विशेष

सिंगरौली। मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने सिंगरौली एनसीएल मैदान में शनिवार को आयोजित विशाल समारोह में 276करोड़ 35 लाख रुपये की लागत के विभिन्न निर्माण कार्यों का शिलान्यास एवं लोकापर्ण किया। इस अवसर पर उन्होंने आमजन को संबोधित करते हुये कहा कि सिंगरौली में 2024 तक हर गरीब को पक्का आवास उपलब्ध कराया जाएगा। सिंगरौली शहर और जिले के विकास की पूरी कार्य योजना तैयार की गई है। सिंगरौली का सर्वांगीण विकास किया जायेगा। समारोह मे मुख्यमंत्री ने प्रधानमंत्री शहरी आवास योजना के 504 हितग्राहियों को नये आवास की चाबी प्रदान की। उन्होंने समारोह में विभिन्न हितग्राहियों को हितलाभ का वितरण किया।   मुख्यमंत्री ने प्रारंभ में कन्यापूजन करके बेटियों को सम्मानित किया। उन्होंने कहा कि सिंगरौली जिले के लिए वरदान बनने वाली गोड़ सिचाई परियोजना का निर्माण कार्य शीघ्र पूरा कराया जाएगा। उन्होंने लोगों की करतल ध्वानि के बीच सिंगरौली मे माईनिंग कालेज की स्थापना की घोषणा की।    मुख्यमंत्री ने कहा कि सिंगरौली मे मेडिकल कालेज निर्माण के लिए डीपीआर तैयार कर लिया गया है। शीघ्र ही इसका निर्माण कार्य शुरू होगा। कौशल विकास के लिए आईटीआई कालेज की सीटों में वृद्धि की जायेगी। जिले में लग रहे बड़े उद्योगों में 75 प्रतिशत स्थान स्थानीय युवाओं के लिए होंगे। सिंगरौली के विकास मे किसी तरह की कसर नहीं रहेगी। उन्होंने अधिकारियो को निर्देश देते हुये कहा कि उद्योगों की स्थापना के साथ विस्थापितो का उचित पुनर्वास करें। कमिश्नर इसकी नियमित समीक्षा करें। सिंगरौली जिले मे अगले दो साल मे हर घर मे नल से जल की आपूर्ति की जायेगी।   मुख्यमंत्री ने कहा कि सिंगरौली शहर तथा जिले मे युवाओ को स्वारोजगार का अवसर देने के लिए कई प्रयास किये जा रहे हैं। पथ पर विक्रय करने वालों को बिना ब्याज का 10 हजार रुपये का ऋण दिया जा रहा है। आयुष्मान योजना से हर गरीब को हर साल 5 लाख रूपये तक के उपचार की सहायता मिलेगी। प्रदेश मे गुण्डे-बदमाशों तथा माफियाओं की अक्ल ठिकाने लगा दी गई है। भूमाफियाओं से 7 हजार करोड़ रुपये की सरकारी जमीन मुक्त कराई गई है। ड्रग्स माफियाओं को जेल भेजने तथा उनकी फैक्ट्री नष्ट करने की कार्यवाही की गई है। धर्मान्तरण तथा बेटियों का अपमान एवं शोषण करने वालो को जीवन भर जेल मे डालने के  लिए नये कानून बनाये गये हैं।   उन्होंने कहा कि जनता मेरी भगवान है उसके कल्याण का कार्य मेरी सर्वोच्च प्राथमिकता है संबल योजना से पुन: पात्र हितग्राहियो को लाभान्वित किया जा रहा है। शीघ्र ही मुख्यमंत्री कन्यादान योजना से गरीब बेटियों के विवाह होंगे।    मुख्यमंत्री ने कहा कि मैं करोना काल में मुख्यमंत्री बना, कोरोना से लडऩे के लिए दूरदर्शी प्रधानमंत्री जी के नेतृत्व मे सफल लड़ाई लड़ी गई। आज का दिन सिंगरौली ही नहीं, पूरे देश की जनता के लिए वैक्सीन के रूप मे कोरोना से मुक्त की संजीवनी बूटी लेकर आया है। पूरे प्रदेश में पहला कोरोना वैक्सीन का टीका उन सफाई कर्मियों तथा डाक्टरों को लगाया गया, जिन्होंने अपनी जान की पहवाह किये बिना करोना से हमे बचाने का प्रयास किया। कोरोना वैक्सीन पूरी तरह से सुरंक्षित और कारागार है। इसके बारे में फैलाई जा रही अफवाहों से घबराएं नहीं, अपनी बारी आने परे निर्भय होकर वैक्सीन लगवाये। समारोह में सांसद रीति पाठक तथा विधायक राम लल्लू वैश्य ने भी संबोधित किया।

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Dakhal News 16 January 2021

भोपाल। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने शनिवार सुबह 10.30 बजे दुनिया के सबसे बड़े देशव्यापी कोविड-19 वैक्सीनेशन अभियान की शुरुआत की। इस अवसर पर मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान भोपाल के हमीदिया अस्पताल पहुंचे और प्रदेशव्यापी कोरोना वैक्सीनेशन अभियान का शुभारम्भ किया। सबसे पहला टीका हमीदिया अस्पताल के स्वास्थ्य विभाग के कर्मचारी संजय यादव को लगाया गया। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने संजय यादव को बधाई देते हुए कहा कि कोरोना वैक्सीनेशन अभियान के प्रथम चरण में लगभग सवा चार लाख स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं को टीका लगाया जाएगा। कार्यक्रम में चिकित्सा शिक्षा मंत्री विश्वास सारंग भी मौजूद रहे।   मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि भारत का टीकाकरण अभियान बहुत ही मानवीय और महत्वपूर्ण सिद्धांतों पर आधारित है, जिसे सबसे ज्यादा जरूरी है, उसे सबसे पहले कोरोना का टीका लगेगा। जिसे कोरोना संक्रमण का रिस्क सबसे ज्यादा है, उसे सबसे पहले टीका लगेगा। उन्होंने कहा कि इतिहास में इस प्रकार का और इतने बड़े स्तर का टीकाकरण अभियान पहले कभी नहीं चलाया गया। दुनिया के 100 से भी ज्यादा देश ऐसे हैं, जिनकी जनसंख्या 3 करोड़ से भी कम है और भारत अपने पहले चरण में ही 3 करोड़ लोगों का टीकाकरण कर रहा है।   उन्होंने कहा कि आज से कोविड-19 वैक्सीनेशन शुरू हो गया है। इतने कम समय में यह केवल प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की दूरदर्शिता और संगठित प्रयासों के कारण ही संभव हो पाया है। प्रदेश को 5 लाख से ज्यादा वैक्सीन डोज प्राप्त हो चुके हैं। इन प्रयासों के लिए प्रधानमंत्री मोदी का अभिनंदन। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने पहले ही संकट को पहचान लिया था और टास्क फोर्स बना दिया था। प्रधानमंत्री के आह्वान पर सभी एकजुट हुए। हमने भी इसे मध्यप्रदेश में आउट ऑफ कंट्रोल नहीं होने दिया। कोविड-19 से नागरिकों के बचाव के लिए सभी आवश्यक प्रबन्ध किए गए।   मुख्यमंत्री चौहान ने कहा कि कोरोना वायरस से बचाव के लिए वैक्सीन संजीवनी बूटी जैसी है। मध्यप्रदेश में प्रथम चरण में लगभग 4 लाख 17 हजार हेल्थ केयर वर्कर्स को चरणबद्ध तरीके से वैक्सीनेट किया जाएगा। मध्यप्रदेश की 150 स्वास्थ्य संस्थाओं पर भी वैक्सीनेशन प्रारंभ किया जाएगा। टीकाकरण के लिए प्रसन्नता के माहौल के बीच एक उत्सव सा माहौल तैयार किया गया है। संबंधित टीकाकरण केंद्रों को काफी सजाया, संवारा गया है। वैक्सीन को सुरक्षित रखने के लिए भी आवश्यक उपाय भी किए गए हैं।   उन्होंने कहा कि 'कोविशील्ड' और 'कोवैक्सीन' दोनों पूरी तरह सुरक्षित हैं। उन्होंने सभी नागरिकों, जनप्रतिनिधियों, मीडिया के मित्रों से अपील की है कि वे वैक्सीन के बारे में किसी भ्रामक जानकारी या अफवाह को पनपने नहीं दें और इस महाअभियान को सभी मिलकर सफल बनाने में सहयोग दें। 

