विशेष

भोपाल। मुख्यमंत्री कमलनाथ ने गुरुवार को मंत्रालय में नाबार्ड द्वारा आयोजित राज्य ऋण संगोष्ठी 2020-21 में स्टेट फोकस पेपर का विमोचन किया। इस अवसर पर सीएम कमलनाथ ने कहा कि राज्य सरकार ने मध्यप्रदेश को देश की हार्टिकल्चर कैपीटल बनाने का संकल्प लिया है। उद्यानिकी क्षेत्र किसानों की समृद्धि के द्वार खोलने वाला क्षेत्र है। यह कृषि क्षेत्र का भविष्य है। नाबार्ड को हार्टिकल्चर क्षेत्र में ऋण देने का अनुमान 6 प्रतिशत से बढ़ाकर कम से कम 15 प्रतिशत तक रखना चाहिए। मध्यप्रदेश में बड़ी मात्रा में अनुपयोगी पड़ी राजस्व भूमि का उपयोग उद्यानिकी क्षेत्र के विस्तार में किया जा सकता है। मुख्यमंत्री ने कहा कि अब कृषि क्षेत्र में भी नई दृष्टि और नई सोच के साथ काम करने की आवश्यकता है। पूरा दृश्य बदल रहा है। पहले छोटे दानों जैसे कोदो-कुटकी, ज्वार-बाजरा पर ज्यादा ध्यान नहीं था। आज इन फसलों की प्राथमिकता है। पहले यह गरीबों की खाद्य सामग्री मानी जाती थी अब इनके पोषक तत्वों के कारण बढती मांग के चलते सर्वाधिक उपयोगी साबित हो रही है। उन्होंने कहा कि नाबार्ड के पास वर्षों का संचित अनुभव और बौद्धिक क्षमता है। इसका उपयोग भविष्य में निर्मित होने वाले परिदृश्य में उपयोगी होगा।   मुख्यमंत्री ने कहा कि सबसे बड़ी चुनौती युवाओं की बेरोजगारी है क्योंकि वे शहरों और गांवों के बीच भटक रहे हैं। युवाओं को नई तकनीक और तकनीकी कौशल से जोडऩा होगा। प्रदेश की कृषि को आधुनिक बनाना होगा। नाबार्ड को अब फसलों के निर्यात पर भी ध्यान देना होगा। कृषि क्षेत्र के भीतर उभरते बाजार पर भी पैनी नजर रखना होगी। नाबार्ड अपने विशेषता को सामान्य रूप से किए जाने वाले कार्यों में उपयोग न करे, खेती की नई तकनीकों पर ध्यान दें। वेयर हाऊस निर्माण और उपार्जन की अधोसंचानाओं के निर्माण पर भी ध्यान दे।    इस अवसर पर नाबार्ड के मुख्य महाप्रबंधक एसके बंसल ने बताया कि नाबार्ड ने वर्ष 2020-21 के लिए एक लाख 98 हजार 786 करोड़ रुपए की ऋण की संभावना का आकलन किया है। यह पिछले वर्ष की तुलना में लगभग 13 प्रतिशत ज्यादा है। पिछले साल यह एक लाख 74 हजार 970 करोड़ थी। इस ऋण अनुमान में फसलीय ऋण पर 1,03,005 करोड़ रुपये और टर्म लोन पर 44 हजार 982 करोड़ रुपये ऋण अनुमान है। सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमियों के लिए लगभग 32 हजार एक करोड़ और प्राथमिकता क्षेत्र जैसे निर्यात ऋण, शिक्षा, आवास, नवकरणीय ऊर्जा और अन्य सामाजिक बुनियादी ढांचे पर 18 हजार 797 करोड़ रुपये ऋण देने का अनुमान है। बंसल ने विभिन्न शेत्रों में विकास की संभावना पर प्रकाश डालते हुए बैंकों का अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभाने का आह्वान किया।    मुख्यमंत्री ने इस अवसर पर उत्कृष्ठ प्रदर्शन करने वाले किसान उत्पादक संगठनों को सम्मानित किया। इस अवसर पर राज्य शासन और नाबार्ड के वरिष्ठ अधिकारी एवं लीड बैंकों के प्रतिनिधि उपस्थित थे।

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Dakhal News 27 February 2020

इंदौर। मुख्यमंत्री कमलनाथ का बुधवार को इंदौर संभाग के धार जिले के विकासखण्ड मुख्यालय डही का एक दिवसीय भ्रमण डही क्षेत्र को अनेक सौगातें दे गया। मुख्यमंत्री कमलनाथ ने यहां 1 लाख 21 हजार 804.53 रुपए लागत के 40 विकास कार्यों का भूमिपूजन और शिलान्यास किया।  मुख्यमंत्री ने डही उद्धवहन सिंचाई योजना का भूमिपूजन भी किया। उन्होंने कहा कि डही में बनने वाली यह उद्धवहन सिंचाई योजना आदिवासी नायक टंट्या भील के नाम से जानी जायेगी।   इस अवसर पर आयोजित समारोह को सम्बोधित करते हुए मुख्यमंत्री कमलनाथ ने कहा कि आज इतनी बड़ी संख्या में आदिवासी जन यहां आए हैं यह बल देखकर बहुत खुशी हो रही है। अब हम सब मिलकर विकास का एक नया अध्याय लिखेंगे। कमलनाथ ने कहा कि आदिवासी समाज सहज, सरल और मेहनतकश हैं। लेकिन विगत 15 वर्षों में उन्हें छला गया है। हमारी सरकार प्रदेश में 15 वर्षों के बाद में बनी है। इन वर्षों में मध्यप्रदेश में किसानों और आम आदमी की दुर्गति हुई। लेकिन अब हमारी सरकार बिगड़ी हुई अर्थव्यवस्था को संवारने के लिए कृत संकल्पित हैं। हम ऐसी नीति बना रहे हैं जिससे किसानों की दशा सुधरे।    मुख्यमंत्री ने कहा कि वे एक लंबे समय से कुक्षी क्षेत्र में आना चाहते थे परंतु उनकी इच्छा थी कि वे ख़ाली हाथ नहीं आए । आज एक हज़ार करोड़ रुपये की इस सिंचाई योजना की सौग़ात लेकर वे आए हैं। उन्होंने कहा कि यह राशि क्षेत्र के लिए एक निवेश की तरह है। मुख्यमंत्री ने कहा कि इससे क्षेत्र में सहायक आर्थिक गतिविधियां प्रारंभ होंगी। भले ही पानी बाद में आए, लेकिन इसके पूर्व ही क्षेत्र में रोज़गार के अवसर आ जाएंगे।   जिले की प्रभारी एवं चिकित्सा शिक्षा मंत्री डॉ. विजय लक्ष्मी साधौ ने कहा कि हम सब का सौभाग्य है कि कमलनाथ मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री बने हैं। वे प्रदेश के विकास के लिए सदैव तत्पर और संकल्पित रहते हैं। क्षेत्रीय विधायक एवं नर्मदा घाटी विकास मंत्री सुरेन्द्र सिंह बघेल ने कहा कि विगत 15 वर्षों में डही क्षेत्र के विकास के लिए कुछ नहीं किया गया। आज मुख्यमंत्री कमलनाथ के कारण क्षेत्र को इतनी बड़ी सौग़ातें मिली हैं। कार्यक्रम में विधायक पांचीलाल मेड़ा सहित अन्य जनप्रतिनिधि उपस्थित रहे।   मुख्यमंत्री ने डही में आयोजित कार्यक्रम के दौरान 1 लाख 12 हजार 782 रुपए की लागत की डही माईक्रो उद्वहन सिंचाई योजना का भूमिपूजन किया। इसके अलावा शासकीय महाविद्यालय कुक्षी में 100 सीटर बालक छात्रावास एवं बाउण्ड्रीवाल लागत 513.69 लाख रुपए सहित अन्‍य विकास कार्यों का लोकार्पण एवं भूमिपूजन किया।

