विशेष

भोपाल। मप्र में बहुप्रतिक्षित शिवराज मंत्रिमंडल का आखिरकार गुरुवार को विस्तार हो गया। राजभवन में आयोजित एक साधारण कार्यक्रम में राज्यपाल आनंदीबेन पटेन ने मंत्रियों को शपथ दिलाई। कुल 28 मंत्रियों ने शपथ ली। जिसमें सिंधिया खेमे से 9 और कांग्रेस से भाजपा में आए 3 मंत्री बने। मंत्रिमंडल विस्तार के बाद मीडिया से बातचीत करते हुए सिंधिया ने कमलनाथ और दिग्विजय सिंह को संदेश देते हुए कहा है कि टाइगर अभी जिंदा है।   राजभवन के बाहर मीडिया से बात करते हुए राज्यसभा सांसद ज्योतिरादित्य सिंधिया ने कहा कि यह मंत्रिमंडल विस्तार नहीं बल्कि जिम्मेदारी दी गई है। उपचुनाव में जीत का दावा करते हुए कहा कि मध्य प्रदेश में 24 सीटों पर होने वाले उपचुनाव में भाजपा की जीत होगी। उपचुनाव भाजपा जीतेगी सभी जनसेवक की जीत होगी, किश्तों की सरकार जो 15 महीने चली उसको मुंहतोड़ जवाब मिलेगा। कमलनाथ और दिग्विजय सिंह को तंज कसते हुए कहा कि टाइगर अभी जिंदा है।   कांग्रेस द्वारा कोरोना काल में ग्वालियर-चंबल अंचल में सिंधिया की गैरमौजूदगी को लेकर उठाए जा रहे सवाल पर जवाब देते हुए उन्होंने कहा कि कोरोना काल के दौरान मैं भले ही ग्वालियर-चंबल अंचल में नहीं था, लेकिन सभी कार्यकर्ताओं के संपर्क में था। सिंधिया फाउंडेशन के द्वारा लोगों को भोजन उपलब्ध करवाया गया है। इसी के विदेश में फंसे कई लोगों को हम वापस देश लेकर भी आए हैं।   बताते चले कि मंत्रिमंडल विस्तार से पहले ज्योतिरादित्य सिंधिया ने ट्वीट भी किया था। जिसमें उन्होंने  लिखा था ‘अन्याय के खिलाफ छेड़ा गया संघर्ष ही धर्म है। दो दिवसीय दौरे पर भोपाल पहुंच रहा हूं। प्रदेश सरकार के मंत्रिमंडल विस्तार कार्यक्रम में उपस्थित होने के बाद, कार्यकर्ताओं से मुलाकात करूंगा।

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Dakhal News 2 July 2020

भोपाल। मध्यप्रदेश में मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के बहुप्रतीक्षित मंत्रिमंडल का विस्तार गुरुवार को अंतत: हो ही गया। राजभवन में आयोजित एक सादा समारोह में 28 मंत्रियों को राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने पद एवं गोपनीयता की शपथ दिलाई। इनमें 20 को कैबिनेट और आठ को राज्यमंत्री की शपथ दिलाई गई। इस दौरान मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान, भाजपा प्रदेश अध्यक्ष वीडी शर्मा, संगठन महामंत्री सुहास भगत, राष्ट्रीय महासचिव कैलाश विजयवर्गीय, गृह मंत्री डॉ. नरोत्तम मिश्रा, प्रदेश भाजपा विनय सहस्त्रबुद्धे समेत सभी बड़े नेता और अधिकारी मौजूद रहे।   कार्यक्रम से पहले मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान राजभवन पहुंचे और राज्यपाल आनंदीबेन पटेल को 20 कैबिनेट और 8 राज्यमंत्रियों की सूची सौंपी। इसके बाद सुबह 11 बजे राजभवन में शपथ समारोह शुरू हुआ, जिसमें राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने नये मंत्रियों को शपथ दिलाई। इनमें गोपाल भार्गव, विजय शाह, जगदीश देवड़ा, बिसाहू लाल सिंह, यशोधरा राजे सिंधिया, भूपेंद्र सिंह, एदल सिंह कंषाना, बृजेंद्र प्रताप सिंह, विश्वास सारंग, इमरती देवी, प्रभुराम चौधरी, महेंद्र सिंह सिसौदिया (संजू भैया), प्रद्युमन सिंह तोमर, प्रेम सिंह पटेल, ओमप्रकाश सकलेचा, उषा ठाकुर, अरविंद भदौरिया, डॉ. मोहन यादव, हरदीप सिंह डंग, राजवर्धन सिंह प्रेमसिंह दत्तीगांव को कैबिनट मंत्री के रूप में पद एवं गोपनीयता की शपथ दिलाई गई। वहीं, भरत सिंह कुशवाह, इंदर सिंह परमार, रामलेखावन पटेल, राम किशोर कांवरे, बृजेंद्र सिंह यादव, गिर्राज दंडौतिया, सुरेश धाकड़ (राठखेड़ा) और ओपीएस भदौरिया को राज्यमंत्री की शपथ दिलाई गई।   गौतरबल है कि कांग्रेस की कमलनाथ सरकार गिरने के बाद मार्च में भाजपा ने मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के नेतृत्व में चौथी बार सरकार बनाई थी। शिवराज ने 23 मार्च को मुख्यमंत्री पद की शपथ लेकर रिकार्ड 29 दिन अकेले सरकार चलाई और उसके बाद 21 अप्रैल को पांच मंत्रियों को शपद दिलाकर अपने मिनी कैबिनेट का गठन किया, तभी से मंत्रिमंडल के विस्तार की अटकलें शुरू हो गई थी, जिन पर गुरुवार को विराम लग गया है। शिवराज मंत्रिमंडल के बहुप्रतीक्षित मंत्रिमंडल का विस्तार अब हो गया है।