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Dakhal News 16 January 2021

राजनीति

भोपाल। प्रोटेम स्पीकर रामेश्वर शर्मा ने शनिवार को सिविल अस्पताल बैरागढ़ में कोरोना टीकाकरण का शुभारंभ किया। यहां डॉ. जीए अर्गल को पहली वैक्सीन लगाई गई। प्रोटेम स्पीकर शर्मा ने कहा कि इस महामारी से सभी को छुटकारा मिले और हमारा टीकाकरण अभियान सफल हो ऐसी मैं कामना करता हूँ।    उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में हमारे देश में वैज्ञानिकों ने तैयार की यह वैक्सीन पूरी तरह से सफल होगी। हमारा प्रदेश स्वस्थ है और स्वस्थ रहेगा। उन्होंने कहा कि देश के 3 करोड़ लोगों को पहले चरण में कोरोना वैक्सीन लगाई जाएगी। प्रोटेम स्पीकर शर्मा ने सभी को बधाई एवं शुभकामनाएं दी। सिविल अस्पताल में डॉक्टर एवं उपस्थितों ने प्रधानमंत्री के संदेश को भी सुना। यहां आज 100 स्वास्थ्य कर्मियों को वैक्सीन लगाई जाएगी।    सफाई कर्मी और चौकीदार हरी देव और सन्नू खरे को टीकाकरण वहीं, भोपाल के जेपी अस्पताल में स्वास्थ मंत्री डॉ. प्रभुराम चौधरी एवं स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग के प्रमुख सचिव संजय गोयल की उपस्थिति में सफाई कर्मचारी सन्नू खरे और चौकीदार हरीदेव यादव को टीका लगाकर देश के सबसे बड़े टीकाकरण महाअभियान की शुरुआत हुई। दोनों कर्मचारियों ने टीका लगने के बाद कहा कि हमारे और परिवार दोनों के लिये सम्मान की बात है परिवार का समाज में सम्मान बढ़ेगा। प्रमुख सचिव डॉ. गोयल ने दोनों का पुष्प गुच्छ भेंटकर अभिवादन किया।   जेपी अस्पताल में डॉ. डीएस तोमर, डॉ. दिनेश गुर्जर, डॉ. एयू खान, डॉ. बृजेश श्रीवास्तव, स्टॉफ नर्स अमिता जैन, आभा प्रसाद और अन्य स्टाफ को भी टीका लगाया गया। आज 100 स्वास्थ कर्मचारी और अधिकरियों को कोरोना से लड़ाई के लिए टीकाकरण किया जाएगा।   स्वास्थ मंत्री डॉ. प्रभुराम चौधरी ने बताया कि देश में इस अभियान से एक ऐतिहासिक शुरूआत हुई है। प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में देश ने इतिहास लिखा है। विश्व के सबसे बड़े वैक्सीनेशन अभियान में दुनिया की निगाह हम पर है दुनिया में वैक्सीन बनाने में देश सबसे आगे है। विकसित देशों की तुलना में सुरक्षित वैक्सीन बनाने में भी हम कई कदम आगे है। स्वदेशी वैक्सीन ने देश को पूरी दुनिया में नई पहचान दी है। जेपी अस्पताल में दोनों स्वच्छता कर्मियों के वैक्सीन के साथ डॉक्टर, नर्स और अन्य स्वास्थ्य कर्मियों को भी टीका लगाया गया। 30 मिनट के पर्यवेक्षण के बाद सभी को सम्मान सहित विजेता की तरह घर के लिए रवाना किया गया। सभी को मास्क लगाने के लिए भी कहा गया है।      पं. खुशीलाल शर्मा आयुर्वेदिक संस्थान में डॉ. मारवाह को पहली वैक्सीन कोरोना के खिलाफ निर्णायक जंग में शनिवार से प्रारंभ हुई वैक्सीनेशन पं. खुशीलाल शर्मा आयुर्वेदिक संस्थान में डॉ. नितिन मारवाह को प्रथम वैक्सीन लगाई गई। इस मौके पर डॉ. मरवाह ने कहा कि कोरोना वैक्सीन पूरी तरह सुरक्षित है और हमें अपने वैज्ञानिकों पर गर्व है, जिन्होंने स्वदेशी वैक्सीन का अविष्कार किया। उन्होंने नागरिकों से भी कहा कि जब भी उनका नंबर आए तब वे पूरे उत्साह से टीका लगवाएं। उन्होंने कहा कि वैक्सीन लगने से मेरा आत्म-विश्वास भी बढ़ा है लगभग 9 महीने से फैले कोरोना के भय से मुक्ति मिली है।    डॉ. नितिन मारवाह को वैक्सीन लगाने के बाद कोविन पोर्टल पर जानकारी अपलोड की गई। सर्वप्रथम उनके शरीर का तापमान मापा गया तत्पश्चात् उनकी पहचान क्रॉस चैक कर लिस्ट से मिलान किया गया। स्वास्य्क कर्मियों द्वारा कोविड-19 वैक्सीन की संपूर्ण जानकारी को रिकॉर्ड में लिया गया। कितने वायल हैं, डेट ऑफ मेनुफेक्चर, एक्सपायरी डेट, वैक्सीन वायल की संख्या एवं बैच नंबर को रिकार्ड किया गया। इस टीकाकरण केन्द्र में आज 100 लोगों को वैक्सीन लगाया जाएगा।

