विशेष

तमिलनाडु के सत्तारूढ़ दल अन्नाद्रमुक ने कहा कि जयललिता की बीमारी और उसके बाद निधन के दुख और सदमे से अभी तक 77 लोगों की जान गयी है। पार्टी ने प्रत्येक पीड़ित परिवार को तीन-तीन लाख रुपये की सहायता राशि देने की घोषणा बुधवार को की। जयललिता की पांच दिसंबर को मृत्यु के बाद कथित रूप से आत्मदाह का प्रयास करने वाले पार्टी पदाधिकारी तथा अपनी अंगुलियां काट लेने वाले व्यक्ति को भी पार्टी ने 50-50 हजार रुपये देने की घोषणा की है। अन्नाद्रमुक की ओर से बुधवार रात जारी विज्ञप्ति के अनुसार, अम्मा की बीमारी और मृत्यु के बारे में जानने के बाद दुख और सदमे से 77 लोगों की मृत्यु हुई है। इस बीच, केन्द्रीय खुफिया एजेंसी ने अभी तक 30 लोगों के मरने और चार लोगों द्वारा आत्महत्या का प्रयास करने की बात कही है। अन्नाद्रमुक ने यह स्पष्ट नहीं किया है कि उनकी बीमारी का मतलब 22 सितंबर को उन्हें अस्पताल में भर्ती कराए जाने से था या चार दिसंबर को दिल का दौरा पड़ने से। पार्टी ने राज्य के विभिन्न हिस्सों में मरे 77 लोगों की सूची भी जारी की है।

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Dakhal News 8 December 2016

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा पर्सनल ला बोर्ड संविधान से ऊपर नहीं तीन तलाक के मुद्दे पर गुरुवार को इलाहाबाद हाईकोर्ट में सुनवाई हुई। कोर्ट ने कहा कि ट्रिपल तलाक असंवैधानिक और महिला अधिकारों के खिलाफ है। खंडपीठ ने साफ शब्दों में कहा कि कोई भी पर्सनल ला बोर्ड संविधान से ऊपर नहीं हो सकता। मालूम हो, ट्रिपल तलाक को लेकर केंद्र सरकार और मुस्लिम संगठन आमने-सामने हैं। मुस्लिम संगठन सरकार की इस कवायद का विरोध कर रहे हैं। दूसरी तरफ आल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड ने इस फैसले को शरियत के खिलाफ बताया है। बोर्ड के अनुसार इस फैसले को वह बड़े कोर्ट में चुनौती देंगे। हाईकोर्ट ने दो याचिकाओं की सुनवाई करते हुए कहा कि कोई भी पर्सनल लॉ संविधान से ऊपर नहीं है। यहां तक कि पवित्र कुरान में भी तलाक को सही नहीं माना गया है। तीन तलाक की इस्लामिक कानून गलत व्याख्या कर रहा है। तीन तलाक महिलाओं के संवैधानिक अधिकारों का हनन है। बुलंदशहर की हिना की याचिका पर न्यायमूर्ति सुनीत कुमार ने दिया आदेश। हाईकोर्ट ने बुलंदशहर की हिना और उमरबी की दाखिल याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए अपना अपना मत रखा। 24 वर्ष की हिना का निकाह 53 वर्ष के एक व्यक्ति से हुआ था, जिसने उसे बाद में तलाक दे दिया। जबकि उमरबी का पति दुबई में रहता है जिसने उसे फोन पर ही तलाक दे दिया था। जिसके बाद उसने अपने प्रेमी के साथ निकाह कर लिया था। जब उमरबी का पति दुबई से लौटा तो उसने इलाहाबाद हाईकोर्ट में कहा कि उसने तलाक दिया ही नहीं। उसकी पत्नी ने अपने प्रेमी से शादी करने के लिए झूठ बोला है। इस पर कोर्ट ने उसे एसएसपी के पास जाने का निर्देश दिया। आल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के सदस्य और इस्लामिक विद्वान खालिद रशीद फिरंगी महली ने इस फैसले को शरियत कानून के खिलाफ बताया। उन्होंने कहा हमारे मुल्क के संविधान ने हमें अपने पर्सनल लॉ पर अमल करने की पूरी-पूरी आजादी दी है। इस वजह से हमलोग इस फैसले से मुत्तफिक नहीं है। पर्सनल लॉ बोर्ड की लीगल कमेटी इस फैसले को स्टडी करके इस फैसले के खिलाफ बड़े कोर्ट में अपील करेगी।    