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Dakhal News 2 July 2020

राजनीति

भोपाल, 02 जुलाई (हि.स.)। कभी खुद फावड़ा लेकर नालों की सफाई करने वाले तो कभी सडक़ और शौचालयों की सफाई करने वाले वरिष्ठ नेता प्रद्युमन सिंह तोमर ने शिवराज कैबिनेट में जगह हासिल कर ली है। गुरुवार को हुए कैबिनेट विस्तार में प्रद्युमन सिंह तोमर ने भी मंत्री पद की शपथ ली। इस दौरान खास बात यह रही कि प्रद्युमन सिंह ने मंत्री पद मिलने के बाद भी जूते-चप्पल नहीं पहने और नंगे पैर शपथ ली।    ज्योतिरादित्य सिंधिया समर्थक प्रद्युम्न सिंह तोमर शिवराज मंत्रिमंडल में शामिल हो गए हैं। गुरुवार को शिवराज के मंत्रिमंडल विस्तार में सिंधिया समर्थक जो 9 नेता मंत्री पद की शपथ ली, उनमें प्रद्युम्न सिंह तोमर का नाम भी शामिल हैं। शपथ ग्रहण में प्रद्युमन सिंह बिना जूते चप्पल पहने पहुंचे, उन्होंने शपथ भी नंगे पैर ही ली। मीडिया से बातचीत करते हुए उन्होंने बताया कि 'मैं ने अपने क्षेत्र में पेयजल और स्वच्छता संबंधी काम पूरा करने तक नंगे पैर रहने का संकल्प लिया है। इसलिए जब तक वह काम पूरे नहीं हो जाते मैं जूते-चप्पल नहीं पहनूंगा। आगे उन्होंने कहा कि 100 दिन में हमारी सरकार ने काफी काम किए हैं। मेरे क्षेत्र में भी 2530 परसेंट काम बाकी है। पूरा होने पर जूते-चप्पल धारण करूंगा। गौरतलब है कि तोमर लगभग पिछले तीन महीने से जूते-चप्पल त्यागकर नंगे पांव रह रहे हैं। वह नंगे पांव ही क्षेत्रवासियों के बीच जाते हैं और उनकी समस्याएं सुनते हैं।  

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Dakhal News 2 July 2020

भोपाल। मध्य प्रदेश मंत्रिमंडल का आज विस्तार हो गया है। सीएम शिवराज और सिंधिया समर्थकों को मिलाकर कुल 28 मंत्रियों ने पद की शपथ ली। जिसमें 20 कैबिनेट स्तर के और 8 राज्य स्तर के मंत्री हैंं। मंत्रिमंडल विस्तार पर मप्र के पूर्व सीएम और कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष कमलनाथ ने सरकार को शुभकामनाएं दी है। साथ ही मंत्रिमंडल में वरिष्ठ भाजपा विधायकों को दरकिनार किए जाने पर खेद भी जताया है।   कमलनाथ ने ट्वीट कर प्रदेश सरकार के आज के मंत्रिमंडल के गठन पर मै सभी नवीन मंत्रियो को बधाई व शुभकामनाएँ देता हूँ और उम्मीद करता हूँ कि प्रदेश के विकास में सभी मिल जुलकर कार्य करेंगे और प्रदेश के विकास में सहभागी बनेंगे। एक अन्य ट्वीट कर उन्होंने कहा ‘आज के मंत्रिमंडल के गठन में कई योग्य , अनुभवी , निष्ठावान भाजपा के वरिष्ठ विधायकों का नाम नहीं पाकर मुझे व्यक्तिगत तौर पर बेहद दु:ख भी है।   गौरतलब है कि सिंधिया समर्थकों को मंत्रिमंडल में शामिल करने की वजह से इस बार भाजपा के कई वरिष्ठ विधायकों और पूर्व मंत्रियों को बाहर का रास्ता दिखा दिया गया है। जिनमें सुरेन्द्र पटवा, राजेन्द्र शुक्ला, रामपाल, गौरीशंकर बिसेन और संजय पाठक के नाम शामिल हैंं।

