विशेष

दमोह। मध्यप्रदेश के दो दिवसीय प्रवास पर आए राष्ट्रपति रामनाथ कोविन्द रविवार को दमोह जिले के ग्राम सिंग्रामपुर में आयोजित राज्यस्तरीय जनजातीय सम्मेलन में सिंगौरगढ़ किले के संरक्षण कार्यों का शिलान्यास किया। इससे पहले उन्होंने यहां रानी दुर्गावती की प्रतिमा पर माल्यार्पण कर परिसर में पौधरोपण भी किया।   राष्ट्रपति कोविन्द मप्र प्रवास के दूसरे दिन रविवार को सुबह जबलपुर से वायुसेना के हेलीकॉप्टर द्वारा दमोह हेलीपैड पहुंचे, जहां प्रदेश की राज्यपाल आनंदीबेन पटेल, मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान, केंद्रीय मंत्री प्रह्लाद पटेल, फग्गन सिंह कुलस्ते, नगरीय विकास एवं आवास मंत्री भूपेन्द्र सिंह, जनजातीय कार्य विभाग मंत्री मीना सिंह, संभागीय आयुक्त मुकेश शुक्ला, कलेक्टर तरुण राठी, पुलिस अधीक्षक हेमंत चौहान ने स्वागत कर उनकी अगवानी की। इस अवसर पर राष्ट्रपति ने सभी से परिचय प्राप्त किया। राष्ट्रपति यहां से सड़क मार्ग से सिंग्रामपुर पहुंचे, जहां उन्होंने रानी दुर्गावती की प्रतिमा पर माल्यार्पण किया और वृक्षारोपण कार्यक्रम के तहत पौधा लगाया।    इसके बाद राष्ट्रपति कोविन्द राज्यस्तरीय जनजातीय सम्मेलन में शामिल हुए और सिंगौरगढ़ किले के संरक्षण एवं पर्यटन से जुड़ी विभिन्न सुविधाओं के विकासकार्यों की आधारशिला रखी। उन्होंने भूमिपूजन एवं शिलापट्टिकाओं का अनावरण किया। इसके साथ ही उन्होंने जनजातीय समूह के सर्वांगीण विकास के लिए मध्यप्रदेश जनजातीय विभाग द्वारा तैयार किए गए आदिरंग पोर्टल का शुभारंभ किया। इस दौरान राज्यपाल आनंदीबेन पटेल और मुख्यमंत्री चौहान मौजूद रहे। 

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Dakhal News 7 March 2021

भोपाल। मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान कल 8 मार्च को अंतरराष्‍ट्रीय महिला दिवस के मौके पर राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन के तहत गठित महिला स्व-सहायता समूहों के सदस्यों को लगभग 200 करोड़ रुपये के बैंक ऋण वितरित करेंगे। कार्यक्रम में मुख्यमंत्री कुछ जिलों के समूह सदस्‍यों से वीडियो कॉन्फ्रेन्स के माध्यम से सीधा संवाद भी करेंगे।जनसम्पर्क अधिकारी आरएस मीणा ने बताया कि अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस पर भोपाल के मोतीलाल नेहरू स्‍टेडियम में मुख्य समारोह आयोजित होगा, जिसमें मुख्यमत्री स्व सहायता समूहों को ऋण वितरित करेंगे। समारोह में लगभग 6 हजार से अधिक स्‍व–सहायता समूह सदस्‍य महिलाएं भाग लेंगी। प्रदेश के समस्‍त जिलों में ग्राम पंचायत स्‍तर पर समूह सदस्‍य कार्यक्रम में वर्चुअल शामिल होंगे। समारोह में पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्री महेन्‍द्र सिंह सिसौदिया एवं राज्‍य मंत्री रामखेलावन पटेल भी उपस्थित रहेंगे।उन्होंने बताया कि पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग द्वारा कोरोना काल में ग्रामीण परिवारों की आर्थिक स्थिति सुदृढ़ करने के लिये लॉकडाउन के समय से लगातार वर्चुअल कार्यक्रम आयोजित कर हितग्राहियों को लाभान्वित किया जा रहा है। मुख्‍यमंत्री द्वारा इससे पहले भी वर्चुअल कार्यक्रमों में तीन बार सामूहिक ऋण वितरण स्व-सहायता समूहों को किया जा चुका है।