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Dakhal News 8 December 2016

राजनीति

राज्यसभा में बोले अरुण जेटली   राज्यसभा में नोटबंदी को लेकर पिछले दो सप्ताह से जारी गतिरोध दूर नहीं हो रहा है और आज भी विपक्षी सदस्यों ने बैंकों में पैसा नहीं होने का मुद्दा उठाते हुए पीएम नरेंद्र मोदी के खिलाफ खूब हमला बोला। इसी बीच वित्तमंत्री अरुण जेटली ने राज्यसभा में विपक्ष पर प्रहार करते हुए कहा कि विपक्ष केवल दिखावे के लिए प्रश्नकाल में कुछ समय के लिए नोटबंदी मुद्दे को उठाता है। राज्यसभा में लीडर ऑफ अपोजिशन गुलाम नबी आजाद ने कहा, ''देश को लाइन में लगा दिया गया है। 84 लोगों की मौत हुई है। इसकी किसी को तो जिम्मेदारी लेनी होगी।'' इसका जवाब देते हुए जेटली ने कहा कि, 'मैं विपक्ष को चुनौती देता हूं कि सरकार चर्चा की लिए तैयार हैं। विपक्ष चाहता था कि प्रधानमंत्री सदन में आएं और वे नियमित रूप से सदन में मौजूद हैं, लेकिन लगता है कि विपक्ष संसद की कार्यवाही किसी न किसी बहाने चलने ही नहीं देना चाहता।'

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Dakhal News 8 December 2016

नोटबंदी के एक महीने पूरे होने के बाजवूद देश में नकदी संकट यथास्थिति रहने पर जहां एक तरफ विपक्षी दलों ने ब्लैक डे मनाकर केन्द्र सरकार को घेरने की कोशिश की है तो वहीं दूसरी तरफ से कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी ने मोदी सरकार पर बड़ा हमला बोला है। राहुल ने कहा कि आज सरकार के नोटबंदी फैसले के बाद पूरे देश की जनता त्रस्त है वो बुरी तरह से सफर कर रही है लेकिन प्रधानमंत्री मोदी मुस्कुरा रहे हैं। कांग्रेस उपाध्यक्ष ने कहा, 'लोकसभा में अगर मुझे बोलने दिया जाए तो मैं सब बता दूंगा कि पेटीएम कैसे पे टू मोदी होता है। कैशलेस इकॉनोमी का यह विचार सिर्फ कुछ लोगों को ज्यादा से ज्यादा फायदा पहुंचाने के लिए है और इस आइडिया ने देश को बर्बाद कर दिया है।' उन्होंने आगे कहा, 'नोटबंदी ने आज गरीब, किसान, दैनिक कामगारों को बर्बादी की कगार पर ला खड़ा किया है। हम चाहते है कि सदन के अंदर नोटबंदी पर वोटिंग हो मगर सरकार नहीं चाहती है। पीएम की कथनी में पूरी तरह से बदलाव आ चुका है। पहले उन्होंने काले धन फिर आतंकवाद उसके बाद नकली करेंसी और अब कैशलेस इकॉनोमी की बात कर रहे हैं। पीएम मोदी भाग रहे हैं। अगर वे सदन में चर्चा के लिए आते है तो हम उन्हें भागने नहीं देंगे।'

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Dakhal News 8 December 2016

मीडिया

अमेरिका की प्रतिष्ठित टाइम पत्रिका ने देश के निर्वाचित राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को \"टाइम पर्सन ऑफ द ईयर 2016\" घोषित कर दिया। ट्रंप को राष्ट्रपति चुनाव में अद्भुत जीत हासिल करने के लिए यह खिताब मिला। इससे पहले पाठकों के ऑनलाइन मतदान में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी विजयी रहे थे। 18 फीसदी वोट के साथ मोदी ने अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा, विकिलीक्स के संस्थापक जूलियन असांज व ट्रंप जैसे दिग्गजों को पीछे छोड़ दिया था। मोदी टाइम द्वारा चयनित आखिरी 11 उम्मीदवारों में भी शामिल थे। टाइम ने कहा कि ट्रंप ने गैर-राजनीतिक व्यक्ति होते हुए भी व्यवस्था-विरोधी प्रचार किया और 70 साल की उम्र में अमेरिका के 45वें राष्ट्रपति चुने गए। टाइम पर्सन की सूची में पहली उप-विजेता अमेरिकी राष्ट्रपति चुनाव की प्रबल दावेदार रहीं हिलेरी क्लिंटन रहीं। वहीं दूसरे उप-विजेता \"ऑनलाइन हैकर्स\" रहे। वहीं, पीएम मोदी के मामले में टाइम ने कहा कि भारतीय प्रधानमंत्री देश की अर्थव्यवस्था को ऐसी स्थिति में ले गए हैं जो उभरते बाजार के तौर पर दुनिया की सबसे सकारात्मक कहानी है। यह दूसरा मौका था जब नरेंद्र मोदी ने रीडर्स पोल जीता था। इसमें ट्रंप को महज आठ फीसदी वोट मिले थे। 2014 में उन्हें कुल 50 लाख में से 16 फीसदी से ज्यादा मत हासिल हुए थे। मोदी लगातार चौथी बार इस खिताब के दावेदारों में शामिल हुए थे। पिछले साल जर्मनी की चांसलर एंगेला मर्केल को टाइम पर्सन ऑफ द ईयर चुना गया था। टाइम का कहना है कि पाठकों का मतदान यह बताता है कि उनकी राय में साल 2016 को आकार देने में किस हस्ती का योगदान सबसे अहम रहा है। यह अमेरिकी पत्रिका हर साल एक ऐसी हस्ती को यह सम्मान प्रदान करती है जिसने \"अच्छी\" या \"खराब\" वजहों से खबरों और दुनिया को प्रभावित किया हो।  