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Dakhal News 2 July 2020

मीडिया

डॉ. वेदप्रताप वैदिक प्रेस ट्रस्ट आफ इंडिया (पीटीआई) देश की सबसे पुरानी और सबसे प्रामाणिक समाचार समिति है। मैं दस वर्ष तक इसकी हिंदी शाखा ‘पीटीआई-भाषा’ का संस्थापक संपादक रहा हूं। उस दौरान चार प्रधानमंत्री रहे लेकिन किसी नेता या अफसर की इतनी हिम्मत नहीं थी कि वह फोन करके हमें किसी खबर को जबर्दस्ती देने के लिए या रोकने के लिए आदेश या निर्देश दे। अब तो प्रसार भारती ने लिखकर पीटीआई को धमकाया है कि उसे सरकार जो 9.15 करोड़ रु. की वार्षिक फीस देती है, उसे वह बंद कर सकती है। यह राशि पीटीआई को विभिन्न सरकारी संस्थान जैसे आकाशवाणी, दूरदर्शन, विभिन्न मंत्रालय, हमारे दूतावास आदि, जो उसकी समाचार-सेवाएं लेते हैं, वे देते हैं। यह धमकी वैसी ही है, जैसी कि आपात्काल के दौरान इंदिरा सरकार ने हिंदी की समाचार समितियों- ‘हिंदुस्थान समाचार’ और ‘समाचार भारती’ को दी थी। मैंने ‘हिंदुस्थान समाचार’ के निदेशक के रुप में इस धमकी को रद्द कर दिया था। मैं अकेला पड़ गया। मेरे अलावा सबने घुटने टेक दिए और इन दोनों एजेंसियों को उस समय पीटीआई में मिला दिया गया। क्या पीटीआई को दी गई यह धमकी कुछ वैसी ही नहीं है ? मैं पीटीआई के पत्रकारों से कहूंगा कि वे डरें नहीं। डटे रहें। 1986 में बोफोर्स कांड पर जब जिनीवा से चित्रा सुब्रह्मण्यम ने घोटाले की खबर भेजी तो ‘भाषा’ ने उसे सबसे पहले जारी कर दिया। प्रधानमंत्री राजीव गांधी और उनके अफसरों की हिम्मत नहीं हुई कि वे मुझे फोन करके उसे रुकवा दें। अब पीटीआई ने क्या गलती की है ? सरकारी चिट्ठी में उस पर आरोप लगाया गया है कि उसने नई दिल्ली स्थित चीनी राजदूत सुन वीदोंग और पेइचिंग स्थित भारतीय राजदूत विक्रम मिसरी से जो भेंट-वार्ताएं प्रसारित की हैं, वे राष्ट्रविरोधी हैं और वे चीनी रवैए का प्रचार करती हैं। उनसे हमारे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के वक्तव्य का खंडन होता है। हमारे राजदूत ने कह दिया कि चीन गलवान घाटी में हमारी जमीन खाली करे जबकि मोदी ने कहा था कि चीन हमारी जमीन पर घुसा ही नहीं है। इसी तरह चीनी राजदूत ने भारत को चीनी-जमीन पर से अपना कब्जा हटाने की बात कही है। यही बात चीनी विदेश मंत्री ने हमारे विदेश मंत्री से कही थी। मेरी समझ में नहीं आता कि इसमें पत्रकारिता की दृष्टि से राष्ट्रविरोधी काम क्या हुआ है? यह पत्रकारिता का कमाल है कि वह दुश्मन से भी उसके दिल की बात उगलवा लेती है। जो काम नेता और राजदूत के भी बस का नहीं होता, उसे पत्रकार पलक झपकते ही कर डालते हैं। उन पर राष्ट्रविरोधी होने की तोहमत लगाकर प्रसार भारती अपनी प्रतिष्ठा को ही ठेस लगा रही है। मैं समझता हूं कि सरकार को चाहिए कि प्रसार भारती के मुखिया अफसर को वह फटकार लगाए और उसे खेद प्रकट करने के लिए कहे। लेखक डॉ. वेदप्रताप वैदिक देश के जाने माने पत्रकार और स्तंभकार हैं.

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Dakhal News 1 July 2020

जो इस देश का मुख्य न्यायाधीश हो, उससे कम से कम ये अपेक्षा तो की ही जाती है कि वह जब तक पद पर रहे तब तक किसी खास पार्टी के पक्ष में अपने खड़े होने का दिखावा या प्रदर्शन न करे. पर वर्तमान मुख्य न्यायाधीश जस्टिस एसए बोबड़ ने शर्म-लिहाज ताक पर रख दिया है. इस तस्वीर में दिख रहा है कि स्टैंड पर खड़ी एक शानदार मोटरसाइकिल, जिसे एक भाजपा नेता के पुत्र का बताया जाता है, पर बिना मास्क लगाए मुख्य न्यायाधीश महोदय बैठे हुए हैं और खास स्टाइल में तस्वीर क्लिक करा रहे हैं. तस्वीर क्लिक हुई है तभी तो इंडियन एक्सप्रेस में छपी है. यह सब कुछ जो माहौल बनाता है उससे देश के मुख्य न्यायाधीश पद की गरिमा गिरती है.

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Dakhal News 29 June 2020

समाज

भोपाल। मध्यप्रदेश में कोरोना की ग्रोथ रेट देश में सबसे कम और संक्रमित मरीजों का रिकवरी रेट 76 फीसदी से अधिक है। इसके बाद भी यहां नये मामलों में कमी नहीं आ रही है। अब यहां चार जिलों में 136 नये मामले सामने आए हैं, जबकि चार लोगों की मौत हुई है। इसके बाद राज्य में संक्रमितों की संख्या 14 हजार के करीब पहुंच गई है। वहीं, प्रदेश में कोरोना से अब तक 585 लोगों की मौत हो चुकी है।    इंदौर के मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. प्रवीण जडिय़ा ने गुरुवार को बताया कि एमजीएम मेडिकल कॉलेज द्वारा बुधवार देर रात 1259 सेम्पलों की जांच रिपोर्ट जारी की, जिनमें 19 नये पॉजिटिव मिले हैं। इसके बाद जिले में संक्रमित मरीजों की संख्या 4753 हो गई है। वहीं, इंदौर में कोरोना से चार लोगों की मौत की पुष्टि हुई है। मृतकों में 65 वर्षीय और 68 वर्षीय दो महिलाओं के साथ 65 वर्षीय दो पुरुष शामिल हैं। अब यहां कोरोना से मरने वालों की संख्या 236 हो गई है। इसके अलावा मुरैना में 56, भोपाल में 58 और उज्जैन में तीन नये मामले सामने आए हैं।   इन 136 नये मामलों के साथ अब राज्य में संक्रमित मरीजों की कुल संख्या 13,997 हो गई है। इनमें सबसे अधिक इंदौर में 4754, भोपाल 2886, उज्जैन 862, खंडवा 317, बुरहानपुर 401, जबलपुर 405, खरगौन 289, धार 179, ग्वालियर 393, नीमच 446, मंदसौर 115, सागर 377, मुरैना 537, देवास 220, रायसेन 110, भिंड 245, बड़वानी 114, होशंगाबाद 41, रतलाम 157, रीवा 58, विदिशा 45, बैतूल 57, सतना 34, छतरपुर 56, डिंडौरी 30, दमोह 40, आगरमालवा 16, झाबुआ 16, अशोकनगर 44, शाजापुर 62, सीधी 20, सिंगरौली 16, दतिया 25, शहडोल 22, बालाघाट 26, श्योपुर 76, शिवपुरी 36, टीकमगढ़ 42, छिंदवाड़ा 59, नरिसंहपुर 31, सीहोर 15, उमरिया 10, पन्ना 34, अलीराजपुर 04, अनूपपुर 29, हरदा 30, राजगढ़ 94, गुना 15, मंडला 06, सिवनी 14. निवाड़ी 09 और कटनी 19 मरीज शामिल हैं।   वहीं, इंदौर में हुई चार मौतों के बाद राज्य में कोरोना से मरने वालों की संख्या 585 हो गई है। मृतकों में सबसे अधिक इंदौर के 236, भोपाल 101, उज्जैन 71, बुरहानपुर 23, खंडवा 17, जबलपुर 14, खरगौन 15, ग्वालियर 03, धार 06, मंदसौर 09, नीमच 07, सागर 21, देवास 10, रायसेन 05, होशंगाबाद 03, सतना 02, आगरमालवा 01, झाबुआ 01, अशोकनगर 01, शाजापुर 03, दतिया 01, छिंदवाड़ा 02, सीहोर 02, उमरिया 01, रतलाम 06, बड़वानी 04 मुरैना 04, राजगढ़ 06, श्योपुर 02, टीमकगढ़ 01, रीवा 01, गुना 01, हरदा 01, कटनी 02, सीधी 01 और मंडला का एक व्यक्ति शामिल है।   इधर, स्वास्थ्य विभाग के बुलेटिन के अनुसार, राज्य में अब तक 10,655 मरीज कोरोना से जंग जीत चुके हैं और वे स्वस्थ होने के बाद अस्पताल से डिस्चार्ज होकर अपने घर जा चुके हैं। अब प्रदेश में कोरोना के सक्रिय प्रकरण 2761 हैं। 

