विशेष

भोपाल। मध्य प्रदेश में विधानसभा उपचुनाव से पहले राजनेताओं बदजुबानी खूब चर्चा में है। आरोप प्रत्यारोप की राजनीति से ऊपर उठकर राजनेता अभद्र भाषा का खूब प्रयोग कर रहे हैं। अभी पूर्व सीएम कमलनाथ द्वारा डबरा से भाजपा प्रत्याशी और प्रदेश सरकार में मंत्री इमरती देवी को आयटम कहने का मामला थमा नहीं था कि मंत्री बिसाहुलाल ने भी विवादित बयान देते हुए कांग्रेस प्रत्याशी विश्वनाथ सिंह की पत्नी को रखैल कह दिया है। इससे प्रदेश की राजनीति का पारा सातवें आसमान पर पहुंच गया है। बिसाहूलाल के बिगड़े बोल पर खेद जताते हुए प्रदेश के गृृहमंत्री  नरोत्तम मिश्रा ने माफी मांगी है।   मंत्री मिश्रा ने मंगलवार को मीडिया से बातचीत करते हुए कहा कि मैंने भाजपा सरकार के मंत्री बिसाहुलाल सिंह जी का बयान सुना नहीं है। लेकिन यदि उन्होंने कोई आपत्तिजनक बात कही है तो संसदीय कार्य मंत्री के नाते मैं माफी मांगता हूँ। इसके साथ ही उन्होंने कमलनाथ पर निशाना साधते हुए कहा कि लेकिन क्या कमलनाथ अपने बयान के लिए माफी मांगेंगे, या दिग्विजय सिंह कमलनाथ के बयान के लिए माफी मांगेंगे? चुनाव में कांग्रेस के पास कोई मुद्दा नहीं है, इसलिए ऐसी बयानबाजी कर रहे हैं, ताकि कोई 15 महीनों के हिसाब ना मांग लें। मंत्री मिश्रा ने कहा कि कांग्रेस के नेता उपचुनाव में हल्के शब्दों का प्रयोग कर जनता के असल सवालों से बच रहे हैं। दरअसल उनके पास बताने लायक कोई उपलब्धि है ही नहीं, इसलिए वे भाजपा को कोसकर वोट बटोरना चाह रहे हैं।   ग्वालियर-चंबल की जनता को असम्मान बर्दाश्त नहींइस दौरान गृह मंत्री ने कहा कि मंत्री इमरती देवी के खिलाफ अपशब्द बोलने पर कमलनाथ ने खेद जताया है लेकिन माफी नहीं मांगी है। इससे साफ है कि अनुसूचित जाति की महिला के अपमान पर उन्हें दिल से अफसोस नहीं है। उन्होंने कहा कि ग्वालियर-चंबल क्षेत्र की जनता सब-कुछ बर्दाश्त कर सकती है लेकिन असम्मान नहीं। मंत्री इमरती देवी के अपमान के लिए जनता कांग्रेस को माफ नहीं करने वाली। 03 नवंबर को वह जरूर सबक सिखाएगी।

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Dakhal News 20 October 2020

नई दिल्ली/भोपाल। पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ द्वारा मंत्री व भाजपा प्रत्याशी इमरती देवी पर की गई अपमानजनक टिप्पणी के मामले में राज्य के मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी आज चुनाव आयोग को विस्तृत रिपोर्ट भेजेंगे। इसके लिए चुनाव आयोग ने सोमवार शाम को निर्देश दिये थे।    पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ की ‘आयटम’ वाली टिप्पणी को लेकर भोपाल से लेकर दिल्ली तक माहौल गर्माने लगा है। महिला आयोग द्वारा इस मामले में संज्ञान लिए जाने के बाद चुनाव आयोग भी हरकत में आया है। इस मामले को लेकर चुनाव आयोग ने प्रदेश के मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी से विस्तृत रिपोर्ट मांगी है। सोमवार को चुनाव आयोग के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि मध्यप्रदेश के मुख्य निर्वाचन अधिकारी से प्राप्त रिपोर्ट के आधार पर, हमने एक विस्तृत रिपोर्ट मांगी है। यह मंगलवार को आयोग को मिल जाएगी, इसके आधार पर आयोग आगे निर्णय लेगा। वहीं राष्ट्रीय महिला आयोग ने भी यह मामला चुनाव आयोग को आवश्यक कार्रवाई के लिए भेजा है। इस मामले में चुनाव आयोग के अधिकारियों का कहना है कि महिला आयोग का संदेश मिलने से पहले ही हम मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी से विस्तृत रिपोर्ट मांग चुके हैं, उसी के आधार पर निर्णय लिया जाएगा। 

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Dakhal News 20 October 2020

राजनीति

अनूपपुर। प्रदेश के खाद्य मंत्री एवं भाजपा उम्मीदवार बिसाहूलाल सिंह के विवादित बयान को गंभीर से लेते हुए मंगलवार को रिटर्निंग अधिकारी ने उन्हें नोटिस जारी कर 24 घंटे में जवाब मांगा है।   दरअसल, सोमवार को भाजपा उम्मीदवार बिसाहूलाल सिंह ने कांग्रेस उम्मीदवार विश्वनाथ सिंह की पत्नी को लेकर आपत्तिजनक टिप्पणी की थी, साथ ही  जिला कांग्रेस कमेटी अध्यक्ष को चुनाव समाप्त होने के बाद देख लेने की भी बात कही है। जिसे मीडिया ने प्रमुखता से प्रकाशित-प्रसारित किया था। मीडिया में बयान आने के बाद ही रिटर्निंग अधिकारी ने भाजपा उम्मीदवार को नोटिस जारी कर 24 घण्टे के अंदर जवाब मांगा गया है।

