विशेष

    महाकाल: प्रमुख ज्योतिर्लिंग आनन्द शंकर व्यास   भारत के इतिहास में उज्जयिनी का बहुत महत्वपूर्ण स्थान है। रामायण, महाभारत, विविध पुराणों तथा काव्य ग्रंथों में इसका आदरपूर्वक उल्लेख हुआ है। धार्मिक और सांस्कृतिक दृष्टि से इसका अद्वितीय स्थान है। इसी पावन नगरी के दक्षिण-पश्चिम भू-भाग में पुण्य-सलिला क्षिप्रा के पूर्वी तट से कुछ ही अन्तर पर भगवान् महाकालेश्वर का विशाल मंदिर स्थित है। महाकाल की गणना द्वादश ज्योतिर्लिंगों में की गयी है, जो शिव-पुराण में दिये गये द्वादश ज्योतिर्लिंग माहात्म्य से स्पष्ट है:-   सौराष्ट्रे सोमनाथं च श्री शैले मल्लिकार्जुनम्।   उज्जयिन्यां महाकालमोंड्कारे परमेश्वरम्॥   केदारे हिमवत्पृष्ठे डाकिन्यां भीमशंकरम्।   वाराणस्यां च विश्वेशं त्र्यम्बंक गौतमीतटे॥   वैद्यनाथं चिताभूमौ नागेशं दारुकावने।   सेतुबन्धे च रामेशं घृष्णेशं च शिवालये॥   एतानि ज्योतिर्लिंगानि प्रातरुत्थाय य: पठेत्।   जन्मान्तरकृतं पापं स्मरणेन विनश्यति॥   उक्त द्वादश ज्योतिर्लिंगों में महाकालेश्वर का प्रमुख स्थान है। पुराणों के अनुसार महाकाल को ज्योतिर्लिंग के साथ-साथ समस्त मृत्युलोक के स्वामी के रूप में भी स्वीकार किया गया है:-   आकाशे तारकं लिगं पाताले हाटकेश्वरम्।   मृत्युलोके महाकालं लिंगत्रयं नमोस्तुते॥   इस प्रकार तीनों लोकों (आकाश, पाताल एवं मृत्यु लोक) के अलग-अलग अधिपतियों में समस्त मृत्यु लोक के अधिपति के रूप में महाकाल को नमन किया गया है। महाकाल शब्द से ही काल (समय) का संकेत मिलता है।   'कालचक्र प्रवर्त्तको महाकाल:प्रतापन:' कहकर कालगणना के प्रवर्त्तक रूप में महाकाल को स्वीकार किया गया है। महाकाल को ही काल-गणना का केन्द्र-बिन्दु मानने के अन्य कारण भी हैं। अवंतिका को भारत का मध्य-स्थान (नाभि क्षेत्र) माना गया है और उसमें भी महाकाल की स्थिति मणिपूर चक्र (नाभि) पर मानी गयी है।   आज्ञाचक्रं स्मृता काशी या बाला श्रुतिमूर्धानि।   स्वाधिष्ठानं स्मृता कांची मणिपूरमवंतिका॥   नाभिदेशे महाकालस्तन्नाम्ना तत्र वै हर:।   --वराहपुराण   (मणिपूर चक्र) योगियों के लिये कुंडलिनी है, कुंडलिनी जागृत करने की क्रिया योग के क्षेत्र में महत्वपूर्ण मानी जाती है, अत: मणिपूर चक्र पर स्थित भगवान महाकाल योगियों के लिये भी सिद्धस्थल हैं।   इसी प्रकार भूमध्यरेखा भौगोलिक कर्क रेखा को उज्जयिनी में ही काटती है, इसलिए भी समय गणना की सुगमता इस स्थान को प्राप्त है। कर्क रेखा तो स्पष्ट है ही, भूमध्य रेखा के लिए भी ज्योतिष के विभिन्न सिद्धांत ग्रंथों में प्रमाण उपलब्ध है:-       राक्षसालयदेवौक: शैलयोर्मध्यसूत्रगा:।   रोहीतकमवन्तीं च यथा सन्निहितं सर:॥   --सूर्यसिद्धांत   भास्कराचार्य पृथ्वी की मध्य रेखा का वर्णन इस प्रकार करते हैं:-   यल्लंकोज्जयिनीपुरोपरि कुरुक्षेत्रादिदेशान् स्पृशन्।   सूत्रं मेरुगतं बुधैर्निगदिता सा मध्यरेखा भुव:॥   जो रेखा लंका और उज्जयिनी में होकर कुरुक्षेत्र आदि देशों को स्पर्श करती हुई मेरु में जाकर मिलती है, उसे भूमि की मध्य रेखा कहते हैं। इस प्रकार भूमध्य रेखा लंका से सुमेरु के मध्य उज्जयिनी सहित अन्यान्य नगरों को स्पर्श करती जाती हैं, किन्तु वह कर्क रेखा को एक ही स्थान उज्जयिनी में, मध्य स्थल एवं नाभि (मणिपूर चक्र) स्थान पर काटती है, जहाँ स्वयंभू महाकाल विराजमान हैं। इसीलिये ज्योतिर्विज्ञान के सिद्धांतकार भारत के किसी भी क्षेत्र में जन्में हो अथवा उनका कार्य या रचना क्षेत्र कहीं भी रहा हो, सभी ने एकमत से कालचक्र प्रवर्तक महाकाल की नगरी उज्जयिनी को ही काल-गणना का केन्द्र स्वीकार किया था। आज भी भारतीय पंचांगकर्त्ता उज्जयिनी मध्यमोदय लेकर ही पंचांग की गणना करते हैं। इस प्रकार अदृश्य रूप से काल गणना के प्रवर्तक तथा प्रेरक महाकाल हैं।   दृश्य रूप में श्वास-निश्वास से लेकर दिन, मास, ऋतु, अयन एवं वर्ष की गणना का संबंध सूर्य से है। एक सूर्योदय से दूसरे सूर्योदय तक एक दिन (दिन के सूक्ष्म विभाग घटी, पल, विपल आदि) और दिनों से मास, ऋतु वर्ष, युग-महायुग और कल्प आदि की गणना चलती रहती है। ऐसे अनेक कल्पों के संयोग (जो वाचनिक संख्याओं से परे हों) को ही महाकाल कहते हैं। सूर्य प्रतिदिन (24 घंटे में) एक उदय से दूसरे उदय पर्यन्त 360 अंश-21,600 कलाएँ चलता है, यही स्वस्थ मनुष्य की 24 घंटे में श्वासों की संख्या भी है। अर्थात् सूर्य की प्रत्येक कला के साथ मनुष्य के श्वास-निश्वास की क्रिया जुड़ी हुई है और सभी में आत्म-रूप से वह विद्यमान है। कहने का तात्पर्य यह कि काल-गणना में दृष्ट (सूर्य) अदृष्ट (महाकाल) में सामंजस्य है। महाकाल ज्योतिर्लिंग हैं और ज्योतिर्लिंग की दिव्य ज्योति के दर्शन चर्मचक्षु से नहीं होते; तप से प्राप्त दिव्य चक्षु से ही हो सकते हैं। सूर्य स्वत: अग्नितत्व, ज्योति के पुंज, तेज और प्रकाश का कारण हैं। अत: महाकाल ज्योतिर्लिंग हैं और सूर्य स्वत: ज्योति के पुंज हैं, महाकाल ही सूर्य हैं और सूर्य ही महाकाल हैं।   महाकालेश्वर के मंदिर में उदयादित्य के नागबन्धस्थ शिलालेख में महाकाल का जो ध्यान दिया गया है, उसमें महाकाल को प्रणव ( ओम्) स्वरूप माना है। वह पद्य इस प्रकार है:-   क्रीड़ाकुंडलितोरगेश्वरतनूकाराधिरुढाम्बरा   नुस्वारं कलयन्नकारुचिराकार: कृपार्द्र: प्रभु :।   विष्णोर्विश्वतनोरवन्तिनगरीहृत्पुण्डरीकेवसन्   ओंकाराक्षरमूर्तिरस्यतु महाकालोअंतकालं सताम्॥   अर्थात जिनका रुचिर आकार ही 'अकार' है। क्रीड़ा से कुण्डलित शेषनाग शरीर को जिन्होंने 'उकार' का रूप देकर आकाश को अनुस्वार के रूप में धारण किया है तथा विश्वरूप विष्णु के अवन्ति नगरीरूपी हृदयकमल में जो निवास करते हैं, ऐसे अक्षर (कभी नष्ट न होने वाली) मूर्ति, ओंकार के रूप में विराजमान, अपनी कृपा से द्रवित हृदय वाले प्रभु महाकाल सज्जनों के अन्तकाल को दूर भगावें।   इस प्रकार समस्त भूलोक के स्वामी, काल-गणना के केन्द्र-बिन्दु योगियों की कुंडलिनी नाभि पर स्थित और स्वत: प्रणवस्वरूप होने से ही श्री महाकाल प्रमुख ज्योतिर्लिंग हैं।  

