विशेष

भोपाल। मध्य प्रदेश में कोरोना संक्रमण के मामले तेजी से कम हो रहे हैं। पॉजिटिविटि रेट कम होने के साथ मरीज अधिक स्वस्थ हो रहे हैं। प्रदेश में पॉजिटिविटि रेट कम होने पर कांग्रेस ने सरकार पर फर्जीवाड़ा करने का आरोप लगाया है। वहीं अब पूर्व सीएम और कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष कमलनाथ ने भी फर्जीवाड़े के आरोपों को दोहराते हुए सरकार पर जनता को धोखा देने का आरोप लगाया है।   कमलनाथ ने कहा कि इस कोरोना महामारी में भी शिवराज सरकार में प्रदेश में फर्जीवाड़े जारी? नकली रेमडेसिविर इंजेक्शन, नकली दवाइयाँ, कालाबाजारी, वैक्सीन की सप्लाई के नाम पर फर्जीवाड़ा, कोविड सेंटर निर्माण फर्जीवाड़ा, मौत के आँकड़ों में फर्जीवाड़े के बाद अब टेस्टिंग में भी फर्जीवाड़ा?पूर्व सीएम ने सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि पहले रेपीड एंटीजन टेस्ट बढ़ाकर पाजिटिव रेट कम करने का काम और अब टेस्टिंग में नकली मरीज, नकली सेम्पल, नकली मोबाइल नं.से फर्जीवाड़ा कर पाजिटिव दर कम करने का काम? यह तो प्रदेश की जनता के साथ धोखा होकर, बड़ा गुनाह है? उन्होंने कहा कि इस तरह नकली टेस्टिंग से, नकली पाजिटिव रेट से जनता भ्रमित होकर संक्रमण खत्म मानकर लापरवाह होगी और संक्रमित होगी? इस तरह के फर्जीवाड़े की पूरे प्रदेश में जाँच हो, इसके दोषियों पर कड़ी से कड़ी कार्यवाही हो।

Dakhal News

Dakhal News 15 June 2021

भोपाल। मध्यप्रदेश के गृहमंत्री नरोत्तम मिश्रा ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी और दिग्विजय सिंह पर बड़ा हमला बोला है। उन्होंने कहा है कि हिंदुओं की आस्था के केंद्रों पर राहुल गांधी, दिग्विजय सिंह ही नहीं, पूरी कांग्रेस विवाद खड़े करती रही है। दिग्विजय सिंह आज राममंदिर पर सवाल कर रहे हैं। पहले उन्होंने कश्मीर पर आपत्तिजनक बयान दिया था। कांग्रेस का मूल मकसद सिर्फ हिंदुओं की धार्मिक आस्था के साथ छेड़छाड़ करना है।   मंत्री नरोत्तम मिश्रा ने मंगलवार को मीडिया से बातचीत करते हुए कहा कि राम सत्य हैं, ये सत्य है। ये वही राहुल है जिनकी सरकार ने सुप्रीमकोर्ट में राम के अस्तित्व पर सवाल खड़ा किया था, मैं राहुल जी को बहस के लिए चुनौती देता हूं, मैं कमलनाथ को भी चुनौती देता हूं कि वो आएं और मुझसे राम के विषय में बहस करें। वहीं दिग्विजय सिंह के ट्वीट पर गृह मंत्री ने निशाना साधते हुए कहा कि हिंदुओं की आस्था के केंद्रों पर राहुल गांधी, दिग्विजय सिंह ही नहीं, पूरी कांग्रेस विवाद खड़े करती रही है। दिग्विजय सिंह आज राममंदिर पर सवाल कर रहे हैं। पहले उन्होंने कश्मीर पर आपत्तिजनक बयान दिया था। कांग्रेस का मूल मकसद सिर्फ हिंदुओं की धार्मिक आस्था के साथ छेड़छाड़ करना है।   कोरोना का ग्राफ तेजी से नीचे आ रहामंत्री नरोत्तम मिश्रा ने कहा कि मध्य प्रदेश में कोरोना संक्रमण का ग्राफ तेजी से नीचे आ रहा है। पिछले 24 घंटे में 528 मरीज स्वस्थ हुए हैं। नए केस 224 हैं, संक्रमण दर अब 0.31 प्रतिशत जबकि रिकवरी दर 98.4 प्रतिशत है। 15 जिलों में कोरोना का एक भी नया मरीज नहीं मिला है। मध्य प्रदेश सरकार देश की पहली ऐसी सरकार है, जो कोरोना से पीडि़त लोगों के पक्ष में कई महत्वपूर्ण योजनाओं का ऐलान कर उनको लागू कर रही है। वहीं कांग्रेस कोरोना महामारी में भी जनहितैषी फैसलों पर सवाल उठा रही है और हर मुद्दे पर सिर्फ राजनीति कर रही है।