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Dakhal News 26 February 2020

राजनीति

भोपाल। मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान हर मोर्चे पर प्रदेश की कमलनाथ सरकार को घेरने के लिए तैयार रहते हैं। वे सोशल मीडिया के माध्यम से सरकार पर हमला बोलते हैं। एक बार फिर उन्होंने प्रदेश में बढ़ रहे आपराधिक मामलों और किसानों की समस्या को लेकर कमलनाथ सरकार पर निशाना साधते हुए गंभीर आरोप लगाए हैं।    शिवराज ने गुरुवार को एक के बाद एक चार ट्वीट कर प्रदेश की कानून व्यवस्था, बढ़ते अपराध और किसानों की समस्या को लेकर प्रदेश सरकार पर हमला बोला है। उन्होंने अपने पहले ट्वीट में जबलपुर में हुई डेढ़ साल की मासूम बच्ची की हत्या के मामले में सरकार को जिम्मेदार ठहराया है। उन्होंने ट्वीट कर लिखा ‘प्रदेश सरकार की निष्क्रियता के कारण अपराधियों के हौसले बुलंद हैं। चारों तरफ अपहरण, लूट, हत्या, भ्रष्टाचार से हाहाकार मचा है और निकम्मी सरकार कुंभकर्णी निद्रा में सो रही है। सरकार को जऱा भी अपने कर्तव्य का भान है, तो मासूम बिटिया देविका और उसके परिवार को न्याय दे। जबलपुर की मासूम बेटी देविका के अनमोल जीवन को नरपिशाचों ने असमय छीन लिया। बेटी के ऐसे असामयिक दुखद निधन पर मेरी आत्मा चीत्कार रही है, दिल दर्द से भरा हुआ है। ईश्वर मासूम बिटिया की आत्मा को अपने श्री चरणों में स्थान और परिजनों को यह गहन दु:ख सहन करने की शक्ति प्रदान करें।   एक अन्य ट्वीट कर शिवराज सिंह चौहान ने किसान कर्जमाफी को लेकर सरकार का घेराव किया। उन्होंने एक अखबार में छपी खबर के हवाले से प्रदेश में कर्ज से परेशान किसान द्वारा आत्महत्या किए जाने का मामला उठाते हुए लिखा ‘मेरे प्रदेश का किसान परेशान है तो भला मैं कैसे चैन से बैठ जाऊं? हृदय पीड़ा से कराह रहा है। अब तो अन्याय की अति हो गई है। कमलनाथ जी, किसानों के साथ यह अन्याय बंद कीजिए, नहीं तो हम उनके हक की लड़ाई लडऩे के लिए सडक़ों पर उतरने को मजबूर होंगे। प्रत्येक दिन अखबार में किसी न किसी योजना का लाभ मध्यप्रदेश के लाभार्थियों को न मिलने की खबर पढ़ता हूँ। ऐसा कोई भी वर्ग नहीं होगा समाज का जो इस सरकार से त्रस्त न हो गया हो। कांग्रेसी नेता आजकल एक दूसरे को निपटाने के रोज नए-नए प्लान बना रहे हैं, इनके चक्कर में प्रदेश डूब रहा है’!  

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Dakhal News 27 February 2020

भोपाल। मध्यप्रदेश सरकार द्वारा अखबार में छपे एक विज्ञापन पर राजनीति शुरू हो गई है। विज्ञापन में मुख्यमंत्री कमलनाथ की फोटो के साथ राज्य सरकार की कई उपलब्धियां बताई गई है। जिसमेंं शुद्ध के लिए युद्ध अभियान के साथ रेत के अवैध उत्खनन पर रोक, ड्रग माफिया के खिलाफ कार्रवाई समेत तमाम दावे विज्ञापन के माध्यम से किये गए हैं। सरकार के इस विज्ञापन पर पूर्व मंत्री और भाजपा विधायक नरोत्तम मिश्रा ने हमला करते हुए निशाना साधा है।    बुधवार का मीडिया से बातचीत करते हुए नरोत्तम मिश्रा ने अखबार में छपे सरकार के विज्ञापन को लेकर कमलनाथ पर तंज कसा है। उन्होंने कहा कि आपका विज्ञापन आपको ही आईना दिखा रहा है। अगर रेत के अवैध उत्खनन पर रोक लगी है तो कंप्यूटर बाबा कैसे जा -जाकर अवैध उत्खनन पकड़ रहे है। आपके मंत्री ने ही माफी मांगी कि हम रेत का अवैध उत्खनन नहीं रोक पाए। उन्होंने कहा कि ड्रग माफिया मुक्त करने की बात कमलनाथ कर रहे हैं, जबकि शराब से ही 4000 करोड़ रुपये अतिरिक्त वसूलने के लिए आपने नई आबकारी नीति बनाई है। महिला सुरक्षा पर सरकार का घेराव करते हुए नरोत्तम मिश्रा ने कहा कि आपका दावा है कि महिलाएं सुरक्षित हैं जबकि मंत्री ही कह रहे हैं कि बाहर निकलने में डर लगता है, महिलाएं असुरक्षित हैं। शुद्ध के लिये युद्ध अभियान पूरे प्रदेश में वसूली का अभियान बन गया है। भोपाल का बड़ा व्यावसायी तो अपना व्यवसाय बंद करके ही भाग गया। कथनी और करनी का साफ अंतर बताता है यह विज्ञापन।  