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Dakhal News 16 January 2021

इंदौर। भाजपा के वरिष्ठ नेता और खनिज विकास निगम के पूर्व उपाध्यक्ष गोविंद मालू ने केंद्रीय कानून मंत्री रविशंकर प्रसाद सिंह को पत्र लिखकर मांग की है कि व्हाट्सअप की नई पॉलिसी पर सरकार सख्त रवैया अपनाए। नई पॉलिसी से यूजर्स की निजता भंग होगी और व्यक्तिगत जानकारियां देश से बाहर जाएंगी! क्योंकि, व्हाट्सअप का कोई सर्वर देश में नहीं है। इसलिए व्हाट्सअप की नई पॉलिसी पर केंद्र सरकार रोक लगाए।    भाजपा नेता ने शनिवार को एक बयान जारी कर कहा कि भारत के यूजर्स के लिए व्हाट्सअप ने अपनी नई टम्र्स और प्राइवेसी पॉलिसी को लेकर अपडेट भेजना शुरू कर दिया है। व्हाट्सअप यूजर्स को नई पॉलिसी को स्वीकार करने के लिए 8 फरवरी तक का समय दिया है। तब तक पॉलिसी को यूजर्स को स्वीकार (एक्सेप्ट) करना होगा, वरना अकाउंट स्वत: डिलीटहो जाएगा। ये एक तरह से व्हाट्सअप संचालकों का ज़बरदस्ती वाला दबाव है। नई पॉलिसी के मुताबिक व्हाट्सअप अब यूजर्स के स्टेटस पढ़ सकता है। साथ ही व्हाट्सअप यूजर्स की लोकेशन का भी पता कर सकेगा।   आगे उन्होंने कहा कि अगर कोई फोटो या वीडियो फॉरवर्ड किया जाता है, तो वे व्हाट्सअप के सर्वर पर अधिक समय तक स्टोर रहेंगे। व्हाट्सअप का कहना कि वह यह सब आपको फॉरवर्ड करने में मदद करने के लिए कर रहा है। जबकि, वास्तव में ऐसा कुछ नहीं है। इसका सीधा सा मतलब यह है कि उसके पास जानकारी होगी कि कौनसा फोटो बहुत फॉरवर्ड हो रहा है। उसका तर्क है कि वह फेक न्यूज को ट्रैक करने के लिए ऐसा कर रहा है! पर, वास्तव में बात इतनी आसान भी नहीं है। दरअसल, व्हाट्सअपअब बिजनेस अकाउंट पर भी नजर रखेगा। इनसे शेयर होने वाले सारे कैटलॉग का एक्सेस उसके पास सुरक्षित रहेगा, जो निजता का सीधा उल्लंघन है।    गोविंद मालू का कहना है कि यह नीति आर्टिफिशियल इंटलीजेंस को सपोर्ट करने के लिए लाई जा रही है। व्हाट्सअप की पुरानी प्राइवेसी पॉलिसी में यूजर्स के पास आजादी थी, कि वह अपने व्हाट्सअप अकाउंट की जानकारी को फ़ेसबुक के साथ साझा होने से रोक सकते थे। लेकिन, नई पॉलिसी में इस बात की गुंजाइश पूरी तरह खत्म हो गई। व्हाट्सअप ने नई पॉलिसी में यह भी कहा है कि वह यूजर्स के हर ऑनलाइन ट्रांजैक्शन का डेटा लेगा। यह सुविधा व्हाट्सअप ने हाल शुरू की है। बैंक का नाम, कितनी राशि और डिलीवरी का स्थान सबकुछ ट्रैक होगा। फेसबुक-इंस्टाग्राम भी आपके फाइनेंशियल ट्रांजेक्शन को जान सकेंगे। व्हाट्सअपकुछ ही महीनों में खुद की 'पेमेंट सर्विस' शुरू कर रहा है।

