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सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को दिल्ली के व्यापारिक संगठनों की याचिका पर तत्काल आदेश देने से इनकार कर दिया। याचिका में कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के दिल्ली के सेंट्रल पार्क में प्रस्तावित प्रदर्शन के कारण कारोबार प्रभावित होने की आशंका जताई गई थी। सुनवाई के दौरान जस्टिस जॉयमाल्या बागची ने कहा कि किसी के लिए प्रदर्शन करना जरूरी है, तो किसी के लिए मूंगफली बेचना और कानून-व्यवस्था बनाए रखना भी महत्वपूर्ण है। अदालत ने उम्मीद जताई कि सभी पक्ष समझदारी से काम लेंगे। प्रदर्शन को देखते हुए नई दिल्ली नगर परिषद (NDMC) ने सेंट्रल पार्क बंद करने का आदेश दिया है। व्यापारियों का दावा है कि इससे कनॉट प्लेस और आसपास के बाजारों में रोजाना करीब 200 करोड़ रुपये का कारोबार प्रभावित हो सकता है। यह याचिका दिल्ली किराना कमेटी और दिल्ली आयरन एंड हार्डवेयर मर्चेंट एसोसिएशन की ओर से दायर की गई थी। व्यापारिक संगठनों ने अदालत में कहा कि त्योहारों और शादी के सीजन में प्रदर्शन के कारण दुकानदारों, ठेले वालों और छोटे कारोबारियों की आजीविका प्रभावित हो सकती है। याचिका में यह भी दावा किया गया कि 10 अक्टूबर से जारी प्रदर्शनों के चलते व्यापारियों को करीब 2,000 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ है। अदालत ने छोटे दुकानदारों की रोजी-रोटी से जुड़ी मुश्किलों का जिक्र करते हुए कहा कि इन परिस्थितियों में सभी पक्षों को बेहतर समझदारी दिखानी चाहिए। हालांकि, अदालत ने इस मामले में तत्काल हस्तक्षेप करते हुए प्रदर्शन पर रोक लगाने का आदेश नहीं दिया। दरअसल, CJP ने मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के विरोध और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर 10 अक्टूबर को जंतर-मंतर पर प्रदर्शन का ऐलान किया था। दिल्ली पुलिस ने इस प्रदर्शन को रोक दिया था और पार्टी के शीर्ष नेताओं अभिजीत दीपके, सौरव दास और आशुतोष रांका को हिरासत में लिया था। मजिस्ट्रेट अदालत ने तीनों को रिहा करने का आदेश दिया था और वे करीब 23 घंटे पुलिस हिरासत में रहे। इस दौरान अन्य राजनीतिक नेताओं और लोगों को भी हिरासत में लिए जाने की खबर सामने आई थी। प्रदर्शन से जुड़े घटनाक्रम के बीच अब मामला कारोबार, सार्वजनिक व्यवस्था और प्रदर्शन के अधिकार के बीच संतुलन को लेकर चर्चा में है।
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दिल्ली में 16 अक्टूबर को कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) की ओर से प्रस्तावित प्रदर्शन को लेकर दिल्ली पुलिस ने हाईकोर्ट को भरोसा दिया है कि स्थिति को नियंत्रित करने के लिए सभी जरूरी कानूनी कदम उठाए जाएंगे। यह प्रदर्शन कनॉट प्लेस के सेंट्रल पार्क में आयोजित करने का आह्वान किया गया है। मामले की सुनवाई कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश नितिन वासुदेव सांबरे और न्यायमूर्ति संजय शर्मा की पीठ ने की। पुलिस की ओर से अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल चेतन शर्मा ने अदालत को आश्वस्त किया कि प्रदर्शन के दौरान कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए जरूरी इंतजाम किए जाएंगे। हाईकोर्ट ने पुलिस के इस आश्वासन को अपने आदेश में दर्ज कर लिया। सुनवाई के दौरान पुलिस की ओर से कहा गया कि अदालत के आदेश का दायरा CJP के संस्थापक अभिजीत दीपके के साथ पार्टी के पदाधिकारियों और अन्य संबंधित लोगों पर भी लागू होना चाहिए। अदालत ने इस बात को स्पष्ट किया। वहीं, याचिकाकर्ता