्होंने कहा कि लोग जहां भी बैठकर अपनी बात रखेंगे, वही जगह उनके लिए जंतर-मंतर बन जाएगी। उनके मुताबिक, प्रदर्शन की जगह बदलने से आंदोलन का उद्देश्य खत्म नहीं हो जाता। अखिलेश यादव ने प्रदर्शन के दौरान पुलिस की भारी मौजूदगी पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि कमजोर लोग पुलिस को आगे करते हैं और आरोप लगाया कि सरकार विरोध की आवाज को दबाने के लिए पुलिस का सहारा ले रही है। सपा प्रमुख ने कहा कि अगर लोकतंत्र में लोगों को अपनी समस्याएं उठाने और सरकार से सवाल पूछने की आजादी नहीं होगी, तो लोकतांत्रिक व्यवस्था का उद्देश्य ही प्रभावित होगा। उन्होंने विपक्ष के संघर्ष को लोकतंत्र बचाने की लड़ाई बताते हुए कहा कि सरकार को प्रदर्शनकारियों की बात सुननी चाहिए और उनकी शिकायतों पर ध्यान देना चाहिए। अखिलेश यादव ने भाजपा को सत्ता से बाहर करने की बात भी कही। उनके इन बयानों से मतदाता सूची के मुद्दे पर केंद्र सरकार और विपक्ष के बीच राजनीतिक टकराव और तेज होने के संकेत मिल रहे हैं। दरअसल, पूरा विवाद मतदाता सूची की जांच प्रक्रिया के दौरान कथित तौर पर बड़ी संख्या में नाम हटाए जाने के आरोपों से जुड़ा है। विपक्षी दलों का दावा है कि इस प्रक्रिया में मतदाताओं के अधिकार प्रभावित हो सकते हैं। इसी को लेकर इंडिया गठबंधन के नेता चुनाव आयोग से जवाब मांग रहे हैं और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग कर रहे हैं। विपक्ष इस मामले को लेकर राजनीतिक विरोध के साथ कानूनी रास्ता अपनाने की बात भी कर रहा है। वहीं, अखिलेश यादव ने साफ किया कि प्रदर्शन की जगह या परिस्थितियां बदलने से विपक्ष का संघर्ष नहीं रुकेगा। दूसरी ओर, मतदाता सूची में गड़बड़ी और नाम हटाए जाने से जुड़े आरोपों की वास्तविक स्थिति स्पष्ट करने के लिए संबंधित पक्षों का जवाब और उपलब्ध तथ्यों की जांच भी जरूरी है।
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प्रतिशत ओबीसी आरक्षण को लेकर एक बार फिर हलचल तेज हो गई है। हाईकोर्ट द्वारा आरक्षण से जुड़े कानून को रद्द किए जाने के बाद मोहन सरकार अब आगे की कानूनी रणनीति तैयार करने में जुटी है। सूत्रों के मुताबिक, सरकार सुप्रीम कोर्ट में अपील करने के विकल्प पर विचार कर रही है। हालांकि, इस संबंध में अभी अंतिम फैसला नहीं हुआ है। सरकार सभी पहलुओं पर कानूनी सलाह ले रही है और जरूरत पड़ने पर सर्वदलीय बैठक बुलाकर विपक्ष समेत अन्य पक्षों से चर्चा भी की जा सकती है। इसके साथ ही उन राज्यों की आरक्षण व्यवस्था का अध्ययन करने पर भी विचार हो रहा है, जहां ओबीसी वर्ग को 27 प्रतिशत या उससे अधिक आरक्षण दिया जा रहा है। आरक्षण के मुद्दे पर आगे बढ़ने के लिए सरकार के सामने कानूनी रास्ता अपनाने और जातिगत जनगणना के आंकड़ों के आधार पर नए सिरे से रणनीति बनाने जैसे विकल्प हैं। कानूनी जानकारों के अनुसार, कुछ राज्यों में 50 प्रतिशत से अधिक आरक्षण की व्यवस्था है, जिसके समर्थन में वहां की सरकारों ने विशेष परिस्थितियों से जुड़े तर्क दिए हैं। मध्य प्रदेश में 27 प्रतिशत ओबीसी आरक्षण का मामला वर्ष 2019 से कानूनी विवाद में है। तत्कालीन कमलनाथ सरकार ने ओबीसी आरक्षण को 14 प्रतिशत से बढ़ाकर 27 प्रतिशत करने के लिए कानून बनाया था, लेकिन इसके खिलाफ अदालतों में याचिकाएं दायर हुईं। अब हाईकोर्ट के फैसले के बाद सरकार के सामने इस मामले में संवैधानिक और कानूनी विकल्प तलाशने की चुनौती है। मध्य प्रदेश में 27 ओबीसी आरक्षण मध्य प्रदेश में एक बड़ा सामाजिक और राजनीतिक मुद्दा भी है। विपक्षी कांग्रेस और ओबीसी संगठनों ने पहले ही सुप्रीम कोर्ट जाने की बात कही है, जबकि आने वाले चुनावों को देखते हुए इस मुद्दे पर राजनीतिक गतिविधियां तेज होने की संभावना है। 9 अक्टूबर को जबलपुर हाईकोर्ट ने 27 प्रतिशत आरक्षण की मांग को खारिज करते हुए 13 प्रतिशत होल्ड पदों पर तीन महीने के भीतर अनारक्षित वर्ग के अभ्यर्थियों को नियुक्ति देने का निर्देश दिया था। कोर्ट ने पहले से 27 प्रतिशत आरक्षण के आधार पर हो चुकी नियुक्तियों को बरकरार रखने और आगे की भर्ती प्रक्रिया में पदों के समायोजन से जुड़े निर्देश भी दिए। अब सबकी नजर सरकार के अगले कदम पर है कि वह सुप्रीम कोर्ट का रुख करती है या आरक्षण के मुद्दे पर कोई नई कानूनी रणनीति अपनाती है।
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दिल्ली में विरोध प्रदर्शनों और राजनीतिक हलचल के बीच सोशल मीडिया पर फैल रही अफवाहों और भ्रामक जानकारी को लेकर पुलिस ने सख्ती बढ़ा दी है। दिल्ली पुलिस के सूत्रों के मुताबिक, लोगों के बीच तनाव बढ़ने की आशंका वाले करीब 300 सोशल मीडिया पोस्ट हटाए गए हैं। पुलिस अलग-अलग सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर लगातार निगरानी कर रही है, ताकि गलत खबरों और भड़काऊ सामग्री को फैलने से रोका जा सके। पुलिस ने लोगों से अपील की है कि किसी भी खबर, तस्वीर या वीडियो को बिना पुष्टि किए सोशल मीडिया पर साझा न करें। पुलिस के मुताबिक, कुछ मामलों में पुराने वीडियो, दूसरे राज्यों की घटनाओं और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) से बनाए गए वीडियो को इस तरह साझा किया जा रहा है, जिससे लोगों के बीच भ्रम या तनाव पैदा हो सकता है। ऐसे कंटेंट को वर्तमान घटना से जोड़कर पेश करने से गलतफहमी फैलने की आशंका रहती है। पुलिस ने चेतावनी दी है कि जानबूझकर गलत या अपुष्ट जानकारी फैलाने वालों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जा सकती है। इसलिए सोशल मीडिया पर किसी भी पोस्ट को साझा करने से पहले उसकी तारीख, स्थान और विश्वसनीय स्रोत की जांच करना जरूरी है। दिल्ली में चुनाव आयोग और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार से जुड़े मुद्दों तथा मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को लेकर विपक्षी दलों के प्रदर्शन के बीच सुरक्षा व्यवस्था कड़ी की गई है। 12 अक्टूबर को विपक्षी नेताओं के सुप्रीम कोर्ट की ओर मार्च के कार्यक्रम को देखते हुए राजधानी के कई इलाकों में पुलिस की निगरानी बढ़ाई गई। ऐसे माहौल में अफवाहों और भ्रामक सूचनाओं को कानून-व्यवस्था के लिए चुनौती माना जा रहा है। पुलिस का कहना है कि सोशल मीडिया पर जिम्मेदारी से जानकारी साझा करना जरूरी है, ताकि किसी भी तरह की गलतफहमी या तनाव को बढ़ने से रोका जा सके।
