विशेष

भोपाल। मध्यप्रदेश पर्यटन के क्षेत्र में पिछले एक साल में राष्ट्रीय स्तर पर 16 पुरस्कार हासिल कर देशभर में जहां अपनी पहचान और मजबूत करने में सफल रहा है, वहीं प्रदेश को आगे बढ़ाने की दिशा में पूर्ववर्ती शिवराज सरकार की नीति को भी आगे बढ़ाने में कमलनाथ सरकार पूरी तरह से सफल साबित हो रही है।   दरअसल, पिछले दिग्‍विजय के कांग्रेसी कार्यकाल में राज्‍य का पर्यटन क्षेत्र पूरी तरह से डूब चुका था, जिसे नए सिरे से आगे बढ़ाने का कार्य भाजपा की तत्‍कालीन मुख्‍यमंत्री साध्‍वी उमा भारती, स्‍व. बाबूलाल गौर से लेकर शिवराज सिंह चौहान बखूबी करते रहे लेकिन फिर एक बार कांग्रेस की कमलनाथ सरकार आने के बाद लोगों को लग रहा था कि कहीं प्रदेश के पर्यटन क्षेत्र का हाल पुराने कांग्रेसी कार्यकाल जैसा ना हो जाए, लेकिन अब एक साल बीत चुके हैं और प्रदेश पर्यटन में पहले की तरह ही दिनों दिन आगे बढ़ रहा है। नई कमलनाथ सरकार अपने इस एक साल के कार्यकाल में पर्यटन पर 136 करोड़ का पूंजी निवेश किया है।   राज्‍य सरकार दे रही नवाचार को प्रमुखता इस संबंध में पर्यटन मंत्री सुरेंद्र सिंह बघेल ने हिस को बताया कि हमारी सरकार की पर्यटन को लेकर नीति बिल्‍कुल स्‍पष्‍ट है। हमें मध्‍यप्रदेश के सभी प्रमुख पर्यटन स्‍थलों को विश्‍वस्‍तरीय पहचान दिलानी है। राज्य सरकार ने इस दौरान पर्यटन को बढ़ावा देने के लिये नवाचारों को प्राथमिकता दी है। उन्‍होंने कहा कि इन नवाचारों में विशेषकर वन प्रक्षेत्रों में पर्यटन सुविधाओं को सरल और सहज तरीके से उपलब्ध कराने की पहल की गई और अन्‍य पर्यटन स्थलों के संरक्षण और संवर्धन को प्राथमिकता दी गई। जो कार्य लम्‍बे समय से अधूरे थे ऐसे सभी अधोसरंचना संबंधी विकास कार्यों को तेजी से पूर्ण कराने पर ध्यान केन्द्रित किया गया। प्रदेश के नगरों, महानगरों के साथ देश और विदेशों में रोड-शो कर निवेशकों को प्रदेश में निवेश के लिये प्रोत्साहित किया गया। इससे पर्यटन के क्षेत्र में रोजगार के नये अवसर निर्मित हुए और राजस्व में भी बढ़ोतरी का सिलसिला शुरू हुआ है ।   ये रहे बड़े निर्णय पर्यटन मंत्री बघेल ने बताया कि  पिछले एक साल में निवेशकों के लिये व्यापक, सरल एवं पारदर्शी पर्यटन नीतियाँ बनाई गईं। इंदौर, भोपाल, ग्वालियर और जबलपुर महानगर से प्रदेश के पर्यटन स्थलों के लिये हेलीकाप्टर सुविधा शीघ्र शुरू करने का निर्णय लिया गया है । साथ में राज्य सरकार की नवाचारी पर्यटन नीति के तहत हॉट एयर बैलून, वाइल्ड लाइफ रिसोर्ट, मेगा एवं अल्ट्रा परियोजनाओं के लिये आकर्षण अनुदान और रियायतें दी गईं।   इसके आलावा अनूसचित जाति एवं जनजातीय उद्यमियों को और दूरस्थ तथा दुर्गम क्षेत्रों में स्थापित की जानेवाली पर्यटन परियोजनाओं के लिये 5 प्रतिशत अतिरिक्त लागत पूँजी अनुदान दिये जाने का प्रावधान किया गया। प्रदेश में तीन नये फूड क्राफ्ट इंस्टीट्यूट की स्थापना करने का निर्णय लिया गया। उन्‍होंने कहा कि प्रदेश में आनेवाले पर्यटकों को ग्रामीण अनुभव प्रदान करने के लिए पर्यटन स्थलों के समीप चयनित ग्रामों में ग्रामीण पर्यटन को बढ़ावा देने का फैसला हुआ। ऐसे ही अन्‍य तमाम बड़े निर्णय पिछले एक साल के दौरान हमारी सरकार द्वारा लिए गए हैं। जिसके परिणाम स्‍वरूप आप देख सकते हैं कि मध्‍यप्रदेश को इस साल राष्ट्रीय स्तर पर 16 पुरस्कार हासिल हुए हैं।   