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Dakhal News 20 October 2020

इंदौर। मप्र के पूर्व सीएम और कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष कमलनाथ प्रदेश की मंत्री इमरती देवी के लिए अभद्र टिप्पणी करने के बाद भाजपा के निशाने पर आ गए हैं। सोमवार को प्रदेश भर में भाजपा ने मौत व्रत रखकर कमलनाथ के खिलाफ अपना विरोध दर्ज कराया। वहीं मंगलवार को इंदौर में एक अलग ही नजारा देखने को मिला। यहां भाजपा अनुसूचित जाति मोर्चा ने अनूठा प्रदर्शन किया, जिसमें कमलनाथ आईटम सांग पर ठूमके लगाते हुए तो दिग्विजय सिंह उन्हें दाद देते हुए नजर आए।   दरअसल मंगलवार को भाजपा अनुसूचित जाति मोर्चा इंदौर द्वारा कलेक्टर चौराहा पर कमलनाथ के डमी रूप को आयटम गर्ल बनाकर आयटम सांग पर डांस करवाकर दिग्विजयसिंह द्वारा दाद दिलवाकर विरोध प्रदर्शन किया। भाजपा कार्यकर्ता मुन्नी बदनाम हुई और तेरी आख्या का यो काजल जैसे आयटम नम्बर गा रहे है, वही कांग्रेस के दो पूर्व सीएम के डमी अवतार उन गानों पर नाच रहे है। इस दौरान मोर्चा कार्यकर्ताओं ने जमकर कमलनाथ और उनकी भाषाशैली के खिलाफ जमकर नारे भी लगाए।    भाजपा अनुसूचित जाति मोर्चा के नगर अध्यक्ष ने बताया कि इस तरह से विरोध करना भाजपा की पद्धति नही है, लेकिन कुत्ता काटे तो उसे काट नही सकते लेकिन डंडे से तो पीटा जा सकता है। वही राजेश शिरोडक़र ने कहा कि आपकी नजर में प्रदेश की मंत्री आयटम है तो फिर प्रियंका गांधी और सोनिया गांधी क्या है जरा ये भी बताए।    गौरतलब है कि कमलनाथ द्वारा डबरा में बिना नाम लिए इमारती देवी को आयटम कहने के मामले में विरोध प्रदर्शन का दौर लगातार जारी है। फिलहाल, प्रदेश में आयटम शब्द पर बवाल मचा हुआ है और भाजपा मुखर होकर पूर्व सीएम कमलनाथ के बयान का विरोध कर रही है।

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Dakhal News 20 October 2020

मीडिया

रंजना मिश्रा आम दर्शक तो टीवी पर केवल सच्ची और साफ-सुथरी खबरें ही देखना चाहते हैं, किंतु टीआरपी की होड़ ने आज न्यूज़ चैनलों की पत्रकारिता को इतने निचले स्तर पर ला दिया है कि अब अधिकतर न्यूज़ चैनलों पर सही न्यूज़ की जगह फेक न्यूज़ और डिबेट के रूप में हो-हल्ला ही देखने-सुनने को मिलता है। सभी चैनल यह दावा करते हैं कि हम ही नंबर वन हैं। अभी हाल ही में देश के दो बड़े न्यूज़ चैनलों पर टीआरपी से छेड़छाड़ के आरोप लगे हैं। टीआरपी की इस होड़ ने न्यूज़ चैनलों की पत्रकारिता का स्तर इतना अधिक गिरा दिया है कि लोकतंत्र के चौथे स्तंभ यानी मीडिया से आम लोगों का भरोसा कम होता जा रहा है। हर हफ्ते गुरुवार के दिन टीआरपी यानी टेलीविज़न रेटिंग प्वाइंट जारी करने वाली संस्था बार्क (ब्रॉडकास्ट ऑडियंस रिसर्च काउंसिल) ने यह घोषणा कर दी है कि अगले 8 से 12 हफ्ते तक अलग-अलग न्यूज़ चैनलों के टीआरपी के आंकड़े जारी नहीं किए जाएंगे। इनमें हिंदी न्यूज़ चैनल, इंग्लिश न्यूज़ चैनल, बिजनेस न्यूज़ चैनल और क्षेत्रीय भाषाओं के सभी न्यूज़ चैनल शामिल हैं। बार्क का कहना है कि इस दौरान उनकी तकनीकी टीम टीआरपी मापने के मौजूदा मानदंडों की समीक्षा करेगी और जिन घरों में टीआरपी मापने वाले मीटर लगे हैं, वहां हो रही किसी भी प्रकार की धांधली और छेड़छाड़ को रोकने की कोशिश करेगी। कुछ न्यूज़ चैनलों द्वारा किए गए कथित टीआरपी घोटाले के कारण दो से तीन महीनों के लिए टीआरपी को रोक दिया गया है। अब सवाल यह उठता है कि दो से तीन महीनों तक न्यूज़ चैनलों की टीआरपी की गतिविधियों को रोककर मीडिया को साफ-सुथरा करने की जो कोशिश की जा रही है, क्या वो सच में कामयाब होगी? जिस चैनल की टीआरपी जितनी ज्यादा होती है उसे उतने ही ज्यादा और महंगे विज्ञापन मिलते हैं। टेलीविजन के सभी चैनलों के मुकाबले न्यूज़ चैनलों की भागीदारी बहुत कम है, किंतु दर्शकों पर इनका प्रभाव सबसे ज्यादा होता है। देश के केवल 44 हजार घरों में ही टीआरपी मापने के मीटर लगे हैं, तो सवाल यह भी है कि केवल इतने घरों में लगे टीआरपी मापने के मीटर पूरे देश की टीआरपी कैसे सुनिश्चित कर सकते हैं? घोटाले के आरोपों के मुताबिक इन घरों में से कुछ घरों को कुछ रुपए देकर टीआरपी के आंकड़ों से छेड़छाड़ की गई है। आजकल अधिकतर न्यूज़ चैनल डिबेट दिखाते हैं, क्योंकि डिबेट में टीवी का दर्शक उस न्यूज़ चैनल पर अपना ज्यादा समय खर्च करता है और जिससे उसकी टीआरपी बढ़ जाती है। आजकल ग्राउंड रिपोर्ट न्यूज़ चैनलों से धीरे-धीरे गायब ही होती जा रही है, क्योंकि अब कोई न्यूज़ चैनल ग्राउंड रिपोर्टिंग में मेहनत और पैसा खर्च करना नहीं चाहता और ना ही अपने रिपोर्टरों को बाहर भेजना चाहता है। अब सवाल यह है कि टीआरपी मापने की जो व्यवस्था फिलहाल लागू है, वो क्या वास्तव में सही है? क्या यह व्यवस्था सच्ची और साफ-सुथरी खबरें दिखाने वाले न्यूज़ चैनलों के लिए उपयोगी है? जवाब है नहीं। यदि ये न्यूज़ चैनल डिबेट करना बंद कर दें, मनोरंजक खबरें देने की बजाय सच्ची और साफ-सुथरी खबरें दिखाना शुरू कर दें तो उनकी टीआरपी निश्चित ही बहुत नीचे आ जाएगी। जिससे विज्ञापनदाता उन चैनलों को विज्ञापन देना बंद कर देंगे और विज्ञापन न मिलने के कारण, उन चैनलों को अपने रिपोर्टरों को तनख्वाह देना भी मुश्किल हो जाएगा और इस कारण उन न्यूज़ चैनलों को फिर से डिबेट और सस्ती खबरों को दिखाने के लिए मजबूर होना पड़ेगा। डिबेट और सस्ती, मनोरंजक खबरें चैनल की टीआरपी को बढ़ा देंगे, जिससे आगे लोगों को यह भरोसा हो जाएगा कि यही मॉडल सही है। न्यूज़ चैनलों के न्यूज़ रूम में बैठे प्रोग्राम एडिटर और पत्रकारों के दिमाग में न्यूज़ बनाते समय केवल एक ही बात ध्यान में रहती है कि कौन-सा प्रोग्राम और न्यूज़ ज्यादा टीआरपी लाएगा। अब आवश्यकता है कि टीआरपी की इस अंधी दौड़ को छोड़कर, न्यूज़ चैनलों का उद्देश्य, दर्शकों तक जरूरी खबरें और सूचनाएं पहुंचाना होना चाहिए, न कि मनमर्जी की खबरें दिखाना। यह खबरें रिसर्च और ग्राउंड रिपोर्टिंग पर आधारित होनी चाहिए, यही पत्रकारिता का सच्चा धर्म है। (लेखिका स्वतंत्र टिप्पणीकार हैं।)  