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Dakhal News 26 February 2020

मीडिया

नई दिल्ली । चर्चित लेखिका वंदना राग के नए उपन्यास ‘बिसात पर जुगनू’ का लोकार्पण शुक्रवार की शाम इंडिया इंटरनेशनल सेंटर में हुआ। पूर्व एमएलए संदीप दिक्षित, पंकज राग, मंगलेश डबराल, विनोद भारद्वाज, अपूर्वानंद के साथ साहित्य, राजनीति, मीडिया और कला जगत के चर्चित चेहरे ने कार्यक्रम में शामिल हुए। लोकार्पण के बाद लेखिका वंदना राग से, आलोचक संजीव कुमार और लेखक ब्लॉगर प्रभात रंजन ने बातचीत की। बिसात पर जुगनू, उपन्यास की कहानी हिन्दुस्तान की पहली जंगे-आज़ादी के लगभग डेढ़ दशक पहले के पटना से शुरू होकर, 2001 की दिल्ली में ख़त्म होती है। उपन्यास, भारत और चीन, इन दो देशों से जुड़ी कहानी साथ-साथ लेकर चलती है जिसके इर्द-गिर्द आज पूरी दुनिया का अर्थतन्त्र, राजनीति, युद्ध की आशंकाएं और कृत्रिम बीमारियां; सब कुछ छितराया हुआ है। किताब पर बातचीत करते हुए वंदना राग ने कहा, “इस किताब के लिए मैंने चीन की लंबी यात्राएं कीं और जाना की दोनों ही देशों के आम लोगों का संघर्ष एक जैसा है। इतिहास में ऐसी कई महिलाएं गुमनामी में रहीं जिन्होंने स्वतंत्रा संघर्ष में योगदान दिया। यह उपन्यास इन महिलाओं की भी कहानी है।“ आलोचक संजीव ने भी वंदना की बात से सहमति जताते हुए कहा कि, “यहाँ फ़िरंगियों के अत्याचार से लड़ते दोनों मुल्कों के दुःखों की दास्तान एक-सी है और दोनों ज़मीनों पर संघर्ष में कूद पड़नेवाली स्त्रियों की गुमनामी भी एक-सी है। ऐसी कई गुमनाम स्त्रियाँ इस उपन्यास का मेरुदंड हैं।“ कथाकार प्रभात रंजन ने अपनी बात रखते हुए कहा, “बहुत दिनों बार एक बड़े कैनवास का ऐतिहासिक उपन्यास है बिसात पर जुगनू।“ उन्होंने यह भी कहा, “19 वीं शताब्दी के इतिहास के द्वंद्व, भारत-चीन व्यापार, कम्पनी का राज, जन जागरण, विद्रोह। पटना कलम के कलाकारों का बिखराव। इस उपन्यास में इतिहास, कला के बहुत से सवाल आते हैं और बेचैन कर देते हैं। बहुत से किरदार डराते भी हैं, मन के भीतर रह जाते हैं।“ किताब के लोकार्पण पर राजकमल प्रकाशन समूह के प्रबंध निदेशक अशोक महेश्वरी ने कहा, “इस उपन्यास को पढ़ते हुए हम कुछ तो इस बारे में सोचने के लिए विवश होंगे। किताब भाषा की बात करती है। चीन में आज भी बहुत कम लोग अंग्रेज़ी समझने वाले हैं। वे अपना सारा काम अपनी भाषा में करते हैं, विज्ञान की खोजें भी, यहां तक कि कम्प्यूटर पर काम भी। उन्होंने अपने बच्चों पर एक अतिरिक्त गैरजरूरी बोझ नहीं डाला। मुझे लगता है चीन, जापान आदि देशों के विकसित होने का बड़ा कारण अपनी भाषा में सोचना और काम करना है।“ उपन्यास बिसात पर जुगनू के बारे में बिसात पर जुगनू सदियों और सरहदों के आर-पार की कहानी है। हिन्दुस्तान की पहली जंगे-आज़ादी के लगभग डेढ़ दशक पहले के पटना से शुरू होकर यह 2001 की दिल्ली में ख़त्म होती है। बीच में उत्तर बिहार की एक छोटी रियासत से लेकर कलकत्ता और चीन के केंटन प्रान्त तक का विस्तार समाया हुआ है। यहाँ 1857 के भारतीय स्वतंत्रता संग्राम की त्रासदी है तो पहले और दूसरे अफ़ीम युद्ध के बाद के चीनी जनजीवन का कठिन संघर्ष भी।   वन्‍दना रागवन्‍दना राग मूलतः बिहार के सिवान ज़िले से हैं। जन्म इन्दौर मध्य प्रदेश में हुआ और पिता की स्थानान्तरण वाली नौकरी की वजह से भारत के विभिन्न शहरों में स्कूली शिक्षा पाई। 1990 में दिल्ली विश्वविद्यालय से इतिहास में एम.ए. किया। पहली कहानी हंस में 1999 में छपी और फिर निरन्तर लिखने और छपने का सिलसिला चल पड़ा। तब से कहानियों की चार किताबें प्रकाशित हो चुकी हैं—यूटोपिया, हिजरत से पहले, ख्‍़यालनामा और मैं और मेरी कहानियाँ।

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Dakhal News 25 February 2020