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Dakhal News 27 July 2016

        मुख्यमंत्री  शिवराज सिंह चौहान से  विधानसभा में सिंगापुर के काउंसल जनरल  अजीत सिंह ने मुलाकात की। उन्होंने बताया कि अक्टूबर माह में होने वाली ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट में सिंगापुर पार्टनर कंट्री के रूप में शामिल होगा। इस अवसर पर मुख्य सचिव  अंटोनी डिसा भी उपस्थित थे।इससे पहले खेल एवं युवा कल्याण मंत्री श्रीमती यशोधरा राजे सिंधिया से रिपब्लिक आफ सिंगापुर के कॉसंल जनरल  अजीत सिंह ने मुलाकात की।   मुख्यमंत्री  चौहान ने कहा कि सिंगापुर से प्रदेश के रिश्ते और अधिक बेहतर बनायें। ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट में सिंगापुर का औद्योगिक प्रतिनिधि-मंडल भेजें। सिंगापुर ने पिछले वर्षों में कई विशिष्ट क्षेत्र में उल्लेखनीय विकास किया है। सिंगापुर के युवा नेताओं का प्रतिनिधि-मंडल मध्यप्रदेश में आये तथा यहाँ की प्रगति का अध्ययन करें। ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट में आने वाले प्रतिनिधि-मंडल में सिंगापुर की अच्छी कंपनियों के प्रतिनिधि शामिल किये जायें।   काउंसल जनरल श्री अजीत सिंह ने कहा कि सिंगापुर मध्यप्रदेश को निवेश के आकर्षक डेस्टिनेशन के रूप में देखता है। उनके देश का प्रतिनिधि-मंडल पूरी तैयारी से ग्लोबल इंवेस्टर्स समिट में शामिल होगा। मध्यप्रदेश ने बीते वर्षों में सभी क्षेत्रों में उल्लेखनीय विकास किया है। चर्चा के दौरान प्रमुख सचिव वाणिज्य एवं उद्योग  मोहम्मद सुलेमान, मुख्यमंत्री के प्रमुख सचिव  एस.के.मिश्रा और ट्रायफेक के अपर प्रबंध संचालक  व्ही. किरण कुमार भी उपस्थित थे।  