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भोपाल में प्रभात चौराहे से मिसरोद तक का करीब 12 किलोमीटर लंबा मार्ग लगातार ऊंचाई और ढलान के कारण वाहन चालकों के लिए रोलर-कोस्टर जैसा अनुभव देने जा रहा है। इस रास्ते पर पहले से बने सुभाष ब्रिज, डॉ. अंबेडकर ब्रिज और वीर सावरकर ब्रिज के बाद अब बरकतुल्लाह विश्वविद्यालय (बीयू) से मिसरोद तक पांच किलोमीटर लंबी नई एलिवेटेड लेन बनाने की तैयारी है। इस परियोजना को केंद्र से मंजूरी मिल चुकी है और नए साल में निर्माण कार्य शुरू होने की संभावना है। इसके बनने के बाद इस मार्ग पर चार बड़े ब्रिज हो जाएंगे। हालांकि, अलग-अलग हिस्सों में बने इन ब्रिजों के कारण वाहन चालकों को बार-बार ऊपर चढ़ना और नीचे उतरना पड़ता है, जिससे यातायात की गति प्रभावित होती है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि इन सभी ब्रिजों को एकीकृत योजना के तहत आपस में जोड़ दिया जाए, तो इस मार्ग को सिग्नल-फ्री और अधिक सुगम कॉरिडोर बनाया जा सकता है। स्ट्रक्चरल इंजीनियर अब्दुल मजीद के अनुसार, सुभाष ब्रिज से मिसरोद तक का हिस्सा भोपाल की व्यस्त यातायात लाइफलाइन बन रहा है। फिलहाल अलग-अलग एजेंसियों की ओर से बनाए गए ब्रिजों के बीच सड़क पर उतरने वाले वाहनों का सामना स्थानीय ट्रैफिक से होता है। गणेश मंदिर और गायत्री मंदिर के आसपास यह स्थिति यातायात के प्रवाह को प्रभावित कर सकती है। करीब 12 किलोमीटर के इस मार्ग में प्रस्तावित और मौजूदा ब्रिजों की कुल लंबाई लगभग 9.70 किलोमीटर बताई गई है। ऐसे में ब्रिजों के बीच बेहतर कनेक्टिविटी विकसित करना जरूरी माना जा रहा है। स्ट्रक्चरल इंजीनियर शैलेंद्र बागरे के मुताबिक, बीयू से मिसरोद तक प्रस्तावित एलिवेटेड लेन को वीर सावरकर ब्रिज के अंतिम हिस्से से सीधे जोड़ने के लिए निर्बाध रैंप बनाया जा सकता है। इससे वाहनों को बार-बार मुख्य सड़क पर उतरने की जरूरत कम होगी। इसके अलावा, जहां एक ब्रिज समाप्त होकर दूसरा शुरू होता है, वहां 100 से 150 मीटर लंबी अलग बफर लेन बनाने का सुझाव दिया गया है, ताकि स्थानीय और हाईवे ट्रैफिक के बीच टकराव की स्थिति न बने। विशेषज्ञों ने पूरे मार्ग के रखरखाव और ट्रैफिक प्रबंधन की जिम्मेदारी एक ही एजेंसी को देने की जरूरत भी बताई है। इन उपायों पर अमल होने से इस व्यस्त मार्ग पर यातायात को अधिक व्यवस्थित और सुचारु बनाने में मदद मिल सकती है।
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मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव सोमवार को मंडला जिले के टटारी दौरे पर थे। इसी दौरान टटारी हेलीपैड जाते समय उन्होंने एक निजी पब्लिक स्कूल में अपना काफिला रुकवाया और अचानक बच्चों के बीच पहुंच गए। उस समय स्कूल में सुबह की प्रार्थना सभा चल रही थी। मुख्यमंत्री को अपने बीच देखकर बच्चे और शिक्षक खुश हो गए। डॉ. यादव ने विद्यार्थियों से आत्मीयता के साथ बातचीत की, उनके नाम पूछे और जाना कि वे किस कक्षा में पढ़ते हैं। उन्होंने बच्चों से उनकी पढ़ाई के बारे में भी पूछा और स्कूल में चल रही गतिविधियों को समझा। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने बच्चों को मन लगाकर पढ़ाई करने और जीवन में आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया। उनका बच्चों के साथ संवाद सहज और अपनत्व भरा रहा। अचानक मुख्यमंत्री को अपने बीच पाकर विद्यार्थियों में उत्साह दिखाई दिया। बातचीत के दौरान मुख्यमंत्री ने बच्चों को दुलारते हुए पढ़ाई-लिखाई पर ध्यान देने की सीख दी। इस दौरान स्कूल परिसर में खुशी का माहौल रहा और बच्चों के लिए मुख्यमंत्री से मुलाकात एक खास अनुभव बन गई। मंडला दौरे के दौरान मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव कान्हा टाइगर रिजर्व भी पहुंचे, जहां उन्होंने जंगल सफारी की और बाघ के दीदार किए। इसके अलावा उन्होंने एसडीओपी से पदोन्नत होकर अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक बने एक अधिकारी को बधाई दी। मुख्यमंत्री ने अधिकारी की वर्दी पर रैंक फ्लैप लगाकर उन्हें नई जिम्मेदारी के लिए शुभकामनाएं दीं। इस तरह मुख्यमंत्री के दौरे में स्कूली बच्चों से संवाद, कान्हा में जंगल सफारी और पुलिस अधिकारी के पदोन्नति समारोह से जुड़े पल भी शामिल रहे।
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शारदीय नवरात्रि के स्वागत के लिए भोपाल में तैयारियां अंतिम चरण में पहुंच गई हैं। इस बार शहर के अलग-अलग इलाकों में दुर्गा पंडालों को देश के प्रसिद्ध मंदिरों और शक्तिपीठों के स्वरूप में सजाया जा रहा है। बरखेड़ा पठानी में 25 मीटर तक ऊंची पहाड़ी संरचनाएं तैयार की जा रही हैं, जबकि अवधपुरी में करीब डेढ़ एकड़ क्षेत्र में हिंगलाज मंदिर की झांकी बनाई जा रही है। इन पंडालों में कृत्रिम पहाड़, गुफाएं और आकर्षक रोशनी के जरिए श्रद्धालुओं को तीर्थस्थलों जैसा अनुभव देने की तैयारी है। बरखेड़ा पठानी के एसएन सेक्टर ग्राउंड में जय मां भवानी धर्म जागृति मंच की ओर से करीब 1.35 करोड़ रुपये की लागत से भव्य झांकी तैयार की जा रही है। इसमें नेपाल के पशुपतिनाथ मंदिर और मुक्तिनाथ धाम के साथ वैष्णो देवी की गुफा का स्वरूप भी बनाया जा रहा है। श्रद्धालुओं को यहां केदारनाथ, बद्रीनाथ, गंगोत्री और यमुनोत्री के साथ बांग्लादेश के ढाकेश्वरी शक्तिपीठ की झलक भी देखने को मिलेगी। वहीं, अवधपुरी में बलूचिस्तान स्थित हिंगलाज मंदिर की प्रतिकृति तैयार की जा रही है, जिस पर लगभग 60 लाख रुपये खर्च किए जा रहे हैं। दूसरी ओर, विट्टल मार्केट हाट बाजार में सोमनाथ मंदिर के स्वरूप वाली झांकी बनाई जा रही है। जय मां वैष्णो दुर्गा उत्सव एवं श्री राम रसोई समिति के इस 24वें आयोजन पर करीब 1.30 करोड़ रुपये खर्च किए जा रहे हैं। सोमनाथ मंदिर की झांकी को तैयार करने के लिए कोलकाता से आए 42 कारीगर पिछले तीन महीने से काम कर रहे हैं। आयोजन समिति के अनुसार, मंदिर के एक हजार वर्ष पूरे होने के उपलक्ष्य में इसकी धार्मिक महत्ता और ऐतिहासिक विरासत को दर्शाने की कोशिश की जा रही है। झांकी में करीब 45 से 48 मूर्तियां लगाई जाएंगी, जो श्रद्धालुओं के आकर्षण का केंद्र रहेंगी। नवरात्रि के दौरान भोपाल में तैयार हो रही इन झांकियों के जरिए भक्तों को एक ही शहर में कई प्रसिद्ध धार्मिक स्थलों के स्वरूप देखने का अवसर मिलेगा
