विशेष

  राजमहल पैलेस की जमीन पर कब्जे का मामला    राजस्थान में जयपुर राजघराना और मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे सिंधिया आमने-सामने हैं। 550 करोड़ की कीमत वाला जयपुर का राजमहल पैलेस इस विवाद की जड़ बना हुआ है। चार दिन पहले जयपुर विकास प्राधिकरण ने राजमहल पैलेस की 12 बीघा जमीन पर कब्जा जमा लिया और तीन दरवाजों पर ताला जड़ दिया। सरकारी कार्रवाई से नाराज जयपुर की राजकुमारी दीया इसके खिलाफ शक्ति प्रदर्शन करने की तैयारी में हैं।   24 अगस्त को जयपुर की प्राइम लोकेशन पर मौजूद होटल राजमहल पैलेस के एक हिस्से पर जयपुर विकास प्राधिकरण का बुलडोजर चला। इसके बाद जेडीए के अफसरों ने महल परिसर की 12 बीघा जमीन अपने कब्जे में ले ली। साथ ही पैलेस के चार में से तीन दरवाजों को भी सील कर दिया।    इस कार्रवाई से बौखलाई राजकुमारी दीया कुमारी पैलेस के गेट पर ही अफसरों से भिड़ गईं। राजपरिवार का दावा है कि जेडीए की कार्रवाई भारत सरकार के साथ हुए अनुबंध के खिलाफ है। 1949 में जयपुर रियासत के राजस्थान में विलय के बाद तत्कालीन गृह मंत्री सरदार पटेल और पूर्व महाराजा मानसिंह के बीच हुए समझौते को कोविनेंट (अनुबंध) कहा जाता है। कोविनेंट के मुताबिक राजमहल पैलेस प्रिंसेज हाउस के तौर पर जयपुर राज परिवार की संपत्ति है। राजमहल पैलेस 120 बीघा में फैला है।

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Dakhal News 29 August 2016

आईटीएम यूनिवर्सिटी में  गृह मंत्री राजनाथ सिंह  अमिताभ उपाध्याय डॉ. राममनोहर लोहिया की समाजवादी विचारधारा भारतीय सांस्कृतिक मूल्यों पर आधारित है। उन्होंने राजनैतिक धाराओं को दार्शनिक अवधारणा का रूप दिया। बीसवीं सदी में डॉ. लोहिया एक ऐसे व्यक्तित्व के रूप में उभरे, जिन्होंने राजनीति को भारत की राष्ट्रनीति के रूप में प्रस्तुत किया। यह बात केन्द्रीय गृह मंत्री  राजनाथ सिंह ने ग्वालियर में आईटीएम यूनिवर्सिटी में “डॉ. राममनोहर लोहिया स्मृति व्याख्यान-2016” में अपने व्याख्यान में कही।   कार्यक्रम में केन्द्रीय पंचायत, ग्रामीण विकास, पेयजल एवं स्वच्छता मंत्री  नरेन्द्र सिंह तोमर, प्रदेश के उच्च शिक्षा मंत्री  जयभान सिंह पवैया, नगरीय विकास एवं आवास मंत्री  माया सिंह, आईटीएम यूनिवर्सिटी के कुलाधिपति  रमाशंकर सिंह व कुलपति प्रो. के.के. द्विवेदी उपस्थित थे।   श्री राजनाथ सिंह ने कहा कि महात्मा गाँधी की तरह डॉ. राममनोहर लोहिया भी स्वच्छता के पक्षधर थे। वो कहा करते थे कि नदियाँ भारत की भाग्य रेखाएँ हैं। डॉ. लोहिया ने नदियों की स्वच्छता के लिये सामाजिक आंदोलन चलाया। इसी भावना के अनुरूप वर्तमान सरकार ने पवित्र गंगा नदी को स्वच्छ बनाने के लिये “नमामि गंगे” कार्यक्रम की शुरूआत की है। वर्ष 2022 तक गंगा को पूर्णत: स्वच्छ बनाने का लक्ष्य है। सरकार गंगा की भाँति अन्य नदियों को भी साफ-सुथरा बनाने का भी प्रयास पूरी शिद्दत के साथ करेगी। गृह मंत्री ने कहा कि डॉ. लोहिया की यह भी मान्यता थी कि मूल चिंतन का विकास स्वभाषा में ही हो सकता है। इसीलिये उन्होंने भारतीय भाषाओं के विकास की पुरजोर हिमायत की। डॉ. लोहिया कुरीतियों के खिलाफ बेबाकी से अपनी राय रखते थे और उस पर अमल भी करते थे।   केन्द्रीय मंत्री ने कहा कि डॉ. लोहिया का ईश्वर की सत्ता में विश्वास नहीं था। इसके बावजूद उनकी विचारधारा उत्कृष्ट थीं। उन्होंने धार्मिक आस्थाओं का सदैव ध्यान रखा। डॉ. लोहिया ने भगवान राम, कृष्ण और शिव पर गहन चिंतन कर नई व्याख्या दी और समाज को बताया कि इन सभी ने देश की सांस्कृतिक एवं सामाजिक एकता के लिये काम किया। उन्होंने कहा कि भारत में धन-दौलत से नहीं त्याग करने वालों को बड़ा माना जाता है। इसके उलट विदेशों में साम्राज्य के विस्तार के आधार पर राजा बड़े माने जाते रहे हैं। पर भारत में भगवान राम और राजा हरिश्‍चंद्र को बड़ा माना गया है। इसी क्रम में उन्होंने सम्राट हर्षवर्धन, संत रविदास और कबीर के त्याग का जिक्र किया। साथ ही कहा कि डॉ. लोहिया की विचारधारा भी इसी अवधारणा का समर्थन करती है।   सांसद  जनार्दन द्विवेदी ने कहा कि डॉ. लोहिया ने राजनीति और धर्म की अपने ही अंदाज में व्याख्या की थी। उनका मानना था कि धर्म दीर्घकालीन राजनीति और राजनीति अल्पकालीन धर्म है। वे कहा करते थे कि जो राजनीति समय की कसौटी पर खरी उतरती है, वह धर्म बन जाती है।   राज्यसभा सांसद प्रो. डी.पी. त्रिपाठी ने कहा कि लोकतंत्र में किसी दल या व्यक्ति का धुर विरोधी होने के बावजूद शत्रु भाव मन में नहीं होना चाहिए। डॉ. लोहिया के व्यक्तित्व में यह बखूबी ढंग से समाया हुआ था।  