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Dakhal News 26 July 2016

राजनीति

  सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच हुई तीखी नोंक-झोंक     कांग्रेस महासचिव दिग्विजय सिंह विधानसभा के कार्यकारी नेता प्रतिपक्ष के काम को लेकर किए गए ट्वीट पर  सदन में कांग्रेस-भाजपा में जमकर बहस हुई। इसके चलते अध्यक्ष को आधे घंटे के लिए कार्यवाही स्थगित करनी पड़ी। संसदीय कार्य मंत्री नरोत्तम मिश्रा ने शून्यकाल में सदन की कार्यवाही के दौरान पाइंट आॅफ आर्डर के तहत किसी का नाम लिए बगैर कहा कि एक पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव सदन के कामकाज पर बात करते हैं। उन्होंने कहा कि नेता प्रतिपक्ष अजा के हैं और अच्छे विषयों को उठाते हैं लेकिन सदन के बाहर के लोग ट्विटर के माध्यम से बताते हैं कि क्या उठाएं या न उठाएं? क्या किसी पार्टी के महासचिव को यह अधिकार है कि वह यह बताए कि सदन में क्या उठाएं व क्या न उठाएं। उन्होंने कहा कि अजा के लोग अच्छे पदों पर बैठे हैं, इसलिए उनके विरुद्ध षड़यंत्र किया जा रहा है। पंचायत मंत्री गोपाल भार्गव ने कहा कि यह षड़यंत्र नहीं लोकतंत्र का अपमान है और सदन की अवमानना है। इस पर अध्यक्ष ने कहा कि नरोत्तम ने जो पाइंट आॅफ आर्डर में कहा है, उस पर व्यवस्था को वे सुरक्षित रखते हैं। मंत्री ओमप्रकाश धुर्वे ने भी संसदीय कार्य मंत्री मिश्रा का समर्थन किया।   कांग्रेस विधायक तरुण भनोट ने कहा कि आज अखबारों में पढ़ा है कि मुख्यमंत्री ने कहा कि बाबूलाल गौर को बोलने से रोकें। यह विशेषाधिकार हनन का मामला बनता है। भनोट का मंत्री गौरीशंकर शेजवार ने विरोध किया और दोनों में बहस होने लगी।   फिर बिफरे गौर पर मंत्री मीणा उद्यानिकी राज्यमंत्री सूर्यप्रकाशमीणा ने पूर्व मंत्री बाबूलाल गौर के खिलाफ अपना हमला जारी रखते हुए कहा है कि गौर खुद को मंत्री पद से हटए जाने का दर्द पचा नहीं  पा रहे हैं लिहाजा वे सरकार के खिलाफ अनर्गल बयानबाजी कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि  विदिशा जिला इकाई बाबूलाल गौर के खिलाफ निंदा प्रस्ताव लाएगी । इसके लिए सिंरौज में एक बैठक का आयोजन कर निंदा प्रस्ताव पारित कर इसे प्रदेश इकाई को भेजा जाएगा। मीणा ने आज विधानसभा परिसर में संवाददाताओं से चर्चा में कहा कि कर्ज लेना नियमित प्रक्रिया होती है। महाराष्ट सरकार में दो लाख करोड़ का तो यूपी सरकार ने ढाई लाख करोड़ का कर्ज लिया हुआ है। उन्होंने कहा कि कर्ज विकास के लिए लिया जाता है। केंद्र के भेदभाव पर सदन में हंगामा, कांग्रेस का वॉकआउट केंद्र से पेयजल से मिलने वाली राशि को लेकर  विधानसभा में जमकर हंगामा हुआ। इसे लेकर सत्ता-पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी बहस और नोक-झोंक हुई। कांग्रेस का आरोप था कि पिछले दो सालों से केंद्र पेयजल के लिए पर्याप्त राशि नहीं मिल रही है। उसने प्रदेश सरकार पर पेयजल संकट से निपटने में अक्षमता का आरोप लगाते हुए सदन से वाकआउट कर दिया। कांग्रेस के ओंकार सिंह ने पूछा था कि केन्द्र से पिछले तीन सालों में पेयजल के लिए कितनी राशि मिली है। मंत्री कुसुम मेहदेले ने कहा कि पिछले तीन सालों में पेयजल के लिए कुछ कम राशि जरूर मिली है पर प्रदेश में कही भी पेयजल संकट नहीं है। उनके इतना कहते ही कांग्रेस के अजय सिंह, रामनिवास रावत, जीतू पटवारी समेत अनेक सदस्य अपने स्थान पर खड़े हो गए। उनका कहना था कि केंद्र से यूपीए सरकार की तुलना में अब प्रदेश को कम राशि मिल रही है पर पहले धरना और प्रदर्शन करने वाली प्रदेश सरकार अब खामोश है। अजय सिंह का कहना था कि पहले सीएम धरने पर बैठ जाते थे अब भी वह धरने पर बैठेंगे क्या। इस बीच मंत्री गोपाल भार्गव ने कहा कि केन्द्र ने ग्रामीण पेयजल के लिए 14 अरब रुपए दिए हैं। भार्गव के बोलने पर कांग्रेस सदस्यों ने आपत्ति करते हुए कहा कि वे दूसरे मंत्री से जुड़े सवाल का जवाब क्यों दे रहे हैं। इस पर अध्यक्ष ने कहा कि यह मामला उनके विभाग से भी जुड़ा हुआ है। कांग्रेस सदस्यों के इस मसले पर लगातार बोलने का भाजपा के नरेन्द्र सिंह कुशवाह, शंकरलाल तिवारी समेत अनेक सदस्यों ने प्रतिवाद किया। जिससे हंगामे की स्थिति बन गई। बाद में कांगे्रस ने यह कहते हुए सदन से वाकआउट कर दिया कि वे मंत्री के उत्तर से संतुष्ट नहीं है। सरकार के इशारे पर बढ़े दालों के दाम विधानसभा में कार्यकारी नेता प्रतिपक्ष बाला बच्चन ने प्रदेश में दालों की कीमत में बढ़ोतरी के लिए राज्य सरकार को जिम्मेदार ठहराया है। उन्होंने कहा कि सरकार ने जानबूझकर ऐसे हालात निर्मित किए कि लोग दाल महंगी खरीदने पर मजबूर हों। प्याज खरीदी के मामले में भी गड़बड़ी के आरोप बच्चन ने लगाए हैं। विधानसभा परिसर में मीडिया से चर्चा करते हुए कार्यकारी नेता प्रतिपक्ष बच्चन ने कहा कि प्रदेश में सरकार के इशारे पर दालों के रेट आसमान छू रहे हैं। इस मामले में जानकारी मांगने पर बताया गया कि जांच के बाद बीस हजार क्विंटल दाल पूरे प्रदेश में जब्त हुई थी उसमें नौ सौ क्विंटल ही नीलाम हुई है। उन्होंने कहा कि शासन ने पूरी दाल की नीलामी जानबूझकर नहीं कराई है ताकि दालों के रेट बढ़े रहें और जनता परेशान होती रहे। तो जा सकते हैं कोर्ट: जीतू पटवारी कांग्रेस विधायक जीतू पटवारी ने कहा कि सिंहस्थ को लेकर 90 सवाल लगाए गए हैं। इसमें से बीस सवाल उनकी ओर से लगे हैं। सरकार सही जानकारी नहीं दे रही है। अगर इस मामले में सही जानकारी नहीं मिली तो कोर्ट भी जा सकते हैं।मंत्री गोपाल भार्गव ने कहा कि सिंहस्थ पर सदन में पर्याप्त चर्चा  हो रही है। एक सप्ताह से अधिक समय से इस पर चर्चा हो रही है। अब कुछ नहीं बचा है। चिटफंड पर ब्रेक के लिए फइक के साथ बनेगी रणनीति: भूपेंद्र गृह मंत्री भूपेन्द्र सिंह ने कहा है कि चिटफंड कंपनियों का फर्जीवाड़ा रोकने के लिए पुलिस अफसर जल्द ही भारतीय रिजर्व बैंक के अफसरों के साथ बैठेंगे और इन पर प्रभावी रोक लगाने के लिए रणनीति तय की जाएगी। आज विधानसभा में विधायक मुरलीधर पाटीदार के चिटफंड कंपनियों की धोखाधड़ी से जुड़े सवाल का जवाब देते हुए गृह मंत्री ने कहा कि प्रदेश में ही नहीं पूरे देश में कई चिटफंड कंपनियां लोगों के साथ धोखाधड़ी कर रही है। उन्होंने कहा कि रिजर्व बैंक अपनी खानापूर्ति के बाद इन कंपनियों को लायसेंस देता है पर पुलिस के संज्ञान में यह भी आया है कि कई कंपनियां बिना लायसेंस के भी अपना कारोबार संचालित कर रही है। उन्होंने कहा कि इस पर लगाम लगाने के लिए विभाग गंभीर है। उन्होंने कहा कि इसके लिए जल्द ही थानास्तर पर भी बैठकों का आयोजन किया जाएगा। जिसमें जनप्रतिनिधियों के अलावा बैंक के अधिकारी भी शामिल होंगे। उन्होंने जनप्रतिनिधियों से भी अपील की कि वे अपने क्षेत्र में इस तरह की कंपनी की जानकारी होने पर उसकी जानकारी पुलिस को दें। इस बीच शैलेन्द्र पटेल ने सुझाव दिया कि पीएचक्यू स्तर पर भी इसके लिए सेल बनाया जाना चाहिए, इस पर मंत्री ने समीक्षा करने का आश्वासन दिया।

