Patrakar Priyanshi Chaturvedi
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मध्य प्रदेश में लाड़ली बहना योजना को लेकर एक बार फिर सियासी विवाद खड़ा हो गया है। सीहोर जिले के धामंदा गांव में एक सरकारी कार्यक्रम के दौरान राजस्व मंत्री करण सिंह वर्मा ने महिलाओं की कम मौजूदगी पर नाराजगी जताते हुए योजना से नाम कटवाने की धमकी दे दी। उन्होंने कहा कि क्षेत्र में 894 महिलाओं को हर महीने 1500 रुपये दिए जा रहे हैं, इसके बावजूद सरकारी कार्यक्रमों में उनकी भागीदारी बेहद कम है। मंत्री वर्मा ने मंच से कहा कि वह एक दिन सभी लाड़ली बहनों को बुलाएंगे और यदि उस दिन भी महिलाएं कार्यक्रम में नहीं आईं तो सीईओ को रिपोर्ट भेजकर उनके नाम योजना से कटवा दिए जाएंगे। उन्होंने यहां तक कहा कि “जिसका पैसा लेते हो, उसका बोलो भी।” मंत्री का यह बयान सामने आते ही सरकार की इस महत्वाकांक्षी योजना को लेकर सवाल उठने लगे हैं। यह पहला मामला नहीं है जब किसी मंत्री ने लाड़ली बहना योजना को लेकर ऐसी टिप्पणी की हो। करीब दो महीने पहले आदिवासी मंत्री विजय शाह भी इसी तरह की धमकी दे चुके हैं। रतलाम में एक बैठक के दौरान उन्होंने अधिकारियों से कहा था कि जो महिला लाभार्थी सरकारी कार्यक्रमों में आएंगी, उनकी राशि बढ़ाई जाए और जो नहीं आएंगी, उनका वेरिफिकेशन पेंडिंग रखा जाए। बाद में मंत्री शाह ने अपने बयान से पल्ला झाड़ लिया था, लेकिन ऐसे बयानों से बीजेपी सरकार और योजना की साख पर सवाल खड़े हो रहे हैं।
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दिसंबर 2025 में आयोजित परीक्षा के परिणाम आधिकारिक तौर पर जारी कर दिए गए हैं। इस परीक्षा में शामिल उम्मीदवार अब अपनी आवेदन संख्या और जन्मतिथि के माध्यम से लॉगिन कर स्कोरकार्ड डाउनलोड कर सकते हैं। यह परिणाम जूनियर रिसर्च फेलोशिप (JRF), असिस्टेंट प्रोफेसर पदों और पीएचडी प्रवेश के लिए पात्रता निर्धारित करता है। अंतिम उत्तर कुंजी की घोषणा अनंतिम उत्तर कुंजी पर प्राप्त आपत्तियों की समीक्षा के बाद की गई है, ताकि सभी प्राप्त अंकों और उत्तरों की पुष्टि सुनिश्चित की जा सके। परिणाम के साथ ही विषयवार कट-ऑफ अंक भी जारी कर दिए गए हैं। ये कट-ऑफ सामान्य, ओबीसी, एससी, एसटी और ईडब्ल्यूएस श्रेणियों के अनुसार अलग-अलग निर्धारित किए गए हैं। सामान्य और जनरल-ईडब्ल्यूएस श्रेणी के उम्मीदवारों के लिए दोनों पेपरों को मिलाकर न्यूनतम 40 प्रतिशत अंक आवश्यक हैं, जबकि एससी, एसटी, ओबीसी, पीडब्ल्यूडी और थर्ड जेंडर श्रेणी के उम्मीदवारों के लिए यह सीमा 35 प्रतिशत तय की गई है। केवल उन्हीं उम्मीदवारों को उत्तीर्ण घोषित किया गया है, जिन्होंने अपने संबंधित विषय और श्रेणी के लिए निर्धारित न्यूनतम कट-ऑफ अंक प्राप्त किए हैं। इस परीक्षा में कुल 7,35,592 अभ्यर्थियों ने भाग लिया। उम्मीदवार अपने रिजल्ट देखने के लिए आधिकारिक वेबसाइट पर जाएं, “Result/Scorecard” लिंक पर क्लिक करें, लॉगिन पेज पर आवेदन संख्या और जन्मतिथि दर्ज करें और Submit/Login बटन दबाएं। स्क्रीन पर स्कोरकार्ड दिखाई देगा, जिसे डाउनलोड या प्रिंट कर भविष्य के लिए सुरक्षित रखा जा सकता है।