की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता सचिन पुरी ने सेंट्रल पार्क और कनॉट प्लेस जैसे गैर-निर्धारित स्थानों पर प्रदर्शन रोकने की मांग की। याचिका में आशंका जताई गई कि प्रदर्शन से कारोबारियों को नुकसान हो सकता है और इलाके में अव्यवस्था पैदा हो सकती है। याचिकाकर्ता अनिल कुमार गुप्ता कनॉट प्लेस स्थित पालिका बाजार में रेहड़ी लगाते हैं। उन्होंने सेंट्रल दिल्ली के अन्य इलाकों में भी ऐसे प्रदर्शनों पर रोक लगाने का अनुरोध किया है। CJP के संस्थापक अभिजीत दीपके ने 16 अक्टूबर को शाम 5 बजे लोगों से राष्ट्रीय ध्वज के साथ सेंट्रल पार्क पहुंचने की अपील की है। यह प्रदर्शन पार्टी नेताओं सौरव दास और आशुतोष रांका की हिरासत के विरोध में आयोजित करने की बात कही गई है। दोनों को कथित तौर पर बिना अनुमति जंतर-मंतर में प्रवेश करने के मामले में पांच दिन की न्यायिक हिरासत में भेजा गया है। सुनवाई के दौरान दिल्ली पुलिस ने आशंका जताई कि पहले जैसी अव्यवस्था दोबारा पैदा हो सकती है। हाईकोर्ट ने पुलिस के आश्वासन को दर्ज करते हुए कहा कि प्रदर्शन को नियंत्रित करने के लिए कानून के मुताबिक जरूरी कदम उठाए जाएं।
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मध्य प्रदेश में 27 प्रतिशत ओबीसी आरक्षण का मुद्दा एक बार फिर राजनीतिक बहस के केंद्र में आ गया है। पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ ने इस मामले को लेकर भाजपा सरकार पर निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि पिछले सात वर्षों से ओबीसी आरक्षण को लेकर सरकार का रवैया ठीक नहीं रहा है। कमलनाथ ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट कर कहा कि 2019 में उनकी सरकार के कार्यकाल के दौरान अन्य पिछड़ा वर्ग को 27 प्रतिशत आरक्षण देने का फैसला किया गया था। उनके मुताबिक, इसके बाद से भाजपा सरकार ने हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट में इस आरक्षण को समाप्त करने की कोशिश की। उन्होंने कहा कि यदि भाजपा वास्तव में ओबीसी आरक्षण को लागू रखना चाहती है, तो उसे सुप्रीम कोर्ट में पूरी कानूनी तैयारी और ठोस तथ्यों के साथ अपना पक्ष रखना चाहिए। कमलनाथ ने आरोप लगाया कि सरकार की कमजोर कानूनी पैरवी के कारण हाईकोर्ट में 27 प्रतिशत आरक्षण के खिलाफ फैसला आया। उन्होंने मांग की कि ओबीसी वर्ग की आबादी से जुड़े प्रमाणिक आंकड़े सुप्रीम कोर्ट के सामने रखे जाएं और आरक्षण से संबंधित कानूनी पहलुओं पर प्रभावी ढंग से पक्ष प्रस्तुत किया जाए। कमलनाथ ने यह भी कहा कि आरक्षण की सीमा और आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग यानी ईडब्ल्यूएस को दिए गए 10 प्रतिशत आरक्षण जैसे मुद्दों पर सरकार को स्पष्टता के साथ आगे बढ़ना चाहिए। उन्होंने भाजपा नेताओं के बयानों पर सवाल उठाते हुए कहा कि यदि सरकार को इस मामले में उनकी या कांग्रेस पार्टी की किसी भी तरह की सहायता चाहिए, तो वे इसके लिए तैयार हैं। कमलनाथ के इस बयान के बाद भाजपा की ओर से भी प्रतिक्रिया सामने आई। भाजपा नेता डॉ. हितेश वाजपेयी ने एक्स पर पोस्ट कर कमलनाथ के आरोपों का जवाब दिया। उन्होंने 2019 में तत्कालीन कांग्रेस सरकार द्वारा लाए गए अध्यादेश और संशोधन कानून का हवाला देते हुए कहा कि हाईकोर्ट की टिप्पणियां विधायी प्रक्रिया में पर्याप्त तैयारी और जल्दबाजी को लेकर गंभीर सवाल खड़े करती हैं। वाजपेयी ने पूछा कि ओबीसी आरक्षण जैसे संवेदनशील विषय पर कांग्रेस सरकार ने पर्याप्त कानूनी तैयारी और स्पष्टता क्यों सुनिश्चित नहीं की। उन्होंने ईडब्ल्यूएस आरक्षण लागू करने में हुई देरी को लेकर भी तत्कालीन सरकार की जवाबदेही पर सवाल उठाए। भाजपा नेता ने कहा कि ओबीसी और ईडब्ल्यूएस आरक्षण जैसे मामलों में राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप के बजाय संवैधानिक स्पष्टता, मजबूत कानूनी तैयारी और पात्र नागरिकों के अधिकारों को प्राथमिकता दी जानी चाहिए। इस तरह 27 प्रतिशत ओबीसी आरक्षण को लेकर कमलनाथ और भाजपा के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर तेज हो गया है।
