विशेष

  अफगानिस्तान में अल्पसंख्यक शिया समुदाय के शिक्षण संस्थान पर बुधवार को आतंकी हमले में 48 की मौत हो गई और 67 अन्य घायल हो गए। मरने वालों में ज्यादातर किशोर छात्र-छात्राएं शामिल हैं। इससे आतंकियों ने देश के उत्तरी हिस्से में स्थित सेना की दो चौकियों पर हमला कर 9 पुलिसकर्मियों और 35 सैनिकों को मौत के घाट उतार दिया। राजधानी काबुल के पश्चिम में स्थित शिया अल्पसंख्यक समुदाय के शिक्षण संस्थान के विद्यार्थी अहाते में एक आत्मघाती हमलावर ने खुद को उड़ा लिया। यहां छात्र टेंट लगाकर विश्वविद्यालय की प्रवेश परीक्षा की पढ़ाई कर रहे थे। एक प्रत्यक्षदर्शी सैयद अली ने बताया कि मरने वाले अधिकांश छात्रों के चीथड़े उड़ गए। सिटी हास्पिटल के डॉक्टरों ने बताया कि कई पीड़ित बुरी तरह जल गए हैं। अस्पताल में मौजूद एक अन्य प्रत्यक्षदर्शी अब्दुल खालिक ने बताया कि उनका भाई भी वहां पढ़ता था। विस्फोट में उसकी भी मौत हो गई है। हालांकि अभी तक विस्फोट की जिम्मेदारी तो किसी समूह ने नहीं ली है, लेकिन शिया समुदाय पर किए जा रहे हमलों के इतिहास को देखते हुए लगता है कि इसे इस्लामिक स्टेट (आइएस) ने अंजाम दिया है। तालिबान ने धमाके से इन्कार किया है। इससे पहले बुधवार को ही उत्तरी अफगानिस्तान के बाघलान प्रांत स्थित सैन्य बेस पर किए गए हमले में 9 पुलिसकर्मियों और 35 सैनिकों की मौत हो गई है। बाघलान से सांसद दिलावर अयमाक ने हमले की पुष्टि करते हुए कहा कि एक सैन्य और एक पुलिस चौकी को निशाना बनाया गया था। तालिबान ने हमले की जिम्मेदारी ली है। अफगानिस्तान में संयुक्त राष्ट्र वरिष्ठ अधिकारी ताडामिची यामामोटा ने लड़ाई बंद करने की अपील की है।

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Dakhal News 16 August 2018

  केरल में लगातार हो रही बारिश से हाल बेहाल हो गए हैं। राज्य में बाढ़ के हालात हैं और नदियों का जलस्तर लगातार बढ़ता जा रहा है। मौसम विभाग ने अगले 24 घंटे में भारी बारिश की चेतावनी जारी की है। बारिश के कारण कोच्चि में एयरपोर्ट के बाद मेट्रो सेवा भी बंद कर दी गई है वहीं मुल्लारपेरियार डैम का जलस्तर लगातार बढ़ रहा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राज्य के मुख्यमंत्री पी विजयन से फोन पर बात करते हुए हालात का जायजा लिया है साथ ही मदद का आश्वासन दिया है। इसके अलावा उन्होंने रक्षा मंत्रालय को भी राहत कार्य तेज करने के लिए कहा है। राहुल गांधी ने भी ट्वीट कर लिखा है कि उन्होंने पीएम मोदी से इस मुद्दे पर बात कर सेना की मदद बढ़ाने की मांग की है। बारिश के कारण कोच्चि शहर में पानी घुस गया है वहीं आलापुजा के कोल्लाकवाडु में अचनकोइल नदी का जलस्तर बढ़ने से गावों में बाढ़ आ गई है। अब तक इस बारिश के कारण राज्य में 73 लोगों के मारे जाने की सूचना है। अकेले बुधवार को 24 लोगों की मौत हुई थी। बता दें कि केरल सदी की सबसे भीषण बाढ़ की चपेट में आ गया है। राज्य के सभी 14 जिलों में रेड अलर्ट घोषित किया गया है। राज्य में इससे पहले 1924 में बाढ़ से ऐसी ही तबाही मची थी। मुख्यमंत्री पिनरायी विजयन ने सचिवालय में आपात बैठक की। बैठक में केंद्र से नौसैनिक हवाई अड्डे पर छोटे विमान लैंड कराने की अनुमति मागने का फैसला लिया गया है। कोचीन हवाई अड्डे के प्रवक्ता ने कहा कि लगातार पानी बढ़ने के कारण शनिवार दो बजे दिन तक संचालन निलंबित रहेगा। अधिकारियों ने बुधवार को आने-जाने वाले विमानों को तिरुअनंतपुरम या कोझिकोड डायवर्ट कर दिया। नागरिक उड्डयन मंत्रालय ने राज्य का आग्रह मानते हुए केरल में अन्य हवाई अड्डों का इस्तेमाल करने की अनुमति दे दी है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राज्य के मुख्यमंत्री विजयन से बातचीत की है। उन्होंने केरल को हर संभव सहायता मुहैया कराने का भरोसा दिया है। नौसेना की 21 टीमें राहत एवं बचाव कार्य में जुटी हैं। नौसेना की टीम ने बाढ़ में फंसे 81 से ज्यादा लोगों को बचा लिया है। एनडीआरएफ की चार और टीमें भेजी गई हैं। इस दक्षिणी राज्य में एक सप्ताह पहले मौसम का रुख आक्रामक हो गया था। अधिकारियों को खतरनाक स्तर तक भर चुके 35 जलाशयों से पानी छोड़ने के लिए विवश होना पड़ा। बांध खोलने के कारण इसकी नदियों का बहाव तीव्र हो गया। मुख्यमंत्री ने कहा, \"राज्य के 35 जलाशयों से पानी छोड़ा जा रहा है। राज्य के कई जिले बाढ़ की चपेट में हैं।\" मौसम विभाग ने शनिवार तक राज्य में भारी बारिश होने की चेतावनी दी है। पिछले सप्ताह बारिश और बाढ़ की चपेट में आने से सैकड़ों घर तबाह हो गए। मसाले और कॉफी के लिए मशहूर इस राज्य की फसलें भी तबाह हो गई हैं। रात 2.35 पर मुल्लपेरियार बांध का गेट खोलने के बाद इडुक्की जिले में अधिकारी सतर्कता बरत रहे हैं। इस बांध में पानी 142 फीट का स्तर पार कर गया है। मुख्यमंत्री ने अपने पड़ोसी राज्य तमिलनाडु के अपने समकक्ष के. पलानीस्वामी को पत्र भेजकर इसे 139 फीट पर लाने का आग्रह किया है। मुख्यमंत्री विजयन ने कहा कि डेढ़ लाख लोगों को राहत शिविरों में रखा गया है। राज्य के कई हिस्सों में बिजली आपूर्ति, संचार प्रणाली और पेयजल आपूर्ति बाधित हो गई है। कुझितुरै में भूस्खलन के कारण लंबी दूरी की चार गाड़ियां देरी से रवाना हुई। इसके अलावा कुछ यात्री गाड़ियों पर भी आंशिक प्रभाव पड़ा है। कोल्लम-पुनालुर-सेंगोट्टाइ खंड पर रेल सेवा निलंबित कर दी गई है।  