Dakhal News

Dakhal News 15 June 2021

राजनीति

भोपाल।  मप्र कांग्रेस ने सरकार से कोरोना की पॉजिटिविटि घटाने के आरोपों पर जवाब मांगा है। कांग्रेस का आरोप है कि पॉजिटिविटी घटाने के लिए नकली मरीज और नकली सैंपल कांड का खुलासा देश के बड़े अखबार ने किया है जिस पर कांग्रेस लगातार पहले से सवाल उठाती रही है। प्रदेश कांग्रेस के मीडिया उपाध्यक्ष भूपेंद्र गुप्ता ने सरकार से इस खबर का स्पष्टीकरण मांगते हुए कहा है कि नकली जांचों के आधार पर लोगों को नेगेटिव मानना तीसरी लहर की पैदाइश का बड़ा सरकारी कारण बन सकता है जिसकी जिम्मेदार सरकार होगी। इस तरह से नेगेटिव लोग जब कोरोना कैरियर बन कर समाज में और भीड़ में घूमेंगे तो किसी नए कोवड वैरीअंट का म्यूटेशन भी हो सकता है जिस पर यूनीवर्शल वैक्सीनेशन की इतनी बड़ी तैयारी का नुकसान हो सकता है।   भूपेन्द्र गुप्ता ने कहा कि सरकार बताए कि जिस तरह ज्यादातर फीवर क्लीनिक खाली हैं, 70 से अधिक जांच शिविर बंद हैं तब ये हजारों जांचें कहां हो रहीं हैं। सरकार यह भी बताये कि नकली सैंपलों की जांच का उद्देश्य क्या है ? अगर इन नकली जाचों के नाम पर टेस्ट किट चुराने का काम चल रहा है या रीसाइक्लिंग का काम चल रहा है तो इस भ्रष्टाचार की जांच होनी चाहिए ।   कांग्रेस नेता ने कहा कि इस तरह का कांड समूची मानवता के लिए खतरा है क्या यही पिकनिक केवीनेट का प्रतिफल है? हजारों संक्रमित जब अनजाने में भीड़ में घूमेंगे तो लाखों लोगों को संक्रमित करेंगे इस आपराधिक लापरवाही के लिए जिम्मेदार कौन होगा सरकार बताये?

Dakhal News

Dakhal News 15 June 2021

भोपाल। सिखों के पांचवें गुरु, श्रद्धेय गुरु अर्जन देव जी साहिब का आज (सोमवार को) शहीदी दिवस है। मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने इस अवसर पर श्रद्धेय गुरु अर्जन देव जी साहिब के चरणों में श्रद्धासुमन अर्पित किये हैं।मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने ट्वीट करते हुए दोहा लिखा है कि-\"सरताज-ए-शहादत पंचम पातशाह अर्जन देव फकीरा, ज़बर-ज़ुलम के दौर में सुच्चा उच्चा था तेरा जमीरा !!\" उन्होंने आगे लिखा है कि-धर्म और मानवता के कल्याण के लिए बलिदान होने वाले, सिखों के 5वें गुरु, श्रद्धेय गुरु #अर्जन_देव जी साहिब के शहीदी दिवस पर उनके चरणों में श्रद्धासुमन अर्पित करता हूं!मुख्यमंत्री ने दूसरे ट्वीट में लिखा है कि गुरु अर्जन देव जी ने हर कष्ट हंसते-हंसते सहते हुए यही अरदास किया कि -''तेरा कीआ मीठा लागे॥ हरि नामु पदारथ नानक मांगे॥'' धर्म और मानवता की सेवा ही उनके चरणों में सच्ची श्रद्धांजलि होगी।

