विशेष

खुफिया रिपोर्ट के मुताबिक रेलवे ट्रैक को धमाके से उड़ाकर कानपुर जैसे  ट्रेन  हादसों को अंजाम  देने के लिए दाऊद इब्राहिम भारत में बेरोजगारों की भर्ती कर रहा है। महाराष्ट्र एंटी टैरारिस्ट स्क्वायड को एक युवक से पूछताछ के दौरान जानकारी मिली कि दुबई में दाऊद का करीबी शम्शुल होदा कानपुर जैसे ट्रेन हादसों के लिए फंडिंग का इंतजाम कर रहा है। रेलवे पुलिस की रिपोर्ट में पूछताछ  के  दौरान हुए खुलासों का जिक्र है। महाराष्ट्र एंटी टैरारिस्ट स्क्वायड ने इसी माह एक युवक बसंत कुमार से पूछताछ की। बसंत ने बताया कि कुछ लोग बिहार और उत्तर प्रदेश के युवाओं को इस काम के लिए पैसे दे रहे हैं। बसंत समेत 10 युवाओं को रेलवे  ट्रैक उड़ाने की टैक्नीक सिखाई गई। कानपुर रेल हादसे जैसी घटनाओं को अंजाम देने के लिए हवाला का इस्तेमाल किया जा रहा है।

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Dakhal News 19 January 2017

भारत के प्रधान न्यायाधीश जेएस खेहड़ ने एक सुनवाई के दौरान कहा कि मैं भी हिन्दू हूं, लेकिन मैं किसी से नहीं डरता। प्रधान न्यायाधीश ने यह टिप्पणी उस वक्त की जब 10वीं बार गोहत्या पर रोक लगाने की गुहार करने वाले याचिकाकर्ता ने कहा कि हिन्दू अदालत में आने से डरते हैं, वह इन बातों में नहीं पडऩा नहीं चाहते। प्रधान न्यायाधीश ने याचिकाकर्ता बाल राम बाली से कहा कि अदालत आने में डरने की बात क्या है। उन्होंने याचिकाकर्ता से कहा कि आप 10वीं बार यह याचिका लेकर आए हैं, पहले ही आपकी तमाम याचिका खारिज हो चुकी है। इस याचिका में भी कुछ नया नहीं है। इस पर याचिकाकर्ता ने कहा कि वर्ष 1996 में संविधान पीठ ने इस संबंध में गलत आदेश पारित किया था। याचिकाकर्ता का कहना था कि संविधान पीठ के फैसले में इस बात को गलत रिकॉर्ड किया गया है कि पूर्व में हिन्दू धर्म के लोग गाय और सूअर का मांस खाते थे। याचिकाकर्ता ने दावा किया कि वेद या धार्मिक ग्रंथों में ऐसी बातें नहीं लिखी हैं। लेकिन प्रधान न्यायाधीश जेएस खेहड़ और न्यायमूर्ति डीवाई चंद्रचूड़ की पीठ ने याचिकाकर्ता बाली को चेतावनी दी कि अगर वह फिर से इस तरह की याचिका दायर करेंगे तो उन्होंने याचिका के साथ 50 हजार रुपए का ड्राफ्ट की संलग्न करना होगा। याचिकाकर्ता बाली पर अदालत की अवमानना का मामला भी चल चुका है, हालांकि बाद में अवमानना की कार्रवाई निरस्त कर दी गई थी।  

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Dakhal News 18 January 2017

राजनीति

नई दिल्ली में  तमिलनाडु के मुख्यमंत्री ओ पनीरसेल्वम ने सांडों को काबू करने वाले सालाना  खेल पर प्रतिबंध को लेकर राज्य में चल रहे विरोध प्रदर्शन के बीच जल्लीकट्टू को अनुमति देने वाले अध्यादेश को लागू करने की मांग को लेकर आज प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात की । पनीरसेल्वम ने आज मोदी के निवास पर उनसे मुलाकात की। तमिलनाडु में जल्‍लीकट्टू के मुद्दे को लेकर मुख्यमंत्री ओ पन्नीरसेल्वम ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से गुरुवार को मुलाकात की और उन्हें ताजा हालात से अवगत कराया। उन्होंने प्रधानमंत्री मोदी से सुप्रीम कोर्ट द्वारा जल्लीकट्टू पर लगाई गई रोक हटाने के लिए केंद्र सरकार से एक अध्यादेश जारी करने की अपील की। प्रधानमंत्री मोदी ने तमिलनाडु के मुख्यमंत्री से कहा कि जल्लीकट्टू का मामला अदालत में विचाराधीन है हालांकि वह वाषिर्क अनुष्ठान के सांस्कृतिक महत्व को समझते हैं। मोदी ने जल्लीकट्टू मुद्दे पर पनीरसेल्वम से कहा कि केंद्र सरकार राज्य सरकार द्वारा उठाये गये कदमों के प्रति समर्थन का रवैया अपनाएगी । पीएम मोदी ने कहा कि इस सिलसिले में एक केंद्रीय टीम तमिलनाडु भेजी जाएगी। मुख्यमंत्री ने कल रात कहा था कि राज्य को इंसाफ दिलाने के लिए हरसंभव कानूनी उपायों पर विचार किया जाएगा। साथ ही उन्होंने इस बात पर भी जोर दिया कि ऐसा नहीं कहा जाना चाहिए कि केंद्र इस मामले में राज्य को ‘नजरअंदाज’ कर रहा है। इस बीच कुछ युवकों के समूह ने जल्लीकट्टू पर प्रतिबंध के खिलाफ यहां तमिलनाडु हाउस के बाहर विरोध प्रदर्शन किया। इस मुद्दे पर अभिनेता विशाल के भी जंतर-मंतर पर विरोध प्रदर्शन करने की संभावना है। तमिलनाडु में कल हजारों छात्रों ने प्रतिबंध के खिलाफ प्रदर्शन किया था। सड़कों पर भारी विरोध प्रदर्शन के मद्देनजर मुख्यमंत्री ने प्रधानमंत्री से मुलाकात करने का निर्णय लिया था। अन्नाद्रमुक महासचिव वी के शशिकला ने विरोध प्रदर्शन को अपना समर्थन दिया और केंद्र से जल्लीकट्टू को अनुमति देने के लिए एक अध्यादेश लाने की मांग की है।