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Dakhal News 7 March 2021

राजनीति

देवास। युद्ध का मैदान अब बदल गया है। देश विरोधियों को यह अहसास हो गया है कि मोदी जी के रहते देश में हमले कराना, विस्फोट कराना संभव नहीं है, इसलिए अब ये लोग सोशल मीडिया का इस्तेमाल करके देश की और हमारे प्रधानमंत्री जी की छवि खराब करने का प्रयास कर रहे हैं। इन ताकतों को यह पता चल गया है कि अब बंदूक के बल पर कुछ किया नहीं जा सकता, इसलिए अब उन्होंने नई रणनीति बनाई है कि किस तरह भारत को बदनाम करके नेतृत्व को कठघरे में खड़ा कर सकते हैं। ये लोग 24 घंटे यही सोचते रहते हैं कि देश को बदनाम कैसे किया जाए और इनमें मध्यप्रदेश के भी कुछ नेता शामिल हैं। इन्हें प्रश्न खड़ा करने के अलावा कुछ आता नहीं है। ऐसे लोगों को हमारे युंवा जो पूरे समय सोशल मीडिया पर एक्टिव रहते हैं, जिन्हें हम साइबर योद्धा भी कहते हैं, वो सही जवाब दे सकते हैं। इस काम में हमारे नौजवान साथियों की भूमिका क्या हो, इस पर भी हम प्रवास के दौरान चर्चा कर रहे हैं। यह बात भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश अध्यक्षविष्णुदत्त शर्मा ने रविवार को देवास प्रवास के दौरान पत्रकार वार्ता को संबोधित करते हुए कही।हमारा फोकस बूथ परप्रदेश अध्यक्ष शर्मा ने कहा कि इस प्रवास के दौरान हम संगठनात्मक सुदृढ़ीकरण का अभियान चला रहे हैं और पार्टी के सभी कार्यकर्ताओं के साथ मिलकर इसे पूरा करेंगे। इस अभियान के दौरान हमारा फोकस बूथ समिति और बूथ अध्यक्ष पर है। हम भारतीय जनता पार्टी में इस तरह की एक प्रतिमा बनाना चाहते है कि बूथ ही हमारा सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा है। श्री शर्मा ने कहा कि हम ये नारे लगाते हैं कि बूथ जीता तो चुनाव जीता। मेरा बूथ सबसे मजबूत। इस अभियान के दौरान बूथ के कार्यकर्ताओं, अध्यक्षों, समिति सदस्यों से मिलकर इस पर चर्चा कर रहे हैं।जनता बताएगी कल का देवास कैसा हो शर्मा ने कहा कि हमारे महापौर ने देवास में काफी अच्छा काम किया है, लेकिन उन कामों को अब और आगे कैसे ले जाया जाए, इसे लेकर एक घोषणा पत्र जारी करेंगे। लेकिन यह घोषणा पत्र पार्टी तैयार नहीं करेगी, बल्कि जनता के, प्रबुद्धजनों के अभिमत पर इसे तैयार किया जाएगा।शर्मा ने कहा कि समाज में कई ऐसे लोग हैं जो यह सोचते हैं कि कल का देवास कैसा हो? ये किसी राजनीतिक दल के सदस्य नहीं हैं, लेकिन उन्हें लगता है कि देवास के विकास में किसी बात को शामिल किया जाना चाहिए, तो उसे हम अपने घोषणा पत्र में शामिल करेंगे। शर्मा ने कहा कि हमारे मुख्यमंत्री जी प्रत्येक नगर निगम क्षेत्र के विकास के लिए एक रोडमैप तैयार कर रहे हैं। उस रोडमैप के साथ हम जनता के सुझावों, अभिमत को भी घोषणा पत्र में शामिल करेंगे। इसके लिए हम आम लोगों, प्रबुद्धजनों से मिल भी रहे हैं और ई-मेल तथा व्हाट्सएपर पर भी सुझाव आमंत्रित किए जा रहे हैं।

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Dakhal News 7 March 2021

रतलाम। भारतीय जनता पार्टी के प्रदेशाध्यक्ष विष्णुदत्त शर्मा ने कहा कि नगरीय चुनाव में भाजपा प्रदेश में इतिहास कायम करेगी। केंद्र व राज्य सरकार की उपलब्धियों से जनता जनार्दन में भाजपा के प्रति आस्था विश्वास कायम हुआ है। यहीं कारण है कि केंद्र से लगाकर पंचायत तक भाजपा के जनप्रतिनिधि चुने गए । आने वाले चुनावों में भी पार्टी को प्रचण्ड बहुमत मिलेगा इसमें कोई दो राय नहीं है।   भाजपा प्रदेश अध्यक्ष वीडी शर्मा ने शुक्रवार को रतलाम प्रवास के दौरान पत्रकारों से बातचीत करते हुए कहा कि न तो संगठन में और ना ही सरकार में आयु सीमा का कोई प्रश्न है और ना ही कोई निर्धारित किया गया है। हम चाहते हैं कि युवाओं को मौका मिले ताकि आने वाले समय में नेतृत्व को मजबूती मिले। वरिष्ठ लोगों ने पार्टी को सींचा हैै उनकी उपेक्षा का कोई प्रश्न नहीं है। उनका मार्गदर्शन पार्टी के साथ सदैव रहा है और रहेगा। उन्होंने यह भी कहा कि वरिष्ठजनों की बैठक में भी सभी से यही अपेक्षा की गई है कि वह पार्टी का जनाधार बढ़ाने के लिए अपना महत्वपूर्ण सहयोग प्रदान करें।   एक प्रश्न के जवाब में शर्मा ने कहा कि निकाय चुनाव कब होंगे इसका निर्धारण निर्वाचन आयोग द्वारा होगा। हमें उम्मीद है कि चुनाव शीघ्र होंगे। जनता की कसौटी पर हमारी पार्टी खरी उतरेगी। आने वाले चुनाव में उन्हीं लोगों को मौका मिलेगा जो चुनाव जीत सके।   महंगाई नियंत्रण के लिए ठोस नीति बन रही है   महंगाई के प्रश्न पर भाजपा प्रदेश अध्यक्ष ने कहा कि महंगाई बढ़ रही है, इससे इंकार नहीं किया जा सकता। इस पर नियंत्रण कैसे हो इस पर केंद्र सरकार गंभीरता से विचार कर रही है। ऐसी ठोस नीति बनाई जा रही है जो भारत के आत्मनिर्भरता की दृष्टि सेे महत्वपूर्ण हो। पूर्व सरकार में कई ऐेसी नीतियां बनीं, जिसके कारण ही महंगाई का यह स्वरुप देखने को मिल रहा है। भाजपा सभी वर्ग की चिंता कर रही है। सबका साथ सबका विकास हमारा लक्ष्य है और उद्देश्य भी।    प्रदेश के बजट में रतलाम को भी महत्व मिला उन्होंने केंद तथा राज्य सरकार की उपलब्धियों का जिक्र करते हुए कहा कि मोदीजी के नेतृत्व में और प्रदेश में शिवराजजी के नेतृत्व में जो प्रगति हुई है वह सबके सामनेे है। जहां तक रतलाम का प्रश्न है इस बजट में भी कई योजनाओं में रतलाम को महत्व देेत हुए राशि आवंटित की गई है, चाहे सड़क हो, पानी हो, पुलिया हो या अन्य कोई योजना सभी के लिए भरपूर राशि आवंटित की गई है।   मेडिकल कालेज का भी जिक्र किया  रतलाम के मेडिकल कालेज का उन्होंने जिक्र किया और कहा कि कोरोना काल में मेडिकल कालेज काफी महत्वपूर्ण रहा हैै। आसपास के जिलों में भी मेडिकल कालेज स्थापित होंगेे ताकि स्वास्थ्य सेवाओं को बल मिल सके। मेरे संसदीय क्षेत्र खजुराहो में भी मेडिकल कालेज की स्थापना केे लिए मैं संघर्षरत हूं।   माफियाओं के समर्थन का प्रश्न ही नहीं ? उन्होंने कहा कि माफियाओं को बख्शा नहीं जाएगा और ना ही उन्हें पर्दें के अंदर या पर्देे केे बाहर किसी प्रकार का कोई समर्थन मिलेगा। मुख्यमंत्री ने भी इस संबंध में स्पष्ट कहा है और पार्टी की भी स्पष्ट रीति नीति है, किसी भी प्रकार के गलत तत्वों को प्रोत्साहन नहीं दिया जाना।   प्रदेश भाजपा रोल माडल साबित हुई है  शर्मा ने भाजपा की अभी तक की प्रगति का भी उल्लेख किया और कहा कि मध्यप्रदेश भाजपा एक रोल माडल के रुप में सारे देश में पहचान बना चुकी है। यह सब कार्यकर्ताओं के बल पर ही संभल हुआ है। हम परिवार भाव से काम करते है। सभी को पार्टी में महत्व दिया जाता है। किसी प्रकार का भेदभाव या अंतर हमारी पार्टी में नहीं है। हमने अल्पसंख्यक वर्ग के हितों की भी चिंता की है, जबकि कांग्रेस सरकार ने विध्वंश की राजनीति करते हुए केवल वोटों की राजनीति को महत्व दिया, यहीं कारण है कि समाज के अधिकांश लोग राष्ट्र की मुख्य धारा में नहीं जुड़ पाए।   इस दौरान सांसद गुमानसिंह डामोर, विधायक चेतन्य काश्यप, प्रदेेश मीडिया प्रभारी लोकेन्द्र पाराशर, भाजपा जिलाध्यक्ष राजेन्द्रसिंह लुनेरा,  संभागीय मीडिया प्रभारी सचिन तथा जिला मीडिया प्रभारी अरूण राव उपस्थित थे। शर्मा हेलीकाप्टर से सुबह यहां पहुंचे। उनके स्वागत में रैली निकाली गई। जगह-जगह उनका भव्य स्वागत किया गया।