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Dakhal News 16 August 2018

राजनीति

शिवराज सिंह चौहान मैं बचपन से ही अपने गाँव से भोपाल पढ़ने चला गया था। भोपाल में मैंने सुना कि भारतीय जनसंघ के अध्यक्ष श्री अटल बिहारी बाजपेयी जी की एक सभा चार बत्ती चौराहे बुधवारे में है। मैंने सोचा चलो भाषण सुन के आएं। अटल जी को जब बोलते सुना तो सुनते ही रह गया।ऐसा लग रहा था कि जैसे कविता उनकी जिव्हा से झर रही है। वो बोल रहे थे,“ये देश केवल जमीन का टुकड़ा नहीं, एक जीता जागता राष्ट्र-पुरुष है, हिमालय इसका मस्तिष्क है, गौरी-शंकर इसकी शिखा हैं, पावस के काले- काले मेघ इसकी केश राशि हैं, दिल्ली दिल है, विंध्यांचल कटि है, नर्मदा करधनी है, पूर्वी घाट और पश्चिमी घाट इसकी दो विशाल जंघाएँ हैं, कन्याकुमारी इसके पंजे हैं, समुद्र इसके चरण पखारता है, सूरज और चन्द्रमा इसकी आरती उतारते हैं, ये वीरों की भूमि है, शूरों की भूमि है, ये अर्पण की भूमि है, तर्पण की भूमि है, इसका कंकर-कंकर हमारे लिए शंकर है, इसका बिंदु-बिंदु हमारे लिए गंगाजल है, हम जियेंगे तो इसके लिए और कभी मरना पड़ा तो मरेंगे भी इसके लिए और मरने के बाद हमारी अस्थियाँ भी अगर समुद्र में विसर्जित की जाएंगी तो वहां से भी एक ही आवाज़ आएगी –“भारत माता की जय, भारत माता की जय”... इन शब्दों ने मेरा जीवन बदल दिया। राष्ट्र प्रेम की भावना हृदय में कूट-कूट कर भर गई और मैंने फैसला किया कि अब ये जीवन देश के लिए जीना है। ये राजनीति का मेरा पहला पाठ था। इसके बाद से राजनीति में मैं माननीय अटल जी को गुरू मानने लगा. जब भी कभी अटल जी को सुनने का अवसर मिलता, मैं कोई अवसर नहीं चूकता। बचपन में ही भारतीय जनसंघ का सदस्य बन गया, और मैं राजनीति में सक्रिय हो गया। आपातकाल में जेल चला गया, और जेल से निकल कर जनता पार्टी में काम करने लगा, फिर अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद का पूर्णकालिक कार्यकर्ता बन गया। अटल जी से मेरी पहली व्यक्तिगत बातचीत भोपाल में एक राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक के दौरान तब हुई जब मेरी ड्यूटी एक कार्यकर्ता के नाते उनकी चाय नाश्ते की व्यवस्था के लिए की गई।मैं अटल जी के लिए फल, ड्राई फ्रूट इत्यादि दोपहर के विश्राम के बाद खाने के लिए ले गया। तो वे बोले,“क्या घास- फूस खाने के लिए ले आए, अरे भाई, कचौड़ी लाओ, समोसे लाओ, पकोड़े लाओ या फाफड़े लाओ” और तब मैंने उनके लिए नमकीन की व्यवस्था की। एक छोटे से कार्यकर्ता के लिए उनके इतने सहज संवाद ने मेरे मन में उनके प्रति आत्मीयता और आदर का भाव भर दिया। उनके बड़े नेता होने के नाते मेरे मन में जो हिचक थी, वो समाप्त हो गई। 84 के चुनाव में वे ग्वालियर से हार गए थे, लेकिन हारने के बाद उनकी मस्ती और फक्कड़पन देखने के लायक था। जब वो भोपाल आए तो उन्होंने हँसते हुए मुझे कहा, “अरे शिवराज, अब मैं भी बेरोजगार हो गया हूँ”। 1991 में उन्‍होंने विदिशा और लखनऊ, दो जगह से लोकसभा का चुनाव लड़ा, और ये तय किया कि जहां से ज्यादा मतों से चुनाव जीतेंगे, वो सीट अपने पास रखेंगे। मैं उस समय उसी संसदीय क्षेत्र की बुधनी सीट से विधायक था। बुधनी विधानसभा में चुनाव प्रचार की ज़िम्मेदारी तो मेरी थी ही, लेकिन युवा मोर्चा का प्रदेश अध्यक्ष होने के नाते, मुझे पूरे संसदीय क्षेत्र में काम करने का मौक़ा मिला था। उस समय अटल जी से और निकट के रिश्ते बन गए। जब मैं उनके प्रतिद्धन्‍दी से उनकी तुलना करते हुए भाषण देता था, तो मेरे एक वाक्य पर वो बहुत हंसते थे। मैं कहता था,“कहाँ मूंछ का बाल और कहाँ पूंछ का बाल”, तो वो हंसते हुए कहते थे “क्या कहते हो भाई, इसको छोड़ो”। विदिशा लोकसभा वो