प्रदेश में बढ़ते पर्यटन विकास को लेकर मंत्री बघेल का यह भी कहना था कि उन्‍हें प्रदेश में पर्यटन विकास को लेकर केंद्र का पूरा सहयोग मिल रहा है । हमारे लिए यह सुखद है मध्‍य प्रदेश से ही केंद्र में संस्कृति एवं पर्यटन राज्य मंत्री (स्वंतत्र प्रभार) श्री प्रहलाद पटेल हैं। ये उनका भी प्रदेश है, इसलिए वे हमारी कही बातों को गंभीरता से लेते हैं ।    बड़ी योजनाओं पर कार्य शुरू करने के साथ राज्‍यों में किए जा रहे रोड शो मप्र में बढ़ते पर्यटन विकास को लेकर वहीं आयुक्त मध्यप्रदेश पर्यटन बोर्ड तथा प्रबंध संचालक एवं मध्यप्रदेश पर्यटन विकास निगम के सचिव फैज अहमद किदवई ने हिस से कहा कि पिछले एक साल में जो बड़े इस दिशा के गिने तो क्षेत्रीय यूनिट ओरछा, खजुराहो एवं भोपाल को डेस्टिनेशन वेडिंग फेसिलिटी के रूप में विकसित किया गया है। खजुराहो के पास कुटनी डेम में 10 नवीन कमरों, मणिखेड़ा डेम पर 8 कमरों और किला कोठी चंदेरी में 6 कमरों के होटल बनाये गये। बुद्धिस्ट साइट देउरकोठार भरहुत एवं साँची के समीप विकास कार्य किये गये हैं, इसके कारण से विदेशी पर्यटकों एवं भारतीय पर्यटकों की संख्‍या में वृद्धि हुई है। फैज अहमद किदवई ने बताया कि 12 प्रमुख शहरों में पिछले एक वर्ष में ट्रेवल एजेन्ट और टूर ऑपरेटर प्रशिक्षण कार्यक्रम 'एम.पी.एक्सपर्ट' और राष्ट्रीय स्तर पर तथा विभिन्न राज्यों में रोड शो किये गये। इसके अलावा, 14 पर्यटन परियोजनाओं की स्थापना पर 17 करोड़ 69 लाख रुपये पूँजीगत अनुदान दिया गया। फलस्वरूप एक वर्ष में 136 करोड़ का पूँजी निवेश हुआ, जिससे होटलों में 543 कमरों का निर्माण हुआ। इस काम में लगभग 2050 लोगों को रोजगार मिला है ।   अधिक से अधिक युवाओं को पर्यटन से जोड़ने का प्रयास जारी युवाओं को पर्यटन के क्षेत्र से जोड़ने के लिये सचिव फैज अहमद किदवई ने बताया कि पर्यटन निगम प्रतिष्ठित समूहों के माध्यम से प्रशिक्षण दिलाने का निर्णय ले चुका है । ब्राण्डेड होटल प्रोत्साहन नीति, फॉर्म स्टे, ग्राम स्टे योजना (पंजीयन एवं विनियमन) योजना-2019 बनाई गई है । फिल्म पर्यटन नीति भी शीघ्र बनाई जा रही है। वर्तमान में प्रदेश के पर्यटन स्थलों में लगभग 6-7 फिल्म वेब सीरीज की शूटिंग पूरी हो चुकी है और कई की शूटिंग चल रही है। इस वर्ष पर्यटन विभाग द्वारा एम.पी. इंस्टीट्यूट ऑफ हॉस्पिटलिटी में ट्रेवल्स एण्ड टूरिज्म स्टडीज विषय का बीबीए कोर्स प्रारंभ किया गया।   इसी तरह से जल-पर्यटन के लिये अधिसूचित जल-क्षेत्रों में जल क्रीड़ा गतिविधियों के संचालन के लिये 15 अभिस्वीकृति-पत्र एवं लायसेंस जारी किये गये। इस वर्ष पर्यटन क्विज में प्रदेश के सर्वाधिक 8000 स्कूलों के 24 हजार छात्र-छात्राओं ने भाग लिया। उन्‍होंने इस दौरान यह भी बताया कि प्रदेश के 11 प्रमुख जिलों एवं अन्‍य पर्यटन स्थलों में समृद्ध विरासत, प्राकृतिक सुन्दरता, इतिहास, परम्पराओं, ऐतिहासिक धरोहरों से परिचय कराने के लिए प्रचार-प्रसार से संबंधित अब तक वॉक फेस्टिवल-2019 किये गये हैं। जिनके कि आज सकारात्‍मक परिणाम प्रत्‍यक्ष सामने दिखाई दे रहे हैं ।

