विशेष

  रामजन्मभूमि विवाद पर सुनवाई पूरी सुप्रीम कोर्ट ने फैसला सुरक्षित रखा   सुप्रीम कोर्ट में ऐतिहासिक रामजन्मभूमि-बाबरी मस्जिद विवाद की सुनवाई पूरी हो गई है  | बुधवार को इस सुनवाई का 40वां दिन और अंतिम दिन था हिंदू पक्ष की ओर से निर्मोही अखाड़ा, हिंदू महासभा, रामजन्मभूमि न्यास की ओर से दलीलें रखी गईं तो वहीं मुस्लिम पक्ष की तरफ से राजीव धवन ने अपनी दलीलें रखीं | सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में अपना फैसला सुरक्षित रख लिया है  |   सुप्रीम कोर्ट में अयोध्या विवाद की सुनवाई खत्म हो गई है.... सबसे आखिर में मुस्लिम पक्ष की ओर से दलीलें रखी गईं  अब सुप्रीम कोर्ट ने लिखित हलफनामा, मोल्डिंग ऑफ रिलीफ को लिखित में जमा करने के लिए तीन दिन का समय दिया है.... जस्टिस चंद्रचूड़ ने कहा कि नक्शे से लगता है कि रामचबूतरा अंदर था...  इसपर राजीव धवन ने कहा कि दोनों ओर कब्रिस्तान है  | राजीव धवन ने कहा कि चबूतरा भी मस्जिद का हिस्सा है, सिर्फ इमारत ही नहीं बल्कि पूरी जगह ही मस्जिद का हिस्सा है  | उन्होंने कहा कि वो मस्जिद थी, हमारी थी और हमें पुनर्निर्माण का अधिकार है, इमारत भले ही ढहा दी गई लेकिन मालिकाना हक हमारा ही है  | चीफ जस्टिस रंजन गोगोई ने मुस्लिम पक्ष को ASI का नक्शा समझाने के लिए कहा इस बीच बहस के दौरान नक्शा फाड़ने की बात वायरल हो गई...मुस्लिम पक्ष के वकील राजीव धवन ने कहा कि ये वायरल हो गया है कि मैंने कोर्ट में नक्शा फाड़ा, लेकिन मैंने ये कोर्ट के आदेश पर किया  | मैंने कहा था कि मैं इसे फेंकना चाहता हूं तब चीफ जस्टिस ने कहा कि तुम इसे फाड़ सकते हो  | इसपर चीफ जस्टिस ने कहा कि हमने कहा था कि अगर आप फाड़ना चाहें तो फाड़ दें  |पीएन मिश्रा ने सुनवाई में ट्रैफन थेलर और निकोलो मनुची जैसे 16वीं सदी में आए विदेशी यात्रियों के वृतांत का ज़िक्र किया. जिसमें मन्दिर का तो ज़िक्र है पर मस्जिद का नहीं है, ब्रिटिश गजेटियर में भी राममन्दिर का ही ज़िक्र है | इस दौरान जस्टिस बोबड़े ने क्रोनोलॉजी बताने को कहा, तो जस्टिस चंद्रचूड़ ने लिमिटेशन का सवाल उठाया  |पीएन मिश्रा ने कहा कि 1934 में हमारे पूजा के अधिकार पर पहला हमला हुआ इसके बाद इस केस की सुनवाई पूरी हुई  सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में अपना फैसला सुरक्षित रख लिया है  |