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Dakhal News 20 October 2020

-जे सुशील- ज़िंदगी में नौकरी सबकुछ नहीं होता है नौकरी मिल जाए तो छुट्टी लेते रहना चाहिए. मैं जब नौकरी करता था तो शुरू शुरू में हीरो बना. छुट्टी नहीं लेता था. मुझे लगता था कि इससे मुझे लोग हीरो समझेंगे कि बहुत काम करता है. लेकिन ऐसा कुछ हुआ नहीं. हमारे दफ्तर में साल की करीब तीस पैंतीस छुट्टियां होती थीं. मैं लेता नहीं था छुट्टी. लगता था काम बहुत करूंगा तो लोग पसंद करेंगे. दो साल में बहुत छुट्टी जमा हो गई. फिर एक बार जाकर संपादक से कहा कि मेरी इतनी छुट्टियां बची हुई हैं क्या अब ले लूं तो उन्होंने कहा नियम के अनुसार छुट्टियां तीस मार्च को खतम हो जाती हैं. तो आपकी चालीस छुट्टियां पिछले दो साल की खत्म हैं. मैं बड़ा दुखी हुआ. मैंने बहस की तो उन्होंंने कहा कि आपकी गलती है. हमने तो आपसे कहा नहीं था कि छुट्टियां न लें. आपकी छुट्टी है लेना ही चाहिए. नहीं ली तो आपकी गलती है. उस दिन के बाद मैंने तय कर लिया कि एक एक छुट्टी ज़रूर लेना है दफ्तर में. मैंने उस दिन के बाद मेडिकल वाली छुट्टियां भी ली. थोड़ी भी तबियत खराब रही या मूड नहीं हुआ तो छु्ट्टी ले ली. सालाना छुट्टियां बचा कर लेने लगा. इससे मेरा जीवन बेहतर हो गया. मैं किताब पढ़ने लगा. आर्ट करने लगा. दफ्तर में कई लोग दिन रात काम करते थे. लेकिन काम की कोई बखत नहीं थी. आगे वही बढ़ रहे थे तो जो मक्खन लगा रहे थे. कई लोग थे मेरे दफ्तर में जो सुबह आठ बजे आते और रात के आठ बजे जाते. मैं उनको गरियाता रहता था कि तुम लोग माहौल खराब कर रहे हो. मैं अपने अनुभव के बाद कभी भी समय से अधिक नहीं रूका और सार्वजनिक रूप से कहता रहा कि जो आदमी बिना किसी ब्रेकिंग न्यूज़ के दफ्तर में रूक रहा है समझो वो कामचोर है या नाकारा जो आठ घंटे में अपना काम पूरा नहीं कर पाता है. इससे मक्खनबाज़ों को बहुत दिक्कत हुई और उन्होंने मेरे खिलाफ शिकायतें की कि मैं माहौल खराब कर रहा हूं. लेकिन किसी ने मुझसे कुछ कहा नहीं. मैं इसी तरह से आठ घंटे की शिफ्ट में जितने ब्रेक अलाउड हैं वो भी लेता था. मैं जानता हूं बहुत लोग सीट पर चिपक कर बैठते हैं और दर्शाते हैं कि वो बहुत महान काम कर रहे हैं. मान लीजिए बात. चार पांच साल के बाद कमर में दर्द होगा तो संपादक बोलेगा कि आपकी गलती है. हमारे यहां एक वरिष्ठ थे. उनको डेंगू हुआ. छुट्टियां खत्म हो गईं. बीमारी ने उनके पैरों को कमजोर कर दिया था. हमारे यहां संपादक को अधिकार था कि छुट्टियां बढ़ा दे. संपादक ने बढ़ा दीं. एचआर खच्चर था. उसने पैसे काट लिए. बाद में पैसे वापस हुए क्योंकि संपादक अच्छा था. कहने का मतलब है कि आपको नौकरी में जो अधिकार मिले हैं छुट्टी के वो ज़रूर लीजिए. छुट्टी लेकर आप अहसान नहीं कर रहे हैं. छुट्टी लेंगे तो तरोताजा काम करते रहेंगे तो दफ्तर खुश रहेगा. जो छुट्टी नहीं लेते हैं दफ्तरों में वो मूल रूप से इनसेक्योर और नकारा लोग होते हैं जो कामचोरी करते हैं. हीरो बनने के लिए काम करना चाहिए. छुट्टी कैंसल कर के क्यों हीरो बनना. जब ज़रूरत होती थी तो मैं छुट्टियां कैंसल कर के भी काम पर लौटा हूं. तो ऐसा नहीं है कि दफ्तर में ज़रूरत हो तो मैं टांग पर टांग चढ़ा कर बैठा हूं लेकिन जबरदस्ती दफ्तर जाने की ज़रूरत नहीं होनी चाहिए. एक और महानुभाव थे. जब भी किसी व्यक्ति का निधन होता तो ये आदमी छुट्टी हो तो दफ्तर पहुंच जाता और तीन लोगों से फोन पर बाइट लेकर स्टोरी कर देता और एवज में छुट्टी ले लेता. ये सिलसिला चार पांच बार चला फिर किसी ने संपादक को कहा कि जो काम ये घर से आकर करते हैं वो तो यहां दफ्तर में जो बैठा है वो कर सकता है तो इन्हें बेवजह इस आसान काम की छुट्टी क्यों दी जा रही है. बाइलाइन चाहिए तो घर से कर के भेज दें. संपादक को समझ में आई बात और उनको मना किया गया कि आप दफ्तर आएंगे बिना बुलाए छुट्टी के दिन तो उसकी छुट्टी नहीं मिलेगी. बंदे ने आना तो बंद कर ही दिया फोन वाले इंटरव्यू भी बंद हो गए. यही सब है. सोचा बता दें. छुट्टी की महिमा अपरंपार है. लेते रहना चाहिए. आदमी का जनम नौकरी करने के लिए नहीं हुआ है जीने के लिए हुआ है. नौकरी कर के आज तक कोई महान नहीं हुआ है. बाकी इमेज बनाना हो तो अलग बात है. मोदी जी बिना छुट्टी लिए ही लाल हुए जा रहे हैं. हम भी पीएम होंगे तो कभी छुट्टी नहीं लेंगे. वैसे छुट्टी मनमोहन सिंह भी नहीं लेते थे लेकिन बोलते नहीं थे इस बारे में. खैर आजकल तो बोलना छोड़ो फोटो अपलोड करने का भी चलन है.