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Dakhal News 19 January 2017

भारत अकेले शांति के पथ पर नहीं चल सकता :मोदी  नई दिल्ली में भारत-पाक संबंधों में जारी तल्खी के बीच प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने स्पष्ट संदेश देते हुए  कहा कि पाकिस्तान अगर भारत के साथ द्विपक्षीय वार्ता शुरू करना चाहता है तो उसे आतंकवाद से अलग होना होगा। समन्वित पड़ोस की अपनी पहल को रेखांकित करते हुए मोदी ने कहा कि सम्पूर्ण दक्षिण एशिया के साथ सौहार्दपूर्ण एवं शांतिपूर्ण संबंध उनकी पड़ोस के प्रति सोच को रेखांकित करता है। तीन दिवसीय रायसीना-2 वार्ता  को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा, ‘भारत अकेले शांति के पथ पर नहीं चल सकता है। यह पाकिस्तान के सफर का मार्ग भी होना चाहिए। पाकिस्तान अगर भारत के साथ वार्ता करना चाहता है तो उसे आतंकवाद से अलग होना होगा।’ इस दौरान उन्होंने अपनी लाहौर यात्रा समेत पाकिस्तान के साथ संबंधों को सामान्य बनाने की दिशा में उठाये गए कई कदमों को याद किया। उल्लेखनीय है कि पाकिस्तान स्थित आतंकवादी समूहों की ओर से पठानकोट और उरी हमलों समेत सीमापार से अनेक हमलों के कारण भारत पाकिस्तान संबंधों में तल्खी आ गई है। पाकिस्तान के साथ संबंधों के बारे में मोदी ने कहा कि पाकिस्तान के सफर का पथ भी शांति का होना चाहिए। भारत का रुख धर्म को आतंकवाद से अलग करने तथा अच्छे एवं बुरे आतंकवाद के कृत्रिम वर्गीकरण को खारिज करने का है और अब दुनिया में इसकी चर्चा हो रही है। तीन दिवसीय सम्मेलन के उद्घाटन को संबोधित करते हुए मोदी ने ये बातें कहीं जिसमें दुनियाभर से शीर्ष विदेश और सुरक्षा विशेषज्ञ हिस्सा ले रहे हैं। चीन का उल्लेख करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि दो बड़े पड़ोसी शक्तियों के बीच कुछ मतभेद असामान्य बात नहीं है लेकिन दोनों पक्षों को संवेदनशीलता और मुख्य चिंताओं एवं हितों पर एक दूसरे प्रति सम्मान का भाव दिखाना चाहिए। भारत-चीन संबंधों के बारे में उन्होंने कहा कि दोनों देशों में अथाह आर्थिक अवसर है और इस पथ पर आगे बढ़ने में दोनों एक दूसरे का पूरक बन सकते हैं। प्रधानमंत्री ने कहा, ‘मैं भारत और चीन को आगे बढ़ते हुए देख रहा हूं जो हमारे दोनों देशों और पूरी दुनिया के लिए अभूतपूर्व आर्थिक अवसर के रूप में है। ऐसे में दो बड़े पड़ोसी शक्तियों के बीच कुछ मतभेद होना अस्वाभाविक नहीं है।’ मोदी ने कहा, ‘हमारे संबंधों की देखरेख और क्षेत्र में शांति और प्रगति के लिए दोनों देशों को संवेदनशीलता और एक दूसरे के हितों और चिंताओं के प्रति सम्मान का भाव प्रकट करना चाहिए।’ प्रधानमंत्री ने कहा कि उन्होंने और चीनी राष्ट्रपति शी चिपफिंग ने अपने संबंधों में वाणिज्यिक और कारोबारी अवसरों के व्यापक क्षेत्रों का दोहन करने पर जोर दिया था। मोदी ने इस बात पर जोर दिया कि यह शताब्दी एशिया की है, साथ ही कहा कि इस महादेश में सबसे तीव्र उतार चढ़ाव हो रहा है और इसी क्षेत्र में कई ऐसे क्षेत्र हैं जहां व्यापक प्रगति और समृद्धि हो रही है। प्रधानमंत्री ने कहा कि एशिया प्रशांत में सतत रूप से बढ़ती सैन्य शक्ति, संसाधन और धन ने उसकी सुरक्षा चिंताओं को बढ़ा दिया है। इसलिए इस क्षेत्र में सुरक्षा ढांचे को खुला, पारदर्शी, संतुलित और समावेशी होना चाहिए। मोदी ने कहा, ‘और इसलिए क्षेत्र में सुरक्षा ढांचा खुला, पारदर्शी, संतुलित और समावेशी होना चाहिए। और इसे अंतरराष्ट्रीय नियमों में निहित व्यवहारों और वार्ता को प्रोत्साहित करने के साथ सम्प्रभुता का सम्मान करने वाला होना चाहिए।’ अपने संबोधन में मोदी ने भारत की विदेश नीति की प्राथमिकताओं, हिन्द महासागर में सुरक्षा हितों और पड़ोसी देशों के साथ द्विपक्षीय संबंधों के साथ खाड़ी देशों, अमेरिका, चीन और रूस समेत प्रमुख देशों के साथ द्विपक्षीय संबंधों के विभिन्न पहलुओं को छुआ। प्रधानमंत्री ने कहा कि ‘सबका साथ, सबका विकास’ की सोच केवल भारत के लिए ही नहीं है बल्कि सम्पूर्ण दुनिया की अवधारणा है। इस सम्मेलन में नेपाल के विदेश मंत्री प्रकाश शरण, अफगानिस्तान के पूर्व राष्ट्रपति हामिद करजई, आस्ट्रेलिया के पूर्व प्रधानमंत्री केविन रड, बांग्लादेश की प्रधानमंत्री के अंतरराष्ट्रीय मामलों के सलाहकार गौहर रिजवी समेत 65 देशों से 250 प्रतिनिधि हिस्सा ले रहे हैं। अफगानिस्तान के मुद्दे पर मोदी ने कहा कि दूरी और आवागमन में कठिनाइयों के बावजूद