Dakhal News

Dakhal News 14 June 2021

समाज

भोपाल। कोरोना महामारी की दूसरी लहर को मध्य प्रदेश सरकार ने चुनौती के रूप में लिया है। साढ़े सात करोड़ की जनसंख्‍या वाला यह राज्‍य अपनी स्वास्थ्य सेवा को मजबूत करने के लिए तत्पर है। इस दिशा में मध्‍य प्रदेश सरकार के प्रयास दिखाई दे रहे हैं।   कोरोना काल में जिस तरह देश के कई अस्पतालों में ऑक्‍सीजन की कमी हुई और मरीजों की मृत्‍यु का कारण बनी, उससे मध्य प्रदेश की शिवराज राज्य ने सबक लिया है। इस विपरीत परस्थिति में राज्‍य ने ऑक्सीजन उत्पादन में आत्मनिर्भर बनने की ओर कदम बढ़ाने में ही अपना हित देखा और इस दिशा में तेजी के साथ अपने कार्य शुरू कर दिये हैं। अब इसके सकारात्‍मक परिणाम सामने आने लगे हैं।    ऑक्‍सीजन प्‍लांट लगाने में मिल रही केंद्र सरकार की मदद  दरअसल, मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के निर्देश पर मध्य प्रदेश को ऑक्सीजन उत्पादन में आत्म-निर्भर बनाने के विशेष प्रयास किये जा रहे हैं। मप्र सरकार ने नई नीति के तहत ऑक्सीजन प्लांट लगाने पर 75 करोड़ रुपए तक की सहायता राशि देने के साथ ही सरकारी स्‍तर पर अपने अस्‍पतालों में ऑक्‍सीजन प्‍लांट लगाना शुरू किया है। जिसमें अब तक कई पीएसए ऑक्सीजन प्लांट शुरू हो चुके हैं। इसमें प्रदेश को लगातार केंद्र सरकार की मदद मिल रही है।    डीआरडीओ कर रहा है ऑनसाईट ऑक्सीजन गैस जनरेटर प्लांट विकसित  केंद्रीय पेट्रोलियम मंत्री धर्मेंद्र प्रधान कहते हैं, 'ऑक्सीजन की उपलब्धता के मामले में केंद्र एवं मध्य प्रदेश शासन लगातार मिलकर कार्य कर रहे हैं। शीघ्र ही मध्य प्रदेश ऑक्सीजन के मामले में आत्म-निर्भर होगा।'    रक्षा मंत्रालय की एजेंसी डीआरडीओ द्वारा अस्पताल में ही नई डेबेल तकनीक के आधार पर चलने वाले ऑनसाईट ऑक्सीजन गैस जनरेटर प्लांट विकसित किये गए हैं। मध्य प्रदेश के आठ जिलों बालाघाट, धार, दमोह, जबलपुर, बडवानी, शहडोल, सतना और मंदसौर में पांच करोड़ 87 लाख रुपये से अधिक की लागत के इसी पर तकनीक आधारित 570 लीटर प्रति मिनट की क्षमता वाले ऑनसाईट ऑक्सीजन गैस जनरेटर प्लांट लगाने पर काम हो रहा है।   ऑक्‍सीजन में हर जिला होगा आत्‍मनिर्भर  मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान का इस मामले में कहना है कि उन्होंने ऑक्सीजन के मामले में आत्मनिर्भर बनने का फैसला लिया है। इसमें केंद्र भी हमारी मदद कर रहा है। इस मदद के कारण ही हम जल्द ही ऑक्सीजन के मामले में आत्मनिर्भर बन जाएंगें। सभी जिलों को ऑक्सीजन के मामले में आत्म-निर्भर बनाने के लिए कमर कस ली है।    सहायता का विशिष्ट पैकेज है इन सभी के लिए  गृहमंत्री और राज्य सरकार के प्रवक्ता नरोत्तम मिश्रा बताते हैं कि 75 करोड़ रुपए तक की सहायता का विशिष्ट पैकेज प्रदान करने वाली इस योजना का लाभ नई यूनिट्स, वर्तमान में चल थी यूनिट्स, मेडिकल कॉलेजों, अस्पतालों और नर्सिंग होम भी उठा सकेंगे। इसमें न्यूनतम 10 क्यूबिक मीटर प्रति घंटा ऑक्सीजन उत्पादन करने वाली इकाइयों को 50 फीसदी की दर और अधिकतम 75 करोड़ रुपए की सहायता प्रदान की जाएगी। इकाइयों को फिलहाल जो इलेक्ट्रिसिटी टैरिफ चल रहा है, उसपर भी एक रुपए प्रति यूनिट की छूट दी जाएगी।    