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सुप्रीम कोर्ट ने प्रशांत किशोर की जन सुराज पार्टी द्वारा दाखिल उस याचिका पर सुनवाई करने से इनकार कर दिया, जिसमें 2025 के बिहार विधानसभा चुनावों के पूरे नतीजों को रद्द करने की मांग की गई थी। याचिका में आरोप लगाया गया था कि चुनाव के दौरान लगभग ₹15,600 करोड़ की नकद राशि मतदाताओं में बांटकर अवैध तरीके से जीत हासिल की गई। हालांकि, मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अगुवाई वाली पीठ ने याचिकाकर्ता को यह स्वतंत्रता दी कि वह इसी मांग को लेकर संबंधित हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटा सकती है। सुनवाई के दौरान CJI ने याचिका पर कड़ी टिप्पणी करते हुए कहा कि सुप्रीम कोर्ट इस तरह सीधे नोटिस जारी नहीं कर सकता और इसके लिए एक तय संवैधानिक प्रक्रिया होती है। उन्होंने इसे “कॉम्पोज़िट चुनाव याचिका” बताते हुए कहा कि सिर्फ चुनाव हारने के आधार पर पूरे चुनाव को रद्द करने की मांग करना उचित नहीं है। अदालत ने सवाल उठाया कि चुनाव में हार के बाद इस तरह की याचिका दायर करना किसी राजनीतिक दल की कैसी सोच को दर्शाता है। इसके साथ ही, मुख्य न्यायाधीश ने कल्याणकारी योजनाओं से जुड़े आरोपों पर भी आपत्ति जताई और कहा कि इस तरह के मुद्दे किसी राजनीतिक दल के बजाय जनहित में काम करने वाले व्यक्ति द्वारा उठाए जाने चाहिए। पीठ ने यह भी टिप्पणी की कि अगर अदालत ऐसे मामलों में राजनीतिक दलों की याचिकाएं स्वीकार करने लगे, तो सत्ता में आने के बाद वही दल भी ऐसे ही कदम उठाएगा। इन टिप्पणियों के साथ सुप्रीम कोर्ट ने याचिका को सुनवाई योग्य मानने से इनकार कर दिया।
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संसद परिसर का मकर द्वार किसी कॉलेज का गेट नहीं, बल्कि लोकतंत्र की गरिमा का प्रतीक है। ऐसे स्थान पर नेताओं का आचरण सिर्फ व्यक्तिगत भावनाओं का नहीं, बल्कि संस्था की मर्यादा का भी प्रतिनिधित्व करता है। राहुल गांधी और केंद्रीय मंत्री रवनीत सिंह बिट्टू के बीच हुई नोकझोंक ने इसी गरिमा पर सवाल खड़े किए। नेता प्रतिपक्ष होने के नाते राहुल गांधी से अपेक्षा थी कि वे संयम और राजनीतिक परिपक्वता का परिचय देंगे, लेकिन क्षणिक आवेग में दिया गया “गद्दार” जैसा शब्द न सिर्फ अनावश्यक था, बल्कि विपक्ष की जिम्मेदारी को भी कमजोर करता दिखा। यह सच है कि राजनीति में रिश्ते बदलते हैं और दल परिवर्तन अक्सर भावनात्मक टकराव लेकर आता है। रवनीत सिंह बिट्टू कभी राहुल गांधी के करीबी रहे, फिर उन्होंने कांग्रेस छोड़कर बीजेपी का दामन थामा। इस