Alok Kumar : डोनाल्ड ट्रम्प की यात्रा के चकाचौंध से चौंधियाए भाई लोग इसे आखिरी मान कर आलोचना में तमाम ऊर्जा को उड़ेल मत देना.आलोचना – प्रत्यालोचना को बचाए रखना क्योंकि हाल फिलहाल ही अंदरूनी सियासत में इससे बड़ा घटने वाला है. इससे भी बड़े मौके आने वाले हैं. मौके की तैयारी मुक़म्मल हो रही है. खबर है कि इधर ट्रम्प लौटकर अमेरिका पहुंचे नहीं होंगे और घरेलू सियासी तुरुप के पत्ते तेज़ी से फेंटे जायेंगे. हौले हौले से राज्यों की सियासत के करवट बदलने का सिलसिला तेज हो जाएगा. बारी बारी से एक -दो नहीं बल्कि एक साथ कई राज्यों को बड़े सियासी बबंडर से गुजारा जाएगा. इसके मंचन की पूरी तैयारी है. यह संसद के ऊपरी सदन राज्यसभा में भाजपा के सदस्यों की संख्या बढ़ाने के लिहाज से खास होगा. क्योंकि सहज़ शासन के लिए राज्यसभा में भाजपा के सदस्यों की संख्या को बढ़ाना सरकार की प्राथमिकता में शामिल है. तैयारी के हिसाब से संभव है कि सियासी नाटक इतना ज्यादा बड़ा हो कि उसकी तुलना में गोवा और कर्नाटक की कहानी लघु और पुरानी पड़ जाए. ओड़िशा और आंध्रप्रदेश में भाजपा अपने हिस्से से ज्यादा राज्यसभा सीट लेगी इसके लिए नवीन पटनायक और जगन मोहन रेड्डी तैयार हैं. सियासी नाटक के असली मंचन की जरुरत महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश, झारखण्ड और पश्चिम बंगाल जैसे राज्यों में है. इसे लेकर दांतों तले अंगुली दबाने वाली कोई बात हो जाए तो चौंकने से संकुचाईयेगा मत. दृश्य एक की तैयारी के मुताबिक महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे बड़ा गुल खिलाने वाले हैं.वह भाई राज की सक्रियता से सहमे हुए हैं. दबाव में सौदे की मेज पर आ बैठे हैं.बेटे आदित्य ठाकरे का भविष्य सुरक्षित होने की ताकीद के साथ ही वह किसी भी घड़ी दिल्ली के मेगा शो में भरत मिलाप का दृश्य फिल्माने वाले हैं. ट्रम्प की विदाई के बाद उद्धव की अयोध्या में मत्था टेकने की योजना है. संजय ने इसे बयां कर दिया है.7 मार्च को तय इस अभियान से वह सुर्खियों में छाने वाले है. सियासी तड़का लगाने वाले लोग काम पर लगे हैं. तलवार सिर पर लटकाया गया है, उद्धव वापसी के रास्ते पर नहीं आए तो राज ठाकरे को भगवान राम का बड़ा भक्त साबित करने की तैयारी होगी. दृश्य दो – मध्य प्रदेश में कुम्हलाए कमल का नया कर्णधार तय हो रहा है. नए गुल से राजमाता सिंधिया की संतति को प्रत्यक्ष लाभ मिलने की संभावना दिन ब दिन मजबूत हो रही है.अंजाम के बदले में भाजपा को मध्य प्रदेश से ज्यादा राज्यसभा सीट मिल जाय. मार्च में राज्यसभा चुनाव से पहले ही सब तय होना है. दृश्य तीन – झारखण्ड के नव निर्वाचित मुख्यमंत्री पर निशाना है. राज्यसभा की महज़ एक-दो ज्यादा सीट लेने के लिए झारखण्ड में बड़ा उलट फेर होने की संभावना है. संभव है कि वहां गठबंधन ही बदल जाए. मुख्यमंत्री तो हेमंत बने रहें लेकिन 2015 में रघुवर दास के मुख्यमंत्री बनने से पहले की स्थिति फिर से बहाल हो जाए. दृश्य चार – यह ज्यादा हंगामेदार होगा. कोलकाता से एक सीट भाजपा को मिल जाए, इसका इंतजाम जारी है. सफल हुआ तो संभव है, वो नज़र आए जिसे असली सियासत कहते हैं. बिहार में नीतीश के पुचकार के पीछे फिलहाल राज्यसभा चुनाव को ही पढ़िए.   दिल्ली के वरिष्ठ पत्रकार आलोक कुमार की एफबी वॉल से.

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Dakhal News 25 February 2020

समाज

टीकमगढ़। प्रदेश के प्रसिद्ध ऐतिहासिक पर्यटन स्थल ओरछा में आगामी छह से आठ मार्च तक तीन दिवसीय \"नमस्ते ओरछा\" महोत्सव का आयोजन किया जा रहा है। इसकी तैयारियां जोर-शोर से चल रही हैं। पूरा जिला प्रशासन इसकी तैयारियों में जुटा है। पूरी ओरछा नगरी को रामराजा मंदिर के रंग में रंगा जा रहा है। यह जानकारी सहायक जनसम्पर्क अधिकारी शैफाली तिवारी ने गुरुवार को मीडिया को दी। उन्होंने बताया कि आगामी छह मार्च को ओरछा महोत्सव भगवान श्रीराम के अयोध्या से ओरछा आगमन की कथा से शुरू होगा। इस ऐतिहासिक गाथा को थ्री-डी मैपिंग से जहाँगीर महल की दीवारों पर दिखाया जाएगा। इसके साथ ही शास्त्रीय संगीत की स्वर लहरियों के बीच यहाँ विदेशी संगीतज्ञों के साथ बुंदेली गायक सुर-ताल मिलाते दिखाई देंगे। पहले दिन के कार्यक्रम का समापन बुंदेली व्यंजनों के जायके से किया जायेगा। महोत्सव का ब्लू-प्रिंट तैयारतीन दिवसीय ओरछा महोत्सव का ब्लू-प्रिंट तैयार कर लिया गया है। देश-विदेश से आने वाले डेलीगेट्स को तीन दिन में यहाँ की संस्कृति, संगीत, पर्यावरण, भोजन आदि हर चीज से रू-ब-रू कराने की कोशिश की जा रही है। देश-विदेश से आने वाले हर क्षेत्र के डेलीगेट्स को ओरछा में इन्वेस्ट करने के लिए आमंत्रित किया जा सके, इस बात को ध्यान में रखकर पूरा कार्यक्रम तैयार किया गया है।महोत्सव की ओपनिंग सेरेमनी में संध्या ग्रुप का डांस, क्लिंटन का म्यूजिक-शो, बुंदेली आर्टिस्ट तिपन्या के साथ संतूर-वादन का कार्यक्रम होगा। दूसरे दिन 7 मार्च की शाम कंचना घाट पर बेतवा नदी की महा-आरती होगी। यहाँ पर प्रख्यात शास्त्रीय संगीत गायिका शुभा मुद्गल का गायन होगा। इसके साथ ही क्लासिकल डांसर अदिति मंगलदास नृत्य की प्रस्तुति देंगी। इसके बाद कल्पवृक्ष के पास आयोजित म्यूजिक-शो में इण्डियन ओशन ग्रुप, मृग्या, स्वनन किरकिरे के गायन के साथ ही फ्रेंच गायक मनु चाव एवं बुंदेली आर्टिस्ट कालू राम की जुगलबंदी का आनंद लोग उठायेंगे।आसमान से निहारेंगे ओरछा की सुंदरताकार्यक्रम में आने वाले देशी-विदेशी मेहमानों को यहाँ के प्राकृतिक वातावरण से रू-ब-रू कराने के लिये नेचर वॉक, योग, हेरिटेज साइकिलिंग एवं फोटोग्राफी जैसे कार्यक्रम रखे गये हैं। दूसरे दिन सुबह से सभी डेलीगेट्स को वन परिक्षेत्र एवं बेतवा नदी के बीच ले जाकर ये कार्यक्रम कराये जायेंगे। इसके साथ ही, ओरछा की ऐतिहासिक एवं प्राकृतिक सुंदरता का आसमानी मंजर दिखाने के लिये हॉट एयर बैलून से पर्यटकों को भ्रमण कराया जायेगा।माँ बेतवा की महा-आरतीमहोत्सव में राज्य सरकार बेतवा के महत्व को सभी लोगों के बीच ले जाने का प्रयास करेगी। महोत्सव में 7 मार्च की शाम को सभी डेलीगेट्स कंचना घाट पर बेतवा की महा-आरती में शामिल होंगे। यहीं पर शुभा मुद्गल का गायन होगा। इसके बाद लगभग 500 वर्ष पुराने कल्पवृक्ष को भी दिखाया जायेगा तथा कल्पवृक्ष के पास म्यूजिक-शो होगा