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Dakhal News 20 January 2020

जबलपुर। भारतीय जनता पार्टी के कार्यकारी राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा को पार्टी हाईकमान द्वारा सोमवार को राष्ट्रीय अध्यक्ष बनाने की घोषणा कर दी है। इसके बाद मध्यप्रदेश के जबलपुर स्थित जेपी नड्डा के ससुराल में जश्न का माहौल है। उनकी सास जयश्री बनर्जी ने उन्हें बधाई दी है। भाजपा से पूर्व सांसद रही जेपी नड्डा की सास जयश्री बनर्जी ने मीडिया से बात करते हुए कहा कि भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष बनने पर उन्होंने अपने दामाद को बधाई दी है। उन्होंने कहा है कि यह जबलपुर के लिए गौरव की बात है। उन्होंने बताया कि आगामी 24 जनवरी को उनके नाती की शादी हो रही है, जिसमें शामिल होने के लिए उनके दामाद जबलपुर आ रहे हैं। यह राष्ट्रीय अध्यक्ष बनने के बाद उनका पहला जबलपुर आगमन होगा। इस दौरान उनका भव्य स्वागत किया जाएगा। 

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Dakhal News 20 January 2020

राजनीति

भोपाल। मध्य प्रदेश के राजगढ़ में सीएए समर्थन रैली के दौरान भाजपा कार्यकर्ता को कलेक्टर द्वारा थप्पड़ मारने और कार्यकर्ताओं पर पुलिस लाठीचार्ज के बाद राजनीति गर्मा गई है। विपक्ष में बैठी भाजपा घटना के बाद भडक़ गई है और विरोध जता रही है। पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने पूरे घटनाक्रम को निंदनीय बताते हुए प्रशासन को चेतावनी दी है।    शिवराज ने सोमवार सुबह एक के बाद एक लगातार कई ट्वीट कर शासन और प्रशासन पर हमला बेाला है। शिवराज ने अपने ट्वीट में लिखा ‘राजगढ़ की घटना पर राजगढ़ की घटना से मैं स्तब्ध हूँ! हाथों में तिरंगा झंडा लिये, 'भारत माता की जय' और 'वंदेमातरम' के नारे लगा रहे लोगों के साथ ऐसी बर्बरता की जायेगी, इसकी मैंने कल्पना भी नहीं की थी। यह मध्यप्रदेश में क्या हो रहा है? एक तरफ तो कांग्रेस सरकार के नेता मंत्री ही संसद द्वारा बनाये गये कानून के विरोध में प्रदर्शन करते हैं और अगर हज़ारों लोग इसके समर्थन में बाहर निकलें तो उन्हें पीटा जाता है! मैं किसी भी कीमत पर इस तरह की घटना बर्दाश्त नहीं कर सकता। मैं 22 जनवरी को राजगढ़ आकर वहाँ के निरपराध लोगों के साथ प्रशासन द्वारा की गई बर्बरता के खिलाफ प्रदर्शन करूंगा।    कमलनाथ सरकार पर निशाना साधते हुए शिवराज ने कहा कि ‘राजगढ़ का यह कृत्य कांग्रेस सरकार के ताबूत में आखिरी कील साबित होगा! इसके खिलाफ हम एक विशाल जनांदोलन खड़ा करेंगे! हम कलेक्टर के खिलाफ एफआईआर दर्ज करायेंगे और अगर एफआईआर दर्ज नहीं की गई, तो कोर्ट भी जायेंगे’!  

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Dakhal News 20 January 2020

इंदौर। प्रदेश के खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति मंत्री प्रद्युमन सिंह तोमर सोमवार को अपने इंदौर प्रवास के दौरान यहां वेयर हाउस का निरीक्षण करने पहुंचे। इस दौरान वेयर हाउस के आसपास गंदगी देख खाद्य मंत्री भडक़ गए और मौके पर मौजूद अधिकारियों को जमकर फटकार लगाई। इसके बाद उन्होंन नगर निगम के अधिकारियों को बुलाकर वहां सफाई करवाई। इस दौरान उन्होंने खुद भी फावड़ा उठाकर सफाई की।  दरअसल, खाद्य मंत्री सरकारी खाद्यान्य का निरीक्षण करने वेयर हाउस पहुंचे थे, लेकिन वहां गंदगी देख उन्होंने न केवल अधिकारियों को फटकार लगाई, बल्कि खुद ही फावड़ा लेकर सफाई करने के लिए मैदान में उतर गए। उन्होंने वेयर हाउस से सटे नाले से गंदगी निकाली और एक जगह एकत्रित की। इसके बाद उन्होंने नगर निगम के अधिकारियों को कचरा उठाने के निर्देश दिए। खाद्य मंत्री ने वेयर हाउस में मौजूद अधिकारियों फटकार लगाते हुए कहा कि जिस तरह हम अपने घरों को साफ सुथरा रखते हैं, उसी तरह अपने कार्यस्थल की सफाई रखना हमारा कर्तव्य है।

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Dakhal News 20 January 2020

मीडिया

भोपाल। जनसम्पर्क मंत्री पी.सी. शर्मा माधवराव सप्रे स्मृति समाचार-पत्र संग्रहालय एवं शोध संस्थान के राज्य-स्तरीय पत्रकारिता पुरस्कार समारोह में शमिल हुए। पूर्व केन्द्रीय मंत्री श्री सुरेश पचौरी ने कार्यक्रम की अध्यक्षता की। समारोह में मध्यप्रदेश और छत्तीसगढ़ राज्य के पत्रकारिता की विभिन्न विधाओं के पत्रकारों को सम्मानित किया गया।  मंत्री श्री शर्मा ने कहा कि सोशल मीडिया से जुड़े पत्रकारों को सम्मानित किया जाना चाहिये। यह वर्तमान और भविष्य में समाचार जगत को मजबूत बनाने के लिये जरूरी है। उन्होंने सप्रे संग्रहालय द्वारा पत्रकारिता के इतिहास को संजोए रखने की दिशा में किये जा रहे कार्यों की सराहना की। श्री शर्मा ने संग्रहालय को डिजिटाइजेशन के लिए सहयोग स्वरूप 5 लाख रुपये देने की घोषणा की। पूर्व केन्द्रीय मंत्री श्री सुरेश पचौरी ने कहा कि सप्रे संग्रहालय की पूरी यात्रा संघर्षपूर्ण रही। इस संस्था ने देश भर में अपनी पहचान बनाई है। उन्होंने कहा कि जिन्हें पुरस्कार मिले हैं, नि:संदेह उनके कार्यों से समाज लाभान्वित हो रहा है। जिन विभूतियों की स्मृति में पुरस्कारों की स्थापना की गई है, उनके कार्य भी नई पीढ़ी को प्रेरणा देते हैं। संग्रहालय के संस्थापक-संयोजक श्री विजयदत्त श्रीधर ने संस्था की गतिविधियों की जानकारी दी। सम्मानित व्यक्तित्व पत्रकारिता की शिक्षा में दीर्घ योगदान के लिए माखनलाल चतुर्वेदी पत्रकारिता विश्वविद्यालय के कुलाधिसचिव डा. श्रीकांत सिंह को सम्मानित किया गया। वरिष्ठ पत्रकार कमाल खान कमाल, रमेश तिवारी, सर्वदमन पाठक, महेश दीक्षित और मुकुन्द प्रसाद मिश्र को  'हुक्मचंद नारद पुरस्कार’ प्रदान  किया गया। संतोष कुमार शुक्ल लोक संप्रेषण पुरस्कार - अखिल कुमार नामदेव,माखनलाल चतुर्वेदी पुरस्कार - पंकज मुकाती, लाल बलदेव सिंह पुरस्कार -  रश्मि खरे, जगदीश प्रसाद चतुर्वेदी पुरस्कार -  विकास वर्मा, झाबरमल्ल शर्मा पुरस्कार-  संजीव कुमार शर्मा, रामेश्वर गुरु पुरस्कार- महेश सोनी, के.पी. नारायणन पुरस्कार- डा. ऋतु पाण्डेय शर्मा, राजेन्द्र नूतन पुरस्कार- विनोद त्रिपाठी, गंगाप्रसाद ठाकुर पुरस्कार-आसिफ इकबाल (रायपुर), जगत पाठक पुरस्कार -  सुशील पाण्डेय, सुरेश खरे पुरस्कार-  कृष्णमोहन झा, आरोग्य सुधा पुरस्कार-पुष्पेन्द्र सिंह तथा होमई व्यारावाला पुरस्कार- होमेन्द्र सुन्दर देशमुख को प्रदान किया गया।x