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Dakhal News 27 July 2016

    राघवेंद्र सिंह   मध्यप्रदेश भाजपा कार्यकारिणी का गठन छह माह से लंबित है। पुरानी काम चलाऊ कार्यकारिणी से काम चलाया जा रहा है। राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह अपनी टीम बनाएंगे, उसके बाद प्रदेश की टीम गठित होगी। आधा साल बीत गया इस चक्कर में। इतनी देर पहले कभी नहीं हुई। भाजपा में बहुत विचार विमर्श के बाद जो निर्णय या निष्कर्ष आते हैं अक्सर वे खोदा पहाड़ की तर्ज पर निराश करने वाले और जगहसाई के होते हैं। मिसाल के तौर पर ढाई साल बाद शिव कैबिनेट विस्तार में जिन क्षेत्रों से जो हीरे लाए या हटाए गए उससे क्षेत्रीय, जातीय, असंतुलन साफ दिखा। हालांकि उसकी समीक्षाओं में बहुत कुछ लिखा जा चुका है। यह स्थिति निगम मंडलों में लालबत्ती देने के लिए चुने गए नगीनों की भी रही। इन गल्तियों के साथ विभाग वितरण भी कम भयावह नहीं रहा। इसके विस्तार में फिर कभी जाएंगे। अच्छे परिणामों के लिए विषय विशेषज्ञों के बजाए कमतर काबिलों को महकमों का जिम्मा दिया गया। हालांकि यह मुख्यमंत्री का विशेषाधिकार है। हम किसी मंत्री की काबलियत को कम करना भी नहीं चाहते, लेकिन अच्छे और जल्दी नतीजे चाहिए तो घोड़े पर चुस्त, चालाक, चौकस और ईमानदार सवार भी चाहिए। विस्तार समारोह से लेकर विभाग वितरण आदि ने नाउम्मीद ज्यादा किया है। प्रदेश भाजपा की नई कार्यकारिणी की घड़ी लगता है अब निकट आ गई है। वैसे तो कई बार कहा गया कि गठन शीघ्र किया जाएगा मगर नेताओं के आश्वासन पर विश्वास कम रह गया सो जैसा लिखा भी जाता है। हालांकि अधिकत तौर पर यह भी कहा जाता है कि पुराने ही सही प्रदेश पदाधिकारी तो हैं न। लेकिन नंदूभैया की टीम में कौन आएगा कौन जाएगा इसे लेकर असमंजस ने सबको उदासीन कर रखा है। कार्यकर्ताओं को डर है बहुत मंथन के बाद अमृत कम, विष के ज्यादा निकलने का। पुराने नेता-कार्यकर्ताओं को नई टीम में जगह मिलेगी या मामूली बदलाव के बाद पैराशूट लैंडिंग करने वाले स्काईलेब ही धमाके के साथ आएंगे। सच्चे और अच्छे कार्यकर्ताओं को जगह नहीं मिली तथा निजी समर्थकों की ताजपोशी होती है तो अगले चुनाव की डगर कठिन होती दिखेगी। मिसाल के तौर पर तीन नगरीय चुनावों मंडीदीप, मैहर और ईशागढ़ में भाजपा की एकतरफा हार मनमानी करने वालों को कार्यकर्ताओं की तरफ से जगाने वाला थप्पड़ है। कार्यकर्ताओं में उम्मीद है कार्यकारिणी गठन में पहाड़ खोदने पर चुहिया तो कम से कम नहीं निकलेगी। उपचुनाव में मंत्रियों को प्रभार नगरीय निकाय चुनावों में हार से सबक लेते हुए भाजपा ने शहडोल लोकसभा व नेपानगर विधानसभा उपचुनाव में मंत्रियों को प्रभार देने का फैसला किया है। हर विधानसभा क्षेत्र में संगठन के एक पदाधिकारी के साथ मंत्रियों को तैनात किया जाएगा। इधर उत्साहित कांग्रेस भी सक्रिय है। मुकाबला कड़ा हो सकता है। भाजपा चिंतित है क्योंकि उपचुनाव हारे तो प्रदेश भाजपा व मुख्यमंत्री के नेतृत्व पर सवाल खड़े किए जाएंगे। इसलिए अब उम्मीदवार चयन से लेकर रणनीति बनाने में कोई जोखिम नहीं उठाया जाएगा। कांग्रेस को दोनों जगह खोने के लिए कुछ नहीं है, इसलिए वह भी बिना दबाव के 20-20 के अंदाज में कुछ प्रयोग कर सकती है। दीनदयालजी का ताबीज जनसंघ के संस्थापक और जिनका चिंतन भाजपा की रीढ़ है- पंडित दीनदयाल उपाध्याय का विचार एक ताबीज की तरह है जिसे छाती से लगाने या बांह में बांधने के फायदे ही फायदे होंगे। सो पेश है उनका मंत्र जिसकी उनके अनुयायियों को सख्त जरूरत भी है। छोटी बड़ी बैठक, सभा में उनका नाम लेते नहीं थकते, जिनका दिया अंत्योदय और एकात्म मानववाद भाजपा के लिए गीता रामायण से कम नहीं है। संगठन को लेकर क्या कहते हैं दीनदयालजी उन्हीं के शब्दों में  ‘राजनीति के क्षेत्र में कार्य करने वाले कार्यकर्ताओं की आजीविका के लिए व्यवसाय आदि आवश्यक है। जीवन यापन के लिए अनिवार्य है। किन्तु राजनीतिक क्षेत्र में केवल अर्थार्जन के लिए प्रवेश करने वाले या राजनीतिक प्रभाव से अर्थार्जन करने वाले या अर्थार्जन के लिए ही दल में सक्रिय लोग दल और देश दोनों के लिए घातक होते हैं। संगठन में विकार का कारण भी ऐसे ही कार्यकर्ता बनते हैं। कुल मिलाकर अर्थ की चाह संगठन में विकृतियों का द्वार है।’ प्रदेश भाजपा की नई कार्यकारिणी में ऐसे तत्व नहीं आएं इसका जिम्मा नंदूभैया से लेकर संगठन महामंत्री सुहास भगत, प्रदेश प्रभारी विनय सहस्रबुद्धे पर है। देखिए आगे-आगे होता है क्या... जनसंपर्क महकमा याने ‘गरीब की लुगाई’ प्रदेश का जनसंपर्क महकमा कभी मुख्यमंत्रियों के आंख, कान और नाक हुआ करता था। मगर इस आंख के तारे जैसे विभाग की हालत खराब है। यह कई बरस से गरीब की लुगाई की तरह हो गया है जिसके सब मजे ले रहे हैं। हंसी ठिठोली भी उसके साथ और सरकार की बदनामी का ठीकरा भी उसी के माथे। तभी तो सीएम-मंत्री की छवि सुधार का काम बाहरी लोग कर रहे हैं। हद है यह.. जनसंपर्क विभाग का जलवा ऐसा भी था कि आज के पत्रकारों और अफसरों को उस पर यकीन करना मुश्किल होगा। मुख्यमंत्री अर्जुन सिंह हुआ करते थे। जो खुद कम बोलते थे उनकी आंखों और अंदाज से ही नौकरशाही समझ लेती थी कि करना क्या है। एक किस्सा है अविभाजित मध्यप्रदेश के छत्तीसगढ़ का। वहां अफसरों की मीटिंग में अर्जुन सिंह और जनसंपर्क प्रमुख सुदीप बैनर्जी उनके साथ थे। बारिश में आदिवासियों को कैरोसिन की जरूरत ज्यादा होती थी, तब राशन दुकान से मिलने वाले घासलेट की तंगी भी रहती थी सो यह बाजार में कम तो था ही मंहगा भी मिलता था। बैठक में उस समय के जिला जनसंपर्क अधिकारी ने एक पर्ची में लिखा कि घासलेट के दाम कम कर दिए जाएं तो आदिवासियों को इससे राहत मिलेगी। चपरासी को इशारे से बुलाकर यह पर्ची उस अधिकारी ने अपने साहब (याने बैनर्जी) को देने का कहा। चूंकि अर्जुन सिंह और बैनर्जी अगल-बगल ही बैठे थे इसलिए पर्ची साहब याने अर्जुन सिंह को दे दी गई। पहले सरकार में साहब का मतलब अर्जुन सिंह ही माना जाता था। यह देख जनसंपर्क अधिकारी सख्ते में आ गया। उन्होंने मुख्यमंत्री की तरफ कातर भाव से माफी के अंदाज में देखा। इसके बाद अर्जुन सिंह ने अपने संबोधन के दौरान ही चौकाने वाली घोषणा कर दी, कि सरकार घासलेट के दाम में कटौती करती है। यह महत्व था जनसंपर्क अधिकारी का सीएम की नजर में। इसके अलावा जनसंपर्क संचालक या आयुक्त कोई बात सीएम या किसी मंत्री से संकेत में भी कह दे तो न चाहने पर भी उसपर गंभीरता से अमल होता था। क्योंकि यह माना जाता था कि जनसंपर्क से जो बात आ रही है वह सरकार व प्रशासन को लेकर जनता व समाज की जमीनी हकीकत है। तब जनसंपर्क कुछ लोगों के हित साधने के लिए किसी एजेंडे पर काम नहीं करता था। सरकार की छवि चमकाने का काम करता था, जिसमें मुख्यमंत्री के साथ मंत्रिगण भी शामिल होते थे। जनसंपर्क प्रमुख जो कि अपने जिला अधिकारियों से मंत्री व प्रशासन की ग्राउंड रिपोर्ट जब सीएम को देते थे उसके आधार पर अधिकारियों की पोस्टिंग व मंत्रियों के विभाग तक कई दफा तय होते थे। चुनाव के समय भी जनसंपर्क की जिला व कस्बों की रिपोर्ट जिसमें नेताओं के समीकरण, चुनावी गणित,दावेदारों की छवि और सेबोटेज पर आई रिपोर्ट को गंभीरता से लिया जाता था। तब के एल.के. जोशी, सुदीप बैनर्जी, ओ.पी. रावत जैसे जनसंपर्क प्रमुख के नामों की आज भी चर्चा होती है जिन्होंने विभाग की वर्किंग 24 घंटे मीडिया की तर्ज पर रखी थी। मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के सचिन तेंदुलकर कहे जाने वाले नरों में उत्तम मिश्रा के पास जनसंपर्क विभाग है। उन्हें मिला है सबकी भौजाई बने इस महकमे की पुन: प्राण प्रतिष्ठा का जिम्मा।[राघवेंद्र सिंह की वॉल से ]