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Dakhal News 28 August 2016

राजनीति

शिवराज से कहा अफसरों पर नकेल कसिये    राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ ने सत्ता में 12 साल से काबिज होने पर मद में आ चुके मंत्रियों को साफ साफ़ हिदायत दी है। अनुषांगिक संगठनों की रिपोर्ट के बाद मंत्रियों को चेताया गया है कि संगठन के हिसाब से चलना पड़ेगा। जवाब में मंत्रियों, राष्ट्रीय नेताओं और सांसदों ने खुद को लाचार बताते हुए कहा कि प्रदेश की नौकरशाही में ऊपर से नीचे तक भ्रष्ट है। कोई भी काम बिना पैसे के लेन-देन के नहीं होता है।    शारदा विहार में संघ की समन्वय बैठक के बाद जब संघ ने निष्कर्ष निकला तो सामने आया कि मध्यप्रदेश के अफसर सिवाए मुख्यमंत्री किसी की नहीं सुनते हैं। मध्यप्रदेश में व्यवस्था का केन्द्रीयकरण होने से अन्य नेताओं को समस्या का सामना करना पड़ रहा है  और आम लोगों को जायज काम के लिए भी अफसरों को घूस खिलना पड़ रही। आरएसएस के  राष्ट्रीय पदाधिकारियों ने मंत्रियों-सांसदों की क्लास ली, तो वे पलटकर बोले और अपनी ही सरकार को कटघरे में खड़ा कर दिया ।    भाजपा के राष्ट्रीय महासचिव कैलाश विजयवर्गीय ने नौकरशाही के हावी होने का मुद्दा उठाया। सांसदों ने गोद लेने वाले गांवों की स्थिति बताई। इनके विकास में अड़ंगे के लिए भी अफसरों को जिम्मेदार ठहराते हुए कहा कि वे फोन तक नहीं उठाते हैं। क्षेत्र में काम के लिए चक्कर काटना पड़ते हैं। इनके अलावा उपाध्यक्ष प्रभात झा, मंत्री गोपाल भार्गव, गौरीशंकर शेजवार, विजय शाह, कुसुम महदेले और यशोधरा राजे सिंधिया ने भी अफसरों की शिकायत की।   मुख्यमंत्री और संघ के नेताओं ने सभी को सुना। इसके बाद संघ के नेताओं ने  मुख्यमंत्री शिवराज सिंह से अकेले में बात की और अफसरों पर लगाम कसने की  के लिए कहा है, जिसका असर एक महीने में दिखने की बात  मुख्यमंत्री ने कही । बैठक में संघ ने 40 से ज्यादा अनुषांगिक संगठनों की रिपोर्टिंग के आधार पर मंत्रियों के बीच खुली चर्चा की गई। इस बैठक का सार यही रहा कि अगर बीजेपी को अगले चुनावों  में विजयी होना है तो मध्यप्रदेश को अफसरों के भरोसे न छोड़ा जाए।    