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Dakhal News 15 October 2020

समाज

बैतूल। जिला अस्पताल प्रबंधन की लापरवाही और संवदनहीनता सोमवार रात सामने आई। गर्भवती महिला को प्रसव के लेकर आई एंबुलेंस महिला को अस्पताल के गेट पर ही छोड़कर चली गई। समय पर महिला को प्रसूती वार्ड में भर्ती न किए जाने पर महिला ने फर्श पर ही बच्चे को जन्म दे दिया। फर्श पर बिलखते नवजात को देख जब लोगों ने आपत्ति ली, तब जाकर स्वास्थ्यकर्मियों ने महिला को वार्ड में भर्ती किया।    प्राप्त जानकारी के अनुसार जिला मुख्यालय से 12 किमी दूर बोड़ी गांव की वृद्धा मुन्नी बाई प्रसव पीड़ा से तड़पती अपनी बेटी को लेकर सोमवार रात 108 एम्बुलेंस से जिला अस्पताल पहुंची थी। गांव से आशा कार्यकर्ता ने भी उसे अकेले भेज दिया। एम्बुलेंस चालक ने गर्भवती को प्रसूति वार्ड के गेट पर ही उतार दिया और वृद्ध महिला को पर्ची बनवाने के लिए ट्रामा सेंटर से दूर मुख्य अस्पताल भेज दिया। इस बीच गर्भवती गेट पर ही आधे घंटे तक तड़पती रही और रात करीब 11 बजे वहीं बच्चे को जन्म दे दिया। रक्तस्राव अधिक हो जाने के कारण महिला बेहोश हो गई।  लोगों की नजर जब प्रसूता पर पड़ी तो उन्होंने हंगामा कर दिया, जिसके बाद नींद से जागे अस्पताल प्रशासन ने प्रसूता को भर्ती कराया। ड्यूटी पर तैनात डॉक्टर रंजीत राठौर का कहना है कि 108 एंबुलेंस चालक की लापरवाही है। जब मरीज की कंडीशन सीरियस थी तो चालक को इसकी जानकारी स्टाफ को देनी थी लेकिन वह प्रसूता को गेट पर ही उतार कर भाग गया।    अस्पताल के सिविल सर्जन अशोक बारंगा का कहना है कि उन्हें इसकीं जानकारी नही है, ऐसा हुआ है तो पता लगाते हैं किसकी गलती है। वहीं, सीएमएचओ डॉ. प्रदीप धाकड़ का कहना है कि मामला गंभीर है, वे स्वयं अस्पताल जाकर जांच करेंगे।

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Dakhal News 20 October 2020

ग्वालियर। शहर के माधवनगर थाना क्षेत्र में कैलाश टॉकीज के पास इंद्रमणि मॉल के सामने सोमवार सुबह एक बाइक सवार युवक को एक बदमाश ने धक्का देकर गिराया और कुल्हाड़ी से हमला कर दिया, जिससे वह गंभीर रूप से घायल हो गया। सूचना मिलने पर पुलिस मौके पर पहुंची और युवक को गंभीर हालत में अस्पताल पहुंचाया, जहां उसका उपचार जारी है। पुलिस ने हमलावर के खिलाफ प्रकरण दर्ज कर मामले को जांच में लिया है। प्रारंभिक जांच में पुराना विवाद सामने आया है।   पुलिस के अनुसार, शहर के नई सडक़ स्थित शांति नगर निवासी समीर खान शिंदे की छावनी में एक दुकान पर मैकेनिक का काम करता है। वह रोजाना की तरह सोमवार सुबह घर से दुकान जाने के लिए निकला था, तभी कैलाश टाकीज के पास स्थित इंद्रमणि मॉल के सामने एक युवक ने उसकी बाइक को धक्का देकर गिरा दिया और कुल्हाड़ी से जानलेवा हमला कर दिया। इसके बाद युवक अपनी बाइक लेकर वहां से भाग गया। स्थानीय लोगों की सूचना पर पुलिस मौके पर पहुंचकर घायल को अस्पताल पहुंचाया और मामले की जांच शुरू की।    पुलिस के अनुसार, प्रारंभिक जांच में हमलावर की पहचान अनवर खान के रूप में हुई है। बताया गया है कि समीर से पहले भी उसका विवाद होता रहा है। संभवत: पुराने विवाद के चलते ही यह हमला हुआ है। समीर पर कुल्हाडी से पांच बार किये गये हैं, जिससे उसकी दो हड्डियां टूट गई हैं और फिलहाल उसकी हालत गंभीर है। पुलिस हमलावर की तलाश में जुटी है।