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Dakhal News 25 July 2016

मीडिया

    अमेरिका में हुए एक शोध में अखबार के रिपोर्टर की नौकरी को दुनिया के सबसे खराब जॉब में रखा गया है। यह सर्वे करियरकास्ट ने किया है।    इस सर्वे में अखबार के रिपोर्टर की नौकरी को दुनिया की सबसे खराब नौकरी बताया गया है। यह सर्वे सैलरी, फ्यूचर, आउटलुक और काम के माहौल के हिसाब से तैयार की गई है।  शोध में तकरीबन 200 पेशों को दुनिया के बेहतरीन और बुरे कामों की लिस्ट में रखा गया। इसमें क्राइटेरिया का आधार इनकम, दबाव, काम का माहौल और नियुक्ति के स्थायित्व के आधार पर था। करियरकास्ट फर्म के शोध के मुताबिक वैज्ञानिक की नौकरी सबसे अच्छी और अखबार के रिपोर्टर की सबसे खराब मानी। गई है।   शोध बताता है कि बीते पांच सालों में रिपोर्टर बनने का क्रेज तेजी से घटा है। साल 2022 तक इसमें और गिरावट आने का अंदेशा है, क्योंकि तमाम कंपनियां अखबार बंद कर रही हैं। दस सबसे खराब जॉब की लिस्ट में जो जॉब है उनमें टैक्सी ड्राइवर, रिटेल सेल्स पर्सन, एड्वर्टाइजिंग सेल्स मैन , मेन शेफ, दमकल विभाग और कचरा विभाग में काम करने वाले कर्मचारी भी शामिल है। 