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Dakhal News 2 July 2020

भोपाल। मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल में अब दुकानें रात 10 बजे तक खुली रह सकेंगी। कलेक्टर एवं जिला दण्डाधिकारी अविनाश लवानिया ने इस संबंध में संशोधित आदेश जारी कर दिया है। जारी आदेश के मुताबिक, औद्योगिक संचालन संबंधी गतिविधियां राष्ट्रीय राजमार्ग पर चलने वाले वाहनों लोडिंग, अनलोडिंग, एयरपोर्ट, रेलवे स्टेशन, बस स्टैंड और अपने वाहनों से गंतव्य स्थान तक जाने वाले यात्रियों के आवागमन को छोडक़र शेष सभी गतिविधियां रात्रि 10.00 से सुबह 5.00 बजे तक बंद रहेगी। अत्यावश्यक दुकान के लिए भी यह नियम लागू होगा। रात्रि 10.00 बजे से 5.00 बजे तक कफ्र्यू का कड़ाई से पालन किया जाना अनिवार्य होगा।      कलेक्टर लवानिया ने धारा 144 के अंतर्गत इन सभी गतिविधियों को संचालित करने के निर्देश जारी किए हैं। इसके साथ ही पूर्व में जारी किए गए धारा144 के अन्तर्गत आदेश यथावत रहेंगे। अत्यावश्यक वस्तुओं की दुकानों को छोडक़र शेष दुकानें शनिवार और रविवार को बंद रहेगी, होटल, रेस्टोरेंट को होम डिलेवरी और पार्सल की अनुमति रहेगी। इसके साथ ही सार्वजनिक जगहों पर मास्क लगाकर जाना अनिवार्य होगा। 65 साल के बुजुर्ग,1 0 साल के बच्चे और गर्भवती महिलाओं को सार्वजनिक जगहों पर नहीं जाने कि सलाह दी गई है।   जिले में सार्वजनिक स्थलों पर थूकना,शराब, पान, तंबाकू सेवन करना प्रतिबंध रहेगा। सभी शासकीय कार्यालयों मेंअधिकारी की उपस्थिति शत-प्रतिशत रहेगी परंतु कंटेनमेंट क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले स्टाफ को कार्यालय में जाने की अनुमति नहीं रहेगी। समस्त स्टाफ को आरोग्य सेतु एप उपयोग करना अनिवार्य है। विभाग, संस्था, राजस्व, स्वास्थ्य पुलिस, दूरसंचार, नगरपालिका, पंचायत, नगर सैनिक, आपदा प्रबंधन एवं  टेलीकॉम इंटरनेट, वेतन मानदेय आदि हेतु कार्यालय को शत-प्रतिशत क्षमता से संचालन कर सकेंगे। समस्त दुकानों में एक समय में कम से कम न्यूनतम व्यक्तियों को प्रवेश दिया जाए और दो गज दूरी का पालन किया जाना आवश्यक होगा।   शादी, समारोह में घर से अधिकतम 40 व्यक्तियों की उपस्थिति एवं सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करें।  जिले में अंतिम संस्कार हेतु 10 व्यक्ति ही शामिल हो सकेंगे। दुकानें सप्ताह में सोमवार से शुक्रवार तक 5 दिन खोलने एवं 2 दिन शनिवार एवं रविवार केवल होम डिलीवरी पार्सल टेकअवे खोलने की अनुमति दी जाती है। दुकानें होटल रात्रि 10:00 बजे तक खोली जायेंगी। जोखिम क्षेत्र को छोडक़र धार्मिक स्थल खोले जा सकेंगे। मूर्ति, फूल, नारियल, अगरबत्ती एवं घंटी बजाने की अनुमति नहीं होगी। जिले में निर्माण कार्य, इंडस्ट्रीज फैक्ट्री के संचालन समस्त कार्य कर सकेगे। फैक्ट्री, इंडस्ट्री कंस्ट्रक्शन गतिविधियों एवं संबंधित परिवहन की शनिवार और रविवार को संचालन की अनुमति रहेगी। यह आदेश 31 जुलाई 2020 तक प्रभाव शील रहेगा।