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केंद्रीय मंत्री डॉ. एल. मुरुगन के केंद्रीय मंत्रिपद और राज्यसभा सदस्यता से इस्तीफे के बाद मध्यप्रदेश की राजनीति में भी बयानबाजी तेज हो गई है। विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष और कांग्रेस नेता उमंग सिंघार ने मुरुगन के अचानक इस्तीफे को लेकर भाजपा से सवाल पूछे हैं। एल. मुरुगन केंद्र सरकार में सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय और संसदीय कार्य मंत्रालय में राज्य मंत्री थे। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को अपना त्यागपत्र सौंपा था, जिसे राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने स्वीकार कर लिया। मुरुगन ने अपने पत्र में तमिलनाडु में भाजपा को जमीनी स्तर पर मजबूत करने और 2029 के लोकसभा चुनाव की तैयारियों के लिए पार्टी के काम में सक्रिय भूमिका निभाने की इच्छा जताई थी। वे मध्यप्रदेश से राज्यसभा सांसद चुने गए थे और उनका कार्यकाल अप्रैल 2030 तक था, लेकिन इस्तीफे के बाद उनकी सीट खाली हो गई है। मुरुगन के इस्तीफे को लेकर राजनीतिक चर्चाओं के बीच उमंग सिंघार ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट कर भाजपा की नैतिकता और पारदर्शिता पर सवाल उठाए। उन्होंने पूछा कि डॉ. एल. मुरुगन के इस्तीफे के पीछे की असली वजह क्या है। सिंघार ने तमिलनाडु में मुरुगन को लेकर उठ रहे कथित सवालों का जिक्र करते हुए यह भी पूछा कि क्या उनका अचानक मंत्री पद और राज्यसभा सदस्यता छोड़ना महज संयोग है या किसी बड़े खुलासे से पहले की राजनीतिक कवायद। कांग्रेस नेता ने आरोप लगाया कि भाजपा को संभावित राजनीतिक नुकसान से बचाने के लिए यह कदम उठाया गया हो सकता है। हालांकि, ये सवाल और आरोप उमंग सिंघार की ओर से लगाए गए हैं; इनके समर्थन में खबर में कोई स्वतंत्र प्रमाण प्रस्तुत नहीं किया गया है। उमंग सिंघार ने अपनी पोस्ट में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से सीधे जवाब मांगते हुए कहा कि यदि सब कुछ स्पष्ट है, तो इस्तीफे की असली वजह देश के सामने रखी जानी चाहिए। उनके बयान के बाद मुरुगन के इस्तीफे को लेकर राजनीतिक बहस और तेज हो गई है। दूसरी ओर, एल. मुरुगन ने अपने त्यागपत्र में तमिलनाडु में पार्टी को मजबूत करने की इच्छा को इस्तीफे का कारण बताया है। राज्यसभा सीट खाली होने के बाद मध्यप्रदेश में उपचुनाव की संभावना भी चर्चा में है, हालांकि चुनाव की तारीख और प्रक्रिया को लेकर आधिकारिक घोषणा का इंतजार रहेगा। अब इस पूरे मामले में भाजपा की प्रतिक्रिया और आगे आने वाले घटनाक्रम पर राजनीतिक नजरें टिकी हैं।
