. हजारो लोग हैं, जिनके पास रोटी है | चांदनी रातें हैं,लड़कियां हैं | और 'अक्ल' है | हजारों लोग हैं,जिनकी जेब में | हर वक्त कलम रहती है | और हम हैं | कि कविता लिखते हैं... | पाश
 
 

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 दखल क्यों?


इसलिए की ''स्टेटस को'' जो अपना स्टेटस खो चुका है॰ यथास्थिति दरअसल जस का तस् बने रहना नहीं है पिछङ जाना है॰ चाय की प्याली में तूफ़ान उठाकर यथास्थिति नहीं तोडी जाती . हमारे बुद्धिजीवियों ने काफ़ी हाउस में बहुत से बुलबुले उडाये है

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आशापुरी- द क्रेडिल ऑफ परमार एंड प्रतिहार आर्ट टेम्पल अनविल्ड का विमोचन


मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने आज यहाँ पुस्तक ""आशापुरी- द क्रेडिल ऑफ परमार एंड प्रतिहार आर्ट é...
 
देवी अहिल्याबाई होलकर परोपकारी कार्यों की इच्छा-शक्ति का प्रतीक


लोकसभा स्पीकर महाजन ने इंदौर में किया जयंती समारोह का शुभारंभ

लोकसभा स्पीकर सुमित्रा महाजन ने कहा...
 
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हिंदुत्व पर शिवसेना भागवत के साथ


शिवसेना अध्यक्ष उद्धव ठाकरे के देश को हिंदू राष्ट्र कहने वाले राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के प्रमुख मो&...
 
 

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