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Dakhal News 2 July 2020

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सब के पॉपुलर सीरियल अलादीन नाम तो सुना होगा में यास्मीन का रोल प्ले करने वाली एक्ट्रेस अवनीत कौर ने सीरियल छोड़ दिया है. अवनीत के शो छोड़ने की वजह कोरोना को बताया जा रहा है, हालांकि लॉकडाउन से पहले भी इस तरह की खबरें आ रही थी कि अवनीत कौर के बिहेवियर से मेकर्स खुश नहीं है. खैर असल कारण तो अभी सामने नहीं आया है, लेकिन अवनीत के शो छोड़ने से उनके फैंस बहुत ज्यादा दुखी है. अवनीत ने फैंस के लिए गुडबॉय मैसेज भी लिखा है. एक्ट्रेस अवनीत कौर ने लिखा- “अपनी जिंदगी के एक हिस्से को छोड़ रही हूं. यास्मिन का रोल मेरे दिल के हमेशा करीब रहा है. एक ऐसा कैरेक्टर जिसकी शुरुआत फेयरीटेल के विपरीत एक वॉरियर प्रिंसेस की तरह हुई. इस किरदार से मैंने काफी कुछ सीखा. घुड़सवारी से लेकर अपने स्टंट खुद करना. मैं सही मायने में एक प्रिंसेस थी. मेरी जर्नी को इतना खूबसूरत बनाने के लिए हर किसी का धन्यवाद. आप सभी के प्यार और सपोर्ट के लिए शुक्रिया.” वहीं सीरियल अलादीन नाम तो सुना होगा मैं अवनीत कौर की जगह एक्ट्रेस आशी सिंह यास्मीन का रोल प्ले करेंगी. आशी सिंह को आपने इससे पहले सोनी टीवी के पॉपुलर शो ये उन दिनों की बात है में नैना के रोल में देखा होगा. आशी जल्द ही अलादीन के नए एपिसोड की शूटिंग शुरु करेंगी, वहीं बात करें अवनीत कौर की, तो अवनीत सीरियल अलादीन नाम तो सुना होगा के अलावा कई म्यूजिक वीडियोज और पॉपुलर टीवी शोज में काम कर चुकी है. अवनीत ने सीरियल चंद्र नंदिनी, सावित्री, हमारी सिस्टर दीदी, मीठी मुस्कान, झलक दिखला जा 5 में काम किया है, इसके अलावा वो मर्दानी 2 में भी नजर आई थी.

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Dakhal News 2 July 2020

पिछले दो हफ्तों से सोशल मीडिया पर नेपोटिज्म का मुद्दा गरमाया हुआ है, एक्टर सुशांत सिंह राजपूत की मौत के लिए फैंस नेपोटिज्म और गुटबाजी को जिम्मेदार ठहरा रहे हैं.सोशल मीडिया पर एक्ट्रेस आलिया भट्ट, सोनम कपूर सहित कई बड़े सेलेब्स को इस वजह से काफी ट्रोलिंग का भी सामना करना पड़ा. वहीं इन सब विवादों के बीच एक्ट्रेस आलिया भट्ट और ऋतिक रोशन को ऑस्कर सेरेमनी में मेंबर बनने के लिए आमंत्रित किया गया है. कोरोना वायरल की वजह से ऑस्कर को पोस्टपोन कर दिया दया था, लेकिन इसकी तैयारियां शुरु हो चुकी है. एकेडमी ऑफ मोशन पिक्चर आर्ट्स एंड साइंस ने दुनियाभर के 819 कालाकारों को न्योता भेजा है, जिसमें बॉलीवुड एक्ट्रेस आलिया भट्ट और ऋतिक रोशल का नाम भी शामिल है. इस लिस्ट में भारत की ओर से आलिया भट्ट और ऋतिक रोशन के अलावा, निष्ठा जैन, अमित मधेशिया, डिजाइनर नीता लूला, कास्टिंग डायरेक्टर नंदिनी श्रीकांत, विज़ुअल इफेक्ट्स सुपरवाइजजर विशाल आनंद और संदीप कमल का नाम भी शामिल है जिन्हें ऑस्कर के लिए न्योता मिला है.    इन कलाकारों को ऑस्कर सेरेमनी में वोट डालने का मौका मिलेगा. इस सम्मान को पाकर आलिया भट्ट और ऋतिक रोशन तो बहुत खुश है लेकिन सोशल मीडिया पर इसे भी नेपोटिज्म से जोड़कर देखा जा रहा है. डायरेक्टर हंसल मेहता भी पिछले कुछ समय से नेपोटिज्म पर खुलकर बात कर रहे हैं, वहीं अब ऑस्कर को लेकर हंसल मेहता ने एक बार फिर बड़ा बयान दिया है. हंसल मेहता ने ट्वीट कर आलिया और ऋतिक के ऑस्कर में शामिल होने पर नाराजगी जाहिर की. हंसल मेहता ने लिखा- “नेपोटिज्म अकेडमी.” डायरेक्टर का ये ट्वीट सोशल मीडिया पर खूब वायरल हो रहा है. सुशांत सिंह राजपूत के फैंस ने भी आलिया को न्योता मिलने पर नारजगी जाहिर की है.  