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Dakhal News 5 March 2021

मीडिया

Sanjaya Kumar Singh-   बंगाल ड्रैगथन… द टेलीग्राफ अखबार में आज चुनाव की खबर लीड है और मुख्य शीर्षक पश्चिम बंगाल का चुनाव आठ चरण में कराए जाने पर केंद्रित है। एक लाइन और कुछ ही शब्दों का छोटा सा शीर्षक रखने की अपनी खास शैली को बनाए रखते हुए अखबार ने आज अंग्रेजी का एक नया शब्द गढ़ा है – ड्रैगेथन। यह अंग्रेजी के दो शब्दों – ड्रैग और मैराथन को मिलाकर बनाया गया है। ड्रैग मतलब होता है घसीटना और लंबी दौड़ की प्रतियोगिता या विशेष आयोजन को मैराथन कहते हैं। बंगाल में चुनाव को लंबे समय तक घसीटने की इस घोषणा को अखबार ने बंगाल ड्रैगथन कहा है। और बेशक सही तुलना है।     इस मुख्य शीर्षक के साथ उपशीर्षक है, राज्य अलग दिखाई दे रहा है क्योंकि सबसे लंबा चुनाव होगा। बंगाल का अखबार बंगाल के साथ किए गए भेदभाव (या विशेष पैकेज, राहत, लाभ आप जो मानिए) को विशेष बता रहा है। बंगाल ड्रैगेथन 27 मार्च से 29 अप्रैल तक चलेगा, मतगणना 2 मई को है – यही खबर है। वरना आम चुनाव भी इतना लंबा कहां चलता है और यह भी नई बीमारी है। बहुत हाल तक आम चुनाव इससे बहुत कम समय में हो जाते थे। अखबार ने अपनी इस खबर के साथ अखबार ने प्रमुखता से बताया है कि किस राज्य में कितनी सीट है और कितने चरण में चुनाव होंगे।   इसके साथ यह भी बताया गया है कि मतदान का दिन कौन सा है। पश्चिम बंगाल में आठ दिन मतदान है तो असम में तीन दिन , तमिलनाडु, केरल और पुडुचेरी में सिर्फ एक दिन 6 अप्रैल को और मतगणना 2 मई यानी इतवार को होगी। एक नजर में सब कुछ – कोई आरोप, कोई शिकायत भी नहीं।