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Dakhal News 28 August 2016

  मप्र भाजपा की नई टीम...किसका है चेहरा, मोहरा और अक्स राघवेंद्र सिंह   एक बात तो साफ होती जा रही है कि जब पार्टी सत्ता में हो तो संगठन सुदृढ़ नहीं होना चाहिए, क्योंकि वह मजबूत होगा तो सवाल करेगा और सरकारें सवाल पसंद नहीं करतीं। पहले कांग्रेस की सरकारें रहीं तब देखा और अब भाजपा की सरकार में यह सब देख सुन और समझ रहे हैं। मध्यप्रदेश भाजपा के अध्यक्ष नंदकुमार सिंह चौहान ने अपने निर्वाचन के बाद आठवें महीने में प्रदेश पदाधिकारी घोषित किए। यह सामान्य नहीं बल्कि नैतिक दबाव के कारण आपरेशन से हुई डिलेवरी है जिसमें प्रसव पीड़ा जन्म देने वालों को नहीं अपितु पैदा होने वाले या होने की आस में बधाई गीत गाने वालों को ज्यादा हो रही थी। माना जाता है सतमासा या अठमासा जन्म के बाद खुद तो तकलीफ में रहते हैं जन्म देने वाले भी परेशान रहते हैं। मगर होते असाधारण हैं। सब ठीक और शुभ रहा तो 2018 में यह नवजात टीम विधानसभा के चुनाव भी कराएगी।    हमने बात शुरू की थी जब दल की सरकार हो तो कोई भी चीफ मिनिस्टर नहीं चाहेगा,पार्टी अध्यक्ष दमदार हो। सो प्रदेश भाजपा में भी ऐसा कुछ लगे तो आश्चर्य नहीं होना चाहिए। अक्सर सियासी जुबान में हुकूमत को पिता कुछ इसे अपनी सुविधा अनुसार पति भी मान सकते हैं और संगठन को मां (पत्नी)। असल में सत्ता मे सीना चौड़ा कर इतराने वाले संगठन की कोख से ही पैदा होते हैं मगर हैरत की बात ये है कि सत्ता-संगठन ने ही जो बाते तय की थीं उनमें से कुछ खास की धज्जियां उड़ा दी गईं। आधी आबादी यानि महिलाओं को संगठन में 33 फीसदी पद देना तय हुआ था। लेकिन 40 सदस्यीय नई टीम में केवल 5 महिलाओं को स्थान मिला है। नंदूभैया की नई टीम में नजर नहीं आया। पार्टी हाईकमान उनसे कमान पूछेगा,पता नहीं ? लेकिन कार्यकर्ता और आमजन अलबत्ता इसकी चर्चा करेंगे। हम तो केवल वादे और की गई बातों को याद दिलाने की गुस्ताखी भर कर रहे हैं।   एक व्यक्ति, एक पद का खूब ढोल पीटा गया था। मगर आठ विधायक और अध्यक्ष समेत चार सांसद पदाधिकारी बना दिए गए। अध्यक्ष का पद अपवाद हो सकता है क्योंकि संगठन कह सकता है यह नियम तो हमने ही बनाया था तो जरूरत और सुविधा के मुताबिक तोड़ भी दिया गया। मेरी मर्जी की तर्ज पर। वैसे तो जाति,धर्म,वर्ग और क्षेत्र के आधार पर कुछ नहीं लिखा जाना चाहिए क्योंकि जिम्मेदारी योग्यता के आधार पर दी जानी चाहिए। यह कोई सरकारी काम तो है नहीं कि आरक्षण का पालन नहीं हुआ तो हल्ला शुरू। मगर चार महामंत्रियों में दो सवर्ण अजय प्रताप सिंह और विष्णुदत्त शर्मा के साथ आरक्षित वर्ग के सांसद मनोहर ऊंटवाल तथा बंशीलाल गुर्जर को नियुक्त किया गया। इनमें अजय प्रताप ने संगठन में पदों की लंबी यात्रा करते हुए घाट-घाट का पानी पिया लेकिन विष्णु शर्मा संघ परिवार के खाते से अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के बाद सीधे नेहरू युवा केन्द्र के उपाध्यक्ष कुछ दिन पहले ही बनाए गए थे। अब उन्हें सीधे भाजपा में प्रदेश महामंत्री के पद से नवाजा गया। मतलब सियासत में सीधे आईएएस। इससे कुछ नेता कुंठा का शिकार भी हो सकते हैं। उनके सीधे अवतरण से जो महामंत्री बनने की कतार में थे या सपना देख रहे थे, वे गाहे-बगाह खुन्नस जरूर निकालेंगे। शर्मा भी जीवट वाले हैं सो इस सियासी कुश्तम पछाड़ का अनुमान पहले ही लगाए बैठे होंगे। वे अपने खलीफाओं से मौके बेमौके दांव सीखेंगे साथ ही उनसे पेंच भी लगवाएंगे। संघ में उनके पैरोकारों को इसके लिए तैयार भी रहना चाहिए। वरना वे एक नेता की भ्रूण हत्या होने के भी साक्षी बनेंगे।    