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Dakhal News 2 July 2020

दखल क्यों

  प्रमोद भार्गव मध्य प्रदेश के सीधी जिले के कई ग्रामों में हाथियों के झुण्ड ने हमला बोला हुआ है। जनपद पंचायत कुसमी के ये सभी आदिवासी ग्राम हैं। हाथियों ने कई घरों को तोड़ दिया, वन विभाग के पेट्रोलिंग कैंप को ढहा दिया और अनेक खेतों की फसलें चौपट कर दीं। घरों में रखे धान, चावल और गेहूं खा गए। ग्रामों की पानी और बिजली की व्यवस्था भी ध्वस्त कर दी। हाथियों ने सबसे ज्यादा उत्पात तिनगी और गजर ग्रामों में मचाया है। ये हाथी छत्तीसगढ़ के संजय गांधी टाइगर रिजर्व क्षेत्र से चलकर सीधी के जंगलों में पहुंचे हैं। इसके पहले भी यही हाथी इसी क्षेत्र के अनेक ग्रामों में आते रहे हैं। सूचना देने के बावजूद वन अमला तो इन्हें भगाने का कोई उपाय नहीं करता है, तब ग्रामीण ही पीपे व थाली बजाकर इन्हें भगाने का काम करते हैं। लेकिन ये बार-बार लौट आते हैं। भारत सरकार ने हाथी को दुर्लभ प्राणी व राष्ट्रीय धरोहर मानते हुए इसे वन्य जीव सरंक्षण अधिनियम 1972 की अनुसूची.1 में सूचीबद्ध करके कानूनी सुरक्षा दी हुई है। इसलिए जंगलों में हाथियों की संख्या निरंतर बढ़ रही है। हालांकि हमारी सनातन संस्कृति में हाथी सह-जीवन का हिस्सा है। इसीलिए हाथी पाले और पूजे जाते हैं। असम के जंगलों में हाथी लकड़ी ढुलाई का काम करते हैं। सर्कस के खिलाड़ी और सड़कों पर तमाशा दिखाने वाले मदारी इन्हें पढ़ा व सिखाकर अजूबे दिखाने का काम भी करते रहे हैं। साधु-संत और सेनाओं ने भी हाथियों का खूब उपयोग किया है। कई उद्यानों में पर्यटकों को हाथी की पीठ पर बिठाकर बाघ के दर्शन कराए जाते हैं। वन संरक्षण अधिनियम लागू होने के बाद अब ये केवल प्राणी उद्यानों और चिड़ियाघरों में ही सिमट गए हैं। बावजूद इन उद्यानों में इसकी हड्डियों और दांतों के लिए खूब शिकार हो रहा है। हाथी के शिकार पर प्रतिबंध है लेकिन व्यवहार में हाथी का शिकार करने वालों से लेकर आम लोग भी इस तरह के कानूनों की परवाह नहीं करते। कर्नाटक के जंगलों में कुख्यात तस्कर वीरप्पन ने इसके दांतों की तस्करी के लिए सैंकड़ों हाथियों को मारा। चीन हाथी दांत का सबसे बड़ा खरीददार है। जिन जंगलों के बीच रेल पटरियां बिछी हैं, वहां ये रेलों की चपेट में आकर बड़ी संख्या में प्राण गंवाते रहते हैं। मनुष्य के जंगली व्यवहार के विपरीत हाथियों का भी मनुष्य के प्रति क्रूर आचरण देखने में आता रहा है। झारखंड, छत्तीसगढ़, मध्य प्रदेश और कर्नाटक के जंगली हाथी अक्सर जंगल से भटककर ग्रामीण इलाकों में उत्पात मचाते रहते हैं। कुछ साल पहले छत्तीसगढ़ में हाथियों ने इतना भयानक उत्पात मचाया था कि यहां 22 निर्दोष आदिवासियों की जान ले ली थी। कर्नाटक और झारखंड में इन हाथियों द्वारा मारे गए लोगों की संख्या भी जोड़ लें तो ये हाथी दस-बारह साल के भीतर करीब सवा सौ लोगों की जान ले चुके हैं। झारखंड के सिंहभूमि इलाके के पोरहाट वन से भटके हाथी रायगढ़ और सरगुजा जिलों के ग्रामीण अंचलों में अकसर कहर बरपाते रहते हैं। इनके आतंक क्षेत्र का विस्तार झारखंड में रांची व गुमला जिलों तक और मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ से कर्नाटक है। एक समय अपने मूल निवास से भटककर ढाई सौ हाथी नए आवास और आहार की तलाश में लगातार छह साल तक ग्रामों में कहर ढहाते रहे थे। इन हाथियों में से कुछ ओड़ीसा और पश्चिम बंगाल में घुस गए थे और 18 हाथी मध्य प्रदेश की सीमा में आ गए थे। झारखंड से ही अंबिकापुर के जंगलों में प्रवेश कर भटके हुए हाथियों के झुंड कुछ साल पहले शहडोल जिले के ग्रामीण इलाकों में आतंक और दहशत का पर्याय बन गया था। इन हाथियों में एक नर, तीन मादा और दो बच्चे थे। वन अधिकारी बताते हैं कि शहडोल, रायगढ़, सरगुजा जिलों के दूरदराज के गांवों में रहने वाले आदिवासियों के घरों में उतारी जाने वाली शराब को पीने की तड़प में ये हाथी गंध के सहारे आदिवासियों की झोंपड़ियों को तोड़ते हुए घुसते चले जाते हैं और जो भी सामने आता है उसे सूंड से पकड़ कर और पेट पर भारी-भरकम पैर रख उसकी जीवन लीला खत्म कर देते हैं। इस तरह से इन मदांध हाथियों द्वारा हत्या का सिलसिला हर साल अनेक गांवों में देखने में आता रहता है। पालतू हाथी भी कई बार गुस्से में आ जाते हैं। ये गुस्से में क्यों आते हैं, इसे समझने के लिए इनके आचार-व्यवहार और प्रजनन संबंधी क्रियाओं व भावनाओं को समझना जरूरी है। हाथी मद की अवस्था में आने के बाद ही मदांध होकर अपना आपा खोता है। हाथियों की इस मनःस्थिति के सिलसिले में प्रसिद्ध वन्य प्राणी विशेषज्ञ रमेश बेदी ने लिखा है कि जब हाथी प्रजनन की अवस्था में आता है तो वह समागम के लिए मादा को ढूंढता है। ऐसी अवस्था में पालतू नर हाथियों को लोगों के बीच नहीं ले जाना चाहिए। मद में आने से पूर्व हाथी संकेत भी देते हैं। हाथियों की आंखों से तेल जैसे तरल पदार्थ का रिसाव होने लगता है और उनके पैर पेशाब से गीले रहने लगते हैं। ऐसी स्थिति में महावतों को चाहिए कि वे हाथियों को भीड़ वाले इलाके से दूर बंदी अवस्था में ही रखें क्योंकि अन्य मादा प्राणियों की तरह रजस्वला स्त्रियों से एस्ट्रोजन हार्मोन्स की महक उठती है और हाथी ऐसे में बेकाबू होकर उन्मादित हो उठते हैं। त्रिचूर, मैसूर और वाराणसी में ऐसे हालातों के चलते अनेक घटनाएं घट चुकी हैं। ये प्राणी मनोविज्ञान की ऐसी ही मनस्थितियों से उपजी घटनाएं हैं। वैसे हाथियों के ऐसे व्यवहार को लेकर काफी नासमझी की स्थिति है मगर समझदारी इसी में है कि धन के लालच में मद में आए हाथी को किसी उत्सव या समारोह में न ले जाया जाए। उत्पाती हाथियों को पकड़ने के लिए बीस साल पहले मध्य प्रदेश में ऑपरेशन खेदा चलाया गया था। हालांकि पूर्ण वयस्क हो चुके हाथियों को पालतू बनाना एक चुनौती व जोखिम भरा काम है। हाथियों को बाल्यावस्था में ही आसानी से पालतू बनाया जा सकता है। हाथी देखने में भले ही सीधे-भोले लगे पर आदमी की जान के लिए जो सबसे ज्यादा खतरनाक प्राणी हैं, उनमें एक हाथी और दूसरा भालू है। हाथी उत्तेजित हो जाए तो उसे संभालना मुश्किल होता है। फिलहाल इस तरह हाथी को पालतू बनाए जाने के उपाय बंद हैं। आखिर जिस वन अमले पर अरबों रुपए का बजट सालभर में खर्च होता है, उसके पास इस समस्या से निपटने के लिए कोई कारगर उपाय क्यों नहीं है? (लेखक स्वतंत्र टिप्पणीकार हैं।)