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Dakhal News 8 December 2016

  अक्खड़ और ईमानदार पत्रकारिता की मिसाल  महेश दीक्षित  मध्यप्रदेश के वरिष्ठ पत्रकार और नवदुनिया भोपाल में न्यूज एडिटर रवीन्द्र कैलासिया प्रदेश के उन अक्खड़ एवं ईमानदार पत्रकारों में शुमार हैं कि उनसे ऐसा-वैसा तो बात करने मेें ही घबराता है। एक समय उनके बारे में कहा जाता था कि यदि कुछ सुनना है, तो कैलासिया से मुंहजोरी करो। वर्ना उनके सामने चुप रहो, तो ज्यादा ठीक है। पुलिस वाला हो या पत्रकार या फिर कोई रसूखदार उनसे बात करने में प्राय: झिझकते हैं। कैलासिया में यह कोई दुर्गुण नहीं, बल्कि उनकी विषय पर पकड़ को साबित करती है। वे हर विषय में इतने निपुण और जानकारी रखने वाले हैं कि उनसे बहस करना नामुमकिन है। कैलासिया प्रदेश के अच्छे क्राइम रिपोर्टर्स में से हैं। इस वजह से कई बार वे पुलिस महकमे के अफसरों की आंखों की किरकिरी भी बने। पर, कैलासिया ने रिपोर्टिंग का अपना स्टाइल नहीं बदला और जो सच लगा वह ही लिखा। तीन दशक से पत्रकारिता में सक्रिय कैलासिया ने स्कूली शिक्षा भोपाल के श्यामला हिल्स स्थित रीजनल स्कूल से पूरी की। इसके बाद 1984 में उच्च शिक्षा के लिए इंदौर चले गए। पिता के नईदुनिया से पारिवारिक रिश्ते थे, सो कैलासिया ने पढ़ाई के साथ नई दुनिया में काम करना शुरू कर दिया। पत्रकारिता के तत्कालीन पुरोधाओं के मार्गदर्शन में कोई ढाई साल तक पत्रकारिता की बेसिक ट्रेनिंग ली। धीमे-धीमे माहौल में ऐसे डूब गए कि पता ही नहीं चला कि कब पत्रकारिता का जुनून सवार हो गया। इसके बाद 1998 में इंदौर से प्रकाशित चौथा संसार से जुड़ गए। वरिष्ठ पत्रकार शिव अनुराग पटैरिया के साथ जो कि उस समय चौथा संसार के भोपाल ब्यूरो चीफ हुआ करते थे, के साथ खूब काम किया। नईदुनिया समूह के भोपाल-इंदौर संस्करणों के विभाजन के दौरान नईदुनिया भोपाल में स्व. मदनमोहन जोशी के सानिध्य में क्राइम रिपोर्टिंग की शुरुआत की। एक के बाद एक सक्सेस स्टोरीज ने उन्हें एक अच्छे क्राइम रिपोर्टर के तौर पर प्रदेश में स्थापित कर दिया। इसके बाद कैलासिया ने वर्ष 1995 में नवभारत में बतौर सीनियर क्राइम रिपोर्टर ज्वाइन किया। यहां तत्कालीन संपादक श्री विजयदत्त श्रीधर और श्री अवधेश बजाज के सानिध्य में अपनी पत्रकारिता को नए तेवर दिए। श्री बजाज ने क्राइम रिपोर्टिंग के साथ उनका पॉलिटिकल रिपोर्टिंग में भी उपयोग किया। इस दौरान उनकी भोपाल में हुए दंगे की सही, संतुलित और सटीक रिपोर्टिंग की खूब चर्चा हुई। इसके लिए उन्हें पुरस्कृत भी किया गया। वर्ष 2000 में दैनिक भास्कर भोपाल ने श्री कैलासिया के लिए बतौर चीफ क्राइम रिपोर्टर ऑफर किया। यहां उन्होंने संपादक श्री महेश श्रीवास्तव, नरेंद्र कुमार सिंह और स्व बाबूलाल शर्मा के साथ काम करते हुए पत्रकारिता को खूब निखारा। उनकी प्रतिभा को देखते हुए भास्कर ने उन्हें सिटी चीफ, सिटी भास्कर प्रभारी, डीबी स्टार में विशेष संवाददाता प्रमोट किया। इस बीच उन्होंने भास्कर ग्वालियर और पत्रिका जबलपुर में भी काम किया। इसके बाद उन्होंने इलेक्ट्रानिक मीडिया की ओर रुख किया। भास्कर ने उन्हें बीटीवी में प्रभारी संपादक बनाया। यहां श्री कैलासिया ने तीन साल तक करते हुए इलेक्ट्रानिक मीडिया में अपनी अलग पहचान बनाई। इस दौरान श्री कैलासिया को श्रेष्ठ पत्रकारिता के लिए कई पुरस्कार भी मिले। इनमें सत्यनारायण श्रीवास्तव श्रेष्ठ रिपोर्टिंग प्रमुख हैं। 995 पुरस्कार मिले हैं। श्री कैलासिया का कहना है कि पत्रकारिता में अब मूल्यों के साथ काम करने की बड़ी चुनौतियां हैं।

