. हजारो लोग हैं, जिनके पास रोटी है | चांदनी रातें हैं,लड़कियां हैं | और 'अक्ल' है | हजारों लोग हैं,जिनकी जेब में | हर वक्त कलम रहती है | और हम हैं | कि कविता लिखते हैं... | पाश
 
 

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 दखल क्यों?


इसलिए की ''स्टेटस को'' जो अपना स्टेटस खो चुका है॰ यथास्थिति दरअसल जस का तस् बने रहना नहीं है पिछङ जाना है॰ चाय की प्याली में तूफ़ान उठाकर यथास्थिति नहीं तोडी जाती . हमारे बुद्धिजीवियों ने काफ़ी हाउस में बहुत से बुलबुले उडाये है

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भ्रूण की जाँच करने वाले सोनाग्राफी केन्द्रों के विरुद्ध एनएसए की कार्यवाही होगी


मध्यप्रदेश में गर्भधारण पूर्व एवं निदान तकनीक ( लिंग चयन प्रतिषेध ) अनिनियम 1994 के प्रभावी क्रियान्वयन &#...
 
लंबे समय के बाद एक सरकार!

संजय द्विवेदी
हिंदुस्तानी मन की आकांक्षाएं बहुत अलग हैं। वह बहुत कम प्रतिक्रिया करके भी ज्यादा कह...
 
एमपी ऑनलाइन भी अब सवालों के घेरे में

सरकार ने नाकारा आरोप को
मध्यप्रदेश में व्यापमं और पीएससी पर लगे गड़बड़ियों के आरोपों की फेरहिस्त के बì...
 
शिवराज ने बजट में एमपी के लिये देखीं संभावनाएँ

एमपी के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा है कि केन्द्र का बजट दूरदृष्टि वाला और शक्तिशाली भारत क...
 
अपारम्परिक ऊर्जा के उत्पादन से रीवा को मिलेगी नई पहचान

गुढ़ में लगेगा 700 मेगावाट का प्लांट

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