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केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) आरजी कर मेडिकल कॉलेज और अस्पताल के चार कर्मचारियों का पॉलिग्राफ टेस्ट कराएगा. इनमें तीन जूनियर डॉक्टर भी शामिल हैं. दरअसल सीबीआई पता लगाना चाहती है कि क्या ये लोग जूनियर डॉक्टर के बलात्कार और हत्या में शामिल थे. इस क्रूर अपराध का आरोपी संजय रॉय का भी पॉलिग्राफ टेस्ट कराया जाएगा. महिला डॉक्टर 9 अगस्त को मृत पाई गई थी. रिपोर्ट और सीसीटीवी फुटेज के अनुसार, संजय रॉय सुबह 4 बजे सेमिनार हॉल में दाखिल हुआ, जहां पीड़िता अपनी 36 घंटे की शिफ्ट करने के बाद सो रही थी. इसके बाद वो 4 बजकर 40 मिनट पर बाहर निकला. कोलकाता पुलिस ने उसे सीसीटीवी फुटेज के आधार पर गिरफ्तार किया.
सीबीआई क्यों कराएगी जूनियर डॉक्टरों का पॉलीग्राफ टेस्ट
इंडिया टुडे की रिपोर्ट के मुताबिक, सीबीआई फर्स्ट ईयर ग्रेजुएशन के ट्रेनी डॉक्टरों का पॉलीग्राफ टेस्ट कराएगी क्योंकि उनके फिंगरप्रिंट सेमिनार रूम के अंदर पाए गए थे. महिला के सेमिनार रूम में आराम करने से पहले, दोनों पीजी डॉक्टरों ने उसके साथ खाना खाया. एक इंटर्न का भी टेस्ट किया जाएगा क्योंकि वह सेमिनार रूम में गया था और उससे बातचीत की थी. बाद में वह कमरे से बाहर चला गया और महिला वापस सो गई.
एक हाउस स्टाफ सदस्य को भी यह परीक्षण करवाना होगा, क्योंकि उस कर्मचारी को फर्स्ट फ्लो के इमरजेंसी वार्ड से तीसरी मंजिल पर जाते देखा गया था. ये कर्मचारी रात 2.45 बजे तीसरी मंजिल पर गया और 3.45 बजे वापस लौटा. चारों लोगों में से किसी ने भी सेमिनार कक्ष से कोई शोर नहीं सुना.
डॉ. संदीप घोष को भी होगा पॉलीग्राफ टेस्ट
अधिकारियों ने आरजी कर मेडिकल कॉलेज के प्रिंसिपल डॉ. संदीप घोष पॉलीग्राफ टेस्ट कराने की भी अनुमति प्राप्त कर ली है, जिन्होंने घटना के दो दिन बाद इस्तीफा दे दिया था. सुप्रीम कोर्ट ने हत्या की एफआईआर दर्ज करने में 14 घंटे की देरी करने के लिए संदीप घोष और पश्चिम बंगाल पुलिस की खिंचाई की है. कोर्ट ने यह भी कहा कि घोष ने हत्या को आत्महत्या बताने की कोशिश की.
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