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Dakhal News 1 March 2021

संत समीर- मुझे लग रहा था कि बात हल्की-फुल्की होगी, जल्दी सुलझ जाएगी, इसलिए इस मसले पर अब तक कोई पोस्ट नहीं लिखी, लेकिन अब लग रहा है कि मामला गम्भीर है। बीते दिनों इण्डियन एक्सप्रेस के पत्रकार मित्र श्यामलाल यादव जी का फ़ोन आया तो चिन्ता और बढ़ी। पुलिस विभाग की ओर से तो ख़ैर पहले ही फ़ोन आ गया था। दिल्ली के सूचना और प्रचार निदेशालय के उपनिदेशक नलिन चौहान क़रीब दो महीने पहले 10 दिसम्बर से लापता हैं या जानबूझकर कहीं गए हैं, कुछ भी अन्दाज़ लगाना मुश्किल हो रहा है। नवम्बर में उनका पूरा परिवार कोरोना-ग्रस्त हुआ था। लोगों ने ले जाकर अस्पताल में भर्ती करा दिया तो वहीं से उन्होंने मुझे फ़ोन किया था। मैंने कुछ चिकित्सकीय सुझाव दिए थे और अच्छी बात थी कि वे जल्दी ही स्वस्थ होकर अस्पताल से बाहर भी आ गए थे। जहाँ तक मुझे याद है, 8 दिसम्बर को नलिन जी ने फिर से मुझे फ़ोन किया था और लिखने की एक बड़ी योजना पर मेरे साथ मिलकर काम करना चाहते थे। हमने हफ़्ते भर के भीतर आमने-सामने बैठकर चर्चा करने का भी तय कर लिया था, लेकिन 10 दिसम्बर को एक पारिवारिक समारोह के दौरान जाने क्या हुआ कि शाम को फ़ोन घर पर ही छोड़कर टहलते हुए बाहर निकले और अब तक वापस नहीं लौटे। घर के भीतर आपस में कोई कहा-सुनी हुई थी या घर के बाहर अपहरण जैसी कोई घटना हुई, कुछ भी कहना मुश्किल है। मैं यही मानकर चलता हूँ कि हल्की-फुल्की कोई नाराज़गी होगी और वे जल्दी ही वापस आ जाएँगे, लेकिन यदि ऐसा नहीं हुआ तो नलिन जी को तलाशने की हमें कुछ बड़ी कोशिश करने की ज़रूरत है। नलिन जी बेहद संवेदनशील व्यक्ति हैं, दुनिया-जहान की चिन्ता करते हैं। ऐसे लोगों के आसपास होने से हमारे जैसे लोगों को भी हौसला मिलता है। नलिन जी, अगर आप सचमुच किसी नाराज़गी की वजह से अपनों से दूर गए हों और इस पोस्ट को पढ़ रहे हों, तो ध्यान रखिए कि परिवार के बाहर भी आपके अपने हैं। मुझे लगता है कि आप एक अच्छे परिवार के मुखिया हैं, फिर भी अगर परिवार से नाराज़गी हो तो परिवार को भी छोड़िए और सामने आइए। हम सब तो हैं ही। परिवार समर्थ है अपने हिसाब से रह लेगा, आपके सोच-विचार की ज़रूरत समाज को ज़्यादा है।

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Dakhal News 14 February 2021

समाज

इंदौर। मध्यप्रदेश की आर्थिक राजधानी इंदौर में कुछ दिनों से कोरोना फिर पैर पसारने लगा है। यहां लगातार नये मरीजों की संख्या बढ़ती रही है। इंदौर में बीते 24 घंटों में कोरोना के 161 नये मामले सामने आए हैं, जबकि दो लोगों की मौत हुई है। इसके बाद यहां संक्रमित मरीजों की कुल संख्या बढक़र 60,720 और मृतकों की संख्या 935 हो गई है। यहां नये संक्रमित अधिक संख्या में मिलने के कारण सक्रिय मरीजों की संख्या भी तेजी से बढ़ते हुए 1395 हो गई है।   इंदौर की प्रभारी मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. पूनम गाडरिया ने रविवार को बताया कि एमजीएम मेडिकल कॉलेज द्वारा शनिवार देर रात 2439 सेम्पलों की जांच रिपोर्ट जारी की गई। इनमें 161 व्यक्ति पॉजिटिव पाए गए, जबकि शेष लोगों की रिपोर्ट निगेटिव आई। इन नये मामलों के साथ जिले में अब संक्रमित मरीजों की कुल संख्या 60,720 हो गई है। वहीं, इंदौर में बीते 24 घंटों में कोरोना से दो मरीजों की मौत की पुष्टि हुई है। अब यहां मृतकों की संख्या 935 हो गई है। हालांकि, यहां अब तक 58,390 मरीज कोरोना को मात देकर अपने घर पहुंच गए हैं, लेकिन नये संक्रमित अधिक संख्या में मिलने से यहां सक्रिय मरीज बढक़र 1395 हो गए हैं, जिनका विभिन्न अस्पतालों और घरेलू एकांतवास में उपचार जारी है।   बता दें कि इंदौर में फरवरी के शुरुआत में नये मामलों की संख्या 50 से नीचे पहुंच गई थी, लेकिन इसके बाद यह संख्या लगातार बढ़ते हुए सौ के पार पहुंच गई। इंदौर में लगातार पांचवें दिन डेढ़ सौ से ज्यादा नये संक्रमित मिले हैं। 

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Dakhal News 7 March 2021

उज्जैन। राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग के अध्यक्ष प्रियंक कानूनगो शनिवार, 06 मार्च को एक दिवसीय प्रवास पर उज्जैन आएंगे। वे यहां अधिकारियों की बैठक लेकर बाल अधिकार से संबंधित विभिन्न योजनाओं की समीक्षा करेंगे।   उज्जैन कलेक्टर कलेक्टर आशीष सिंह ने शुक्रवार को बताया कि राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग के अध्यक्ष प्रियंक कानूनगो शनिवार सुबह उज्जैन पहुंचेंगे और यहां प्रात: 11.00 बजे बृहस्पति भवन में बाल भिक्षावृत्ति, बाल श्रम, बाल शोषण रोकथाम आदि मुद्दों पर चलाये जाने वाले अभियानों के सम्बन्ध में बैठक लेंगे। बैठक में विभिन्न विभागों के अधिकारी उपस्थित रहेंगे।   उन्होंने बताया कि नईदिल्ली द्वारा उज्जैन को धार्मिक स्थल के रूप में चाईल्ड फ्रेंडली निर्मित करने के लिए चयन किया गया है। इसके लिये राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग द्वारा एसओपी तैयार की गई है, जिसमें यह सुनिश्चित किया जायेगा कि कोई भी बालक-बालिका फुटपाथ पर न रहे। यदि किसी भी बालक के परिवार को सहायता की आवश्यकता होने पर शासन द्वारा प्रदाय की जा रही विभिन्न योजनाओं से जोड़ा जायेगा। उज्जैन में विशेष धार्मिक स्थल भगवान महाकालेश्वर मन्दिर पर विशेष ध्यान केन्रिजोत किया जायेगा। 