तीन चरणों में हो जाएगा पूरा कार्य  प्रदेश के 13 जिलों में मेडिकल कॉलेज होने से वहां पूर्व से ही ऑक्सीजन की बल्क स्टोरेज यूनिट्स उपलब्ध हैं। प्रदेश के शेष 37 जिलों के लिए राज्य सरकार द्वारा स्वयं के बजट से जिला अस्पतालों में पीएसए तकनीक से तैयार होने वाले नए ऑक्सीजन प्लांट्स लगाए जा रहे हैं।    इनमें से प्रथम चरण में 13 जिलों में, द्वितीय चरण में नौ जिलों में और तृतीय चरण में शेष 15 जिलों में ऑक्सीजन प्लांट्स लग रहे हैं। इससे प्रदेश में ऑक्सीजन के लिए बाहरी स्त्रोतों पर निर्भरता लगभग न के बराबर हो जायेगी।   नवीनतम तकनीक से ऑक्सीजन प्लांट्स लगाने वाला मध्य प्रदेश देश का पहला राज्य  कौंसिल ऑफ़ साइंटिफिक एंड इंडस्ट्रियल रिसर्च, भारत सरकार द्वारा अधिकृत संस्था के माध्यम से प्रदेश के पांच जिला चिकित्सालयों भोपाल, रीवा, इंदौर, ग्वालियर और शहडोल में नवीनतम वीपीएसए तकनीक आधारित आक्सीजन प्लांट्स एक करोड़ 60 लाख रुपये की लागत से लगाये जा रहे हैं।    इनमें 300 से 400 लीटर प्रति मिनट ऑक्सीजन बनेगी, जो लगभग 50 बेड्स के लिए पर्याप्त होगी। इस नवीनतम तकनीक से ऑक्सीजन प्लांट्स लगाने वाला मध्य प्रदेश, देश का पहला राज्य है। इसके साथ ही राज्‍य में सरकारी अस्पतालों के बेड्स को ऑक्सीजन बेड्स में परिवर्तित करने के लिए पाइप लाइन डालने का कार्य भी युद्ध स्तर पर जारी है।    अब तक लग गए ऑक्‍सीजन के 20 प्लांट  स्वास्थ्य आयुक्त आकाश त्रिपाठी कहते हैं कि राज्य सरकार द्वारा मेडिकल कॉलेज, जिला अस्पताल, सिविल अस्पताल और कम्युनिटी हॉस्टिपटल में 111 हवा से ऑक्सीजन बनाने की अनूठी टेक्नोलॉजी पर आधारित पीएसए (प्रेशर स्विंग, एडजॉर्व्सन) ऑक्सीजन प्लांट लगाने के ऑर्डर दिये गये थे। शासन द्वारा जारी आदेश के अनुक्रम में अब तक 20 प्लांट लगाये जा चुके हैं।   111 पीएसए ऑक्सीजन प्लांट 30 सितम्बर तक लग जाएंगे यहां  वे बताते हैं कि पीएसए ऑक्सीजन प्लांट को समय पर लगाने के लिये संबंधित निर्माता कम्पनियों को निर्देशित किया गया है। 15 जून तक 25 और 30 जुलाई तक 81 ऑक्सीजन प्लांट स्थापित कर दिये जाएंगे। जबकि 30 अगस्त तक 91 और 30 सितम्बर तक पूरे 111 पीएसए ऑक्सीजन प्लांट की स्थापना अस्पतालों में कर दी जायेगी।    इनसे अस्पताल के लिये ऑक्सीजन की आपूर्ति सुनिश्चित होगी। अस्पतालों में उपलब्ध ऑक्सीजन बेड और आईसीयू आदि को ध्यान में रखते हुए जरूरत की ऑक्सीजन आपूर्ति सुनिश्चित हो सके, इसी अनुक्रम में क्षमता के पीएसए प्लांट लगाये जा रहे हैं।    केन्द्र और राज्य सरकार की मद से प्राप्त राशि से हो रहा पूरा कार्य  उनका कहना है कि इसमें 100 लीटर प्रति मिनिट से लेकर 1500 लीटर प्रति मिनिट की क्षमता वाले पीएसए प्लांट शामिल हैं। पीएसए प्लांट्स की स्थापना 10 बिस्तर के आईसीयू अस्पतालों से लेकर 150 बिस्तर (आईसीयू) वाले अस्पतालों में ऑक्सीजन की आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिये की जा रही है। उन्होंने बताया कि पीएसए ऑक्सीजन प्लांट्स की स्थापना केन्द्र सरकार और राज्य सरकार की मद से प्राप्त राशि से की गई है।