भाजपा की नई टीम पर न तो संघ का असर दिख रहा है और न संगठन परंपरा की छाया। यह किसका चेहरा है पता ही नहीं चल रहा। भाजपा को छोड़ ये नए पदाधिकारियों के चेहरे मोहरे जानकार जिनमें पार्टी को समझने और जानने वाले कहते हैं कि इस पदाधिकारी की नाक सीएम से मिल रही है तो कोई कहता है कि आंखे और मुंह संघ से तो कुछ कहते हैं कि इनका दिलो-दिमाग केन्द्रीय मंत्रियों से मेल खाता है। कम ही लोग कहते हैं भाजपा के इन नए ‘अफसरों’ की शक्ल-सूरत कार्यकर्ताओं से मेल खा रही है। उम्मीद तो यह थी कि संघ से आए संगठन महामंत्री सुहास भगत का अक्स पदाधिकारियों में नजर आता है। संघ से दूल्हा बनाकर भाजपा में भेजे गए भगतजी तो उदासीन अखाड़े के प्रमुख बन वीतरागी जैसे व्यवहार करते दिख रहे हैं। मंत्रिमंडल विस्तार से लेकर पदाधिकारियों के ऐलान तक वे शादी-ब्याह के धूम धड़ाके और सत्ता संगठन के मेले ठेले से दूर स्वयंसेवक की भांति तपस्वी जीवन जीने का मोह नहीं छोड़ पा रहे हैं। भाजपा में लोग महसूस करते हैं भगतजी मानो ऐसे सन्यासी हैं जिन्हें गुरू ने आदेश दे संगठन की गृहस्थी में भेज तो दिया मगर उनका मन भोग विलास और ऐश्वर्य में रम नहीं रहा। इससे कई दिक्कतें हैं। एक तो सत्ता सुन्दरी परेशान है वह उपेक्षित महसूस कर रही है। दूसरे सत्ता संगठन के आकांक्षी दुखी हैं क्योंकि दरवाजे के बाहर वर्षों से खड़े हैं और अन्दर आने के संकेत तो मिल रहे हैं मगर अनुमति नहीं। तीसरे स्वयं सुहासजी जो अपने को अभी तक न तो सहज दिखा पा रहे हैं और न भाजपा के भगत बन पा रहे हैं। जबकि सत्तारूढ़ भाजपा के लिए कई पुरुषार्थी और पराक्रमी चांद तारे तोड़ लाने के लिए बेताब हैं। खैर अभी तो सुहास भगत के लिए संघ के संस्कारों से सराबोर नेताओं, कार्यकर्ताओं को मुख्यधारा में लाकर अपनी मौजूदगी का अहसास कराना है। मगर कैबिनेट विस्तार में उनकी यानि संघ की मर्जी के विपरीत दो आयातित नेताओं को जगह मिलना उन्हें कार्यकर्ताओं और अपनी नजरों में गिराने जैसा था। लेकिन निर्णय करने वालों ने ढिठाई के साथ कहा हमने आयातित नेताओं से कमिटमेन्ट किया था इसलिए मंत्री बनाया। यहीं से भगत के सामने शुरू होती है सिद्धांतो को सड़क पर ला अपमानित करने की कहानी। जिसे कार्यकर्ताओं की भांति नए संगठन महामंत्री ने महसूस भी किया होगा।   पंचमुखी संवाद प्रमुख हम बहुत विस्तार में नहीं जाना चाहते क्योंकि यह तो हरि अनंत हरि कथा अनंता की तरह है। नए पदाधिकारियों में प्रदेश संवाद प्रमुख पद का जितना पराभव हुआ उतना पहले कभी नहीं। पूर्व में यह अकेला पद था। जिसकी शुरूआत में ग्वालियर के प्रभात झा इसके प्रमुख बने। वन मैन आर्मी की तरह। झा इसी रास्ते राज्यसभा में गए और प्रदेश अध्यक्ष से लेकर राष्ट्रीय उपाध्यक्ष के पद तक पहुंचे। लेकिन हर कोई जो पत्रकार नहीं हैं वे भी संवाद प्रमुख बनने के लिए प्राण-प्रण लगाए रहते हैं। हालांकि घोषित रूप से इस पद के लिए पत्रकार होना जरूरी नहीं है इसलिए डाक्टर हितेष वाजपेयी भी इस पद पर रहे। जिसके चलते कई विवाद भी जन्मे। मसलन उनका दफ्तर न हुआ ओपीडी हो जिसमें मरीजों की तरह पत्रकारों से भी मिलने का टाइम टेबिल तय जैसा था।    अब झा की तरह स्वदेश अखबार से संबद्ध रहे लोकेन्द्र पाराशर को इसकी कमान सौंपी गई है। उनके साथ चार सह संवाद प्रमुख भी नत्थी कर दिए गए हैं। इसे पॉजिटिव लें तो पाराशर ‘पंचमुखी’ हो गए हैं। मगर सियासत में यह सब शुभ नहीं होता। जिसे एक किचिन में कई रसोईया हो जाएं तो समझो खाना खराब। इसकी पुष्टि पाराशर के कार्यभार ग्रहण कार्यक्रम में ही हो गई। उनके दो सह संवाद प्रमुख अपने लीडर की ताजपोशी के वक्त गैरहाजिर थे। और निवरत्तमान संवाद प्रमुख भी मौजूद नहीं थे। क्योंकि उन्हें ताजपोशी समारोह की सूचना नहीं थी। संवादहीनता का यह उदाहरण चिंतनीय है। पार्टी प्रवक्ताओं की जो नई टीम बनी है, उसे हमारी शुभकामनाएं। इसे संगठन ने ठीक वैसे ही सजाया है जैसे सेना में नए रंगरूट। बहुत उत्साही और न थकने वाले । मगर पुराने प्रवक्ताओं को निर्ममता के साथ साफ कर दिया गया। पार्टी का पक्ष रखने वाले अनुभवी प्रवक्ताओं के साथ ऐसा व्यवहार चौंकाने वाला है। यह संकेत है कि पार्टी अपनी लाईन बदल रही है। प्रदेशमंत्री के पद पर ऋषिराज सिंह को सांसद प्रहलाद पटैल की काट के लिए लाया गया है। उनका ताल्लुक लोधी बिरादरी से है और वे टीकमगढ़ क्षेत्र से है। इसी तरह दो महामंत्रियों अरविन्द भदौरिया और विनोद गोंटिया को नई टीम में उपाध्यक्ष बना दिया गया। उपाध्यक्षों का काम पार्टी के फैसलों को मंडल तक ले जाना होता है। इनमें से कुछ को छोड़ बहुतों को तो संगठन की बैठक तक करना आता है इसपर भी संशय है। ऐसे में नई फौज के लिए यह सब सतर्क करने वाला भी है। हम तो अंत में यही कहेंगे ‘जिन दीयों को हवाओं का खौफ नहीं, उन्हें हवाओं से बचाए रखिए।’