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Dakhal News 5 March 2021

पेज 3

टेलीविजन जगत के मशहूर अभिनेत्री गौहर खान के पिता का  जफर अहमद खान का शुक्रवार को इंतकाल हो गया। वे कुछ समय से बीमार चल रहे थे और अस्पताल में भर्ती थे। उनके इंतकाल की जानकारी खुद गौहर ने इंस्टाग्राम पर अपने पिता की तस्वीर शेयर कर दी है।  इसके साथ ही उन्होंने एक भावुक कर देने वाला नोट भी लिखा है गौहर ने लिखा-मेरे हीरो, कोई पुरुष आपके जैसा नहीं हो सकता, मेरे पिता अब नहीं रहे, वो फरिश्ता हो गए हैं। अल्हमदोलिल्लाह। उनका निधन उनकी खूबसूरत जिंदगी के लिए एक वसीयतनामा था, जिसमें वह सबसे अच्छी रुह थे। मेरे पापा हमेशा रहेंगे। मैं आपसे बहुत प्यार करती हूं। और अभी तक व कभी भी आपके शानदार व्यक्तित्व का एक प्रतिशत भी नहीं हो सकती हूं’। इसके साथ ही गौहर ने हैशटैग लगाकर लिखा 'मेरे हमेशा के लिए चमकते सितारे'। इसके बाद उन्होंने फैंस से दिवंगत पिता को दुआओं में याद करने की अपील की। साथ ही खुद भी उनकी आत्मा की शांति के लिए दुआ मांगी हैं।   गौहर खान के इस पोस्ट के बाद फैंस के साथ -साथ मनोरंजन जगत की हस्तियां भी शोक व्यक्त कर रही है एवं फैंस लगातार उनकी पोस्ट पर प्रतिक्रिया देते हुए उनके पिता की आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना कर रहे हैं और गौहर  को ढांढस भी बंधा रहे हैं। फिलहाल इस दुखद खबर के बाद गौहर के साथ-साथ उनका पूरा परिवार दुःख और सदमे में हैं।

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Dakhal News 5 March 2021

फिल्म अभिनेत्री कंगना रनौत सोशल मीडिया पर सक्रिय रहती हैं और अक्सर अपनी फिल्मों से जुड़े अपडेट्स फैंस के साथ साझा करती रहती हैं। कंगना रनौत इन दिनों अपनी आगामी फिल्मों को लेकर काफी व्यस्त चल रही हैं। उनकी कई फिल्में कतार में है, जिनमें उनकी एक देशभक्ति फिल्म 'तेजस' भी शामिल है। इस फिल्म में कंगना एक एयरफोर्स पायलट की भूमिका में हैं।  कंगना अपनी इस फिल्म में एक भारतीय वायुसेना अधिकारी के किरदार में दिखने वाली हैं। फाइटर पायलट के रोल में खुद को ढ़ालने के लिए कंगना लगातार कठिन मेहनत कर रही हैं। इसके साथ ही वह इस फिल्म के लिए आर्मी की ट्रेनिंग भी ले रही हैं। इसकी जानकारी खुद कंगना ने सोशल मीडिया पर एक वीडियो पोस्ट कर दी।   इस वीडियो में कंगना नेट पर चढ़ते हुए दिख रही हैं। सोशल मीडिया पर कंगना का यह वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है। इसके साथ ही फैंस उनके कठिन परिश्रम की तारीफ भी कर रहे हैं।  रोनी स्क्रूवाला द्वारा निर्मित इस फिल्म के निर्देशक सर्वेश मेवाड़ा है।