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Dakhal News 27 February 2020

भोपाल। पश्चिमी विक्षोम के असर के चलते मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल समेत ग्वालियर संभाग में आगामी 2 मार्च को बारिश होने की संभावना है। पिछले 24 घंटे के दौरान प्रदेश के रीवा संभाग के जिलों में कहीं-कहीं बारिश दर्ज की गई है। जिसके चलते राजधानी सहित प्रदेश के मौसम में एक बार फिर ठंडक घुल गई है। कई शहरों में अधिकतम और न्यूनतम तापमान भी सामान्य से कम हो गया है। राजधानी में भी अधिकतम और न्यूनतम तापमान सामान्य से कम रहा।    वरिष्ठ मौसम वैज्ञानिक उदय सरवटे ने जानकारी देते हुए बताया कि अधिकतम तापमान में पिछले 24 घंटे के दौरान 2.8 डिग्री की बढ़ोतरी हुई है, वहीं न्यूनतम तापमान में 1.4 डिग्री की बढ़ोतरी हुई है। मौसम विभाग के अनुसार न्यूनतम तापमान रीवा, शहडोल एवं जबलपुर संभाग के जिलों में काफी गिरा है। शेष संभाग के जिलों में विशेष परिवर्तन नहीं हुआ है। प्रदेश में सबसे कम न्यूनतम तापमान 10 डिग्री सेल्सियस छिंदवाड़ा, रायसेन व खरगौन में दर्ज किया गया। मौसम विभाग के अनुसार मप्र के मौसम में 29 फरवरी से बड़ा बदलाव आ सकता है। 29 फरवरी से 2 मार्च के बीच भोपाल सहित ग्वालियर संभाग के जिलों में गरज-चमक के साथ ओले गिरने की भी संभावना है।   लगातार मौसम बदलने की वजह जम्मू-कश्मीर से गुजरने वाला पश्चिमी विक्षोभ है। कई जगहों पर ओले गिरने से किसानों को नुकसान हो सकता है। पूर्वी मध्य प्रदेश के कुछ हिस्सों में पहले ही ओलावृष्टि हो चुकी है। विभाग का कहना है कि 29 फरवरी से पश्चिमी विक्षोभ आ रहा है, जो काफी मजबूत है। इससे प्रदेश के पश्चिमी क्षेत्र में बारिश होने की संभावना है।

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Dakhal News 27 February 2020

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मुंबई। सोनी टीवी पर शनिवार और रविवार को प्रसारित होने वाला बहुचर्चित कॉमेडी धारावाहिक 'द कपिल शर्मा शो' में इस हफ्ते निर्देशक अनुभव सिन्हा, अभिनेत्री तापसी पन्नू और दीया मिर्जा अपनी आगामी फिल्म 'थप्पड़' के प्रमोशन के लिए आएंगे। आगामी शनिवार के एपिसोड में हंसी-ठहाकों का दुगना मजा होगा। शो के होस्ट कपिल शर्मा 'थप्पड़' की टीम के साथ अपने मजेदार हाजिर जवाबी से दर्शकों को हंसा-हंसाकर लोटपोट करते नजर आएंगे। इस शो में अभिनेत्री दिया मिर्जा पहली बारआ रही हैं। सोनी टीवी ने ट्विटर पर शो के आगामी एपिसोड का एक वीडियो शेयर किया है, जिसमें कपिल अभिनेत्री दीया मिर्जा से पूछते हैं कि दीया आप पहली बार घर आई है क्या लेगी आप? चाय कॉफी या डायरेक्ट फ्लर्ट। कपिल के इस सवाल पर दिया कहती है कि फिल्म का थीम पता है न ! इसके जवाब में कपिल कहते हैं-'थप्पड़ से डर नहीं लगता मेमसाब प्यार से लगता है!'   कपिल के इस हाजिर जवाबी पर सभी हंसने लगते हैं। फिल्म 'थप्पड़' इसी साल 28 फरवरी को सिनेमाघरों में दस्तक देगी। फिल्म में तापसी पन्नू और दीया मिर्जा के अलावा पावेल गुलाटी, तन्वी आजमी, रत्ना पाठक शाह,राम कपूर, कुमुद मिश्रा, मानव कौल, ग्रेसी गोस्वामी भी अहम भूमिका में हैं। फिल्म में एक पारिवारिक कहानी है, जिसमें घरेलू हिंसा का चित्रण किया गया है। निर्देशक अनुभव सिन्हा फिल्म 'थप्पड़' में साधारण पारिवारिक कहानी को दिखाते हैं, जिसमें 'बस एक थप्पड़' से सब कुछ बदल जाता है। फिल्म में एक घरेलू औरत को अपने आत्मसम्मान के लिए लड़ाई लड़ते हुए दिखाया जायेगा। फिल्म 'थप्पड़' भूषण कुमार, अनुभव सिन्हा और कृष्ण कुमार द्वारा निर्मित है। 