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Dakhal News 16 October 2019

  मध्य प्रदेश में अब तक की सबसे बड़ी कार्रवाई लोकायुक्त ने किया काली कमाई का खुलासा     इंदौर में पदस्थ सहायक आबकारी आयुक्त आलोक खरे के यहाँ  लोकायुक्त पुलिस ने छापामारी की तो उसकी बेहिसाब संपत्ति देखकर जांच करने वालों के भी होश उड़ गए  |  इस अधिकारी ने करप्शन का ऐसा खेल खेला कि इसका परिवार सौ करोड़ से ज्यादा की मिलकियत का मालिक बन गया  | लोकायुक्त पुलिस की माने तो यह मध्यप्रदेश का सबसे बड़ा खुलासा है | जाँच पूरी होने पर इसकी खुल संपत्ति डेढ़ सौ करोड़ के आसपास बैठेगी |    ज्यों ज्यों छापे की कार्यवाही आगे बढ़ रही थी  | आलोक खरे की असलियत भी सामने आ रही थी भोपाल, रायसेन, इंदौर, ग्वालियर और छतरपुर स्थित कई ठिकानों पर लोकायुक्त पुलिस की टीमों ने छापा मारा  | प्रारम्भिक तौर पर  पड़ताल में खरे के पास करोड़ों की चल-अचल संपत्ति का खुलासा हुआ है  ... लेकिन शाम होते होते करोड़ का आंकड़ा सौ करोड़ के पार चला गया  | लोकायुक्त की जांच टीमों को फार्म हाउस, आलीशान बंगले, कई प्लॉट, कृषि भूमि, ऑफिस, लग्जरी कार, 79 लाख रुपए कीमत का सोना, 6 लाख रुपए कीमत की चांदी एवं 15 लाख रुपए नकद सहित करोड़ों रुपए मूल्य की चल-अचल संपत्ति के दस्तावेज मिले हैं  |  लोकायुक्त पुलिस की इस सबसे बड़ी रेड में खरे के पास भोपाल-रायसेन में 110 एकड़ जमीन है | इसमें से 70 एकड़ रायसेन में है  | रायसेन शहर से सटे ग्राम मासेर और डाबरा-इमलिया में लग्जरी फार्म हाउस बना रखे हैं, जिनकी ड्रोन और सीसीटीवी कैमरों से निगरानी होती है  |   मासेर में फार्म हाउस के गेट पर छह लेयर वायरिंग डालकर करंट छोड़ा गया था, इसलिए लोकायुक्त टीम को गेट खुलवाने में मशक्कत करनी पड़ी  इनके अलावा 16 बैंक अकाउंट आलोक खरे व 22 उनकी पत्नी  मीनाक्षी खरे के नाम पर एसबीआई, आईसीआईसीआई व बैंक ऑफ इंडिया के मिले  सभी अकाउंट व लॉकर को सीज कर लिया गया है  | धार जिले में आबकारी अधिकारी और एक आरटीआई कार्यकर्ता की कथित बातचीत जिसमें मंत्री व विधायकों को शराब ठेकेदार पैसा दिए जाने को लेकर मचे बवाल की जांच यह करप्ट शिकारी आलोक खरे ही कर रहा था | भ्रष्टाचार के मामले की जांच करने वाले अफसर का खुद भ्रष्टाचार के मामले में फंसने को लेकर दिनभर चर्चा चलती रही  | लोकायुक्त पुलिस का कहना है  इस अधिकारी के पूरे कार्यकाल की तन्खा भी जोड़ ली जाए तो वो एक करोड़ रुपये के आसपास होती है | इस शक्श के बारे में लोकयुक्त को लंबे समय से शिकायत मिल रही थी अपनी जांच में लोकायुक्त पुलिस ने पाया की यह अपनी काली कमाई को अपनी पत्नी की कृषि आय के रूप में दिखाता था |   

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Dakhal News 16 October 2019

राजनीति

  भूपेश सरकार ने की  केवल वादा खिलाफी   छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री रमन सिंह ने  चित्रकोट उपचुनाव में  प्रचार के दौरान  कांग्रेस की भूपेश बघेल सरकार पर निशाना साथ और कहा कांग्रेस सरकार केवल वादा खिलाफी कर सकती है और कुछ नहीं  | चित्रकोट विधानसभा में मुख्यमंत्री भूपेश बघेल की सभा के बाद पूर्व मुख्यमंत्री रमन सिंह ने भी मोर्चा संभाला |रमन सिंह ने लोहंडीगुड़ा से लेकर करंजी तक रोड शो किया और पांच  सभाएं की  रमन सिंह ने  15 वर्षों तक किये गए भाजपा के विकास कार्यों का उल्लेख  किया और   कांग्रेस की 11 महीने की सरकार  पर जमकर बरसे  | रमन सिंह ने बताया कि 15 साल में उनकी सरकार  ने बस्तर में कई विकास कार्य कर बस्तर का समुचित विकास किया | इस दौरान रमन सिंह ने कांग्रेस सरकार पर जमकर निशाना साधते हुए कहा कि भूपेश बघेल की सरकार ने केवल वादाखिलाफी की है  | कांग्रेस ने हाथ में गीता और गंगाजल उठाकर महिलाओं से वादा किया था की शराबबंदी की जाएगी , पर आज तक इस पर कोई पहल नहीं की गई  | कांग्रेस में विचारधारा में भी मतभेद है जिससे आधे कोंग्रेसी 370 के पक्ष में हैं तो आधे विरोध में | 