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Dakhal News 19 January 2020

केंद्र सरकार ने जम्मू-कश्मीर में केबल टेलिविजन ऑपरेटरों को मुस्लिम देशों के प्राइवेट चैनलों को दिखाने को लेकर चेतावनी जारी की है. इन मुस्लिम देशों में पाकिस्तान, तुर्की और मलेशिया के अलावा ईरान भी शामिल है.5 अगस्त को भारत सरकार ने जब जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 खत्म करने का फैसला किया तो पाकिस्तान के साथ-साथ मलेशिया और तुर्की ने भी विरोध जताया था. हालांकि, सऊदी अरब, यूएई और ईरान ने कश्मीर मुद्दे पर भारत के फैसले पर कोई आपत्ति नहीं जताई थी.सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय द्वारा जारी एडवाइजरी  में केबल टीवी ऑपरेटरों को केबल टीवी नियमों के तहत उनके दायित्वों को याद दिलाया गया है.इस नोट में कहा गया है कि मंत्रालय के संज्ञान में आया है कि कुछ केबल ऑपरेटर अपने नेटवर्क पर मंत्रालय की प्रकाशित सूची से बाहर निजी चैनलों का प्रसारण कर रहे हैं. यह स्पष्ट तौर पर केबल टीवी रूल्स के उपनियम 6 (6) का उल्लंघन है और इस पर तुरंत कार्रवाई किए जाने की जरूरत है. बता दें कि सूचना प्रसारण मंत्रालय ने 500 से ज्यादा चैनल को मान्यता दी हुई है.एडवाइजरी पर सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय के संयुक्त सचिव विक्रम सहाय के हस्ताक्षर हैं. एडवाइजरी में केबल टीवी ऑपरेटरों को चेतावनी दी गई है कि अगर वे नियमों का उल्लंघन करते हैं तो उनका लाइसेंस रद्द किया जा सकता है और उनके उपकरण जब्त किए जा सकते हैं. सहाय हाल ही में केबल टीवी ऑपरेटरों के साथ बैठक करने के लिए श्रीनगर पहुंचे थे.बैठक में शामिल हुए एक केबल ऑपरेटर ने बताया, अधिकारियों ने बैठक में कहा कि ईरान, तुर्की, मलेशिया और पाकिस्तान के सभी चैनलों को ब्लॉक किया जाना चाहिए.सूचना प्रसारण मंत्रालय के अधिकारियों को ऑपरेटरों ने बताया कि वे ईरान आधारित सहर चैनल और सऊदी अरब के अल-अरबिया चैनल का प्रसारण कर रहे हैं. कश्मीर की ज्यादातर आबादी के बीच इन चैनलों के कार्यक्रम लोकप्रिय हैं. शिया समुदाय के लोग इन चैनलों को धार्मिक कार्यक्रमों की वजह से बड़ी दिलचस्पी के साथ देखते हैं.मंत्रालय के एक अधिकारी ने ईटी से बताया, इंटरनेट बैन होने की वजह से ईरान, तुर्की, सऊदी अरब, मलेशिया और पाकिस्तान के कई धार्मिक चैनल स्थानीय केबल ऑपरेटरों के जरिए कश्मीर के टीवी सेट में जगह बना रहे थे. इसके बारे में हमें अलर्ट किया गया जिसके बाद हमने इस पर लगाम कसने का फैसला लिया 

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Dakhal News 19 November 2019