पृष्ठभूमि में कटुता स्वाभाविक हो सकती है, लेकिन सार्वजनिक मंच पर व्यक्तिगत खुन्नस का प्रदर्शन राजनीतिक शालीनता को नुकसान पहुंचाता है। प्रतिक्रिया में बिट्टू का “देश का दुश्मन” कहना भी उतना ही दुर्भाग्यपूर्ण रहा। दोनों तरफ से आई तीखी भाषा ने बहस के स्तर को गिराया और मुद्दों की जगह व्यक्तियों को केंद्र में ला खड़ा किया। राहुल गांधी की राजनीति में प्रतीकों की अहम भूमिका रही है—कभी संविधान की प्रति, तो अब पूर्व सेना प्रमुख की किताब। ये प्रतीक सरकार से सवाल पूछने का माध्यम हो सकते हैं, लेकिन आचरण और भाषा ही नेता की असली छवि गढ़ते हैं। संघर्ष के लंबे दौर में धैर्य का टूटना मानवीय है, पर नेतृत्व की कसौटी यही है कि कठिन क्षणों में भी संयम बना रहे। लोकतंत्र में तीखापन हो सकता है, पर मर्यादा के भीतर—ताकि संसद का मकर द्वार राजनीति का अखाड़ा नहीं, संवाद का द्वार बना रहे।
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टी20 वर्ल्ड कप 2026 से ठीक पहले ऑस्ट्रेलियाई टीम को एक और बड़ा झटका लगा है। अनुभवी तेज गेंदबाज जोश हेजलवुड चोट से पूरी तरह उबर नहीं पाने के कारण पूरे टूर्नामेंट से बाहर हो गए हैं। आयरलैंड के खिलाफ होने वाले पहले मैच से महज पांच दिन पहले यह फैसला लिया गया। हेजलवुड अब सिडनी में रहकर अपनी रिकवरी और रिहैबिलिटेशन पर ध्यान देंगे। ऑस्ट्रेलियाई चयनकर्ता टोनी डोडेमैड ने बताया कि फिलहाल हेजलवुड के स्थान पर किसी नए खिलाड़ी को टीम में शामिल नहीं किया जाएगा। उन्होंने कहा कि शुरुआती मैचों के लिए टीम के पास पर्याप्त विकल्प मौजूद हैं और जरूरत पड़ने पर बाद में रिप्लेसमेंट पर फैसला लिया जाएगा। चयनकर्ताओं के अनुसार, घरेलू माहौल में रहकर रिहैब पूरा करना हेजलवुड के लिए ज्यादा बेहतर रहेगा। हेजलवुड के बाहर होने के साथ ही ऑस्ट्रेलिया की तेज गेंदबाजी ‘बिग थ्री’ पूरी तरह टूर्नामेंट से नदारद हो गई है। पैट कमिंस पहले से चोटिल हैं, जबकि मिचेल स्टार्क अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट से संन्यास ले चुके हैं। मार्च 2011 के बाद यह पहला वर्ल्ड कप होगा, जब स्टार्क, कमिंस और हेजलवुड में से कोई भी टीम का हिस्सा नहीं होगा। मौजूदा स्क्वाड में अब केवल जेवियर बार्टलेट और बेन ड्वारशुइस ही पूरी तरह फिट मुख्य तेज गेंदबाज बचे हैं।
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कंसोर्टियम ऑफ एनएलयू (Consortium of NLUs) ने 5 फरवरी 2026 को CLAT 2026 की तीसरी मेरिट लिस्ट जारी कर दी है। इस लिस्ट में उन उम्मीदवारों के नाम शामिल हैं जिन्हें तीसरे राउंड में राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालयों (NLU) में सीट मिली है। छात्र अपना रिजल्ट आधिकारिक वेबसाइट consortiumofnlus.ac.in पर जाकर चेक कर सकते हैं। CLAT 2026 की परीक्षा 7 दिसंबर 2025 को आयोजित हुई थी और अब उम्मीदवारों को तय