पुनर्निर्माण, संस्थाओं के निर्माण और क्षमता उन्नयन में भारत सहयोग दे रहा है। अफगानिस्तान के संसद भवन का निर्माण और भारत अफगानिस्तान दोस्ती बांध हमारे बढ़ते संबंधों के उदाहरण हैं। प्रधानमंत्री ने ईरान और अफगानिस्तान के साथ चाबहार बंदरगार पर त्रिपक्षीय समझौता और अंतरराष्ट्रीय उत्तर दक्षिण परिवहन गलियारा को आगे बढ़ाने की भारत की प्रतिबद्धता का जिक्र किया। उन्होंने साथ ही इस बात पर भी जोर दिया कि कनेक्टिीविटी दूसरे देश की सम्प्रभुता को कमतर नहीं कर सकते हैं। केवल एक दूसरे की सम्प्रभुता का सम्मान करके ही क्षेत्रीय सम्पर्क गलियारे के बायदे को पूरा किया जा सकता है और मतभेदों को सुलझाये जा सकते हैं। अमेरिका के साथ रिश्तों के बारे में मोदी ने निर्वाचित राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के साथ अपनी बातचीत का जिक्र किया और कहा, ‘हमने अपने सामारिक संबंधों को आगे बढ़ाने पर सहमति व्यक्त की।’ उन्होंने कहा कि अस्थिरता, हिंसा, संघर्ष, चरमपंथ का खतरनाक दिशा में बढ़ना जारी है। प्रधानमंत्री ने कहा कि शासन से इतर ताकतें (नन स्टेट एक्टर) इन चुनौतियों के विस्तार में महत्वपूर्ण योगदान दे रहा है। अलग तरह की दुनिया के लिए बनी संस्थाएं और स्थापत्य पुरानी पड़ गई है जो प्रभावी बहुलतावाद के मार्ग में बाधक है। अमेरिका के साथ संबंधों का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि सतत सम्पर्क के जरिये आर्थिक, वाणिज्यिक और सुरक्षा संबंधों के सम्पूर्ण आयामों को निश्चित गति प्रदान करने के साथ इसको मजबूत बनाया गय प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने कहा, ‘पड़ोस के बारे में मेरी दृष्टि सम्पूर्ण दक्षिण एशिया के साथ शांतिपूर्ण और सौहार्दपूर्ण संबंधों पर जोर देती है। इसी दृष्टि ने मुझे अपने शपथग्रहण समारोह में पाकिस्तान समेत सभी दक्षेस देशों को आमंत्रित करने को प्रेरित किया।’ उन्होंने कहा, ‘इसी सोच के आधार पर मैं लाहौर गया। लेकिन शांति के पथ पर भारत अकेले नहीं चल सकता है। यह पाकिस्तान के सफर का मार्ग भी होना चाहिए। अगर पाकिस्तान भारत के साथ वार्ता चाहता है तो उसे आतंकवाद से अलग होना होगा।’ पाकिस्तान के संदर्भ में मोदी ने कहा कि हमारे पड़ोस में जो हिंसा का समर्थन करते हैं, घृणा फैलाते हैं और आतंकवाद का निर्यात करते हैं, वे अलग थलग और उपेक्षित हैं। भारत के विदेश संबंध और भू सामरिक हितों के बारे में मोदी ने कहा, ‘पिछले ढ़ाई वर्षों में हमने अमेरिका, रूस, जापान और अन्य महत्वपूर्ण वैश्विक शक्तियों के साथ संबंधों को मजबूत गति प्रदान की है।’ उन्होंने कहा कि आर्थिक और राजनीतिक रूप से भारत का उदय क्षेत्रीय और वैश्विक अवसरों को काफी महत्व प्रदान करता है। प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत के नौवहन हित सामरिक और महत्वपूर्ण है और हिन्द महासागर में शांति, समृद्धि और सुरक्षा की मुख्य जिम्मेदारी उनकी है जो इस क्षेत्र में रहते हैं। मोदी ने किसी देश का नाम लिये बिना कहा, ‘हमारा विशेषाधिकार वाला रुख नहीं है। हम देशों को अंतरराष्ट्रीय कानून के सम्मान के आधार पर साथ लाना चाहते हैं। हम मानते हैं कि नौवहन का सम्मान करना और अंतरराष्ट्रीय कायदे का पालन करना एक दूसरे से जुड़े और हिंद.प्रशांत समुद्री भूगोल के व्यापक हित में शांति एवं आर्थिक विकास के लिए जरूरी है।’ भू-राजनीतिक विकास का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि तीव्र उतार चढाव एशिया में हो रहा है लेकिन साथ ही कहा कि बढ़ती महत्वाकांक्षा और प्रतिद्वन्द्विता से प्रत्यक्ष तनाव उत्पन्न हो रहा है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने रूस, जापान एवं अन्य बड़ी वैश्विक ताकतों के साथ संबंधों का भी जिक्र किया। मोदी ने रूस को अभिन्न मित्र बताते हुए कहा कि उनके साथ भरोसे वाला सामारिक संबंध विशेष तौर पर रक्षा क्षेत्र में संबंध और गहरे हुए हैं। उन्होंने कहा कि जापान के साथ सही अथरे में हमारे सामरिक संबंध हैं। मोदी ने कहा कि उनकी सरकार ने छोटी अवधि में और अनिश्चितता एवं संघषरे के बावजूद सउदी अरब, यूएई, कतर और ईरान समेत खाड़ी और पश्चिम एशियाई देशों के साथ संबंधों को नया स्वरूप प्रदान किया है। इससे हमें अपने सुरक्षा हितों की सुरक्षा करने और बढ़ावा देने के साथ आर्थिक एवं उर्जा संबंधों को बढ़ावा देने में मदद मिली है। प्रधानमंत्री ने कहा कि अस्थिर समय में भारत ने बदलाव की ओर कदम बढ़ाया है ।