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Dakhal News 19 October 2019

  सात करोड़ में से सात सौ पौधे नहीं बचे   कम्प्यूटर बाबा ने पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह के नर्मदा किनारे किये गए पौधरोपण अभियान पर सवाल उठाये और कहा उनके साथ करोड़ में से सात सौ पौधे भी नहीं बच पाए  | कंप्यूटर बाबा ने कहा नर्मदा किनारे शराब नहीं बिकने दी जाएगी |   नदी न्यास के प्रमुख  कम्प्यूटर बाबा ने  हरदा जिले के भ्रमण  किया  कंप्यूटर  बाबा द्वारा  टिमरनी में नर्मदा युवा सेना के कार्यकर्ताओं से भेंट कर अवैध रेत उत्खनन पर चर्चा की यहाँ कंप्यूटर बाबा ने कहा कि शिवराज सिंह ने सात करोड़ पौधे लगवाए लगाए थे उनमे से सात सौ भी नहीं बचे | इस मामले में जांच कर दोषियों पर कार्यवाही होना चाहिए उन्होंने नर्मदा किनारे शराब बेचे जाने को लेकर अधिकारीयों से चर्च की और तुरंत इस पर रोक लगाने को कहा | कम्प्यूटर बाबा ने प्रशासनिक अधिकारियों के साथ बैठक कर वृक्षारोपण, स्वच्छता एवं नर्मदा नदी में हो रहे प्रदूषण व रेत का अवैध उत्खनन पर रोक लगाने हेतु चर्चा की और  सर्किट हाउस में वृक्षारोपण भी किया |      

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Dakhal News 18 October 2019

मीडिया

इंडिया टुडे ग्रुप की वाइस चेयरपर्सन कली पुरी को ‘इंडियाज मोस्ट पावरफुल वुमन इन मीडिया’ अवॉर्ड से सम्मानित किया गया|  कली पुरी को ये सम्मान ब्रिटिश संसद में आयोजित लोकप्रिय कॉनफ्लुएंस एक्सीलेंस अवॉर्ड्स समारोह में दिया गया|  दो हफ्ते पहले ही कली पुरी को लंदन में 21st सेंचुरी आइकन अवॉर्ड्स में ‘आउटस्टैंडिंग मीडिया एंड एंटरटेनमेंट अवॉर्ड’ से सम्मानित किया गया था|इस अंतरराष्ट्रीय सम्मान को स्वीकार करते हुए कली पुरी ने कहा, 'इंडिया टुडे ग्रुप में हम इंडस्ट्री के रुझानों का नेतृत्व कर रहे हैं|  हमने मोबाइल के इर्द-गिर्द एक पूरा इकोसिस्टम तैयार किया है| हमने डिजिटल और मोबाइल के आधार पर सिर्फ दो साल के वक्त में 20 से ज्यादा चैनलों का नेटवर्क विकसित किया है और हमें लगता है कि हमने नई पीढ़ी के विचारों को पकड़ने में सक्षम होने का सराहनीय काम किया है| हम नई ऊर्जा, नए विचार और काम करने के नए तरीके में भरोसा रखते हैं|ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी से राजनीति, दर्शनशास्त्र और अर्थशास्त्र में स्नातक कली पुरी का खबरों के भविष्य को लेकर नजरिया साफ है|  वे भविष्य की ओर उन्मुख एक ऐसे न्यूज रूम में, सबसे सम्मानित और प्रख्यात पत्रकारों की टीम का नेतृत्व कर रही हैं, जो आज की मल्टीमीडिया और मल्टी डिवाइस वाली दुनिया को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है| कली पुरी एक सतत उद्यमी हैं जिन्हें मीडिया के एक विस्तृत नेटवर्क को चलाने का समृद्ध अनुभव है| आज तक, आज तक एचडी, इंडिया टुडे टीवी, दिल्ली आज तक, तेज, एप्स, डिजिटल न्यूजपेपर, विश्वस्तरीय कार्यक्रमों का आयोजन, ग्रुप के लिए सोशल मीडिया रणनीति तैयार करने आदि का उन्हें गहन अनुभव है|    

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Dakhal News 29 September 2019