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Dakhal News 2 July 2020

  आर.के.सिन्हा आज सारा देश देख रहा है कि भारत वर्तमान में वैश्विक महामारी कोरोना और चीन की शरारतपूर्ण सीमा विवाद के रूप में दो घोर चुनौतियों से प्रतिदिन सामना कर रहा है। भारत इन दोनों चुनौतियों का मुकाबला भी कर रहा है, पर कांग्रेस और उसके नेता सोनिया गांधी और राहुल गांधी सरकार से प्रतिदिन इस तरह के सवाल कर रहे हैं मानों वे भारत के साथ नहीं बल्कि चीन के साथ खड़े हों। कभी-कभी लगता है कि उनकी चर्चा करना व्यर्थ है क्योंकि ये सुधरने वाले तो हैं नहीं। ये वक्त की नजाकत को समझने के लिए भी तैयार नहीं हैं। जब प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी देश को बता चुके हैं कि चीन ने भारत की एक इंच भी जमीन पर अतिक्रमण नहीं किया है, तो सवाल पर सवाल करने का मतलब ही क्या है? मोदी ने कहा, ''जवानों का बलिदान व्यर्थ नहीं जाएगा। देश की संप्रभुता सर्वोच्च है। देश की सुरक्षा करने से हमें कोई भी रोक नहीं सकता। हमारे दिवंगत शहीद वीर जवानों के विषय में देश को इस बात का गर्व होगा कि वे दुश्मनों को मारते-मारते ही शहीद हुए हैं।\"क्या आपको देश के सूरते हाल पर प्रधानमंत्री से भी अधिक विश्वसनीय जानकारी कोई दे सकता है? पर यह छोटी-सी बात सोनिया या राहुल गांधी को समझ नहीं आ रही है। वे बार-बार यही कह कर देश को गुमराह कर रहे हैं कि चीन के साथ हुई झड़प पर संसद का सत्र बुलाया जाए। क्या कोरोना काल में यह करके वे सबकी जान जोखिम में डालना चाहते हैं। वास्तव में राहुल गांधी संकट की इस घड़ी में ओछी राजनीति कर रहे हैं। उनके बयानों को सुन-पढ़कर चीन अवश्य खुश होता होगा कि आखिर \"राजीव गाँधी फाउंडेशन\" को कई लाख डालर का दिया गया चंदा काम आ गया। 1962 की जंग से डोकलाम विवाद तक आज दुश्मन की भाषा बोलने वाले जरा 1962 की हार से लेकर डोकलाम विवाद तक के पन्नों को खोलकर देख लें। पंडित नेहरू की अदूरदर्शी चीन नीति का परिणाम यह रहा था कि देश को अपने मित्र पड़ोसी बौध राज तिब्बत के अस्तित्व को खोना पड़ा, 1962 में युद्ध लड़ना पड़ा और युद्ध में मुंह की खानी पड़ी। उस जंग के 58 साल गुजरने के बाद भी चीन ने हमारे अक्सई चिन पर अपना कब्जा जमाया हुए है। अक्सई चिन का कुल क्षेत्रफल 37,244 वर्ग किलोमीटर है। यह एक रणनीतिक क्षेत्र है। जल संसाधनों और खनिजों से भरपूर है और हमारे हिन्दू आस्था केन्दों के नजदीक है। क्या इसपर वापस कब्जा करने की चिंता पिछले 58 वर्षों में नहीं होनी चाहिये थी। नेहरू ने ही संयुक्त राष्ट्र की सुरक्षा परिषद् में भारत का स्थान ठुकराकर चीन का नाम प्रस्तावित किया था। उस समय तो नेहरू गुटनिरपेक्षता के वायरस से ग्रस्त थे और वे विश्व नेता बनना चाह रहे थे। न तो वह कर पाये न ही अपनी सीमाओं को सुरक्षित रख पाये। पूरी कश्मीर समस्या के जन्मदाता भी वही हैं। यदि उन्होंने कश्मीर को अपने हाथ में रखने की जिद न की होती तो सरदार पटेल कब का समाधान कर चुके होते। पंडित नेहरू अपने से बड़ा और समझदार विदेश मामलों का जानकार किसी को मानते ही नहीं थे। इसीलिये उनकी जिद में देश फँसा। उन्हें कैबिनेट की विदेश मामलों की समिति के मेंबर गृह मंत्री सरदार पटेल ने 1950 में एक पत्र में चीन तथा उसकी तिब्ब्त के प्रति नीति से सावधान रहने को कहा था। अपने पत्र में पटेल ने चीन को \"भावी शत्रु\" तक घोषित कर दिया था। पर, नेहरू ने उनकी एक नहीं सुनी और पटेल की भविष्यवाणी ठीक 12 वर्षों के बाद 1962 में सच निकली। कैसे भड़कते थे नेहरू भारतीय संसद में 14 नवंबर,1963 को चीन के साथ युद्ध के बाद की स्थिति पर चर्चा हुई। नेहरू ने प्रस्ताव पर बोलते हुए कहा- \"मुझे दुख और हैरानी होती है कि अपने को विस्तारवादी शक्तियों से लड़ने का दावा करने वाला चीन खुद विस्तारवादी ताकतों के नक्शेकदम पर चलने लगा।