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Dakhal News 27 August 2016

मीडिया

  एम.पी.वर्किंग जर्नलिस्ट यूनियन की जबलपुर के विश्राम भवन में संपन्न हुई बैठक की अध्यक्षता प्रदेश अध्यक्ष राधावल्लभ शारदा ने की। बैठक में मंडला, कटनी, नरसिंहपुर एवं जबलपुर के प्रांतीय, संभागीय एवं जिला अध्यक्षों की उपस्थिति रही।  बैठक का संचालन प्रदेश संगठन सचिव गणेश बैरागी  ने किया। बैठक में विभिन्न विषयों पर चर्चा की। मुख्य मुद्दा आयुक्त जनसम्पर्क को लिखे पत्र जिसमें 70 के लगभग पत्रकारों पर दर्ज प्रकरणों की पुन: पुलिस विभाग द्वारा समीक्षा न कराने पर पदाधिकारियों ने रोष प्रकट किया तथा निर्णय लिया कि 2 अक्टूबर गांधी जयंती पर भोपाल में एक दिवसीय धरना दिया जाये।  प्रदेश अध्यक्ष राधावल्लभ शारदा ने बताया कि आयुक्त जनसम्पर्क अनुपम राजन ने अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक (शिकायत) भोपाल को 9 दिसंबर 2015 को पत्र लिखा। परन्तु लगता है कि पुलिस विभाग पत्रकार जगत से नाराज है अत: अभी तक परिणाम सामने नहीं आया। यूनियन द्वारा संबंधित प्रकरण की जानकारी सूचना के अधिकार के तहत मांगी गई है।  श्री शारदा ने कहा कि आयुक्त जनसम्पर्क के पत्र को भी पुलिस विभाग ने गंभीरता से नहीं लिया अत: 2 अक्टूबर को भोपाल में प्रदेश के पत्रकार एक दिवसीय धरना देंगे।  बैठक में सरकार से मांग की है कि पत्रकार सुरक्षा कानून शीघ्र बनाया जाये। पत्रकारों को दी जाने वाली श्रद्धा निधि की राशि बढ़ाकर 10 हजार तथा 70 वर्ष से अधिक उम्र के पत्रकारों को रुपये 15 हजार दी जाये। सरकार तहसील स्तर तक मीडिया सेंटर बनाये जिसका संचालन जिला जनसम्पर्क अधिकारी करें। निर्णय लिया गया कि यूनियन की जिला इकाईयां अपने जिला मुख्यालय पर जिला चिकित्सालय में भोपाल एवं बैतूल की तर्ज पर पत्रकार प्राइवेट वार्ड का निर्माण सांसद अथवा विधायक निधि एवं जनसहयोग से करायें।  संभागीय बैठक में प्रदेश अध्यक्ष राधावल्लभ शारदा, प्रदेश संगठन सचिव गणेश बैरागी ‘गन्नू भैया’, संभागीय अध्यक्ष  मीना विनोदिया, जबलपुर जिला इकाई अध्यक्ष पवन पटेल, कटनी इकाई अध्यक्ष अभिषेक मिश्रा, नरसिंहपुर जिला इकाई के अध्यक्ष उमेश पाली, जबलपुर सदस्यता प्रभारी अशोक उपाध्याय, संजय सिंह, लखनलाल भांडे (मंडला) सहित यूनियन के अनेक सदस्य उपस्थित थे।   