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Dakhal News 19 October 2020

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अभिनेत्री दिव्या खोसला कुमार और जॉन अब्राहम की फिल्म 'सत्‍यमेव जयते 2' की शूटिंग आज से शुरू हो रही है। यह फिल्म 2018 की एक्शन थ्रिलर फिल्म 'सत्यमेव जयते' की अगली कड़ी है। फिल्म 'सत्‍यमेव जयते 2' में अभिनेता जॉन अब्राहम के साथ दिव्या खोसला कुमार मुख्य भूमिका में हैं। इस फिल्म को भूषण कुमार और निखिल आडवाणी प्रोड्यूस करेंगे, वहीं मिलाफ जावेरी इस फिल्म को निर्देशित करेंगे। टीम लखनऊ में आज से इस फिल्म की शूटिंग शुरू कर रही है और यह अगले साल जनवरी तक चलेगी। फिल्म 'सत्‍यमेव जयते 2' अगले साल ईद के मौके पर 12 मई को रिलीज होगी। यह जानकारी फिल्म एंड ट्रेड एनालिस्ट तरण आदर्श ने दी।    तरण आदर्श ने मंगलवार को ट्विटर पर तस्वीर शेयर कर लिखा-'शूटिंग आज से शुरू होगी...जॉन अब्राहम और दिव्या खोसला कुमार अभिनीत सत्यमेव जयते 2 का फिल्मांकन शुरू, आज से लखनऊ में शुरू हुई शूटिंग जनवरी 2021 तक जारी रहेगी। अगले साल की शुरुआत में मुंबई के एक स्टूडियो में भी शूट किया जाएगा। मिलाप जवेरी द्वारा निर्देशित यह फिल्म ईद पर 12 मई 2021 में रिलीज होगी।' निर्देशक मिलाप जावेरी ने कहा कि पहले दिन हम केवल मुख्य जोड़ी के साथ शूटिंग करेंगे। बाद में हर्ष छाया, गौतमी कपूर, शाद रंधावा, अनूप सोनी और साहिल वैद जैसे अन्य कलाकार शामिल होंगे। उन्होंने कहा कि फिल्म की शूटिंग लखनऊ में करेंगे, जिसमें महलों और कॉलेजों जैसी विरासत संरचनाओं को भी शामिल किया जाएगा। निर्माता भूषण कुमार ने कहा कि मिलाप ने लॉकडाउन के दौरान जॉन के साथ एक्शन दृश्यों पर काफी मेहनत की है। लखनऊ में शूटिंग के अलावा टीम मुंबई में कुछ हिस्सों का फिल्मांकन भी करेगी। 'सत्‍यमेव जयते 2' के पहले पार्ट के निर्देशक भी मिलाप जावेरी थे। 15 अगस्त 2018 को 'सत्यमेव जयते' रिलीज हुई थी। जॉन अब्राहम की फिल्म 'सत्यमेव जयते' ने 118 करोड़ रुपये का कलेक्शन किया था।   वर्कफ्रंट की बात करें तो बॉलीवुड अभिनेता जॉन अब्राहम जल्द ही संजय गुप्ता द्वारा निर्देशित फिल्म 'मुंबई सागा' में दिखाई देंगे। इसके अलावा वह फिल्म 'अटैक' में मुख्य भूमिका में नजर आएंगे। लक्ष्य राज आनंद के निर्देशन में बन रही यह फिल्म 14 अगस्त को रिलीज होने वाली थी, लेकिन कोरोना की वजह से इसकी रिलीज डेट आगे बढ़ गई है।

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Dakhal News 20 October 2020

टेलीविजन से लेकर फिल्मों तक का सफर तय करने वाली खूबसूरत अभिनेत्री अंकिता लोखंडे का एक वीडियो सोशल मीडिया पर काफी पसंद किया जा रहा है। इस वीडियो में अंकिता रणवीर सिंह और सोनाक्षी सिन्हा की फिल्म 'लूटेरा' के मशहूर गाने 'हवा के झोखे' पर साड़ी पहनकर थिरकती नजर आ रही हैं। इस वीडियो में अंकिता के खूबसूरत डांस के साथ-साथ उनकी अदाएं भी देखने लायक हैं। अंकिता ने खुद इस वीडियो को इंस्टाग्राम पर फैंस के साथ साझा करते हुए लिखा-'साड़ी डांस और अच्छा संगीत वाह क्या संयोग हैं।' सोशल मीडिया पर अंकिता के इस वीडियो को फैंस ने सिर्फ पसंद कर रहे हैं, बल्कि अपनी प्रतिक्रियाएं भी दे रहे हैं। अंकिता लोखंडे ने अपने अभिनय करियर की शुरुआत साल 2007 'इंडियाज बेस्ट सिने स्टार की खोज' के एक प्रतिभागी के रूप में की थी। इसके बाद वह साल 2009 में जीटीवी के मशहूर धारावाहिक 'पवित्र रिश्ता' में लीड रोल में नजर आई और अपने शानदार अभिनय से घर-घर में मशहूर हो गई।   साल 2019 में अंकिता फिल्म 'मणिकर्णिका: द क्वीन ऑफ झांसी' से बॉलीवुड में डेब्यू किया। इसके बाद वह फिल्म बागी 3 में भी नजर आई। बीते दिनों अंकिता अपने एक्स ब्यॉयफ्रेंड एवं अभिनेता सुशांत सिंह राजपूत निधन के मामले में दिए गए अपने बयानों को लेकर चर्चा में थी।