समय के भीतर अपनी सीट का विकल्प चुनना होगा। तीसरे राउंड में उम्मीदवार फ्रीज, फ्लोट या एग्जिट का विकल्प चुन सकते हैं। सीट कन्फर्म करने की अंतिम तारीख 12 फरवरी 2026, दोपहर 1 बजे तक निर्धारित की गई है। इसके बाद चौथा राउंड सीट आवंटन 2 मई 2026 को सुबह 10 बजे होगा। चौथे राउंड में फ्रीज या फ्लोट विकल्प चुनने के बाद छात्र 2 से 8 मई 2026 के बीच एडमिशन प्रक्रिया पूरी कर सकते हैं। पांचवां और अंतिम राउंड 15 मई 2026 को होगा, और अंतिम फीस जमा करने की तारीख 30 मई 2026 शाम 5 बजे तक है। विकल्पों के अनुसार, फ्रीज का मतलब है कि छात्र को मिली सीट पसंद है और वह उसी को पक्का कर सकता है। फ्लोट चुनने पर छात्र वर्तमान सीट ले सकता है लेकिन बेहतर कॉलेज की उम्मीद भी रख सकता है। एग्जिट का विकल्प लेने पर उम्मीदवार CLAT काउंसलिंग प्रक्रिया से बाहर हो जाता है। उम्मीदवारों को सलाह दी जाती है कि समय रहते अपने विकल्प चुनकर सीट को सुरक्षित करें।
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केरल के पूर्व मुख्यमंत्री और दिग्गज वामपंथी नेता वीएस अच्युतानंद को केंद्र सरकार ने मरणोपरांत पद्म विभूषण देने का ऐलान किया है, लेकिन उनके परिवार ने यह सम्मान स्वीकार करने से इनकार कर दिया है। अच्युतानंद के बेटे वीए अरुणकुमार ने बताया कि उन्हें गृह मंत्रालय की ओर से इस फैसले की आधिकारिक सूचना मिली थी, लेकिन परिवार ने वामपंथी मूल्यों और पार्टी की परंपरा के अनुरूप अवॉर्ड न लेने का निर्णय किया है। अरुणकुमार ने कहा कि उनके पिता को जनता से जो प्यार और सम्मान मिला, वही उनके लिए सबसे बड़ी उपलब्धि है। उन्होंने बताया कि अच्युतानंद ने हमेशा पार्टी के फैसलों और कम्युनिस्ट विचारधारा का सम्मान किया और सरकारी सम्मानों को स्वीकार करने को लेकर वाम आंदोलन का एक स्पष्ट राजनीतिक रुख रहा है। परिवार का मानना है कि लोगों के दिलों में उनकी जगह किसी भी सरकारी सम्मान से कहीं बड़ी है। यह पहली बार नहीं है जब किसी वामपंथी नेता या उनके परिवार ने नागरिक सम्मान लेने से इनकार किया हो। 1996 में तत्कालीन पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री ज्योति बसु ने भारत रत्न स्वीकार करने से मना कर दिया था, जिसके बाद प्रस्ताव वापस ले लिया गया। इसी तरह हरकिशन सिंह सुरजीत, बुद्धदेव भट्टाचार्य और ईएमएस नंबूदरीपाद के मामलों में भी पार्टी ने यही रुख अपनाया। वाम दलों का कहना रहा है कि उनके नेता समाज परिवर्तन के लिए काम करते हैं, न कि पुरस्कार पाने के लिए।