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अभिनेत्री और सांसद कंगना रनोट ने दिल्ली में कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के प्रदर्शन को लेकर तीखी प्रतिक्रिया दी है। मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर जंतर-मंतर पर हुए प्रदर्शन के बाद कंगना ने प्रदर्शन के नेतृत्व पर निशाना साधते हुए उन्हें ‘देशद्रोही और आतंकी ताकतें’ करार दिया। अयोध्या में रामलला के दर्शन के लिए जाते समय लखनऊ में उन्होंने कहा कि देश को अस्थिर करने की साजिश रची जा रही है और अब ऐसी ताकतों का सच सामने आ रहा है। कंगना के मुताबिक, लोग इन गतिविधियों को पहचानने लगे हैं और सवाल पूछ रहे हैं। उन्होंने यह भी कहा कि देश की सुरक्षा के लिए एजेंसियां काम कर रही हैं, लेकिन आम नागरिकों को किसी तरह की परेशानी नहीं होनी चाहिए। कंगना रनोट ने कहा कि अब केवल पुलिस ही नहीं, बल्कि आम जनता भी ऐसे लोगों से सवाल करेगी। उनका बयान उस समय आया है, जब दिल्ली में मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे और मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को लेकर राजनीतिक विरोध तेज है। प्रदर्शन को देखते हुए दिल्ली पुलिस ने बड़े स्तर पर सुरक्षा व्यवस्था की थी। रिपोर्ट के मुताबिक, शनिवार को करीब 7 हजार लोगों को हिरासत में लिया गया, जिनमें CJP के नेता, छात्र, वकील और कुछ पूर्व मुख्यमंत्री भी शामिल थे। इनमें से ज्यादातर लोगों को शाम तक छोड़ दिया गया, जबकि जंतर-मंतर और दिल्ली की सीमाओं पर सुरक्षा व्यवस्था और बैरिकेडिंग जारी रही। इससे पहले कंगना रनोट ने भारत में स्टारलिंक को लाइसेंस मिलने में देरी के मुद्दे पर भी प्रतिक्रिया दी थी। उन्होंने अभिनेता और राज्यसभा सांसद कमल हासन के उस बयान का समर्थन किया, जिसमें उन्होंने कहा था कि भारत की नीतियां देश की जनता तय करेगी, कोई अरबपति नहीं। कंगना ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर हासन की टिप्पणी की तारीफ करते हुए इसे तीखा और सटीक बताया। दरअसल, एलन मस्क ने भारत में स्टारलिंक की सेवा को मंजूरी मिलने में देरी पर सवाल उठाए थे और कहा था कि कंपनी कई देशों में सेवाएं देने की अनुमति हासिल कर चुकी है। इस मुद्दे पर भी भारत की नीतियों और विदेशी कंपनियों को लाइसेंस देने की प्रक्रिया को लेकर बहस हुई थी।
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अभिनेत्री और भाजपा सांसद कंगना रनोट ने स्टारलिंक को भारत में लाइसेंस मिलने में हो रही देरी को लेकर जारी बहस पर प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने राज्यसभा सांसद कमल हासन के बयान का समर्थन करते हुए सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर लिखा, “ओह! यह तो चुभ गया होगा।” कंगना ने हासन की टिप्पणी को तीखा और व्यंग्यात्मक बताया। दरअसल, कमल हासन ने अपने बयान में कहा था कि भारत एक स्वतंत्र लोकतांत्रिक देश है और अपनी नीतियां तय करने का अधिकार भारतीय जनता के पास है, किसी अरबपति के पास नहीं। उनका यह बयान स्टारलिंक के संस्थापक