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मध्य प्रदेश के जबलपुर से हैदराबाद के बीच हवाई सफर करने वाले यात्रियों को दिवाली से पहले किराए में राहत मिल सकती है। 25 अक्टूबर से इस रूट पर एटीआर विमान की जगह एयरबस का संचालन शुरू होने की उम्मीद है। इससे टिकटों के दाम में 25 से 30 प्रतिशत तक की कमी आ सकती है। फिलहाल सामान्य दिनों में जबलपुर से हैदराबाद की टिकट के लिए यात्रियों को करीब 6,500 से 9,000 रुपये तक खर्च करने पड़ते हैं। एयरबस शुरू होने के बाद यह किराया घटकर लगभग 4,000 से 5,500 रुपये तक रह सकता है। हालांकि, वास्तविक किराया बुकिंग के समय, यात्रियों की मांग और सीटों की उपलब्धता पर निर्भर करेगा। किराए में संभावित गिरावट की प्रमुख वजह एयरबस में सीटों की अधिक संख्या होना है। मौजूदा एटीआर विमान में करीब 78 सीटें होती हैं, जबकि एयरबस में 180 से 186 यात्रियों के बैठने की क्षमता होती है। विमानन कंपनियां डायनामिक प्राइसिंग के तहत टिकटों के दाम तय करती हैं। कम सीटों वाले विमान में सस्ती टिकटों की श्रेणी जल्दी भर जाती है, जिसके बाद यात्रियों को महंगे टिकट खरीदने पड़ते हैं। अधिक सीटों की उपलब्धता से कम किराए वाली श्रेणी में टिकट मिलने की संभावना बढ़ सकती है। फिलहाल व्यस्त दिनों में जबलपुर-हैदराबाद रूट का किराया 12 हजार से 18 हजार रुपये तक पहुंच जाता है। एयरबस संचालन के बाद सामान्य दिनों में किराया 4,000 से 5,500 रुपये रहने का अनुमान है, जबकि आखिरी समय में टिकट लेने वाले यात्रियों को भी पहले की तुलना में राहत मिल सकती है। जबलपुर और आसपास के कटनी, नरसिंहपुर, मंडला और सिवनी जैसे जिलों के यात्रियों के लिए यह रूट काफी महत्वपूर्ण है। हैदराबाद और बेंगलुरु में आईटी क्षेत्र में काम करने वाले युवाओं के साथ दक्षिण भारत के अस्पतालों में इलाज के लिए जाने वाले लोगों को भी इसका लाभ मिल सकता है। हैदराबाद से आगे बेंगलुरु, चेन्नई, केरल और खाड़ी देशों के लिए कनेक्टिंग फ्लाइट लेना भी सुविधाजनक हो सकता है। प्रस्तावित समय-सारणी के अनुसार, विमान हैदराबाद से दोपहर 3:40 बजे रवाना होकर शाम 4:55 बजे जबलपुर पहुंचेगा। इसके बाद जबलपुर से शाम 5:25 बजे उड़ान भरकर शाम 6:45 बजे हैदराबाद पहुंचेगा। एयरबस की अधिक क्षमता और संभावित कम किराए से यात्रियों को सुविधा मिलने की उम्मीद है।
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राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु 22 और 23 अक्टूबर को छत्तीसगढ़ के दो दिवसीय दौरे पर रहेंगी। इस दौरान राजधानी रायपुर में युवा प्रबोधन एवं सेवा सम्मान कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा, जिसमें राष्ट्रपति स्कूल और कॉलेजों के करीब 1,000 विद्यार्थियों से संवाद करेंगी। 22 अक्टूबर को इंडोर स्टेडियम में होने वाले इस कार्यक्रम में विद्यार्थियों को राष्ट्रपति से सीधे बातचीत करने का अवसर मिलेगा। इसके साथ ही, प्रदेश में सेवा संकल्प अभियान के तहत स्वैच्छिक रक्तदान करने वाले रक्तदाताओं को भी सम्मानित किया जाएगा। कार्यक्रम का उद्देश्य युवाओं को सामाजिक सरोकारों से जोड़ने और सेवा कार्यों में योगदान देने वालों को प्रोत्साहित करना है। रायपुर में कार्यक्रम के बाद राष्ट्रपति 23 अक्टूबर को बस्तर संभाग के मुख्यालय जगदलपुर पहुंचेंगी। यहां वे विश्व प्रसिद्ध बस्तर दशहरा के समापन से जुड़ी ऐतिहासिक परंपरा ‘मुरिया दरबार’ में शामिल होंगी। मुरिया दरबार को बस्तर की जनजातीय संस्कृति, परंपराओं और सामुदायिक संवाद का महत्वपूर्ण प्रतीक माना जाता है। इस आयोजन में जनजातीय समाज के प्रतिनिधि अपनी समस्याएं, मांगें और क्षेत्र से जुड़े मुद्दे सामने रखते हैं। इसे आदिवासी समाज की ‘जन-संसद’ के रूप में भी पहचान मिली है। राष्ट्रपति की मौजूदगी से बस्तर की इस विशिष्ट सांस्कृतिक परंपरा को राष्ट्रीय स्तर पर पहचान मिलने की उम्मीद है। जगदलपुर प्रवास के दौरान राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु लालबाग में आयोजित सभा को भी संबोधित करेंगी। इससे पहले वे 7 फरवरी को बस्तर पंडुम का शुभारंभ करने जगदलपुर पहुंची थीं। बस्तर पंडुम के जरिए क्षेत्र की जनजातीय कला, लोक परंपराओं और सांस्कृतिक विरासत को प्रदर्शित किया जाता है। राष्ट्रपति का यह दौरा छत्तीसगढ़ में युवा संवाद, सामाजिक सेवा और जनजातीय संस्कृति को केंद्र में रखेगा। रायपुर में विद्यार्थियों और रक्तदाताओं से जुड़ा कार्यक्रम होगा, जबकि जगदलपुर में बस्तर की ऐतिहासिक परंपराओं और सांस्कृतिक विरासत को प्रमुखता मिलेगी।