एक लाख चार हजार वोट से जीते और लखनऊ एक लाख सोलह हजार से। ज्यादा वोटों से जीतने के कारण उन्होंने लखनऊ सीट अपने पास रखी और विदिशा रिक्त होने पर मुझे विदिशा से उपचुनाव लडवाया। उपचुनाव में जीत कर जब मैं उनसे मिलने गया तो उन्होंने मुझे लाड़ से कहा, “आओ विदिशा-पति”. और तब से वो जब भी मुझसे मिलते तो मुझे विदिशा-पति ही कहते और जब भी मैं विदिशा की कोई छोटी समस्या भी लेकर जाता तो उसे भी वो बड़ी गम्भीरता से लेते। एक बार गंजबासौदा में एक ट्रेन का स्टॉप समाप्त कर दिया था। जब मेरे तत्कालीन रेल मंत्री श्री जाफर शरीफ जी से आग्रह करने बाद भी ट्रेन को दोबारा स्टॉपेज नहीं दिया गया तो मैं अटल जी के पास पहुंचा, और मैंने कहा कि आप इस ट्रेन का स्टॉप फिर से गंजबासौदा में करवाइए। उन्होंने संसद भवन में ही पता लगवाया कि श्री जाफर शरीफ जी कहाँ हैं संयोग से वे संसद भवन में ही थे, अटल जी चाहते तो फोन कर सकते थे। लेकिन फोन करने की बजाय उन्होंने कहा कि चलो सीधे मिल के बात करते हैं। इतने बड़े नेता का एक ट्रेन के स्टॉप के लिए उठकर रेल मंत्री के कक्ष में जाना मुझे आश्चर्यचकित कर गया और तब मैंने जाना कि छोटे-छोटे कामों को करवाने के लिए भी अटल जी कितने गम्भीर थे कि जनता की सुविधा के लिए उन्हें वहां जाने में कोई हिचक नहीं है। मैं भी उनके साथ श्री जाफर शरीफ जी के पास गया और तत्काल जाफर शरीफ जी ने रेल का स्टाफ गंजबासौदा में कर दिया। 2003 में मध्यप्रदेश में विधान सभा के चुनाव थे। उस समय तत्कालीन कांग्रेस की सरकार द्वारा सूखा राहत के लिए राशि केंद्र सरकार से मांगी जा रही थी। हम भाजपा के सांसदों का एक समूह यह सोचता था कि विधान सभा के चुनाव आने के पहले यदि यह राशि राज्य शासन को मिलेगी तो सरकार इस राशि का दुरूपयोग चुनाव जीतने के लिए करेगी, इसलिए कई सांसद मिलकर माननीय अटल जी, जो उस समय प्रधानमंत्री थे, के पास पहुंचे, और उनसे कहा कि इस समय राज्य सरकार को कोई भी अतिरिक्त राशि देना उचित नहीं होगा, तब अटल जी ने हमें समझाते हुए कहा कि लोकतन्त्र में चुनी हुई सरकार किसी भी दल की हो, उस सरकार को मदद करने का कर्त्‍तव्‍य केंद्र सरकार का है, इसलिए ऐसे भाव को मन से त्याग दीजिये। 1998 के अंत में मेरा एक भयानक एक्सीडेंट हुआ। मेरे शरीर में 8 फ्रैक्चर थे। उसी दौरान एक वोट से माननीय अटल जी की सरकार गिर गई। मैं भी स्ट्रेचर पर वोट डालने गया था। तब फिर से चुनाव की घोषणा हुई। मुझे लगा ऐसी हालत में मेरा चुनाव लड़ना उपयुक्त नहीं होगा। मैंने अटल जी से कहा कि इस समय विदिशा से कोई दूसरा उम्मीदवार हमें ढूँढना चाहिए, मेरी हालत चुनाव लड़ने जैसी नहीं है, तब उन्होंने स्नेह से मुझे दुलारते हुए कहा, “खीर में इकट्ठे और महेरी में न्यारे, ये नहीं चलेगा. ...जब तुम अच्छे थे तब तुम्हें चुनाव लड़वाते थे। आज तुम अस्वस्थ हो तब तुम्हें न लड़वाएं, ये नहीं होगा। चुनाव तुम ही लड़ोगे, जितना बने जाना, बाक़ी चिंता पार्टी करेगी”. और मैं अस्वस्थता की अवस्था में भी चुनाव लड़ा और जीता। ऐसे मानवीय थे अटल जी। ऎसी कई स्मृतियाँ आज मस्तिष्क में कौंध रही हैं। सबको अपना मानने वाले, सबको प्यार करने वाले, सबकी चिंता करने वाले, सर्वप्रिय अजातशत्रु राजनेता, उनके लिए कोई पराया नहीं था, सब अपने थे।पूरा जीवन वे देश के लिए जिए। भारतीय संस्कृति, जीवन मूल्यों और परम्पराओं के वे जीवंत प्रतीक थे। भारत माता के पुजारी. उनकी कविता, “हार नहीं मानूँगा, रार नहीं ठानूँगा, काल के कपाल पर लिखता-मिटाता हूँ, गीत नया गाता हूँ”, साहस के साथ हमें काम करने की प्रेरणा देती है।उनके चरणों में शत-शत नमन – प्रणाम |[लेखक मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री हैं ]  