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Dakhal News 16 January 2021

मीडिया

ऋतुपर्ण दवे इण्टरनेट, संचार क्रान्ति में वरदान तो जरूर साबित हुआ और देखते ही देखते मानव जीवन की अहम जरूरत बन भी गया। हकीकत भी यही है कि ‘दुनिया मेरी मुट्ठी में’ का असल सपना इण्टरनेट ने ही पूरा किया। लेकिन अब बड़ा सच यह भी है कि इस सेवा का जरिया बने यूजर्स से ही कमाई कर रहे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स चोरी-छिपे न केवल सायबर डकैती करते हैं बल्कि यूजर्स डेटा को ही अपने पास स्टोर करने की कोशिशें करते रहते हैं। यह न केवल निजता का उल्लंघन है बल्कि भविष्य में हर किसी की हैसियत को नापने का जरिया भी। दरअसल अभी आम लोगों को इस बारे में वाकई में ज्यादा जानकारी नहीं है। लेकिन यदि इसपर रोक नहीं लगी और कानून नहीं बना तो आपके एक-एक हिसाब-किताब यहाँ तक कि लेन-देन तक की सारी जानकारियाँ विदेशों में बैठे ऐसे सोशल मीडिया प्रोवाइडर के पास होगी जो अन एडिटेड इसे सोशल मीडिया में सारा कंटेंट जस का तस परोस देते हैं। वहीं वैध इलेक्ट्रॉनिक मीडिया हो या प्रिन्ट, जिम्मेदार संपादक से लेकर कंटेंट एडिटर, कॉपी एडिटर की लंबी-चौड़ी और लगातार काम करने वाली टीम होती है। इसके द्वारा एक-एक शब्द को परखा और समझा जाता है तब जाकर सामग्री प्रकाशित या प्रसारित की जाती है। हाल ही में वाट्सएप के द्वारा निजी डेटा के नाम पर जो इजाजत का प्रपंच रचा जा रहा है, वह देखने में तो महज चंद शब्दों का साधारण सा नोटिफिकेशन दिखता है लेकिन उसकी असल गहराई किसी साजिश से कम नहीं है। इससे सात समंदर पार दूर विदेश में बैठा वह सर्विस प्रोवाइडर जिसे यहाँ न उपयोगकर्ता जानता है न देखा है, उसे आपकी हर एक गतिविधि यहाँ तक कि मूवमेण्ट की भी जानकारी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर ऐक्टिव होते ही हो जाएगी जो रिकॉर्ड होती रहेगी। मसलन आपने मॉल में कितने की खरीददारी की, आपकी मूवमेण्ट कहाँ-कहाँ थी, चूंकि भारत में वाट्सएप पेमेंट सेवा भी शुरू है तो लेन-देन तक यानी सारा कुछ जो आपके परिवारवालों को भी नहीं पता होता है, उस सोशल मीडिया सर्वर के जरिए वहाँ इकट्ठा होता रहेगी। झूठ और सच की महापाठशाला यानी वाट्सएप यूनिवर्सिटी भविष्य में उसी का काल बनेगी जो अभी मस्ती या सही, गलत सूचना के लिए इसका उपयोग धड़ल्ले से कर रहे हैं। सच तो यह है कि इण्टरनेट ही तो वो दुनिया है जहां असल साम्यवाद है। सब बराबर हैं। किसी का रुतबा और पैसा यहां नहीं चलता। इसके लिए सारे यूजर समान हैं। किसी से भेदभाव भी नहीं है। सबको समान रूप से पल प्रतिपल इण्टरनेट ही तो अपडेट रखता है। लेकिन उसी इण्टरनेट की आड़ में निजी डेटा खंगालने का विदेशी खेल ठीक नहीं। अब वाट्सएप भारत सहित यूरोप से बाहर रहने वालों में लोकप्रिय इस इंस्टैंट मैसेजिंग ऐप के उपयोग के लिए अपनी निजी पॉलिसी और शर्तों में बदलाव करने जा रहा है। 8 फरवरी के बाद वॉट्सएप इस्तेमाल तभी कर पाएंगे जब इन्हें स्वीकारेंगे वरना एकाउण्ट डिलीट हो जाएगा। यानी वाट्सएप द्वारा जबरन इजाजत ली जा रही है। अबतक यह देखा गया है कि सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स इस तरह के अड़ियल रवैया नहीं अपनाते हैं और स्वीकार या अस्वीकार का ऑप्शन देते हैं। दरअसल फेसबुक ने 2014 में वाट्सएप को खरीदते ही कई बार पॉलिसी में बदलाव किए हैं। सितंबर 2016 से अपने उपयोगकर्ताओं का डेटा फेसबुक से शेयर भी कर रहा है। वाट्सएप की हालिया नई प्राइवेसी पॉलिसी और शर्तों की बारीकियों पर नजर डालें तो दिखता है कि यह हमारे आईटी कानूनों के अनुरूप कहीं से भी वाजिब नहीं है। यहाँ गौर करना होगा कि वाट्सएप भी अलग-अलग देशों में वहाँ के कानूनों के अनुरूप अपनी निजता की पॉलिसी बनाता है। मसलन जिन देशों में प्राइवेसी और निजता से जुड़े बेहद कड़े कानून मौजूद हैं वहाँ उनका पालन इनकी मजबूरी होती है। जैसे यूरोपीय क्षेत्र, ब्राज़ील और अमेरिका, तीनों के लिए अलग-अलग नीतियाँ हैं। यूरोपीय संघ यानी यूरोपियन यूनियन और यूरोपीय क्षेत्रों के तहत आने वाले देशों के लिए अलग तो ब्राज़ील के लिए अलग। वहीं अमेरिका के उपयोगकर्ताओं के लिए वहाँ के स्थानीय स्थानीय कानूनों के तहत अलग-अलग प्राइवेसी पॉलिसियाँ व शर्ते हैं। शायद इसीलिए तमाम विकसित देशों की इसपर गंभीरता दिखती है क्योंकि वे अपने नागरिकों की निजता को लेकर बेहद सतर्क रहते हैं। यही कारण है कि देश के कानूनों से इतर ऐसे ऐप्स को वहाँ के प्ले स्टोर्स में जगह तक नहीं मिलती। हालांकि हमारे देश में पर्सनल डेटा प्रोटेक्शन बिल लंबित है परन्तु उससे पहले ही वॉट्सएप का यह फरमान निश्चित रूप से परेशानी में तो डाल ही रहा है। इसकी वजह यह है कि बिल के पास होने तक वाट्सएप लोगों के निजी डेटा को न केवल इकट्ठा कर चुका होगा बल्कि जहाँ फायदा होगा वहाँ तक भी पहुँचा चुका होगा। ऐसे में इस बिल की प्रासंगिकता से कुछ खास हासिल होगा, लगता नहीं है। भारतीयों के डेटा का बाहर कैसा उपयोग होगा इसको लेकर भी अनिश्चितता का माहौल है। साफ है कि इस बारे में कोई कानून नहीं है और जरूरत है सबसे पहले प्राइवेसी और निजी डेटा प्रोटेक्शन की। दरअसल हमारे देश में अभी भी अंग्रेजों के बनाए कानूनों की भरमार है। वक्त के साथ इन्हीं में बदलाव कर काम चलाने की हमारी आदत गई नहीं है। जबकि इक्कीसवीं सदी, तकनीकी और संचार क्रान्ति का जमाना है। सारा कुछ मुट्ठी में और एक क्लिक में होने के दावे का नया दौर। ऐसे में कोई पलक झपकते हमारी निजता को ही कब्जा ले, यह कहाँ की बात हुई? निजता चाहे वह डेटा में हो या अन्य तरीकों में, सुरक्षा बेहद जरूरी है। गौर करना होगा कि हमारे सुप्रीम कोर्ट ने भी 2017 में पुट्टुस्वामी बनाम यूनियन ऑफ़ इंडिया के प्रकरण में ऐतिहासिक फैसला देते हुए कहा था निजता का अधिकार हर भारतीय का मौलिक अधिकार है। तभी अदालत ने इसे भारतीय संविधान के अनुच्छेद-21 यानी जीवन के अधिकार से जोड़ा था। सुप्रीम कोर्ट की 9 जजों की संविधान पीठ ने सर्वसम्मति से फैसला दिया और 1954 तथा 1962 में दिए गए फैसलों को पलटते हुए यह फैसला दिया था क्योंकि पुराने दोनों फैसलों में निजता को मौलिक अधिकार नहीं माना गया था। वाट्सएप की नीयत पर शक होना लाजिमी है। 2016 में अमेरिकी चुनाव के वक्त फेसबुक का कैंब्रिज एनालिटिका स्कैंडल लोग भूले नहीं हैं। जबकि 2019 में इसराइली कंपनी पेगासस ने इसी वॉटसएप के जरिए हजारों भारतीयों की जासूसी की थी। इधर भारत में भी फेसबुक की भूमिका पर जब-तब सवाल उठते रहे हैं। ऐसे में फेसबुक की मिल्कियत वॉट्सएप द्वारा खुलेआम फेसबुक और इससे जुड़ी कंपनियों से उपयोगकर्ताओं का डेटा साझा करने की बात समझनी होगी। हालांकि सफाई में वाट्सएप का कहना है कि नई प्राइवेसी पॉलिसी से इसपर कोई फर्क नहीं पड़ेगा कि आप अपने परिवार या दोस्तों से कैसे बात करते हैं। लेकिन यह भी तो सच है कि जानकारी, संपर्क, हंसी-ठिठोली और मनमाफिक असली-नकली सूचनाओं को बिना रुकावट भेजने का प्लेटफॉर्म बना वाट्सएप का इस्तेमाल बहुत सारी व्यापारिक गतिविधियों के बढ़ावे के लिए भी हो रहा है। इसमें कई संवेदनशील जानकारियाँ भी होती होंगी। स्वाभाविक है कि यह देश की सीमाओं के बाहर न जाएँ।  साफ लग रहा है कि हमारे यहाँ प्राइवेसी से सम्बन्धित कानूनों की कमी है, यही वजह है कि वॉट्सएप और ऐसे ही प्लेटफॉर्म्स के लिए भारत जैसा विशाल देश आसान निशाना होते हैं। शायद हो भी यही रहा है। वॉट्सएप के ताजा नोटिफिकेशन से जहाँ विशेषज्ञों की चिंताएँ बढ़ी होंगी वहीं सरकार भी जरूर चिन्तित होगी। इस सबके बावजूद इतनी बारीकियों से बेखबर एक औसत भारतीय को भी सजग होना होगा ताकि वह ऐसे झाँसे में आने से बचे। इसके लिए बिना समय गंवाए तत्काल मिल जुलकर कोई कदम उठाया जाए जो हमेशा के लिए ऐसे विवादों को ही समाप्त कर दे ताकि भारत में सायबर दायरों की आड़ में पैठ बनाते विदेशी प्लेटफॉर्म अपनी हदों में ही रहे। हाँ, यहाँ हमारे दुश्मन ही सही चीन से नसीहत लेनी होगी जिसने शायद इसी वजह से ही विदेशी प्लेटफॉर्म्स को देश में घुसने ही नहीं दिया, सारा कुछ खुद का बनाया इस्तेमाल करता है। यकीनन चिंताएं सबकी बढ़ी हैं और एक यूज़र के तौर पर हमको, आपको सबको इससे चिंतित होना चाहिए। (लेखक स्वतंत्र टिप्पणीकार हैं।)  