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Dakhal News 6 December 2016

समाज

मुख्यमंत्री  शिवराज सिंह चौहान भोपाल में  शहीद स्वर्गीय रमाशंकर यादव की बेटी सोनिया के विवाह में शामिल हुए। इस अवसर पर उन्होंने सोनिया को मंत्रालय में सहायक ग्रेड-3 का नियुक्ति पत्र सौंपा। मुख्यमंत्री श्री चौहान ने बारात का स्वागत किया। पिछले दिनों स्वर्गीय श्री यादव का निधन सिमी के विचाराधीन कैदियों द्वारा जेल से भागने की घटना के दौरान हुआ था। मुख्यमंत्री श्री चौहान ने वर-वधु सुनील और सोनिया को आशीर्वाद दिया, उपहार दिये और उनके सुखी जीवन की कामना की। मुख्यमंत्री विवाह के दौरान वरमाला और अन्य रस्मों के दौरान उपस्थित रहे। उन्होंने कहा कि सोनिया मध्यप्रदेश की बेटी है। उसकी शादी में कोई कमी नहीं रहे, इसकी कोशिश की गई। प्रदेश में कोई भी पुलिसकर्मी कर्तव्य निर्वहन के दौरान शहीद होगा तो उसकी बेटी मध्यप्रदेश की बेटी होगी और उसका विवाह समाज और सरकार मिलकर करेंगे। उन्होंने दोनों परिवारों को शुभकामनाएँ दी। इस अवसर पर सहकारिता राज्य मंत्री श्री विश्वास सारंग भी उपस्थित थे। मुख्यमंत्री श्री चौहान द्वारा शहीद की बेटी की शादी की तैयारियों का जायजा  शादी से मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने लैण्डमार्क गार्डन पहुँचकर शहीद स्वर्गीय रमाशंकर यादव की बेटी की शादी की तैयारियों का जायजा लिया। शहीद श्री यादव का निधन पिछले दिनों सिमी आतंकियों द्वारा जेल से भागने की घटना में हो गया था। मुख्यमंत्री श्री चौहान ने कहा कि शहीद की बेटी सोनिया की शादी में कोई कमी नहीं रहेगी। वो मध्यप्रदेश की बेटी है। उन्होंने शादी से संबंधित बारात के स्वागत, भोजन तथा अन्य व्यवस्थाओं की जानकारी ली। इस अवसर पर सहकारिता राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) श्री विश्वास सारंग और महापौर श्री आलोक शर्मा भी उपस्थित थे।  

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Dakhal News 10 December 2016