  प्रकाश भटनागर हनी के ट्रैप में पत्रकारिता भी कांदा (प्याज) और फंदा (यहां हनी ट्रैप के संदर्भ में) कोई तालमेल नहीं है लेकिन एक विचित्र संयोग है। प्याज लगातार महंगी हो रही है। परत दर परत खुलने वाली इस खाद्य सामग्री की कीमत आसमान छूने लगी है। इधर हनी ट्रैप वाला फंदा भी लगातार भारी-भरकम कीमत वाले खेल के तौर पर सामने आ रहा है। परत-दर-परत नये-नये नाम (अघोषित रूप से) सामने आ रहे हैं। अभी किसी छिलके पर किसी राजनेता की तस्वीर दिख रही है तो कहीं कोई अफसर भी नजर आ जा रहा है। लेकिन एक छिलके में कोशिकाओं की तरह छिपी उन असंख्य तस्वीरों का सामने आना अभी बाकी है, जो इस सारे घटनाक्रम की जड़ हैं। जिनका सहारा लेकर इस घिनौने काम को बीते लम्बे समय से अंजाम दिया जा रहा था। किस्सा हनी-मनी कांड में मीडिया खासकर टीवी मीडिया की भूमिका का है।   बात शुरू से शुरू करते हैं। कहानी को कुछ ऐसे समझें। इस काम को सहारा देने का समय तब आया, जब कई मीडिया हाउस भयावह मंदी की चपेट में आ गए हैं। कुछ एक रीजनल टीवी चैनल तो अपने मालिकों के पापों को पिछले लंबे समय से भोग रहे हैं। यहां तक कि मनु वादी कहे जाने वाले मीडिया समूह के कर्मचारियों तक को तो इसलिए ही लंबे समय से वेतन के लाले हैं। घोर संकट का समय। दूसरी जगह नौकरी मिलने की संभावनाएं भी कम थी। तब प्रिंट मीडिया की पीत पत्रकारिता को मात देने वाले ये हनी-मनी टाईप के ट्रेप की कोमल सी कठोर आकांक्षाए रची गई जिसके तार दिल्ली तक जुड़ गए। योजनाबद्ध तरीके से ब्लैकमेलिंग के ताने बाने रचे गए। मीडिया से जुड़ी आधी आबादी के अति महत्वाकांक्षी कुछ हिस्से का इसमें चतुराई से उपयोग किया गया। अलग-अलग समूहों में कुछ लोगों की फौज मछली के चारे के तौर पर तैयार की गयी। इनमें उन तितलियों को सहारा लिया गया जो कम समय में बड़ा नाम ना सही दौलत बनाने सरकारी लाभ कमाने की ख्वाहिशमंद थी, जो केवल ग्लैमर के लालकालीन पर अपने पैर बढाती मीडिया इंडस्ट्री में आई थीं।  रात के अंधेरे में जो करना है, उसकी भूमिका सुबह की रोशनी में बनायी जाती। टारगेट पहले से ही तय रहते। महिला पत्रकार उनके पास बाइट लेने के नाम पर पहुंचतीं। यह औपचारिकता पूरी करने के बाद क्वालिटी समय बिताने की बात छेड़ी जाती। शाम ढले किसी खास जगह पर, किसी छिपे हुए कैमरे के सामने मामला शराब से शबाब के सेवन तक पहुंचता। इसके बाद ब्लैकमेलिंग का खेल शुरू किया जाता। भोपाल/इंदौर तक नये शिकार की तलाश में जुट जाते। पुराने शिकार से डील करने का काम दिल्ली के स्तर पर होता। इसके बाद होने वाली हिस्सा-बांट की व्यापकता इस बात से समझी जा सकती है कि कई मीडिया हाउस में असंख्य कर्मचारी लम्बे समय से तन्ख्वाह न मिलने के बावजूद एक दिन के लिए भी आर्थिक तंगी के शिकार नहीं हो पाये। बल्कि उनके संसाधन ऐसे तमाम पत्रकारों से कई गुना ज्यादा बेहतर हैं, जो नियमित रूप से वेतन पाने के बावजूद आर्थिक संतुष्टि की परिधि से कोसो दूर हैं।   मामला बेहद संजीदा होता जा रहा है। लिहाजा कुछ पल के लिए माहौल हलका कर देते हैं। 