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मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल के मिसरोद थाना क्षेत्र में जनजातीय विद्यार्थियों के साथ कथित दुर्व्यवहार का मामला तूल पकड़ता जा रहा है। गोंड समाज महासभा ने इस मामले में निष्पक्ष जांच और जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है। महासभा के प्रदेश अध्यक्ष युवा प्रकोष्ठ जेएस धुर्वे ने नरसिंहपुर कलेक्टर के माध्यम से राष्ट्रपति, राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग और राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग के नाम ज्ञापन सौंपा है। ज्ञापन में आरोप लगाया गया है कि 13 अक्टूबर को गोंडवाना स्टूडेंट यूनियन के शांतिपूर्ण प्रदर्शन के दौरान ‘जय जोहार’ अभियान पर आपत्तिजनक टिप्पणी की गई और प्रदर्शन कर रहे छात्रों को पुलिस वाहन में बैठाकर ले जाया गया। इस मामले में मिसरोद के तत्कालीन थाना प्रभारी रतन सिंह परिहार पर छात्रों के साथ अभद्र व्यवहार करने और आपत्तिजनक भाषा का इस्तेमाल करने के आरोप लगे हैं। घटनाक्रम का एक वीडियो सोशल मीडिया पर सामने आने के बाद विभिन्न संगठनों ने विरोध जताया था। मामले की गंभीरता को देखते हुए थाना प्रभारी को निलंबित कर जांच के आदेश दिए गए। राज्य मंत्री नरेंद्र शिवाजी पटेल के मुताबिक, मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने मामले को गंभीरता से लेते हुए कार्रवाई के निर्देश दिए हैं। उन्होंने यह भी कहा कि जांच में यदि अन्य पुलिसकर्मी दोषी पाए जाते हैं, तो उनके खिलाफ भी कार्रवाई की जाएगी। गोंड समाज महासभा ने मांग की है कि घटना से जुड़े सीसीटीवी फुटेज, मोबाइल वीडियो और पुलिस रिकॉर्ड सुरक्षित रखे जाएं, ताकि निष्पक्ष जांच हो सके। संगठन ने हिरासत में लेने की प्रक्रिया की वैधानिकता की जांच करने और आरोप प्रमाणित होने पर संबंधित लोगों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की मांग भी की है। महासभा का कहना है कि केवल निलंबन पर्याप्त नहीं है और जांच के आधार पर एफआईआर दर्ज करने पर भी विचार किया जाना चाहिए। साथ ही, पुलिसकर्मियों को जनजातीय संस्कृति, परंपराओं और संवैधानिक अधिकारों के प्रति संवेदनशील बनाने की मांग उठाई गई है। अब इस मामले में जांच के निष्कर्ष और आगे होने वाली कार्रवाई पर सबकी नजर है।
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मध्य प्रदेश में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की अध्यक्षता में 15 अक्टूबर को भोपाल स्थित मंत्रालय में कैबिनेट की बैठक हुई। बैठक में औद्योगिक विकास, स्कूल परिवहन व्यवस्था और शैक्षणिक संस्थानों के उन्नयन से जुड़े कई अहम प्रस्तावों को मंजूरी दी गई। सरकार ने भोपाल, जबलपुर और इंदौर को जोड़ने वाले औद्योगिक कॉरिडोर के विकास का फैसला किया है। इसके लिए उद्योग विभाग के माध्यम से राज्य सरकार के स्वामित्व वाली नई कंपनी गठित की गई है और शुरुआती तौर पर 100 करोड़ रुपए की राशि उपलब्ध कराई गई है। इस परियोजना का उद्देश्य महाकौशल समेत प्रदेश के विभिन्न क्षेत्रों में निवेश, व्यापार और औद्योगिक गतिविधियों को गति देना है। औद्योगिक कॉरिडोर के पहले चरण में 3,000 