  मुख्यमंत्री  शिवराज सिंह चौहान ने कहा है कि नर्मदा को प्रदूषणमुक्त करने का सामूहिक संकल्प नर्मदा सेवा यात्रा के दौरान लिया जायेगा। नर्मदा के दोनों तट पर वृक्षारोपण, नर्मदा में मल-जल का मिलान रोकने के कार्य, खुले में शौच की प्रथा को समाप्त करने, पूजन कुंड और विश्रामघाट निर्माण के लिए जन-सहमति के साथ प्रयास किये जायेंगे। श्री चौहान आज यहाँ मुख्यमंत्री निवास में पत्रकारों से चर्चा कर रहे थे। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने माँ नर्मदा पर केन्द्रित गीतों की सी.डी. का विमोचन किया। मुख्यमंत्री  चौहान ने कहा कि नर्मदा सेवा यात्रा 2016 का शुभारंभ 11 दिसम्बर को अमरकंटक से होगा। नर्मदा के उत्तर-दक्षिण दोनों तटों से होते हुए यात्रा 11 मई 2017 को अमरकंटक में सम्पन्न होगी। यात्रा अवधि में 1900 किलोमीटर से अधिक की पदयात्रा होगी। केवल निर्जन स्थानों पर यात्रा वाहन के माध्यम से होगी। उन्होंने कहा कि नदी संरक्षण की सामाजिक पहल अधिक प्रभावी और कारगर होती है। इसी मंशा से नर्मदा सेवा यात्रा का संयोजन किया गया है।  यात्रा के दौरान अलग-अलग स्थानों और समय पर समाज के सभी वर्गों के प्रतिनिधि शामिल होंगे। शुभारंभ अवसर पर स्वामी अवधेशानंद, स्वामी चिदांनद, गुजरात के मुख्यमंत्री श्री विजय रूपानी, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सह-सरकार्यवाह श्री भैय्या जी जोशी, मैगसेसे पुरस्कार विजेता श्री राजेन्द्र सिंह और अमरकंटक के स्थानीय संत शामिल होंगे। मुख्यमंत्री श्री चौहान ने कहा कि मध्यप्रदेश की नर्मदा के जल की हर बूँद के उपयोग की वर्ष 2024 तक की कार्य-योजना तैयार है। नर्मदा में जल की निरंतर उपलब्धता के लिये वृक्षारोपण की आवश्यकता को देखते हुए वैधानिक प्रावधानों के बजाय जनमानस की सहमति से प्रदूषणमुक्ति के प्रयास अभियान का आधार है। नर्मदा की बाढ़ क्षेत्र के दोनों तटों के एक-एक किलोमीटर क्षेत्र में फलदार वृक्षारोपण के लिए किसानों को संकल्प दिलवाया जायेगा। उनकी आजीविका प्रभावित नहीं हो। इस के लिए फलदार वृक्ष लगवाने के लिए प्रेरित किया जायेगा। कौन सा वृक्ष कब रोपित किया जायेगा, इसकी विशेषज्ञों द्वारा रूपरेखा तैयार की गई है। वृक्षों में फल आने तक किसानों को प्रति हेक्टर 20 हजार रूपए के मान से आर्थिक सहयोग किया जायेगा। यात्रा के दौरान संकल्प पत्र भरवाए जायेंगे। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह अभियान नर्मदा संरक्षण का सामाजिक आंदोलन है। इसमें सरकार समाज के सहयोगी की भूमिका में होगी। आस-पास के क्षेत्रों में पर्यावरण जागृति के लिए उपयात्राएँ निकाली जायेगी। मुख्यमंत्री ने बताया कि यात्रा अवधि में सप्ताह में किसी एक दिन वे स्वयं भी यात्रा में शामिल होंगे। श्री चौहान ने समाज के हर व्यक्ति और संस्था से अपील की है कि जीवनदायिनी नर्मदा नदी के संरक्षण के इस महत्वाकांक्षी जन-आंदोलन में सक्रिय सहयोग दें। इस अवसर पर जन-अभियान परिषद के उपाध्यक्ष श्री प्रदीप पाण्डेय और श्री राघवेन्द्र गौतम उपस्थित थे।  

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Dakhal News 8 December 2016

पेज 3

फिल्म अभिनेत्री अनुष्का शर्मा का कहना है कि किसी भी साधारण लड़की की तरह ही वह भी विवाह करना चाहेंगी, लेकिन उन्हें शादी के बंधन में बंधने की इतनी कोई जल्दी नहीं है। 28 वर्षीय इस अभिनेत्री का फिल्मी सफर अभी सुनहरे दौर से गुजर रहा है। उनका कहना है कि फिलहाल वह शादी करने के बारे में नहीं सोच रही हैं। एक न्‍यूज चैनल के कार्यक्रम में अनुष्का ने कहा कि शादी तो होगी, लेकिन मैं नहीं जानती कि यह कब होगी। अभी तक मैंने इसके बारे में सोचा भी नहीं है। मैं अपने जीवन में सभी चीजों को बहुत ही सामान्य तरीके से करती हूं और शादी भी मेरे जीवन के एजेंडे में बिल्कुल शामिल है। अनुष्का का कहना है कि मैं मानती हूं कि चीजें अब बदल रही हैं। अभिनेत्रियां अब शादी करने और बच्चे होने के बाद भी उसी उर्जा से काम करती हैं। इस इंडस्ट्री में महिलाओं के लिए यह अद्भुत समय है। मैं भी एक साधारण व्यक्ति की तरह ही चीजों को जारी रखना चाहूंगी। मेरे लिए यह बहुत ही महत्वपूर्ण है। मुझे बिल्कुल भी अच्छा नहीं लगता है जब लोग कहते हैं कि अभिनेत्रियों की शेल्फ लाइफ होती है। उन्होंने बताया कि मैं एक बेहद मामूली इंसान हूं। मैं अभी भी शादी केवल एक बार करने में विश्वास रखती हूं। लेकिन मैं समझती हूं कि देश में तलाक के मामले इसलिए बढ़ रहे क्योंकि महिलाएं आज के दौर में बदल रही हैं। उनकी सोच बदल रही हैं। उनका कहना है, महिलाएं अब आर्थिक रूप से स्वतंत्र हो रही हैं और बिना जीवन साथी के भी वे अपनी जिंदगी जी सकती हैं। उनको जो पसंद होता है बस उन्हीं के साथ वह जीवन में आगे बढ़ना चाहती हैं।