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Dakhal News 18 January 2017

मीडिया

बराक ओबामा के अमेरिकी राष्ट्रपति पद से रिटायर होते ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ऐसे नेता हो गए हैं, जिनके सोशल मीडिया पर सबसे ज्यादा फॉलोअर हैं। प्रधानमंत्री कार्यालय के सूत्रों ने बताया कि सोशल मीडिया के सभी मंचों-फेसबुक, ट्विटर, यूट्यूब और गूगल प्लस मिलाकर मोदी के सबसे ज्यादा फॉलोअर हैं। इतनी तादाद में दुनिया के किसी नेता के फॉलोअर नहीं हैं। मोदी के ट्विटर पर दो करोड़, 65 लाख, फेसबुक पर तीन करोड़, 92 लाख, गूगल प्लस पर 32 लाख और लिंक्डइन पर 19 लाख, 90 हजार फॉलोअर हैं। इंस्टाग्राम पर पीएम के फॉलोअरों की संख्या 58 लाख और यूट्यूब पर 5.91 लाख है। इसके अलावा उनके नाम पर बने मोबाइल एप को भी लगभग एक करोड़ बार डाउनलोड किया जा चुका है, जो एक रिकार्ड है। उल्लेखनीय है कि इससे पहले ओबामा टॉप नेता थे , कल गुरुवार को अमेरिकी राष्ट्रपति के तौर पर आखिरी दिन था। अब उनकी जगह डोनाल्ड ट्रंप अमेरिका के नए राष्ट्र प्रमुख होंगे।  