समाज

भोपाल। भोपाल में सोमवार सुबह से मौसम का मिजाज कुछ बदला हुआ है, धूप खिलने से लोगों को राहत मिली। मौसम विभाग के अनुसार, आज एक पश्चिमी विक्षोभ के उत्तर भारत में  हिमालय से आ रही सर्द हवाओं के कारण राजधानी समेत मध्य प्रदेश के अधिकांश भागों के न्यूनतम तापमान में गिरावट दर्ज हुई और ठंड के तेवर तीखे बने रहे। राजधानी भोपाल में चल रही शीतलहर का असर यातायात पर भीदेखा गया। आज सुबह यहां धूप खिली, लेकिन वातावरण में सर्द हवाएं सिहरन पैदा कर रही हैं। मौसम विभाग के अनुसार, रविवार को न्यूनतम तापमानसीहोर 3.7, बैतूल 5.2, भोपाल 6.4, दतिया 7.7, धार 5.7, गुना 8.2, ग्वालियर 6.8, इंदौर 8.8, खंडवा 8.4, खरगौन 6.8, पचमढ़ी 4.8, रायसेन 5.0, राजगढ़ 8.2, रतलाम 6.4, शाजापुर 7.2, उज्जैन 6.4, छिंदवाड़ा 9.6, दमोह 6.8, जबलपुर 7.6, खजुराहो 7.0, मंडला 8.0, नौगांव 7,0, रीवा 5.6, सागर 8.4, सतना 7.6, सीधी 7.9, सिवनी 8.0, टीकमगढ़ 6.4, उमरिया 5.0 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। यहां 10 डिग्री रहा न्यूनतम तापमान: होशंगाबाद 10.4, नरसिंहपुर 10.0, श्योपुर 10.2 डिग्री सेल्सियस रिकॉर्ड किया गया।राजधानी भोपाल में सोमवार सुबह से मौसम का मिजाज कुछ बदला हुआ है। धूप खिलने से लोगों को राहत मिली है। लेकिन, ठंडी हवाएं सिहरन पैदा कर रही है। मौसम विभाग के अनुसार, आज एक पश्चिमी विक्षोभ के उत्तर भारत में प्रवेश करने से हवाओं का रूख बदलेगा। वातावरण में नमी आने से आसमान में बादल छा जाएंगे। इससे रात के तापमान में बढोत्तरी होगी और लोगों को ठंड से कुछ राहत मिलेगी। 22 जनवरी को कई इलाकों हो सकती है बारिश मौसम विज्ञान केंद्र के मौसम विज्ञानी पीके साहा ने बताया कि हवा का रुख लगातार उत्तरी बना हुआ है। करीब 15 किमी प्रति घंटा की रफ्तार से सर्द हवाओं के चलने के कारण प्रदेश में ठंड के तेवर तीखे बने हुए हैं। साहा के मुताबिक सोमवार को एक पश्चिमी विक्षोभ उत्तर भारत में दाखिल होगा। उसके प्रभाव से हवाओं का रुख बदलेगा। वातावरण में नमी आने से बादल छाने लगेंगे। इससे रात के तापमान में इजाफा होने लगेगा और ठंड से राहत मिलेगी। 22 जनवरी को राजधानी सहित प्रदेश में कई स्थानों पर गरज-चमक के साथ बौछारें भी पड़ सकती है।    

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Dakhal News 20 January 2020

भोपाल। मध्य प्रदेश में ठंड का कहर जारी है। प्रदेश भर में घने कोहरे के साथ ही कड़ाके की ठंड पड़ रही है। राजधानी भोपाल में रविवार दोपहर तक आसमान में बादल छाए रहे। सुबह के समय हल्की बारिश की बौछारे भी गिरी। बादल छाने से मौसम में ठंडक महसूर की गई। हालांकि दोपहर बाद आसमान साफ हो गया और धूप निकल आई लेकिन ठंड का असर बरकरार रहा। इसके अलावा मध्य प्रदेश के कई जिलों में मौसम शुष्क रहा। शुष्क मौसम के बीच सुबह के समय उत्तर-पश्चिमी मध्य प्रदेश में घना कोहरा देखने को मिला। वरिष्ठ मौसम वैज्ञानिक पीके साहा के मुताबिक पूर्वी मध्य प्रदेश में एक-दो स्थानों पर गर्जना के साथ हल्की बारिश हो सकती है। अनुमान है कि सीधी, शहडोल और अनूपपुर जैसे स्थानों पर बारिश देखने को मिलेगी। यह स्थितियाँ अगले 24 घंटों तक रहेंगी उसके बाद मौसम बदल जाएगा और सभी जगहों पर शुष्क मौसम देखने को मिलेगा। हालांकि बारिश में यह ब्रेक 24 घंटों का ही है क्योंकि इसके बाद मध्य प्रदेश के मध्य भागों में 21 जनवरी को एक चक्रवाती सिस्टम विकसित होने की उम्मीद है। यह प्रणाली पूर्वी मध्य प्रदेश के कई हिस्सों में हल्की से मध्यम बारिश दे सकता है। बारिश की गतिविधियां इन भागों में 22 जनवरी तक बनी रह सकती हैं। बारिश के साथ एक-दो स्थानों पर ओलावृष्टि की भी संभावना है। सागर, दमोह, कटनी, जबलपुर, उमरिया, सतना, सीधी, शहडोल, अनूपपुर, नरसिंहपुर जैसे स्थानों पर बारिश और ओलावृष्टि का सबसे अधिक प्रभाव देखने को मिल सकता है। सर्दियों की यह बारिश मौसम साफ होने के बाद मध्य प्रदेश में सुबह के समय मध्यम से घने कोहरे का कारण भी बन सकती है।  

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Dakhal News 19 January 2020

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मुंबई। निर्माता-निर्देशक करण जौहर और साउथ फिल्मों के मशहूर निर्देशक पुरी जगन्नाथ ने हाथ मिला लिया है।दोनों ने सोमवार से नई फिल्म पर मुंबई में काम भी शुरू कर दिया है। फिल्म में विजय देवकोंडा मुख्य भूमिका में होंगे, लेकिन फिल्म का टाइटल अभी तय नहीं हुआ है।   सोमवार को फिल्म समीक्षक तरण आदर्श ने सोशल मीडिया पर बताया कि करण जौहर और पुरी जगन्नाथ ने हाथ मिला लिया है। दोनों ने मिलकर नई फिल्म पर काम करना शुरू कर दिया है।फिल्म की शूटिंग मुंबई में आज से शुरू हो गई है। अभिनेता विजय देवकोंडा मुख्य भूमिका में होंगे, वह इस फिल्म के लिए मार्शल आर्ट की ट्रेनिंग भी लेंगे। फिल्म एक्शन से भरपूर होगी। तरण अदर्श के अनुसार फिल्म को पुरी जगन्नाथ,चार्मी कौर, करण जौहर और अपूर्व मेहता संयुक्त रूप से प्रोड्यूस करेंगे।फिल्म में विजय देवकोंडा के अलावा अभिनेत्री रम्या कृष्णन और रोनित रॉय भी अहम भूमिका में होंगे। यह फिल्म हिन्दी और सभी दक्षिण भारतीय भाषाओँ में प्रदर्शित की जाएगी।

