. हजारो लोग हैं, जिनके पास रोटी है | चांदनी रातें हैं,लड़कियां हैं | और 'अक्ल' है | हजारों लोग हैं,जिनकी जेब में | हर वक्त कलम रहती है | और हम हैं | कि कविता लिखते हैं... | पाश
 
 

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 दखल क्यों?


इसलिए की ''स्टेटस को'' जो अपना स्टेटस खो चुका है॰ यथास्थिति दरअसल जस का तस् बने रहना नहीं है पिछङ जाना है॰ चाय की प्याली में तूफ़ान उठाकर यथास्थिति नहीं तोडी जाती . हमारे बुद्धिजीवियों ने काफ़ी हाउस में बहुत से बुलबुले उडाये है

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आध्यात्मिक चेतना से जुड़े बगैर आर्थिक समृद्धि अर्थहीन

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