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Dakhal News 29 August 2016

    बस्तर के पत्रकार अपने सीनियर्स से पत्रकारिता के गुर सीख रहे हैं। इस ट्रेनिंग प्रोग्राम का आयोजन यूनिसेफ ने किया है।    यूनिसेफ के माध्यम से राजधानी रायपुर में बस्तर संभाग के पत्रकारों को दो दिवसीय रिफ्रेशन ट्रेनिंग कोर्स देश के वरिष्ठ पत्रकारों द्वारा दिया जा रहा है । इसके लिए   बस्तर संभाग के कॉडीनेटर हरजीत सिंह ने इस आयोजन में मुख्य भूमिका अदा की हैं।   

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Dakhal News 28 August 2016

समाज

निवेश के लिये अलग-अलग समूह से करेंगे चर्चा  मुख्यमंत्री  शिवराज सिंह चौहान मध्यप्रदेश में निवेश आकर्षित करने के लिए अमेरिका में उद्योगपतियों से मुलाकात की और अमेरिकन कंपनियों को मध्यप्रदेश आने का न्यौता दिया। पाँच दिवसीय यात्रा पर रविवार को शिवराज सिंह  न्यूयार्क पहुँचे।    मुख्यमंत्री श्री चौहान के न्यूयार्क पहुँचने पर ओवरसीज फ्रेंड्स ऑफ बीजेपी संस्था द्वारा आयोजित कार्यकर्ताओं के सम्मेलन में भव्य स्वागत किया गया। श्री चौहान 29 अगस्त को मध्यप्रदेश में निवेश करने में रूचि रखने वाले निवेशकों और उद्योगपतियों से अलग-अलग चर्चा करेंगे।    इनमें दि कौल समूह के  राजीव कौल, मास्टर कार्ड की उपाध्यक्ष  तारा नाथान, जल-प्रबंधन प्रौद्योगिकी की प्रमुख कंपनी एक्सलेम के प्रतिनिधि, एशिया स्पेसिफिक के गवर्नमेंट अफेयर्स के संचालक  क्लाउडियो लिलिएनफील्ड, इंडिया फर्स्ट ग्रुप के चीफ एक्जीक्यूटिव ऑफिसर  रान सोमर्स, कोका-कोला कंपनी के अंतर्राष्ट्रीय सार्वजनिक मामलों के उपाध्यक्ष  माइकल गोल्डजमेन, कस्टमर केयर और सेल्स साइरियस के उपाध्यक्ष  माइकल मूर, साइबर सिक्यूरिटी आर्किटेक्चर और आईटी रणनीति के संचालक  शैलेन्द्र गुप्ता, एसएनपी टेक्नालॉजी, व्यापार विकास के उपाध्यक्ष  सचिन पारिख और सोलर एनर्जी कंपनी के सीईओ  गोपाल खार शामिल हैं।     मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने आज वहां की दर्जन भर कंपनियों के सीईओ और कंपनी प्रमुखों से मुलाकात की। सीएम ने उन्हें मध्यप्रदेश में निवेश के माहौल और सरकार की सुविधाओं के बारे में विस्तार से जानकारी दी। इसके पहले उन्होंने ओवरसीज फ्रेंड्स आॅफ बीजेपी की बैठक में भी हिस्सा लिया।  इस दौरान सीएम के पीएस एसके मिश्रा, उद्योग विभाग के पीएस मोहम्मद सुलेमान समेत ट्रायफेक के एमडी डीपी आहूजा मौजूद रहे।  