Dakhal News

Dakhal News 14 June 2021

इंदौर। मध्यप्रदेश की आर्थिक राजधानी इंदौर में कोरोना संक्रमण के मामलों में राहत मिली है। यहां कोरोना के नये मरीजों की संख्या में तेजी से कमी आ रही है। इंदौर में लगातार दूसरे दिन नये प्रकरण 100 से नीचे आए हैं। यहां बीते 24 घंटों में कोरोना के 82 नये मामले सामने आए हैं, जबकि दो मरीजों की मौत हुई है। इसके बाद यहां संक्रमित मरीजों की कुल संख्या बढ़कर 1,52, 519 और मृतकों की संख्या 1370 हो गई है। एक दिन पहले यहां कोरोना के 96 नये मामले सामने आए थे।इंदौर के मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. बी.एस सैत्या ने रविवार को बताया कि एमजीएम मेडिकल कॉलेज द्वारा शनिवार देर रात 10,017 सेम्पलों की जांच रिपोर्ट जारी की गई। इनमें 82 व्यक्ति पॉजिटिव पाए गए, जबकि शेष लोगों की रिपोर्ट निगेटिव आई। इन नये मामलों के साथ जिले में अब संक्रमित मरीजों की कुल संख्या 1 लाख, 52 हजार 519 हो गई है। वहीं, इंदौर में बीते 24 घंटों में कोरोना से दो मरीजों की मौत की पुष्टि हुई है। अब यहां मृतकों की संख्या 1370 हो गई है। हालांकि, यहां बीते 24 घंटे में 127 मरीज स्वस्थ हुए हैं। यहां अब तक 1 लाख 50 हजार 454 मरीज कोरोना को मात देकर अपने घर पहुंच गए हैं। फिलहाल इंदौर में कोरोना के सक्रिय प्रकरण 695  है।