\" वे बता रहे थे कि चीन ने किस तरह भारत की पीठ पर छुरा घोंपा। वे बोल ही रहे थे कि करनाल से सांसद स्वामी रामेश्वरनंद ने व्यंग्य भरे अंदाज में कहा, 'चलो अब तो आपको चीन का असली चेहरा दिखने लगा।' इसपर, नेहरू नाराज हो गए और स्वामी रामेश्वरनंद की टिप्पणी पर क्रुद्ध होकर कहने लगे, \"अगर माननीय सदस्य चाहें तो उन्हें सरहद पर भेजा जा सकता है।\" सदन को नेहरू जी की यह बात समझ नहीं आई। पंडित नेहरू प्रस्ताव पर बोलते ही जा रहे थे। तब एक और सदस्य एच.वी. कामथ ने कहा, \"आप बोलते रहिए। हम बीच में व्यवधान नहीं डालेंगे।\" अब नेहरू जी विस्तार से बताने लगे कि चीन ने भारत पर हमला करने से पहले कितनी तैयारियां की हुई थी। पर उन्होंने ये नहीं बताया था कि चीन के मुकाबले भारत की तैयारी किस तरह और क्या तैयारी थी। इसी बीच, स्वामी रामेश्वरानंद ने फिर तेज आवाज में कहा, 'मैं यह जानने में उत्सुक हूं कि जब चीन तैयारी कर रहा था, तब आप क्या कर रहे थे।' सवाल वाजिब था। पर अब नेहरू जी अपना आपा खोते हुए कहने लगे, 'मुझे लगता है कि स्वामी जी को कुछ समझ नहीं आ रहा। मुझे अफसोस है कि सदन में इतने सारे सदस्यों को रक्षा मामलों की पर्याप्त समझ नहीं है।\" मतलब तीखा सवाल पूछ लिया तो वे खफा हो गए। बुरा मत मानिए कि जिस शख्स को बहुत ही लोकतान्त्रिक नेता माना और बताया जाता है, वह कभी भी स्वस्थ आलोचना झेलने का माद्दा नहीं रखता था। अपने को गुटनिरपेक्ष आंदोलन का मुखिया बताने वाले नेता, चीन के साथ संबंधों को मजबूत करना तो छोड़िए, संबंधों को सामान्य बनाने में भी मात खा गये थे। अक्साई चिन की 37000 वर्ग किलोमीटर भूमि पर कब्जा पर बोलते हुए पंडित नेहरू ने कहा कि \" इस अक्साई चिन का क्या करना? वहां तो घास भी पैदा नहीं होती? नेहरू जी गंजे थे। एक सदस्य ने कहा, \"तब तो सारे गंजों को सिर कटवा लेना चाहिये।\" आंखों में आंख डालकर बात अब तो यह स्थिति आ गई कि चीन से सम्मान और अपनी भूमि खोने वाला भारत भी उससे आंखों में आंखें डालकर बातें तो कर रहा है। मोदी सरकार ने चीन को डोकलाम विवाद में ही उसको औकात समझा दी थी। वो डोकलाम पर मात खाने के बाद चुप हो गया। अब तो भारत चीन का हर स्तर पर मुकाबला करने के लिए तैयारी भी कर चुका है। जल, थल और नभ में हम तैयार हैं। हाँ, भारत ने कभी वार्ता के दरवाजे बंद नहीं किए। लद्दाख की गलवान घाटी में हुई हिंसक झड़प के बाद से भारत का रुख भी आक्रामक बना हुआ है। भारत गलवान घाटी की घटना के लिए सीधे तौर पर चीन को जिम्मेदार ठहरा चुका है। यह बात विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने भी चीनी विदेश मंत्री को टेलीफोन पर बातचीत के दौरान साफ कर दी थी। भारत के इसी रवैये के कारण अब चीन, सीमा पर तनाव खत्म करना चाहता है। चीन समझ गया है कि यदि युद्ध की स्थिति आई तो पूरा विश्व भारत के साथ खड़ा होगा और उसके साथ पाकिस्तान के अतिरिक्त कोई न होगा। भारत की भी यही चाहत है। गलवान में अपने 20 सैनिकों को खोने वाले भारत ने चीन के 40 से अधिक सैनिकों और उसके कमांडिंग ऑफिसर को मार डाला था। भारत इस बार आर-पार के संघर्ष के लिए तैयार है। वह हालात पर नजर बनाए हुए है। हालांकि वह यही चाहता कि दोनों देश बातचीत के जरिए विवाद को सुलझाएं। हिंसा से तो किसी को फायदा नहीं होगा। पर इस बार हिंसा या जंग का जवाब शांति की अपील से नहीं दिया जाएगा। बुद्ध, महावीर और गांधी को अपना आदर्श मानने वाले भारत में अर्जुन, कर्ण, छत्रपति शिवाजी, राणा प्रताप और रानी लक्ष्मीबाई को भी राष्ट्रनायक माना जाता है। अब इस तथ्य से चीन जितना जल्द वाकिफ हो जाए वही बेहतर है। (लेखक वरिष्ठ संपादक, स्तंभकार और पूर्व सांसद हैं।)

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