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Dakhal News 5 March 2021

दखल क्यों

हृदयनारायण दीक्षित सारी प्राचीनता गर्व करने योग्य नहीं होती लेकिन प्राचीनता का बड़ा भाग प्रेरक और गर्व करने योग्य ही होता है। अंग्रेजों ने प्रचारित किया कि भारत एक राष्ट्र नहीं है। अंग्रेजी सभ्यता प्रभावित विद्वानों ने मान लिया कि हम कभी राष्ट्र नहीं थे। अंग्रेजों ने ही भारत को राष्ट्र बनाया है। लेकिन 20वीं सदी के सबसे बड़े आदमी महात्मा गांधी ने चुनौती दी। उन्होंने 1909 में हिन्द स्वराज में लिखा, “आपको अंग्रेजों ने बताया है कि भारत एक राष्ट्र नहीं था कि अंग्रेजों ने ही यह राष्ट्र बनाया है लेकिन यह सरासर झूठ है। भारत अंग्रेजों के यहां आने के पहले भी एक राष्ट्र था।” गांधीजी ने भारत को प्राचीन राष्ट्र बताया। प्राचीन भारत राष्ट्र के साथ-साथ एक राज्य रूप में भी था। मौर्यकाल इसकी सबसे बड़ी ऐतिहासिक गवाही है। तब यूरोप सहित दुनिया के अधिकांश भूभागों के पास राष्ट्र की कल्पना भी नहीं थी। विश्व के अन्य देशों में राष्ट्र जैसी कल्पना भी 11वीं सदी के पहले नहीं मिलती। भारतीय राष्ट्र हजारों बरस पुराना है। ऋग्वेद विश्व का प्राचीनतम ज्ञान संकलन है। ऋग्वेद जैसा प्रीतिपूर्ण, ज्ञान विज्ञान युक्त काव्य अचानक नहीं उग सकता। इसके पहले एक विशेष प्रकार की संस्कृति और वैज्ञानिक दृष्टिकोण वाला दर्शन भी रहा होगा। ऋग्वेद में ज्ञान, विज्ञान है, अप्रतिम सौन्दर्यबोध है, इतिहासबोध है- पूर्वज परम्परा के प्रति आदरभाव है। प्रकृति के प्रति प्रीति है। प्रकृति रहस्यों के प्रति ज्ञान अभीप्सु दृष्टि भी है। जल माताएं हैं, नदियां माताएं हैं, पृथ्वी माता है, आकाश पिता है। ढेर सारे गण हैं, गणों से बड़े समूह जन हैं। ‘वैदिक एज’ (पृष्ठ 250) में पुसाल्कर ने बताया है “ऋग्वेद में उल्लिखित जन उत्तर पश्चिम में गांधारि, पक्थ, अलिन, भलानस और विषाणिन हैं। सिंध और पंजाब में शिव, पर्शु कैकेय, वृचीवन्त्, यदु, अनु, तुर्वस, द्रुह्यु थे। पूरब में मध्यदेश की ओर तृत्सु, भरत, पुरू अैर श्रृंजय थे।” ऐसे सभी जनों, नदियों और बड़े भूभाग में रहने वाले मनुष्यों की एक संवेदनशील संस्कृति है सो वे एक राष्ट्र हैं। ऋग्वेद में राष्ट्र सम्वर्द्धन की स्तुतियां हैं। यजुर्वेद और अथर्ववेद में राष्ट्र के समग्र वैभव की प्रार्थनाएं हैं। ऋग्वेद (1.32.12 व 1.34.8 व 8.24.27) में सप्त सिंधु सात नदियों का विशेष उल्लेख है। ‘वैदिक इंडेक्स’ के (खण्ड 2 पृष्ठ 424) में मैक्डनल और कीथ ने “इसे एक सुनिश्चित देश” माना है। ऋग्वेद में गण है, गण से मिलकर बने ‘जन’ है। यहां पांच जनों की ‘पांचजन्य’ विशेष चर्चा है- “अश्विनी कुमारो ने पांचजन्य कल्याण में प्रवृत्त अत्रि को सहयोगियों सहित मुक्त करवाया।” पांच जनों के देश में 7 मुख्य नदियां हैं। ऋग्वेद में सप्तसिंधु और पंचजन बार-बार आते हैं। सिन्धु मुख्य नदी है पर सरस्वती की प्रार्थनाएं ज्यादा हैं। सरस्वती भी पांचजनों को समृद्धि देती हैं (6.61.12) यहां के निवासी पांच जन आदि धरती को मां और आकाश को पिता कहते हैं। जल धाराएं उनके लिए ‘आपः मातरम्’ हैं। एक विशेष प्रकार की संस्कृति है, सामूहिक चित्त है और सत्य अभीप्सु जीवनशैली है। धरती माता है। आकाश पिता हैं। भरी-पूरी भू सांस्कृतिक निष्ठा है। यह राष्ट्र ऋग्वेद से भी पुराना है।  ऋग्वेद में इन्द्र और वरुण आराध्य देव हैं। ऋषि दोनों से राष्ट्र आराधना करते हैं “आपका द्युलोक जैसा राष्ट्र सबको आनंदित करता है।” (7.84) ऋग्वेद के वरुण श्रेष्ठ शासक हैं, वे ‘राष्ट्राणां’ शासनकत्र्ता है।” (7.34.11) ऋग्वेद के इक्ष्वाकु ऐतिहासिक हैं लेकिन इन्द्र, अग्नि, वरुण देवता हैं। सभी देवों से प्रार्थना है कि “वे राष्ट्र को मजबूती दें- इन्द्रः च अग्निः च ते राष्ट्रं धु्रवं धारयातम्।” (10.173.3) ऋग्वेद में वरुण का शासक रूप है। ऋग्वेद में अनेक स्थलों पर आया ‘राष्ट्र’ एक सुनिश्चित भू-प्रदेश, एक विराट जन और एक प्रवाहमान जीवंत संस्कृति की सूचना है। यहां एक सुदीर्घ प्राचीन परम्परा के साक्ष्य हैं। इस राष्ट्र को सनातन कहना ही ठीक होगा। राष्ट्र भू-सांस्कृतिक प्रतीति और अनुभूति है। इस अनुभूति का एक प्राचीन प्रवाह है। ऋग्वेद से लेकर अथर्ववेद तक राष्ट्रभाव की अनुभति लगातार गाढ़ी हुई है। अथर्ववेद का पृथ्वी सूक्त मातृभूमि की आराधना है। यही अनुभूति आधुनिक काल तक व्यापक और विस्तृत हुई है। बंकिमचंद्र का वंदेमातरम् इसी प्रवाह का विस्तार है।  