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Dakhal News 20 January 2020

मुंबई। अमिताभ बच्चन की आगामी फिल्म ‘झुंड’  का फर्स्ट लुक सोमवार को जारी हो गया है। फिल्म में अमिताभ बच्चन के अलावा रिंकू राजगुरु, आकाश ठोसर अहम भूमिका में हैं।फिल्म के फर्स्ट लुक को महानायक अमिताभ बच्चन ने भी ट्विटर पर शेयर किया है।अमिताभ ने लिखा-'झुंड' !!   फिल्म के इस फर्स्ट लुक में अमिताभ का चेहरा नहीं दिख रहा हैं। वह बैक साइड खड़े हैं। इस फर्स्ट लुक में वह ब्लू रंग की हुडी और जींस पहने हुए दिखाई दे रहे हैं। उनके सामने बॉउंड्री   के पास एक फुटबॉल हैं और बॉउंड्री की दूसरी तरफ झुग्गी  बस्तियां हैं,जिसे वह देख रहे हैं।  फिल्म के इस  फर्स्ट लुक को निर्माता भूषण कुमार ने सोशल मीडिया पर शेयर किया हैं। भूषण ने लिखा-'हमारे सबसे अच्छी परियोजनाओं में से एक 'झुंड' का फर्स्ट लुक प्रस्तुत करने में हमें गर्व हो रहा हैं। फिल्म का टीजर 21 जनवरी को जारी किया जायेगा।   'झुंड' में मुख्य भूमिका निभा रहे अमिताभ बच्चन टीचर की भूमिका में हैं। फिल्म का टीजर कल यानी मंगलवार को जारी होगा। यह फिल्म नागपुर के एक रिटायर्ड स्पोर्ट्स टीचर के जीवन पर आधारित फिल्म है। उन्होंने 2001 में 'स्लम सॉकर्स' नामक एक एनजीओ की स्थापना की थी। इस एनजीओ का उद्देश्य झुग्गी-झोपड़ियों में रह रहे  बच्चों को ट्रेनिंग देकर उन्हें फुलबाल खेलने के लिए प्रेरित करना है। फिल्म 'झुंड' का निर्देशन मराठी फिल्मों के निर्देशक नागराज मंजुले कर रहे हैं।‘झुंड' नागराज मंजुले की पहली हिंदी फिल्म हैं। इस फिल्म को भूषण कुमार,सविता राज हीरेमठ और नागराज मंजुले संयुक्त रूप से प्रोड्यूस कर रहे हैं।