से 10,000 एकड़ तक भूमि विकसित करने की योजना है। सरकार के अनुमान के मुताबिक, मार्च 2028 तक इस परियोजना के जरिए एक लाख करोड़ रुपए से अधिक का निवेश आकर्षित किया जा सकता है, जिससे करीब एक लाख लोगों को प्रत्यक्ष और दो लाख लोगों को अप्रत्यक्ष रोजगार मिलने की संभावना है। आगामी तीन वर्षों में तीन लाख करोड़ रुपए से अधिक के निवेश और छह लाख से ज्यादा रोजगार के अवसर पैदा करने की संभावनाएं भी जताई गई हैं। इस क्षेत्र में पर्यटन, कृषि, खनन और भारी उद्योगों के विकास पर जोर दिया जाएगा। सड़क, बिजली, पानी और विमानन जैसी सुविधाओं का उपयोग कर उद्योगों के लिए अनुकूल माहौल तैयार करने की योजना है। कैबिनेट ने स्कूलों में परिवहन व्यवस्था को मजबूत करने के लिए करीब 241 करोड़ रुपए की योजना को भी मंजूरी दी है। इसके तहत बसों के संचालन और रखरखाव की जिम्मेदारी जिला स्तर पर कलेक्टरों को सौंपने का निर्णय लिया गया है, ताकि स्थानीय जरूरतों के अनुसार व्यवस्था बेहतर बनाई जा सके। इसका लाभ जनजातीय और अन्य क्षेत्रों के विद्यार्थियों को देने का लक्ष्य है। इसके अलावा, सांदीपनि स्कूलों सहित शासकीय स्कूलों, छात्रावासों, पुस्तकालयों और अन्य शैक्षणिक संस्थानों के उन्नयन के लिए लगभग 3,000 करोड़ रुपए की राशि स्वीकृत किए जाने की जानकारी दी गई। सरकार का लक्ष्य शिक्षा से जुड़ी सुविधाओं को बेहतर बनाना और विद्यार्थियों को अधिक प्रभावी शैक्षणिक एवं परिवहन सुविधाएं उपलब्ध कराना है।
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साउथ सुपरस्टार रजनीकांत की एक्शन-ड्रामा फिल्म ‘जेलर 2’ ने रिलीज के पहले ही दिन बॉक्स ऑफिस पर शानदार शुरुआत की है। नेल्सन दिलीपकुमार के निर्देशन में बनी यह फिल्म 15 अक्टूबर को सिनेमाघरों में रिलीज हुई। ट्रेड वेबसाइट सैकनिल्क के मुताबिक, फिल्म ने भारत में पहले दिन 59.70 करोड़ रुपये का नेट कलेक्शन किया, जबकि घरेलू बाजार में इसका ग्रॉस कलेक्शन 70.25 करोड़ रुपये रहा। विदेशों में फिल्म ने 55 करोड़ रुपये का ग्रॉस कारोबार किया। इस तरह फिल्म की पहले दिन की वर्ल्डवाइड कमाई 125.25 करोड़ रुपये तक पहुंच गई। रिपोर्ट के मुताबिक, फिल्म को पहले दिन सिनेमाघरों में करीब 37.46 लाख दर्शक मिले। ‘जेलर 2’ ने पहले दिन की वर्ल्डवाइड ओपनिंग के मामले में रणबीर कपूर की फिल्म ‘एनिमल’ के 116 करोड़ रुपये के कलेक्शन को पीछे छोड़ दिया है। वहीं, विदेशी बाजार में भी फिल्म ने इस साल जनवरी में रिलीज हुई ‘धुरंधर 2’ के 52 करोड़ रुपये के पहले दिन के ग्रॉस कलेक्शन को पार कर लिया। भाषा के हिसाब से देखें तो फिल्म को सबसे ज्यादा कमाई तमिल वर्जन से हुई, जिसने 9,326 शो में 43.35 करोड़ रुपये का नेट कलेक्शन किया। तेलुगु वर्जन ने 12.50 करोड़ रुपये, हिंदी वर्जन ने 3.50 करोड़ रुपये और कन्नड़ वर्जन ने 35 लाख रुपये कमाए। इन सभी भाषाओं को मिलाकर फिल्म का घरेलू नेट कलेक्शन 59.70 करोड़ रुपये रहा। ‘जेलर 2’ साल 2023 में आई रजनीकांत की हिट फिल्म ‘जेलर’ का सीक्वल है। फिल्म में रजनीकांत एक बार फिर रिटायर्ड जेलर टाइगर मुथुवेल पांडियन के किरदार में नजर आ रहे हैं। कहानी में अंडरवर्ल्ड से नई चुनौती सामने आने के बाद टाइगर अपने परिवार और विरासत की रक्षा के लिए फिर से संघर्ष करता है। इस एक्शन थ्रिलर में रजनीकांत के साथ मोहनलाल और विद्या बालन भी अहम भूमिकाओं में हैं। फिल्म की शुरुआती कमाई ने इसे बॉक्स ऑफिस पर चर्चा में ला दिया है, हालांकि आगे इसका प्रदर्शन कैसा रहता है, यह आने वाले दिनों के कलेक्शन से स्पष्ट होगा।