भारतीय जागरण और यूरोपीय पुनर्जागरण (रिनेशाँ) में अंतर करना चाहिए। भारत में ऋग्वेद और उसका दर्शन प्रथम जागरण काल है। लेकिन ऋग्वेद के पहले कोई अंधकार काल नहीं। उपनिषदों का दर्शन ऋग्वैदिक काल का ही प्रवाह है। इसी तरह भारत के सभी परवर्ती दर्शन इसी धारा का विकास हैं। यूरोपीय पुनर्जागरण बहुत बाद का है। इसके सैकड़ों वर्ष पहले भारत में ज्ञान विज्ञान उच्चतर तर्क-वितर्क और दर्शन की शुरुआत हो चुकी थी। कृषि सम्मुनत थी। कृषि, पशुपालन और बढ़ईगीरी, लोहारी आदि हुनर विकसित हो चुके थे। इनके खास जानकार- विषय विशेषज्ञ भी विकसित हो रहे थे। सभा समितियां भी ऋग्वैदिक काल में ही अपना काम कर रही थीं। ऐसा जागरण यूरोप में 15वीं सदी तक भी नहीं हो पाया। यूरोपीय समाज में अंधकार था। भारत में तब तक तीसरे पुनर्जागरण ‘भक्ति प्रवाह’ का दौर था। मार्क्सवादी विचारकों ने इसे ‘भक्ति आन्दोलन’ कहा है। उनके अनुसार यह वर्ण व्यवस्था आदि की प्रतिक्रिया थी लेकिन वास्तव में यह उच्चस्तरीय वेदान्त का लोकप्रवाह था। भक्ति ने वेदान्त के सीमित प्रवाह को असीमित विस्तार दिया और एक ही परम सत्य का सगुण प्रवाह समूचे लोक में छा गया।  भारतीय राष्ट्रभाव दुनिया के अन्य देशों से भिन्न है। राष्ट्र का विकास यहां राजनैतिक कार्रवाई नहीं है और न ही राष्ट्र राजनैतिक इकाई है। मनुष्य-मनुष्य की प्रीति से संगठित मानव समूह/समाज बनते हैं। इसी से मानव समूह की साझी आचार संहिता विकसित होती है। इससे साझा रस, जीवन, छन्द औरसामूहिक आनंद मिलता है। सामूहिकता से जुड़े ऐसे सभी रचनात्मक कर्म ‘संस्कृति’ कहलाते हैं। कृषि आवास और सामूहिक अनुभूति से यह समूह अपनी भूमि से स्वाभाविक प्रेम करने लगता है। भूमि, जन और संस्कृति की त्रयी मिलती है। तीनों में से कोई एक बेकार हैं। निर्जन भूमि बेमतलब है। बिना भूमि वाले जन असहाय होते हैं। संस्कृति विहीन मनुष्य पशु से भी बदतर होते है। भूमि, जन और संस्कृति की त्रयी मिलकर एकात्म राष्ट्र बनाती है। भारतीय राष्ट्रभाव का स्वाभाविक विकास हुआ है। अथर्ववेद के एक मंत्र (19.41) में ‘राष्ट्र के जन्म’ का इतिहास है। कहते है “भद्रमिच्छन्त ऋषयः - ऋषियों ने सबके कल्याण की इच्छा की। उन्होंने आत्मज्ञान का विकास किया। कठोर तप किया।” यहां कठोर तप कठोर कर्म है। फिर कहते हैं “दीक्षा आदि नियमों का पालन किया। उनके आत्मज्ञान, तप और दीक्षा से “ततो राष्ट्रं बलम् ओजस् जातं - राष्ट्र बल और ओज का जन्म हुआ। दिव्य लोग इस (राष्ट्र) की उपासना करें।” ‘परिचय’ असाधारण कार्रवाई है। नाम स्थान पूछ लेना या अपना नाम स्थान बता देना काफी नहीं है। धर्म, मत, मजहब और पंथ भी परिचय के हिस्से हैं लेकिन ‘राष्ट्रीयता’ इन सबसे बड़ी है। यह अतिमहत्वपूर्ण है। भारत में इसका बोध पुनर्बोध कराने की प्राचीन परम्परा है। जन्मोत्सव, विवाह, गृहप्रवेश सहित सभी प्रीतिकर अनुष्ठानों में संकल्प लेते समय पूरा परिचय दोहराया जाता है- जम्बूद्वीपे भरतखण्डे आर्यावर्ते सहित नगर गांव दोहराकर प्राचीन राष्ट्रीय अनुभूति बताते हैं। फिर युग और मन्वन्तर वर्ष संवत्सर, माह, दिन, तिथि बताकर काल के प्रवाह का परिचय देते हैं। फिर नाम, पिता का नाम, प्राचीन गोत्र वंश दोहराकर पूर्वज/ऋषि परम्परा से जोड़ते हैं और तब सम्बन्धित कार्य का संकल्प लेते हैं। पूरे परिचय को दोहराने की यह परम्परा राष्ट्रबोध जगाती थी। भारत प्राचीन राष्ट्र था और है। (लेखक, उत्तर प्रदेश विधानसभा के अध्यक्ष हैं।)