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Dakhal News 27 February 2020

मुंबई। निर्देशक बिपिन नाडकर्णी की आगामी फिल्म 'दरबान'  बड़े पर्दे पर दस्तक देने के लिए तैयार है। यह फिल्म इसी साल 3 अप्रैल को सिनेमाघरों में दस्तक देगी। इस फिल्म में शरद केलकर, शारिब हाशमी, रसिका दुगल और फ्लोरा सैनी अहम भूमिका में है। फिल्म निर्माताओं ने गुरुवार को फिल्म 'दरबान' का दूसरा पोस्टर जारी किया है। फिल्म के इस पोस्टर को अभिनेता शरद केलकर ने ट्विटर पर शेयर कर लिखा-दो पीढ़ियों की इस अविस्मरणीय कहानी के साक्षी बनिए। फिल्म को प्रोड्यूस और डायरेक्ट बिपिन नाडकर्णी ने किया है। यह 3 अप्रैल 2020 को रिलीज होगी!'   फिल्म के इस पोस्टर में शरद केलकर, शारिब हाशमी और फ्लोरा सैनी  नजर आ रही है। फिल्म में शरद, शारिब और फ्लोरा मुख्य भूमिका में है। वहीं इस फिल्म में रसिका दुगल छोटी लेकिन महत्वपूर्ण भूमिका में नजर आयेगी। फिल्म के इस पोस्टर को अभिनेता शारिब हाशमी ने भी सोशल मीडिया पर शेयर करते हुए लिखा-'मेरी फिल्म 'दरबान' का दूसरा पोस्टर जारी हो गया है। नेशनल अवार्ड के विजेता बिपिन नाडकर्णी इस फिल्म को प्रोड्यूस एवं डायरेक्ट कर रहे हैं!'    फिल्म में शारिब एक केयरटेकर की भूमिका में है। निर्देशक बिपिन नाडकर्णी इससे पहले कई मराठी फिल्मों का सफल निर्देशन कर चुके हैं। फिल्म 'दरबान' निर्देशक बिपिन नाडकर्णी की बॉलीवुड में डेब्यू है। यह 3 अप्रैल 2020 को सिनेमाघरों में रिलीज होगी।

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Dakhal News 27 February 2020