'अनुरोध' फिल्म का एक गीत है, 'तुम बे-सहारा हो तो, किसी का सहारा बनो...' तो यहां भी ऐसा ही हुआ। बे-सहारा और सहारा का ऐसा घालमेल बना, जिसने कि पीत पत्रकारिता को भी कई सदियों पीछे धकेल दिया। यह प्रीत पत्रकारिता बन गयी। प्रीत, पैसे के लिए। संसाधनों के लिए। प्रीत के जरिये लोगों को फंसाया गया और फिर 'भय बिन होय न प्रीत...' की तर्ज पर भयग्रस्त लोगों से इस प्रीत की तगड़ी कीमत वसूली गयी। इस कांड के नाम पर आपको अखबार तथा सोशल मीडिया पर जिन महिलाओं की तस्वीरें दिख रही हैं, वो तो महज मुखौटा हैं। कठपुतली हैं। जिनकी डोर कई अन्य लोगों के हाथ में थी। जबकि मुख्य डोर दिल्ली से खींची जाती रही।   तीन दशक से अधिक की पत्रकारिता में मैंने पीत पत्रकारिता के कई अध्याय देखे हैं। तब ऐसा करने वालों पर क्रोध आता था। आज उन पर दया आ रही है। क्योंकि वे सार्वजनिक रूप से ऐसा करने के लिए बदनाम थे। पढ़ने-लिखने वाले मीडिया के बीच वे शर्मिंदगी के भाव से घिरे नजर आते थे। लेकिन हनी ट्रैपनुमा पत्रकारिता वाले तो इस पेशे के रसूखदार लोगों में गिने जाते रहे हैं। पद, प्रतिष्ठा और सम्मान की उन्हें कभी भी कमी नहीं आयी। यहां तक कि इस घटनाक्रम का खुलासा होने के चार दिन बाद भी पुलिस तथा कानून के हाथ उन तक नहीं पहुंच सके हैं। यह हमारे सिस्टम की कमजोरी तो नहीं, मजबूरी जरूर हो सकती है।क्योंकि इतना बड़ा माफिया भारी-भरकम बैकिंग के बगैर कतई संचालित नहीं किया जा सकता। तो अब इंतजार इस बात का है कि इस सबको पीछे से मिल रहा सहारा कब हटे और कब असली गुनाहगारों का चेहरा सामने लाया जाएगा। फंदे में बड़े भारी भरकम लोग हैं, इसलिए संभावना कम है।   मामले की गंभीरता एक खयाल से और बढ़ जाती है। जो शिकार बने, वे सभी सरकारी तंत्र के असरकारी नाम बताये जा रहे हैं। जाहिर-सी बात है कि ब्लैकमेलर्स ने इन लोगों से उनके पद का दुरूपयोग भी करवाया होगा। कहा जा रहा है कि कई वरिष्ठ अफसरों सहित सत्तारूढ़ दल और प्रमुख विपक्षी पार्टी भाजपा के  जन प्रतिनिधि भी बड़ी संख्या में इस सबके मजे से शिकार हुए हैं। तो क्या यह नहीं पता लगाया जाना चाहिए कि इन सभी ने मायाजाल से बाहर निकलने के लिए किस-किस तरह के गलत कामों को अंजाम दिया होगा। यह जांच हुई तो निश्चित ही यह भी पता चल जाएगा कि ऐसे गुनाहगारों को सहारा प्रदान करने वालों ने गलत तरीके से सरकारी काम करवाने का ठेका भी ले रखा था। देर-सबेर यह सच सामने आकर रहेगा। नाम चाहे सार्वजनिक न हो पाएं। डर है कि पहले ही किसी पतित-पावन को तरस रही पत्रकारिता के दामन पर इसके बाद और कितने दाग नजर आने लगेंगे। इस सबकी इबारत उसी दिन लिख दी गयी थी, जब पत्रकारिता को ग्लैमर से जोड़ने का महा-गुनाह किया गया। ऐसा पाप करने वालों की फौज अब गुजरे कल की बात हो चुकी है, लेकिन उनके द्वारा रोपा गया विषवृक्ष का बीज आज इस पूरी बिरादरी में भयावह प्रदूषित हवा का संचार कर रहा है। यह हवा दमघोंटू है। इससे बचने के लिए नई खिड़कियां खोलने की संभावनाएं कोई और नहीं मीडिया में ही लोगों को तलाशनी होगी। प्रिंट मीडिया तक तो विश्वसनीयता बाकी थी लेकिन इलेक्ट्रानिक, डिजीटल और सोशल मीडिया के दौर में पत्रकारिता की आत्मा 'विश्वसनीयता' घायल पड़ी हुई है। इसलिए खबरें बेअसर हो रही हैं।  ताजी हवा का यह प्रसार पत्रकारिता के मूल्यों की दोबारा स्थापना से ही संभव हो सकेगा। माना कि यह बहुत दुश्वारी वाला काम है, लेकिन इस पेशे में सिर उठाकर चलने का दौर वापस लाने के लिए इस कड़ी मेहनत के अलावा और कोई चारा बाकी नहीं रह गया है।  तो जो ये दमघोंटू माहौल है, इससे बाहर आने खिड़की खोलिए.....रोशनी आएगी तो चेहरे भी साफ साफ दिखाई देंगे.....और डिओडरेंट की खुशबूओँ में छिपाई गई दुर्गन्ध भी बाहर होगी.....