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Dakhal News 7 March 2021

आर.के. सिन्हा कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने अपनी दादी श्रीमती इंदिरा गांधी द्वारा सन 1975 में लगाई गई इमरजेंसी को अंततः गलत बताया है। पर उन्हें तो कांग्रेस के और नेहरू-गाँधी खानदान के न जाने और भी कितने गुनाहों के लिए देश की जनता से माफी मांगनी होगी। काश,राहुल गांधी ने इमरजेंसी के साथ ही स्वर्ण मंदिर में टैंक चलाने की कार्रवाई को भी गलत करार दिया होता। तब देश की प्रधानमंत्री उनकी दादी श्रीमती इंदिरा गांधी ही थीं। उन्होंने 5 जून 1984 को बेहद खतरनाक फैसला लिया। उनके फैसले से देश के राष्ट्रभक्त सिख समाज का एक बड़ा भाग हमेशा के लिए देश की मुख्यधारा से अलग हो गया। उन्होंने देश-दुनिया के करोड़ों सिखों की भावनाओं को आहत किया। उस मनहूस दिन भारतीय सेना अमृतसर के स्वर्ण मंदिर परिसर में भेजी गई। वहां सेना के टैंक चलने लगे। उस एक्शन को ऑपरेशन ब्लूस्टार कहा गया। इस एक्शन से पूरा देश सन्न था। इंदिरा गांधी की जिद से सिख समाज को देश का शत्रु मान लिया गया था। उस एक्शन के दूरगामी नतीजे सामने आए। देशभर में हजारों सिख भाईयों, बहनों, बच्चों तक को दौड़ा-दौड़ाकर कत्लेआम किया गया। सिख इंदिरा गांधी से नाराज हो गए क्योंकि उन्होंने सैन्य कार्रवाई के आदेश दिए थे। क्या स्वर्ण मंदिर में सैन्य कार्रवाई के अलावा कोई दूसरा विकल्प नहीं था? मुझे याद है, जब मैंने आकाशवाणी से महान समाचार वाचक देवकीनंदन पांडे को सुना कि भारतीय सेना स्वर्ण मंदिर में घुस गई है, तब ही मन में तरह-तरह के बुरे विचार आने लगे थे। वे आगे चलकर सही साबित हुए। क्या राहुल गांधी कभी कहेंगे-मानेंगे कि उनकी दादी ने स्वर्ण मंदिर में सेना को भेजकर गलत किया था। भारतीय सेना के पूर्व लेफ्टिनेंट जनरल तत्कालीन वाइस चीफ एस.के.सिन्हा ने एकबार कहा था, \"काश ! मैडम गांधी ने मेरी बात को मान लिया होता तो स्वर्ण मंदिर में सेना की कार्रवाई की जरूरत नहीं पड़ती।\" उन्होंने कहा था \" श्रीमती गांधी ने सैनिक कार्रवाई से पहले उन्हें घर पर बुलाया और कहा कि भिंडरावाले का उत्पात बढ़ गया है। शांत करना ही होगा। वे गुस्से में थीं। वे अपनी योजनायें बताती गईं और मैं सुनता गया। कुछ मिनट बाद उन्होंने मेरी तरफ देखकर पूछा कि कुछ सुना आपने या नहीं? मैंने कहा कि सबकुछ सुन लिया लेकिन आप यह बताइए कि आप चाहती क्या हैं? भिंडरावाले को ज़िन्दा या मुर्दा पकड़ना या सिखों की आस्था के केन्द्र अकाल तख़्त को ध्वस्त करना? उन्होंने कहा, कि मैं जो कह रही हूँ वही करिए चौबीस घंटे के अन्दर। मैंने कहा कि चौबीस घंटे तो नहीं एक सप्ताह दें तो मैं बिना अकाल तख़्त को क्षतिग्रस्त किये यह कार्य एक सप्ताह में सम्पन्न करवा दूँगा। वह कैसे? मैंने कहा कि भिंडरावाले के गिरोह के पास खाने-पीने का पर्याप्त सामान नहीं है। शौच के लिये भी वे बाहर के शौचालयों का प्रयोग करते हैं। यदि हम चारों तरफ़ से अकाल तख़्त को घेरकर बिजली-पानी बंद कर देंगें तो वे किसी भी हालात में एक सप्ताह से ज़्यादा टिक नहीं पायेंगे और बिना किसी ज़्यादा ख़ून-खराबा के सभी समर्पण कर देंगे।\" जनरल सिन्हा की बात सुनकर उन्होंने कहा, \"आप जा सकते हैं।\" सबको पता है कि उसके बाद उन्होंने जनरल वैद्य की निगरानी में ऑपरेशन करवाया और प्रतिक्रिया में जो कुछ भी हुआ उसमें श्रीमती गांधी और जनरल वैद्य दोनों की ही जान गई। क्या राहुल गांधी अपनी दादी के गुनाह के लिए भी देश से कभी माफी मांगेंगे? अफसोस कि उस एक्शन के बाद इंदिरा गांधी की 31 अक्तूबर 1984 को हत्या हुई। उससे अगर देश स्तब्ध था तो देश ने यह भी देखा था कि कांग्रेस के गुंडे-मवाली किस तरह इंदिरा गांधी की हत्या के बाद सिखों को मार या मरवा रहे हैं। राहुल गांधी जिस कांग्रेस के नेता हैं उसी कांग्रेस के कई असरदार नेताओं की देखरेख में हजारों सिखों का कत्लेआम हुआ। दिल्ली में सज्जन कुमार, एच.के.एल भगत, धर्मदास शास्त्री, कमलनाथ सरीखे नेता सिख विरोधी दंगों को खुल्लमखुल्ला भड़का रहे थे। अब तो सज्जन कुमार दिल्ली की मंडोली जेल में उम्रकैद की सजा काट रहे हैं। राहुल गांधी बीच-बीच में भारत की विदेश नीति में मीनमेख निकालते हैं। वे बता दें कि क्या उनके पिता राजीव गांधी को देश के प्रधानमंत्री पद पर रहते हुए भारतीय सेना को श्रीलंका में भेजना चाहिए था? क्या भारत का अपने किसी पड़ोसी देश में सेना भेजना सही माना जा सकता है? श्रीलंका में शांति की बहाली के लिए भेजी गई भारतीय सेना ने अपने मिशन में 1,157 जवान खोए थे। ये सभी वीर राजीव गांधी की लचर विदेश नीति का शिकार हुए। उस मिशन के बाद भारत और श्रीलंका के तमिल भी राजीव गांधी के दुश्मन हो गए। इसी के चलते राजीव गांधी की 1991 में हत्या हुई। गुप्तचर रिपोर्ट थी कि राजीव गांधी को सलाह दी गई थी कि वे तमिलनाडु न जायें। उनपर आत्मघाती हमला हो सकता है। तमिलनाडु के तत्कालीन राज्यपाल डॉ. भीष्मनारायण सिंह जी ने स्वयं राजीव गाँधी जी को फोनकर कहा था कि वे तमिलनाडू न आएं। लेकिन, उनकी जिद उन्हें मौत के करीब ले गई। यही है राहुल जी के परिवार का चरित्र और इतिहास। राहुल जी, अभी तो बात शुरू हुई है। क्या आपको पता है कि 2-3 दिसंबर 1984 की रात को भोपाल में यूनियन कार्बाइड की फैक्ट्री में जहरीली गैस के रिसने के कारण हजारों मासूम लोग मारे गए थे। हजारों लोग हमेशा के लिए अपंग हो गए थे। उस समय केन्द्र और मध्य प्रदेश में कांग्रेस की सरकारें थीं। क्या आपको पता है कि यूनियन कार्बाइड के चेयरमेन वारेन एंडरसन 7 दिसंबर 1984 को भोपाल आए थे। उन्हें गिरफ्तार करने की जगह उन्हें देश से बाहर भेज दिया गया। यह काम मध्य प्रदेश के तब के मुख्यमंत्री अर्जुन सिंह और केन्द्रीय गृहमंत्री पी.वी. नरसिंह राव की मिलीभगत से राजीव गाँधी के स्पष्ट निर्देश पर ही हुआ होगा। इतनी त्रासद घटना के बाद भी पीड़ितों को दशकों गुजर जाने के बाद भी तारीखों पर तारीखें मिलती रही थीं कोर्ट से। तो यह है आपकी कांग्रेस के कुछ पाप। हैं तो सैकड़ों पर नेहरू के कारनामों पर तो पूरी पुस्तक ही लिखी जा सकती है। (लेखक वरिष्ठ संपादक, स्तंभकार और पूर्व सांसद हैं।)

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Dakhal News 7 March 2021

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