Dakhal News

Dakhal News 13 June 2021

पेज 3

बॉलीवुड की ब्लॉकबस्टर फिल्म 'गदर एक प्रेम कथा' ने आज अपनी रिलीज के 20 साल पूरे कर लिए है। इस फिल्म में सनी देओल और अमीषा पटेल मुख्य भूमिका में थे। 15 जून, 2001 को रिलीज हुई रोमांटिक एक्शन और ड्रामा से भरपूर इस फिल्म की रिलीज के 20 साल पूरे होने पर अभिनेता सनी देओल ने फैंस का आभार जताया है। सनी देओल ने फिल्म की यादों को ताजा करते हुए फिल्म के गाने 'मुसाफिर जाने वाले' का वीडियो शेयर किया है। इसके साथ ही सनी देओल ने लिखा-' हमने एक फिल्म बनाई, आपने इसे एक इवेंट बनाया! #20इयर्सऑफगदर  मैं उन सभी का आभार व्यक्त करता हूं जिन्होंने हमारी फिल्म को ऐतिहासिक बनाया।' इसके साथ ही सनी देओल ने अमीषा पटेल, अनिल शर्मा और इस प्रोजेक्ट से जुड़े सभी लोगों को टैग भी किया हैं।   वहीं अभिनेत्री अमीषा पटेल ने भी फिल्म से जुड़े कुछ वीडियोज को फैंस के साथ साझा करते हुए इससे जुड़ी यादों को ताजा किया हैं।   'गदर एक प्रेम कथा' में सनी देओल ने तारा सिंह और अमीषा पटेल ने सकीना का किरदार निभाया था। फिल्म में इन दोनों कलाकारों के अलावा अमरीश पुरी, उत्कर्ष शर्मा, मिथलेश चतुर्वेदी आदि ने भी अहम भूमिका निभायी थी। अनिल शर्मा के निर्देशन में बनी इस आइकॉनिक फिल्म के गाने से लेकर फिल्म के डायलॉग तक काफी मशहूर हुए। यह फिल्म बॉक्स ऑफिस पर ब्लॉकबस्टर साबित हुई और फिल्म ने कई सारे रिकॉर्ड भी तोड़े। आज भी इस फिल्म की यादें फैंस के जहन में ताजा हैं।

Dakhal News

Dakhal News 15 June 2021

अक्षय कुमार और वाणी कपूर की अपकमिंग फिल्म अब बड़े पर्दे पर दस्तक देने के लिए तैयार है। लम्बे समय से चर्चा में बनी हुई इस फिल्म की रिलीज डेट की घोषणा मेकर्स ने मंगलवार को कर दी है। इसकी जानकारी खुद अभिनेता ने सोशल मीडिया पर ट्वीट कर दी। अक्षय कुमार ने फिल्म की रिलीज डेट की घोषणा करते हुए लिखा-'मुझे पता है कि आपने बेल बॉटम की रिलीज के लिए धैर्यपूर्वक इंतजार किया है। ऐसे में हमारी फिल्म की रिलीज की घोषणा करने से ज्यादा खुशी नहीं हो सकती। बेल बॉटम 27 जुलाई, 2021 के दिन दुनिया भर में बड़े पर्दे पर आ रही है।'   फिल्म की रिलीज डेट की घोषणा होने से फैंस काफी खुश और उत्साहित हैं। इस स्पाई थ्रिलर फिल्म में अक्षय कुमार एक सीक्रेट एजेंट की भूमिका में होंगे। वहीं फिल्म में वाणी कपूर अक्षय कुमार की पत्नी के किरदार में होंगी। फिल्म में लारा दत्ता भी होंगी जो पूर्व दिवंगत प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी का किरदार निभाएंगी। फिल्म में हुमा कुरैशी भी अहम भूमिका में हैं।  'बेल बॉटम' के निर्देशक  रंजीत एम तिवारी  हैं, जबकि फिल्म को वाशु भगनानी, जैकी भगनानी, दीपशिखा देशमुख ,मोनिशा आडवाणी, मधु भोजवानी और निखिल आडवाणी संयुक्त रूप से प्रोड्यूस किया है।   यह फिल्म पहले इसी साल 2 अप्रैल को रिलीज होने वाली थी, लेकिन देश में बढ़ते कोरोना महामारी को देखते हुए मेकर्स ने फिल्म की रिलीज डेट को पोस्टपोन कर दिया था, जिसके बाद फिल्म के ओटीटी प्लेटफार्म पर रिलीज होने के कयास लगाए जा रहे थे। लेकिन अब फिल्म की रिलीज डेट की घोषणा के साथ तमाम तरह की अटकलों और अफवाहों पर पूर्ण विराम लग गया है। 'बेल बॉटम' इसी साल 27 जुलाई को सिनेमाघरों में दस्तक देगी।