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Dakhal News 18 August 2018

देश के पूर्व पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की तबीयत बुधवार से लगातार नाजुक बनी हुई है। इस बीच गुरुवार सुबह से ही एम्स में केंद्रीय मंत्रियों और भाजपा के वरिष्ठ नेताओं का मूवमेंट बढ़ गया है।  हालचल तेज होती नजर आ रही है और एसपीजी की टीम अटल जी के तुगलक रोड़ स्थित घर पहुंच चुकी है। दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल और उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया एम्स पहुंचे। फारुख अब्दुल्ला ने कहा कि हम उनके जल्द स्वस्थ्य होने की कामना करते हैं। वो केवल भारत नहीं पूरी दुनिया में शांति चाहते थे। अटल जी के हालचाल जानने के लिए गृहमंत्री राजनाथ सिंह और जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री फारुख अब्दुल्ला एम्स पहुंचे। एम्स के बाहर और उस तरफ के रास्तों पर ट्रैफिक डाइवर्ट कर दिया गया है।एम्स से निकलकर अमित शाह सीधे भाजपा मुख्यालय पहुंचे हैं। देशभर में अटल जी के स्वस्थ्य होने की कामना की जा रही है। हमेशा मस्तमौला रहे अटल जी, विमान भटका तो डरने की बजाय सो गए थे एम्स ने अटल जी का मेडिकल बुलेटिन जारी कर दिया है जिसमें कहा गया है कि अटल जी की हालत वैसी है जैसी कल रात को थी। अस्पताल के बाहर हलचल तेज हो गई है, रास्ते बंद कर दिए गए हैं और एम्स के बाहर खड़े वाहनों को हटाया जा रहा है। पुलिस ने भी बैरिकेड्स लगा दिए गए हैं और सुरक्षा भी बढ़ा दी गई है। इसके बाद अब तरह-तरह के कयास लगाए जाने लगे हैं। सुबह उपराष्ट्रपति वैकेंया नायडू के अलावा केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा, मुख्तार अब्बास नकवी, विदेश मंत्री सुषमा स्वराज के अलावा कई वरिष्ठ नेता अटल जी के स्वास्थ्य की जानकारी लेने के लिए एम्स पहुंचे। उनके अलावा भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह भी एम्स पहुंचे और अटल जी के स्वास्थ्य की जानकारी ली। इनके अलावा कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी और पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी भी एम्स जाएंगे। पिछले 66 दिनों से एम्स में भर्ती अटल जी की तबीयत बुधवार को अचानक बिगड़ी और उसके बाद से ही उन्हें लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर रखा गया है। जानकारी के अनुसार उनकी देखरेख में लगी डॉक्टर्स की टीम वाजपेयी के स्वास्थ्य पर लगातार नजर बनाए हुए हैं। अटल जी के स्वास्थ्य की सूचना के बाद देर शाम प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी उनके स्वास्थ्य की जानकारी लेने के लिए एम्स पहुंचे। उन्होंने करीब एक घंटे तक एम्स के डॉक्टरों से वाजपेयी के स्वास्थ्य पर चर्चा की। रात करीब दस बजे एम्स प्रशासन की ओर से बताया गया कि अटल की तबीयत पिछले 24 घंटे से बेहद गंभीर है। जानकारी के अनुसार आज सुबह एम्स की तरफ से अटल जी के स्वास्थ्य को लेकर अपडेट आ सकता है। बुधवार दोपहर भारत रत्न व पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की तबीयत खराब होने की खबरों के बीच केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी एम्स पहुंचीं। उन्होंने अटल के स्वास्थ्य के बारे में जानकारी ली। इस बीच शाम तक एम्स के बाहर मीडिया का जमावड़ा लग गया। शाम करीब सात बजे वाजपेयी के स्वास्थ्य का हाल जानने के लिए पीएम मोदी बिना ट्रैफिक रूट के ही अचानक एम्स पहुंचे और करीब आठ बजे तक रुके। इसके बाद रात करीब दस बजे एम्स प्रशासन की ओर से मेडिकल बुलेटिन जारी कर बताया गया कि वाजपेयी पिछले 24 घंटे के दौरान उनकी हालत ज्यादा गंभीर हो गई है। उन्हें जीवन रक्षक उपकरणों की सहायता दी जा रही है। गौरतलब है कि पूर्व प्रधानमंत्री पिछले दो माह से एम्स में भर्ती हैं। विशेषज्ञ डॉक्टरों की टीम उनके स्वास्थ्य की लगातार निगरानी कर रही है। उन्हें सांस लेने में परेशानी, यूरीन व किडनी में संक्रमण होने के कारण 11 जून को एम्स में भर्ती किया गया था।  