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Dakhal News 25 July 2016

  सरकार की लापरवाही और मीडिया समूह का शोषण  जिम्मेदार     भोपाल के पत्रकार शिवराज सिंह की प्रतिभावान बेटी ने पिता की आर्थिक तंगी से परेशान होकर आज खुदकुशी कर ली। वह आठवीं की छात्रा थी। इंडियन प्रेस फोरम के अध्यछ महेश दीक्षित ने इस झकझोर देने वाली दुखद घटना पर शोक जताया है।तथा कहा कि इसके लिए पूर्णत: शोषक मीडिया समूह और सरकार की लापरवाही दोषी है।  उन्होंने पत्रकार शिवराज को समुचित आर्थिक सहायता देने की राज्य सरकार से मांग की है। तथा पत्रकार साथियों से दुख की इस घड़ी में शिवराज के साथ खड़े होने का आग्रह किया है।    पत्रकार शिवराज सिंह भोपाल के कई अखबारों में काम कर चुके हैं। कुछ दिन पहले प्रबंधन की मनमानी के चलते उन्हे भोपाल के एक प्रमुख दैनिक समाचार पत्र से नौकरी से निकाल दिया गया था। इसके बाद से वे भयंकर आर्थिक तंगी से गुजर रहे थे। स्कूल की टॉपर उनकी बेटी पिता की इस  तंग हालत से परेशान थी। वो पिता पर बोझ नहीं बनना चाहती थी, इसलिए उसने जान दे दी।    फोरम के अध्यछ श्री दीक्षित ने कहा कि ऐसे सैकड़ों काबिल पत्रकार आर्थिक तंगी के दौर से गुजर रहे हैं और उनके बच्चे इसका खामियाजा भुगत रहे हैं। वजह मीडिया मालिक उन्हें काम का पूरा दाम (वेतन) न देकर उनका शोषण कर रहे हैं। आज प्रदेश के कई मीडिया समूह पत्रकारों के साथ  यह रवैया अपनाए हुए हैं। उन्हें कई-कई महीने वेतन नहीं दिया जा रहा है। यदि पत्रकार कर्मी वेतन मांगने जाता है तो उसे मैनेजमेंट द्वारा अपमानित किया जाता है या फिर उसे नौकरी से निकाल दिया जाता है। जबकि मीडिया समूह खुद सरकार से समस्त सुविधाओं का लाभ से रहे हैं। दबाव बनाकर हर महीने लाखों के विग्यापन ऐंठ रहे हैं।  श्री दीछित ने कहा कि हालांकि सरकार ने पत्रकारों के हित में पत्रकार स्वास्थ्य बीमा और पत्रकार दुर्घटना जैसी योजनाएं लागू की हैं।पत्रकारों को इन योजनाओं का लाभ भी मिल रहा है, लेकिन पत्रकारों के लिए बनाए गए मजीठिया वेज बोर्ड की सिफारिशों को सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बावजूद सरकार लागू नहीं करा पा रही है।  दीक्षित ने कहा अखबारों के दफ्तरों में मजीठिया वेजेज को लागू कराने और पत्रकारों को वेजेज के अनुसार वेतन मिल रहा है या नहीं इसकी निगरानी करने की जिम्मेदारी सरकार के श्रम विभाग की है। लेकिन लगता है श्रम विभाग ने इन निरंकुश हो चुके मीडिया समूहों के सामने घुटने टेक दिए हैं।  पत्रकार शिवराज की प्रतिभावान बेटी की आर्थिक तंगी में खुदकुशी, सरकार की लापरवाही और मीडिया समूहों की शोषण नीति का नतीजा है।  श्री दीछित ने कहा कि, फिर कोई पत्रकार की बेटी खुदकुशी न करे, इसके लिए सरकार को चाहिए कि, वह ऐसे मीडिया समूहों पर कार्रवाई करे, जो मजीठिया वेजेज का लाभ अपने यहां काम करने वाले पत्रकार कर्मियों को नहीं दे रहे हैं। तथा जब तक मीडिया समूह अपने यहां कार्यरत पत्रकार कर्मियों को मजीठिया वेतनमान नहीं दे देते हैं, तब तक इन मीडिया समूहों को दी जाने वाली समुचित सरकारी सुविधाएं तथा सरकारी विग्यापन बंद कर देना चाहिए।

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Dakhal News 24 July 2016

समाज

      वह दिन दूर नहीं जब रसोई गैस की तरह तरह केरोसिन की सब्सिडी भी सीधे गरीबों के बैंक खाते में जाएगी। सरकार केरोसिन की कालाबाजारी रोकने के इरादे से चुनिंदा33 जिलों में केरोसिन सब्सिडी सीधे गरीबों के बैंक खाते में भेजने की पायलट योजना के साथ पूरे देश में इसे विस्तार देने की योजना बना रही है। इसके अलावा केंद्र ने हरियाणा को जल्द ही केरोसिन फ्री राज्य बनाने का लक्ष्य भी रखा है।   पेट्रोलियम मंत्री धमेंद्र प्रधान ने  लोक सभा में एक पूरक प्रश्न का जवाब देते हुए यह जानकारी दी। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में हुई अंतरराज्यीय परिषद की बैठक के एजेंडा में जन वितरण प्रणाली को डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर के दायरे में लाने का मुद्दा शामिल था। कर्नाटक, हिमाचल प्रदेश, हरियाणा, झारखंड, मध्य प्रदेश, गुजरात और उड़ीसा ने इसे डीबीटी के तहत लाने को सहमति दे दी है। इसी वर्ष 33 जिलों में केरोसिन सब्सिडी भेजने के लिए डीबीटी की एक पायलट योजना चल रही है।   प्रधान ने कहा कि केरोसिन सब्सिडी डीबीटी के माध्यम से देने से जो भी धनराशि केंद्र को बचेगी उसका 75 प्रतिशत राज्यों को दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि सरकार राज्यों को केरोसिन फ्री बनाने की दिशा में भी कदम बढ़ा रही है। हरियाणा को जल्द ही केरोसिन फ्री राज्य बना दिया जाएगा। पेट्रोलियम उत्पादों को जीएसटी के दायरे में लाने के सवाल के जवाब में प्रधान ने कहा कि सरकार इस दिशा में राज्यों की सहमति के साथ प्रयास कर रही है। उन्होंने इस आरोप को खारिज किया कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट का पूरा फायदा ग्राहकों को नहीं दिया जा रहा है। प्रधान ने कहा कि मोदी सरकार ने अब तक 27 बार पेट्रोल तथा 21 बार डीजल की कीमतों में कटौती की है।   कांग्रेस सदस्य शशि थरूर ने जब यह सुझाव दिया कि सरकार को पेट्रोल व डीजल की कीमतों में कमी का फायदा ग्राहकों को देना चाहिए ताकि अर्थव्यवस्था में मांग बढ़ सके। प्रधान ने इसका जवाब देते हुए कहा कि मोदी सरकार की प्राथमिकता में कृषि व ग्रामीण क्षेत्रों में ढांचागत सुविधाओं का विकास करना है, इसलिए सरकार कुछ राशि इन उत्पादों पर टैक्स लगाकर जुटा रही है। उन्होंने कहा कि तमिलनाडु और मिजोरम तथा कुछ केंद्र शासित प्रदेशों को छोड़कर सभी राज्यों ने पेट्रोलियम उत्पादों पर टैक्स बढ़ाया है।