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भारत और अमेरिका के बीच लंबे समय से अटके व्यापार समझौते पर सहमति बन गई है। इस पर विपक्ष लगातार सवाल उठा रहा था कि कृषि क्षेत्र के लिए यह समझौता सुरक्षित रहेगा या नहीं। इस पर प्रतिक्रिया देते हुए कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने स्पष्ट कहा कि भारतीय किसानों के हित पूरी तरह सुरक्षित हैं। उन्होंने कहा कि चाहे छोटे किसान हों या बड़े, सभी कृषि उत्पाद सुरक्षित रहेंगे और ऐसी कोई चीज़ के लिए बाजार नहीं खोला गया है। शिवराज सिंह चौहान ने आगे कहा कि यह व्यापार समझौता कूटनीति, विकास और सम्मान का नया उदाहरण है। किसानों के हित पूरी तरह संरक्षित किए गए हैं और मुख्य अनाज, फल, बाजरा और डेयरी उत्पाद पूरी तरह सुरक्षित रहेंगे। उन्होंने कहा कि सरकार विवाद नहीं, बल्कि संतुलित संवाद और विकास में विश्वास करती है। वहीं विपक्ष पर निशाना साधते हुए उन्होंने कहा कि कांग्रेस और अन्य दल निराश और मानसिक रूप से परेशान हैं, इसलिए अंधाधुंध विरोध कर रहे हैं और अफवाहें फैला रहे हैं। उन्होंने यह भी बताया कि कपड़ा निर्यात बढ़ने से कपास किसानों को लाभ होगा और इससे देश के कृषि क्षेत्र में सकारात्मक प्रभाव पड़ेगा।
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नेटफ्लिक्स पर आने वाली फिल्म ‘घूसखोर पंडत’ के टाइटल को लेकर विवाद लगातार बढ़ता जा रहा है। उत्तर प्रदेश में इसे लेकर पुलिस ने डायरेक्टर और प्रोड्यूसर सहित पूरी टीम के खिलाफ FIR दर्ज कर ली है। मामला ब्राह्मण समुदाय को निशाना बनाने और धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने के आरोपों से जुड़ा है। लखनऊ पुलिस ने सोशल मीडिया और ओटीटी प्लेटफॉर्म पर शांति व्यवस्था बिगाड़ने वालों पर सख्त कार्रवाई का ऐलान किया है। फिल्म के प्रोड्यूसर नीरज पांडे ने अब इस पूरे मामले पर अपनी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा कि फिल्म बनाने का मकसद केवल दर्शकों को मनोरंजन देना था। विवाद को देखते हुए उन्होंने प्रमोशनल सामग्री को हटा दिया है ताकि दर्शक पहले पूरी फिल्म देखकर कहानी को समझ सकें, न कि सिर्फ टाइटल या टीजर के आधार पर राय बना लें। नीरज पांडे ने साफ किया कि फिल्म जल्द ही दर्शकों के सामने पेश की जाएगी। फिल्म का निर्देशन रितेश शाह ने किया है और इसमें मनोज बाजपेयी भ्रष्ट पुलिस अफसर ‘अजय दीक्षित’ के किरदार में नजर आएंगे, जिन्हें विभाग में ‘पंडित’ के नाम से जाना जाता है। इसके अलावा नुसरत भरूचा, साकिब सलीम और दिव्या दत्ता भी अहम भूमिकाओं में हैं। कहानी करप्ट सिस्टम और उसमें फंसे एक अफसर के इर्द-गिर्द घूमती है, जिसका उद्देश्य समाज में भ्रष्टाचार और नीतिगत मुद्दों पर रोशनी डालना है।
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एआर रहमान के हालिया बयान और इसके बाद अरिजीत सिंह के प्लेबैक सिंगिंग से किनारा करने के फैसले ने म्यूजिक इंडस्ट्री में हलचल मचा दी है। अब इस मुद्दे पर दिग्गज सिंगर–गीतकार लकी अली ने भी खुलकर अपनी बात रखी है। पीटीआई से बातचीत में लकी अली ने कहा कि म्यूजिक इंडस्ट्री में काम करना बिल्कुल आसान नहीं है और किसी कलाकार के ऐसे फैसले के पीछे गहरी पीड़ा