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Dakhal News 8 December 2016

वाणी कपूर की दूसरी फिल्म 'बेफिक्रे' इस हफ्ते रिलीज होने वाली है। फिल्म से ज्यादा इस बात के चर्चे हैं कि वाणी यहां काफी बदली हुई नजर आ रही हैं। कई दिनों से यह भी चर्चे हैं कि उन्होंने इस फिल्म के लिए सर्जरी करवाई है। सोशल मीडिया पर जब फिल्म का प्रोमो जारी हुआ तो लोग उनकी तस्वीरों के साथ 'प्रिटी वाणी' की जगह 'हैंडसम वाना' भी कहने लगे। तब सोशल मीडिया पर यह कहा जानेे लगा कि उन्होंने अपनी चिन और होंठों की सर्जरी करवाई है। अब पहली बार वाणी ने इन बातों को बकवास बताते हुए कहा है 'क्या आपको लगता है कि मैंने कुछ करवाया है! मैं वाकई नहीं जानती कि क्या कहना चाहिए।' उन्होंने बयान दिया है 'मैंने वजन कम किया है शायद इस कारण मेरा चेहरा अलग नजर अा रहा है। हम पेरिस में तब शूट कर रहे थे जब वहां जमा देने वाली ठंड थी। कैमरा लगातार जूम अन और जूम आउट हो रहा था, हो सकता है अलग दिखने की एक वजह यह भी हो। मैं सिर्फ एक फिल्म पुरानी हूं, मैं सर्जरी अफोर्ड ही नहीं कर सकती।' यह फिल्म नौ दिसंबर को रिलीज हो रही है। फिल्म वाणी और उनके को-स्टार रणवीर सिंह के लिप लॉक सीन्स की वजह से भी चर्चा में हैं।  