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Dakhal News 12 January 2021

कभी ट्रेन में इस वक़्त फ़र्स्ट एसी में मयखाना सज जाया करता था। टिकट तो होता थर्ड या सेकंड एसी का पर रेल विभाग के पियक्कड़ों के सौजन्य से आँखों ही आँखों में इशारा हो जाता। फिर अपन सब की महफ़िल फ़र्स्ट क्लॉस वाली शुरू हो जाती। जो भी आता जाता झांकता मुस्कराता उसे लखेद कर पिला दिया जाता। हालाँकि अपन सब उतने भी असभ्य नहीं जितना इतिहासकारों ने वर्णित किया है। कर्टसी के तहत पहले पूछा जाता- लोगे गुरु एक पैग! कोच अटेंडेंट से लेकर ज़्यादातर स्टाफ़ सेवा में लग जाता। टीटी साहब सबसे आख़िर में शरीक होते। डिब्बा डब्बा चेक चाक कर नौकरी बजाने के बाद।   जगह जगह स्टेशनों पर जंता को इत्तला एडवांस में कर दिया जाता कि बाबा फ़लाँ नम्बर की फ़लाँ ट्रेन से वाया फ़लाँ शहर फ़लाँ वक्त पर गुजर रहे हैं। जंता लोग वेज-नोनवेज बीयर दारू लेकर खड़े मिलते।   ट्रेन में या जीवन में, जो भी प्रेम से मिला हम उसी संग चीयर्स कर लिए।   एक दफे एक डिप्टी एसपी के साथ ट्रेन में जो पियक्कड़ी शुरू हुई तो सिलसिला ट्रेन के मंज़िल तक पहुँचने से बस एक स्टेशन पहले टूटा। स्टेशन आते जाते, ब्लैक डॉग के अद्धे गिरते जाते। क्रम यूँ बना रहता कि कोई किसी पर अहसान न लाद सके। किसी एक टेशन पर जय हिंद मारते हुए पुलिसकर्मी मदिरा लेकर आते तो अगले टेशन पर पत्रकार साथी अद्धा समर्पित कर देते।       आज बस चाय चिप्स है तो अतीत की नशीली रेल यात्राएँ दिलो दिमाग़ में छुकछुक कर गईं!   #dryyear21   #पियक्कड़_डायरी   भड़ास एडिटर यशवंत सिंह की एफबी वॉल से.  

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Dakhal News 11 January 2021

समाज

रतलाम। पश्चिम रेलवे रतलाम मंडल से होकर पुरी से जोधपुर के मध्य गाड़ी संख्या 02093/02094 पुरी-जोधपुर-पुरी स्पेशल ट्रेन 20 जनवरी से चलेगी।   मंडल रेल प्रवक्ता जितेन्द्र कुमार जयंत ने शनिवार को बताया कि यात्रियों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए रतलाम मंडल के विभिन्न स्टेशनों से होते हुए गाड़ी संख्या 02093/02094 पुरी जोधपुर पुरी स्पेशल ट्रेन का परिचालन किया जाएगा।  गाड़ी संख्या 02093 पुरी जोधपुर स्पेशल एक्सप्रेस, 20 जनवरी से अगले आदेश तक पुरी से प्रति बुधवार को 16.05 बजे चलकर रतलाम मंडल के शुजालपुर(19.25/19.27 गाड़ी चलने के दूसरे दिन ), उज्जैन( 21.15/21.25) एवं नागदा( 22.40/23.05)  होते हुए गाड़ी चलने के तीसरे दिन 11.55 बजे जोधपुर पहुँचेगी।  इसी प्रकार गाड़ी संख्या 02094 जोधपुर पुरी स्पेशल एक्सप्रेस 23 जनवरी से अगले आदेश तक  जोधपुर से प्रति शनिवार को 14.15 बजे  चलकर रतलाम मंडल के  नागदा(02.45/03.10), उज्जैन(04.05/04.15) एवं शुजालपुर(05.44/05.46) होते हुए गाड़ी चलने के तीसरे दिन 10.00 बजे पुरी पहुँचेगी।    इस ट्रेन का दोनों दिशाओं में खुर्दारोड, भुवनेश्वर, कटक, ढेंकनाल, तालचेर रोड, अंगुल, राइराखोल, संबलपुर, झासरगुडा रोड, रायगढ़, शक्ति, चंपा, बिलासपुर, भटापारा, रायपुर, दुर्ग, राजनांदगांव, गोंदिया, भंडारा रोड, नागपुर, पांढुरना, बैतूल, इटारसी, हबीबगंज, भोपाल, शुजालपुर, उज्जैन, नागदा, कोटा, सवाई माधोपुर, दुर्गापुरा, जयपुर, मकराना, डेगाना एवं मेड़ता रोड स्टेशनों पर ठहराव दिया गया है। इस ट्रेन में एक फर्स्ट एसी, एक सेकेंड एसी,  पांच थर्ड एसी, नौ स्लीपर एवं चार सामान्य श्रेणी के कोच रहेंगे।

