छत्तीसगढ़ में ओबीसी समुदाय का सरकार के खिलाफ मोर्चा
छत्तीसगढ़ में ओबीसी समुदाय का सरकार के खिलाफ मोर्चा

 

 छत्तीसगढ़ में चुनावी साल में आदिवासियों के बाद अब ओबीसी (अन्य पिछड़ा वर्ग) ने भी सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। राज्य में ओबीसी आबादी करीब 52 फीसद है। आबादी के अनुपात में आरक्षण की मांग को लेकर ओबीसी लगातार आंदोलित होते रहे हैं। सोमवार को ओबीसी आंदोलन को हवा देने दिल्ली से स्वामी अग्निवेश यहां आ रहे हैं। सुभाष स्टेडियम के पास शासकीय बहुउद्देश्यीय उच्च्तर माध्यमिक विद्यालय के सभागार में ओबीसी अधिकार सम्मेलन का आयोजन किया जा रहा है।

इससे पहले भी ओबीसी आरक्षण में भागीदारी को लेकर आंदोलित होते रहे हैं। जदयू नेता शरद यादव पिछले साल ओबीसी सम्मेलन में रायपुर आ चुके हैं। अब स्वामी अग्निवेश को बुलाकर ओबीसी आंदोलन को आगे बढ़ाने की तैयारी की जा रही है। इस आयोजन में छत्तीसगढ़ पनिका समाज, साहू समाज, मनवा कुर्मी समाज, यादव समाज, सोनार समाज, गाड़ा समाज, मरार पटेल समाज, कलार समाज, निषाद समाज, मटियारा समाज समेत छत्तीसगढ़ के पिछड़े वर्ग के विभिन्न संगठनों के नेता भाग ले रहे हैं।

आयोजन में आदिवासी समाज और अनुसूचित जाति समाज के नेताओं को भी बुलाया गया है। पिछड़ा वर्ग संगठनों का कहना है कि छत्तीसगढ़ में ओबीसी की आबादी 52 फीसद, आदिवासी 323 फीसद और अनुसूचित जाति 13 फीसद हैं। इन तीनों वर्गों की सामाजिक, आर्थिक, राजनीतिक परिस्थितियां और समस्याएं एक समान हैं।

तीनों समाज को भारतीय संविधान में शिक्षा, नौकरी और राजनीति में विशेष अवसर उपलब्ध कराने का प्रावधान है। छत्तीसगढ़ में एससी, एसटी को उनके आबादी के अनुपात में आरक्षण मिल रहा है लेकिन ओबीसी को मंडल कमीशन की सिफारिश के अनुसार 27 प्रतिशत आरक्षण नहीं दिया जा रहा है।

हमारे लिए केवल 14 फीसद आरक्षण का प्रावधान है और वह भी व्यवहार में सिर्फ छह प्रतिशत ही मिल रहा है। एससी-एसटी समाज भी छत्तीसगढ़ के ओबीसी को आबादी के अनुपात में 52 फीसद आरक्षण देने की मांग करते रहे हैं। अब आबादी के अनुपात में आरक्षण के लिए सड़क की लड़ाई लड़ने की तैयारी की जा रही है। ओबीसी समुदाय का यह आंदोलन चुनावी साल में सरकार के लिए बड़ा सिरदर्द बन सकता है।

ओबीसी वर्ग की मांगें-

जनसंख्या के अनुपात में आरक्षण दिया जाए। ओबीसी वर्ग से क्रीमीलेयर की व्यवस्था खत्म की जाए।ओबीसी वर्ग के लिए एससी-एसटी की तरह लोकसभा और विधानसभाओं में जनसंख्या के अनुपात में सीटें आरक्षित की जाएं।आदिवासी भूमि संरक्षण अधिनियम की तरह उद्योग धंधों के लिए यदि पिछड़ा वर्ग की जमीन ली जाए तो भू स्वामी को शेयर होल्डर बनाया जाए।आउट सोर्सिंग और संविदा व्यवस्था पर रोक लगे। दूसरे प्रांतों से आने वाले लोगों को यहां कृषि भूमि खरीदने पर प्रतिबंध लगाया जाए। एससी-एसटी, ओबीसी वर्ग के अधिकारियों-कर्मचारियों को 50 साल की आयु के बाद अनिवार्य सेवानिवृत्त करने की नीति बंद की जाए।ओबीसी वर्ग के अधिकारियों-कर्मचारियों को प्रमोशन में आरक्षण दिया जाए। एससी-एसटी वर्ग की तरह ओबीसी छात्रों को भी छात्रावास और छात्रवृत्ति दी जाए।

 

Dakhal News 25 June 2018

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