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एक्टर इमरान खान को मुंबई पुलिस की ओर से नोटिस जारी कर 28 अक्टूबर तक भारत छोड़ने का निर्देश दिए जाने की खबर सामने आई है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, इमरान अमेरिकी नागरिक हैं और भारत में ओवरसीज सिटीजनशिप ऑफ इंडिया (OCI) कार्ड के आधार पर रह रहे हैं। बताया जा रहा है कि यह कार्रवाई इमिग्रेशन से जुड़े नियमों के तहत की गई है। इमरान 10 अक्टूबर को मुंबई के अगस्त क्रांति मैदान में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर हुए प्रदर्शन में शामिल हुए थे। इससे पहले वे जुलाई में नीट पेपर लीक के विरोध में कॉकरोच जनता पार्टी की ओर से आयोजित प्रदर्शन में भी शामिल हुए थे। इमरान खान का जन्म अमेरिका के विस्कॉन्सिन में हुआ था और उनके पास अमेरिकी नागरिकता है। भारत में विदेशी नागरिकों के प्रवेश और रहने से जुड़े नियमों के तहत उनकी गतिविधियों और प्रवास पर शर्तें लागू हो सकती हैं। रिपोर्ट्स के अनुसार, 10 अक्टूबर को प्रदर्शन के दौरान मुंबई पुलिस ने इमरान को हिरासत में लिया था। इसके बाद उन्होंने पुलिस वैन के अंदर से अपनी तस्वीर सोशल मीडिया पर साझा की थी। इमरान ने मीडिया से बातचीत में दावा किया था कि उन्हें बिना किसी वजह के सड़क से उठाकर पुलिस वैन में बैठाया गया। हिरासत के दौरान उनकी कजिन जैन ने उनसे जेल जाने को लेकर सवाल किया था, जिस पर इमरान ने मौजूदा हालात को देखते हुए इसकी आशंका जताई थी। रिहाई के बाद इमरान खान और उनके साथ मौजूद लोगों को घर लौटने में भी परेशानी होने की बात सामने आई थी। लेखा वाशिंगटन ने सोशल मीडिया पर एक वीडियो साझा कर दावा किया था कि पुलिस ने रिहाई के बाद उनके लिए कार या कैब की व्यवस्था नहीं करने दी और उनका मोबाइल फोन भी जमा करा लिया गया था। इसके बाद इमरान, लेखा और जैन पैदल ही घर की ओर निकले। इमरान ने यह भी बताया था कि रिहाई से पहले उन्हें और अन्य लोगों को करीब दो घंटे तक पुलिस वैन में घुमाया गया। अब भारत छोड़ने के नोटिस की खबर के बाद यह मामला एक बार फिर चर्चा में है।
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छत्तीसगढ़ सरकार ने अग्निपथ योजना के तहत चार साल की सैन्य सेवा पूरी करने वाले पूर्व अग्निवीरों के लिए सरकारी नौकरी के नए अवसर खोलने की पहल की है। सामान्य प्रशासन विभाग की ओर से 15 अक्टूबर 2026 को जारी भर्ती नियमों के तहत पुलिस आरक्षक, वनरक्षक और जेल प्रहरी के पदों पर पात्र पूर्व अग्निवीरों को 10 प्रतिशत क्षैतिज आरक्षण देने का प्रावधान किया गया है। इसके तहत गृह विभाग, वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग और जेल विभाग की भर्तियों में उन्हें अवसर मिलेगा। यह आरक्षण संबंधित सामाजिक श्रेणियों के भीतर लागू होगा। हालांकि, इस विशेष व्यवस्था का लाभ छत्तीसगढ़ के पात्र स्थानीय निवासी पूर्व अग्निवीर ही ले सकेंगे। इसके लिए उम्मीदवारों को चार साल की सैन्य सेवा पूरी करने का प्रमाणपत्र, स्थानीय निवास प्रमाणपत्र और अन्य जरूरी दस्तावेज प्रस्तुत करने होंगे। नए नियमों के अनुसार, पात्र पूर्व अग्निवीरों को लिखित परीक्षा और शारीरिक योग्यता एवं दक्षता परीक्षा से छूट देने का प्रावधान है। चयन के लिए 10वीं कक्षा के अंकों के आधार पर मेरिट सूची तैयार की जाएगी। यदि दो उम्मीदवारों के अंक समान होते हैं, तो अधिक उम्र वाले अभ्यर्थी को प्राथमिकता देने का प्रावधान रखा गया है। सेना, नौसेना या वायुसेना से जारी मान्य शैक्षणिक प्रमाणपत्रों को भी निर्धारित नियमों के अनुसार स्वीकार किया जा सकेगा। इसके अलावा, पूर्व अग्निवीरों को अधिकतम आयु सीमा में अतिरिक्त छूट मिलेगी। पहले बैच के अभ्यर्थियों को पांच साल और