दखल क्यों

डाॅ. राकेश राणा विजय सिंह पथिक भारतीय राजनैतिक परिदृश्य पर ऐसा नेतृत्व हैं, जिन्होंने समाज के साथ मिलकर सफल सत्याग्रह की शैली ईजाद की। होली के दूसरे दिन दुल्हेंडी 27 फरवरी, 1884 को जन्में भूपसिंह ही विजय सिंह पथिक बने। उनके पिता व माता दोनों के परिवारों की 1857 की क्रांति में सक्रिय भागीदारी थी। पथिक इन्दौर में 1905 में प्रसिद्ध क्रांतिकारी देशभक्त शचीन्द्र सान्याल के सम्पर्क में आये। उन्होंने पथिक जी को रासबिहारी बोस से मिलाया। क्रांतिकारियों के इस समूह में पथिक जी कई महत्वपूर्ण कार्रवाहियों का हिस्सा रहे। 1912 में जब अंग्रेजों ने दिल्ली को राजधानी बनाया तो क्रांतिकारियों ने उद्घाटन समारोह में वायसराय के जुलूस पर चांदनी चौक में बम फेंका। इस कर्यवाही में पथिक जी शामिल थे। 1914 में रासबिहारी बोस और शचीन्द्र सान्याल ने सम्पूर्ण भारत में एकसाथ सशस्त्र क्रांति के लिए ’अभिनव भारत समिति’ नाम का संगठन बनाया। पथिक जी को इस काम के लिए राजस्थान का जिम्मा सौंपा गया। अजमेर से प्रमुख समाचार पत्रों का सम्पादन और प्रकाशन प्रारम्भ किया। बिजौलिया का प्रसिद्ध किसान आन्दोलन, बेगू किसान आन्दोलन, सिरोही का भील आन्दोलन, बरार किसान आन्दोलन ये सब बड़े किसान आन्दोलन पथिक जी के नेतृत्व में खड़े हुए। राजस्थान के स्वतंत्रता आन्दोलन का विस्तार कर राष्ट्रीय और अन्तर्राष्ट्रीय स्तर तक ले गये। उस दौर के बड़े नेता गांधी और तिलक थे, उनतक राजस्थान के स्वतंत्रता संघर्ष की पूरी योजना और परिणामों को पहुंचाया। ऐनी हडसन के जरिये ब्रिटेन के हाउस ऑफ काॅमन में राजस्थान स्वतंत्रता संघर्ष की आवाज उठायी। रियासतों के दमन और शोषण को समझाने वाली विशाल प्रदर्शनी अधिवेशन स्थलों पर आयोजित की। यह सब पथिक जी की दूरदृष्टि और नेतृत्व शैली को समझने के लिए पर्याप्त है। 1920 में वर्धा में राजस्थान सेवा संघ की स्थापना की। इसके माध्यम से सत्याग्रह के प्रयोग शुरू किए। बाद में संघ की गतिविधियों का केन्द्र अजमेर बना। देशभक्त युवाओं को खोज-खोजकर आन्दोलन में शामिल किया। माणिक्य लाल वर्मा, राम नारायण चौधरी, हरिभाई किंकर, नैनूराम शर्मा और मदनसिंह करौला जैसे देशभक्त और आजाद भारत के बड़े नेता पथिक जी के राजस्थान सेवा संघ की ही देन हैं।1929 में पथिक जी राजस्थान कांग्रेस के अध्यक्ष चुने गये। पथिक जी की कार्यशैली और नेतृत्व शैली दोनों अद्भुत है। दोनों के केन्द्र में सत्याग्रह की पद्धति है। उनके कार्यक्रम और प्रबंधन का जो अनूठापन और परिणाम देने वाला है वह सत्याग्रह ही है। लगान के सम्बन्ध में, ठिकाने के अत्याचारों के सम्बन्ध में, किसानों की बहादुरी के सम्बन्ध में, गीत और भजन के द्वारा किसानों में गांव-गांव आन्दोलन का प्रचार करना, सबकुछ सत्याग्रह को साक्षी मानकर ही किया। पथिक जी ने सम्मिलित हस्ताक्षरों से राज्य को किसानों के अभाव अभियोगों के लिए आवेदन देना बन्द करवा दिया। केवल पंचायत के सरपंच के नाम से ही लिखा-पढ़ी की जाने लगी। चेतावनी दी गई कि अब किसान अनुचित लागतें और बेगारें नहीं देंगे। पंचायत ने यह निश्चय किया है कि यदि ठिकाना इन्हें समाप्त नहीं करेगा तो पंचायत उन्हें अन्य टैक्स भी नहीं देगी। राज्य ने अपने कर्मचारियों और ठिकाने के पक्ष में आदेश दिया कि सरपंच या पंचायत के नाम से किसी अर्जी या आवेदन पर कोई कार्यवाही न हो अर्थात राज्य ने पंचायत के अस्तित्व को मानने से इनकार कर दिया। विजय सिंह पथिक ने किसानों को समझाया कि कोई किसान व्यक्तिगत रूप से या सम्मिलित हस्ताक्षर करके आवेदन न दे। सभी किसानों की ओर से बोलने का अधिकार एकमात्र पंचायत को ही होगा। उनके इस आह्वान से सम्पूर्ण राजस्थान सत्याग्रह की गूंज से जागृत हो उठा। पथिकजी के आह्वान पर बिजोलिया के किसानों ने युद्ध का चन्दा देने से इन्कार कर दिया। प्रेमचन्द भील भजन गा-गाकर किसानों को सत्याग्रह के लिए प्रेरित करते रहे। पथिकजी ने गणेश शंकर विद्यार्थी को पत्र लिखा कि वे बिजोलिया में किसान सत्याग्रह चला रहे हैं, उनके प्रसिद्ध पत्र प्रताप की सहायता की आन्दोलन को अत्यन्त आवश्यकता है। साथ ही बिजोलिया के किसानों की ओर से गणेश शंकर विद्यार्थी को राखी भेजी गई। पत्र मिलते ही गणेश शंकर विद्यार्थी का जवाब आया कि बिजोलिया आन्दोलन के लिए प्रताप के पृष्ठ सदैव खुले हैं। आप अपने सत्याग्रह पथ पर चलते रहिए। यह सत्याग्रह की शैली का ही प्रभाव था कि देखते ही देखते राजस्थान का स्वतंत्रता संघर्ष पूरे देश में पहचाना जाने लगा। विजयसिंह पथिक सत्याग्रह पथ पर अडिग रहे और आजादी के लिए जीवन पर्यन्त संघर्ष करते रहे। 29 मई, 1954 को जब उनका देहान्त हुआ, तब भी पथिक जी एक समरस, शान्तिपूर्ण और सुन्दर समाज के निर्माण में जुटे थे। एक नया अखबार शुरू करने की योजना बना रहे थे। पथिक जी जीवन भर सामंतवाद, जातिवाद, पूंजीवाद, सम्प्रदायवाद, धर्मांधतता, सामाजिक कुप्रथाओं, शोषण, दमन और अन्याय के विरूद्ध संघर्ष करते रहे। पथिक जी जहां देश, समाज और राष्ट्र के बड़े सवालों को लेकर चिंतनशील थे, वही बेरोजगारी, पर्यावरण विनाश, स्वास्थ्य और स्वच्छता जैसे सामाजिक महत्व के मुद्दों पर अपने अखबारों के जरिए बराबर लिख रहे थे। इसीलिए देश का पहला सत्याग्रही विजयसिंह पथिक हैं। सत्याग्रह की शक्ति ने स्वतंत्रता संघर्ष को सामाजिक महत्व के जनान्दोलन में बदलने का बड़ा काम किया। पूरे स्वतंत्रता संग्राम में सत्याग्रह एक शक्तिशाली हथियार की तरह उपयोग में आया। वास्तव में भारतीय स्वाधीनता संग्राम की कहानी सत्याग्रह की ही कहानी है। आज भी न इसका महत्व कम हुआ है और न ही इसकी प्रासंगिकता कम हुई है। जैसे-जैसे दुनिया में अन्याय, शोषण और अत्याचार बढ़ेगा, सत्याग्रह के लिए आग्रह और तीव्र होंगे। इस जादुई हथियार को समझने के लिए पथिक साहित्य/शोधकार्य/इतिहास सामग्री/संस्मरण और उनके जीवनानुभवों तथा सामाजिक कार्यों को समझना आवश्यक है। उनके द्वारा प्रकाशित छः प्रमुख समाचार-पत्रों में राजस्थान केसरी, नवीन राजस्थान, तरुण राजस्थान, राजस्थान संदेश, नव-संदेश और उपरमाल को डंको है। पथिक जी ने पत्रकारिता को सत्याग्रह का शस्त्र बनाया और समाज व राष्ट्र को संघर्ष सिखाया। एक सफल सत्याग्रह राष्ट्रीय चेतना में कैसे प्रस्फुटित होता है और समाज को बदलाव के लिए खड़ा करता है, यह पथिक के प्रयोगों से ही सीखा जा सकता है। (लेखक स्वतंत्र टिप्पणीकार हैं।)

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Dakhal News 27 February 2020