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Dakhal News 16 August 2018

मीडिया

आने वाले चुनावों में व्‍हाट्सएप के जरिये अपशब्द भरी राजनीतिक बयानबाजी को नहीं फैलाया जा सकेगा। व्‍हाट्सएप ने स्पष्ट कर दिया है कि वह चुनावों के वक्त इस तरह के संदेश प्रसारित करने वाले अकाउंट पर रोक लगाते हुए उसे ब्लॉक कर देगा। इस बारे में व्‍हाट्सएप चुनाव आयोग और राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों को जानकारी दे चुका है। भारत की चिंताओं को देखते हुए व्‍हाट्सएप ने यहां अपना एक स्थानीय प्रतिनिधि भी नियुक्त करने का फैसला किया है। सरकार की तरफ से अफवाहों और फेक न्यूज को रोकने की दिशा में भेजे गए दूसरे नोटिस के जवाब में व्‍हाट्सएप ने कहा है कि वह अपने प्लेटफार्म का गलत इस्तेमाल होने से रोकने का हर संभव प्रयास कर रहा है। कर्नाटक के चुनाव में उसने ऐसे कई अकाउंट की पहचान की थी जिनका व्यवहार अवांछनीय पाया गया था। ऐसे सभी अकाउंट पर उस समय रोक लगा दी गई थी। 27 जुलाई को सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय को भेजे गए अपने जवाब में व्‍हाट्सएप के डायरेक्टर एंड एसोसिएट जनरल काउंसिल ब्रायन हैंसी ने लिखा है कि चुनाव आयोग और राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों से व्‍हाट्सएप सीधे इस संबंध में बात कर चुका है। व्‍हाट्सएप का कहना है कि वह बिना किसी राजनीतिक पक्षपात के इस तरह के अवांछित संदेशों को रोकने की व्यवस्था कर रहा है। सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय ने पहले तीन जुलाई को व्‍हाट्सएप को पत्र लिखकर अफवाहें फैलाने वाले संदेशों पर रोक लगाने को कहा था। व्‍हाट्सएप ने उसके बाद कुछ कदम उठाए थे, लेकिन सरकार उन कदमों से संतुष्ट नहीं थी। लिहाजा 19 जुलाई को सरकार ने फिर पत्र लिखकर व्‍हाट्सएप को आगाह करते हुए और सख्त कदम उठाने को कहा था। ब्रायन ने इसके जवाब में कहा है कि उनकी संस्था चुनावों में व्‍हाट्सएप के दुरुपयोग को लेकर सरकार की इस चिंता को समझती है। खासतौर पर चुनाव के दौरान अफवाह फैलाने से लेकर अपशब्दों के जरिये छवि खराब करने वाले संदेश अधिक चिंता की वजह बनते हैं। इसलिए व्‍हाट्सएप भारत में होने वाले आगामी चुनावों को लेकर अधिक संवेदनशील है। व्‍हाट्सएप ने माना है कि इस संबंध में तत्काल कदम उठाए जाने की जरूरत है। कंपनी का कहना है कि वह इस मामले में सरकार के साथ मिलकर काम करेगी। इसीलिए भारत में एक स्थानीय प्रतिनिधि नियुक्त करने का निर्णय हुआ है। यह प्रतिनिधि अपनी टीम गठित कर स्थानीय चिंताओं के संबंध में काम करेगा। ब्रायन ने अपने पत्र में व्‍हाट्सएप पर संदेश फारवर्ड करना सीमित करने जैसे कदमों का ब्यौरा भी दिया है। साथ ही व्‍हाट्सएप के दुरुपयोग को रोकने के लिए अवांछनीय अकाउंट बंद करने जैसे कदम उठा रहा है। लेकिन संदेशों के स्त्रोत का पता लगाने के बारे में व्‍हाट्सएप का कहना है कि लोगों के निजी संदेशों में स्त्रोत का पता लगाना उनकी निजता के अधिकार के हनन की श्रेणी में आ सकता है।  

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Dakhal News 16 August 2018

  फेसबुक बैंकों और वित्तीय संस्थानों के साथ मिलकर उनके ग्र्राहकों को अपनी मैसेंजर व चैट सेवाओं के जरिये बेहतर सेवाएं देने की संभावनाएं तलाश रही है। उसने कहा है कि वह बैंकों और वित्तीय संस्थानों के साथ बातचीत कर रही है ताकि वह उनके ग्राहकों के लिए सेवाएं सुधारने में मदद कर सके। फेसबुक ने कहा है कि पे-पाल, सिटी बैंक और अमेरिकन एक्सप्रेस जैसे वित्तीय संस्थानों के यूजर्स अपना वित्तीय खाता फेसबुक मैसेंजर एंड चैट से जोड़ सकते हैं। वॉल स्ट्रीट जर्नल ने एक रिपोर्ट में कहा है कि फेसबुक ने बैंक और वित्तीय संस्थानों से ग्राहकों का वित्तीय विवरण उपलब्ध कराने को कहा है। उसने कार्ड ट्रांजैक्शन और एकाउंट बैलेंस की भी जानकारी देने को कहा है। फेसबुक की एक प्रवक्ता ने कहा कि अगर बैंक फेसबुक के साथ समझौता करते हैं तो उसे उन बैंकों के ग्राहकों का कुछ वित्तीय विवरण मिल सकता है। फेसबुक इस डाटा का इस्तेमाल प्रचार या किसी अन्य उद्देश्य के लिए नहीं करेगी। फेसबुक ने एक बयान में कहा कि इन सूचनाओं का इस्तेमाल ग्राहक सेवा के अलावा किसी और उद्देश्य से नहीं किया जाएगा। ग्राहकों के डाटा की संवेदनशीलता को अहम बताते हुए फेसबुक ने कहा कि बैंकों के साथ इस तरह के समझौतों में ग्राहकों की सूचनाएं सुरक्षित रखना महत्वपूर्ण काम है। वॉल स्ट्रीट जर्नल की रिपोर्ट के अनुसार फेसबुक ने पिछले साल जेपी मॉर्गन चेज, वेल्स फार्गो कंपनी, सिटी ग्र्रुप इंक और यूएस बैनक्रॉप के साथ फेसबुक मैसेजर पर ग्राहकों की दी जाने वाली सेवाओं के बारे में बातचीत की थी। इसके पीछे विचार यह था कि किसी ग्राहकों को सेवा देने के लिए फोन पर इंतजार करवाने के बजाय बेहतर होगा वह बैंक को अपनी जरूरत के बारे में मैसेज कर दे।  