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Dakhal News 28 September 2019

समाज

  मंत्रियों ने अधिकारियों से जानकारी तक नहीं ली गड्डे भरवाए ,थोड़ी देर में सड़क फिर खराब हुई   मध्यप्रदेश में सड़कों के गड्ढों पर सियासत हो रही है | कमलनाथ सरकार के मंत्री भी मस्ती में हैं  | PWD मंत्री सज्जन वर्मा और जनसम्पर्क मंत्री पीसी शर्मा ने भी गड्ढों के साथ फोटो खिचवाये और कुछ गड्ढों को ठीक करवाया जो कुछ देर बाद ही उखाड़ना शुरू हो गए  |सज्जन वर्मा ने कहा कि शिवराज की अमेरिका जैसी सड़कें उनके भ्रस्टाचार के कारण गढ्ढो में बदल गई है  | वहीँ जन्समार्क मंत्री ने सड़कों को लेकर कहा कि ये   कैलाश विजयवर्गीय के गालों  जैसी हो गई हैं  |   मध्यप्रदेश में सड़कों की अनदेखी के कारण सड़कें गढ्ढों में तब्दील हो गई हैं  पिछले दस महीने में कमल नाथ सरकार ने सड़कों के रख रखाव पर ध्यान ही नहीं दिया  |ऐसे में रही सही कसर बारिश ने पूरी कर दी  | कमलनाथ के मंत्री काम करने की बजाये सड़कों की दुर्दशा के लिए पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह को कोसते नजर आये  ... मध्यप्रदेश की  बदहाल सड़कों पर अब  सियासत  हो रही है  | सबसे पहले भोपाल  में  मंत्री और अधिकारियों ने शहर का  जायजा लिया  गड्ढों में फोटो खिंचवाने में व्यस्त मंत्रियों ने गड्ढों में तब्दील हो चुकी सड़कों की सुध या सुधार कार्य की जानकारी तक अधिकारियों से नहीं ली  |  पीडब्ल्यूडी मंत्री सज्जन सिंह वर्मा व जनसंपर्क मंत्री पीसी शर्मा ने शहर में बदहाल सड़कों के निरीक्षण के दौरान जमकर  पूर्व की शिवराज सरकार पर निशाना साधा  | पीडब्ल्यूडी मंत्री सज्जन सिंह वर्मा और जनसम्पर्क मंत्री पीसी शर्मा  कहा कि पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान अमेरिका | तो भाजपा नेता हेमा मालिनी की तरह प्रदेश में सुंदर सड़कें होने का दावा करते थे, लेकिन सड़क निर्माण में धांधली के कारण प्रदेश की सड़कों की हालत कैलाश विजयवर्गीय के चेहरे की तरह हो गई है  |   मंत्री सज्जन सिंह वर्मा ने प्रदेश में खस्ता सड़कों का जिम्मेदार  पूर्व की  सरकार को बताया | उन्होंने कहा कि प्रदेश में खस्ता सड़कों की स्थिति का कारण इनके निर्माण में हुआ भ्रष्टाचार है  | भाजपा शासन में इन सड़कों का निर्माण कराया गया था | अब इनकी जांच कराई जाएगी | इस आधार पर इनकी शिकायत ईओडब्ल्यू में भी दर्ज कराई जाएगी  ..मंत्रियों के निरीक्षण की भनक लगते ही सड़क का सुधार कार्य  शुरू कर दिया | पीडब्ल्यूडी मंत्री सज्जन सिंह ने बताया कि सड़कों के सुधार के लिए केंद्र से आर्थिक सहायता राज्य सरकार ने मांगी थी, लेकिन केंद्र सरकार मदद नहीं मिली है |  

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Dakhal News 16 October 2019

  सड़क के किनारे खदान में की जा रही थी ब्लास्टिंग   क्रेशर की खदान में ब्लास्टिंग से पत्थर तोड़े जा रहे थे  तभी खदान से उछला पत्थर हाइवे से जा रही कार की छत से  टीन फाड़ते हुए  कार चला रहे  बैंक मैनेजर  के सिर में घुस गया  जिससे उसकी मौके पर ही मौत हो गई |   कहते है होनी को कोई नहीं टाल सकता | ऐसा ही एक वाक़्या बैतूल के  मुलताई थाना क्षेत्र के उभारिया गांव में हुआ  जहाँ खदान में क्रेशर से पत्थर तोड़े  जा रहे थे | तभी एक पत्थर उछलकर एक कार की छत से सीधे  कार चालक के सिर में जा घुसा जिससे मौके पर ही उनकी मौत हो गई  कार एक बैंक का मैनेजर चला रहा था  मैनेजर के साथ उनके साथी भी कार में बैठे हुए थे  हादसे के बाद किसी को भी विश्वास नहीं हुआ  की ऐसे भी मौत आ सकती है  बैंक मैनेजर के सिर में पत्थर लगाने के बाद  उनके बगल में बैठे मित्र ने जैसे तैसे कार संभाली और कार को खेत में नीचे उतार दिया  जिससे बड़ा हादसा होने से टल गया  बताया जा रहा है की  इंडस बैंक बैतूल में कार्यरत होशंगाबाद निवासी अशोक वर्मा मुलताई जा रहे थे  | बैतूल-नागपुर फोरलेन के नदीक उभारिया ग्राम में  अल्वी क्रेशर की खदान में ब्लास्टिंग से पत्थर तोड़े जा रहे थे  | इसी दौरान यह हादसा हुआ  पुलिस ने केस दर्ज कर स्टोन क्रैशर को सील कर दिया है |  