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Dakhal News 20 January 2017

एबीपी और इण्डिया टीवी को दूसरे सप्ताह में झटके लगे हैं और इनके टेलीविजन रेटिंग पॉइंट कम हुए है। आज तक हमेशा की तरह नंबर वन पर कायम है। वहीँ न्यूज़ 24 का कहना है की वह पिछले 21 सप्ताह से मध्यप्रदेश में नंबर वन हैं।  Trp नेशनल न्यूज़ चैनल Weekly Relative Share: Source: BARC, HSM, TG:CS15+,TB:0600Hrs to 2400Hrs, Wk 2' 2017 Aaj Tak 17.0 up 0.1   India TV 14.1 dn 0.2  Zee News 12.9 up 0.1   ABP News 12.7 dn 1.4  India News 10.2 up 0.5  News 24 9.5 up 0.6  News Nation 8.9 up 0.4  News18 India 7.9 up 0.4  Tez 2.5 dn 0.2  NDTV India 2.4 same   DD News 1.8 dn 0.2  TG: CSAB Male 22+ Aaj Tak 15.8 dn 0.3  India TV 14.9 dn 0.3  Zee News 13.3 up 0.1  ABP News 12.9 dn 1.2  News Nation 9.1 up 0.6  News18 India 8.9 up 0.5  India News 8.9 up 0.5  News 24 8.8 up 0.6  NDTV India 3.0 dn 0.1  Tez 2.7 dn 0.1  DD News 1.8 dn 0.2 मध्यप्रदेश छत्तीसगढ़ के रीजनल न्यूज़ चैनल्स की स्थिति  BARC WK 2,  6 JAN-13 JAN TG: CS 15+ YRS  MP Market RELATIVE SHARE %  Bansal-40 Z MP-31 ETV-22 IBC24-5 Swaraj-1 India News-1 REACH'000 Z MP-1569 ETV-1415 Bansal-1026 IBC24-585 Swaraj-191 India News-119 TSV IN MINS Bansal-18:30 Z MP-10:55 ETV-08:20 India News-07:03 IBC24-05:34 Swaraj-04:48 GRP Bansal-6 Z MP-4 ETV-3 IBC24-1 Swaraj-0 India News-0 CG MARKET RELATIVE SHARE %  Z MP-38 IBC24-37 ETV-19 Bansal-5 Swaraj-1 India News-0 REACH'000 Z MP-1037 IBC24-919 ETV-627 Bansal-273 Swaraj-203 India News-46 TSV IN MINS Z MP-14:08 IBC24-12:26 ETV-10:57 Bansal-05:53 Swaraj-02:46 India News-02:00 GRP Z MP-9 IBC24-9 ETV-5 Bansal-1 Swaraj-0 India News-0 MPCG MRKT  RELATIVE SHARE %  Z MP-33 Bansal-26 ETV-21 IBC24-18 Swaraj-1 India News-1 REACH'000 Z MP-2606 ETV-2043 IBC24-1504 Bansal-1299 Swaraj-393 India News-165 TSV IN MINS Bansal-15:53 Z MP-12:10 IBC24-10:23 ETV-09:09 India News-05:04 Swaraj-03:46 GRP Z MP-6 Bansal-4 ETV-4 IBC24-3 Swaraj-0 India News-0

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Dakhal News 19 January 2017

समाज

मुख्यमंत्री  से इजराईल के राजदूत श्री कार्मोन की मुलाकात मुख्यमंत्री  शिवराज सिंह चौहान ने कहा है कि इजराईल और मध्यप्रदेश कृषि, सिंचाई, जल प्रबंधन और फ्लोरीकल्चर के क्षेत्र में सहयोग कर सकते हैं। मुख्यमंत्री श्री चौहान ने यह बात आज यहाँ इजराईल के राजदूत श्री डेनियल कार्मोन से मुलाकात के दौरान कही। मुख्यमंत्री श्री चौहान ने कहा कि इजराईल रक्षा क्षेत्र में भी सहयोग कर सकता है। केन्द्र सरकार की रक्षा उत्पादन नीति के तहत मध्यप्रदेश रक्षा नीति बनाने वाला पहला प्रदेश है। प्रदेश के जबलपुर और ग्वालियर इसके लिये उपयुक्त स्थान है। उन्होंने कहा कि इजराईल और भारत के ऐतिहासिक और मैत्रीपूर्ण संबंध रहे हैं। इजराईल ने कठिन परिस्थितियों में एक राष्ट्र के रूप में विकास किया है। इजराईल की देशभक्ति प्रेरणा देती है। मध्यप्रदेश भी इसी रूप में इजराईल को देखता है। मध्यप्रदेश देश का सबसे तेजी से विकसित होता प्रदेश है। प्रदेश की कृषि विकास दर लगातार चार वर्ष से 20 प्रतिशत से अधिक है। इजराईल द्वारा कृषि और जल प्रबंधन के क्षेत्र में किये गये कार्य दुनिया में उदाहरण हैं। कम पानी में ज्यादा सिंचाई इजराईल से सीखी जा सकती है। मध्यप्रदेश में पानी के बेहतर इस्तेमाल के लगातार प्रयास किये जा रहे हैं। मुख्यमंत्री श्री चौहान ने कहा कि मध्यप्रदेश की विकास दर लगातार आठ वर्षों से दस प्रतिशत से अधिक है। कृषि, सिंचाई और अधोसंरचना विकास के क्षेत्र में तेजी से काम किये जा रहे हैं। प्रदेश में सामाजिक दायित्व पूरा करने के लिये विशेष प्रयास किये जा रहे हैं। दुनिया का सबसे बड़ा नदी संरक्षण अभियान 'नर्मदा सेवा यात्रा' प्रदेश में शुरू किया गया है, जिसमें समाज और सरकार मिलकर नर्मदा को प्रदूषणमुक्त बनाने का अभियान चला रहे हैं। आनंद विभाग गठित करने वाला मध्यप्रदेश देश का पहला प्रदेश है। भारत में प्राचीन समय से माना जाता है कि आनंद पैसे से नहीं आता यह आत्मिक वस्तु है। हाल ही में प्रदेश में आनंदम कार्यक्रम शुरू किया गया है, जिसमें जिसके पास जरूरत से ज्यादा वस्तुएँ हैं वह दे जाये और जिसे जरूरत है वह ले जाये। इस व्यवस्था को धीरे-धीरे पंचायत स्तर तक शुरू किया जायेगा। सीहोर और शाजापुर जिलों में दो सेंटर ऑफ एक्सीलेंस इजराईल के राजदूत श्री कार्मोन ने कहा कि इजराईल ऐसा देश है जिसे विपरीत परिस्थितियों में राष्ट्र निर्माण का अनुभव है। राष्ट्र के रूप में प्राथमिकताएँ तय हैं। भारत से बेहतर संबंध इजराईल की प्राथमिकताओं में है। दोनों देशों के बीच सहयोग के लिये प्राथमिकताओं वाले क्षेत्र चिन्हित किये गये हैं। इसमें रक्षा, कृषि, सिंचाई, जल प्रबंधन, नगरीय विकास और रिसाईकलिंग शामिल हैं। इजराईल भारत के विभिन्न प्रदेशों में उद्यानिकी क्षेत्र में सेंटर ऑफ एक्सीलेंस विकसित कर रहा है। इसमें मध्यप्रदेश के सीहोर और शाजापुर जिलों में दो सेंटर ऑफ एक्सीलेंस विकसित किये जायेंगे। इजराईल की प्रतिबद्धता भारत के साथ काम करने, सीखने और सहयोग करने की है।चर्चा के दौरान मुख्यमंत्री के प्रमुख सचिव द्वय श्री अशोक वर्णवाल और श्री एस.के. मिश्रा और मुख्यमंत्री के सचिव श्री हरिरंजन राव भी उपस्थित थे।  