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Dakhal News 20 October 2020

दखल क्यों

मुरली मनोहर श्रीवास्तव शिक्षा देने वाले शिक्षक तो देश में लाखों की संख्या में हैं लेकिन कुछ ऐसे विरले शिक्षक भी हैं, जो अपनी अनोखी शिक्षण शैली के कारण देश-दुनिया में प्रसिद्ध हैं। हम जिन शिक्षकों के बारे में आपको बताने जा रहे हैं, वे बहुत अलग और अनोखे हैं। सोनम वांगचुक आपने '3 इडियट्स' फिल्म में आमिर खान को जिस शख्सियत का किरदार निभाते देखा था, वास्तव में वे हैं लद्दाख के शिक्षाविद् सोनम वांगचुक। बीते तीन दशकों से शिक्षा की अलख जगाए रखने वाले शिक्षक और मैकेनिकल इंजीनियर वांगचुक उन चंद भारतीय लोगों में से हैं, जिन्हें उनके अनोखे प्रयास के लिए रेमन मैग्सेसे पुरस्कार मिल चुका है। उन्होंने सरकार, समाज और अन्य संस्थाओं के साथ मिलकर शिक्षा को व्यावहारिक और उपयोगी बनाने के अनूठे प्रयास किए हैं। लद्दाख जैसे शिक्षा के मामले में पिछड़े इलाके के छात्रों में शिक्षा के प्रति जो जागरुकता आई है, उसका श्रेय इन्हीं को जाता है। फेल होने वाले छात्रों की शिक्षा के लिए भी इन्होंने वैकल्पिक व्यवस्था की है, जो उन्हें लगातार आगे बढ़ने की प्रेरणा देती है। सुगत मित्रा 2013 में टीइडी (टेक्नोलॉजी, एंटरटेनमेंट, डिजाइन) अवार्ड से सम्मानित हो चुके, कोलकाता से ताल्लुक रखने वाले सुगत मित्रा के 'स्कूल इन द क्लाउड' का कॉन्सेप्ट यह है कि बच्चे ही एक-दूसरे को पढ़ाएं। पेशे से एजुकेशनल रिसर्चर सुगत मित्रा का मानना है कि बच्चों में खुद पढ़ने और दूसरों को पढ़ाने की अद्भुत क्षमता होती है। उनका यह भी मानना है कि अगर हम अपने बच्चों को कंप्यूटर की पर्याप्त सुविधा दें तो वे काफी कुछ खुद ही सीख सकते हैं। उन्हें मिनिमम गाइडेंस के साथ कंप्यूटर की शिक्षा मोटिवेशन और एंटरटेनमेंट के माध्यम से दे सकते हैं। गगन दीप सिंह राजस्थान के जैसलमेर के रहने वाले गगनदीप सिंह ने अबतक दर्जनों दृष्टिहीन बच्चों की जिंदगी में शिक्षा के दीप जलाकर उनकी जिंदगी रोशन की है। इन्होंने हर बच्चे की समस्या के अनुसार अलग शैक्षिक प्रोग्राम बनाया और उसे पढ़ाया। बच्चों के साथ-साथ इन्होंने उनके परिवारों की भी काउंसलिंग की ताकि वे अपने बच्चे को फुल सपोर्ट दे सकें। गगनदीप सिंह ने नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ द विजुअली इंपेयर्ड में प्रशिक्षण लिया है। ये बच्चों को ब्रेलर्स जैसे इक्विपमेंट का उपयोग भी सिखाते हैं। बाबर अली पश्चिम बंगाल के मुर्शिदाबाद जिले के एक छोटे से गांव में रहने वाले बाबर अली ने उस उम्र से शिक्षक की भूमिका निभानी शुरू कर दी, जिस उम्र में लोग खुद पढ़ना सीखते हैं। जी हां! बाबर अली 9 वर्ष की उम्र से लोगों को पढ़ा रहे हैं। आज 23 साल के हो चुके बाबर अली किसी तरह से बनाए अपने स्कूल में 300 से ज्यादा गरीब बच्चों को पढ़ा रहे हैं। इस काम के लिए उन्होंने 6 शिक्षकों को भी रखा है। आदित्य कुमार 'साइकिल गुरुजी' के नाम से मशहूर साइंस ग्रेजुएट आदित्य कुमार शिक्षा के सच्चे वाहक और प्रसारक हैं। ये शिक्षा को उन जगहों तक पहुंचाते हैं, जहां तक स्कूलों की पहुंच नहीं। आदित्य हर रोज अपनी साइकिल पर सवार होकर 60-65 किलोमीटर सफर करके लखनऊ के आसपास के इलाकों में झुग्गी-झोपड़ी में रहने वाले गरीब बच्चों को पढ़ाते हैं। स्वयं गरीब परिवार में जन्मे आदित्य 1995 से यह अनोखा कार्य कर रहे हैं। आदित्य अपने साथ साइकिल पर ही एक बोर्ड लेकर घूमते हैं। जहां उन्हें कुछ छात्र मिलकर