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Dakhal News 16 January 2021

राजगढ़/ सारंगपुर। मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के निर्देशानुसार इन दिनों मप्र में माफियाओं के खिलाफ अभियान चलाया जा रहा है। इसी क्रम में राजगढ़ जिले के सारंगपुर नगर में अतिक्रमण मुक्त करने की मुहिम शुरू की। जिसके तहत राजस्व विभाग, पुलिस विभाग, नगरपालिका के संयुक्त अभियान चलाकर हिस्ट्रीशीटर इशाक टेंसन द्वारा मकान दुकान के साथ-साथ एबी रोड इंदौर नाका पुराना बस स्टैंड नगर पालिका परिषद के ट्रेंचिंग ग्राउंड की जमीन को अतिक्रमण मुक्त कराया गया।   हिस्ट्रीशीटर इशाक टेंसन पर कुल 32 अपराध दर्ज हैं। अतिक्रमणकर्ता भूरा के मकान दुकान के साथ-साथ एबी रोड इंदौर नाका पुराना बस स्टैंड नगर पालिका परिषद के ट्रेंचिंग ग्राउंड की जमीन को अतिक्रमण मुक्त कराया गया। नगर सारंगपुर में 200 दुकानों के सामने शासकीय भूमि पर टीन शेड सीढिय़ां, होटल की भट्टी काउंटर एवं अन्य स्थाई निर्माण को प्रशासन ने जेसीबी चलाकर अतिक्रमण से मुक्त कराया। प्रशानस ने लगभग 12000 स्क्वायर मीटर शासन की भूमि को जिसकी अनुमानित लागत 07 करोड़ रुपये को अतिक्रमण से मुक्त कराया गया। अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व) संदीप अस्थाना ने बताया कि अतिक्रमण की यह मुहिम नगर में लगातार जारी रहेगी। प्रशासन की टीम लगातार शासकीय भूमि पर हो रहे अतिक्रमण को चिन्हित कर अतिक्रमण मुक्त कार्यवाही करेगी। कार्यवाही के दौरान  एसडीओपी जोइस दास, थाना प्रभारी हुकम सिंह पवार, नायब तहसीलदार प्रदीप भार्गव आदि अमले सहित उपस्थित रहे।

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Dakhal News 16 January 2021

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अभिनेत्री प्रीति जिंटा बेशक फिल्मी दुनिया से काफी समय से दूर हैं, लेकिन सोशल मीडिया के जरिये वह फैंस से जुड़ी रहती हैं।  प्रीति ने हाल ही में सोशल मीडिया पर एक पोस्ट साझा किया है, जिसमें उन्होंने बॉलीवुड में अपनी डेब्यू फिल्म 'दिल से' से जुड़ी एक सीन का जिक्र किया है। उन्होंने इस सीन की एक तस्वीर सोशल मीडिया पर फैंस के साथ साझा भी की है। इस थ्रोबैक तस्वीर में प्रीति हाथियों की आगे खड़ी होकर पोज देती नजर आ रही हैं। यह सीन फिल्म दिल से के मशहूर गाने 'जिया जले', जो की प्रीति जिंटा पर फिल्माया गया था के डांस का है। इस  तस्वीर को शेयर करते हुए प्रीति ने लिखा-'हाथी भी सोच रहे होंगे कि मैं क्या कर रही हूं। मैं सब कुछ फराह खान के कहने पर कर रही थी। फराह ने मुझे कहा था कि एक अच्छी लड़की की तरह करो। यह 'दिल से' शूट की मेरी पसंदीदा तस्वीरों में से एक है।'    प्रीति जिंटा 22 सालों से हिंदी फिल्म इंडस्ट्री की हिस्सा रही हैं।उन्होंने 1998 में फिल्म 'दिल से' के साथ बॉलीवुड में डेब्यू किया था। मणिरत्नम के निर्देशन में बनी यह एक रोमांटिक थ्रिलर फिल्म थी। इस फिल्म में प्रीति जिंटा, शाहरुख खान और मनीषा कोइराला लीड रोल में थी। इस फिल्म को दर्शकों ने काफी पसंद किया और फिल्म बॉक्स ऑफिस पर सफल रही।  इस फिल्म के लिए प्रीति जिंटा को बेस्ट डेब्यू फिल्मफेयर अवॉर्ड से भी नवाजा गया था। प्रीति उसी साल फिल्म सोल्जर में भी नजर आई थी। फिल्म 'क्या कहना' की सफलता के बाद उन्होंने दिल चाहता है, चोरी चोरी चुपके चुपके, कोई मिल गया, कल हो ना हो, लक्ष्य, वीर-जारा, सलाम नमस्ते और दिल है तुम्हारा जैसी फिल्मों में मुख्य भूमिका निभाई है। प्रीति जिंटा ने साल 2016 में जीन गुडइनफ से शादी कर ली। शादी के बाद प्रीति कुछ गिनी चुनी फिल्मों में ही नजर आई। आखिरी बार साल 2018 में आई फिल्म 'भईया जी सुपरहिट' में सनी देओल संग दिखाई दी थीं।फिलहाल प्रीति लम्बे समय से फिल्मी दुनिया से दूर हैं और वर्तमान में वह  प्रीति जिंटा आईपीएल में क्रिकेट टीम किंग्स इलेवन पंजाब की सह मालकिन हैं।

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Dakhal News 16 January 2021

अभिनेत्री तापसी पन्नू की फिल्म 'रश्मि रॉकेट' लंबे समय से चर्चा में है। तापसी पन्नू की यह फिल्म स्पोर्ट्स पर आधारित है। फिल्म 'रश्मि रॉकेट' में तापसी पन्नू गुजराती एथलीट की भूमिका में नजर आएंगी। इस फिल्म के लिए तापसी पिछले कुछ समय से लगातार कड़ी मेहनत कर रही हैं और जमकर पसीना बहा रही हैं। हाल ही तापसी इस फिल्म के आखिरी शेड्यूल के लिए गुजरात के भुज में पहुंची है, जहां वह इस फिल्म के आखिरी शेड्यूल को पूरा करेंगी। इसकी जानकारी खुद तापसी ने सोशल मीडिया पर पोस्ट शेयर कर दी। तापसी ने इंस्टाग्राम पर अपनी एक तस्वीर शेयर की है, जिसमें उनका बैक साइड नजर आ रहा है। इस तस्वीर में तापसी ने रेड कलर की टीशर्ट पहने हुई है, जिसपर भुज लिखा है। इस तस्वीर शेयर करते हुए तापसी ने लिखा- 'रश्मि रॉकेट का आखिरी शेड्यूल और आखिरी स्टॉप।'   फिल्म 'रश्मि रॉकेट' की कहानी एक गुजराती लड़की के इर्द-गिर्द घूमती है। उसकी दौड़ने की गति को लेकर उसके गांव के लोगों द्वारा उसे 'रॉकेट’ की उपाधि मिलती है। फिल्म 'रश्मि रॉकेट' आकाश खुराना द्वारा निर्देशित और रॉनी स्क्रूवाला, नेहा आनंद और प्रांजल खंडाडिया द्वारा निर्मित है। फिल्म को रॉनी स्क्रूवाला की आरएसवीपी मूवीज प्रस्तुत करेगी। इस फिल्म की पटकथा अनिरुद्ध गुहा ने लिखी है। 'रश्मि रॉकेट' गुजरात के कच्‍छ की तेज धावक रश्मि पर आधारित फिल्‍म है। 'रश्मि रॉकेट' स्पोर्ट्स पर आधारित तापसी पन्नू की तीसरी फिल्म है। इसके पहले वह फिल्म सूरमा में हॉकी खेलती नजर आई थी। वहीं शूटर दादी चंद्रो तोमर पर बनी फिल्म 'सांड की आंख' में वह प्रकाशी तोमर के किरदार में नजर आई थी। वर्कफ्रंट की बात करें तो तापसी पन्नू इस फिल्म के अलावा भारतीय महिला क्रिकेट टीम की कप्तान मिताली राज की बायोपिक फिल्म 'शाबाश मिट्ठू' और रोमांटिक-थ्रिलर फिल्म 'हसीन दिलरुबा' में भी नजर आएंगी।