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Dakhal News 20 January 2020

दखल क्यों

डॉ. रमेश ठाकुर   संघ प्रमुख मोहन भागवत ने जिस सामाजिक समस्या पर अपनी चिंता व्यक्त की, उसे सियासी चश्मे से देखने की बजाय उसपर मंथन की आवश्यकता है। गज भर जमीने के लिए एक-दूसरे के कत्ल होंगे, रोटी पर झपटमारी होगी, लोग अपने हकों के लिए एक-दूसरे के खून के प्यासे होंगे? ऐसी स्थिति सामने खड़ी है। सड़कें खचाखच भरी हैं, पार्किंग फुल हैं, घरों के आंगन सिमट गए हैं, आवासीय जगहों के कम होने से फ्लैट सिस्टम वर्षों से शुरू है, बावजूद इसके जनसंख्या की विकराल होती समस्या पर ज्यादा चिंतन नहीं हो रहा। उपरोक्त सभी समस्याओं को कायदे से देखें तो हर समस्या की जड़ बढ़ती जनसंख्या ही है। इसलिए इस विस्फोट को रोकना निहायत जरूरी है। इसमें भला किसी एक वर्ग या एक समुदाय का नहीं, बल्कि सामूहिक रूप से सभी का है। इस मुद्दे को जबरन सियासी मसला बनाया जा रहा है।   जनसंख्या विस्फोट ने हर किसी को बुरी तरह से प्रभावित किया है। पढ़ा-लिखा हिंदू-मुसलमान, सिख-ईसाई सभी समर्थन में हैं कि इसपर मुकम्मल प्रयास होने चाहिए। इसी दिशा में आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत ने भी अपनी चिंता जताई। लेकिन उनके बयान पर बेवजह की बहस छिड़ी हुई है। समूचा हिंदुस्तान जनसंख्या विस्फोट का भुगतभोगी होता जा रहा है। रेल, सड़क, बाजार, सार्वजनिक स्थान लोगों से खचाखच भरे हैं। नौकरियां, मौके, संसाधन सिमटते जा रहे हैं। नौबत ऐसी आ गई है कि चपरासी की वैकेंसी के लिए पीएचडी जैसे उच्च शिक्षा प्राप्त युवा भी एप्लाई कर रहे हैं। ऐसी स्थिति को देखते हुए जनसंख्या नियंत्रण निहायत जरूरी है। चिंता की बात है कि आज ऐसी स्थिति है तो आने वाले वक्त में क्या होगा? दो बच्चे पैदा करने की नीति का हमें अनुपालन करना ही होगा, अगर सरकार इस दिशा में कोई कदम उठाती है तो उसका सामूहिक रूप से सभी भारतीयों को समर्थन करना चाहिए।   इस समय देश की सबसे बड़ी समस्या बेरोजगारी है। बेरोजगारी के कारण युवा शक्ति लगातार तनाव की तरफ बढ़ रही है। कुछ गलत रास्तों पर भी चलते हैं। एनसीआरबी के ताजा आंकड़े इस बात की तस्दीक करते हैं। हर तरह के अपराधों में युवाओं की संख्या बढ़ती जा रही है जिसमें ब्लैकमेलिंग, लूट-चोरी, रंगबाजी आदि कृत्य शामिल हैं। केंद्र सरकार हो या राज्य सरकारें जब भी किसी बड़े मसले पर लगाम लगाने की सुगबुगाहट होती है तो उससे लागू होने से पहले ही विरोध शुरू हो जाता है। कोई कानून या नीति बनने से पहले ही दुष्प्रचार शुरू हो जाता है। जनसंस्खा नियंत्रण काननू को लेकर भी हवा बननी शुरू हो गई है। दरअसल, बढ़ती जनसंख्या के नियंत्रण की मांग पर किसी एक वर्ग विशेष की नहीं, बल्कि हर वर्ग की सहमति है। लेकिन इसकी सुगबुगाहट से पहले ही उसे सियासी भट्टी में झोंका जा रहा है। देश का हर वर्ग सहूलियतें, सामान अधिकार, घरों की छत और रोजगार चाहता है। पर इनके स्थान पर उनके हिस्से सिर्फ परेशानियां ही आती हैं।   देश में विगत कुछ दशकों से तेजी से बढ़ी जनसंख्या ने रोजगार, शिक्षा व जरूरतों को सीमित कर दिया है। दूसरे देशों के मुकाबले हम जनसंख्या वृद्धि में अभी दसवें पायदान पर हैं। भारत के अलावा इथियोपिया-तंजानिया, संयुक्त राष्ट्र, चीन, नाइजीरिया, कांगो, पाकिस्तान, युगांडा, इंडोनेशिया व मिस्र ऐसे मुल्क हैं जहां स्थिति कमोबेश हमारे जैसी ही है। लेकिन इन कई देशों में जनसंख्या वृद्धि को रोकने के लिए कानून अमल में आ चुके हैं। कई देशों में दो से ज्यादा बच्चे पैदा करने पर सरकारी सुविधाओं से वंचित करने का फरमान है।   भारत की आबादी अगले एक दशक में 1.5 बिलियन हो जाने का अनुमान है। आजादी के समय देश की जनसंख्या मात्र 34 करोड़ थी लेकिन बीते सत्तर सालों में बढ़कर डेढ़ सौ करोड़ के आसपास पहुंच गई। जनगणना 2011 के मुताबिक भारत की आबादी 121.5 करोड़ थी जिनमें 62.31 करोड़ पुरुष और 58.47 करोड़ महिलाएं शामिल थीं। अगले वर्ष नया आकंड़ा आएगा, उससे पता चलेगा हम कहां पहुंच चुके हैं। सर्वाधिक जनसंख्या उत्तर प्रदेश में है जहां कुल आबादी 19.98 करोड़ है। सबसे कम जनसंख्या वाला राज्य सिक्किम है जहां की आबादी मात्र 6 लाख है। बढ़ती जनसंख्या पर कायदे से गौर करें तो रोंगटे खड़े हो जाएंगे।   आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत के जनसंख्या नियंत्रण पर दिए बयान को अगर सियासी चश्मे से न देखकर सामाजिक लिहाज से देखें तो कई बातें साफ हो जाती हैं। इस मसले पर जितने दूसरे वर्ग चिंतित हैंं, उतने ही अल्पसंख्यक भी। यह दुष्प्रचार मात्र है कि अल्पसंख्यक जनसंख्या नियंत्रण कानून के खिलाफ हैं। वे भी भविष्य के खतरों से वाकिफ हैं। अभी हाल ही में संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट आई थी जिसमें बताया गया था कि हिंदुस्तान में जिस तेज गति से जनसंख्या बढ़ रही है उससे 2024 तक चीन को भी पीछे छोड़ देगा। इस लिहाज से अगले पचास वर्ष बाद हिंदुस्तान समूची दुनिया में जनसंख्या में सबसे बड़ा मुल्क हो जाएगा। इसलिए इस विकराल होती समस्या पर गंभीरता से विचार करने की आवश्यकता है।   (लेखक स्वतंत्र टिप्पणीकार हैं।)