रोक लेते हैं, वे वहीं बैठकर पढ़ाने लगते हैं। अरविंद गुप्ता खेल-खेल में बच्चों को विज्ञान जैसे गूढ़ विषय का ज्ञान देना कोई अरविंद से सीखे। ये बच्चों को खिलौने बनाने की प्रक्रिया के माध्यम से विज्ञान के पाठ पढ़ा देते हैं। खिलौने भी बाजार से खरीदे मैटीरियल से नहीं बनवाते बल्कि कबाड़ से बनवाते हैं। खिलौने बनाने के एक-एक चरण के माध्यम से वे विज्ञान की कोई नई बात सिखा देते हैं। ये अपनी फन टीचिंग टेकनीक के वीडियो यू-ट्यूब पर भी अपलोड करते हैं। राजेश कुमार शर्मा 'अंडर द ब्रिज स्कूल' के संस्थापक राजेश कुमार शर्मा दिल्ली के एक मेट्रो ब्रिज के नीचे लगभग 200 बच्चों का स्कूल लगाते हैं। उनके छात्र आसपास की बस्तियों में रहने वाले बच्चे हैं, जिन्हें अपनी गरीबी के कारण कभी स्कूल जाने का सौभाग्य नहीं मिला। इनके स्कूल में भले ही कोई इमारत, कुर्सी या अन्य सुविधाएं न हों लेकिन बच्चों को शिक्षा अच्छी तरह दी जाती है। यह स्कूल इन्होंने 2005 से शुरू किया। कभी-कभी यहां कुछ चर्चित शख्सियतों को भी बुलाया जाता है। दिलचस्प बात यह है कि राजेश कुमार पेशे से कभी शिक्षक नहीं रहे। आनंद कुमार बिहार के पटना जिले के रहने वाले शिक्षक आनंद कुमार न सिर्फ भारत बल्कि पूरी दुनिया के इंजीनियरिंग स्टूडेंट्स के बीच एक चर्चित नाम हैं। इनका 'सुपर 30' प्रोग्राम विश्व प्रसिद्ध है। इसके तहत वे आईआईटी-जेईई के लिए ऐसे तीस मेहनती छात्रों को चुनते हैं, जो बेहद गरीब हों। 2018 तक उनके पढ़ाए 480 छात्रों में से 422 अबतक आईआईटीयन बन चुके हैं। आनंद कुमार की लोकप्रियता का अंदाजा आप इसी बात से लगा सकते हैं कि डिस्कवरी चैनल भी उनपर डॉक्यूमेंट्री बना चुका है। उन्हें विश्व प्रसिद्ध मेसाच्युसेट्स इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी और हार्वर्ड युनिवर्सिटी से भी व्याख्यान का न्योता मिल चुका है। आरके श्रीवास्तव बिहार के रोहतास जिले के रहने वाले आरके श्रीवास्तव देश में मैथेमैटिक्स गुरु के नाम से मशहूर हैं। चुटकुले सुनाकर खेल-खेल में जादुई तरीके से गणित पढ़ाने का उनका तरीका लाजवाब है । कबाड़ की जुगाड़ से प्रैटिकल कर गणित सिखाते हैं। सिर्फ 1 रुपया गुरु दक्षिणा लेकर स्टूडेंट्स को पढ़ाते हैं, आर्थिक रूप से सैकड़ों गरीब स्टूडेंट्स को आईआईटी, एनआईटी, बीसीईसीई सहित देश के प्रतिष्ठित संस्थानों मे पहुँचाकर उनके सपने को पंख लगा चुके हैं। वर्ल्ड बुक ऑफ रिकॉर्डस और इंडिया बुक ऑफ रिकॉर्ड में भी आरके श्रीवास्तव का नाम दर्ज है। राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद भी आर के श्रीवास्तव के शैक्षणिक कार्य शैली की प्रशंसा कर चुके हैं। इनके द्वारा चलाया जा रहा नाइट क्लासेज अभियान अद्भुत, अकल्पनीय है । स्टूडेंट्स को सेल्फ स्टडी के प्रति जागरूक करने लिये 250 क्लास से अधिक बार पूरी रात लगातार 12 घंटे गणित पढ़ा चुके हैं। विश्व प्रसिद्ध गूगल ब्वॉय कौटिल्य के गुरु के रूप में भी देश इन्हें जानता है। रोशनी मुखर्जी बैंगलुरु से ताल्लुक रखने वाली डिजिटल टीचर रोशनी मुखर्जी न तो कहीं पढ़ाने जाती हैं, न उन्होंने कोई स्कूल खोल रखा है। इसके बावजूद वे हजारों स्टूडेंट्स की फेवरेट टीचर हैं। असल में रोशनी ने अपना ऑनलाइन एजुकेशन प्लेटफॉर्म बना रखा है, जिसका लाभ हजारों विद्यार्थी उठा रहे हैं। ये अपने वीडियो यू-ट्यूब पर अपलोड करती हैं, जिनकी मदद से स्टूडेंट्स पढ़ाई करते हैं। उन्हें अपने विद्यार्थियों से लगातार फीडबैक भी मिलता है। (लेखक स्वतंत्र टिप्पणीकार हैं।)