इलॉन मस्क की ओर से भारत में कंपनी को मंजूरी मिलने में देरी पर सवाल उठाए जाने के बाद आया। इलॉन मस्क ने सोशल मीडिया पर दावा किया था कि स्टारलिंक को दुनिया के 165 से अधिक देशों में सेवाएं देने की मंजूरी मिल चुकी है, लेकिन भारत में लाइसेंस मिलने की प्रक्रिया में देरी हो रही है। उन्होंने यह सवाल भी उठाया कि क्या बड़े कारोबारी समूह कंपनी की भारत में एंट्री में बाधा बन रहे हैं। इससे पहले कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने भी मस्क की पोस्ट पर प्रतिक्रिया दी थी, जिस पर मस्क ने स्थिति को परेशान करने वाला बताया। दूसरी ओर, भारत सरकार ने कारोबारियों के हितों के आधार पर भेदभाव किए जाने के आरोपों को खारिज किया है। सरकार का कहना है कि सैटेलाइट संचार सेवाओं के लिए सुरक्षा से जुड़े नियम सभी कंपनियों पर समान रूप से लागू होते हैं। भारत में अपनी सेवाएं शुरू करने की तैयारी के तहत स्टारलिंक ने कथित तौर पर 20 गेटवे साइट्स स्थापित की हैं, जहां एंटीना के जरिए सैटेलाइट नेटवर्क को जमीन पर मौजूद इंटरनेट व्यवस्था से जोड़ा जाना है। कंपनी ने रिलायंस जियो और भारती एयरटेल के साथ शुरुआती समझौता ज्ञापन भी किए हैं। इसके अलावा, महाराष्ट्र, गुजरात और मेघालय सरकारों के साथ लेटर ऑफ इंटेंट पर हस्ताक्षर किए जाने की जानकारी सामने आई है। फिलहाल, भारत में सैटेलाइट इंटरनेट सेवाएं शुरू करने के लिए सुरक्षा समीक्षा और सरकारी मंजूरी की प्रक्रिया महत्वपूर्ण है। आवश्यक अनुमति और अन्य औपचारिकताएं पूरी होने के बाद ही कंपनी अपनी सेवाएं शुरू कर सकेगी।
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अभिनेत्री और सांसद कंगना रनोट ने दिल्ली में कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के प्रदर्शन को लेकर तीखी प्रतिक्रिया दी है। मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर जंतर-मंतर पर हुए प्रदर्शन के बाद कंगना ने प्रदर्शन के नेतृत्व पर निशाना साधते हुए उन्हें ‘देशद्रोही और आतंकी ताकतें’ करार दिया। अयोध्या में रामलला के दर्शन के लिए जाते समय लखनऊ में उन्होंने कहा कि देश को अस्थिर करने की साजिश रची जा रही है और अब ऐसी ताकतों का सच सामने आ रहा है। कंगना के मुताबिक, लोग इन गतिविधियों को पहचानने लगे हैं और सवाल पूछ रहे हैं। उन्होंने यह भी कहा कि देश की सुरक्षा के लिए एजेंसियां काम कर रही हैं, लेकिन आम नागरिकों को किसी तरह की परेशानी नहीं होनी चाहिए। कंगना रनोट ने कहा कि अब केवल पुलिस ही नहीं, बल्कि आम जनता भी ऐसे लोगों से सवाल करेगी। उनका बयान उस समय आया है, जब दिल्ली में मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे और मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को लेकर राजनीतिक विरोध तेज है। प्रदर्शन को देखते हुए दिल्ली पुलिस ने बड़े स्तर पर सुरक्षा व्यवस्था की थी। रिपोर्ट के मुताबिक, शनिवार को करीब 7 हजार लोगों को हिरासत में लिया गया, जिनमें CJP के नेता, छात्र, वकील और कुछ पूर्व मुख्यमंत्री भी शामिल थे। इनमें से ज्यादातर लोगों को शाम तक छोड़ दिया गया, जबकि जंतर-मंतर और दिल्ली की सीमाओं