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Dakhal News 26 July 2016

  आचार्यश्री के चातुर्मास को स्थाई बनाने महापौर की पहल रवीन्द्र जैन    भोपाल के महापौर आलोक शर्मा इस बात से बहुत प्रसन्न है कि उनके कार्यकाल में दुनिया के सबसे बड़े संत आचार्य विद्यासागर जी महाराज भोपाल पधारे हैं और यहां चातुर्मास कर रहे हैं। इस चातुर्मास को स्थाई बनाने के लिए आलोक शर्मा भोपाल के एक कालोनी और एक सड़क का नाम आचार्य विद्यासागर जी के नाम पर रखने पर भी विचार कर रहे हैं। इस संबंध में उनकी जैन समाज की प्रतिनिधियों से चर्चा चल रही है। वे मुख्यमंत्री से चर्चा के बाद इसे अंतिम रूप देंगे।    आचार्य विद्यासागर जी महाराज के दर्शन करने लोगों का तांता लगा हुआ है। रविवार को कलश स्थापना समारोह में 50 हजार से अधिक लोग भोपाल पहुंचे थे। इस समारोह में 9 श्रावकों को आचार्यश्री के चातुर्मास कलश की स्थापना का सौभाग्य मिला। इस अवसर पर आचार्य विद्यासागर जी महाराज ने कहा कि भोपाल का अर्थ है कि जो रक्षा करे अर्थात यहां रहने वालों को अपनी संस्कृति और संस्कारों की रक्षा करना चाहिए। सोमवार को भी हबीबगंज जैन मंदिर में आचार्यश्री की संगीतमय पूजन के बाद उन्होंने अपने आर्शीवचन में कहा कि हमारा चातुर्मास चार माह में हो जाएगा और यहां से गमन भी हो जाएगा,लेकिन आपको इस चातुर्मास का पूरा लाभ लेना चाहिए। जीवन के रहस्यों को समझने के लिए स्वयं और पर का भेद समझना चाहिए। आप स्व कल्याण की और बढ़ते हैं तो आपके चातुर्मास का श्रीगणेश होगा। हम चले जाएंगे आपका चातुर्मास चलता रहेगा।  सोमवार को आचार्यश्री की आहारचर्या  ब्रह्मचारी जयकुमार जैन, जितेन्द्र जैन, सतीष जैन के चौके में हुई। इस परिवार ने रविवार को आचार्यश्री के चातुर्मास का प्रथम कलश स्थापित करने का सौभाग्य प्राप्त किया था।    महापौर के प्रयास महापौर आलोक शर्मा लगातार आचार्य विद्यासागर जी महाराज के संपर्क में है और लगभग प्रतिदिन उनके दर्शन करने और उनसे आशीर्वाद लेने पहुंच रहे हैं। उन्होंने हबीबगंज जैन मंदिर के आसपास सौंदर्यीकरण के लिए नगर निगम से दो करोड़ रुपए स्वीकृत कर दिए हैं। अब वे जैन समाज की संस्था दिगम्बर जैन सोश्यल ग्रुप रेलवे स्टेशन मध्य रीजन और दिगम्बर जैन मुनिसंघ सेवा समिति के पदाधिकारियों के आग्रह पर भोपाल की प्रोफेसर कालोनी जिसे विद्या विहार के नाम से भी जाना जाता है का नाम आचार्य विद्यासागर कालोनी करने एवं पोलिटेक्निक चौराहे से डीपो चौराहे तक बनने वाली सिक्स लेन रोड का नाम आचार्य विद्यासागर मार्ग रखने पर विचार कर रहे हैं। आलोक शर्मा ने अग्निबाण से चर्चा में बताया कि इस संबंध में वे पहले मुख्यमंत्री से चर्चा करेंगे। इसके बाद नगर निगम परिषद की बैठक में प्रस्ताव लाएंगे। शर्मा का कहना है कि आचार्य विद्यासागर महाराज का भोपाल में चातुर्मास इस सदी की बड़ी उपलब्धि के रूप में देखता हूं।    इन्हें मिला कलश स्थापना का सौभाग्य आचार्य विद्यासागर जी महाराज के चातुर्मास कलश की स्थापना रविवार को हुई जिन लोगों को चातुर्मास कलश स्थापित करने का सौभाग्य मिला। इनमें   प्रथम कलश ब्रह्मचारी जयकुमार जैन, दूसरा कलश प्रवीण जैन (गाजियाबाद), तीसरा कलश प्रेमचंद जैन (बड़े बाबा कलेक्शन),चौथा कलश नील जैन नीलेश (भोपाल), पांचवा कलश डॉ.सुभाष शाह ( मुंबई), छठा कलश जीके जैन (इंदौर), सातवा कलश जयेश भाई (मुंबई), आठवा कलश प्रभात जैन (मुंबई), नौवा कलश अशोक पाटनी (किशनगढ़) को स्थापित करने का सौभाग्य मिला। रविवार को आचार्यश्री का पाद प्रच्छालन डॉ. राजेश जैन एवं अशोक पाटनी ने किया। रविवार की बोलियों में लगभग दस करोड़ रुपए की दान स्वीकृतियां प्राप्त हुई हैं। इनमें इस राशि का उपयोग हबीबगंज जैन मंदिर में बनने वाले त्रिकाल चौबीसी और सहस्रकूट जिनालय एवं छात्रावास व संत निवास के निर्माण में किया जाएगा। 

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Dakhal News 25 July 2016

पेज 3

      अभिनेत्री स्वरा भास्कर ने कहा है उनकी आगामी फिल्म ‘वीरे दी वेडिंग’ के निर्माताओं ने उन्हें इस फिल्म का किरदार निभाने के लिए अपना वजन कुछ किलोग्राम कम करने के लिए कहा है। इस फिल्म का निर्माण रिया कपूर और एकता कपूर कर रही है और इस फिल्म को सोनम कपूर और करीना कपूर समेत सभी महिला कलाकार हैं।   एशिया सोसायटी के तीसरे संस्करण ‘न्यू वॉइसेस फैलोशिप फार स्क्रीन राइर्ट्स ’ कार्यक्रम में स्वरा ने बताया, ‘हम सितम्बर में फिल्म की शूटिंग शुरू कर देंगे। हम इसके लिए तैयारी कर रहे हैं। मुझे अपना वजन कम करने के लिए कहा गया है। तो मैं कठिन परिश्रम और प्रयास कर रही हूं।'   28 वर्षीय अभिनेत्री ने कहा, 'इसकी कहानी काफी प्रेरणादायक है। यह मजेदार फिल्म है इसमें कई महिला कलाकार हैं। जरूरी नहीं है महिला प्रधान फिल्मों में हमेश रोना धोना, अबला नारी और उसके संघर्षों का ही चित्रण किया जाए। यह जरूरी नहीं है।’   उन्होंने कहा, 'महिलायें भी मजाक करती हैं, हसंती हैं, वो नृत्य करती है पार्टी करती हैं। हमने भी यह सब किया है। यह फिल्म आज की शहरी महिला और उसके वास्तविक समस्याओं पर आधारित है।’ उल्लेखनीय है 35 वर्षीय अभिनेत्री करीना कपूर को अपने पति सैफ अली खान से पहला बच्चा होने वाला है। स्वरा ने कहा है कि उनकी टीम ‘उड़ता पंजाब’ की अभिनेत्री का पूरा ख्याल रखेंगी। इस फिल्म में अभिनेत्री शिखा तलसानिया भी काम कर रही हैं। फिल्म का निर्देशन 'खूबसूरत’ फिल्म के निर्देशक शशांक घोष करेंगे।