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Dakhal News 8 August 2018

समाज

  सिवनी जिले के ग्राम जमुनिया की 13 वर्षीय बालिका सुलोचना अक्सर बीमार रहती थी। कुछ नासमझी और कुछ आर्थिक स्थिति के कारण उसका कभी  ढंग का इलाज नहीं हुआ। सुलोचना की किस्मत कहिये कि एक दिन आरबीएसके की टीम गांव पहुँच गई। टीम ने जाँच में सुलोचना को गंभीर हृदय रोग से ग्रसित पाया। जिला प्रशासन की मदद से 24 जुलाई को नागपुर के श्रीकृष्णा हास्पिटल में उसकी हार्ट सर्जरी हुई। ऑपरेशन तो सफल रहा पर सुलोचना ठीक से अपने पैरों पर खड़ी नहीं हो पा रही थी। उसका स्कूल जाना भी बंद हो गया। माता-पिता हैरान-परेशान थे। लगभग एक साल तक ऐसी ही स्थिति में रहने से सुलोचना का मनोबल गिरने लगा था। उपचार के दौरान होम्योपैथी चिकित्सक डॉ. तारेन्द्र डेहरिया ने सुलोचना और उसके माता-पिता को ढांढस बंधाया कि होम्योपैथिक इलाज से वह ठीक हो सकती है। डॉ. डेहरिया ने 6 माह तक सुलोचना का नि:शुल्क उपचार किया। अब सुलोचना अपने पैरों पर खड़ी होने के साथ ही चलने भी लगी है। डॉक्टर का विश्वास है कि जल्दी ही सुलोचना दौड़ने और खेलने-कूदने लगेगी।

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Dakhal News 18 August 2018

राष्ट्रपति पदक प्राप्त पुलिस अधिकारियों और कर्मचारियों से भेंट राज्यपाल आनंदीबेन पटेल से आज मध्यप्रदेश पुलिस के राष्ट्रपति पदक प्राप्त पुलिस अधिकारियों और कर्मचारियों ने भेंट की। राज्यपाल ने बधाई और शुभकामनाएँ देते हुए कहा कि मध्यप्रदेश देश का प्रथम राज्य है, जहां नाबालिगों से दुष्कर्म के मामलों में फांसी की सजा का प्रावधान किया गया है। बच्चियों से दुष्कर्म के मामले में पुलिस अधिकारियों/कर्मचारियों द्वारा त्वरित कार्यवाही एवं न्यायालय में साक्ष्य प्रस्तुतीकरण के कारण दोषियों को कम से कम समय में दण्डित किया जा रहा है। पुलिस की ही निरंतर और प्रभावी कोशिशों के चलते  मध्यप्रदेश में कानून-व्यवस्था संतोषजनक है पुलिस को अपनी जन-हितैषी छवि को और पुख्ता बनाने की आवश्यकता है। राज्यपाल श्रीमती पटेल ने कहा कि  उन्नत तकनीकी,  इंटरनेट एवं सोशल मीडिया के कारण साइबर अपराधों में वृद्धि हो रही है। अपराधों की रोकथाम तथा कानून व्यवस्था की स्थिति बेहतर बनाये रखने के लिए पुलिस आधुनिकीकरण पर विशेष ध्यान देने की आवश्यकता है।  साहसी,  कर्मठ और बहादुर पुलिस अधिकारी-कर्मचारियों को पदक से सम्मानित किया जाना समूचे प्रदेश के लिये गौरव और अभिमान का प्रसंग है। राज्यपाल ने कहा कि महिला अपराधों के प्रति जागरुकता तथा बच्चियों एवं महिलाओं को आत्मरक्षा के लिए सशक्त बनाने के उद्देश्य से पुलिस द्वारा कई नवाचार किए जा रहे हैं। प्रदेश के 12 जिलों के 180 थानों में URJA डेस्क (अरजेन्ट रिलीफ एण्ड जस्ट एक्शन डेस्क) स्थापित की जा रही हैं। पुलिस महानिदेशक श्री ऋषि कुमार शुक्ला, ने पुलिस की गतिविधियों पर प्रकाश डालते हुए कहा कि मध्यप्रदेश पुलिस प्रदेश को सुरक्षित बनाये रखने के प्रति कटिबद्ध है। उन्होंने कहा कि महिलाओं के खिलाफ उत्पीड़न और बलात्कार की घटनाओं को पुलिस ने चुनौति के रूप में लिया है। त्वरित कार्यवाही करते हुए बच्चियों से बलात्कार के 10 मामलों में दोषियों को फांसी की सजा दिलाई है। इस अवसर पर म.प्र. पुलिस हाउसिंग कार्पोरेशन के चेयरमेन, श्री विजय कुमार सिंह, विशेष महानिदेशक, पुलिस सुधार श्री मैथिलीशरण गुप्त, राज्यपाल के सचिव श्री डी.डी.अग्रवाल तथा पुलिस के वरिष्ठ अधिकारी और पदक प्राप्त अधिकारियों और कर्मचारियों के परिजन उपस्थित थे। अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक,विसबल श्री विजय यादव ने आभार व्यक्त किया।