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Dakhal News 16 January 2021

दखल क्यों

डॉ़. वेदप्रताप वैदिक नेपाल के विदेश मंत्री प्रदीप ग्यावली की यह दिल्ली-यात्रा हुई तो इसलिए है कि दोनों राष्ट्रों के संयुक्त आयोग की सालाना बैठक होनी थी लेकिन यह यात्रा बहुत सामयिक और सार्थक रही है। दोनों देशों के विदेश मंत्रियों ने परस्पर सड़कें बनाने, रेल लाइन डालने, व्यापार बढ़ाने, कुछ नए निर्माण-कार्य करने आदि मसलों पर सहमति दी लेकिन इन निरापद मामलों के अलावा जो सबसे पेंचदार मामला दोनों देशों के बीच आजकल चल रहा है, उस पर भी दोनों विदेश मंत्रियों ने बात की है। नवंबर 2020 में शुरू हुए सीमांत-क्षेत्र के लिपुलेख-कालापानी-लिंपियाधुरा के सीमा-विवाद के कारण दोनों देशों के बीच काफी कहासुनी हो गई थी। भारतीय विदेश मंत्रालय इस मामले को इस वार्ता के दौरान शायद ज्यादा तूल देना नहीं चाहता था। इसीलिए उसने अपनी विज्ञप्ति में इसपर हुई चर्चा का कोई संकेत नहीं दिया लेकिन नेपाली विदेश मंत्रालय ने उस चर्चा का साफ़-साफ़ जिक्र किया। इसका कारण यह भी हो सकता है कि नेपाल की आंतरिक राजनीति का यह बड़ा मुद्दा बन गया है। नेपाल की ओली-सरकार द्वारा संसद में रखे गए नेपाल के नए नक्शे पर सर्वसम्मति से मुहर लगाई गई है। भारत के पड़ौसी देशों की राजनीति की यह मजबूरी है कि उनके नेता अपनी लोकप्रियता बढ़ाने के लिए प्रायः भारत-विरोधी तेवर अख्तियार कर लेते हैं। अब क्योंकि सत्तारुढ़ नेपाली कम्युनिस्ट पार्टी के दो टुकड़े हो गए है, संसद भंग कर दी गई है और ओली सरकार इस समय संकटग्रस्त है, इसलिए भारत से भी सहज संबंध दिखाई पड़ें, यह जरूरी है। इस काम को नेपाली विदेश मंत्री प्रदीप ग्यावली ने काफी दक्षतापूर्ण ढंग से संपन्न किया है। इस बीच यों भी भारत के सेनापति और विदेश सचिव की काठमांडो-यात्रा ने आपसी तनाव को थोड़ा कम किया है। इंडियन कौंसिल ऑफ वर्ल्ड एफेयर्स में ग्यावली ने कई पत्रकारों के सवालों का जवाब देते हुए इतनी सावधानी बरती कि भारत-विरोधी एक शब्द भी उनके मुंह से नहीं निकला। कुछ टेढ़े सवालों का जवाब देते समय यदि वे चूक जाते तो उन्हें नेपाल में चीनी दखलंदाजी को स्वीकार करना पड़ता लेकिन उन्होंने कूटनीतिक चतुराई का परिचय देते हुए विशेषज्ञों और पत्रकारों पर यही प्रभाव छोड़ा कि भारत-नेपाल सीमा-विवाद शांतिपूर्वक हल कर लिया जाएगा। उन्होंने 1950 की भारत-नेपाल संधि के नवीकरण की भी चर्चा की। उन्होंने भारत-नेपाल संबंध बराबरी के आधार पर संचालित करने पर जोर दिया और कोरोना-टीके देने के लिए भारत का आभार माना। भारत-नेपाल संबंधों की भावी दिशा क्या होगी, यह जानने के पहले नेपाली राजनीति की आंतरिक पहेली के हल होने का इंतजार हमें करना होगा। तात्कालिक भारत-नेपाल संवाद तो सार्थक ही रहा है। (लेखक, भारतीय विदेश नीति परिषद के अध्यक्ष हैं।‎)