अन्य बैच के अभ्यर्थियों को तीन साल की छूट देने का प्रावधान है। भर्ती प्रक्रिया में बैचवार प्राथमिकता भी निर्धारित की गई है, जिसके तहत पहले बैच के पात्र उम्मीदवारों पर पहले विचार किया जाएगा। हालांकि, अंतिम पात्रता संबंधित विभाग के भर्ती नियमों और आधिकारिक विज्ञापन के अनुसार तय होगी। राज्य सरकार ने पूर्व अग्निवीरों की भर्ती के लिए अलग ऑनलाइन पोर्टल विकसित करने का भी प्रावधान किया है। संबंधित विभागों की ओर से भर्ती विज्ञापन जारी होने के बाद पात्र उम्मीदवार आवेदन कर सकेंगे। फिलहाल आवेदन शुरू होने की तारीख और कुल रिक्त पदों की संख्या की जानकारी उपलब्ध नहीं है। नियमों के अनुसार, चयनित उम्मीदवारों को तीन साल की परिवीक्षा अवधि पर रखा जाएगा। साथ ही, किसी एक पद पर पूर्व अग्निवीर आरक्षण का लाभ लेकर नियुक्ति पाने वाला अभ्यर्थी दूसरे पद पर नियुक्ति के लिए दोबारा इसी आरक्षण का लाभ नहीं ले सकेगा। सरकार ने 30 सितंबर 2026 को मंत्रिपरिषद की बैठक में इन भर्ती नियमों को मंजूरी दी थी, जिसके बाद 15 अक्टूबर को इन्हें जारी किया गया। अब पात्र उम्मीदवारों को आवेदन प्रक्रिया और भर्ती से जुड़ी आगे की जानकारी के लिए आधिकारिक विज्ञापन का इंतजार करना होगा।
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उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कांग्रेस समेत विपक्षी दलों पर निशाना साधते हुए कहा कि लोकतंत्र में सत्ता जनता के जनादेश से मिलती है, अराजकता से नहीं। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट के जरिए उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ ताकतें बांग्लादेश की तर्ज पर भारत में सत्ता परिवर्तन का सपना देख रही हैं और युवाओं को राष्ट्र निर्माण के बजाय अराजकता की ओर ले जाना चाहती हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि युवाओं की ऊर्जा देश का भविष्य संवारने में लगनी चाहिए, न कि किसी की राजनीतिक महत्वाकांक्षा पूरी करने में। उनके मुताबिक, देश में अस्थिरता फैलाकर सत्ता हासिल करने की कोशिश लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए उचित नहीं है। सीएम योगी ने चुनाव सुधार, न्याय और लोकतंत्र के नाम पर देश में अस्थिरता पैदा करने की कोशिशों का भी आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि भारत का लोकतंत्र जनता के विश्वास पर टिका है और इसे राजनीतिक साजिशों से कमजोर नहीं किया जा सकता। मुख्यमंत्री ने विपक्ष पर तंज कसते हुए कहा कि जनता ने ऐसे राजनीतिक दलों को पहचानकर सत्ता से दूर रखा है। उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ लोग देश को अराजकता की आग में झोंककर कुर्सी हासिल करना चाहते हैं। योगी ने जोर दिया कि युवाशक्ति का उद्देश्य राष्ट्र निर्माण होना चाहिए, न कि राजनीतिक स्वार्थों को पूरा करना। मुख्यमंत्री का यह बयान ऐसे समय आया है, जब कांग्रेस समेत विपक्षी दल भाजपा सरकार पर वोट चोरी के आरोप लगा रहे हैं। विपक्ष मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग भी कर रहा है और चुनाव प्रक्रिया से जुड़े मुद्दों को लेकर प्रदर्शन कर रहा है। इसी पृष्ठभूमि में योगी आदित्यनाथ ने विपक्ष की रणनीति पर सवाल उठाते हुए जनादेश को लोकतंत्र का आधार बताया। जहां विपक्ष चुनाव प्रक्रिया में सुधार और जवाबदेही की मांग कर रहा है, वहीं मुख्यमंत्री ने इन मुद्दों के जरिए देश में अस्थिरता फैलाने के आरोप लगाए हैं। इस बयान से चुनाव प्रक्रिया और विपक्ष के आंदोलन को लेकर राजनीतिक बहस और तेज होने की संभावना है।
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