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Dakhal News 15 October 2019

पेज 3

  शाहरुख का बर्थडे  अभी तो पार्टी शुरू हुई है   \"बॉलीवुड के बादशाह   शाहरुख के जन्म दिन में भले ही एक महीने का समय बचा हुआ है  लेकिन फैन एक महीने का इंन्तजार नही कर पा रहे है  | शाहरुख के फैन्स के उत्साह का स्तर ऐसा है कि एक महीने पहले ही ट्विटर पर #1MonthForSRKDay सेलिब्रेशन शुरू कर दिया | \"बॉलीवुड के बादशाह\"  \"किंग ख़ान\" शाहरुख खान के जन्मदिन के लिए अभी एक महीने का समय बचा है…. लेकिन ऐसा लगता है कि उनके फैन्स 2 नवंबर तक इंतजार नहीं कर सकते  | शाहरुख के फैन्स  में उत्साह इतना है  कि उन्होंने ट्विटर पर #1MonthForSRKDay के साथ 30 दिन पहले ही सेलिब्रेशन शुरू कर दिया है  | हैशटैग अब माइक्रो-ब्लॉगिंग साइट पर वायरल हो गया है  | जिसमें फैंस अपने पसंदीदा अभिनेता की तस्वीरें और वीडियो शेयर कर रहे हैं | शाहरुख के बचपन की तस्वीरों को शेयर करने से लेकर उनके घर मन्नत के बाहर इंतजार कर रही भीड़ की क्लिप तक शेयर कर रहे हैं…. इसके साथ ही शाहरुख खान के फैंस ने उनके बर्थ डे के एक महीने पहले ही उन्हें ट्विटर पर ट्रेंडिंग लिस्ट में टॉप स्पॉट दिला दिया है  | 1MonthForSRKDay का अनाउंसमेंट ऐसे कर रहे थे जैसे कि उनकी कोई अगली फिल्म की घोषणा हो रही हो एक यूजर ने लिखा, 'स्टारडम क्या है अगर तुम वाकई जानना चाहते हैं तो 2 नवंबर को मन्नत आओ बता दें कि शाहरुख खान अपने जन्मदिन के दिन मन्नत के बाहर आकर अपने प्रशंसकों का अभिवादन करते हैं  | एक ट्विटर यूजर ने करण जौहर के चैट शो की क्लिप शेयर की जिसमें टाइगर श्रॉफ, अनन्या पांडे और तारा सुतारिया है | उन्होंने वीडियो का कैप्शन दिया 'फिल्मों के अलावा, कई चीजें हैं जो हमें उनका फैंस होने के लिए प्रेरित करती है | इस वीडियो में करण पूछते हैं, 'सलमान, आमिर या शाहरुख, आपका फेवरेट खान तो टाइगर ने कहा, 'मैं सभी को प्यार करता हूं लेकिन मुझे नहीं पता क्यों मैं शाहरुख खान सर की और ज्यादा देखता हूं  | उन्होंने ऑफ और ऑन स्क्रीन जो किया है, जो एम्पायर खड़ा किया है, कहां से कहां पहुंचे हैं |         

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Dakhal News 3 October 2019

  5 मैचों की सीरीज में 2-0 से बढ़त बनाई   भारतीय महिला क्रिकेट टीम ने दक्षिण अफ्रीकी टीम को सीरीज़ के चौथे टी-20 मैच में हराकर 2-0 से बढ़त बना ली है सीरीज़ के 2 मैच बारिश के कारण रद्द हो गए थे और चौथे मैच में बारिश के कारण मुकाबले को 17-17 ओवरों का कर दिया गया |    भारत और दक्षिण अफ्रीका के मध्य खेली जा रही महिला टी-20 सीरीज में सूरत में खेले गए चौथे टी-20 मुकाबले में भारत ने अफ्रीका को 51 रनों से हराकर सीरीजं पर 2-0 से कब्जा कर लिया है आपको बता दें की सीरीज़ का दूसरा और तीसरा मैच बारिश की भेंट चढ़ गए थे | चौथे मैच में भी बारिश के कारण मुकाबले को 17-17 ओवर का कर दिया गया था | अफ्रिका ने टॉस जीत कर पहले गेंदबाजी का निर्णय लिया था भारत ने पहले बल्लेबाजी करते हुए 4 विकेट के नुकसान पर 140 रन बनाए | जवाब में दक्षिण अफ्रीका की टीम निर्धारित ओवरों में 7 विकेट पर मात्र 89 रन पर ही सिमट गई |.... भारत की ओर से पूनम यादव को शानदार गेंदबाजी के लिए प्लेयर ऑफ द मैच चुना गया |