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Dakhal News 20 January 2020

डॉ. अजय खेमरिया   भारत के सर्वोच्च न्यायालय ने इंटरनेट की निर्बाध उपयोगिता को मौलिक अधिकार के समकक्ष दर्जा देते हुए जम्मू-कश्मीर में इसकी बहाली के लिये सरकार को निर्देशित किया है। संविधान के अनुच्छेद 19 (1) (अ) में अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का प्रावधान है और कोर्ट ने इंटरनेट की निर्बाध उपयोगिता को इसी आलोक में रेखांकित किया है। सुप्रीम कोर्ट के इस निर्णय के साथ ही यह बहस तेज हो गयी है कि क्या इंटरनेट की आजादी पर कोई युक्तियुक्त पाबंदी मुल्क की सुरक्षा या सामाजिक सरोकारों की जमीन पर संभव है या नहीं? क्या नागरिक आजादी का नागरिक व्यवस्था के साथ किसी तरह का जवाबदेह युग्म होना चाहिये अथवा नहीं? भारत का संविधान उन्मुक्त और स्वच्छन्दता के साथ नागरिक आजादी की व्यवस्था नहीं देता है वह इस पर युक्तियुक्त निर्बन्धन का पक्षधर है। लेकिन हकीकत की जमीन पर पिछले 72 साल में अनुच्छेद 19 की व्याख्या बगैर जवाबदेही के ही की गई है। इसके राष्ट्रीय तत्व को सुनियोजित तरीके से तिरोहित किया गया है। भारत तेरे टुकड़े होंगे या अफजल हम शर्मिंदा हैं जैसे अभिव्यक्ति के नारे, असल में अनुच्छेद 19 की उसी व्याख्या और संरक्षण पर खड़े हैं जो राष्ट्र राज्य की अवधारणा के विरुद्ध है। दुनिया के किसी भी लोकतंत्र में इस तरह की आजादी का उदाहरण हमें देखने को नहीं मिलता।   इसका सामाजिक पहलू भी गौर करने वाला है। संविधान के हर मौलिक अधिकार उसके नागरिकों के सर्वांगीण विकास के कारक के रूप में अधिमान्य किये गए हैं लेकिन इंटरनेट की सामाजिक उपयोगिता के विश्लेषणात्मक आंकड़े कुछ और ही कहानी कहते हैं। हाल ही में जारी एक वैश्विक रिपोर्ट में बताया गया है कि दुनिया में सबसे ज्यादा पोर्न देखने वालों में भारत नम्बर एक पर है। भारत में इस समय 450 मिलियन स्मार्टफोन यूजर हैं। 2019 में भारत के 89 फीसदी यूजर ने अपने स्मार्टफोन पर पोर्न मूवी देखी। 2017 में यह आंकड़ा 86 फीसदी था। मोबाइल हैंडसेट बनाने वाली कम्पनी एरिक्सन के अनुसार भारत में औसत 9.8 जीबी मासिक खपत स्मार्टफोन पर है और 2024 में यह बढ़कर 18 जीबी प्रति महीने होगी। अब सवाल यह है कि जब हमारा इंटरनेट उपयोग का संजाल इस बड़े पैमाने पर बढ़ रहा है तब इसकी सामाजिक उत्पादकीय क्षमताओं का मूल्यांकन होना चाहिये या नहीं? बेशक इंटरनेट ने लोकजीवन को सरलता और सुविधाओं के धरातल पर एक अकल्पनीय आयाम दिया है लेकिन इसके देय उपयोग को मूलाधिकारों के साथ जोड़ा जाना कुछ अतिशय आजादी की ओर इशारा करता है। हमारा लोकजीवन सदैव संयमित यौनाचार का हामी रहा है और एक आत्मकेंद्रित अनुशासन ने हजारों सालों से हमारे सामाजिक और पारिवारिक ताने-बाने को मर्यादित रखा है। सवाल यह है कि क्या सर्वसुलभ इंटरनेट की आजादी हमारी मर्यादित जीवन पद्धति को निगल नहीं रही है? निर्भया केस के अपराधी हों या हैदराबाद के दरिंदे, यौन हिंसा के बीज कहीं न कहीं इंटरनेट पर निर्बाध रूप से उपलब्ध पोर्नोग्राफी साइटों में ही नजर आते है। इंदौर के बाल सम्प्रेक्षण गृह में रह रहे दो नाबालिगों ने स्वीकार किया कि 14 वर्षीय बालिका के बलात्कार से पहले उन्होंने पोर्न मूवी अपने मोबाइल पर देखी थी। जाहिर है इंटरनेट की यह आजादी हमारे लोकाचार की मर्यादा को निगल रही है।   फ़ोर्ब्स पत्रिका के ताजा 100 भारतीय आइकॉन्स की लिस्ट में सनी लियॉन भी शामिल है क्योंकि उन्हें इस नेट ट्रैफिक में हमने सर्वाधिक खोजा है। 2019 में अमेरिका, इंग्लैंड, ब्राजील, फ्रांस जैसे देशों से भी हम भारतीय पोर्न देखने के मामले में आगे रहे हैं। सवाल यह भी है कि क्या 2013 की 40 फीसदी की पोर्न लत के 2019 में 86 फीसदी तक पहुँचने के साथ ही हमारी चेतना का स्वरूप समेकित रूप से विकृत तो नहीं हो रहा है। क्या हम एक कामांध समाज की चेतना का निर्माण कर रहे हैं। 2017 में जियो के आने के बाद स्मार्टफोन उपयोग को लेकर जिस तरह का वातावरण बना है, वह इस बात की चेतावनी भी है कि हमारे इंटरनेट उपभोग पर तार्किक बंधन भी आवश्यक है।   केंद्र सरकार ने पिछले सालों में करीब 400 पोर्न साइट्स पर प्रतिबंध लगाया है इसके बावजूद जिओ कम्पनी की हालिया रिपोर्ट बताती है कि इससे महज 200 एमबी डाटा की खपत स्मार्टफोन से घटी है। समझा जा सकता है कि हमारी सामूहिक चेतना किस तरफ उन्मुख है। इसलिये इंटरनेट की मौलिक आजादी का नियमन और नियंत्रण अत्यावश्यक है। केवल एक नागरिक की आजादी भर से यह जुड़ा हुआ सीमित महत्व का मामला नहीं है, ये समाज की सेहत का आधार भी है। जाहिर है इसे बोलने, घूमने, फिरने, रहने जैसी जीवनोपयोगी स्वतंत्रता के समानांतर नहीं रखा जा सकता है। एक सभ्य और सम्प्रभुता सम्पन्न राष्ट्र के अपने अंतर्निहित हित होते हैं जो सर्वोपरि है। अगर इंटरनेट की मौलिक स्वतंत्रता राष्ट्रीय राज्य की अवसंरचना या सुरक्षा में खलल पैदा करती है तो किसी भी संप्रभु राज को इसपर विचार करना होगा।   (लेखक स्वतंत्र टिप्पणीकार हैं।)

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Dakhal News 19 January 2020
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