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Dakhal News 6 December 2016

दखल क्यों

  उमेश त्रिवेदी बसपा सुप्रीमो मायावती की राजनीतिक-आक्रामकता ने फिलवक्त उत्तर प्रदेश के चुनावी-परिदृश्य को तिकोने चुनावी संघर्ष में तब्दील कर दिया है। वो एक हाथ में पकड़ी ईंट को भाजपा की ओर उछालती हैं तो दूसरे हाथ के पत्थर से समाजवादी पार्टी पर प्रहार करती हैं। नोटबंदी के शोरशराबे में मद्धम पड़ी चुनावी-गतिविधियों में कांग्रेस सहित अन्य दलों की उपस्थिति हाशिए पर खिसकने लगी है। राहुल गांधी की किसान-रैली के बाद कांग्रेस की चुनावी गतिविधियों का मोमेण्टम कुछ ढीला पड़ा है, लेकिन भाजपा, सपा और बसपा के तेवरों में दिन-ब-दिन तेजाब घुलता जा रहा है। भारतीय जनता पार्टी प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की परिवर्तन रैलियों के माध्यम से नोटबंदी को भुनाने में जुटी है, जबकि समाजवादी पार्टी के मुख्यमंत्री अखिलेश यादव विकास की मशाल लेकर चुनावी-सफर पर निकल पड़े हैं। भाजपा और सपा के चुनावी काफिले के बीच सुप्रीमो मायावती के साथ बसपा का हाथी दलितों की रौद्रता के साथ चिंघाड़ रहा है। मायावती प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के उस एजेण्डे के खिलाफ उफन रही हैं, जिसके अंतर्गत भाजपा बाबासाहब को किडनेप करना चाहती है।  उप्र के चुनाव में इन तीनों नेताओं की शख्सियत के दिलचस्प पहलू देखने को मिल रहे है। प्रधानमंत्री मोदी के तौर-तरीकोें में जहां विपक्षी दलों की विश्‍वसनीयता पर सवाल खड़ा करने की कोशिशें होती हैं, वहीं मायावती के भाषा-शिल्प का कसैलापन अपने पीछे कड़ुवाहट छोड़ता आगे बढ़ रहा है। नरेन्द्र मोदी और मायावती की तुलना में सपा के मुख्यमंत्री अखिलेश यादव के हाव-भाव का आकर्षण उनकी कटाक्षों वाली प्रचार-शैली की कूलनेस या ठंडक है, जो उन्हें सामान्य नेताओं से अलग करती है। नरेन्द्र मोदी और मायावती की शाब्दिक-अतिरंजनाओं और उत्तेजनाओं की तुलना में अखिलेश यादव अपने हर संभाषण में कूल नजर आते हैं।  उनकी शब्दावली रि-बाउन्स नहीं होती है, जबकि प्रधानमंत्री के संवाद अक्सर कटाक्ष और कटुता में लिपट कर वापस उनकी ओर लौटते हैं। मुरादाबाद की परिवर्तन-रैली में प्रधानमंत्री द्वारा खुद को फकीर के रूप में पेश करना सोशल मीडिया पर अलग-अलग अंदाज में चटक रहा है। प्रधानमंत्री की फकीरी का यह फलसफाना अंदाज सूट-बूट के किस्सों और अंबानी-अडानी के रिश्तों के साथ वापस लौट रहा है। उप्र के चुनाव अभियान में सिर्फ प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की फकीरी का सूफियाना अंदाज ही चर्चा में नहीं है, बल्कि मुख्यमंत्री अखिलेश यादव और बसपा सुप्रीमो मायावती के बीच बुआ भतीजे का संवाद भी लोगों के बीच चटखारे का विषय है। गौरतबल है कि मुख्यमंत्री अखिलेश यादव मायावती को बुआ कहकर संबोधित करते रहे हैं। बुआ के इस संबोधन में छिपे कटाक्ष से विचलित मायावती ने इस पर आपत्ति की थी कि अखिलेश उन्हें बुआ कहकर संबोधित नहीं करें। अखिलेश ने उनकी इस आपत्ति के मद्देनजर कहा था कि वो मायावती को बुआ नहीं कहेंगे। लेकिन बसपा की मुखिया ने लखनऊ में बाबा साहब भीमराव आम्बेडकर के 61वें परिनिर्वाण दिवस पर आयोजित कार्यक्रम में अखिलेश यादव को ’बबुआ’ संबोधित करके इस अध्याय को फिर से शुरू कर दिया है। अखिलेश यादव को ’बबुआ’ कहने के पीछे मायावती की राजनीतिक मंशा यह दर्शाने की है कि उनकी नजर में अखिलेश की राजनीतिक-हैसियत एक नासमझ बच्चे से ज्यादा नहीं है। यदि उनमें राजनीतिक-परिपक्वता होती तो वो लखनऊ में निर्मित आम्बेडकर स्मारक में बने हाथियों का जिक्र करके बसपा के चुनाव-चिन्ह का प्रसार नहीं करते। उल्लेखनीय है कि चुनाव अभियान में अखिलेश यादव सपा-सरकार के विकास कार्यों की चर्चा करते हुए अक्सर कटाक्ष करते हैं कि पिछले कई सालों से मायावती के हाथी जहां के तहां खड़े हैं, एक कदम भी आगे नहीं बढ़े हैं। इस फिजूलखर्ची से उप्र की जनता का क्या भला हुआ है? मायावती का कहना है कि मूर्तियों और स्मारकों के बारे में ऐसा सोच कोई बबुआ ही रख सकता है।  बहरहाल ये नेताओं के चुनावी जुमले हैं। चुनाव अभियान के दौरान जो तेजी से प्रचलन में आ रहे हैं। बुआ, बबुआ और फकीर के बीच यह राजनीतिक घमासान आगे क्या आकार लेगा, यह देखना दिलचस्प होगा।[लेखक सुबह सवेरे के प्रधान संपादक है।यह लेख सुबह सवेरे से ]