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Dakhal News 16 January 2021

सियाराम पांडेय 'शांत' व्यक्ति के जीवन में जिस तरह सोलह संस्कार होते हैं, सोलह श्रृंगार होते हैं, उसी तरह उसकी जिंदगी में सोलह तरह के सुख और सोलह तरह के दुख होते हैं। निरोगी शरीर को जीवन का पहला सुख कहा गया है। ऐसे में उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ आरोग्य को अगर सबका अधिकार बता रहे हैं तो यह उचित ही है। योगी आदित्यनाथ ने कहा कि आरोग्यता प्राप्त करना हर किसी का अधिकार है। फर्रूखाबाद जिले के विख्यात बौद्ध पर्यटक तीर्थस्थल संकिसा में प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र में आयोजित मुख्यमंत्री जन आरोग्य मेले का उद्घाटन करते हुए यह बात कही। इस अवसर पर उत्तर प्रदेश के 3400 स्थानों पर जन आरोग्य मेलों का शुभारंभ किया गया। उत्तर प्रदेश का हर आदमी निरोगी रहे, इसके लिए सरकार यथासंभव प्रयास कर भी रही है। सरकार की अपनी सीमा है लेकिन अगर हर व्यक्ति को जागरूक किया जा सके तो उसे रोगों के प्रभाव से बचाया जा सकता है। स्वास्थ्य विज्ञानी भी मानते हैं कि 80 प्रतिशत बीमारियां मन की होती है। 20 प्रतिशत बीमारी ही तन की होती है। जिनका मनोबल मजबूत होता है, पहली बात तो वे बीमार नहीं होते और कदाचित होते भी हैं तो जल्द ही ठीक भी हो जाते हैं। मुख्यमंत्री ने विश्वास दिलाया है कि प्रदेश के हर नागरिक को कोरोना का टीका लगेगा लेकिन चरणबद्ध ढंग से। कुछ लोग ड्राई रन की राजनीतिक आलोचना कर सकते हैं लेकिन ऐहतियात के नजरिए से यह एक अच्छा प्रयोग है। कोई भी अभियान शुरू करने से पहले व्यवस्था बिगाड़ने वाले हर छिद्र को बंद कर देना चाहिए। साथ ही हर कील-कांटे दुरुस्त कर लेना चाहिए। प्रदेश के लोगों का जीवन आरोग्यमय हो, इसके लिए सर्वप्रथम सरकार द्वारा योगदिवस का आयोजन किया गया था। नसीहत दी गई थी कि योग करें और निरोग रहें। इसके बाद अस्पतालों में दवाओं की उपलब्धता सुनिश्चित कराने के मुकम्मल प्रयास भी हुए। अगर सरकार जन आरोग्य मेलों का आयोजन कर रही है तो इसके मूल में जनहित का भाव ही प्रमुख अभीष्ठ है। मेलों के दौरान चिकित्सक दवाई देंगे, सामान्य बीमारियों की जांच एवं उपचार करेंगे तो इससे दो लाभ होंगे। एक यह कि लोग बड़ी बीमारियों से बचेंगे। दूसरा, सरकार द्वारा संचालित स्वास्थ्य योजनाओं से वे अवगत हो सकेंगे। उन्हें आयुष्मान भारत योजना के सम्बन्ध में जानकारी मिलेगी। इसके तहत गोल्डन कार्ड दिए जाएंगे। यह एक अच्छी पहल है, जिसका स्वागत किया जाना चाहिए। मुख्यमंत्री की मानें तो टीबी के उपचार की व्यवस्था की जाएगी। बच्चों तथा गर्भवती महिलाओं को लगने वाले टीके की जानकारी दी जाएगी। इसमें शक नहीं कि आरोग्य मेलों से लाखों की संख्या में लाभार्थियों को लाभ प्राप्त हुआ है। प्रदेश में पहले भी पूर्व सरकारों में स्वास्थ्य मेले लगते रहे हैं लेकिन वह किस तरह लगते थे और वहां जांच -उपचार के नाम पर क्या कुछ होता था, यह किसी से भी छिपा नहीं है। योगी सरकार में उत्तर प्रदेश में लगने वाले स्वास्थ्य मेलों से औपचारिकता समाप्त हुई थी और लोगों का उनपर विश्वास भी जमने लगा लेकिन कोरोना महामारी ने स्वास्थ्य मेलों के आयोजन पर रोक की जमीन तैयार कर दी थी। अब अगर उत्तर प्रदेश में नए सिरे से स्वास्थ्य मेलों का अयोजन शुरू हुआ है तो इस पहल का स्वागत किया जाना चाहिए। व्यक्ति के स्वास्थ्य के लिए उसका संतुष्ट होना जरूरी है। इसलिए कारोबार, रोजगार में बढ़ोतरी होते रहना बहुत जरूरी है। शौचालय अगर आरोग्य का आधार है तो नारी गरिमा का प्रतीक भी है। बकौल मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, दो करोड़ 61 लाख लाभार्थियों को शौचालय का लाभ मिला है। प्रत्येक ग्राम पंचायत में एक सामुदायिक शौचालय का निर्माण किया जा रहा है। स्वयं सहायता समूह की एक महिला को सामुदायिक शौचालय के रखरखाव के साथ जोड़ा जा रहा है। इस कार्य के लिए महिला को 6 हजार रुपए का मानदेय दिया जा रहा है। सुरक्षा का संकट हो तब भी व्यक्ति मानसिक रूप से स्वस्थ नहीं रह सकता। न तो व्यापार कामयाब हो सकता है और न व्यक्ति निरापद ढंग से अपने काम कर सकता है। सरकार ने आराजक तत्वों पर नकेल कसकर प्रदेश को मानसिक तौर पर स्वस्थ रखने का काम किया है। भय व्यक्ति का सबसे बड़ा शत्रु है। वह किसी भी बीमारी से बड़ी बीमारी है। माफियाओं के घरों पर चलते बुलडोजर आम जन को सुरक्षा की गारंटी तो देते ही हैं। सरकार जब सबके साथ, सबके विकास और सबके विश्वास की बात करती है तो पता चलता है कि वह यह सब बिना किसी मतभेद के कर रही है। उसका दावा है कि शासन की हर एक योजना का लाभ पात्र लाभार्थी तक पहुंचेगा। 'एक जनपद, एक उत्पाद' योजना के तहत युवाओं और परम्परागत उद्यमियों को जोड़कर,उन्हें स्वरोजगार के लिए बैंक से लोन दिलवाकर, युवाओं को रोजगार देने के लिए रोजगार मेलों का आयोजन कर सरकार घर में माया यानी दूसरे सुख का भी बंदोबस्त कर रही है। कृषि संरचना को सुदृढ़ करने, कोल्ड स्टोरेज और भण्डारण की व्यवस्था सुनिश्चित करने के पीछे सरकार की योजना किसानों को मजबूती देने और मानसिक,आर्थिक संबल प्रदान करने की है। महिलाएं भी स्वयंसेवी समूह बनाकर कृषि क्षेत्र में योगदान करें, ऐसा सरकार का प्रयास है। जनसहभागिता से कृषि क्षेत्र में सुधार को द्रुतगति प्रदान करने की दिशा में सरकार न केवल सोच रही है बल्कि उस पर अमल भी कर रही है। प्रधानमंत्री आवास योजना, आयुष्मान भारत योजना, प्रधानमंत्री मुद्रा योजना, स्टार्टअप योजना, मुख्यमंत्री आवास योजना, मुख्यमंत्री कन्या सुमंगला योजना, मुख्यमंत्री जन आरोग्य योजना, 'एक जनपद-एक उत्पाद' सहित अन्य योजनाओं के क्रियान्वयन के जरिए सरकार की मंशा व्यक्ति को मानसिक और आर्थिक रूप से सुदृढ़ बनाने की है। सरकार की योजना सामाजिक आर्थिक और सांस्कृतिक समरसता लाने की है। वह जीवन के हर पहलू पर ध्यान दे रही है लेकिन यह काम अकेले सरकार का ही नहीं है। प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना के तहत 20.48 लाख अयोग्य लाभार्थियों को 1,364 करोड़ रुपये का भुगतान हुआ है। यह जानकारी केंद्रीय कृषि मंत्रालय ने सूचना के अधिकार अधिनियम के तहत मांगी गई सूचना के जवाब में दी है। पंजाब, असम, केरल और महाराष्ट्र के ज्यादातर लाभार्थी इस कोटि के हैं जिन्होंने अयोग्य होते हुए भी किसान सम्मान निधि हासिल की है। इस प्रवृत्ति से बचना चाहिए। इससे जरूररतमंदों का नुकसान होता है।  गोस्वामी तुलसीदास ने लिखा है कि 'कोउ न काहू सुख-दुख कर दाता। निजकृत कर्म भोग सब ताता।' इसलिए जबतक स्वास्थ्य को लेकर चाहे वह तन का हो, मन का हो या कि धन का हो, जन-जन जागरूक और गंभीर नहीं होगा तबतक अकेले सरकार के प्रयास नाकाफी साबित होंगे। देश सर्वोपरि की भावना से जिस दिन लोग काम करने लगेंगे, बहुत सारी समस्याओं का सहज समाधान हो जाएगा। (लेखक हिन्दुस्थान समाचार से संबद्ध हैं।)

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Dakhal News 15 January 2021

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