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Dakhal News 27 July 2016

      कैटरीना कैफ और सिद्धार्थ मल्होत्रा की अपकमिंग फिल्म बार बार देखो के पहले गाने  का टीज़र आज रिलीज हुआ है। आपको बता दें कि काला चश्मा गाने का फुल वीडियो दो दिन बाद रिलीज किया जाएगा। यह गाना काफी पेप्पी सॉन्ग है। इस टीजर को देखकर लगता है कि यह डांस नंबर है जो कि आपको नाचने पर मजबूर कर देगा।   यह गीत अमरीक सिंह द्वारा लिखा और अमर अरशी, बादशाह और नेहा कक्कड़ ने गाया गया है। इस गीत की मुख्य बात यह है कि इस गीत में कैटरीना कैफ विवाहिता के रूप में नजर आएंगी। इस गीत में कैटरीना चिकनी चमेली के जैसे डांस करती नजर आएंगी। अब यह देखना बाकी है कि कैटरीना के फैंस को यह गाना कितना लुभाता है।

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Dakhal News 26 July 2016

दखल क्यों

        महेश दीक्षित    मप्र भाजपा भले ही वर्ष 2018 में होने वाले विधानसभा को लेकर नए कसीदे गढ़ रही है और नई रणनीति बना प्रदेश में चौथी बार सरकार बनाने का ख्वाब देख रही हो, पर खुद भाजपा के कुनबे में भीतर ही भीतर जिस तरह से असंतोष खदबदा रहा है और नए शक्ति केंद्र उभर रहे हैं उससे भाजपा की हवा बिगडऩे लगी है। इन बेरुख हवाओं ने भाजपा के केंद्रीय आलाकमान और सरकार के मुखिया के माथे पर सलवटें ला दी हैं।    भाजपा के रणनीतिकार कहने लगे हैं कि हवाओं यही आलम रहा, तो 2018 में भाजपा सत्ता से बे-राह हो सकती है। भाजपा के वरिष्ठ नेता पार्टी की गाइड लाइन को खूंटी को टांग कर हर दिन भाजपा सरकार के खिलाफ बोल रहे हेैं। पार्टी के भीतर अलग शक्ति केंद्र उभर रहे हैं। वरिष्ठ नेता बाबूलाल गौर और सरताज सिंह पार्टी के भीतर नए शक्ति केंद्र बन रहे हैं। जब से उन्हें शिवराज मंत्रिमंडल से हटाया गया है, उन्होंने पार्टी का लिहाज ही छोड़ दिया है। गौर तो हर रोज सरकार पर हमले कर रहे हैं। इसी तरह भाजपा के विधायक राजेंद्र पांडे, ओम प्रकाश सखलेचा, विधायक बहादुर सिंह चौहान और आरडी प्रजापति ने विधानसभा में सरकार पर जिस तरह से आरोप लगाए, यह विरोध बता रहा है कि भाजपा में सब कुछ ठीक नहीं चल रहा है।    हालांकि, भाजपा के अंदर शिवराज के खिलाफ विरोध के स्वर पहले से उठते रहे हैं और विरोधी स्वरों को राग भाजपा के राष्ट्रीय महासचिव और विधायक कैलाश विजयवर्गीय, वरिष्ठ भाजपा नेता प्रभात झा, रघुनंदन शर्मा, कैलाश चावला तथा प्रहलाद पटेल देते रहे हैं। ये नेता पहले से मौकों की तलाश में रहे हैं। ऐसे में गौर-सरताज के कारण पार्टी में नया शक्ति केंद्र खुलने का खतरा पैदा हो गया है। अपने नेताओं के इन सरकार विरोधी बोलों ने भाजपा आलाकमान और सरकार के मुखिया की नींद उड़ा दी है। हालांकि पार्टी आलाकमान इन विरोधी स्वरों को रोकने के फार्मूले को तलाश रही है, लेकिन यह तो तय है कि असंतोष के ये नए शक्ति केंद्र पार्टी में नया गुल खिलाएंगे और शिवराज के लिए मुसीबत बनेंगे।[महेश दीक्षित की वॉल से ]  

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Dakhal News 26 July 2016

  जनसंपर्क मंत्री डॉ. नरोत्तम मिश्रा ने बाँटे सहायता कार्ड      जल संसाधन, जनसंपर्क एवं संसदीय कार्य मंत्री डॉ. नरोत्तम मिश्रा ने दतिया जिले की घरेलू कामकाजी महिलाओं को कल्याण योजना और रत्‍ननंदिता अभियान के तहत शत-प्रतिशत पंजीयन कर दी जाने वाली सहायता के कार्ड वितरण का  दतिया में शुभारंभ किया। जिले में 2000 महिलाएँ लाभान्वित की जाएंगी। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में महिलाएँ उपस्थित रहीं।   जनसंपर्क मंत्री डॉ. मिश्रा ने कहा कि  महिलाओं का समाज के समग्र विकास में महत्वपूर्ण योगदान है। राज्य शासन समाज के जरूरतमंद वर्ग के लोगों के लिए तत्परता से कार्यरत है। योजना के जरिये जिले में घर-घर जाकर पंजीयन कर पात्र बहनों, माताओं को बीमा, विवाह, जन्म, छात्रवृत्ति, प्रशिक्षण आदि सहायता शासकीय मानदंडों के अनुरूप विशेष अभियान में दी जायेगी। जिले में इसी उद्देश्य से रत्‍ननंदिता अभियान प्रारंभ किया गया है। एक माह में जिले की सभी लाड़ली लक्ष्मियों को 6000 से अधिक ई- प्रमाण पत्र भी घर-घर जाकर वितरित किए जाएंगे। जनसंपर्क मंत्री डॉ. मिश्रा ने दतिया में नगर उदय अभियान की भी समीक्षा की   नहरों के पानी से बढ़ेगा खरीफ उत्पादन - जल संसाधन मंत्री डॉ. मिश्र जल संसाधन, जनसंपर्क एवं संसदीय कार्य मंत्री डॉ. नरोत्तम मिश्र द्वारा ग्वालियर जिले के किसानों के हित में महत्वपूर्ण पहल हुई है। रविवार को हरसी कमांड नहरों के खुल जाने से किसान हित सुनिश्चित होगा। मोहिनी डेम से हरसी जलाशय को भरने के लिए आज जल संसाधन मंत्री डॉ. मिश्र ने जल संसाधन विभाग के अधिकारियों को निर्देश दिए। हरसी कमांड क्षेत्र के सभी इलाकों में अब सिंचाई के लिए पर्याप्त पानी मिल सकेगा।  डबरा में जल उपभोक्ता संथाओं(संस्थाओं) के अध्यक्षों ने जल संसाधन मंत्री डॉ मिश्र से भेंट कर नहर खोलने का आग्रह किया था। डॉ. मिश्र ने यह आग्रह तत्काल स्वीकार कर मौके पर मौजूद जल संसाधन विभाग के अधिकारियों को नहरों में पानी छोड़ने के निर्देश दिए। जल संसाधन मंत्री डॉ. मिश्र ने कहा प्रदेश सरकार किसानों की भलाई के लिए कटिबद्व है। उन्होंने कहा कि हरसी नहर खुल जाने से धान सहित खरीफ की अन्य फसलों के उत्पादन में अपेक्षित वृद्वि हो सकेगी।

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Dakhal News 24 July 2016
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