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Dakhal News 20 January 2017

मुख्यमंत्री  शिवराज सिंह चौहान 20 जनवरी को रीवा में फूड एण्ड क्राफ्ट इंस्टीट्यूट का शुभारंभ करेंगे। श्री चौहान मध्यप्रदेश राज्य पर्यटन विकास निगम द्वारा नव-निर्मित विंध्या रिट्रीट रीवा का लोकार्पण भी करेंगे। उल्लेखनीय है कि फूड एण्ड क्राफ्ट इंस्टीट्यूट की स्थापना रीवा में भारत सरकार के सहयोग से की गई। रीवा में यह संस्थान 3.50 करोड़ की लागत से निर्मित हुआ है। संस्थान में जल्द ही फूड प्रोडक्शन, फूड एण्ड वेबरेज सर्विस एवं हाउसकीपिंग विषयों के पाठ्यक्रम शुरू किये जायेंगे। इससे क्षेत्र के युवाओं को रोजगारोन्मुखी प्रशिक्षण मिल सकेगा। मुख्यमंत्री श्री चौहान इसी दिन रीवा में नवनिर्मित विंध्या रिट्रीट का लोकार्पण भी करेंगे। इससे रीवा में पर्यटक सुविधाओं का विस्तार होगा। विंध्या रिट्रीट के निर्माण पर लगभग 3 करोड़ रुपए की लागत आई है। इसमें 10 कक्ष बने हैं। साथ ही सर्वसुविधायुक्त कॉन्फ्रेंस हॉल, रेस्टॉरेंट, लॉबी और किचन का निर्माण किया गया है। इस अवसर पर रीवा में आयोजित समारोह में वाणिज्य एवं उद्योग तथा खनिज साधन मंत्री श्री राजेन्द्र शुक्ल, पर्यटन एवं संस्कृति राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) श्री सुरेन्द्र पटवा, सांसद श्री जनार्दन मिश्रा, राज्य पर्यटन विकास निगम के अध्यक्ष श्री तपन भौमिक एवं महापौर श्रीमती ममता गुप्ता विशेष रूप से उपस्थित रहेंगे।  