Dakhal News

Dakhal News 15 June 2021

दखल क्यों

प्रभुनाथ शुक्ल   राजस्थान में पानी की किल्लत का फिलहाल दीर्घकालीन समाधान नहीं निकल रहा है। पिछले दिनों जालोर जिले में प्यास लगने और पानी न मिलने की वजह से मासूम बच्ची ने तड़प-तड़प कर दम तोड़ दिया। मीडिया रिपोर्ट में जो बताया गया है उसके अनुसार बुर्जुग महिला सुखी देवी अपनी पोती के साथ पैदल रेतीले रास्ते से खुद के मायके जा रही थी। रास्ते में जब पोती और दादी को प्यास लगी तो 12 किमी की पैदल यात्रा में उन्हें कहीं पानी नहीं दिखा। जिसकी वजह से पोती की प्यास से तड़प कर मौत हो गयी। दादी की जान किसी तरह मौसम नम होने और चरवाहे की सूचना पर बच गयी। राजस्थान की तस्वीर सामने आते ही दिमाग में पानी को लेकर एक अजीब कल्पना उभरती है जो बेहद भयावह और डरावनी होती है। उस भयावहता को इस घटना ने सच साबित कर दिया है।   जालोर की यह घटना बेहद चिंतनीय और संवेदनशील है। यह राजनीति का विषय नहीं है, हमारे लिए चुनौती है। हमने कैसा भारत बना रखा है कि 12 किमी रेतीले यात्रा में हम दादी और पोती को चुल्लू भर पानी नहीं उपलब्ध करा पाए। हम किस विकास और किस सोच की बात करते हैं। राजनीति के लिए यह बहस का मसला हो सकता है, लेकिन हमारे लिए यह संवेदना और शर्म की बात है। हम देश की जनता को चुल्लू भर पानी उपलब्ध नहीं करा सकते। जिस चुल्लू भर पानी के लिए तड़प कर बच्ची की मौत हो गयी, उसी चुल्लू भर पानी में व्यवस्था को डूब मरना चाहिए।   राजस्थान के शहरी और ग्रामीण इलाकों में आज भी पानी की समस्या का हल नहीं हो सका है। भीषण गर्मी में पानी की किल्लत को लेकर लोग जूझते हैं। हालांकि यह प्राकृतिक भू-भाग की बनावट से भी जुड़ा है। लेकिन अगर हमारे पास इच्छाशक्ति होती तो हमें ऐसी शर्मनाक घटनाओं का सामना नहीं करना पड़ता। हम यह नहीं कहते हैं कि सरकारों ने अब तक पानी के लिए कुछ काम नहीं किया। हो सकता है बहुत कुछ हुआ हो, लेकिन हमें लगता है कि अभी हमें शून्य से आगे बढ़ना होगा। तभी पानी की समस्या का समाधान निकल सकता है। हम ग्लोबल लीडरशिप की बात करते हैं और देश में मासूम चुल्लू भर पानी के लिए तड़प कर दम तोड़ते हैं। केंद्र और राज्य सरकारों को इस समस्या को गंभीरता से लेना चाहिए। विकास की आड़ में लंबे-चौड़े बजट और नीतियां बनती हैं। चुनावों में सब्जबाग दिखाए जाते हैं, लेकिन सरकारें अपना पांच साल का कार्यकाल पूरा कर लेती हैं और वादों की जमीन राजस्थान की तरह रेतीली और सूखी रहती है। जिसकी वजह से सूखी देवी जैसे लोगों को मरना पड़ता है।   राजस्थान में जल जीवन मिशन के तहत 30 लाख नल लगाए जाएंगे। इसके लिए केंद्र और राज्य सरकार ने 2022 का लक्ष्य रखा है। 2024 तक हर घर तक स्वच्छ पानी पहुंचाने का लक्ष्य है। मीडिया रिपोर्ट में बताया गया है कि राजस्थान में 1.01 करोड़ ग्रामीण घर हैं जिसमें तकरीबन 20 फीसदी घरों में नल का पानी उपलब्ध है। योजना के तहत ग्रामीण इलाकों में साढ़े छह लाख और नल उपलब्ध कराए जाएंगे। केंद्र की मोदी सरकार ने राज्य को 2020-21 के लिए 2,522 करोड़ की राशि उपलब्ध करायी थी। जबकि चालू वित्तीय वर्ष 2021-22 में 5,500 करोड़ रुपये मिलने की संभावना है।   इस मिशन को अंजाम तक पहुंचाने के लिए सरकार ने 38,823 ग्राम जल स्वच्छता समितियों का गठन किया है। हजारों की संख्या में इस योजना को सफल बनाने के लिए लोगों को तकनीकी प्रशिक्षण भी दिया गया है। इस मिशन को कामयाब बनाने के लिए सरकार ने 50,011 बजट का आवंटन किया है। कहा गया है कि 15 वें वित्त आयोग से 26,940 करोड़ की निधि भी उपलब्ध कराई गयी है। केंद्र सरकार इस योजना के तहत पूरे देश में एक लाख करोड़ रुपये निवेश कर लोगों को साफ और स्वच्छ पेयजल उपलब्ध कराएगी। अब जल जीवन मिशन कितना कायाब होगा यह वक्त बताएगा अभी इसके लिए कम से दो सालों तक इंतजार करना पड़ेगा।   राजस्थान में पानी की समस्या एक अंतहीन सिलसिला है जिसका कोई फिलहाल समाधान निकलता नहीं दिख रहा है। लेकिन हाल के सालों में केंद्रीय जलशक्ति और पेट्रोलियम मंत्रालय के साथ मिलकर काम करने की घोषणा की थी जिसमें कहा गया था कि राजस्थान में 100 सालों तक पानी की समस्या नहीं होगी। लेकिन अभी उस योजना में लंबा वक्त लगेगा। इस योजना का सबसे अधिक लाभ पश्चिमी राजस्थान के इलाकों होगा। जिसमें बाड़मेर और जैसलमेर के साथ दूसरे जिले शामिल हैं। राजस्थान का उच्च न्यायालय भी लोगों को स्वच्छ पेयजल उपलब्ध कराने को लेकर कड़ी फटकार भी लगा चुका है।   उच्च न्यायालय में कुछ साल पूर्व लोकसंपत्ति संरक्षण समिति ने परिवाद दाखिल कर आरोप भी लगाया था कि जयपुर में कुल 31 बांध हैं जिसमें 28 सूखे पड़े हैं। इसकी मूल वजह बांधों के बहाव वाले इलाकों में अतिक्रमण की बात कहीं गयी थी। राजस्थान में फ्लोराइड, नमक, और लोहायुक्त पानी पीने के लिए लोग बाध्य हैं। एक रिपोर्ट के मुताबित बाड़मेर, नागौर, भरतपुर, जालोर, सिरोही, जोधपुर, जयपुर, बीकानेर और चुरु जिलों में लोग दूषित पेयजल पीते हैं जिसकी वजह से बीमार पड़ते हैं। इस पर केंद्र की मोदी सरकार भी राज्य के गहलोत सरकार को स्वच्छ पेयजल उपलब्ध कराने की बात कहीं थी। अब उस पर कितना काम हुआ है यह दोनों सरकारों की जिम्मेदारी बनती है। दो साल पूर्व आयी एक रिपार्ट के अनुसार राज्य का हर पांचवां व्यक्ति रसायनयुक्त पानी पीता है। अधिकांश आबादी परंपरागत साधानों का उपयोग कर अपनी प्यास बुझाती है। ग्रामीण इलाकों में दूषित पानी पीने से लोग अपंगता का शिकार होते हैं। उस आंकड़े के अनुसार बाड़मेर में तकरीबन 15 लाख और नागौर में 12 लाख दूषित पानी पीते हैं। रिपोर्ट में राजस्थान को सबसे अधिक प्रदूषित जल पीने का वाला राज्य बताया गया था। उसके मुताबित 19,575 बस्तियों में लोग प्रदूषित जल का सेवन करते थे। फिलहाल उस बच्ची की मौत के बाद ही हमें सबक लेना चाहिए। राज्य में पानी की समस्या एक गंभीर विषय है। इस पर केंद्र और राज्य सरकारों को एक साथ मिलकर काम करना चाहिए।     (लेखक स्वतंत्र टिप्पणीकार हैं।)