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Dakhal News 16 August 2018

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  सोनम कपूर और आनंद आहुजा की शादी के बाद, अब बॉलीवु़ड के हॉ़टेस्ट कपल दीपिका पादुकोण और रणवीर सिंह की शादी की चर्चाएं होने लगी है। चर्चा है कि रणवीर-दीप‍िका 20 नवंबर को इटली में शादी के बंधन में बंधेंगे। इस शादी में करीबी दोस्त और रिश्तेदार ही शामिल होंगे। सोनम कपूर और अनुष्का शर्मा की शादी में मेहमानों ने शादी की तस्वीरें सोशल मीडिया पर शेयर कर दी थी, दीपिका ने इसी बात को ध्यान में रखते हुए एक फैसला किया है। वो नहीं चाहती शादी में आए परिवार के सदस्य उनकी तस्वीरें सोशल मीड‍िया पर शेयर करें इसलिए शादी में आए मेहमानों से वे गुजारिश करने वाले हैं कि सेरेमनी में मोबाइल फोन न लेकर आएं। शादी की तस्वीरें बाहर लीक नहीं हो इस बात का खास ख्याल रखने के लिए सुरक्षा के इंतजाम किए जाएंगे। र‍िपोर्ट्स के मुताब‍िक दीपिका-रणबीर ने शादी के लिए इटली में लेक कोमो वेन्यू फाइनल किया है। दीप‍िका-रणवीर की शादी की डेट फाइनल होते ही दोनों स्टार्स को बधाइयां भी मिलने लगी हैं। इस सूची में सबसे पहला नाम कबीर बेदी का है। बता दें कि दीपिका और रणवीर ने अभी तक आधिकारिक रूप से रिश्तों को न तो स्वीकारा है और न ही शादी के बारे में कोई घोषणा की है। दोनों साल 2013 से एक-दूसरे को डेट कर रहे हैं। दोनों ने फिल्म 'गोलियों की रासलीला: रामलीला', 'बाजीराव मस्तानी' और 'पद्मावत' में साथ काम किया है।  

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Dakhal News 16 August 2018

सलमान ख़ान ने कहा है कि गर्लफ्रेंड्स के मामले में उनके पापा सलीम खान से साफ तौर पर निर्देश दे रखे हैं। दरअसल ये बात तब उठी जब सलमान खान ने अपने शो 'दस का दम' में सवाल पूछा कि 'कितने प्रतिशत भारतीय लोग, पब्लिक प्लेस पर रोमांस करते हुए पुलिसवालों की डांट खा चुके हैं?' जब तक जवाब आता, उससे पहले सलमान खान बताते हैं 'ये बेहद बुरा है कि कपल्स को पब्लिक में अपना अच्छा वक्त बिताना पड़ता है। ये कपल्स मजबूर हैं क्योंकि छोटे-से घर में 8-10 लोग रहते हैं। ये नौजवान लोग होटल बुक नहीं कर सकते क्योंकि समाज क्या सोचेगा की मानसिकता आड़े आ जाती है। मेरे पापा ने मुझे इस मामले में साफ निर्देश दे रखे हैं। उन्होंने हमें घर पर ही वक्त बिताने की इजाजत दी, बजाए शहर में भटकने के।' बता दें कि सलमान खान कथित तौर पर ऐश्वर्या राय और कटरीना कैफ के साथ रोमांटिक तौर पर साथ रहे हैं। सलमान ने बताया कि उनकी बहनों के लिए भी यही निर्देश लागू होते हैं और उन्हें हमेशा आजादी मिली कि वे जिससे चाहें, उससे शादी करें। हाल ही में सलमान खान के पापा सलीम खान तब चर्चा में आए थे जब उन्होंने 'भारत' से प्रियंका चोपड़ा के बाहर जाने पर राय व्यक्त की थी। फ़िल्म की शूटिंग शुरू होने वाली थी और प्रियंका इस प्रोजेक्ट से बाहर निकल गईं। अली अब्बास ज़फर ने यह ख़बर अपने सोशल मीडिया अकाउंट पर ट्वीट करते हुए दी थी। जब से प्रियंका का नाम इस फ़िल्म से हटा है तब से उनकी रिप्लेसमेंट की ख़बरें भी ज़ोर पकड़ रही हैं। 'भारत' में प्रियंका की जगह सबसे पहले कटरीना कैफ़ का नाम सामने आया है जिन्हें हमेशा सलमान के साथ पसंद किया गया है और फ़िल्म के डायरेक्टर अली अब्बास ज़फर के साथ भी उनकी ट्यूनिंग अच्छी है। इससे पहले ही 'भारत' के बारे में बात करते हुए सलमान के पिता सलीम ख़ान ने भी बड़ा बयान दिया था। प्रियंका के बाहर जाने पर सलीम ने एक इंटरव्यू के दौरान कहा, \"मैं नहीं जानता कि प्रियंका ने भारत क्यूं छोड़ी है लेकिन, हम जल्द ही किसी और को कास्ट कर लेंगे। कोई भी आ जाएगा उनके रोल में, कितने सारे लोग हैं।\" बतातें चलें कि 'भारत' में सलमान के साथ दिशा पाटनी भी है जो सलमान की बहन का किरदार निभा रही हैं। दिशा ने हाल ही में अपने केरेक्टर का नाम एक तस्वीर के ज़रिये लोगों के सामने पेश किया था। दिशा इस तस्वीर में एक टी-शर्ट को हाथ में पकड़े हुई है जिस पर लिखा है 'राधा'!