और टूटन छिपी होती है। लकी अली ने कहा, “किसी म्यूजिशियन की स्थिति को समझने के लिए उसके जूते पहनकर चलना पड़ता है। अगर अरिजीत ने यह कदम उठाया है, तो जरूर उसके भीतर कुछ टूट-सा गया होगा। मैं उनके फैसले का पूरा समर्थन करता हूं। यह कोई नुकसान नहीं है, बल्कि एक नया रास्ता है। वह फिर गाएंगे, लेकिन शायद हालात पहले जैसे नहीं होंगे।” उन्होंने यह भी जोड़ा कि हर कलाकार को जीवन में अपना रास्ता खुद बनाना पड़ता है, जैसे उन्होंने अपने करियर में किया। अपने अनुभव साझा करते हुए लकी अली ने कहा कि इंडस्ट्री में कुछ भी आसानी से नहीं मिलता, हर कलाकार को खुद को साबित करना होता है और अपने फैसलों पर भरोसा रखना पड़ता है। उन्होंने याद दिलाया कि उन्होंने भी टॉक्सिक माहौल से ऊबकर बॉलीवुड से दूरी बनाई थी। गौरतलब है कि 27 जनवरी को अरिजीत सिंह ने इंस्टाग्राम पोस्ट के जरिए नए प्लेबैक असाइनमेंट न लेने की घोषणा की थी, जिसके बाद संगीत जगत में बहस तेज हो गई है और सभी की नजरें उनके अगले कदम पर टिकी हैं।
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सिंगरौली जिले के माड़ा तहसील अंतर्गत छतौली गांव में समाजसेवी सीपी शुक्ला ने एनसीएल नेहरू चिकित्सालय, जयंत के डॉक्टरों के सहयोग से निशुल्क चिकित्सा शिविर का आयोजन किया। यह शिविर हर वर्ष की भांति इस वर्ष भी आयोजित किया गया, जिसमें माड़ा, छतौली और आसपास के आधा दर्जन से अधिक गांवों के 600 से ज्यादा लोगों ने लाभ उठाया। इस दौरान बीपी, शुगर, पीलिया, फाइलेरिया सहित विभिन्न रोगों से पीड़ित व्यक्तियों का मुफ्त इलाज किया गया। चिकित्सा शिविर में आंखों के कई मरीजों को भी निशुल्क इलाज की सुविधा दी गई। जरूरतमंदों को ऑपरेशन के लिए चित्रकूट भेजा गया और उन्हें मुफ्त चश्मा भी प्रदान किया गया। सीपी शुक्ला ने बताया कि वे हर वर्ष इस तरह के शिविर आयोजित कर ग्रामीणों को स्वास्थ्य सेवाओं का लाभ पहुँचाते हैं और इस पहल के माध्यम से लोगों को समय पर और गुणवत्तापूर्ण इलाज मुहैया कराया जाता है।
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छतरपुर। भारतीय महिला क्रिकेट की उभरती खिलाड़ी और अंतरराष्ट्रीय क्रिकेटर क्रांति गौड़ मंगलवार को प्रसिद्ध धार्मिक स्थल बागेश्वर धाम पहुंचीं। ऑस्ट्रेलिया दौरे से पहले उन्होंने धाम में माथा टेका और बागेश्वर बालाजी का आशीर्वाद प्राप्त किया। इसके साथ ही उन्होंने धाम के पीठाधीश्वर पं. धीरेन्द्र कृष्ण शास्त्री से भी मुलाकात कर आशीर्वाद लिया। क्रांति ने इस दौरान धाम में आयोजित होने जा रहे सामूहिक कन्या विवाह महोत्सव की भी सराहना की। वहीं बागेश्वर महाराज ने उनके खेल की प्रशंसा की और आगामी क्रिकेट मुकाबलों में उत्कृष्ट प्रदर्शन की शुभकामनाएं दीं। यह दौरा उनके लिए आस्था और खेल में प्रेरणा का महत्वपूर्ण अनुभव रहा।
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