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Dakhal News 2 October 2019

दखल क्यों

  अमनदीप जोधपुर रेजीमेंट  में था पदस्थ   जोधपुर रेजीमेंट की 126 बटालियन में तैनात ग्वालियर के जवान अमनदीप किरार का ड्यूटी के दौरान निधन हो गया  ... उनका पार्थिव शरीर ग्वालियर लाया गया |  सैनिक सम्म्मान के साथ उनकी अंतेष्टि की गई   |   ग्वालियर  का अमनदीप किरार जोधपुर रेजीमेंट की 126 बटालियन में तैनात था  |  14 तारीख  की सुबह  सेना के इस 21 वर्षीय  नौजवान का आकस्मिक निधन  हो गया  | निधन के समय अमनदीप ऑन ड्यूटी थे | हॉकी खेलते समय उसके सीने में दर्द हुआ  इसके बाद उन्हें  जोधपुर एमएच हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया  | जहाँ उसके इलाज के दौरान उसकी मृत्यु हो गई  | अमनदीप कुछ दिनों पहले लेह में पोस्टेड था दो दिन पहले ही अमनदीप  रेजीमेंट में पोस्टिंग होकर आया  था  | भारतीय सेना के जवान  शहीद जवान अमनदीप किरार का पार्थिव शरीर ग्वालियर लेकर आये   जहाँ  खुरेरी  श्मशान में शहीद जवान के पार्थिव शरीर की अंत्येष्टि की गई  |      

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Dakhal News 17 October 2019

  घंटों अस्पताल के बेड पर पड़ा रहा शव शव को पर रेंगती रहीं चीटियां   स्वास्थ्य मंत्री तुलसी सिलावट जी मध्यप्रदेश के अस्पताल और उनका प्रबंधन बीमार पड़ा है इस जल्दी ठीक कीजिये |  अब  शिवपुरी  से मानवता को शर्मसार करने वाली खबर आई है अस्पताल के मेडिकल वार्ड में घंटों एक शव पड़ा रहा  | शव पर चींटियां लग गईं  लेकिन इसकी सुध किसी ने नहीं ली आपके अस्पताल और वहां काम करने वालों की संवेदनायें मर गई हैं |    शिवपुरी का जिला अस्पताल कभी काम के मामले में नंबर वन था |  लेकिन अब यहाँ संवेदनाएं मर चुकी हैं  भावनाओं का क़त्ल कर दिया गया है  इस दृश्य को देखिये इन आँखों को देखिये स्वास्थ्य मंत्री जी शायद आपकी आँखें खुला जाएँ | ये एक शव की आँखें हैं | यह शव अस्पताल के बेड पर घंटों पड़ा रहा लेकिन अस्पताल प्रबंधन को क्या  पलंग पर चढ़ते हुए चींटियों ने इस शव पर कब्ज़ा कर लिया | चींटियां शव की आँखों में पहुंच गई लेकिन आपके विभाग के संवेदनहीं स्टाफ को इससे क्या लेना देना | इस शख्स की मौत कब हुई किसी को कुछ पता नहीं | मेडिकल वार्ड के पलंग पर शव  की  आंख पर चीटियां रेंगती नजर आने लगीं |  तब लोगों ने स्टाफ को बताया लेकिन तब भी किसी ने इस पर ध्यान नहीं दिया | जिला अस्पताल इसे साधारण मौत बता रहा है, लेकिन इंसानियत के नाम पर यह घटना शर्मसार करने वाली है | मरीज ने जब दम तोड़ा, तब उसके साथ कोई परिजन मौजूद नहीं था फक्कड़ कॉलोनी में रहने वाले बालचंद्र लोधी  इलाज के लिए दो दिन पहले जिला अस्पताल के मेडीकल वार्ड में भर्ती हुए थे | उनकी कब मौत हुई किसी को पता नहीं  आसपास के मरीजों ने दिन में  अस्पताल के स्टाफ को  इस की जानकारी दी इस घटना की जानकारी मृतक की पत्नी  रामश्री को  मिलने के बाद  वह अस्पताल  पहुंची | मौके पर मौजूद मरीजों के मुताबिक ऐसे में रामश्री ने ही पल्लू से चीटियां आंख से हटाईं  बाद में अपने पति के शव को जैसे-तैसे मरीजों के सहयोग से  वो घर लेकर गई मंत्री तुलसी सिलावट जी अगर आप इस तरह वक्त  बदलना चाहते हैं  तो इस पर लानत है |     

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Dakhal News 16 October 2019
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