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Dakhal News 19 January 2017

पेज 3

  गुत्थी और गुलाटी के किरदार के जरिए लोगों का भरपूर मनोरंजन करने वाले सुनील ग्रोवर असल जिंदगी में बेहद गंभीर इंसान है।  यह कहना है सुनील के साथ ‘कॉफी विद डी’ नामक फिल्म में काम कर रहीं अभिनेत्री अंजना सुखानी का। अंजना ने पीटीआई को बताया कि गुत्थी और गुलाटी के किरदारों के जरिए लोगों को हंसाने वाले सुनील जरा भी शरारती नहीं है।   उन्होंने कहा, ‘‘लोग मुझसे लगातार पूछते रहते हैं कि वह एक हास्य कलाकार हैं इसलिए क्या वह शरारती हैं लेकिन मैं कहती हूं कि वह सेट पर बिल्कुल भी शरारती नहीं हैं बल्कि बेहद शांत और गंभीर है।’‘    अंजना ने कहा कि विशाल मिश्रा निर्देशित इस फिल्म में उन्होंने लोगों को जानबूझकर हंसाने का बिल्कुल भी प्रयास नहीं किया क्योंकि यह पूरी तरह से कॉमेडी फिल्म नहीं हैं। वह सुनील गुत्थी और गुलाटी के किरदारों में अद्भुद हैं लेकिन यह :कॉफी विद डी: उनके लिए काफी अलग है क्योंकि इसमें आप बंधी बंधाई छवि से बाहर आ रहे हैं।   अंजना इससे पहले सलामे ए इश्क, गोलमाल रिटन्र्स और संडे जैसी फिल्में के अलावा दक्षिण भारतीय फिल्मों में भी अभिनय कर चुकी हैंं। उनकी यह फिल्म 20 जनवरी को रिलीज हो रही है।

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Dakhal News 19 January 2017

सैफ अली खान करीना कपूर खान ने अपने बेटे का नाम तैमूर अली खान रखा था। जिसके बाद सोशल मीडिया पर काफी बवाल भी हुआ।  हाल ही में सैफ अली खान ने तैमूर के नाम पर हुई कॉन्ट्रोवर्सी पर अपनी चुप्पी तोड़ते हुए बता दिया है कि उन्होंने अपने बेटे का नाम तैमूर क्यों रखा है। सैफ अली खान ने कहा,\"मैं इतिहास और तुर्की रूलर के विषय में काफी जागरुक हूं। मेरे बेटे का नाम उसके बाद नहीं रखा गया है। वो तिमूर(Timur)था लेकिन मेरे बेटे का नाम तैमूर(Taimur) है। शायद रूट एकसा है लेकिन नाम अलग है। तैमूर एक प्राचीन फारसी शब्द है जिसका अर्थ आयरन(Iron) होता है। मुझे और करीना को इस शब्द का साउंड और मीनिंग काफी अच्छा लगता है। यहां तक कि मैंने करीना को जितने भी नाम बताए, उन सब में से उसे ये पसंद आया.. क्योंकि ये नाम ना सिर्फ ब्यूटीफुल है बल्कि स्ट्रांग भी है।\" सैफ ने आगे कहा, \"अलेक्जेंडर और अशोका की भी हिस्ट्री काफी वॉयलेंट रही है। लेकिन कभी उस नाम के शख्स ने कभी वैसा बर्ताव नहीं किया और ना ही हम उसके साथ नाम को लेकर कोई व्यवहार करते हैं। मैं भी आशा करता हूं तैमूर भी अपनी अलग पहचान बनाएगा और सबका प्यार पाएगा। मैं और करीना उसे जो प्यार, पीस और अच्छे संस्कार देंगे वो उसे लेकर चलेगा। मेरी तरह मेरा बेटा भी लिबरल, बैलेंस और ओपन माइंडेड रहेगा।\"

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Dakhal News 18 January 2017

दखल क्यों

दिल्ली पुलिस आयुक्त आलोक कुमार वर्मा को सीबीआई का निदेशक नियुक्त कर दिया गया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता वाली तीन सदस्यीय समिति ने उनके नाम को मंजूरी दी। समिति में भारत के चीफ जस्टिस जगदीश सिंह खेहर और लोकसभा में कांग्रेस के नेता मल्लिकार्जुन खड़गे भी हैं। एजीएमयूटी कैडर के 1979 बैच के आईपीएस अधिकारी वर्मा ने 29 फरवरी, 2016 को दिल्ली पुलिस आयुक्त की जिम्मेदारी संभाली थी।  