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Dakhal News 29 August 2016

    खंडवा जेल से भागे आतंकियों का पूछताछ में खुलासा    खंडवा जेल से फरार सिमी आतंकी विदेशियों के अपहरण व हत्या की साजिश को अंजाम देने में जुटे थे। अमेरिकी सैलानियों को निशाना बनाने की नीयत से वे गोवा में रैकी तक कर चुके थे। ये खुलासा हुआ हैं  एसटीएस की पूछताछ में। सैलानियों को निशाना बनाने की वजह पाकिस्तानी न्यूरोसाइंटिस्ट आफिया सिद्दीकी को रिहा करवाना था, जो अमेरिका की जेल में बंद है।   40 साल की आफिया आतंकियों के बीच 'लेडी अल कायदा' के नाम से जानी जाती है। दरअसल आफिया को रिहा करवाने की सोच सिमी सरगना अबू फैजल की थी, लेकिन उसकी गिरफ्तारी के बाद यह प्लान ठप हो गया, लेकिन खंडवा जेल से फरार हुए सिमी के दूसरे आतंकियों शेख महबूब उर्फ गुड्डू उर्फ मलिक,अमजद उर्फ दाऊद, मोहम्मद असलम उर्फ बिलाल और जाकिर हुसैन उर्फ सादिक अपने आका के सपने को पूरा करने की तैयारियों में जुटे थे। इधर ओड़िसा एटीएस ने राउरकेला से पकड़ गए सिमी के चारो आतंकियों के खिलाफ चार्जशीट पेश कर दी।   फैजल आफिया की गिरफ्तारी से नाराज था। वह मानता है कि आफिया को फंसाया गया है। अबू के उस वक्त किए प्लान के तहत सिमी आतंकी खंडवा जेल से फरार होने के बाद जब महाराष्ट्र के पुणे पहुंचे, उसी दौरान वे गोवा गए। यहां उन्होंने अमेरिकी सैलानियों के उन स्थानों को भी चिन्हित कर लिया था, जहां वे सबसे ज्यादा जाते हैं। साजिश थी कि करीब दो दर्जन से ज्यादा अमेरिकियों को बंधक बनाकर उनकी रिहाई के एवज में अमेरिका से आफिया को छोड़ने की शर्त रखी जाए। इस दौरान अमेरिकी नागरिकों की हत्या करने की साजिश थी।  

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Dakhal News 27 August 2016

पेज 3

    प्रियंका चोपड़ा को असम राज्य के 'ऑसम असम' अभियान का चेहरा बनाया गया है, जिसके लिए वो प्रतिदिन डेढ़ करोड़ रुपए ले रही हैं। 10 दिन के प्रमोशन के लिए प्रियंका को 15 करोड़ रुपए देने की बात सामने आ रही है। मीडिया में खबर आने के बाद प्रियंका को मिलने वाली इस रकम पर विवाद खड़ा हो गया जिसके बाद राज्य सरकार ने एक लेटर इशू कर सफाई दी है।   राज्य सरकार के इस लेटर में लिखा है,'मीडिया में चल रही ये खबरें निराधार हैं, जिसमें ये कहा जा रहा है कि असम सरकार प्रियंका को प्रमोशन के लिए 15 करोड़ रुपए दे रही है। ये गलत और मनगढ़ंत कहानी बनाई जा रही है। 'बता दें असम के हालात इस समय कुछ ठीक नहीं हैं। राज्य के कुछ हिस्से बाढ़ की चपेट में हैं। आर्थिक रूप से भी राज्य काफी परेशानियों का सामना कर रहा है। ऐसे में प्रियंका को मिलने वाली रकम पर विवाद खड़ा होना लाजमी है।

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Dakhal News 29 August 2016

 बॉलीवुड एक्टर इरफान खान के फेवरेट एक्टरों में अमिताभ बच्चन शामिल नहीं हैं, बल्कि ट्रेजडी किंग कहे जाने वाले सुपरस्टार दिलीप कुमार व अभिनेता मोतीलाल हैं। इरफान का कहना है कि सबकी पसंद अलग-अलग होती है।    इरफान रायपुर में चल रहे दक्षिण एशियाई उद्योगपतियों के सम्मेलन ईओ स्पार्क में उद्यमियों से अपने अनुभव शेयर कर रहे थे। बॉलीवुड एक्टर ने कहा कि लोगों को अपनी जिंदगी का मजा लेना चाहिए। बेकार ही लोग क्या सोचेंगे या कोई क्या कहेगा, इस पर बातें कर समय नहीं बर्बाद करना चाहिए। उन्होंने उद्योगपतियों के बीच याद किया कि किस तरह फिल्मी दुनिया में शुरुआती दिनों में संघर्ष किया और मेहनत के बल पर ही आज वे इस मुकाम पर पहुंचे हैं। इरफान खान ने कहा कि दोस्ती सबसे बड़ी पूंजी होती है, इसलिए सबको दोस्त बनाना चाहिए। बिना दोस्ती के जीवन की कल्पना नहीं की जा सकती। अपने पारिवारिक जीवन के बारे में सवाल का उत्तर देते हुए इरफान खान ने कहा कि जब भी उन्हें समय मिलता है तो वे अपने बच्चों के साथ घूमने जाते हैं। उन्होंने अपने संघर्ष के दिनों के बारे में बताया कि अपनी जिद व पूरी शिद्दत के साथ की गई मेहनत से ही वे इस मुकाम पर पहुंचे है। शनिवार को ईओ स्पार्क सम्मेलन का आखिरी दिन था।   एक सवाल का उत्तर देते हुए इरफान खान ने कहा कि पैसे का महत्व समझें। उसे व्यर्थ मत बर्बाद करें। आजकल अच्छे मौसम होने पर भी बच्चे घर में एसी रूम में बैठकर गेम खेलना व चैटिंग करते हैं। यह सही नहीं है, बल्कि उन्हें घर से बाहर निकलना चाहिए। आजकल की नई जेनरेशन तो घर में बैठकर कम्प्यूटर में गेम खेलना ही पसंद करती है, जो सही नहीं है। बॉलीवुड एक्टर ने कहा कि बच्चों पर अपनी चीजें मत थोपिए। वे क्या बनना चाहते हैं, क्या करना चाहते हैं, करने दीजिए।   इरफ़ान बोले सलमान मेरे भी फेवरेट हैं।  एक सवाल के जवाब में इरफान खान ने कहा कि वैसे तो सभी एक्टर उनके पसंदीदा हैं, लेकिन सलमान खान वाकई सबसे अलग हैं। वे मेरे भी फेवरेट हैं। जिस एक्टर का जूता ही 25 हजारी,उसका अंदाज तो निराला ही होगा-इरफान ने फिल्म मुगले आजम के बारे में पूछे गए प्रश्न का उत्तर देते हुए कहा कि जो एक्टर उस जमाने में 25 हजार का जूता पहन रहा है। उसके चलने का अंदाज तो निराला ही होगा। इसलिए मुगले आजम एक बेहतरीन फिल्म है।  