Dakhal News

Dakhal News 20 October 2020

आर.के. सिन्हा जम्मू-कश्मीर के नज़रबंद नेताओं ने रिहा होते ही फिर पुरानी खुराफात चालू कर दी है। राज्य के पूर्व मुख्यमंत्रियों फारुख अब्दुल्ला, महबूबा मुफ़्ती, उमर अब्दुल्ला और जम्मू-कश्मीर पीपुल्स कॉन्फ्रेंस, माकपा तथा जम्मू-कश्मीर अवामी नेशनल कॉन्फ्रेंस के नेताओं ने हाल ही में यह मांग कर दी कि भारत सरकार राज्य के लोगों को वो सारे अधिकार फिर से वापस लौटाए जो पाँच अगस्त 2019 से पहले उनको हासिल थे। मतलब यह कि वे चाहते हैं कि संविधान के अनुच्छेद 370 की पुनः बहाली हो जो संसद के दोनों सदनों ने रद्द कर दिया है, ताकि ये मौज कर सकें। ये तो भारत के कट्टर शत्रु चीन और पाकिस्तान की भाषा बोल रहे हैं। दोनों देश भी यही चाहते हैं कि भारत जम्मू-कश्मीर के विशेष दर्जे की पुनः बहाली करे। इन नेताओं की बैठक में प्रस्ताव भी पारित किया गया, जिसे गुपकार घोषणापत्र नाम दिया गया था। हालांकि इन नेताओं की मांग ख्वाबों में भी पूरी होती नहीं दिख रही। जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 को हटाने के हक में संसद और सरकार के साथ सारा देश खड़ा था। आखिर पता तो चले कि अनुच्छेद 370 में क्या बात है जिसकी मांग कश्मीरी नेता कर रहे हैं? क्या यह सच नहीं है कि अनुच्छेद 370 कश्मीर और भारत को एक-दूसरे से पूरी तरह नहीं जोड़ती था? गृहमंत्री अमित शाह ने सही कहा था कि अनुच्छेद 370 ने भारत और दुनिया के मन में यह गलत और भ्रामक शंका पैदा कर दी थी कि कश्मीर भारत का अभिन्न अंग है या नहीं? सारा देश जानता है कि बिना अपनी कैबिनेट को विश्वास में लिए आकाशवाणी के माध्यम से कश्मीर मुद्दे को संयुक्त राष्ट्र ले जाने की विवादास्पद घोषणा पंडित जवाहर लाल नेहरू ने की थी। किधर हैं हुर्रियत कांफ्रेंस के नेता पाकिस्तान से चंदा मांगने वाले अब यह मांग कर रहे कि कश्मीर में पुरानी व्यवस्था फिर बहाल हो। अब किधर हैं हुर्रियत कांफ्रेंस के नेता? वे तो दिन-रात पाकिस्तान का ही गुणगान किया करते थे। सारा देश भलीभांति जानता है कि अनुच्छेद 370 के कारण ही कश्मीर में अलगाववाद बढ़ा था। क्या अब्दुल्ला या महबूबा मुफ्ती ने कभी राज्य के अल्पसंख्यकों के हक भी बोला? क्या वहां हिंदू, जैन, बौद्ध और सिख नहीं रहते? अनुच्छेद 370 से राज्य के अल्पसंख्यकों के साथ घोर अन्याय हो रहा था। राज्य में 1989 से लेकर 2019 तक हजारों लोग बिना वजह मारे गए। अब जब वहां हालात सामान्य हो चुके हैं तो फिर देश क्या उसी पुराने रास्ते पर चले जिसपर वह पिछले 70 सालों से गलत ढंग से चल रहा था? क्यों कश्मीर के नेता या उनके लिए आंखें नम करने वाले हिमायती यह नहीं बताते कि अनुच्छेद 370 किस तरह कश्मीर का कल्याण कर रहा था? यह विकास, महिला, गरीब विरोधी और आतंकवाद को बढ़ावा देने वाला था और वहां के मुठ्ठी भर परिवारों को भ्रष्टाचार की खुली छूट दे रखी थी जो पूरी तरह बंद हो जाने से वहां के इन भ्रष्ट नेताओं में बेचैनी फैली हुई है। जिस अनुच्छेद 370 की बहाली की मांग हो रही है, उसकी वजह से राज्य में बाल विवाह कानून लागू नहीं कर सकते थे? क्या कश्मीरी नेता फिर से यही चाहते हैं? इसी के चलते वहां कभी अल्पसंख्यक आयोग नहीं बना। वहां हिन्दू, जैन, सिख और बौद्ध अल्पसंख्यकों के रूप रहते हैं। हालांकि शिक्षा का अधिकार देश की संसद ने सबको दिया पर जम्मू-कश्मीर के बच्चों को यह अधिकार नहीं था क्योंकि वहां अनुच्छेद 370 लागू था। कश्मीर में अब खारिज कर दिए गए ये नेता यह क्यों नहीं बताते कि राज्य में आरटीआई एक्ट लागू क्यों नहीं हो पाया? इसी धारा 370 के कारण न? ऐसे अनेकों उदहारण हैं जिससे कश्मीर में घोर असमानता, अन्याय, अत्याचार और खुले भ्रष्टाचार को छूट मिली हुई थी। शांति की बहाली बहरहाल, कश्मीरी नेताओं की बैठक में कांग्रेस का कोई नुमाइंदा नहीं था। यह अच्छी बात कही जा सकती है। तो क्या माना जाए कि कांग्रेस ने भी अब महसूस करना चालू कर दिया है कि उसका अबतक राज्य में धारा 370 को समर्थन करना गलत था? हालांकि कांग्रेस के नेता तो यह भविष्यवाणी कर रहे थे कि इसके निरस्त करने के बाद खूनखराबे की स्थिति बन जाएगी। जबकि इसके हटने के बाद वहां अभूतपूर्व शांति की बहाली हो गई। कोरोना काल से पहले वहां स्कूल भी खुल गए थे। उनमें परीक्षाएं हो रही थीं। श्रीनगर में अस्पताल खुल गए थे। दरअसल अब कश्मीरी नेताओं को जमीनी हकीकत समझने और व्यवहारिक होने की जरूरत है। उन्हें जमीनी हकीकत अब समझ आ जानी चाहिए। उनकी बकवास सुनने वाला कोई नहीं है। वे चाहें तो करके देख लें आंदोलन। उन्हें समझ आ जाएगा कि वे राज्य की जनता का विश्वास पूरी तरह खो चुके हैं। उनसे सारा देश सवाल पूछ रहा है कि वे चीन और पाकिस्तान की भाषा क्यों बोल रहे हैं? चीन कह रहा है कि जम्मू- कश्मीर से विशेष राज्य का दर्जा खत्म करना अवैध और अमान्य है। वह भारत के आंतरिक मामले में दखल देकर अपनी औकात के बाहर चला गया। चीन ने पिछले साल भारत सरकार की तरफ से धारा 370 को हटाने के कदम को 'अस्वीकार्य' करार दिया था। उधर, कश्मीर पर भारत सरकार के कदमों से पाकिस्तान की नींद उड़ी ही हुई है। भारत द्वारा लिए गए फैसले के बाद पाकिस्तान में जबर्दस्त खलबली मच गई। पाकिस्तान के राष्ट्रपति आरिफ अल्वी ने संसद का संयुक्त सत्र बुलाया। संयुक्त सत्र में पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान ने भारत सरकार के फैसले को आरएसएस के एजेंडे को आगे बढ़ाने वाला कदम बताया। दिमाग से सनकी हो गए इमरान खान ने भारत के मुसलमानों को भड़काने और उकसाने वाली पूरी बकवास की। वे तब से बार-बार कह रहे हैं कि भारत में मुसलमानों को दोयम दर्जे का नागरिक माना जाता है। इस तरह की बयानबाजी करके इमरान खान यही साबित करते रहे कि वे घनघोर भारत विरोधी हैं और वे यही चाहते हैं कि पाकिस्तान में जो वे हिन्दुओं, सिखों और ईसाइयों के साथ अन्याय कर रहे हैं, वही भारत मुसलमानों के साथ यहाँ करे। वे भारत के मुसलमानों को भड़काने की कोशिश कर आहे हैं, जिसमें वे कभी सफल न होंगे। तो इस आलोक में ये क्यों न कहा जाए कि कश्मीरी नेता भारत के दुश्मनों के हाथों में खेल रहे हैं। जब चीन और पाकिस्तान भारत को जंग की धमकी दे रहे हैं तब कश्मीरी नेता वही अनाप-शनाप मांगे रख रहे हैं जो कभी पूरी नहीं होने वाली। इन्हें समझ आ जाना चाहिए कि जम्मू-कश्मीर की तरह भारत की एक-एक इंच भूमि पवित्र और खास है। कोई जगह कम या अधिक विशेष नहीं है। देशहित और कश्मीरी नेताओं के हित में यही होगा कि अब वे राज्य के विकास में सरकार का साथ दें और जनता का विश्वास पुनः प्राप्त करने की कोशिश करें। वे राज्य के उप-राज्यपाल मनोज सिन्हा से मिलकर काम करें। मनोज सिन्हा बेहद समझदार नेता हैं। वे सबको साथ लेकर चलने में यकीन भी करते हैं। लेकिन, चिंता यह है कि यदि राज्य का विकास हो जायेगा तो इन्हें पूछेगा कौन? (लेखक वरिष्ठ संपादक, स्तंभकार और पूर्व सांसद हैं।)

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Dakhal News 20 October 2020

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