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Dakhal News 8 December 2016

उमेश त्रिवेदी मुरादाबाद की परिवर्तन रैली में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का संबोधन चिंता पैदा करने वाला है कि वो उन्माद की किस 'फ्रीक्वेंसी' पर देश की राजनीति को सेट करना चाहते हैं? देश का बड़ा तबका पहले ही  'हिन्दुत्व' और 'राष्ट्रवाद' के जिमनेशियम में 'पुश-अप' लगा रहा है, अखाड़े में लाठियां भांज रहा है, क्या मोदी उसके आगे समाज में वर्ग-संघर्ष की सुरंगें बिछाना चाहते हैं? देश के गरीबों के नाम पर मोदी भाजपा समर्थकों को जिस दिशा में बढ़ने के लिए उत्प्रेरित करना चाहते हैं, उसके दुष्परिणामों के किनारे आसानी से ढूंढे नहीं मिलेंगे। नोटबंदी के बाद गोवा, कर्नाटक और उत्तर प्रदेश की परिवर्तन रैलियो में भाव विह्वल और रुंधे गले से राष्ट्र को संबोधित करने वाले प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के स्वरों में प्रधानमंत्रित्व का गांभीर्य और गौरव पिघलता महसूस हो रहा है। उनकी पिछली रैलियों में उनकी चिंताएं नोटबंदी की उन समस्यायों को एड्रेस करने वाली प्रतीत होती थीं, जिनसे यह देश जूझ रहा है। लेकिन मुरादाबाद की परिवर्तन रैली में तो उनके इशारे उस शाश्वत वर्ग-संघर्ष को आमंत्रित करने वाले थे, जो समाज को खतरनाक हदों की ओर मोड़ता है।  मुरादाबाद की परिवर्तन रैली में जनधन के लाखों करोड़ों गरीब खातेदारों को राजनीतिक-सीख देते हुए मोदी ने कहा कि- 'मैं गरीबों से यह कहना चाहता हूं कि जिन लोगों ने आपके जनधन खातों में अपना काला पैसा जमा कराया है, वो कितना भी दबाव डालें, आपके खाते में जितने भी पैसे आए हैं, उन्हेंन निकालें नहीं। उस पैसे को खाते में ही जमा रहने दीजिए। यदि काला धन देने वाले आपके पास पैसा वापस मांगने आते हैं, तो उनसे प्रूफ मांगिए कि वह पैसा ईमानदारी से कमाया हुआ है या नहीं। मै दिमाग लगा रहा हूं कि जो लोग जनधन खातों में अपना काला पैसा छिपा रहे हैं, उन्हें  जेल के सीखचों के पीछे कैसे डाला जाए? मेरी आकांक्षा है कि काले पैसे वाले जेल जाएं और पैसा गरीबों के घर जाए।' खातेदारों को बगावत की इस सीख के साथ कई सामाजिक, व्यावसायिक और नैतिक सवाल जुड़े है, जो कानून-व्यवस्था की जद में भी आते हैं। बड़ा सवाल तो यह है कि मोदी ने बगैर जांच के धारणाओं के आधार पर यह निष्कर्ष कैसे निकाल लिया कि नोटबंदी के बाद जनधन खातों में जमा 30,000 करोड़ रुपये काला धन ही है। यदि यह महज एक चुनावी जुमला है, तो देश के प्रधानमंत्री के मुंह से ये कदापि शोभास्पद नहीं माना जाएगा। इस जुमले से तालियां मिल सकती हैं, उन्माद फैल सकता है, वोट मिल सकते हैं, लेकिन समाज को दिशा नहीं मिलती है।  मोदी के इस कथन के मायने यह भी हैं कि जितने लोगों ने जनधन योजना के खातों में ढाई लाख जमा किए हैं, वो सभी चोर हैं और उससे कम मात्रा में जमा कराने वाले भले-मानुष है। इस मामले में सरकार भी उतनी ही गुनहगार है, जिसने खातों में ढाई लाख रुपए जमा कराने की इजाजत दी थी। जनधन खातों के दुरुपयोग की कुछ शिकायतें जायज हो सकती हैं, लेकिन इन अपवादों को सम्पूर्ण-सच माना जाना मुनासिब नहीं है। सही है कि प्रारंभ में जनधन और गरीब के खातों का दुरुपयोग हुआ, बैंकों में मजदूरों की कतारें भी लगीं, लेकिन इस सच के सिरे आखिर में समाज के उस छोर पर जाकर रुकते हैं जहां जमीन पर मजदूर-किसान और किसान-साहूकार के बीच रोजमर्रा के रिश्तों और आर्थिक व्यवहार की इबारत लिखी है। ये रिश्ते लाखों गरीबों के रोजगार का रोडमेप हैं, जिसे पहचानना और पढ़ना जरूरी है। जिन ढाई लाख रूपयों को आप पहले दिन हर प्रकार की दरयाफ्त या पूछताछ से मुक्त कर चुके हो, उसके आधार पर किसी को गुनाहगार बनाने का नैतिक और कानूनी आधार आपको कैसे मिल सकता है? फिर नोटबंदी और काले धन का सेनानी बनकर जो गरीब आग के दरिया में कूद जाएगा, उसके रोजगार की ग्यारंटी कौन लेने वाला है? प्रधानमंत्री का यह बयान भी उन्माद भड़काने वाला है कि अमीर गरीबों के पैरों पर गिर रहे हैं। अमीर-गरीब के सामाजिक रिश्तों की कठोर सच्चाइयों को भ्रमित करना मुनासिब नहीं है। भले ही विमुद्रीकरण के नाम पर अमीर-गरीबों के बीच संघर्ष पैदा करने की ये कोशिशें वोट की दृष्टि से भाजपा के लिए मुनाफे वाली हों, लेकिन यह नहीं भूलना चाहिए कि इसकी चिंगारियों से समाज भी आहत होगा। फिर मोदी के अमीरों के विरुध्द गरीबों के संघर्ष के इस   आह्वान की कोई सैध्दांतिक धुरी नही है। यह सिर्फ विमुद्रीकरण से उत्पन्न परिस्थितियों से निपटने के तात्कालिक उपाय हैं। क्योंकि सरकार की सारी दिशाएं तो पांच सितारा भारत का इन्द्र-धनुष रच रही हैं। [ लेखक सुबह सवेरे के प्रधान संपादक है।]    

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Dakhal News 6 December 2016
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