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Dakhal News 28 August 2016

दखल क्यों

    * पेशे से पत्रकार ,लेखक- कवि अनुराग उपाध्याय समाज के हर विषय पर अपनी कलम चलाते हैं।  साफ़ साफ़ और बिना लाग लपेट के सच बयान कर देना उनके लेखन की सबसे बड़ी खूबी है। कालाहांडी की घटना ने देश के संवेदनशील लोगों को झकझोर दिया है। ऐसे में पत्रकार वो भी कवि कैसे खामोश रह सकता है।    संपादक  ---------         तुम अखंड निर्लज और मुर्दा  हो  ... ------------------------------------------   अनुराग उपाध्याय कलाहान्डी ने उजागर कर दिआ  तुम्हारा काला चेहरा...   साबित कर दिया कि निर्लज्जों की टोली के माहनायकों,   यह देश तुम्हारे नहीं भगवान भरोसे है...   दाना मांझी ने अपनी पत्नी नहीं तुम्हारे सिस्टम की लाश ढोई ...   उसने चादर में पत्नी नहीं ,   देश की अंतरात्मा और ;   मरी सड़ी सरकार को लपेट कर ढोया...   तुम्हारे उज्जल चेहरे ,धवल वस्त्र    अब सड़े गटर जैसे बजबजाते नजर आ रहे हैं...   सत्तर साल की बूढ़ी आजादी कोस रही है...   पूछ रही है सवाल देश के हुक्मरानो से...   इसीलिए आजादी मिली थी,   तुम शहजादों और अमीरजादों की चप्पलें चाटते रहो...   बंद करो देश बदल रहा है जैसे नारे ...   अगर यह बदलाव है तो कुलीनों यह तुम्हें मुबारक ...   दाना मांझी और उसकी पत्नी अमंग दोई को सलाम,   यह साबित करने के लिए की   तुम अखंड निर्लज  और मुर्दा  हो  ...    

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Dakhal News 28 August 2016

    मध्यप्रदेश के टीकमगढ़ जिले के एक 23 साल के लड़के ने सेना में सिलेक्शन न हो पाने की जो वजह बताई है वह हैरान करने वाली है। सेना में भर्ती का अरमान संजोए 23 वर्षीय सौरभ का आरोप है कि उसके सीने पर पीएम नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान का टैटू बना हुआ था, जिसकी वजह से उसे सेना में नहीं लिया गया।    दसवीं तक पढ़ा सौरभ पांच बार आर्मी में सिलेक्शन के लिए प्रयास कर चुका है। सौरभ ने कहा कि 2014 में मैं पुणे में गया, जहां मुझे पहली बार निकाला गया। मैं अनूपपुर और गुना सेना शिविरों में गया लेकिन वहां भी यही सब हुआ। हालांकि सौरभ के आरोपों पर आर्मी का कोई पक्ष सामने नहीं आया है।     सौरभ के मुताबिक मैं भर्ती के किसी भी मानक पर पीछे नहीं रहा लेकिन मुझे इसलिए निकाल दिया गया क्योंकि मेरे सीने पर एक टैटू बना हुआ था जिसमें लिखा था ‘जब तक सूरज चांद रहेगा, शिवराज मामा और मोदी का नाम रहेगा।’ उसके मुताबिक उसके शरीर पर बना यह टेटू भर्ती परीक्षा में भारी पड़ गया।   सौरभ ने इस मसले पर प्रधानमंत्री ,मुख्यमंत्री और सेना मुख्यालय को पत्र लिखा है। 

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Dakhal News 26 August 2016
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