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Dakhal News 20 January 2017

उमेश त्रिवेदी नोटबंदी के होलिकोत्सव के बाद काले धन की काली राख में दबे सवालों के जिंदा अंगारे ठंडा होने का नाम नहीं ले रहे हैं। संसद की लोक लेखा समिति के सवालों के आगे रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया के गवर्नर उर्जित पटेल के पास अपने बचाव में ज्यादा कुछ कहने को नहीं है। समिति के आगे निरुत्तर बने रहना गवर्नर की मजबूरी है। समिति के दस सवालों के जवाब में उर्जित पटेल की असहाय खामोशी अपने आप बड़े खुलासे कर रही है। पहला खुलासा यह है कि नोटबंदी का फैसला देश की आर्थिक और वित्तीय परिस्थितियों को कम, राजनीतिक मुद्दों को ज्यादा ’एड्रेस’ कर रहा है।  लोक लेखा समिति के दस सवालों की प्रतिध्वनि में देश के सामने यह ग्यारहवां सवाल सिर पर आसमान उठा रहा है कि- ’क्या देश की मुद्रा या करंसी का राजनीतिक-हथियार के रूप में इस्तेमाल हो सकता है?’ अभी तक राजनीति की जमीन पर पैसे के पेड़ उगते थे। विमुद्रीकरण के बाद पैसे को पथरीली जमीन के नीचे गाड़ कर राजनीति के वट-वृक्ष लगाने की कोशिशें हो रही हैं, जिसकी छांव में बैठ कर केन्द्र सरकार की असफलताएं सुस्ताती रहें या कोने में दुबकी रहें।   ’राजनीति के लिए मुद्रा और मुद्रा के लिए राजनीति में परस्पर पूरक होने का भाव है।’ राजनीति और मुद्रा की आपसी साझेदारी में राजनीति शास्त्र और मुद्रा विज्ञान का व्यवहार एक-दूसरे की धाराओं का अतिक्रमण नहीं करते हैं। मोदी-सरकार ने देश की 86 प्रतिशत मुद्रा के कब्रिस्तान में राजनीति की नई नस्ल को गांठने का अभूतपूर्व उपक्रम किया है। यह कितना जायज है और इसके दुष्परिणामों का खामियाजा आम लोगों को क्यों भुगतना चाहिए?    शब्दों और तथ्यों की हेराफेरी के साथ लोक लेखा समिति के दस सवालों के आधे-अधूरे और कमजोर उत्तर मिल भी सकते हैं। केन्द्र सरकार ने समिति के सवालों के तकनीक-जवाब ढूंढना शुरू भी कर दिए हैं। केन्द्र सरकार और रिजर्व बैंक का सबसे बड़ा ’डिफेन्स’ यह है कि रिजर्व बैंक अधिनियम की धारा 7 के तहत केन्द्र सरकार जन-हित में रिजर्व बैंक को किसी भी मुद्दे पर विचार करने के लिए निर्देशित कर सकती है। इसके बावजूद राजनीति और प्रशासन के नैतिक धरातल पर करंसी के राजनैतिक इस्तेमाल से जुड़े इस ग्यारहवें सवाल का उत्तर मिलना आसान नहीं है। इस परिप्रेक्ष्य में लोकसभा में पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह की चेतावनी सटीक है कि ’विमुद्रीकरण के परिणामों को देखने, परखने और आकलन करने के लिए हममें से कई लोग मौजूद नहीं रहेंगे...।’ राजनैतिक-हथियार के रूप में करंसी के इस्तेमाल के मूर्त और अमूर्त प्रभावों और परिणामों को तत्काल आंकना मुश्किल है। पैसे की तासीर में अमीरी का लावा गरीबी की बेरहम बस्तियों पर हमेशा बरसता रहता है। गरीबी-अमीरी के इंडेक्स में जमीन-आसमान का फर्क है।   अर्थ-शास्त्रियों के अनुसार मुद्रा का उपयोग अर्थ-व्यवस्था के संचालन के लिए होता है। मूलरूप से करंसी लोगों के व्यवसाय और सुविधाओं का सबब होना चाहिए, न कि उन सवालों और कमजोरियों का जवाब, जो सरकार की राजनीतिक असफलताओं के कारण उपजते हैं। अर्थ-तंत्र में काले धन की भयावहता, महंगाई की फजीहत और नकली मुद्रा के काले प्रवाहों को नियमों के कठोर नियंत्रण से रोकना सहज प्रशासनिक प्रवृत्ति होना चाहिए। इन संदर्भों में मोदी-सरकार से इस सवाल का उत्तर अपेक्षित है कि मुद्रा का संचालन और नियमन वित्तीय विधि और दंड विधान से होना चाहिए अथवा राजनीतिक विधान से होना चाहिए? इसीलिए यह सवाल जहन को कुरेदता रहता है कि क्या इसके पहले करंसी का राजनीतिक-हथियार के रूप में किसी ने उपयोग किया है?   सत्ता और सरकार की ’बेसिक-थ्योरी’ है कि ’राजा’ कभी गलत नहीं होता अथवा उसकी नीयत की अच्छाई-बुराई को नापने का कोई बैरोमीटर उपलब्ध नहीं है। मान्यताओं के इस धरातल पर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की शुद्धता  प्रश्‍नोत्तर  और जवाबदेही से परे है। सत्तासीनों की सीनाजोरी के आगे खामोश बने रहना लोगों की नियति  भी है और बेहतरी भी है। मोदी नोटबंदी के जरिए समूचे विपक्ष को तबाह कर सकने वाली राजनीतिक-सुनामी पैदा करना चाहते हैं। इसीलिए उनके भाषणों में अर्थ शास्त्र कम, राजनीति-शास्त्र ज्यादा गरजता है।  यह महज संयोग है कि विमुद्रीकरण की खंदकोें में मोदी को राजनीतिक मुश्किलें इसलिए कम महसूस हो रही हैं कि विपक्ष की विश्‍वसनीयता डूबी हुई है। अनुकूलता यह भी है कि नोटबंदी ने नव धनाढ्य मध्यम वर्ग की जिंदगी में ज्यादा खलल नहीं डाला है। मोदी को  देश के सौ करोड़ से ज्यादा गरीबों की सरलता, सहजता और अज्ञानता का बोनस मिल रहा है। इन गरीबों को पता ही नहीं है कि उनके साथ क्या हुआ है? वो महज इसलिए खुश हैं कि पड़ोसी की काली तिजोरियां चटक रही हैं। [लेखक सुबह सवेरे के प्रधान संपादक है।]

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Dakhal News 19 January 2017
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