पर सुरक्षा व्यवस्था और बैरिकेडिंग जारी रही। इससे पहले कंगना रनोट ने भारत में स्टारलिंक को लाइसेंस मिलने में देरी के मुद्दे पर भी प्रतिक्रिया दी थी। उन्होंने अभिनेता और राज्यसभा सांसद कमल हासन के उस बयान का समर्थन किया, जिसमें उन्होंने कहा था कि भारत की नीतियां देश की जनता तय करेगी, कोई अरबपति नहीं। कंगना ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर हासन की टिप्पणी की तारीफ करते हुए इसे तीखा और सटीक बताया। दरअसल, एलन मस्क ने भारत में स्टारलिंक की सेवा को मंजूरी मिलने में देरी पर सवाल उठाए थे और कहा था कि कंपनी कई देशों में सेवाएं देने की अनुमति हासिल कर चुकी है। इस मुद्दे पर भी भारत की नीतियों और विदेशी कंपनियों को लाइसेंस देने की प्रक्रिया को लेकर बहस हुई थी।
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मध्य प्रदेश में किसानों को आधुनिक खेती से जोड़ने और कृषि को अधिक लाभकारी बनाने के उद्देश्य से शाजापुर की कृषि उपज मंडी में ‘बलराम कृषि महोत्सव’ आयोजित किया गया। ‘कृषक कल्याण वर्ष-2026’ के तहत हुए इस कार्यक्रम में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव वर्चुअली शामिल हुए और किसानों से सीधा संवाद किया। कार्यक्रम में जिले के जनप्रतिनिधियों, विभिन्न विभागों के अधिकारियों और बड़ी संख्या में किसानों ने भाग लिया। इस दौरान आधुनिक कृषि तकनीकों, उन्नत बीजों, नवीन कृषि यंत्रों और खेती से जुड़ी नई पद्धतियों को अपनाने पर जोर दिया गया। मुख्यमंत्री ने परंपरागत कृषि अनुभव के साथ आधुनिक तकनीक के इस्तेमाल को खेती की उत्पादकता बढ़ाने और किसानों की आय में सुधार के लिए महत्वपूर्ण बताया। महोत्सव में कृषि और उससे जुड़े विभिन्न विभागों की ओर से प्रदर्शनी लगाई गई। निजी कृषि आदान कंपनियों और कृषि उपकरण निर्माताओं ने भी अपने स्टॉल के माध्यम से उन्नत मशीनों, बीज, उर्वरक, जैविक उत्पादों और अन्य कृषि नवाचारों की जानकारी दी। किसानों को प्राकृतिक एवं जैविक खेती, फसल विविधीकरण, जल संरक्षण और कृषि यंत्रीकरण जैसे विषयों पर विशेषज्ञों ने मार्गदर्शन दिया। इसके साथ ही शासन की विभिन्न किसान हितैषी योजनाओं की जानकारी भी साझा की गई, ताकि किसान उपलब्ध सुविधाओं का लाभ उठाकर खेती को अधिक टिकाऊ और लाभकारी बना सकें। कार्यक्रम में किसानों की जिज्ञासाओं का समाधान करने के लिए भी व्यवस्था की गई। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कार्यक्रम के दौरान किसानों के साथ-साथ मेधावी विद्यार्थियों से भी सीधा संवाद किया। इसके लिए आयोजन स्थल पर टू-वे कम्युनिकेशन की व्यवस्था की गई, जिससे मुख्यमंत्री ऑनलाइन माध्यम से प्रतिभागियों से बातचीत कर सके। कार्यक्रम का उद्देश्य किसानों तक नई तकनीकों और कृषि नवाचारों की जानकारी पहुंचाना तथा उन्हें खेती में आधुनिक तरीकों के इस्तेमाल के लिए प्रोत्साहित करना रहा। सरकार की ओर से कृषि क्षेत्र को मजबूत बनाने, संसाधनों का बेहतर उपयोग करने और किसानों की समृद्धि बढ़ाने के प्रयासों के तहत ऐसे आयोजनों को महत्वपूर्ण माना जा रहा है
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