प्रभुनाथ शुक्ल   राष्ट्रपति बनने के बाद अपनी पहली भारत यात्रा पर आए दुनिया के सबसे शक्तिशाली शख्सियत डोनाल्ड ट्रम्प बेहद खुश और गौरवान्वित दिखे। गुजरात से लेकर मोहब्बत की नगरी आगरा तक बेमिसाल ताज का दीदार कर बेहद खुश हुए। दुनिया के सबसे ताकतवर देश और भारत जैसे बड़े लोकतांत्रिक देश के राष्ट्राध्यक्ष ट्रम्प-मोदी इस दोस्ती को नया आयाम देना चाहते हैं। अपने दो दिवसीय यात्रा में ट्रम्प और मोदी एक-दूसरे से क्या खोया और क्या पाया, यह विश्लेषण का विषय होगा। लेकिन एक बात जो खुलकर सामने आई, वह है हिंदी की अहमियत। मोदी और ट्रम्प की जुगलबंदी ने हिंदी का ग्लोबल मान बढ़ाया है। मोटेरा स्टेडियम में आयोजित कार्यक्रम की मूल थीम हिंदी यानी नमस्ते ट्रम्प पर आधारित थी। लेकिन ट्रम्प और मोदी ने लाखों की भीड़ का हिंदी यानी नमस्ते से अभिवादन किया। अपनी भारत यात्रा के दौरान ट्रम्प ने तीन बार हिंदी में ट्वीट किया।   भारत के अभिजात वर्ग में हिंदी और हिंदी भाषियों को हिकारत की नजरों से भले देखा जाता हो, लेकिन ग्लोबल स्तर पर अमेरिकी राष्ट्रपति ने हिंदी की स्वीकार्यता को निश्चित रूप से बढ़ाया है। ट्रम्प ने हिंदी फिल्म शोले और शाहरुख का भी जिक्र किया। जबकि देश में हिंदी भाषा की स्वीकार्यता पर संसद से लेकर सड़क तक खूब राजनीति होती है। पूर्वोत्तर भारत और दक्षिण भारत में हिंदी को लेकर क्या स्थिति है, सभी जानते हैं। गुजरात में हिंदी भाषियों पर किस तरह जानलेवा हमले हुए यह कहने की बात नहीं है। लेकिन ट्रम्प ने उसी गुजरात की धरती से हिंदी को बड़ा सम्मान दिया है। हिंदी को राजभाषा का दर्जा भले मिल गया हो लेकिन राष्ट्रभाषा का सम्मान आजतक नहीं मिल पाया है। सरकारी परीक्षाओं को हिंदी माध्यम से कराने पर भी राजनीति होती है। अंग्रेजी सोच की हिमायती राजनीति हिंदी बोलने में अपना अपमान और शर्म महसूस करती है। अधिकांश राजनेता अपने ट्वीट अंग्रेजी में करते हैं। जबकि अमेरीकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने हिंदुस्तान और हिंदी की अहमियत समझते हुए अपनी भारत यात्रा को हिंदीमय बना दिया।   अंग्रेजी के हिमायती यह कह सकते हैं कि ट्रम्प ने यह सब अमेरिका में होने वाले आम चुनाव के लिए किया क्योंकि अमेरिका में भारतीय मूल के 40 लाख लोग रहते हैं। लेकिन आलोचकों को यह सोचना होगा कि दुनिया के सबसे ताकतवर देश के राष्ट्रपति को हिंदी में ट्वीट की क्या जरुरत थी। वह अपनी बात अंग्रेजी में भी कह सकते थे। निश्चित रूप से हिंदी का ग्लोबल मान बढ़ाने में ट्रम्प और मोदी का अहम योगदान है। पहले ट्वीट में उन्होंने लिखा- हम भारत आने के लिए तत्पर हैं। हम रास्ते में हैं, कुछ ही घंटों में हम सबसे मिलेंगे। दूसरे और तीसरे ट्वीट में उन्होंने भारत और अमेरिकी संबंधों का जिक्र किया। इसका असर भी अमेरिका में रहने वाले भारतीय मूल के लोगों पर गहरा होगा। लोग इस ट्वीट के राजनीतिक मायने चाहे जो निकालें, लेकिन सच है कि वैश्विक स्तर पर हिंदी की स्वीकार्यता बढ़ी है।   हिंदी में संबोधन किसी विदेशी राष्ट्राध्यक्ष की कोई नई पहल नहीं है। पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा जब 2010 में भारत आए तो उन्होंने भी अपने सत्कार से प्रभावित होकर हिंदी में 'बहुत-बहुत धन्यवाद' बोलकर भारत और भारतीयता के प्रति अभार जताया था। जबकि भाषण का समापन 'जय हिंद' से किया था। विदेशी धरती पर सिर्फ हिंदी नहीं उसकी क्षेत्रीय भाषाओं का भी जलवा कायम रहा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जब अमेरिकी यात्रा पर गए थे तो तत्कालीन राष्ट्रपति बराक ओबामा ने गुजराती भाषा में 'केम छो मिस्टर मोदी' से स्वागत किया था। जब अमेरिका में आम चुनाव हो रहे थे तो वहां भी 'अबकी बार ट्रम्प सरकार' की गूंज सुनाई दी थी। भारत में गढ़ा इस चुनावी जुमले का इस्तेमाल खुद राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने किया था। भारत में 2014 के आम चुनाव में यह चुनावी नारा खूब गूंजा था अबकी बार मोदी सरकार। हिंदी की अहमियत और ग्लोबल स्वीकार्यता तेजी से बढ़ रही है। प्रधानमंत्री अपनी विदेश यात्राओं में हिंदी का खुलकर प्रयोग करते रहे हैं। हिंदी को 'ग्लोबल' बनाने में भी खास योगदान रहा है। अपनी अमेरिकी यात्रा के दौरान ट्रम्प से मुलाकात में उन्होंने हिंदी में भाषण दिया था।   इससे पूर्व भारत के कई राजनेता वैश्विक मंच पर हिंदुस्तान और हिंदी का मान बढ़ाते आए हैं। देश की विदेश मंत्री के पद पर रहीं सुषमा स्वराज आज हमारे बीच नहीं हैं। लेकिन हिंदी के उत्थान और विकास के लिए उनके योगदान को भुलाया नहीं जा सकता। विदेश मंत्री रहते संयुक्त राष्ट्र संघ में 2017 में उन्होंने हिंदी में भाषण देकर पाकिस्तान को खूब लताड़ लगाई थी। संसद से लेकर वैश्विक मंच पर उन्होंने हिंदी का मान बढ़ाया। भारत रत्न एवं पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी का हिंदी प्रेम किसी से छुपा नहीं है। अटल जी ने विदेशी दौरों के समय कई मंचों पर हिंदी में अपनी बात रखी। 1977 में संयुक्त राष्ट्र संघ में उन्होंने अपना पहला भाषण हिंदी में दिया। देश के प्रथम प्रधानमंत्री पंडित जवाहर लाल नेहरू भी हिंदी के हिमायती थे। उनकी पहल पर ही 14 सितम्बर को 'हिंदी दिवस' मनाया जाता है। 14 सितम्बर 1949 को हिंदी को संविधान सभा में अधिकारिक भाषा सम्मान मिला था। सोशल मीडिया में हिंदी का अच्छा प्रयोग हो रहा है। ट्विटर पर भी हिंदी में काफी ट्वीट किए जा रहे हैं। वक्त आ गया है जब हमें हिंदी की वैश्विक स्वीकार्यता को समझते हुए राजनीति को किनारे रख हिंदी को और समृद्ध बनाने के लिए काम करना चाहिए।     (लेखक स्वतंत्र टिप्पणीकार हैं।)

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Dakhal News 25 February 2020
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