Dakhal News

Dakhal News 15 June 2021

गिरीश्वर मिश्र   दो दिन हुए टीवी पर सूचना मिली कि काशी में गंगा का जल हरा हो गया है। प्रदूषण खतरनाक स्तर पर है और उस जल का स्पर्श, स्नान, और पीना स्वास्थ्य के लिए हानिकर होने से वर्जित कर दिया गया। युगों-युगों से काशी और वहां गंगा पर उपस्थिति दोनों मिलकर भारत के गौरव की श्री वृद्धि करते आये हैं। पुण्यतोया गंगा के महत्त्व को पहचान कर 'नमामि गंगे' परियोजना भी कई हजार करोड़ की लागत से शुरू हुई। इन सबके बावजूद वाराणसी शहर के पास हर तरह के प्रदूषण की वृद्धि ने गंगा को बड़ी क्षति पहुंचाई है। गंगा के प्रवाह को प्रदूषण मुक्त कर स्वच्छ बनाना राष्ट्रीय कर्तव्य है। गंगा-प्रदूषण की मात्रा में निरंतर बढ़ोत्तरी हो रही है और इसके लिए तत्काल प्रभावी कदम उठाना चाहिए।   गंगा भारतीय संस्कृति की जीवित स्मृति है जो युगों-युगों से भौतिक जीवन को संभालने के साथ आध्यात्मिक जीवन को भी रससिक्त करती आ रही है। हिमालय से चलकर तमाम नदियों का जल समेटते हुए बंगाल की खाड़ी से होते हुए समुद्र तक पहुँचने की भौगोलिक यात्रा एक तथ्य है परन्तु लोक मानस में गंगा नदी से ज्यादा एक मान, पापनाशिनी और मोक्षदायिनी जाने कितने रूपों में बसी हुई है। गंगा-स्नान की लालसा सबको गंगा की और लौटने के लिए आमंत्रित और उन्मथित करती रहती है। गंगा नाम लेना और उनका दर्शन मन को पवित्र करता है। गंगा जल लोग आदर से घर ले जाते हैं और प्रेमपूर्वक सहेज कर रखते हैं।   गंगा भारत की सनातन संस्कृति का अविरल प्रवाह है और साक्षी है उसकी जीवन्तता का। कहते हैं भागीरथ ने बड़े श्रम से गंगा को धरती पर अवतरित किया था इसीलिए वह 'भागीरथी' भी कहलाती हैं। कथा के अनुसार राजा सगर के वंशज भगीरथ ने बड़ा तप किया तब कहीं भगवान विष्णु के चरणों से बिंदु-बिदु निकलीं जिसे ब्रह्मा ने झट से अपने कमंडलु में रख लिया। ब्रह्मा को भी भगीरथ ने तप से प्रसन्न किया और तब गंगा का प्रवाह निकला जिसे भगवान शिव ने अपनी जटा में धारण कर लिया। भागीरथ ने फिर तप किया और तब जाकर गंगा का पृथ्वी पर अवतरण हुआ।   गंगा प्रतीक है शुभ्रता का, पवित्रता का, ऊष्मा का, स्वास्थ्य और कल्याण का। भौगोलिक रूप से मध्य हिमालय के अन्दर ऊंचाई पर स्थित कई ग्लेशियरों से जल उपलब्ध होता है। फिर वह गोमुख में एकत्र होता है और वहां से आगे की यात्रा पर निकलता है। आगे चलकर वनों से होते हुए कई प्रवाह समेट कर भागीरथी प्रकट होती है। इसी में केदारनाथ में मंदाकिनी मिलती है जो फिर अलकनंदा से देवप्रयाग में मिलती है। ऋषीकेश से होकर भागीरथी हरद्वार पहुंचती है और फिर गंगा का रूप लेती है। आगे राम गंगा, यमुना से मिलती है। प्रयाग में संगम है जहां गंगा तट पर प्रतिवर्ष विश्व का अद्भुत मेला लगता है। बारह वर्ष पर कुम्भ होता है। फिर गंगा प्रसिद्ध शिव नगरी काशी पहुंचती है जिसे वाराणसी भी कहते हैं। यह अत्यंत प्राचीन नगर अर्धचन्द्र की तरह गंगा से घिरा है। मानों शिव अपने कपाल पर अर्धचन्द्र धारण किये हों। यहाँ से आगे चलकर गंगा घाघरा, सोन, गंडक, वागमती, कोशी तीस्ता आदि नदियों से मिलती है। इसकी दो धाराएं भी बनती हैं- हुबली और पद्मा। हुबली कोलकाता होकर गंगा सागर में बंगाल की खाड़ी में मिलकर समुद्र तक यात्रा पूरी होती है।   गंगा ने राजनैतिक इतिहास के उतार-चढ़ाव भी देखे हैं। इसके तट पर तपस्वी, साधु-संत बसते रहे हैं और आध्यात्म की साधना भी होती आ रही है। गंगा के निकट साल भर उत्सव की झड़ी लगी रहती है। मान गंगा दुःख और पीड़ा में सांत्वना देने का काम करती है। जीवन और मरण दोनों से जुड़ी है। पतित पावनी गंगा मृत्यु लोक में जीवन दायिनी मां है। गंगा का नाम लेकर उनका आवाहन कर जिस जल का स्पर्श करते हैं वह भी गंगा भाव से भर उठता है। पर गंगा की कृपा से निकटवर्ती क्षेत्र में खेती भी उपजाऊ है। कभी गंगा में जल मार्ग से व्यापार भी होता था जिसकी ओर फिर ध्यान दिया जा रहा है। इन सबके बावजूद नगरों का सारा कचरा और उद्योगों के दूषित सामग्री के अनियंत्रित मेल से गंगा अनेक स्थानों पर विषाक्त सी हो रही है। यह खतरे का संकेत है।   आज मनुष्य भूल गया है कि वह धरती का सहजीवी है स्वामी नहीं है। उसने धरती, हवा, पानी सब पर अधिकार जमा लिया है। जीवन के विकास की कथा की मानें तो मनुष्य ने धरती, पशु, वनस्पति, खनिज पदार्थ आदि प्रकृति के विभिन्न अवयवों पर कब्जा कर अपने उपनिवेश का विस्तार किया और प्रकृति की जीवन-संहिता का उल्लंघन करना शुरू किया। मनुष्य ने प्रकृति के साथ द्रोह की जो ठानी उसके दुष्परिणाम आ रहे हैं और वे हमें चेताते हैं कि संभल जाओ पर अहंकार और आलस्य में हम उन संकेतों की उपेक्षा करते रहते हैं। मनुष्य केन्द्रित दृष्टि में शेष जगत उपभोग की वस्तु हो जाता है और फिर हम उसका अंधाधुंध शोषण करते हैं जो जीवन की कीमत पर होता है। हमारी भोगवादी विकास दृष्टि ने भागीरथी और गंगा का दोहन, शोषण और प्रदूषण करने में कोई कसर नहीं छोड़ी। गंगा की जीवनी शक्ति पर लगातार प्रहार हो रहे हैं।   गंगा जीवन का प्रतीक है और भारत की सांस्कृतिक पहचान बनाने में उसकी प्रमुख भूमिका है। काशी ही नहीं अनेक तीर्थ गंगा से ही अपनी तेजस्विता ग्रहण करते हैं। कभी रीति काल के प्रमुख कवि पद्माकर ने कहा था: छेम की लहर, गंगा रावरी लहर ; कलिकाल को कहर, जम जाल को जहर है। अब स्थिति ऎसी पल्टा खा रही है कि गंगा का स्वयं का क्षेम की खतरे में है। काशी प्रधानमंत्री जी का क्षेत्र है और काशी में गंगा को प्रदूषण मुक्त करने का तत्काल यत्न जरूरी है। गंगाविहीन देश भारत देश कहलाने का अधिकार खो बैठेगा।   (लेखक, महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विवि, वर्धा के पूर्व कुलपति हैं।)

Dakhal News

Dakhal News 15 June 2021

Video

Page Views

  • Last day : 8492
  • Last 7 days : 59228
  • Last 30 days : 77178
x
This website is using cookies. More info. Accept
All Rights Reserved © 2021 Dakhal News.