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Dakhal News 8 August 2018

दखल क्यों

 महासमुंद में मौजूद जंगली हाथी-दल से भटके पांच हाथियों का मूवमेंट शुक्रवार को पूरे दिन तटवर्ती बड़गांव के आसपास दिखा। हाथियों के बस्ती के नजदीक होने से महासमुंद के बड़गांव सहित रायपुर वनांचल के समीपवर्ती गांव के लोग दहशत में दिखे। संभावना है कि हाथी कभी भी नदी पार कर रायपुर की सीमा में दाखिल हो सकते हैं। यदि ऐसा हुआ तो हाथियों का दल रायपुर वनांचल में भारी तबाही मचा सकता है। वन विभाग हालांकि इन हाथियों पर नजर गड़ाए है और मूवमेंट बदलने की कवायद में जुटा है। महासमुंद व बलौदाबाजार में जंगली हाथियों के दल बार दल व लोनर्स के कुछ सदस्य इन दिनों अपने गु्रप से भटक इधर-उधर विचरण कर रहे हैं। हाथियों के बदले मूवमेंट से इलाकाई लोग काफी दहशत में हैं, लोगों को जानमाल का खतरा सताने लगा है। चिंता की बात यह भी है कि महासमुंद के हाथियों का मूवमेंट राजधानी की ओर ही है। पांच हाथी बड़गांव के आस-पास पूरे दिन देखे गए। यदि हाथी नदी पार किए तो वे रायपुर की सीमा में दाखिल हो जाएंगे और रायपुर वनांचल के समीपवर्ती गांवों में तबाही मचा सकते है। हाथी यदि आबादी वाले इलाकों में पहुंचे तो जनहानि भी हो सकती है। वन विभाग हालांकि इस प्रयास में लगा है कि हाथियों का मूवमेंट बदला जाए, पर विडंबना है कि विभाग चाह कर भी कुछ कर नहीं पा रहा है। हाथियों के अपने ग्रुुप से बिछड़ने व बस्ती के नजदीक होने से लोगों में दहशत व्याप्त है। डीएफओ महासमुंद आलोक तिवारी ने बताया दल से भटके हाथियों का मूवमेंट बड़गांव के इर्द-गिर्द है। तीन चार की संख्या में हाथी दिखे भी हैं। लोगों को जंगल में ज्यादा अंदर न जाने का अलर्ट जारी किया गया है। हाथियों ने अभी नदी पार नहीं किया है। प्रयास जारी है कि हाथी पुनः अपने ग्रुप की ओर लौट जाएं। हाथियों के मूवमेंट पर लगातार नजर रखी जा रही है।   

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Dakhal News 18 August 2018

  ओबीसी जातियों के उपवर्गीकरण की दिशा में आगे बढ़ने के साथ ही आरक्षण की बढ़ती मांगों का भी समाधान निकालने की कोशिश हो। अन्य पिछड़े वर्गों की जातियों के उपवर्गीकरण की संभावनाओं का पता लगाने के लिए गठित रोहिणी आयोग की ओर से मिले संकेत यदि यह रेखांकित कर रहे हैं कि ओबीसी आरक्षण का लाभ चुनिंदा जातियों ने उठाया है तो इसमें हैरानी नहीं। इस स्थिति को बयान करने वाले आंकड़े उपलब्ध भले न हों, लेकिन हर कोई यह जान रहा है कि हकीकत क्या है। यह विसंगति केवल ओबीसी आरक्षण तक ही सीमित नहीं है। यही हालत अनुसूचित जातियों व जनजातियों को मिले आरक्षण में भी है। अब जब ओबीसी आरक्षण में उपवर्गीकरण की दिशा में कदम उठाए जा रहे हैं, तो यह जरूरी हो जाता है कि एससी-एसटी आरक्षण में भी ऐसा हो। नीति-नियंता और राजनीतिक दल इससे अनभिज्ञ नहीं हो सकते कि यह आरक्षण में विसंगति, अर्थात सभी पात्र जातियों को समुचित लाभ न मिल पाने का ही प्रतिफल है कि जहां ओबीसी की कुछ जातियां अनुसूचित जाति का दर्जा चाह रही हैं, वहीं कुछ अनुसूचित जातियां जनजाति के रूप में अपनी गिनती कराना चाहती हैं। ओबीसी आरक्षण का अधिकतम लाभ उठाने वाली जातियां आमतौर पर वही हैं, जो सामाजिक एवं आर्थिक रूप से अपेक्षाकृत सक्षम हैं। इन्हें पिछड़ों में अगड़े की संज्ञा दी जा सकती है। अलग-अलग राज्यों में पिछड़ों में अगड़े का दर्जा रखने वाली जातियां भिन्न्-भिन्न् हैं, लेकिन वे हैं सभी राज्यों में। इनमें से कुछ जातियां तो राजनीतिक रूप से भी प्रभावी हैं। इसके चलते उनका शासन में भी दबदबा है और कहीं-कहीं तो प्रशासन में भी। इसका कोई मतलब नहीं कि सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक तौर पर प्रभावी जातियां आरक्षण का लाभ उठाती रहें। यदि समर्थ जातियों के लोग आरक्षण का लाभ लेते रहेंगे तो वे कहीं न कहीं अन्य ऐसी जातियों के अधिकारों का हरण ही करेंगे, जो आरक्षण के दायरे में होने के बावजूद उसके न्यूनतम लाभ से वंचित हैं। समय आ गया है कि न केवल ओबीसी आरक्षण के तहत आने वाली जातियों का उपवर्गीकरण हो, बल्कि उन जातियों को आरक्षण के दायरे से अलग भी किया जाए, जो अब आरक्षण की पात्र नहीं रह गई हैं। हालांकि क्रीमीलेयर की व्यवस्था इसी मकसद से की गई है, लेकिन उससे अभीष्ट की पूर्ति नहीं हो पा रही है। पता नहीं ऐसी कोई व्यवस्था एससी-एसटी आरक्षण में क्यों नहीं है? जैसे यह एक तथ्य है कि भारतीय समाज को समरस बनाने के लिए आरक्षण की आवश्यकता है, वैसे ही यह भी कि इस व्यवस्था में कई विसंगतियां हैं। आरक्षण का लाभ कुछ समर्थ जातियों के खाते में जाना केवल एक विसंगति है। अन्य विसंगतियों की चर्चा इसलिए नहीं होती, क्योंकि आरक्षण को राजनीतिक रूप से एक नाजुक मसला बना दिया गया है। परिणाम यह है कि कुछ ऐसी जातियां भी आरक्षण की मांग कर रही हैं, जो इसके लिए पात्र नहीं हैं। विडंबना यह है कि वे आरक्षण की अपनी मांग मनवाने के लिए हिंसक तौर-तरीके भी अपना रही है। बेहतर यही होगा कि ओबीसी जातियों के उपवर्गीकरण की दिशा में आगे बढ़ने के साथ ही आरक्षण की बढ़ती मांगों का भी कोई समाधान निकालने की कोशिश हो। यह कोशिश सामाजिक न्याय की अवधारणा के तहत ही होनी चाहिए।

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